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                <title>Madhya Pradesh News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Madhya Pradesh News RSS Feed</description>
                
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                <title>बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की चांदी और नकदी पर उठे सवाल, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अब आगर मालवा स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की नकदी, चांदी और अभिलेखों को लेकर जांच शुरू, प्रशासन ने गठित की समिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-silver-and-cash-offered-in-baglamukhi-temple/article-58238"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/baglamukhi-temple2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चांदी और नकदी में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने मध्य प्रदेश में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आगर मालवा जिले के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। कलेक्टर ने एक जांच समिति का गठन करते हुए सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जांच केवल चांदी और नकदी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि श्रद्धालुओं की ओर से वर्षों से चढ़ाए गए सोना, चांदी, नकदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी बारीकी से पड़ताल की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने मंदिर प्रबंधन व्यवस्था और चढ़ावे के रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में गड़बड़ी करने वाले लोग किसी भी तरह की रियायत के पात्र नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग राक्षस की मानसिकता वाले हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालु मंदिरों में अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि उस विश्वास के साथ किसी तरह का खिलवाड़ किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कलेक्टर की ओर से जारी आदेश में जांच समिति को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति यह पता लगाएगी कि श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी, सोना और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है। इनकी एंट्री किस प्रकार की जाती रही है, सुरक्षित रखने की व्यवस्था कैसी है और संबंधित बैंक खातों में जमा राशि का पूरा विवरण क्या है। इसके अलावा मंदिर से जुड़े अभिलेखों की भी जांच होगी ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उपलब्ध रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में कहीं कोई अंतर तो नहीं है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन समिति या अन्य संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है तो उसका स्पष्ट उल्लेख रिपोर्ट में किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच दल को तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज, रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी होगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन चाहता है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो ताकि किसी भी तरह की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। सात दिनों में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं। शिकायतों के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और अब औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चढ़ावे का हिसाब-किताब निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रखा गया था या नहीं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण के दोषी नहीं माना जाएगा, लेकिन यदि अनियमितता साबित होती है तो कार्रवाई निश्चित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आगर मालवा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि यह पांडवकालीन मंदिर है और महाभारत काल में पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से यहां मां बगलामुखी की आराधना करते हुए शत्रु विजय यज्ञ किया था। इसी वजह से देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब बगलामुखी मंदिर का मामला भी चर्चा का विषय बन गया है। ऐसे समय में प्रशासन की यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर नई व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी चर्चा तेज हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दशकों पुराना नर्मदा जल विवाद खत्म, चार राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता; अमित शाह बोले- पानी का लाभ पूरे देश को मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान ने सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वित्तीय विवाद पर वन-टाइम सेटलमेंट समझौते पर किए हस्ताक्षर, वर्षों से लंबित भुगतान और दावों का हुआ अंतिम निपटारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4dd35b49837/article-58133"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmada-water-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">नई दिल्ली में मंगलवार को देश के सबसे लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय जल विवादों में से एक नर्मदा जल विवाद का महत्वपूर्ण समाधान सामने आया। सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत, मुआवजा और विभिन्न राज्यों के बीच वित्तीय दावों को लेकर वर्षों से चल रही खींचतान आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ परियोजना से जुड़े सभी लंबित वित्तीय मामलों के अंतिम निपटारे का रास्ता साफ हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्र सरकार और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान को सहकारी संघवाद की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जल किसी एक राज्य की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि पानी चाहे किसी भी राज्य में उपयोग हो, उसका लाभ अंततः भारत के किसानों और नागरिकों को ही मिलता है। उनके अनुसार राज्यों के बीच सहयोग की भावना से ही देश के संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव है और यही विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और वर्षों पुराने विवादों को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद