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                <title>Yogi Adityanath - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Yogi Adityanath RSS Feed</description>
                
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                <title>चित्रकूट पहुंचे सीएम योगी, कामदगिरि परिक्रमा कर बरहा हनुमान मंदिर में की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-yogi-reached-chitrakoot-circumambulated-kamadgiri-and-worshiped-at-barha/article-58273"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/yogi-adityanath-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह धार्मिक नगरी चित्रकूट पहुंचकर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए और कामदगिरि की पवित्र परिक्रमा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह धार्मिक कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा। सुबह से ही चित्रकूट में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा बल तैनात रहे और पूरे कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जाती रही। मुख्यमंत्री के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़क किनारे और मंदिर परिसर में पहले से मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 7:10 बजे चित्रकूट के प्रसिद्ध बरहा हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। मंदिर में पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, शांति और जनकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और वहां मौजूद संतों से भी मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">बरहा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने कामदगिरि की लगभग पांच किलोमीटर लंबी पवित्र परिक्रमा शुरू की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामदगिरि पर्वत को भगवान श्रीराम का स्वरूप माना जाता है और इसकी परिक्रमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान चित्रकूट में लंबा समय बिताया था। इसी कारण देशभर से लाखों श्रद्धालु वर्षभर यहां दर्शन और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने भी पारंपरिक तरीके से पैदल चलते हुए परिक्रमा पूरी की।</p>
<p style="text-align:justify;">परिक्रमा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ साधु-संत, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा कर्मी भी मौजूद रहे। रास्ते में उन्होंने कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। परिक्रमा मार्ग पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री को करीब से देखने का खास उत्साह दिखाई दिया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उन पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पूरे मार्ग में 'जय श्रीराम' और 'जय कामतानाथ' के जयघोष लगातार सुनाई देते रहे, जिससे धार्मिक माहौल और भी भक्तिमय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के इस दौरे की एक और तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। परिक्रमा के दौरान उन्होंने रास्ते में मौजूद बंदरों को चना भी खिलाया। चित्रकूट में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं और श्रद्धालु उन्हें प्रसाद या चना खिलाना शुभ मानते हैं। मुख्यमंत्री ने भी कुछ समय रुककर बंदरों को चना खिलाया। वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में कैद किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किए जाने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के चित्रकूट दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग के हर प्रमुख स्थान पर पुलिस बल तैनात रहा। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए गए थे। प्रशासन का कहना था कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं।चित्रकूट धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी अनेक मान्यताएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं। कामदगिरि परिक्रमा, रामघाट, बरहा हनुमान मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के आगमन का स्वागत किया और इसे चित्रकूट के लिए गौरव का विषय बताया। व्यापारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में चित्रकूट में तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई योजनाओं पर भी काम होगा। कामदगिरि परिक्रमा पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बांदा के लिए रवाना होने का कार्यक्रम निर्धारित था। वहां भी उनके कई सरकारी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। हालांकि चित्रकूट में उनका यह दौरा पूरी तरह धार्मिक गतिविधियों पर केंद्रित रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना एवं परिक्रमा संपन्न की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>नोएडा की हाईराइज सोसाइटी में AC ब्लास्ट से भीषण आग, दहशत</title>
                                    <description><![CDATA[सेक्टर-119 अरण्य सोसाइटी की 21वीं मंजिल पर आग, तीन फ्लैट चपेट में; फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां मौके पर, सीएम योगी ने दिए निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a4200d5102d8/article-57277"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/noida-fire-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">नोएडा में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया जब सेक्टर-119 स्थित अरण्य सोसाइटी की एक 24 मंजिला इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक 21वें फ्लोर पर लगे एक फ्लैट में AC ब्लास्ट हुआ, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते आसपास के कम से कम तीन फ्लैट इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद पूरी सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। यह घटना सुबह करीब साढ़े 8 बजे की बताई जा रही है। आग लगते ही ऊपरी मंजिलों से धुएं का घना गुबार उठने लगा और कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग के एक हिस्से में धुआं भर गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक आग की लपटें इतनी तेज थीं कि खिड़कियों से बाहर तक दिखाई देने लगीं। कई लोगों ने घबराकर सीढ़ियों के जरिए नीचे उतरने की कोशिश की, जबकि कुछ लोग बालकनी और अन्य सुरक्षित स्थानों पर फंस गए।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img alt="Z"></img></p>
