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                <title>Uttar Pradesh - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Uttar Pradesh RSS Feed</description>
                
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                <title>राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़: 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दान गिनने वाले कर्मचारियों ने बढ़े कार्यभार और बदली व्यवस्था पर जताई नाराजगी, दान प्रबंधन और कथित गड़बड़ी मामले में CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-twist-in-ram-temple-donation-dispute-mass-resignation-of/article-58425"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा श्रद्धालुओं की आस्था या धार्मिक आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती और उससे जुड़े प्रशासनिक विवाद को लेकर हो रही है। दान की गिनती का जिम्मा संभाल रहे 23 कर्मचारियों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि दान चोरी का मामला सामने आने के बाद दान की प्रकृति बदल गई है, जिससे उनका कार्यभार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। इसी बीच इस पूरे मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिससे इस विवाद पर सभी की नजरें टिक गई हैं। मंदिर में आने वाले दान की गिनती का कार्य बैंक कर्मचारियों की टीम करती थी। पहले दान में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, जिससे गिनती का काम अपेक्षाकृत तेजी से पूरा हो जाता था। कर्मचारियों के मुताबिक पहले प्रतिदिन 500 रुपये के नोटों के 70 से 80 बंडल तैयार हो जाते थे। लेकिन दान चोरी की खबरें सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके में बदलाव देखने को मिला है। अब मंदिर में 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है, जबकि 500 रुपये के नोटों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्मचारियों का कहना है कि छोटे मूल्य के नोटों की गिनती में अधिक समय लगता है। पहले जहां दो शिफ्टों में काम होता था और प्रत्येक कर्मचारी लगभग छह घंटे की ड्यूटी करता था, वहीं अब पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार काम करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनके वेतन में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई। बढ़े हुए कार्यभार और लंबी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया और अंततः 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफों के बाद अब केवल 13 कर्मचारी ही दान गिनने का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में मंदिर में प्रतिदिन आने वाले दान की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि जल्द ही नई नियुक्तियां नहीं की गईं या कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दान प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में दान चोरी के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है। इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ 13 जुलाई को सुनवाई करेगी। इस सुनवाई को पूरे देश में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आगे की जांच और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर दिशा तय हो सकती है। दान विवाद पर देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी नेपाल से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। नेपाल के जनकपुर स्थित प्रसिद्ध जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के किसी मंदिर में दान से जुड़ी ऐसी घटना पहले कभी सुनने या देखने को नहीं मिली। उनके अनुसार, जब से उन्हें अयोध्या में दान से जुड़े विवाद की जानकारी मिली है, तब से वे बेहद दुखी और चिंतित हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। राम मंदिर देशभर के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की दान व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। श्रद्धालु यह उम्मीद कर रहे हैं कि दान की राशि का पूरी पारदर्शिता के साथ उपयोग हो और उसकी गिनती एवं प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनी रहे। अब सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देशों के आधार पर इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है या दान प्रबंधन प्रणाली में बदलाव के निर्देश दिए जाते हैं, तो इसका असर भविष्य में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>चित्रकूट पहुंचे सीएम योगी, कामदगिरि परिक्रमा कर बरहा हनुमान मंदिर में की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-yogi-reached-chitrakoot-circumambulated-kamadgiri-and-worshiped-at-barha/article-58273"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/yogi-adityanath-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह धार्मिक नगरी चित्रकूट पहुंचकर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए और कामदगिरि की पवित्र परिक्रमा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह धार्मिक कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा। सुबह से ही चित्रकूट में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा बल तैनात रहे और पूरे कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जाती रही। मुख्यमंत्री के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़क किनारे और मंदिर परिसर में पहले से मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 7:10 बजे चित्रकूट के प्रसिद्ध बरहा हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। मंदिर में पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, शांति और जनकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और वहां मौजूद संतों से भी मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">बरहा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने कामदगिरि की लगभग पांच किलोमीटर लंबी पवित्र परिक्रमा शुरू की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामदगिरि पर्वत को भगवान श्रीराम का स्वरूप माना जाता है और इसकी परिक्रमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान चित्रकूट में लंबा समय बिताया था। इसी कारण देशभर से लाखों श्रद्धालु वर्षभर यहां दर्शन और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने भी पारंपरिक तरीके से पैदल चलते हुए परिक्रमा पूरी की।</p>
