<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/international-politics/tag-6543" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>international politics - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/6543/rss</link>
                <description>international politics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुबह ईरान को चेतावनी, रात में शांति समझौता; एक दिन में बदला ट्रम्प का रुख</title>
                                    <description><![CDATA[G7 समिट में सख्त बयान देने वाले ट्रम्प ने कुछ घंटों बाद फ्रांस के वर्साय पैलेस में ईरान के साथ शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/warning-to-iran-in-the-morning-peace-agreement-at-night/article-56330"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच बुधवार का दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ही दिन में ऐसा रुख दिखाया जिसने दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया। सुबह तक ईरान को कड़ी चेतावनी देने वाले ट्रम्प ने रात होते-होते उसी देश के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। यह घटनाक्रम फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया, जहां ट्रम्प के बयानों और फैसलों ने वैश्विक कूटनीति को नई दिशा दे दी। दिन की शुरुआत में ट्रम्प ने G7 समिट के दौरान आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि यदि आने वाले समय में समझौता नहीं हुआ और हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया और माना गया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ दबाव की नीति जारी रखेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान ट्रम्प की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले नेता हैं। ट्रम्प की यह टिप्पणी भी दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा नजरें ईरान को लेकर उनके अगले कदम पर टिकी हुई थीं। G7 सम्मेलन समाप्त होने के बाद ट्रम्प अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस के लिए रवाना हुए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उन्हें विशेष रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया था। बताया गया कि G7 नेताओं में ट्रम्प अकेले ऐसे नेता थे जिन्हें इस विशेष आयोजन के लिए न्योता मिला था। वर्साय पहुंचने पर मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्साय पैलेस अपने भव्य इतिहास और शानदार वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ट्रम्प ने यहां के ऐतिहासिक हिस्सों का दौरा किया और विशेष रूप से शीशमहल को काफी देर तक देखा। बताया जाता है कि 357 बड़े आइनों से सजी इस ऐतिहासिक गैलरी की भव्यता ने उन्हें प्रभावित किया। सोने की नक्काशी और शाही सजावट के प्रति रुचि रखने वाले ट्रम्प ने इस इमारत की खुलकर प्रशंसा भी की। इस दौरान माहौल पूरी तरह औपचारिक और मैत्रीपूर्ण नजर आ रहा था। हालांकि असली घटनाक्रम डिनर शुरू होने से ठीक पहले सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्साय पैलेस में मौजूद कई अधिकारियों और मेहमानों को आखिरी समय तक यह जानकारी नहीं थी कि ईरान से जुड़े समझौते पर उसी रात हस्ताक्षर हो सकते हैं। कुछ तस्वीरों में ट्रम्प और मैक्रों को एक फोन कॉल के दौरान बातचीत करते हुए देखा गया। माना जा रहा है कि इसी दौरान अंतिम स्तर की चर्चा हुई और समझौते को मंजूरी मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद ट्रम्प ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। हस्ताक्षर के समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उनके साथ मौजूद थे, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी वहां उपस्थित थे। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रम्प की तस्वीरें सामने आते ही पूरी दुनिया में यह खबर तेजी से फैल गई। खास बात यह रही कि जिस समझौते को आधिकारिक तौर पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में अंतिम रूप दिया जाना था, उस पर अपेक्षा से पहले फ्रांस में ही हस्ताक्षर कर दिए गए। हस्ताक्षर के बाद ट्रम्प ने मीडिया के सामने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। जब एक पत्रकार ने उनसे समझौते के बारे में पूछा तो उन्होंने जोर से जवाब दिया, “साइन किए।” इस एक वाक्य ने पूरे दिन की राजनीतिक कहानी को समेट दिया। सुबह जहां ट्रम्प ईरान के खिलाफ सख्त बयान दे रहे थे, वहीं रात तक वे समझौते के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा चुके थे। ट्रम्प की यह रणनीति दबाव और बातचीत के मिश्रण पर आधारित रही। पहले उन्होंने कड़ा संदेश देकर अपनी स्थिति मजबूत की और बाद में बातचीत के जरिए समझौते का रास्ता चुना। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे ट्रम्प की पारंपरिक वार्ता शैली का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें वह पहले सख्त रुख अपनाते हैं और फिर अचानक समझौते की ओर बढ़ जाते हैं। इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/warning-to-iran-in-the-morning-peace-agreement-at-night/article-56330</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/warning-to-iran-in-the-morning-peace-agreement-at-night/article-56330</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:57:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/donald-trump-%284%29.jpg"                         length="111080"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूएस-ईरान न्यूक्लियर डील पर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप बोले—ईरान को 300 अरब डॉलर देने की खबर फर्जी, वेंस ने समझौते को बताया ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-nuclear-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच अब परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा राजनीतिक दावा सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार कभी न बनाने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जो यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर दे रहा है, वह पूरी तरह “फर्जी खबर” है। ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दिया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने स्पष्ट रूप से परमाणु हथियार न रखने पर सहमति दी है और 300 मिलियन या अरब डॉलर देने की बात गलत तरीके से फैलायी जा रही है। ट्रंप ने इस तरह की खबरों को राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया और कहा कि यह जानकारी अमेरिकी जनता को भ्रमित करने के लिए फैलाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरें सामने आई हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे युद्ध जैसे हालात को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक स्थायी ढांचा तैयार करना बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस डील के सभी विस्तृत बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे कई सवाल बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। वेंस ने कहा कि पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यही था कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समझौता अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच ईरान की तरफ से भी सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अभी अंतिम शांति समझौता तैयार होना बाकी है। ईरानी पक्ष का कहना है कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए विस्तृत बातचीत और ठोस शर्तों पर सहमति जरूरी है। सबसे बड़ा विवाद उस 300 अरब डॉलर के कथित पैकेज को लेकर है, जिस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ट्रंप ने जहां इसे पूरी तरह झूठ बताया है, वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह रकम किसी प्रत्यक्ष भुगतान के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक पुनर्निर्माण और निवेश कार्यक्रम से जुड़ी हो सकती है। ईरानी मीडिया का दावा है कि यह राशि युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और प्रतिबंधों में राहत के तौर पर मांगी गई संभावित आर्थिक पैकेज का हिस्सा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान ने 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों की रिहाई की मांग की है और साथ ही तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील की भी बात शामिल है। ईरानी पक्ष का तर्क है कि देश को हुए नुकसान का आकलन कई सौ अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, इसलिए आर्थिक राहत किसी भी समझौते का अहम हिस्सा होना चाहिए। दूसरी ओर पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स में इस आंकड़े को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार यह 300 अरब डॉलर का पैकेज सीधे भुगतान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश और पुनर्निर्माण सहयोग से जुड़ा एक प्रस्ताव हो सकता है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल हो सकती है। इस अंतर ने पूरे समझौते को और अधिक विवादित बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">समझौते के प्रारंभिक ढांचे को लेकर उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि यह दस्तावेज अभी केवल डेढ़ पेज का है और बहुत सामान्य प्रकृति का है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में इसके और विवरण सामने आएंगे। वेंस के अनुसार समझौते में परमाणु निरीक्षकों की वापसी, यूरेनियम स्टॉकपाइल के प्रबंधन और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान में दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है, ताकि परमाणु गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार को लेकर एक साझा समाधान निकाला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते से पहले ईरान को कई अहम शर्तों को पूरा करना होगा, जिनमें परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों से दूरी बनाना शामिल है। हालांकि ईरान की ओर से इन शर्तों पर औपचारिक प्रतिक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/us-iran-nuclear-deal.jpg"                         length="127711"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता, युद्ध समाप्ति का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[तीन महीने से चल रहे तनाव के बाद मध्यस्थता से बनी सहमति, 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/historic-peace-agreement-between-america-and-iran-claims-end-of/article-55949"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-peace-deal-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">14 जून 2026 की देर रात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अचानक बड़ा मोड़ देखने को मिला जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और सैन्य टकराव को लेकर एक व्यापक शांति समझौते की घोषणा सामने आई। इस घोषणा ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी क्योंकि पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में हालात लगातार अस्थिर बने हुए थे और कई देशों की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई थी। दोनों देशों ने सभी सैन्य गतिविधियों को “तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त” करने पर सहमति जताई है। यह समझौता केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है क्योंकि इसमें लेबनान सहित कई मोर्चों पर चल रही कार्रवाइयों को रोकने की बात शामिल है। मध्यस्थता की भूमिका पाकिस्तान ने निभाई, जिसने लगातार दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश की और अंतिम चरण की बातचीत को सफल बनाने में अहम योगदान दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह समझौता “REACHED” हो चुका है और 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जाएगा। इस घोषणा के बाद वैश्विक कूटनीतिक हलकों में इसे एक संभावित ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि कई विशेषज्ञ अभी भी इसके क्रियान्वयन को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच अमेरिका की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान के साथ शांति समझौता अब पूरी तरह से अंतिम रूप ले चुका है और इसे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, अब फिर से पूरी तरह खोल दिया गया है और अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में तुरंत हलचल देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के संकेत सामने आए। पिछले कई महीनों से इस क्षेत्र में जारी तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही थी, जिससे कई देशों में आर्थिक दबाव भी बढ़ा था। अब इस समझौते के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बाजारों में स्थिरता लौट सकती है, हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है क्योंकि जमीनी स्तर पर भरोसा बहाल करना आसान नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस समझौते तक पहुंचने के लिए कई दौर की गुप्त और लंबी बातचीत हुई, जिसमें विभिन्न देशों की कूटनीतिक टीमों ने पर्दे के पीछे रहकर भूमिका निभाई। पाकिस्तान की मध्यस्थता को इस प्रक्रिया में सबसे अहम माना जा रहा है क्योंकि उसने दोनों पक्षों के बीच संवाद की खाई को लगातार कम करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों की निगरानी, और भविष्य में किसी भी टकराव को रोकने के लिए एक साझा ढांचे पर भी चर्चा हुई है। हालांकि अभी तक सभी बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह समझौता केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें दीर्घकालिक स्थिरता और सहयोग की दिशा में भी कुछ प्रावधान शामिल हैं। अगर यह समझौता जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होता है तो पश्चिम एशिया में पिछले कई वर्षों से जारी अस्थिरता में बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे शुरुआती चरण का समझौता