केवल एक विचार नहीं बल्कि व्यवहार में दिखाई देने वाला मॉडल बन चुका है। कई राज्यों में बेहतर समन्वय के कारण जल विवादों सहित अन्य जटिल मामलों का समाधान तेजी से हो रहा है। सरदार सरोवर परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देश्यीय नदी परियोजनाओं में गिनी जाती है। इस परियोजना से गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को सिंचाई, पेयजल तथा बिजली उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिला है। लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिली है जबकि अनेक शहरों और गांवों में पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर हुई है। राजस्थान के कई सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक नर्मदा का पानी पहुंचने के बाद खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि परियोजना के निर्माण के दौरान लागत, पुनर्वास, मुआवजा और हिस्सेदारी को लेकर चारों राज्यों के बीच लंबे समय तक मतभेद बने रहे। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसलों के बाद भी कई वित्तीय दावे लंबित थे, जिन पर लगातार चर्चा चल रही थी। अब वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए इन सभी विवादों को समाप्त करने पर सहमति बनी है। समझौते के बाद हालांकि मध्य प्रदेश को आर्थिक दृष्टि से अपेक्षित लाभ नहीं मिला। राज्य सरकार ने सरदार सरोवर बांध के कारण प्रभावित भूमि और मुआवजे के आधार पर लगभग 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। लेकिन नए समझौते के अनुसार मध्य प्रदेश को उल्टे गुजरात सरकार को लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस पहलू को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में सरदार सरोवर बांध पहली बार अपनी पूर्ण क्षमता तक भरने के बाद मध्य प्रदेश के डूब क्षेत्र का वास्तविक आकलन सामने आया। पहले जहां 178 गांव प्रभावित बताए गए थे, वहीं बाद में यह संख्या बढ़कर 192 गांव हो गई। डूब क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि जलमग्न हुई, जिससे प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण बन गया था। इसी आधार पर मध्य प्रदेश ने संशोधित मुआवजे की मांग रखी थी। गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर अन्य अंतरराज्यीय जल विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हरियाणा-राजस्थान जल विवाद और किशाऊ बांध परियोजना जैसे मामलों में भी सहमति बनी है। उनका कहना था कि राज्यों के बीच विवाद जितनी जल्दी समाप्त होंगे, उतनी ही तेजी से विकास परियोजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:13:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वायरल गर्ल के पति को नहीं मिली अग्रिम जमानत, पॉक्सो कोर्ट ने कहा- सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[मंडलेश्वर की विशेष पॉक्सो अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और पीड़िता की उम्र का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/viral-girls-husband-did-not-get-anticipatory-bail-pocso-court/article-57652"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/viral-girl-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">खरगोन जिले के मंडलेश्वर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने चर्चित वायरल गर्ल मामले में उसके पति को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत का मानना है कि आरोपी के फरार रहने, जांच में सहयोग नहीं करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की वास्तविक उम्र का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। यह मामला उस एफआईआर से जुड़ा है जो पीड़िता के पिता ने 25 मार्च को दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी बेटी को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर केरल ले जाया गया। वहां कुछ समय तक साथ रखने के बाद आरोपी ने कथित रूप से उसे बहला-फुसलाकर विवाह कर लिया। परिवार का दावा है कि शादी के समय उनकी बेटी नाबालिग थी, इसलिए पूरा मामला पॉक्सो एक्ट के दायरे में आता है। बुधवार को मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि युवती अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों ने आपसी सहमति से विवाह किया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि केरल के थंपानूर पुलिस थाने में युवती ने स्वयं को बालिग बताया था और उसने अपने बयान में भी विवाह को अपनी इच्छा से किया गया बताया था। इसी आधार पर आरोपी को अग्रिम जमानत देने की मांग की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अभियोजन पक्ष और पीड़िता की ओर से पेश वकीलों ने अदालत के सामने जन्म प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। उनका कहना था कि विवाह के समय युवती नाबालिग थी और आरोपी की ओर से प्रस्तुत किए गए कुछ दस्तावेज कानूनी रूप से प्रमाणिक नहीं हैं। अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश रवि झारोला ने केस डायरी का अध्ययन किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभी मामले की जांच जारी है और पीड़िता के बयान सहित कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं। आरोपी जांच एजेंसियों के सामने उपस्थित नहीं हुआ है और फरार बताया जा रहा है। ऐसे में यदि उसे अग्रिम जमानत दी जाती है तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की वास्तविक उम्र को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद है। इस विषय पर अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान प्रस्तुत होने वाले दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाएगा। फिलहाल इस स्तर पर उम्र को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में इससे पहले केरल हाईकोर्ट भी सुनवाई कर चुका है। तीन जून को केरल हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर युवती को बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल प्रदान की थी। उस दौरान अदालत के सामने जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज पेश किए गए थे। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से यह दावा किया गया था कि जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है और युवती वास्तव में नाबालिग है। हाईकोर्ट ने उस समय उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर राहत दी थी, लेकिन उम्र संबंधी विवाद का अंतिम फैसला नहीं सुनाया था। मामले ने उस समय और अधिक तूल पकड़ लिया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस विवाह पर आपत्ति जताई। आयोग ने दावा किया कि शादी के समय युवती की उम्र 16 वर्ष थी और विवाह के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद खरगोन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी मामले से जुड़ा एक अन्य पहलू फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी है। युवती ने आरोप लगाया था कि जब वह नाबालिग थी तब फिल्म की शूटिंग के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। इन आरोपों के आधार पर केरल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि फिल्म निर्देशक ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ रची गई साजिश बताया है। पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद युवती की उम्र को लेकर है। जांच के दौरान अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र सामने आए, जिनमें जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज है। प्रशासन की ओर से कुछ दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। यही कारण है कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद का समाधान केवल ट्रायल के दौरान साक्ष्यों की जांच के बाद ही संभव होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:40:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उज्जैन रामघाट शिप्रा आरती में महिलाओं-पुजारियों में मारपीट</title>
                                    <description><![CDATA[दीपक बेचने को लेकर विवाद बढ़ा, पीतल की आरती से हमला; वीडियो वायरल के बाद पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a44a5ea468b6/article-57491"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-shipra-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन के प्रसिद्ध रामघाट पर रोजाना होने वाली शिप्रा आरती रविवार शाम उस वक्त अचानक विवाद और हिंसा में बदल गई जब दीपक और पूजन सामग्री बेचने वाली महिलाओं और पुजारियों के बीच कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान हालात कुछ ही मिनटों में बेकाबू हो गए और दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरती खत्म होने के बाद भी घाट पर भीड़ मौजूद थी और उसी दौरान छोटी सी बात ने बड़ा रूप ले लिया। शिप्रा नदी के तट पर हुआ यह विवाद देखते ही देखते पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो गया, जिसमें मारपीट और धक्का-मुक्की साफ नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण रहा और श्रद्धालुओं में भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पूजन सामग्री बेचने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। इसी दौरान बात इतनी बढ़ गई कि पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि पुजारियों ने आरती में इस्तेमाल होने वाले पीतल के दीपक भी महिलाओं की ओर फेंके, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। दूसरी तरफ महिलाओं ने भी विरोध में जवाब दिया और देखते ही देखते पूरा घाट एक तरह से झगड़े का मैदान बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ अचानक हुआ और किसी को भी अंदाजा नहीं था कि धार्मिक आरती स्थल पर इस तरह की स्थिति पैदा हो जाएगी। कई श्रद्धालु बीच-बचाव करने की कोशिश करते रहे लेकिन तब तक मामला काफी आगे बढ़ चुका था। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में वायरल हो गया और पुलिस तक भी पहुंच गया।</p>
<p style="text-align:justify;">महाकाल क्षेत्र से जुड़ी इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन भी तुरंत सक्रिय हुआ। मामला <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mahakal Police Station</span></span> पहुंचा जहां दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। महिलाओं की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें दीपक बेचने से रोका गया और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। एक महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पीतल की आरती उनके सिर पर मारी गई जिससे उन्हें चोट आई। वहीं दूसरी तरफ पुजारियों का कहना है कि महिलाओं ने पहले गाली-गलौज शुरू की और फिर हमला किया। उनका आरोप है कि धक्का-मुक्की के दौरान आरती का जलता हुआ दीपक उनके ऊपर गिर गया जिससे उन्हें भी चोटें आईं। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा का आरोप लगा रहे हैं और अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक घटना में तीन से चार लोगों को चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद गवाहों के बयान के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस घटना के बाद घाट पर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिप्रा आरती जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में नियमित निगरानी और स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगस्त में खुलेगा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का अहम हिस्सा, एमपी से मुंबई तक सफर होगा और तेज</title>
                                    <description><![CDATA[वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर पूरा होने की तैयारी, मध्य प्रदेश के उद्योग, किसानों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/an-important-part-of-delhi-mumbai-expressway-will-open-in-august/article-57318"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/delhi-mumbai-expressway.