<p style="text-align:justify;">परिक्रमा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ साधु-संत, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा कर्मी भी मौजूद रहे। रास्ते में उन्होंने कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। परिक्रमा मार्ग पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री को करीब से देखने का खास उत्साह दिखाई दिया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उन पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पूरे मार्ग में 'जय श्रीराम' और 'जय कामतानाथ' के जयघोष लगातार सुनाई देते रहे, जिससे धार्मिक माहौल और भी भक्तिमय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के इस दौरे की एक और तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। परिक्रमा के दौरान उन्होंने रास्ते में मौजूद बंदरों को चना भी खिलाया। चित्रकूट में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं और श्रद्धालु उन्हें प्रसाद या चना खिलाना शुभ मानते हैं। मुख्यमंत्री ने भी कुछ समय रुककर बंदरों को चना खिलाया। वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में कैद किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किए जाने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के चित्रकूट दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग के हर प्रमुख स्थान पर पुलिस बल तैनात रहा। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए गए थे। प्रशासन का कहना था कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं।चित्रकूट धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी अनेक मान्यताएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं। कामदगिरि परिक्रमा, रामघाट, बरहा हनुमान मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के आगमन का स्वागत किया और इसे चित्रकूट के लिए गौरव का विषय बताया। व्यापारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में चित्रकूट में तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई योजनाओं पर भी काम होगा। कामदगिरि परिक्रमा पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बांदा के लिए रवाना होने का कार्यक्रम निर्धारित था। वहां भी उनके कई सरकारी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। हालांकि चित्रकूट में उनका यह दौरा पूरी तरह धार्मिक गतिविधियों पर केंद्रित रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना एवं परिक्रमा संपन्न की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नसीहत, बोलीं- आत्मनिर्भर बनने के बाद करें शादी, शिक्षा के दौरान जिम्मेदार फैसले लें</title>
                                    <description><![CDATA[AKTU के 24वें दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को जिम्मेदार जीवन, आत्मनिर्भरता और शिक्षा की गुणवत्ता पर दिया संदेश; विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार की भी जरूरत बताई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/governor-anandiben-patels-advice-in-the-convocation-ceremony-was/article-58125"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/anandiben-patel.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">लखनऊ स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 24वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जीवन के बड़े फैसले सोच-समझकर लें और पहले अपने भविष्य को मजबूत बनाने पर ध्यान दें। राज्यपाल ने अपने भाषण में कहा कि पढ़ाई के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिनका असर केवल संबंधित परिवार पर ही नहीं बल्कि समाज और सरकारी व्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसलों में जिम्मेदारी और परिपक्वता का परिचय देना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हैं। उनके अनुसार यदि दो लोग एक-दूसरे को पसंद करते हैं और साथ जीवन बिताना चाहते हैं तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विवाह का निर्णय तब लेना चाहिए जब दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएं। उनका कहना था कि आत्मनिर्भरता से परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाया जा सकता है और जीवन अधिक संतुलित बनता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक निजी अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उनका बेटा उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर गया था तो उन्होंने उससे कहा था कि यदि उसे कोई जीवनसाथी पसंद हो तो वह परिवार को बताए, लेकिन सबसे पहले अपने करियर और भविष्य को मजबूत बनाए। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए युवाओं को करियर और शिक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। कुलाधिपति ने डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल डिग्रियों की व्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से विद्यार्थियों को भविष्य में दस्तावेजों के प्रबंधन में सुविधा मिलेगी। समारोह में शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां भी प्रदान की गईं और विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभिन्न शिक्षण संस्थानों के निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर ऐसी कमियां देखने को मिलीं, जिन्हें समय रहते दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रावासों की स्थिति, कक्षाओं की संरचना और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कुछ छात्रावासों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था और अध्ययन सामग्री रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं दिखाई दी। इसके अलावा पानी की टंकियों की सुरक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों की ओर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की मेस व्यवस्था को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी होनी चाहिए। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, एक्सपायरी डेट और स्वच्छता जैसे पहलुओं पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका मानना था कि स्वस्थ भोजन विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकारी बजट का उपयोग केवल खर्च दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे विद्यार्थियों को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पुस्तकालय, हॉस्टल या अन्य सुविधाएं ऐसी जगह बनाई जाएं जहां उनका उपयोग करना ही कठिन हो, तो इससे संसाधनों का उद्देश्य पूरा नहीं होता। इसलिए योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में व्यावहारिक सोच अपनाना जरूरी है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने देश की रक्षा क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर बन रहा है और पहले जिन सैन्य उपकरणों का आयात किया जाता था, अब देश उनके निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे देश की तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनकी राज्यपाल ने सराहना की। कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रक्रिया भी है। समारोह का मुख्य संदेश यही रहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता, अनुशासन और जिम्मेदार निर्णय किसी भी युवा के सफल भविष्य की मजबूत नींव होते हैं। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने करियर, परिवार और समाज के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं तथा देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:52 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया, बोले- SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद दूंगा हर सवाल का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीरामचरितमानस की चौपाई साझा कर तोड़ी चुप्पी, पत्र जारी कर कहा- मौन इसलिए हूं क्योंकि जांच पूरी होने का इंतजार है; ट्रस्ट और SIT की कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/champat-rais-first-reaction-on-the-ram-temple-offering-controversy/article-58124"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई साझा करते हुए संकेत दिया कि कठिन समय में धैर्य और सत्य की परीक्षा होती है। इसके साथ ही उन्होंने रामभक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी भी आरोप का जवाब नहीं देंगे और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। चंपत राय ने अपने संदेश में लिखा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, लेकिन उन्होंने जांच की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए मौन रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद उससे जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक हो गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा और सच्चाई सभी के सामने होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से लेकर अब तक का उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा संगठन और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया है। इधर, चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अब जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी अब राम मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजनों में हुए खर्च का भी परीक्षण कर रही है। विशेष रूप से 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह और नवंबर 2025 में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित बिल, भुगतान और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां इन खर्चों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं ताकि वित्तीय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी प्रकार की अंतिम टिप्पणी या निष्कर्ष सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस कथित मामले से कोई व्यक्तिगत या चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ चूक हुई होगी, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्रस्ट में नए महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन दास ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी और आवश्यक प्रशासनिक सुधार भी किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड भी मिली है। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी चंपत राय को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। संगठन का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप जांच में सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसी कारण चंपत राय संगठन में अपनी वर्तमान जिम्मेदारी पर बने रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट, CCTV में 70 संदिग्ध घटनाएं कैद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया में गंभीर खामियां; कई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-donation-theft-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 अप्रैल से 5 जून के बीच चढ़ावे की गिनती वाले कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। जांच में सामने आया कि गिनती का काम कर रहे कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कई की गतिविधियां फुटेज में साफ नजर आई हैं। इसी बीच राममंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे भी स्वीकार किए गए, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की नकदी गिनती और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच टीम का कहना है कि चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा को पहले से सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी, जिससे नकदी बाहर ले जाना आसान हो गया। अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान पर नियंत्रण, नकदी का रिकॉर्ड और दैनिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं थीं। ऐसे हालात में सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती गई और चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों और गिनती कक्ष से जुड़ी चाबियों का नियंत्रण था। इतना ही नहीं, उसकी सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया गया, जो बाद में आरोपियों में शामिल पाया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना है। रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में कई बार कर्मचारी एक-दूसरे को