मानते हुए चेतावनी दे रहे हैं कि असली परीक्षा इसके पालन और भरोसे की बहाली में होगी। दुनिया की नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले उस आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हुई है, जहां इस समझौते को औपचारिक रूप दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/historic-peace-agreement-between-america-and-iran-claims-end-of/article-55949</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/historic-peace-agreement-between-america-and-iran-claims-end-of/article-55949</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:17:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/us-iran-peace-deal-2026.jpg"                         length="128018"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने ईरान युद्ध का विरोध किया, बोले- आम लोग कीमत चुका रहे</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पोस्ट में युद्ध खत्म करने की मांग, कहा- बिना मंजूरी शुरू हुए संघर्ष ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-york-mayor-mamdani-opposed-the-iran-war-and-said/article-54508"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-war-news.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने ईरान युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस पूरे संघर्ष का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि यह युद्ध अब खत्म होना चाहिए, क्योंकि इसकी सबसे ज्यादा कीमत आम लोग चुका रहे हैं। ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में जिस तरह हालात बिगड़े हैं, उसने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्ध के लिए किसी आम नागरिक ने वोट नहीं किया था, लेकिन सबसे ज्यादा असर उन्हीं लोगों पर पड़ा जिनकी इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं थी।</p>
<p dir="ltr">ममदानी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि युद्ध के दौरान हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि 13 अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में मारे गए हैं और वे अब कभी अपने परिवारों के पास वापस नहीं लौट पाएंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध की असली मार हमेशा आम परिवारों पर पड़ती है, चाहे वह किसी भी देश के हों। उनके मुताबिक संघर्ष सिर्फ सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगता है।</p>
<p dir="ltr">मेयर ने कहा कि अमेरिका में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं। इससे मिडिल क्लास और वर्किंग क्लास परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोग पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव झेल रहे थे, ऐसे में युद्ध ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। ममदानी के मुताबिक विदेश नीति के फैसलों का बोझ आखिरकार आम टैक्स देने वाले लोगों पर ही आता है।</p>
<p dir="ltr">उन्होंने आरोप लगाया कि यह संघर्ष अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस की मंजूरी के बिना शुरू किया गया। ममदानी ने कहा कि विदेश में जाने वाली हर जान और अमेरिका के भीतर आम परिवारों पर पड़ने वाला हर आर्थिक बोझ एक लापरवाह फैसले की कीमत है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जोड़कर आलोचना भी कर रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की नई टोल वसूली व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि यह चेतावनी तेल व्यापार और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ती चिंता के कारण दी गई है।</p>
<p dir="ltr">उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन लगातार गलत फैसले ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओमान को दी गई धमकी यह दिखाती है कि ईरान युद्ध धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर जा रहा है। अमेरिकी विपक्ष का कहना है कि हालात संभालने के बजाय और ज्यादा तनाव पैदा किया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">ईरान की तरफ से भी लगातार तीखे बयान सामने आ रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि दोनों देश सैन्य मोर्चे पर नाकाम रहने के बाद अब ईरान को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं। खामेनेई के बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।</p>
<p dir="ltr">दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है और इसके जरिए क्षेत्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p dir="ltr">इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला किया। ईरान के मुताबिक यह हमला बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। हालांकि अमेरिका की तरफ से इस दावे पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">दुनियाभर में अब इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और नेता लगातार शांति की अपील कर रहे हैं। न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी का बयान भी ऐसे समय आया है जब आम लोग युद्ध के असर को सीधे महसूस कर रहे हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-york-mayor-mamdani-opposed-the-iran-war-and-said/article-54508</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-york-mayor-mamdani-opposed-the-iran-war-and-said/article-54508</guid>
                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:12:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/iran-war-news.jpg"                         length="134594"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Quad बैठक के बाद जयशंकर का बड़ा ऐलान, भारत-अमेरिका बनाएंगे खास मिनरल फ्रेमवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में हुई Quad बैठक के बाद एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं पर नए फ्रेमवर्क का ऐलान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/jaishankars-big-announcement-after-quad-meeting-india-america-will-create-special/article-54231"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/quad,-s.-jaishankar-india-us-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली में मंगलवार को </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Quad <span lang="hi" xml:lang="hi">देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका खास खनिजों और दुर्लभ धातुओं की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए एक नया द्विपक्षीय ढांचा तैयार कर रहे हैं। इस बैठक में अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी भाग लिया। चर्चा में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर सुरक्षा</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन पर गहराई से बात की गई। वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व की स्थितियों का असर भी प्रमुख विषय रहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त प्रेस बयान में जयशंकर ने कहा कि चारों देशों के बीच समन्वय लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि समुद्री निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लॉजिस्टिक्स नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडरसी केबल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है और इसे और भी मजबूत किया जाएगा। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति हमेशा से रही है। उन्होंने ये भी बताया कि वर्तमान वैश्विक हालात के मद्देनज़र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन बनाना बहुत जरूरी हो गया है। इसी दिशा में भारत और अमेरिका के बीच नया ढांचा तैयार किया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के बाद दो बड़ी समुद्री सुरक्षा पहलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग पहल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शुरू हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सदस्य देशों के बीच समुद्री सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर होगा। इसके अलावा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्रीय देशों को रियल टाइम समुद्री डेटा मिल सके। रुबियो ने भारत को </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">क्वाड एट सी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">मिशन के अगले चरण की मेज़बानी के लिए धन्यवाद भी दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Quad <span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि क्षेत्र में रणनीतिक तनाव बढ़ रहा है और ऊर्जा सुरक्षा पर भी दबाव है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालात का हवाला देते हुए समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं के खनन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। जयशंकर ने कहा कि यह ढांचा सप्लाई चेन को और अधिक लचीला और सुरक्षित बनाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक व्हीकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेमीकंडक्टर और हाईटेक सेक्टर में इन खनिजों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/jaishankars-big-announcement-after-quad-meeting-india-america-will-create-special/article-54231</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/jaishankars-big-announcement-after-quad-meeting-india-america-will-create-special/article-54231</guid>
                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:19:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/quad%2C-s.-jaishankar-india-us-relations.jpg"                         length="160211"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा- ईरान समझौते के करीब, खुल सकता है होर्मुज मार्ग</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान और कई देशों के बीच समझौता लगभग तय है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द खुलने की उम्मीद जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-hormuz-passage-may-open-closer-to/article-54126"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/donald-trump-iran-middle-east-strait-of-hormuz.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिडिल ईस्ट में पिछले कई महीनों से चल रहे तनाव के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर सबका ध्यान खींच लिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान और क्षेत्र के कुछ देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तय है। ट्रंप का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जल्द ही इस पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि हाल में उन्होंने मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत की है। उनके अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सऊदी अरब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त अरब अमीरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुर्की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिस्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जॉर्डन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान और बहरीन के नेताओं के साथ इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए राजी हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने समझौते की सभी शर्तें बताने से परहेज किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतना बताया कि बातचीत का अंतिम दौर चल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि दोनों नेताओं के बीच डील के अंतिम पहलुओं पर चर्चा हुई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बहुत जल्द इस समझौते को दुनिया के सामने लाया जाएगा। यह बताया जा रहा है कि बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और संघर्ष विराम जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। लेकिन इजरायल और ईरान की तरफ से ट्रंप के दावों पर अभी तक आधिकारिक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दुनिया हमेशा चिंतित रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हमलों के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई देशों ने सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। अगर यह समझौता होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसका असर देखा जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर तेल की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों में राहत मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले अमेरिका की तरफ से ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई जा रही थी। ऐसे में अचानक बातचीत और समझौते की खबरों ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम या संवर्धित यूरेनियम का सीधा जिक्र नहीं किया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान ने शनिवार को कहा कि वह अमेरिका के साथ तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने के लिए एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">पर काम कर रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की नजर इस संभावित समझौते पर है। अगर बातचीत सफल रहती है तो मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे तनाव में कुछ राहत मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस पर आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-hormuz-passage-may-open-closer-to/article-54126</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-hormuz-passage-may-open-closer-to/article-54126</guid>
