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                <title>religious tourism - दैनिक जागरण</title>
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                <description>religious tourism RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>काल भैरव मंदिर में VIP दर्शन से 45 दिनों में ₹3.09 करोड़ की आय, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ बनी बड़ी वजह</title>
                                    <description><![CDATA[₹500 की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर प्रबंधन को मिली रिकॉर्ड आय, महाकाल मंदिर के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव धाम पहुंच रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-early-darshan-vip-ticket-system-of-%E2%82%B9-500-started/article-57942"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kal-bhairav-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में शुरू की गई ₹500 की शीघ्र दर्शन (VIP दर्शन) व्यवस्था मंदिर प्रबंधन के लिए आय का बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। महज 45 दिनों के भीतर इस व्यवस्था से 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय दर्ज की गई है। 20 मई से 3 जुलाई के बीच हुई इस कमाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और दर्शन की सुगम व्यवस्था के लिए शुरू किया गया यह प्रयोग सफल साबित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर के बाद उज्जैन में सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर पहुंचते हैं। विशेष रूप से शनिवार, रविवार, अवकाश और धार्मिक पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसी बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन कराने के उद्देश्य से ₹500 की शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था लागू की गई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>45 दिनों में तीन करोड़ से अधिक की आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 20 मई से 3 जुलाई तक VIP दर्शन टिकटों की बिक्री से कुल 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय हुई। यह आय केवल उन दिनों की है, जब टिकटों का नियमित वितरण हुआ। जिन दिनों अत्यधिक भीड़ के कारण टिकट वितरण रोक दिया गया था, उनकी आय इस आंकड़े में शामिल नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य सामान्य दर्शन व्यवस्था को प्रभावित किए बिना भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span>महाकाल के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर में</span></h3>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधक संध्या मार्कंडेय के अनुसार उज्जैन आने वाले अधिकांश श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद काल भैरव मंदिर अवश्य पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते, जब तक श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण वर्षभर यहां श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या बनी रहती है। विशेष अवसरों और छुट्टियों के दौरान मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिलती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अलग प्रवेश मार्ग से कराए जाते हैं शीघ्र दर्शन</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">VIP दर्शन व्यवस्था के तहत टिकट लेने वाले श्रद्धालुओं को अलग प्रवेश मार्ग से मंदिर में प्रवेश कराया जाता है। इससे उन्हें लंबी कतार में खड़े रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती और कम समय में दर्शन हो जाते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग संचालित की जाती हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>प्रतिदिन लाखों रुपये की होती है आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार सामान्य दिनों में शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक की आय होती है। वहीं यदि किसी धार्मिक पर्व, शनिवार, रविवार या अवकाश के कारण श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है तो यह आय बढ़कर 10 से 11 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>भीड़ बढ़ने पर रोकना पड़ता है टिकट वितरण</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">काल भैरव मंदिर का परिसर सीमित क्षमता वाला है। ऐसे में यदि अचानक श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाती है तो सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए VIP टिकटों का वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि कई बार आधे घंटे या उससे अधिक समय तक टिकट बिक्री बंद रखनी पड़ती है ताकि परिसर में धक्का-मुक्की जैसी स्थिति न बने और सभी श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अवकाश के दिनों में रहती है सबसे ज्यादा भीड़</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">शनिवार, रविवार, मुहर्रम सहित अन्य सार्वजनिक अवकाशों के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में सामान्य दर्शन के साथ-साथ शीघ्र दर्शन टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। हालांकि, अत्यधिक भीड़ होने पर प्रशासन को VIP टिकट जारी करना बंद करना पड़ता है ताकि मंदिर परिसर की क्षमता से अधिक लोगों का प्रवेश न हो। पहले छुट्टियों के दौरान भी टिकट जारी किए जाते थे, लेकिन बाद में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में बदलाव किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>धार्मिक पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव काल भैरव, हरसिद्धि, मंगलनाथ, चिंतामन गणेश और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है। बेहतर व्यवस्थाओं और सुविधाओं के कारण श्रद्धालुओं का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>व्यवस्था और सुविधाओं पर रहेगा जोर</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही VIP दर्शन व्यवस्था का संचालन भी पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगा। 