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                <title>energy security - दैनिक जागरण</title>
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                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान जंग के बीच वैश्विक तेल संकट गहराया, 115 करोड़ बैरल सप्लाई गायब</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी पूरी तरह राहत नहीं, तेल भंडार 36 साल के निचले स्तर पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/global-oil-crisis-deepens-amid-iran-war-115-crore-barrel/article-56437"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-oil-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुनिया के ऊर्जा बाजार में ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच बड़ा झटका सामने आया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले चार महीनों में वैश्विक तेल सप्लाई से करीब 115 करोड़ बैरल कच्चा तेल गायब हो गया है। यह आंकड़ा एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुलने के बाद बाजार में थोड़ी राहत जरूर देखी गई है, लेकिन स्थिति अभी भी सामान्य नहीं मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के दौरान तेल आपूर्ति लगभग बाधित रही, जिससे दुनिया के रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार पर भारी दबाव पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान करीब 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकाल लिया गया, जिससे वैश्विक रिजर्व तेजी से घटे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के न्यूनतम स्तर पर दर्ज किया गया है। हालात इतने गंभीर रहे कि कई देशों को अपने दैनिक ईंधन उपयोग को संतुलित करने के लिए आपातकालीन खरीदारी करनी पड़ी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर युद्ध लंबा चलता, तो अमेरिका के तेल भंडार करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ समझौते के बाद स्थिति नियंत्रण में आई है, लेकिन अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान ऊर्जा संकट की गंभीरता को दर्शाता है, क्योंकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तेल आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर हैं। सीजफायर और समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। युद्ध के दौरान जहां कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, वहीं अब यह 80 डॉलर से नीचे आ चुकी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल अस्थायी राहत है, क्योंकि सप्लाई चेन अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हुई है। समुद्री रास्तों से संभावित बारूदी खतरे हटाने, खाली टैंकरों की वापसी और उत्पादन सामान्य करने में अभी लंबा समय लग सकता है। बाजार फिलहाल जरूरत से ज्यादा आशावादी हो गया है। RBC कैपिटल मार्केट्स की विश्लेषक हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल आपूर्ति को सामान्य स्थिति में आने में कई महीनों का समय लग सकता है। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि OPEC देश उत्पादन बढ़ाकर बाजार में स्थिरता ला सकते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी के अनुसार युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल स्टॉक था, इसी कारण इतनी बड़ी सप्लाई बाधा के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं टूटा। उन्होंने यह भी बताया कि डीजल और पेट्रोल के भंडार में गिरावट जरूर आई है, लेकिन स्थिति अभी नियंत्रण में है और आने वाले हफ्तों में सप्लाई चैन में सुधार देखा जा सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में इस समय प्रतिदिन लगभग 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। इसमें अमेरिका, सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक जैसे देश प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जो मिलकर वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। ऐसे में इन देशों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता या युद्ध सीधे तौर पर वैश्विक बाजार और ईंधन कीमतों को प्रभावित करती है। युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। यदि उत्पादन मांग से 50 लाख बैरल प्रतिदिन अधिक भी बढ़ाया जाए, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक साल का समय लग सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, सरकार का बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[22% से 30% एथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल को टैक्स फ्री कर क्रूड ऑयल इम्पोर्ट घटाने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/governments-big-decision-to-end-excise-duty-on-ethanol-mix/article-55588"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ethanol-blended-petrol-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने देश में ऊर्जा नीति को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल में अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी को खत्म कर दिया है। नए नियमों के अनुसार 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर अब कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार का मकसद देश में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस टैक्स छूट के दायरे में E22, E25, E27 और E30 जैसे नए फ्यूल वेरिएंट शामिल होंगे। हालांकि पहले से लागू E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर इस फैसले का कोई सीधा लाभ नहीं दिया गया है। यह पहली बार है जब सरकार ने हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग को वित्तीय प्रोत्साहन देकर बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। यह मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का और अन्य स्टार्च आधारित फसलों से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जाता है, जिससे प्रदूषण में कमी और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जो देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाकर विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है और किसानों को भी उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिल सकता है। एथेनॉल उत्पादन को लेकर देश में तीन प्रमुख श्रेणियां मानी जाती हैं। फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ना, मक्का और मीठे फसलों से बनाया जाता है। सेकेंड जनरेशन एथेनॉल कृषि अवशेषों जैसे भूसी, बांस और वेस्ट मटेरियल से तैयार होता है। वहीं थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल अभी विकास के चरण में है, जो मुख्य रूप से एल्गी (शैवाल) पर आधारित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस नीति को लागू करने से पहले तकनीकी तैयारियों पर भी काम किया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22 से E30 तक के फ्यूल ब्लेंड्स के लिए गुणवत्ता मानक तय कर दिए हैं। इन मानकों में ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर लेवल, सुरक्षा मानक और टेस्टिंग प्रोसेस शामिल हैं। ये नियम मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं, जिससे इस ईंधन को व्यावसायिक रूप से अपनाने का रास्ता साफ हो गया है। भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। पहले जहां 2030 तक E20 लक्ष्य रखा गया था, उसे बाद में संशोधित कर 2025-26 तक कर दिया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने 10% ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था, जिससे इस नीति की गति का अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कुछ उपभोक्ताओं ने चिंता भी जताई है। खासकर पुरानी गाड़ियों में माइलेज कम होने और इंजन पर असर पड़ने की आशंका को लेकर सवाल उठे थे। यह मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने E20 फ्यूल के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि यह बदलाव पूरी तरह तकनीकी जांच के बाद लागू किया गया है और इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि E20 या उससे कम ब्लेंड वाले ईंधन से वाहन की सुरक्षा पर कोई बड़ा खतरा नहीं है, हालांकि माइलेज में मामूली अंतर संभव है। वर्तमान में एक चुनौती यह भी है कि एथेनॉल की लागत कई बार पेट्रोल से अधिक पड़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ट्रांसपोर्ट और GST मिलाकर एथेनॉल की औसत लागत लगभग 71 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है, जिससे रिटेल फ्यूल प्राइस को कम करना आसान नहीं हो पा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:25 +0530</pubDate>