<p>सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। दमकल विभाग की टीम लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऊंची इमारत होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल बिल्डिंग को खाली कराया जा रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है, हालांकि कुछ लोग धुएं की वजह से असहज महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि आग लगने के बाद आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग भी मदद के लिए सामने आए। कुछ लोगों ने पाइप और बाल्टियों के जरिए ऊपर की मंजिलों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की ताकि आग को फैलने से रोका जा सके। लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि शुरुआती प्रयास नाकाफी साबित हुए। घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाएं। साथ ही घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन को हर स्तर पर सतर्क रहने और किसी भी तरह की लापरवाही न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<p>दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नोएडा जैसी हाईराइज सोसाइटियों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और आर्टिकुलेटिंग वाटर टावर जैसी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। ये मशीनें 30 से 42 मीटर तक की ऊंचाई तक प्रभावी रूप से आग बुझाने में सक्षम हैं, जो लगभग 10 फ्लोर तक कवर करती हैं। हालांकि इससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए अभी भी संसाधनों की कमी महसूस की जाती है। नोएडा में 72 और 102 मीटर तक पहुंचने वाली नई हाइड्रोलिक मशीनों की खरीद प्रक्रिया चल रही है, लेकिन वे अभी सेवा में शामिल नहीं हुई हैं। शहर की सबसे ऊंची इमारतों में शामिल सुपरनोवा टावर जैसे प्रोजेक्ट्स में आग से निपटने की क्षमता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यहां मौजूदा हाइड्रोलिक सिस्टम सीमित ऊंचाई तक ही काम कर पाते हैं, जबकि पूरी इमारत इससे कहीं ज्यादा ऊंची है। इसी बीच यह भी सामने आया है कि पिछले कुछ हफ्तों में नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों में आग लगने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 5 जून को सेक्टर-74 की एक सोसाइटी में भी कई फ्लैटों में आग लगने की घटना हुई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने हाईराइज बिल्डिंग्स की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:35:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीतांबरा पीठ पहुंचे सीएम योगी, सुरक्षा के चलते डेढ़ घंटे रुके श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[दतिया में मां बगलामुखी और वानखंडेश्वर महादेव के किए दर्शन, वीआईपी मूवमेंट के कारण आम श्रद्धालुओं की एंट्री बंद रहने पर लोगों ने जताई नाराजगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a365bbe0ad50/article-56490"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yogi-adityanath-datia-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को मध्यप्रदेश के दतिया पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ में मां बगलामुखी और वानखंडेश्वर महादेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा कुछ ही मिनटों का था, लेकिन उनके आगमन को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा कारणों से करीब डेढ़ घंटे तक आम श्रद्धालुओं की एंट्री रोक दी गई, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को मंदिर के बाहर इंतजार करना पड़ा। इस व्यवस्था को लेकर कुछ श्रद्धालुओं ने नाराजगी भी जताई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 10:15 बजे विशेष विमान से दतिया हवाई पट्टी पहुंचे। वहां से उनका काफिला सीधे पीतांबरा पीठ के लिए रवाना हुआ। प्रशासन ने पहले से ही पूरे मंदिर परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया था। मंदिर के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर पुलिस बल तैनात किया गया था और वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई थी। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर यह व्यवस्था लागू की गई थी। पीतांबरा पीठ देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और यहां रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शनिवार होने के कारण भी सुबह से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ मौजूद थी। कई लोग दूर-दराज के शहरों और राज्यों से दर्शन करने पहुंचे थे। लेकिन मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना के बाद मंदिर परिसर में प्रवेश अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इससे श्रद्धालुओं को बाहर खड़े होकर इंतजार करना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ मां बगलामुखी की पूजा की। इसके बाद उन्होंने वानखंडेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन किए। बताया जा रहा है कि उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति और विकास की कामना की। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। पूरा कार्यक्रम बेहद सीमित समय में संपन्न हुआ और मुख्यमंत्री करीब 15 मिनट तक मंदिर परिसर में रहे। दर्शन कार्यक्रम के दौरान मंदिर के बाहर इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं में कुछ लोगों ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। ग्वालियर से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि वह सुबह जल्दी मंदिर पहुंच गए थे ताकि भीड़ से पहले दर्शन कर सकें, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी तरह कई अन्य लोगों ने भी लंबे इंतजार को लेकर असंतोष व्यक्त किया। एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वह तेज धूप और गर्मी से बचने के लिए सुबह के समय ही मंदिर पहुंची थीं। लेकिन प्रवेश बंद होने के कारण उन्हें बाहर ही इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इस तरह की स्थिति कठिन हो जाती है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था हटने के बाद सभी श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दे दिया गया और दर्शन की प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री स्तर के दौरे में सुरक्षा एजेंसियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है। प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा को कम करने की कोशिश की गई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए प्रवेश रोकना जरूरी था। अधिकारियों ने बताया कि पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रही और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दतिया प्रशासन कई दिनों से तैयारियों में जुटा हुआ था। हवाई पट्टी से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे थे। पीतांबरा पीठ में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़क मार्ग से झांसी के लिए रवाना हो गए। झांसी में उनका करीब 20 घंटे का कार्यक्रम निर्धारित है। वहां वे विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों में भाग लेंगे। बताया जा रहा है कि करीब 1500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात झांसी क्षेत्र को मिलने वाली है। इसके अलावा मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे और कई प्रशासनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दतिया और झांसी दोनों जिलों में मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि दौरे को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया था। गौरतलब है कि पीतांबरा पीठ लंबे समय से देशभर के राजनेताओं, उद्योगपतियों और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई वरिष्ठ नेता समय-समय पर यहां दर्शन के लिए पहुंचते रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा विशेष सिद्धि और सफलता प्रदान करने वाली मानी जाती है, जिसके कारण देशभर से लोग यहां आते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:46:50 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचेंगे योगी, चंपत राय को कार्यक्रम से दूर रहने का संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[चढ़ावा चोरी जांच तेज, सीएम योगी के दौरे से पहले प्रशासन की सख्ती बढ़ी, मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-champat-rai-will-reach-ayodhya-amid-ram-temple-offering/article-56342"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद और जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मंदिर प्रबंधन, दान राशि की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। हालांकि इस दौरे को लेकर जारी प्रोटोकॉल में एक ऐसा बिंदु सामने आया है जिसने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बताया जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को कार्यक्रम में शामिल न होने और अपने स्थान पर किसी प्रतिनिधि को नामित करने का सुझाव दिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में इस संबंध में जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को देने के लिए भी कहा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय मंदिर ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों में गिने जाते हैं। मंदिर निर्माण से लेकर प्रबंधन और वीआईपी कार्यक्रमों तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान उनकी अनुपस्थिति की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) चौथे दिन भी सुबह से ही राम मंदिर परिसर पहुंची और जांच प्रक्रिया जारी रखी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की और दान राशि की गिनती एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान राशि की गिनती, उसके भंडारण और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। इसी क्रम में मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से भी पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई है। अब तक की जांच में पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी किसी न किसी रूप में दान राशि की गिनती और उससे संबंधित कार्यों से जुड़े थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों की निशानदेही पर अब तक करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी भी की जा चुकी है। हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी गुरुवार को अयोध्या पहुंचे और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावा राशि से जुड़े मामले में बड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी दावा किया था कि मंदिर में करोड़ों रुपये की दान राशि के गबन की आशंका है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की जांच की मांग की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने की खबर सामने आई थी, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर हो गया। इसके बाद राज्य स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच एक और महत्वपूर्ण चर्चा राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं की निगरानी और अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक दलों की बयानबाजी, जांच एजेंसियों की सक्रियता और मंदिर प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सभी की नजरें इस दौरे पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:27:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>योगी बोले- मारीच और सुबाहु भी