इशारों से सतर्क करते भी दिखाई दिए, जिससे जांच टीम को यह गतिविधि संगठित तरीके से होने का संदेह हुआ। जांच अधिकारियों ने इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि लगातार दोहराए गए पैटर्न के रूप में दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। एसआईटी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट में इनके खिलाफ चोरी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक दुर्विनियोग, षड्यंत्र और चोरी की संपत्ति रखने जैसी धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की ओर से मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन दर्ज मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने परिवार और दोस्तों पर बड़ी रकम खर्च करने की बात भी स्वीकार की है। एक भाई की शादी पर लाखों रुपये खर्च करने, दूसरे भाई को नकद राशि देने, कार खरीदने और दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि चोरी की रकम को बैंक खातों और संपत्तियों के जरिए खपाने की कोशिश की गई हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती जांच है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल अभी बाकी है। निगरानी व्यवस्था में लापरवाही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता को लेकर विस्तृत जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत निष्कर्ष और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>2.5 लाख रुपये किलो का मियाजाकी आम बना आकर्षण, यूपी मैंगो फेस्टिवल में उमड़ी भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[जापान की दुर्लभ मियाजाकी किस्म ने खींचा लोगों का ध्यान, कीमत सुनकर सोशल मीडिया पर आई मजेदार प्रतिक्रियाएं; विशेषज्ञ बोले- सही देखभाल से खेती बन सकती है मुनाफे का सौदा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/miyazaki-mango-worth-rs-25-lakh-per-kg-becomes-attraction/article-57940"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/miyazaki-mango.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में आयोजित मैंगो फेस्टिवल इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह है जापान की मशहूर और बेहद दुर्लभ मियाजाकी आम (Miyazaki Mango) की प्रदर्शनी, जिसकी कीमत करीब 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। इस आम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसकी कीमत जानकर हैरान हैं। कई यूजर्स मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं कि "एक आम खरीदने के लिए तो लोन लेना पड़ेगा।" मैंगो फेस्टिवल में पहुंचे लोगों की नजर सबसे पहले इसी खास आम पर ठहर रही है। लाल और बैंगनी रंग की चमक लिए यह आम अपने आकर्षक रूप, दुर्लभता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमत के कारण चर्चा में बना हुआ है। आयोजकों का कहना है कि इस आम को लोगों को नई और दुर्लभ किस्मों से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रदर्शित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत में उगाया जाता है। इसे दुनिया के सबसे महंगे फलों में गिना जाता है। इसकी खेती बेहद नियंत्रित वातावरण में की जाती है, जहां तापमान, धूप, नमी और पोषण का विशेष ध्यान रखा जाता है। फल पूरी तरह पकने के बाद अपने आप पेड़ से गिरता है। गिरने से पहले उसे विशेष जालीदार बैग में सुरक्षित रखा जाता है ताकि फल को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। यही वजह है कि इसकी गुणवत्ता और स्वाद सामान्य आमों से अलग मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम का स्वाद बेहद मीठा होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अधिक होती है और यह विटामिन ए, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट तथा अन्य पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। फल का औसत वजन 350 से 500 ग्राम तक हो सकता है। इसकी चमकदार लाल रंगत और मुलायम गूदा इसे अन्य आमों से अलग पहचान दिलाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंगो फेस्टिवल में प्रदर्शित मियाजाकी आम का वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा जा चुका है। वीडियो में लोग आम को देखकर उसकी तस्वीरें लेते और उसकी कीमत जानने के बाद आश्चर्य व्यक्त करते नजर आ रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने लिखा, "इतने में तो नई बाइक आ जाएगी।" वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, "आम नहीं, यह तो लग्जरी आइटम है।" कई लोगों ने इसे दुनिया का सबसे महंगा आम बताते हुए इसकी तुलना सोने से भी कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम की खेती भारत में भी संभव है, लेकिन इसके लिए विशेष तकनीक, नियंत्रित वातावरण और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल की आवश्यकता होती है। देश के कुछ राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में कुछ किसानों ने प्रयोग के तौर पर इस किस्म की खेती शुरू की है। हालांकि बड़े स्तर पर इसकी खेती अभी सीमित है। यदि किसान सही तकनीक अपनाएं और बाजार तक अच्छी पहुंच बना सकें, तो यह फसल बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम का पौधा बड़े गमले में भी लगाया जा सकता है। हालांकि केवल पौधा लगाने से सफलता नहीं मिलती। नियमित सिंचाई, पर्याप्त धूप, संतुलित खाद, कीट नियंत्रण और समय-समय पर छंटाई जैसी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है। यदि पौधे की सही तरीके से देखभाल की जाए तो कुछ वर्षों बाद फल प्राप्त हो सकते हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता हासिल करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती करना आवश्यक माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 16:27:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पत्नी के इश्क और पैसे के खेल में पान दुकानदार की हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ के पारा इलाके में पान दुकानदार नरेश की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया, पत्नी और पति समेत एक दोस्त पर साजिश रचने का आरोप, तीनों गिरफ्तार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/paan-shopkeeper-murdered-due-to-wifes-love-and-money-game/article-57572"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lucknow-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में