                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:05:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/donald-trump-iran-middle-east-strait-of-hormuz.jpg"                         length="102264"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया तनाव BRICS में गूंजा, ईरान बोला- US-इजरायल की हरकतों की हो निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली BRICS बैठक में ईरान ने अमेरिका-इजरायल की निंदा की मांग की। जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चिंता जताई और शांति की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/west-asia-tension-echoed-in-brics-iran-said-%E2%80%93-us-israels/article-53347"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t151151.621.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली में चल रही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक के दौरान अचानक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा छा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदस्य देशों से खुलकर निंदा करने की मांग की। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने कहा कि मौजूदा हालात सिर्फ एक देश से जुड़े नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मामला बन चुके हैं। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं में अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी साफ नजर आती है और ऐसे में </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मंच को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। कई कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के इस बयान ने माहौल को गंभीर और संवेदनशील बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह मुद्दा अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भू-राजनीतिक टकराव से भी जुड़ता दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरगची ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया एक नई वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उन्होंने </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">को इस बदलती व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया और कहा कि यह समूह अब सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक राजनीति में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है। इसी दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर कई आरोप लगाए और कहा कि इन देशों की नीतियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी देशों के खिलाफ ईरान की स्थिति को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से नहीं देखना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह विकासशील देशों के हितों से भी जुड़ा है। बैठक में उन्होंने यह मांग की कि </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">देश बिना किसी शर्त के अमेरिका और इजरायल की उन कार्रवाइयों की निंदा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानता है। उनके बयान के बाद चर्चा का रुख कूटनीतिक तनाव की ओर मुड़ गया और कई प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहा बढ़ता तनाव</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर खतरा और ऊर्जा आपूर्ति पर असर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जरूरी मानता है। उन्होंने लेबनान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूडान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यमन और लीबिया जैसे देशों में चल रहे संकटों का भी जिक्र किया और कहा कि इन संघर्षों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयशंकर ने यह भी कहा कि शांति को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान हर देश की जिम्मेदारी है। नई दिल्ली में 14 और 15 मई को हो रही इस </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा जारी है। भारत ने इस वर्ष </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">की अध्यक्षता संभाली है और वह लगातार संतुलित और संवाद आधारित कूटनीति की वकालत कर रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/west-asia-tension-echoed-in-brics-iran-said-%E2%80%93-us-israels/article-53347</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/west-asia-tension-echoed-in-brics-iran-said-%E2%80%93-us-israels/article-53347</guid>
                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:38:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-14t151151.621.jpg"                         length="119196"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने ईरान को भेजा नया प्रस्ताव, ट्रंप बोले- समझौता नहीं हुआ तो फिर होगी बमबारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने का नया प्रस्ताव भेजा है। ट्रंप की चेतावनी के बीच परमाणु कार्यक्रम पर समझौता अब भी अटका हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t161820.521.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच करीब दो महीने से जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने तेहरान को युद्ध खत्म करने के लिए नया प्रस्ताव भेजा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी समीक्षा फिलहाल ईरान कर रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा खोलने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को कम करने जैसे बिंदु शामिल हैं। हालांकि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। तेहरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में किसी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा। इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फिर चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू हो सकती है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में बेचैनी फिर बढ़ गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुरुवार सुबह से ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए स्थिर हुईं और निवेशकों में उम्मीद जगी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य खुलता है तो तेल सप्लाई सामान्य हो सकती है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ हफ्तों में पर्सियन गल्फ से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। बुधवार देर रात अमेरिकी सेना और एक ईरानी तेल टैंकर के बीच ओमान की खाड़ी में तनाव की खबर भी सामने आई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद कार्रवाई की गई। हालांकि ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। हालात इतने तनावपूर्ण रहे कि कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अस्थायी रूप से अपने रूट बदल दिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे युद्ध की सबसे बड़ी उलझन अब भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। वॉशिंगटन चाहता है कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन सीमित करे और परमाणु हथियारों की दिशा में