लैंड जिहाद में थे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ में रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा में पहुंचे मुख्यमंत्री, कहा- राम का जीवन आज भी समाज के लिए आदर्श, लव जिहाद और सामाजिक चुनौतियों पर भी रखी बात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-said-marich-and-subahu-were-also-involved-in-land/article-55451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yogi-adityanath-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लखनऊ में आयोजित जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा के समापन दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से उन्हें जोड़ने की कोशिश की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने वाला आदर्श भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में भी राम के जीवन से कई महत्वपूर्ण सीख ली जा सकती हैं और समाज की अनेक समस्याओं का समाधान उनके आदर्शों में दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामायण के पात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि जब भगवान राम वनवास के दौरान दंडकारण्य पहुंचे थे, तब वहां खर-दूषण, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का प्रभाव था। उन्होंने कहा कि ये शक्तियां साधु-संतों को उनके स्थानों से हटाने का काम करती थीं। इसी संदर्भ में उन्होंने मारीच और सुबाहु को लैंड जिहाद से जोड़ते हुए टिप्पणी की। योगी ने कहा कि जब भी नकारात्मक शक्तियां समाज में प्रभाव बढ़ाती हैं, तब विनाश और अव्यवस्था का माहौल बनता है। रामकथा ऐसे ही प्रसंगों के माध्यम से समाज को सजग रहने का संदेश देती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन में नारी सम्मान और मर्यादा की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब लव जिहाद जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, तब राम का जीवन एक आदर्श उदाहरण के रूप में सामने आता है। उनके अनुसार श्रीराम ने अपने आचरण से यह दिखाया कि समाज में महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से रामकथा को केवल सुनने तक सीमित न रखने बल्कि उसके संदेशों को जीवन में उतारने का आग्रह किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसने भी भगवान राम को अपने जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ। वहीं जो लोग राम के मार्ग से भटके, उनका इतिहास में सम्मानजनक स्थान नहीं बच पाया। उन्होंने रावण, मारीच और अन्य पात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि उच्च कुल में जन्म लेने के बावजूद गलत रास्ता अपनाने वालों का अंत अच्छा नहीं हुआ। दूसरी ओर विभीषण और हनुमान जैसे पात्र आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किए जाते हैं क्योंकि उन्होंने धर्म और सत्य का साथ चुना।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी आस्था, संस्कृति और परंपराओं से है। जो लोग भारत के प्रति निष्ठा और यहां की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान नहीं रखते, उन्हें देश की भावना को समझने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जाति, धर्म और अन्य आधारों पर बांटने की कोशिशें समय-समय पर होती रही हैं, लेकिन संत परंपरा हमेशा लोगों को जोड़ने का काम करती रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों तक संतों और श्रद्धालुओं ने भगवान राम के जन्मस्थान के लिए संघर्ष किया। यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ऐसा नाम हैं जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे देश को जोड़ने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि राम भारतीय समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र में बने हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मध्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास ने समाज को जागरूक करने और एकजुट करने का कार्य किया था, उसी प्रकार आज रामभद्राचार्य समाज में आध्यात्मिक चेतना फैलाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें आधुनिक युग का प्रेरक संत बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। चित्रकूट में दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना इसका उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रामभद्राचार्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान दोनों के बीच कुछ देर चर्चा भी हुई। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और समापन दिवस के अवसर पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। आयोजन के दौरान रामकथा के माध्यम से समाज, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए, जिन पर श्रद्धालुओं ने भी अपनी सहमति जताई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जगदलपुर में अमित शाह की मुख्यमंत्रियों के साथ होगी बड़ी बैठक, 4 राज्यों के CM पहुंचे बस्तर</title>
                                    <description><![CDATA[जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक, अमित शाह के साथ यूपी, MP, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के CM शामिल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/amit-shah-will-have-a-big-meeting-with-the-chief/article-53738"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/amit-shah-jagdalpur-bastar-central-zonal-council.