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                <title>UAE संग हुई बड़ी डील, अब भारत के रिजर्व में रहेगा 3 करोड़ बैरल तेल</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी के UAE दौरे में भारत और UAE के बीच बड़ी ऊर्जा डील हुई. अब भारत के रिजर्व में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल स्टोर होगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-deal-made-with-uae-now-3-crore-barrels-of/article-53533"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-uae-oil-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अबू धाबी दौरे के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UAE) <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस डील के तहत अब </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल स्टोर कर सकेगा। जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है और तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी साझा की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया कि दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। बताया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (</span>ADNOC) <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच रणनीतिक सहयोग समझौता किया गया है। इसके जरिए </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">की भागीदारी भारत के तेल भंडारण ढांचे में और भी बढ़ जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे भारत को किसी भी वैश्विक संकट या सप्लाई रुकने की स्थिति में राहत मिल सकती है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच ये डील और भी महत्वपूर्ण हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इस समुद्री मार्ग से बड़े हिस्से का तेल व्यापार होता है। भारत और </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इस दौरान समुद्र में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही पर भी जोर दिया। बातचीत में कहा गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई के लिए समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत ने हाल में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">पर हुए हमलों की निंदा भी की और उसके साथ एकजुटता जताई। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों के बीच केवल कच्चे तेल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्लाई को लेकर भी अहम सहमति बनी है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और </span>ADNOC <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच लॉन्ग टर्म </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्लाई एग्रीमेंट पर भी बातचीत आगे बढ़ी है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में स्ट्रैटेजिक गैस रिजर्व तैयार करने को लेकर भी सहयोग बढ़ाने की बात की गई है। विदेश मंत्रालय ने </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">को भारत की ऊर्जा सुरक्षा का "महत्वपूर्ण साझेदार" बताया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार और तेजी से बढ़ सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऊर्जा क्षेत्र के अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरे में निवेश और रक्षा सहयोग पर भी कई महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं। </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बैंकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस सेक्टर में होगा। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिपबिल्डिंग और एडवांस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भी समझौते हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक हालात को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है और </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ हुआ ये डील उसी रणनीति का हिस्सा है। कहा जा रहा है कि आने वाले महीनों में भारत अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व को और मजबूत करने पर भी ध्यान दे सकता है ताकि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट का असर घरेलू बाजार पर कम पड़े।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:34:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत और UAE के बीच हुई LPG और डिफेंस फ्रेमवर्क डील, 5 अरब डॉलर निवेश पर भी सहमति बनी</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी के UAE दौरे में LPG सप्लाई डील, डिफेंस फ्रेमवर्क और 5 अरब डॉलर निवेश पर सहमति बनी। भारत-यूएई रिश्ते और मजबूत हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lpg-and-defense-framework-deal-signed-between-india-and-uae/article-53430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-uae-relations-lpg-agreement.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संयुक्त अरब अमीरात दौरा इस बार काफी महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक निर्णयों के लिए जाना गया। पाँच देशों की यात्रा के पहले चरण में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी शुक्रवार को यूएई की राजधानी अबू धाबी पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उनका शानदार स्वागत राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने किया। यह मुलाकात उस समय हुई जब दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले से ही मजबूत थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार की बातचीत ने इसे नए स्तर पर पहुंचा दिया। प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों के बीच ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा और निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्लाई डील और डिफेंस फ्रेमवर्क शामिल हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के दौरान</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और यूएई ने एक नई रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने पर सहमति जताई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सुरक्षा सहयोग और मजबूत होगा। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर एक एमओयू साइन किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लिक्विड पेट्रोलियम गैस (</span>LPG) <span lang="hi" xml:lang="hi">की आपूर्ति पर भी एक बड़ा समझौता हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भारत में ऊर्जा की आवश्यकताओं को स्थिर करने में मदद मिलने की संभावना है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात के वडिनार में एक शिप रिपेयरिंग क्लस्टर विकसित करने पर भी सहमति बनी। निवेश के मोर्चे पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूएई ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर</span>, RBL <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक और सम्मान कैपिटल में करीब 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। इन निर्णयों को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरे का माहौल कूटनीतिक गर्मजोशी से भरा रहा। जैसे ही </span>PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी का विमान यूएई के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ</span>, UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">वायुसेना के </span>F-<span lang="hi" xml:lang="hi">16 लड़ाकू विमानों ने उन्हें एस्कॉर्ट किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सम्मान के रूप में देखा गया। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में </span>PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी का स्वागत करते हुए दोनों देशों की दोस्ती को "विशेष और ऐतिहासिक" बताया। वहीं</span>, PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने इस मुलाकात को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए कहा कि वे यूएई को अपना "दूसरा घर" मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल हालात में यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और देखभाल जो तरीके से की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सराहनीय है। बातचीत के दौरान</span>, PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों की निंदा की और इसे अस्वीकार्य बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संयम और संवाद की जरूरत पर जोर दिया। यूएई ने भी इस दौरे के दौरान भारत के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञ इस दौरे को दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग और निवेश साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। खासकर </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">डील और डिफेंस फ्रेमवर्क को आने वाले समय में रणनीतिक साझेदारी की रीढ़ माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:14:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चीन की अपील, कहा- ऊर्जा संकट से बचने के लिए जहाजों की आवाजाही जारी रखें</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बनाए रखने को लेकर चीन की अपील, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर की चिंता बढ़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/chinas-appeal-regarding-hormuz-strait-said-movement-of-ships/article-51689"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/hormuz-strait-xi-jinping.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सामान्य आवाजाही बनाए रखने की अपील की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया। शी ने स्पष्ट किया कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल व्यापक सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील भी की। चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक महत्व</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आ सकती है और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि की बात करें तो हाल के महीनों में मध्य-पूर्व में कई घटनाओं ने क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाया है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। इससे पहले भी कई बार होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कूटनीतिक पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">चीन ने बातचीत और राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है। शी जिनपिंग ने सभी पक्षों से संवाद के जरिए आगे बढ़ने की अपील की। आधिकारिक बयान के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से ही संभव है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी पक्षों को शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, चीन लगातार मध्य-पूर्व में संतुलन बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रभाव और विश्लेषण की दृष्टि से देखा जाए तो चीन का यह रुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका असर सीधे तेल कीमतों, परिवहन लागत और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आगे क्या की बात करें तो फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें मध्य-पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं और प्रमुख देश इस मुद्दे पर बातचीत को आगे बढ़ा सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में स्थिरता बनाए रखना न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक हितों के लिए जरूरी माना जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/chinas-appeal-regarding-hormuz-strait-said-movement-of-ships/article-51689</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाएगा ईरान, इजराइल बोला- युद्ध कब खत्म होगा तय नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-will-impose-toll-on-ships-passing-through-the-strait/article-49682"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-hormuz-strait-toll-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की योजना को आगे बढ़ाया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ईरान को उसकी स्थानीय मुद्रा रियाल में शुल्क देना होगा। इसके साथ ही अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग में प्रवेश से रोकने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले ईरान की संसद, गार्जियन काउंसिल और राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक तेल आपूर्ति पर संभावित असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है। ऐसे में ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह की बाधा से तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल का बयान और युद्ध पर अनिश्चितता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के खत्म होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती। एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि अब तक युद्ध के आधे से अधिक लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं और आने वाले समय में ईरान का मौजूदा शासन कमजोर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान के इस्फहान में अमेरिका की एयरस्ट्राइक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस बीच अमेरिका ने ईरान के शहर Isfahan में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हमले के बाद डिपो में जोरदार विस्फोट हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार वहां बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री मौजूद थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ट्रंप का वीडियो और अमेरिका का दावा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हमले से जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई सैन्य ठिकानों को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई थी।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान की ओर से टोल नीति और अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों ने वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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