सामने आए पान दुकानदार नरेश की हत्या के मामले ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया था। शुरुआत में यह मामला किसी लूट या अज्ञात हमले जैसा लग रहा था, लेकिन पुलिस की गहन जांच में जो सच सामने आया उसने रिश्तों और भरोसे की पूरी कहानी ही बदल दी। जांच के बाद पुलिस ने इस हत्याकांड में मृतक के करीबी दोस्त मोनू, उसकी पत्नी हिना और एक अन्य साथी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यह हत्या किसी अचानक गुस्से का नतीजा नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही आपसी खींचतान, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत संबंधों के उलझे हुए ताने-बाने का परिणाम थी। यह घटना उस समय सामने आई जब नवंबर महीने के अंतिम दिनों में सुबह-सुबह स्थानीय लोगों ने एक सुनसान गली के मोड़ पर एक युवक का शव देखा। शव के गले पर तार से दबाने के निशान स्पष्ट थे और शरीर पर चोटों के संकेत भी मौजूद थे। सबसे अहम बात यह थी कि मृतक के पैरों में जूते-चप्पल नहीं थे, जिससे पुलिस को शक हुआ कि हत्या कहीं और की गई है और बाद में शव को यहां लाकर फेंका गया है। मौके की स्थिति देखकर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और शव की पहचान नरेश के रूप में हुई, जो इलाके में पान की दुकान चलाता था और स्थानीय लोगों के बीच जाना-पहचाना चेहरा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिनाख्त के बाद पुलिस ने नरेश के सामाजिक और निजी संबंधों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि उसका मोनू नाम के व्यक्ति से गहरा दोस्ताना संबंध था और वह अक्सर उसके घर आता-जाता था। इसी दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि नरेश की मोनू की पत्नी हिना से भी नजदीकी बढ़ रही थी। यह जानकारी मिलते ही जांच की दिशा बदल गई और पुलिस ने मोनू को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पूछताछ में मोनू ने स्वीकार किया कि नरेश उसके घर आता था और उसकी उससे दोस्ती थी, लेकिन उसने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया। हालांकि पुलिस को शुरुआती जांच में ही कई विरोधाभास नजर आने लगे। घटनास्थल से मिले सुराग और मोनू के घर के आसपास के हालात मेल खाते दिखाई दे रहे थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले। फुटेज में घटना वाली रात कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं, जिसमें मोनू और एक अन्य व्यक्ति की गतिविधियां शामिल थीं। जब पुलिस ने हिना और मोनू से अलग-अलग पूछताछ की तो दोनों के बयानों में काफी अंतर पाया गया। इसी आधार पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला धीरे-धीरे खुलने लगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार मोनू ने बताया कि नरेश और उसकी पत्नी हिना के बीच पिछले कुछ समय से नजदीकियां बढ़ रही थीं। नरेश आर्थिक रूप से मजबूत था, जबकि मोनू मजदूरी करता था और पैसों की तंगी से जूझ रहा था। इसी असंतुलन के बीच नरेश अक्सर मोनू के घर आने लगा था और धीरे-धीरे उसके और हिना के बीच संबंध गहरे होते चले गए। शुरुआत में मोनू इस स्थिति को नजरअंदाज करता रहा क्योंकि उसे नरेश से आर्थिक मदद मिलती थी और घर का खर्च चल रहा था, लेकिन समय के साथ यह स्थिति उसके लिए असहनीय होती गई। जांच में यह भी सामने आया कि हिना को भी नरेश से आर्थिक मदद मिलने लगी थी और धीरे-धीरे वह उसके करीब होती चली गई। नरेश इस पूरे रिश्ते को एकतरफा अधिकार की तरह देखने लगा था, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण होती गई। पुलिस के अनुसार घटना वाले दिन शराब के दौरान विवाद बढ़ा और उसी दौरान मोनू ने अपने एक साथी को बुला लिया। आरोप है कि नरेश को घर के अंदर बुलाकर जब वह हिना के साथ था, तभी पीछे से तार से उसका गला घोंट दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हत्या के बाद आरोपियों ने शव को कुछ समय तक घर में ही छिपाए रखा। इसके बाद देर रात उसे ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई और शव को सुनसान गली में फेंक दिया गया ताकि यह किसी बाहरी वारदात जैसा लगे। पुलिस ने मौके से मिले तार और अन्य भौतिक साक्ष्यों को जब्त कर लिया है और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की रही, जिनके आधार पर पूरी कड़ी जुड़ती गई। शुरुआत में यह मामला अंधी हत्या जैसा लग रहा था, लेकिन जांच ने इसे एक जटिल रिश्तों के विवाद में बदल दिया। पुलिस का यह भी कहना है कि सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की जांच में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:38:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रिटायर्ड अधिकारी की पड़ोसी महिला की हत्या में गिरफ्तारी, पुलिस ने ऐसे सुलझाई गुत्थी</title>
                                    <description><![CDATA[झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में हाईवे किनारे मिला महिला का शव, पुलिस जांच में पड़ोसी रिटायर्ड अधिकारी और उसके नौकर की कथित भूमिका सामने आई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/retired-officer-arrested-for-murder-of-neighbor-woman-police-solved/article-57571"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jhansi-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक महिला की हत्या का मामला पुलिस की तफ्तीश के बाद सुलझ गया। कानपुर हाईवे की सर्विस रोड किनारे मिले शव की पहचान पूंछ थाना क्षेत्र की रहने वाली मालती (बदला हुआ नाम) के रूप में हुई। शुरुआती जांच में पुलिस को घटनास्थल से मिले कुछ छोटे सुरागों ने हत्या की पूरी गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस का दावा है कि महिला की हत्या उसके पड़ोसी और परिचित रिटायर्ड अधिकारी ने कथित तौर पर विवाद के बाद की, जबकि शव को ठिकाने लगाने में उसके नौकर ने भी साथ दिया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी। पुलिस के अनुसार 21 दिसंबर की सुबह किसी राहगीर ने पूंछ थाना पुलिस को सूचना दी कि कानपुर हाईवे की सर्विस रोड के किनारे एक महिला का शव पड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रथम दृष्टया जांच में पुलिस को आशंका हुई कि महिला की हत्या कहीं और की गई और बाद में शव को यहां लाकर फेंका गया। घटनास्थल से एक तार का टुकड़ा और सरसों के कुछ पत्ते भी बरामद हुए, जिन्हें पुलिस ने साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर लिया। पोस्टमार्टम और पहचान की कार्रवाई के बाद मृतका की पहचान मालती के रूप में हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/retired-officer.jpg" alt="Retired Officer" width="1366" height="712"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">जांच के दौरान पुलिस ने महिला के परिवार, परिचितों और पड़ोसियों से पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में पता चला कि मालती पिछले कई वर्षों से अपने परिवार से अलग रह रही थीं। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि उनका पड़ोस में रहने वाले एक रिटायर्ड अधिकारी रामप्रसाद (बदला हुआ नाम) के घर अक्सर आना-जाना था। दोनों अकेले रहते थे, इसलिए पुलिस ने इस पहलू को भी जांच में शामिल किया। पुलिस टीम जब पूछताछ के लिए रामप्रसाद के घर पहुंची तो वहां कुछ ऐसे संकेत मिले जिन्होंने संदेह और गहरा कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक घर में वैसा ही तार और सरसों के पत्ते दिखाई दिए जैसे घटनास्थल से बरामद हुए थे। इसके बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। पुलिस का दावा है कि फुटेज में देर रात रामप्रसाद अपने नौकर के साथ एक भारी वस्तु कार में रखते और घर से बाहर जाते दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से स्वीकार किया कि घटना वाली रात दोनों के बीच विवाद हुआ था। जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों के बीच लंबे समय से परिचय था और घटना वाले दिन कहासुनी के बाद गुस्से में महिला का गला तार से दबा दिया गया। इसके बाद शव को करीब 15 घंटे तक घर में रखा गया और रात के अंधेरे में नौकर की मदद से कार में रखकर हाईवे किनारे फेंक दिया गया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तार और शव ले जाने में इस्तेमाल कार भी जब्त कर ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/jhansi-news.jpg" alt="Jhansi News" width="1366" height="770"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार इस पूरे मामले में घटनास्थल से मिले छोटे-छोटे भौतिक साक्ष्य और तकनीकी जांच सबसे अहम साबित हुई। यदि घटनास्थल से बरामद तार और सरसों के पत्तों को गंभीरता से नहीं लिया जाता तो जांच लंबी खिंच सकती थी। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर पूरी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ीं। पुलिस का कहना है कि आरोपी और मृतका के बीच संबंधों तथा घटना के पीछे की परिस्थितियों की भी विस्तृत जांच की गई है। हालांकि इन व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोग भी इस बात से हैरान हैं कि वर्षों से एक-दूसरे को जानने वाले लोगों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हत्या तक पहुंच गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया जाएगा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:38:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सियासी हलचल, अयोध्या में कांग्रेस नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर अयोध्या में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पुलिस ने कई नेताओं पर एहतियाती कार्रवाई की, जबकि मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-in-ram-temple-offering-case-police-action-against/article-57413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ayodhya-ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले को लेकर अयोध्या में मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ अयोध्या पहुंचे थे। पार्टी की ओर से मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के बाहर विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई थी। इससे पहले सोमवार देर रात पुलिस ने अजय राय को अयोध्या के एक होटल में रोक दिया। बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रशासन ने इसे एहतियाती कदम बताया। इसी दौरान कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों को भी उनके आवास पर ही रोक दिया गया, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। मंगलवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम जन्मभूमि परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने मंदिर क्षेत्र से पहले टेढ़ी बाजार इलाके में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। इस दौरान कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालात को देखते हुए पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम पहले से किए गए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अजय राय की पत्नी रीना राय ने वाराणसी से एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने अपने पति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि वह जल्द से जल्द उनसे मिलने की उम्मीद कर रही हैं। कांग्रेस की ओर से भी कहा गया कि पार्टी इस मुद्दे पर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखेगी। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी फैसले उसी के अनुसार लिए गए। इस बीच चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के क्रम में राम मंदिर परिसर में लंबे समय से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। वह करीब 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी नेटवर्क की निगरानी से जुड़ी थी। बताया जाता है कि चढ़ावा गिनती वाले कक्ष सहित पूरे मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> विशेष जांच दल (एसआईटी) इस पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। अर्जुन देव की लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। जांच के सिलसिले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से भी पुलिस ने पूछताछ की। जानकारी के अनुसार उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि उन्हें मामले की जानकारी पहली बार कब मिली और उसके बाद क्या कदम उठाए गए। इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत अदालत ने 14 दिन के लिए बढ़ा दी थी। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया। 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दो पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से जांच लगातार जारी है और संबंधित दस्तावेजों व अन्य पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी रखी गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती जारी है। वहीं जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नोएडा की हाईराइज सोसाइटी में AC ब्लास्ट से भीषण आग, दहशत</title>