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन काफी महत्वपूर्ण है। जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की हाई-लेवल बैठक हो रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं। यह बैठक एक निजी होटल में हो रही है और इसकी अध्यक्षता खुद अमित शाह करेंगे। बस्तर जैसे क्षेत्र में इस स्तर की बैठक को लेकर सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिल रहे हैं। शहर के कई हिस्सों में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में योगी आदित्यनाथ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोहन यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुष्कर सिंह धामी और विष्णु देव साई शामिल हुए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार सुबह जगदलपुर पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि बाकी मुख्यमंत्री सोमवार रात को ही पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर भाजपा के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बैठक की तैयारियों को लेकर प्रशासन काफी सतर्क नजर आ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आम लोगों की आवाजाही पर भी कुछ क्षेत्रों में असर देखने को मिल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए चर्चा में रहा है। ऐसे में यहां चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">; <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक हलकों में इसे एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ये दिखाने की कोशिश कर रही है कि बस्तर अब धीरे-धीरे संघर्ष वाले क्षेत्र की छवि से बाहर निकल रहा है और विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक गतिविधियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन इलाकों में पहले बड़े नेताओं के दौरे सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां अब ऐसी बैठकें होना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में कानून व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच समन्वय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा विवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर रहने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई बड़े नक्सली कमांडरों की गिरफ्तारी या मौत की खबरें आई हैं। केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अभी तेज किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने बस्तर में आदिवासी समाज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर कई बातें की थीं। उन्होंने कहा था कि पिछले कई दशकों में बस्तर को जो नुकसान हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। गुंडाधुर की धरती का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस इलाके को अब नई पहचान देने की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने भी बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। दीपक बैज ने कहा कि जब केंद्र सरकार खुद ईंधन बचाने और वर्क फ्रॉम होम की बात करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब इतनी बड़ी बैठक वर्चुअल भी की जा सकती थी। उनका कहना था कि चार राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री अलग-अलग विमानों से आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लाखों रुपए खर्च हुए। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा नेताओं का कहना है कि बस्तर में इस तरह की बैठक होना क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे यहां विकास की नई तस्वीर सामने आएगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:05:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी की अपील का असर, CM मोहन यादव ने घटाईं अपने काफिले की गाड़ियां</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की अपील के बाद कई राज्यों में वीआईपी काफिले और सरकारी वाहनों में कटौती, ईंधन बचत और ई-वाहनों को बढ़ावा दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/effect-of-pm-modis-appeal-cm-mohan-yadav-reduced-the/article-53274"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t144257.278.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पीएम मोदी की अपील के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में वीआईपी सुरक्षा व काफिले में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या कम हो रही है। मिडिल ईस्ट संकट के चलते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र और राज्य सरकारें ईंधन बचाने के लिए कदम उठा रही हैं। खबरों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या लगभग आधी कर दी है और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने पर ध्यान दिया है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये निर्देश भी दिए गए हैं कि नए फ्यूल-आधारित वाहनों की खरीद से बचने की कोशिश की जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां संभव हो।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने सुरक्षा काफिले में भारी कटौती की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब उनके साथ चलने वाले वाहनों की संख्या आधी से भी कम रह गई है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई केंद्रीय मंत्रालयों ने भी अपने स्तर पर ईंधन बचाने के उपाय लागू करना शुरू कर दिया है। कुछ राज्यों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक बैठकें और कामकाज डिजिटल मोड में बदलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई बीजेपी शासित राज्यों ने इस पहल को गंभीरता से लेते हुए काफिले और सरकारी वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">13<span lang="hi" xml:lang="hi"> से घटाकर </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> कर दी है। उन्होंने मंत्रियों से अनुरोध किया है कि अनावश्यक वाहनों का उपयोग न करें और दौरे पर बेवजह गाड़ियों की लंबी कतारें न लगाएं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने काफिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के वाहनों में करीब </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा है कि एक दिन </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">नो व्हीकल डे</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मनाया जाए और सरकारी बैठकों को जहां तक संभव हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑनलाइन किया जाए। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा और आधिकारिक कार्यों के लिए अनावश्यक वाहनों का उपयोग न किया जाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली में भी इस दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। भाजपा नेता रेखा गुप्ता के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रियों और विधायकों को कम से कम वाहनों के इस्तेमाल और कारपूलिंग को बढ़ावा देने के लिए कहा गया है। महाराष्ट्र सरकार ने गैर-जरूरी हवाई यात्राओं पर रोक लगाते हुए यह व्यवस्था लागू की है कि मंत्रियों को सरकारी विमानों के उपयोग के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमति लेनी होगी। गुजरात के राज्यपाल ने उदाहरण पेश करते हुए घोषणा की है कि वे अब राज्य की यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर या विमान के बजाय ट्रेन और बस का उपयोग करेंगे। बिहार में भी उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या आधी करने का फैसला किया है और अनावश्यक आधिकारिक यात्राओं से बचने का निर्णय लिया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई नेताओं और मंत्रियों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी ईंधन बचाने के उदाहरण पेश किए हैं। मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ई-स्कूटर चलाते नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उन्होंने कहा कि यह कदम पीएम की अपील के बाद लिया गया है ताकि पेट्रोल की बचत की जा सके। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी ई-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना शुरू कर दिया है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने भी मेट्रो और ई-रिक्शा से सरकारी कार्यों के लिए यात्रा कर ईंधन बचत का संदेश दिया है। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र और राज्यों की यह पहल धीरे-धीरे एक बड़े अभियान में तब्दील होती नजर आ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सरकारी तंत्र में ईंधन की खपत कम करने पर जोर दिया जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 14:47:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>यूपी पंचायत चुनाव 2026 टलेंगे या होंगे? सीएम योगी का संकेत आया सामने</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सीएम योगी आदित्यनाथ का रुख कोर्ट के फैसले पर निर्भर है, जिससे चुनाव टलने की चर्चा तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/up-panchayat-elections-2026-will-be-postponed-or-will-cm/article-49583"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/up-panchayat-election-2026-yogi-adityanath.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव समय पर होंगे या टल जाएंगे, इस पर अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। हाल ही में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयानों और सरकार की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है। अब पूरा मामला न्यायालय की प्रक्रिया और उसके फैसले पर निर्भर करता दिख रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सरकार का रुख और मुख्यमंत्री योगी की सोच</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूत्रों और मंत्री ओम प्रकाश राजभर के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विषय पर स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकार अदालत के निर्णय का सम्मान करेगी। उनका मानना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब सरकार की ओर से कोई भी जल्दबाजी उचित नहीं होगी। इसी कारण पंचायत चुनाव की समयसीमा को लेकर स्थिति फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं से बढ़ी अनिश्चितता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पंचायत चुनाव से जुड़ी कई याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं, जिन पर सुनवाई लगातार टलती रही है। हालिया घटनाक्रम में भी इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी गई थी। यही कारण है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है। जब तक अदालत कोई अंतिम निर्णय नहीं देती, तब तक चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की संभावना कम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">राजनीतिक रणनीति और समय प्रबंधन का पहलू</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पंचायत चुनाव 2027 के बाद कराए जाते हैं तो इससे राज्य सरकार को अपनी रणनीति और संगठनात्मक तैयारी को मजबूत करने का अतिरिक्त समय मिल सकता है। इसके अलावा सरकार किसी भी कानूनी विवाद या प्रशासनिक उलझन से बचने की कोशिश कर रही है। यह भी माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष फिलहाल बड़े चुनावी समीकरणों पर फोकस करना चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ग्रामीण स्तर पर बढ़ी चर्चा और उम्मीदें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनाव को लेकर लोगों की उम्मीदें बनी हुई हैं। कई जगह मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी चुनाव को लेकर स्पष्टता नहीं है। ऐसे में जनता नए प्रतिनिधियों के चयन को लेकर इंतजार कर रही है। यदि चुनाव टलते हैं तो मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाए जाने की संभावना भी बन सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ओम प्रकाश राजभर के बयानों से बढ़ी राजनीतिक हलचल</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पहले संकेत दिए थे कि पंचायत चुनाव तय समय पर हो सकते हैं, लेकिन हालिया बयानों में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सरकार और निर्वाचन आयोग अब पूरी तरह अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। उनके बयानों ने राजनीतिक हलचल और चर्चाओं को और तेज कर दिया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:52:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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