45 दिनों में तीन करोड़ रुपये से अधिक की आय यह दर्शाती है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओंकारेश्वर मंदिर में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या बढ़ी, अब रोज 6 हजार श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[27 जून से नई व्यवस्था लागू, 4 हजार की जगह प्रतिदिन 6 हजार ऑनलाइन टिकट होंगे जारी; सामान्य कतारों का दबाव घटने और मंदिर की आय बढ़ने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-number-of-online-early-darshan-tickets-increased-in-omkareshwar/article-57118"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/omkareshwar-temple-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने ऑनलाइन शीघ्र दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रतिदिन जारी होने वाले ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या 4,000 से बढ़ाकर 6,000 कर दी गई है। नई व्यवस्था 27 जून से प्रभावी हो गई है। प्रत्येक ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकट का शुल्क पहले की तरह 300 रुपये ही रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से अधिक श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन का अवसर मिलेगा और मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। ओंकारेश्वर मंदिर देश के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और यहां पूरे वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि, अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की सीमित संख्या के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु टिकट बुक नहीं कर पाते थे। कई लोगों को सामान्य कतार में लंबा इंतजार करना पड़ता था। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए टिकटों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और ऑनलाइन टिकटों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पहले प्रतिदिन 4,000 ऑनलाइन टिकट उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन अब 2,000 अतिरिक्त टिकट जारी किए जाएंगे। इससे रोजाना कुल 6,000 श्रद्धालु ऑनलाइन शीघ्र दर्शन सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु रूप से संचालित होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य दर्शन की कतारों पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। अभी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऑनलाइन टिकट नहीं मिलने के कारण सामान्य लाइन में शामिल हो जाते थे, जिससे कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब अधिक लोगों को ऑनलाइन टिकट मिलने से सामान्य कतारों में भी भीड़ कम होगी और बिना शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं को भी पहले की तुलना में कम समय में दर्शन करने का अवसर मिल सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले से मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अब तक 4,000 ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 12 लाख रुपये की आय होती थी। टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 होने के बाद यह आय बढ़कर लगभग 18 लाख रुपये प्रतिदिन पहुंच जाएगी। यानी केवल ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से ही मंदिर को प्रतिदिन लगभग 6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। यदि पूरे वर्ष इसी व्यवस्था के अनुसार टिकटों की बुकिंग होती है तो सालाना आय में करीब 21 करोड़ रुपये तक की वृद्धि संभव मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन का यह भी अनुमान है कि ऑनलाइन व्यवस्था बेहतर होने से अन्य श्रेणियों के टिकटों की बुकिंग में भी वृद्धि होगी। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 1,000 अतिरिक्त टिकट अन्य श्रेणियों में भी बुक हो सकते हैं, जिससे लगभग 3 लाख रुपये प्रतिदिन की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, स्वच्छता, पेयजल, प्रतीक्षालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन टिकटों की संख्या बढ़ने से दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले से यात्रा की बेहतर योजना बनाने में आसानी होगी। कई बार टिकट उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को सामान्य कतार में घंटों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब अधिक टिकट उपलब्ध होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। ओंकारेश्वर के पंडित नीलेश पुरोहित ने भी जिला प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला श्रद्धालुओं के हित में है और इससे दर्शन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को समय पर दर्शन का लाभ मिलेगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए समय-समय पर ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना आवश्यक है। मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में ओंकारेश्वर का विशेष महत्व है। यहां हर दिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके चलते मंदिर प्रशासन भी डिजिटल सुविधाओं और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार कर रहा है। ऑनलाइन टिकट व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देना और भीड़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक करें और तय समय के अनुसार मंदिर पहुंचें। इससे अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा और सभी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन का लाभ मिल सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:29:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्तदान के बदले VIP दर्शन योजना हिट, ओंकारेश्वर में बढ़ा उत्साह</title>
                                    <description><![CDATA[ओंकारेश्वर मंदिर की अनोखी पहल से ब्लड बैंकों में बढ़ा भंडार, रक्तदान करने वालों को परिवार समेत मिल रहा VIP दर्शन का लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vip-darshan-scheme-in-exchange-for-blood-donation-increases-enthusiasm/article-55993"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/omkareshwar-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शुरू की गई रक्तदान के बदले VIP दर्शन योजना को जबरदस्त सफलता मिल रही है। धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा को जोड़ने वाली इस पहल ने न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित किया है, बल्कि जिले और आसपास के क्षेत्रों में रक्त की कमी की समस्या को भी काफी हद तक दूर कर दिया है। फरवरी 2026 में शुरू हुई इस योजना के बाद से रक्तदान करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब स्थिति यह है कि खंडवा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में जरूरत से ज्यादा रक्त उपलब्ध है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के कारण जिले में रक्त संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हर