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                <title>Kashmir News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Kashmir News RSS Feed</description>
                
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                <title>शोपियां एनकाउंटर में लश्कर कमांडर जाकिर अहमद ढेर, पांच दिन बाद मिली बड़ी सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी हिट लिस्ट में था शामिल, शोपियां के चनापोरा इलाके में सेना, पुलिस और CRPF का संयुक्त ऑपरेशन जारी, एक अन्य आतंकी की तलाश तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lashkar-commander-zakir-ahmed-killed-in-shopian-encounter-big-success/article-58166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/shopian-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान के बीच सुरक्षाबलों को अहम सफलता मिली है। पांच दिनों से लगातार चल रहे संयुक्त ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया। बुधवार को चनापोरा इलाके से उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, जाकिर उन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची में शामिल था, जिसे पहलगाम आतंकी हमले के बाद तैयार किया गया था। इस कार्रवाई को दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। हालांकि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि सुरक्षाबलों को आशंका है कि लश्कर का एक और आतंकी लतीफ भट अब भी इलाके में छिपा हो सकता है। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान लगातार जारी है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। शनिवार शाम खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि चनापोरा क्षेत्र में कुछ आतंकवादी छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। शुरुआती दौर में आतंकियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग की गई, जिसके बाद ऑपरेशन को और व्यापक बनाया गया। घने जंगलों, बागानों और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार तलाशी चलती रही। सुरक्षाबलों ने संभावित भागने के सभी रास्तों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए और रात के समय निगरानी के लिए विशेष उपकरणों तथा रोशनी की व्यवस्था भी की गई। कई दिनों की सघन तलाश के बाद बुधवार को जाकिर अहमद गनी का शव बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार शव की पहचान और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त अभियान में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की कई इकाइयों के अलावा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ की बटालियनें शामिल रहीं। आतंकवाद विरोधी अभियानों में विशेषज्ञ मानी जाने वाली सेना की विक्टर फोर्स ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षाबलों ने गांवों, बागानों और आसपास के इलाकों में लगातार तलाशी लेते हुए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह खुफिया इनपुट के आधार पर संचालित किया गया और नागरिकों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि कोई आतंकी बचकर निकल न सके। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जाकिर अहमद गनी कुलगाम जिले के मतलहामा गांव का रहने वाला था। वह पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसका संबंध पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क से भी रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पहले भी उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी थी और अक्टूबर 2025 में अदालत के माध्यम से नोटिस जारी किया गया था। हाल के महीनों में उसका नाम पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान भी सामने आया था। यही कारण था कि पहलगाम हमले के बाद जिन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची सुरक्षा एजेंसियों ने तैयार की थी, उनमें जाकिर का नाम प्रमुखता से शामिल था।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक जाकिर के मारे जाने से दक्षिण कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार वह वर्ष 2024 से संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था। वहीं लतीफ भट पिछले वर्ष संगठन में शामिल हुआ था और उसके भी इलाके में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण सुरक्षाबल पूरे क्षेत्र में अभियान जारी रखे हुए हैं। पुलिस और सेना का कहना है कि जब तक क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक तलाशी अभियान जारी रहेगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ लगातार बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान विभिन्न अभियानों में कई शीर्ष आतंकवादी मारे गए हैं और उनके ठिकानों को ध्वस्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आतंकवाद को समर्थन देने वाले तंत्र को भी चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि कई इलाकों में आतंकियों के मददगारों के खिलाफ भी अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जाकिर अहमद गनी के मारे जाने के बाद पहलगाम हमले के बाद तैयार की गई 14 आतंकियों की सूची में शामिल अब तक नौ आतंकवादी ढेर किए जा चुके हैं। बाकी बचे आतंकियों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी आतंकी संगठन को घाटी में दोबारा मजबूत होने का मौका नहीं दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:06:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पीओके में हिंसा से 27 लोगों की मौत, चुनाव से पहले बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[आरक्षित सीटों को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन पर प्रतिबंध के बाद भड़की हिंसा, पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों की जान गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pok-violence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष खुलकर सामने आया है। क्षेत्र के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 27 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े। शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जारी है, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ था, जो अब बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और सत्ता कुछ चुनिंदा समूहों तक सीमित रह जाती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो विभिन्न युद्धों और संघर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात हिंसा तक पहुंच गए।