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                <title>हरियाणा में 19 साल बाद बेटे का जन्म: 10 बेटियों के बाद सुनीता बनीं 11वीं बार मां</title>
                                    <description><![CDATA[फतेहाबाद के एक छोटे गांव में बेटे के जन्म से खुशी, लेकिन सामाजिक सोच और संघर्ष की कहानी भी सामने आई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-born-after-19-years-in-haryana-sunita-becomes-mother/article-42294"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/desha-(61).jpg" alt=""></a><br /><p>हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भूना क्षेत्र के एक छोटे से गांव में एक परिवार के लिए बुधवार का दिन खास बन गया। यहां रहने वाली सुनीता ने 19 वर्षों में 11वीं बार मां बनते हुए बेटे को जन्म दिया। इससे पहले उनके घर 10 बेटियों का जन्म हो चुका था। बेटे के आने से परिवार में खुशी का माहौल है और गांव में लोग बधाई देने पहुंच रहे हैं।</p>
<p>घटना हाल ही की है। सुनीता को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए गांव से दूर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सामान्य प्रसव के जरिए बच्चे का जन्म हुआ। डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के समय नवजात में हल्की कमी पाई गई थी, लेकिन समय रहते इलाज होने से स्थिति सामान्य हो गई। फिलहाल मां और बेटा दोनों स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं।</p>
<p><strong>कौन हैं सुनीता और उनका परिवार</strong><br />सुनीता और उनके पति संजय की शादी को करीब 19 साल हो चुके हैं। इतने लंबे समय में उनके परिवार में बेटियों की संख्या बढ़ती गई। सबसे बड़ी बेटी अब कॉलेज की तैयारी कर रही है, जबकि अन्य बेटियां स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। सीमित आय के बावजूद दंपती ने बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में कोई समझौता नहीं किया।</p>
<p>संजय पहले सरकारी विभाग में अस्थायी मजदूरी करते थे। बाद में रोजगार छूटने के बाद उन्होंने मनरेगा के तहत काम किया। फिलहाल स्थायी काम न होने के बावजूद परिवार किसी तरह जीवन यापन कर रहा है। संजय का कहना है कि परिस्थितियां कठिन रहीं, लेकिन बच्चों के भविष्य को लेकर उन्होंने कभी हार नहीं मानी।</p>
<p><strong>सामाजिक दबाव और पारिवारिक नजरिया</strong><br />परिवार का कहना है कि बेटे को लेकर समाज की अपेक्षाएं हमेशा बनी रहीं। रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की बातें अक्सर मानसिक दबाव बढ़ाती थीं। इसके बावजूद सुनीता और संजय ने बेटियों को बराबरी का दर्जा दिया। उनका साफ कहना है कि बेटियां भी परिवार की जिम्मेदारी और सम्मान बढ़ाती हैं।</p>
<p>परिवार की एक बेटी को रिश्तेदारी में गोद दिया गया है, जबकि बाकी बेटियों की जिम्मेदारी माता-पिता खुद निभा रहे हैं। संजय कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि संख्या को लेकर समाज की सोच पर चलना।</p>
<p><strong>गांव में प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति</strong><br />बेटे के जन्म की खबर के बाद गांव में चर्चा तेज है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने परिवार को सम्मानित करने की बात कही है। कई ग्रामीण इसे परिवार की निजी खुशी मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे समाज में बेटे को लेकर बनी सोच से जोड़कर देख रहे हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं जहां एक ओर पारिवारिक खुशी का कारण बनती हैं, वहीं दूसरी ओर जनसंख्या नियंत्रण, महिला स्वास्थ्य और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर सोचने का अवसर भी देती हैं।</p>
<p>फिलहाल सुनीता का परिवार बेटे के जन्म से खुश है। मां और नवजात की हालत स्थिर है और आने वाले दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।</p>
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                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 13:57:43 +0530</pubDate>
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