सप्ताह औसतन 150 यूनिट रक्त एकत्र किया जा रहा है। लगातार बढ़ते संग्रह के चलते खंडवा ब्लड बैंक अब पड़ोसी जिलों की भी मदद कर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बुरहानपुर, धार और बैतूल जिलों को 150-150 यूनिट रक्त भेजा गया है, जबकि बड़वानी को 200 यूनिट और हरदा जिले को 80 यूनिट रक्त उपलब्ध कराया गया है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि श्रद्धालुओं को एक छोटे से सामाजिक योगदान के बदले लंबी कतारों से राहत मिल रही है। आम दिनों में ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं रक्तदान करने वाले श्रद्धालु और उनके परिवार को VIP दर्शन की सुविधा दी जाती है, जिससे वे कम समय में मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर सकते हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इस पहल से जुड़ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता की पहल पर शुरू की गई इस योजना के तहत मंदिर परिसर के पास पांच बेड वाला विशेष रक्त संग्रह केंद्र स्थापित किया गया है। यहां 18 से 60 वर्ष तक की आयु के स्वस्थ व्यक्ति, जिनका वजन कम से कम 45 किलोग्राम हो, रक्तदान कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया लगभग 20 मिनट में पूरी हो जाती है। रक्तदान के बाद दाताओं को अल्पाहार, प्रमाण पत्र, प्रसाद और भगवान ओंकारेश्वर की तस्वीर भी भेंट की जाती है। प्रमाण पत्र मिलने के बाद रक्तदाता अपने परिवार के साथ VIP दर्शन का लाभ उठा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, एक स्वस्थ सदस्य द्वारा रक्तदान करने पर परिवार के बुजुर्गों और छोटे बच्चों को भी प्राथमिकता के साथ दर्शन की सुविधा मिलती है। इस व्यवस्था ने धार्मिक यात्रियों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का एक और सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि अब दुर्लभ रक्त समूहों का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने लगा है। एबी नेगेटिव, ओ नेगेटिव, ए नेगेटिव और बी नेगेटिव जैसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप पहले अक्सर कमी में रहते थे, लेकिन अब इनके पर्याप्त यूनिट सुरक्षित रखे जा रहे हैं। इससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में आसानी हो रही है। अधिक मास और धार्मिक आयोजनों के दौरान रक्तदान में विशेष बढ़ोतरी देखने को मिली है। हिंदू धर्म में दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है और इसी भावना के कारण श्रद्धालु बड़ी संख्या में रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं। जून महीने के पहले पखवाड़े में ही रिकॉर्ड स्तर पर रक्त संग्रह हुआ है। 14 जून तक ओंकारेश्वर शिविर से 497 यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जबकि योजना की शुरुआत वाले फरवरी महीने में यह आंकड़ा 168 यूनिट था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मॉडल देश के अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। जहां एक ओर श्रद्धालुओं को दर्शन की सुविधा मिलती है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता बढ़ती है। इससे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों को लाभ होता है। स्थानीय मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद खंडवा जिले में हर महीने रक्त की मांग लगभग 1200 यूनिट तक पहुंच गई थी। पहले आयोजित रक्तदान शिविर इस आवश्यकता का केवल आधा हिस्सा ही पूरा कर पाते थे। लेकिन अब ओंकारेश्वर से जुड़ी इस योजना ने रक्त संग्रह की स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। बढ़ते भंडार को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में एक अलग और आधुनिक ब्लड बैंक स्थापित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>721 साल बाद भोजशाला में लगाया गया छप्पन भोग, CM मोहन यादव ने मां वाग्देवी की पूजा की</title>
                                    <description><![CDATA[धार भोजशाला में 721 साल बाद मां वाग्देवी को छप्पन भोग लगाया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूजा कर प्रतिमा वापस लाने की बात कही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/after-721-years-chhappan-bhog-was-offered-in-bhojshala-cm/article-54178"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-dhar-cm-mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला में एक अद्भुत माहौल देखने को मिला। हाईकोर्ट के फैसले के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहली बार सकल हिंदू समाज ने मां वाग्देवी को छप्पन भोग अर्पित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव भी भोजशाला पहुंचे और विधि विधान से पूजा की। कहा जा रहा है कि करीब 721 साल बाद किसी मुख्यमंत्री ने यहां आकर मां वाग्देवी की पूजा की है। पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने सरस्वती वंदना की और मंदिर के पुजारियों से आशीर्वाद लिया। भोजशाला मंदिर के पुजारियों ने उन्हें मां वाग्देवी का प्रतीक चिह्न भी दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मां वाग्देवी की मुख्य प्रतिमा वापस लाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और केंद्र सरकार के सहयोग से उसे भारत लाने की कोशिश की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भोजशाला के फैसले से पूरे देश में खुशी का माहौल है और अब धार को एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के दिनों में भोजशाला में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद यहां नियमित पूजा शुरू हो चुकी है। पहले केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति मिलती थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब रोजाना सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा हो रही है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था खत्म होने के बाद परिसर में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। सोमवार को छप्पन भोग कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था और धार्मिक अनुष्ठान देर तक चलते रहे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिंदू संगठनों ने भोजशाला को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग भी की है। कई संगठनों ने यहां संस्कृत विश्वविद्यालय</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरस्वती लोक और धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर बनाने की मांग रखी है। कुछ संगठनों का मानना है कि भोजशाला को अयोध्या मॉडल की तरह भव्य बनाया जाना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि देशभर से श्रद्धालु यहां आ सकें। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद इन मांगों पर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोजशाला विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में वर्ष 2003 की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति थी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 17:08:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमपी को नंबर-1 बनाने की तैयारी, सीएम मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में अफसरों को दिया बड़ा टास्क</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में नर्मदा मिशन, जल संरक्षण, किसानों, पर्यटन और सरकारी कार्यों को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/preparation-to-make-mp-number-1-cm-mohan-yadav-gave-a/article-53523"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cm-mohan-yadav-review-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश को देश के शीर्ष राज्यों में लाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में एक बड़ी समीक्षा बैठक की। इस बैठक में विभिन्न विभागों की गतिविधियों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">योजनाओं की प्रगति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ज़मीनी चुनौतियों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं का प्रभाव लोगों तक पहुंचना चाहिए और हर विभाग को अपनी ज़िम्मेदारी गंभीरता से लेनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में प्रशासनिक कार्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक पर्यटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दिशा-निर्देश जारी किए गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेशवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि जिन जिलों या क्षेत्रों में प्रगति धीमी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां विशेष ध्यान दिया जाए। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नर्मदा समग्र मिशन के लिए अलग नोडल विभाग और स्पेशल सेल बनाने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों को नर्मदा अभियान से जोड़ा जाए। साथ ही अमरकंटक और अन्य प्रमुख नदी उद्गम स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए उद्गम स्थलों के आसपास अनियंत्रित निर्माण कम किए जाएं और दूर सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान चलाकर पूरी की जाए और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। गर्मी को देखते हुए पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर पानी की उपलब्धता पर नजर रखी जाए। जल संरक्षण को जनअभियान बनाने की बात भी बैठक में उठी। यह सुझाव दिया गया है कि सरकार गांवों और शहरों में स्थानीय लोगों को जल संरक्षण गतिविधियों में जोड़ने के लिए अलग अभियान चला सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट धाम के विकास को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संयुक्त बैठक करने का उल्लेख किया। मंदाकिनी नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने के लिए योजना बनाई जा रही है। साथ ही ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को श्रीराम वन गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय जैसी परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए। महाकाल महालोक समेत बड़े धार्मिक स्थलों पर होमगार्ड व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">किसानों और युवाओं से जुड़े निर्णय भी बैठक में सामने आए। मुख्यमंत्री ने खंडवा और बुरहानपुर मंडियों में कपास उत्पादक किसानों के लिए मंडी शुल्क को एक रुपए से घटाकर 55 पैसे करने के निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को राहत मिलेगी और पड़ोसी महाराष्ट्र के समान शुल्क होने से व्यापार में आसानी होगी। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में सेक्टर आधारित प्रशिक्षण शुरू करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। राजधानी भोपाल के मंत्रालय भवनों में लागू बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे पूरे प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में लागू करने की बात कही।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:05:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केदारनाथ धाम पहुंचे कैलाश खेर, पूजा-अर्चना कर लिया बाबा केदार का आशीर्वाद</title>
                                    <description><![CDATA[कैलाश खेर केदारनाथ धाम दर्शन के लिए पहुंचे, व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए देश की सुख-समृद्धि की कामना की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/kailash-kher-reached-kedarnath-dham-and-took-blessings-of-baba/article-52410"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/kailash-kher-kedarnath.jpg" alt=""></a><br /><p>आज प्रसिद्ध गायक कलाकार कैलाश खेर केदारनाथ धाम  दर्शनों के लिए पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे विधि -विधान से शिव की पूजा-अर्चना कर बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद लिया। सुबह के समय मंदिर पहुंचकर उन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और देश की सुख-समृद्धि तथा वैश्विक शांति की कामना की। धाम में उनके आगमन पर मंदिर समिति और केदार सभा के सदस्यों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने कुछ समय मंदिर परिसर में बिताया और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस किया।</p>
<p>कैलाश खेर का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब चारधाम यात्रा का नया सत्र शुरू हो चुका है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच रहे हैं। इस वर्ष यात्रा के शुरुआती दिनों में ही रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंच चुके हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति पूरी तरह सतर्क है।</p>