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव उस समय और बढ़ गया जब पीओके सरकार ने 5 जून को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इसका कारण बताया। प्रतिबंध लगने के बाद पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात तब ज्यादा बिगड़ गए जब संगठन के एक सदस्य की कथित पुलिस फायरिंग में मौत होने की खबर सामने आई। इस घटना के बाद समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल के शवगृह के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को रावलकोट में स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और JAAC समर्थकों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर हथियारों से हमला किया, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग कर हालात को और बिगाड़ दिया। इस दौरान गोलीबारी और पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, वहीं बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन के मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियां हिंसा फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं विपक्षी और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सरकार राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव दिखाई दे रहा है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आगामी विधानसभा चुनाव भी इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह हैं। पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले बढ़ता तनाव सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। यहां विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। बाकी सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे समय में आरक्षित सीटों का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में पीओके की राजनीति लगातार अस्थिर रही है। सरकारों में बदलाव, नेतृत्व संकट और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। 2021 के चुनावों के बाद बनी सरकार भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। कई प्रधानमंत्रियों को बीच कार्यकाल में पद छोड़ना पड़ा और राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। ऐसे माहौल में जनता के बीच असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 15:33:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी शब्बीर लोन गिरफ्तार, देशभर में मॉड्यूल तैयार करने की साजिश का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश से संचालित नेटवर्क के जरिए दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में युवाओं की भर्ती की योजना; 2007 में भी हो चुका है गिरफ्तार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lashkar-e-taiba-terrorist-shabbir-lone-arrested-in-delhi-conspiracy-to-prepare/article-49571"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/lashkar-e-taiba.jpg" alt=""></a><br /><p>राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा एजेंसियों ने सोमवार को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े संदिग्ध आतंकी शब्बीर अहमद लोन को दिल्ली बॉर्डर से गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह बांग्लादेश में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन कर रहा था और देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में था।</p>
<p>दिल्ली पुलिस के अनुसार, शब्बीर अहमद लोन दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में युवाओं की भर्ती कर एक संगठित मॉड्यूल तैयार कर रहा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारों पर काम कर रहा था।</p>
<p>यह गिरफ्तारी कई दिनों से चल रही निगरानी और छापेमारी के बाद हुई है। काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने 26 मार्च को कश्मीर के गांदरबल, शोपियां और श्रीनगर में लोन से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे नेटवर्क की परतें खुलती गईं।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि इस मॉड्यूल के तार बांग्लादेश और पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर्स से जुड़े हुए थे, जो डिजिटल और वित्तीय माध्यमों से निर्देश दे रहे थे। सुरक्षा एजेंसियां पिछले दो महीनों से लोन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं।</p>
<p>इस पूरे मामले का खुलासा फरवरी में दिल्ली मेट्रो और कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास लगे देश विरोधी पोस्टरों से हुआ। CISF के जवानों ने पोस्टर देखे और मेट्रो पुलिस को सूचित किया। इसके बाद जांच शुरू हुई और संदिग्धों की पहचान की गई।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने कोलकाता से उमर फारूक और रबि-उल-इस्लाम को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश में बैठे शब्बीर अहमद लोन के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कोलकाता और तमिलनाडु में छापेमारी कर एक बांग्लादेशी समेत कुल 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 12 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड बरामद किए गए।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, तमिलनाडु से गिरफ्तार छह आरोपियों पर विभिन्न शहरों की रेकी करने और आतंकी गतिविधियों में सहयोग का आरोप है। सभी को आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है।</p>
<p>शब्बीर अहमद लोन का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसे वर्ष 2007 में भी आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2019 में जमानत मिलने के बाद वह बांग्लादेश भाग गया था और वहीं से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था।</p>
<p>सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस गिरफ्तारी से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:49:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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