कोई कदम न बढ़ाए। दूसरी तरफ ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच असली पेच यहीं फंसा है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि किसी भी समझौते में परमाणु गतिविधियों पर सख्त निगरानी शामिल हो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान अपने कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। हालांकि अब यह भी कहा जा रहा है कि दोनों देश फिलहाल इस मुद्दे को अलग रखकर बाकी बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश कर सकते हैं ताकि युद्ध जैसी स्थिति खत्म हो सके। बाद में परमाणु वार्ता के लिए अलग दौर की बातचीत कराई जा सकती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस संघर्ष की शुरुआत फरवरी के आखिर में हुई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले शुरू किए। उसी दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा नुकसान पहुंचा और इसके बाद तेहरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हालात तेजी से बिगड़े और होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ने लगा। अप्रैल में संघर्षविराम की कोशिश हुई थी लेकिन बीच-बीच में दोनों पक्षों की तरफ से आरोप लगते रहे कि सीजफायर का उल्लंघन हुआ। पाकिस्तान की मध्यस्थता में भी बातचीत कराने की कोशिश हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर वह सफल नहीं हो पाई। अब ट्रंप प्रशासन दावा कर रहा है कि समझौता करीब है और एक छोटे मेमोरैंडम पर सहमति बन सकती है। लेकिन तेहरान अभी पूरी तरह भरोसा करने की स्थिति में नहीं दिख रहा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857</guid>
                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-07t161820.521.jpg"                         length="147039"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाएगा ईरान, इजराइल बोला- युद्ध कब खत्म होगा तय नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-will-impose-toll-on-ships-passing-through-the-strait/article-49682"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-hormuz-strait-toll-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की योजना को आगे बढ़ाया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ईरान को उसकी स्थानीय मुद्रा रियाल में शुल्क देना होगा। इसके साथ ही अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग में प्रवेश से रोकने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले ईरान की संसद, गार्जियन काउंसिल और राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक तेल आपूर्ति पर संभावित असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है। ऐसे में ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह की बाधा से तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल का बयान और युद्ध पर अनिश्चितता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के खत्म होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती। एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि अब तक युद्ध के आधे से अधिक लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं और आने वाले समय में ईरान का मौजूदा शासन कमजोर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान के इस्फहान में अमेरिका की एयरस्ट्राइक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस बीच अमेरिका ने ईरान के शहर Isfahan में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हमले के बाद डिपो में जोरदार विस्फोट हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार वहां बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री मौजूद थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ट्रंप का वीडियो और अमेरिका का दावा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हमले से जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई सैन्य ठिकानों को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई थी।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान की ओर से टोल नीति और अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों ने वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-will-impose-toll-on-ships-passing-through-the-strait/article-49682</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-will-impose-toll-on-ships-passing-through-the-strait/article-49682</guid>
                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/iran-hormuz-strait-toll-plan.jpg"                         length="165609"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान को ट्रंप की चेतावनी: होर्मुज खोलो, नहीं तो होगा विनाश</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और समझौते की राह अपनाने को कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-warning-to-iran-to-open-hormuz-otherwise-there-will/article-49616"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/trump-iran-tension-strait-of-hormuz-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक बार फिर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि ईरान को अब बातचीत और समझौते की राह अपनानी चाहिए, वरना परिणाम गंभीर होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज को लेकर चेतावनी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अपने बयान में ट्रंप ने विशेष रूप से Strait of Hormuz का जिक्र करते हुए कहा कि यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को व्यापार के लिए पूरी तरह नहीं खोला गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पिछले कुछ हफ्तों से जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित किया है। ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और व्यापारिक अनिश्चितता के कारण कई देश चिंता में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कूटनीतिक स्थिति और आगे की राह</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">फिलहाल दोनों देशों के बीच सुलह के संकेत कमजोर दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका की ओर से लगातार आक्रामक बयानबाजी स्थिति को और जटिल बना रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की अपीलें की जा रही हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-warning-to-iran-to-open-hormuz-otherwise-there-will/article-49616</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-warning-to-iran-to-open-hormuz-otherwise-there-will/article-49616</guid>
                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:50:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/trump-iran-tension-strait-of-hormuz-news.jpg"                         length="101875"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        