<p>गायक ने मंदिर में पूजा करने के बाद सुरक्षा में तैनात कर्मियों, तीर्थ पुरोहितों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने यात्रा व्यवस्थाओं, सुरक्षा इंतजामों और श्रद्धालुओं के लिए किए गए प्रबंधों की जानकारी ली। कैलाश खेर ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यहां की व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं और श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>आस्था और अनुभव</strong><br />मंदिर परिसर में कुछ देर ध्यान और प्रार्थना करने के बाद कैलाश खेर ने कहा कि केदारनाथ धाम में आकर एक अलग तरह की शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि यहां का आध्यात्मिक वातावरण हर व्यक्ति को भीतर से जोड़ता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देता है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि बाबा केदार की नगरी में पहुंचकर मन को अद्भुत सुकून मिलता है, जो शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। उनके अनुसार, इस तरह के धार्मिक स्थल व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और आत्मिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p><br />बताया जा रहा है कि इस बार केदारनाथ यात्रा को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए गए हैं। कैलाश खेर ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इतनी ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण मौसम में व्यवस्थाएं बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 13:36:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काशी विश्वनाथ में पहुंचे सीएम मुख्यमंत्री मोहन यादव, बोले- एमपी-यूपी मिलकर लिखेंगे विकास की नई कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम का दौरा कर मंदिर प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और तीर्थयात्री सुविधाओं की जानकारी ली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-reached-kashi-vishwanath-chief-minister-mohan-yadav-said/article-49696"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mohan-yadav-kashi-vishwanath.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 मार्च को वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ औद्योगिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निरीक्षण किया और धार्मिक पर्यटन व लघु उद्योगों के विकास को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">काशी आगमन पर हुआ भव्य स्वागत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वाराणसी पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान और खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश यादव सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किया। यह दौरा मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित सम्मेलन का हिस्सा था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">काशी विश्वनाथ धाम का भ्रमण और अध्ययन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया। उन्होंने पूरे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निरीक्षण करते हुए भीड़ प्रबंधन, क्राउड फ्लो डिजाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर और तीर्थयात्री सुविधा प्रणाली का गहन अध्ययन किया। इस दौरान मंदिर प्रशासन की ओर से प्रस्तुत किए गए विभिन्न मॉडल और प्रबंधन तकनीकों को भी देखा गया। साथ ही उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर मंदिर प्रबंधन व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक सहयोग पर जोर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लागू ओडीओपी (One District One Product) मॉडल काफी प्रभावी रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश भी इसी तरह की नीति पर काम कर रहा है, जिसमें चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों सहित पारंपरिक लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों राज्य धार्मिक पर्यटन और सूक्ष्म उद्योगों को जोड़कर आर्थिक विकास की नई राह तैयार कर सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भीड़ प्रबंधन और सिंहस्थ की तैयारी पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में जिस तरह भीड़ प्रबंधन किया जा रहा है, उसी मॉडल का अध्ययन मध्यप्रदेश के उज्जैन सिंहस्थ के लिए किया जा रहा है। उनका उद्देश्य है कि भविष्य में बड़े धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव मिल सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">महाकाल लोक और विकास मॉडल पर चर्चा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकाल लोक परियोजना के बाद उज्जैन क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। इसी तरह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने भी वाराणसी की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच इस तरह की परियोजनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा और इसके लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी काम चल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रोजगार और गरीब कल्याण पर विशेष ध्यान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दोनों राज्यों का साझा लक्ष्य युवाओं को रोजगार देना, गरीबों के जीवन स्तर को सुधारना और स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। इसके लिए लघु उद्योगों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष चर्चा की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बनाया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सांस्कृतिक कार्यक्रम और महानाट्य की योजना</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित शोध और फेलोशिप कार्यक्रम चल रहा है। इसी क्रम में काशी विश्वनाथ धाम में 3 से 5 अप्रैल तक एक भव्य महानाट्य का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लगभग 400 कलाकार भाग लेंगे। यह पहल भारतीय सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">एमपी-यूपी सहयोग से विकास की नई दिशा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सहयोग का दौर है। केन-बेतवा लिंक परियोजना और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों राज्य मिलकर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि साझा प्रयासों से देश के विकास को नई गति मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">समाप्ति</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस पूरे दौरे के दौरान धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और औद्योगिक विकास का समन्वय स्पष्ट रूप से देखने को मिला। मुख्यमंत्री का यह दौरा एमपी और यूपी के बीच भविष्य में मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 16:47:31 +0530</pubDate>
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