                                    <description><![CDATA[सेक्टर-119 अरण्य सोसाइटी की 21वीं मंजिल पर आग, तीन फ्लैट चपेट में; फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां मौके पर, सीएम योगी ने दिए निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a4200d5102d8/article-57277"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/noida-fire-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">नोएडा में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया जब सेक्टर-119 स्थित अरण्य सोसाइटी की एक 24 मंजिला इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक 21वें फ्लोर पर लगे एक फ्लैट में AC ब्लास्ट हुआ, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते आसपास के कम से कम तीन फ्लैट इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद पूरी सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। यह घटना सुबह करीब साढ़े 8 बजे की बताई जा रही है। आग लगते ही ऊपरी मंजिलों से धुएं का घना गुबार उठने लगा और कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग के एक हिस्से में धुआं भर गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक आग की लपटें इतनी तेज थीं कि खिड़कियों से बाहर तक दिखाई देने लगीं। कई लोगों ने घबराकर सीढ़ियों के जरिए नीचे उतरने की कोशिश की, जबकि कुछ लोग बालकनी और अन्य सुरक्षित स्थानों पर फंस गए।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img alt="Z"></img></p>
<p>सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। दमकल विभाग की टीम लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऊंची इमारत होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल बिल्डिंग को खाली कराया जा रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है, हालांकि कुछ लोग धुएं की वजह से असहज महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि आग लगने के बाद आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग भी मदद के लिए सामने आए। कुछ लोगों ने पाइप और बाल्टियों के जरिए ऊपर की मंजिलों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की ताकि आग को फैलने से रोका जा सके। लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि शुरुआती प्रयास नाकाफी साबित हुए। घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाएं। साथ ही घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन को हर स्तर पर सतर्क रहने और किसी भी तरह की लापरवाही न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<p>दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नोएडा जैसी हाईराइज सोसाइटियों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और आर्टिकुलेटिंग वाटर टावर जैसी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। ये मशीनें 30 से 42 मीटर तक की ऊंचाई तक प्रभावी रूप से आग बुझाने में सक्षम हैं, जो लगभग 10 फ्लोर तक कवर करती हैं। हालांकि इससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए अभी भी संसाधनों की कमी महसूस की जाती है। नोएडा में 72 और 102 मीटर तक पहुंचने वाली नई हाइड्रोलिक मशीनों की खरीद प्रक्रिया चल रही है, लेकिन वे अभी सेवा में शामिल नहीं हुई हैं। शहर की सबसे ऊंची इमारतों में शामिल सुपरनोवा टावर जैसे प्रोजेक्ट्स में आग से निपटने की क्षमता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यहां मौजूदा हाइड्रोलिक सिस्टम सीमित ऊंचाई तक ही काम कर पाते हैं, जबकि पूरी इमारत इससे कहीं ज्यादा ऊंची है। इसी बीच यह भी सामने आया है कि पिछले कुछ हफ्तों में नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों में आग लगने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 5 जून को सेक्टर-74 की एक सोसाइटी में भी कई फ्लैटों में आग लगने की घटना हुई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने हाईराइज बिल्डिंग्स की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:35:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह 7 बजे पुलिस की आठ टीमों ने एक साथ दी दबिश, कई घरों पर मिले ताले, परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ; संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/big-police-action-in-ram-mandir-offering-theft-case-simultaneous/article-57177"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-theft.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या में राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रविवार सुबह पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए जा चुके आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी कर कार्रवाई को और तेज कर दिया। सुबह करीब 7 बजे पुलिस की अलग-अलग आठ टीमों ने एक ही समय पर सभी आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान कई घरों पर ताले लगे मिले, जबकि कुछ स्थानों पर पुलिस ने परिजनों और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर जरूरी जानकारी जुटाई। अधिकारियों के अनुसार मामले से जुड़े आर्थिक पहलुओं और आरोपियों की संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर शुरुआत में ताला लगा मिला। कुछ देर बाद उनकी मां मौके पर पहुंचीं और घर का ताला खोला। इसके बाद पुलिस ने घर के अंदर तलाशी ली और जरूरी दस्तावेजों की जांच की। इसी तरह टिन्नू के भतीजे और सह-आरोपी मनीष यादव के घर पर भी ताला लगा मिला। पुलिस टीम वहां भी कुछ समय तक मौजूद रही और आसपास के लोगों से पूछताछ की। तीसरे आरोपी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के घर पर भी कोई मौजूद नहीं था और बाहर ताला लगा मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर पर भी लंबी कार्रवाई की। यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने घर के अंदर मौजूद दस्तावेजों की जांच की और खरीदी गई संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं चोरी की रकम का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने या अन्य निवेश में तो नहीं किया गया। छापेमारी अभियान में पुलिस के साथ राजस्व विभाग के अधिकारी, विशेष रूप से लेखपालों को भी शामिल किया गया। इनकी मदद से आरोपियों के नाम पर दर्ज जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है। यदि जांच में किसी प्रकार की अवैध संपत्ति या संदिग्ध निवेश सामने आता है तो संबंधित कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। पुलिस परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज कर रही है ताकि मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला 7 जून को सामने आया था, जब राममंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी की जानकारी सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने विभिन्न दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। इसके बाद जांच में मिले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। 25 जून को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित आठ लोगों को नामजद किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन 26 जून को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने सभी आरोपियों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इसके बाद से लगातार मामले की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच मंदिर ट्रस्ट में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला। शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि की। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस्तीफों के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन यह घटनाक्रम मामले की जांच के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। अधिकारियों के अनुसार जांच निष्पक्ष और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़ाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 12:42:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले पर मुकेश खन्ना का गुस्सा, बोले- भगवान को भी लूट रहे हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता ने चढ़ावा घोटाले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नकद और गहनों का चढ़ावा बंद करने की अपील की, मामले में अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/mukesh-khannas-anger-on-ram-temple-offering-issue-says/article-57142"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mukesh-khanna.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा अनियमितता मामले को लेकर वरिष्ठ अभिनेता मुकेश खन्ना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए मंदिरों में चढ़ावे की व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर चढ़ाए गए धन में गड़बड़ी करते हैं, वे साधारण चोर या बेईमान नहीं, बल्कि उनसे भी बड़े अपराधी हैं। अभिनेता ने श्रद्धालुओं से अपील की कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी नहीं हो जाती, तब तक मंदिरों में नकद राशि और गहनों का चढ़ावा देने से बचना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मुकेश खन्ना ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली नकद राशि हमेशा भगवान तक नहीं पहुंचती और बीच में ही उसका दुरुपयोग हो जाता है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि समाज में पहले भी चोर, डाकू और बेईमान लोगों की चर्चा होती रही है, लेकिन मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी करने वाले लोग उनसे भी आगे हैं क्योंकि वे केवल भक्तों का ही नहीं बल्कि भगवान के नाम पर दिए गए विश्वास का भी नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि यदि चढ़ावा ही नहीं चढ़ेगा तो ऐसे घोटालों की संभावना भी खत्म हो जाएगी। अभिनेता ने विशेष रूप से लोगों से अपील की कि मंदिरों में नकद धनराशि और कीमती गहने चढ़ाने के बजाय अन्य माध्यमों से धार्मिक कार्यों में सहयोग करें। उनका कहना था कि भगवान आस्था से प्रसन्न होते हैं, धन से नहीं। उन्होंने अपने संदेश में एक कहावत का उल्लेख करते हुए लिखा कि यदि चढ़ावा ही नहीं होगा तो घोटाले की गुंजाइश भी समाप्त हो जाएगी। यह बयान सामने आने के बाद उनके समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच इस विषय पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला 7 जून को सामने आया था, जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। शुरुआती जांच में दान, चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़े कुछ मामलों में अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई। इसके आधार पर आगे की जांच शुरू की गई और संबंधित दस्तावेजों व रिकॉर्ड की भी जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। इसी घटनाक्रम के बीच मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ बड़े प्रशासनिक बदलाव भी देखने को मिले। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। मंदिर निर्माण से जुड़े प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्थाओं से अलग कर दिया गया है। हालांकि इन बदलावों के पीछे आधिकारिक तौर पर क्या कारण रहे, इस पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।मामले के सामने आने के बाद देशभर में मंदिरों के दान प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी एक मामले के आधार पर सभी धार्मिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।चूंकि मामला जांच के दायरे में है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और जांच एजेंसियां अपने स्तर पर साक्ष्य जुटाने में लगी हैं। यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों की संख्या या धाराओं में बदलाव भी संभव है। वहीं जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उन्हें कानून के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। मुकेश खन्ना के बयान ने इस पूरे मामले को एक नई चर्चा दे दी है। एक ओर लोग उनके बयान को आस्था और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे व्यक्तिगत राय मान रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 16:08:29 +0530</pubDate>
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