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा अहम हिस्सा अब जल्द ही आम लोगों के लिए खुल सकता है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो 31 अगस्त तक वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है। इस हिस्से के शुरू होने के बाद मध्य प्रदेश से मुंबई तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का रास्ता पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इससे न सिर्फ यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और कृषि क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि वडोदरा से मुंबई तक का महत्वपूर्ण कॉरिडोर जल्द पूरा होने वाला है। अभी तक इसी हिस्से का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा था। एक्सप्रेसवे के अधिकांश हिस्से तैयार होने के बावजूद मुंबई तक निर्बाध हाई-स्पीड यात्रा संभव नहीं थी। अब इस कमी के दूर होने के बाद पूरे कॉरिडोर की उपयोगिता काफी बढ़ जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। यह करीब 1,350 से 1,400 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर 12 लेन तक की जा सकती है। मध्य प्रदेश के लिए यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक्सप्रेसवे राज्य के रतलाम, मंदसौर और झाबुआ जिलों से होकर गुजरता है। अभी तक मुंबई की दिशा में अंतिम कनेक्टिविटी पूरी नहीं होने से माल परिवहन और लंबी दूरी की यात्रा में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही थी। वडोदरा-मुंबई सेक्शन चालू होने के बाद यह स्थिति बदल जाएगी और राज्य को सीधा फायदा मिलने लगेगा। सबसे बड़ा लाभ व्यापार और उद्योग जगत को मिलने की संभावना है। मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर इंदौर, पीथमपुर और देवास से तैयार होने वाला औद्योगिक सामान पहले की तुलना में कम समय में मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक पहुंच सकेगा। इससे निर्यात करने वाली कंपनियों की परिवहन लागत घटेगी और समय की भी बचत होगी। तेज और बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र के लिए भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मालवा क्षेत्र से फल, सब्जियां, अनाज और अन्य कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। मुंबई जैसे बड़े बाजार तक कम समय में कृषि उत्पाद पहुंचने से उनकी गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने का सीधा असर किसानों की आय पर भी पड़ सकता है। पर्यटन और आम यात्रियों के लिए भी यह परियोजना राहत लेकर आएगी। दिल्ली से मुंबई और मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र की ओर जाने वाले लोगों का सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आरामदायक होगा। एक्सप्रेसवे पर नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था होने के कारण ट्रैफिक बाधाएं कम रहेंगी और यात्रा का समय काफी घट जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। इस पर वाहनों की निर्धारित गति 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी गई है। मार्ग पर आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, सर्विस रोड, इमरजेंसी सहायता, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली और पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है। एक्सप्रेसवे के किनारे भविष्य में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की भी संभावना जताई जा रही है। करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजना देश के सबसे बड़े सड़क बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों में शामिल है। इसका उद्देश्य केवल यात्रा को आसान बनाना नहीं बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे अपनी पूरी क्षमता के साथ उपयोग में आ सकेगा। मध्य प्रदेश के उद्योग, व्यापार, परिवहन और कृषि क्षेत्र को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यदि निर्धारित समय के अनुसार अगस्त के अंत तक यह हिस्सा चालू हो जाता है, तो आने वाले महीनों में लाखों यात्रियों और हजारों व्यवसायों के लिए यात्रा और माल परिवहन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कलियासोत डैम में दर्दनाक हादसा, 17 वर्षीय किशोर की डूबने से मौत</title>
                                    <description><![CDATA[दोस्तों के साथ फोटो खिंचवाने गया था नाबालिग, प्रतिबंधित क्षेत्र में फिसला पैर, दो घंटे बाद मिला शव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/tragic-accident-in-kaliyasot-dam-17-year-old-teenager-died/article-57282"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-kaliyasot-dam-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राजधानी भोपाल के चूनाभट्टी थाना क्षेत्र स्थित कलियासोत डैम में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें 17 वर्षीय किशोर की डूबने से मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब किशोर अपने तीन दोस्तों के साथ घूमने और फोटो खिंचवाने के लिए डैम पहुंचा था। बताया जा रहा है कि सभी दोस्त प्रतिबंधित क्षेत्र में पानी के अंदर उतरकर फोटो ले रहे थे, तभी अचानक यह हादसा हो गया और पूरा माहौल मातम में बदल गया। मृतक की पहचान जाटखेड़ी (मिसरोद) निवासी अंगद दांडे (17) पुत्र संतोष दांडे के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, अंगद रविवार को अपने दोस्तों के साथ कलियासोत डैम घूमने गया था। सभी लोग पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर ढलान वाले हिस्से में पानी में उतरकर तस्वीरें ले रहे थे। शुरुआती हिस्से में पानी घुटनों तक था, लेकिन कुछ ही कदम आगे बढ़ने पर गहराई अचानक बढ़ गई। इसी दौरान अंगद का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। बताया गया कि उसे और उसके साथ मौजूद किसी भी दोस्त को तैरना नहीं आता था, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई। घटना के बाद वहां मौजूद दोस्तों ने शोर मचाया, लेकिन आसपास तत्काल कोई मदद नहीं मिल सकी। घबराए हुए दोस्तों ने दौड़कर पास स्थित पुलिस चौकी को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत गोताखोरों की टीम को मौके पर बुलाया। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने किशोर का शव डैम से बाहर निकाला और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और माहौल गमगीन हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वह क्षेत्र पहले से ही प्रतिबंधित घोषित है। वहां मगरमच्छों की मौजूदगी और गहरे पानी को लेकर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। इसके साथ ही सुरक्षा के लिए फेंसिंग और स्टॉपर भी लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग नियमों की अनदेखी कर अंदर चले जाते हैं। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया और फोटो शूट के चक्कर में युवा अक्सर जोखिम भरे स्थानों पर पहुंच जाते हैं, जिससे इस तरह के हादसे बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कलियासोत डैम में पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी लोग चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेते। पुलिस ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करें और खासकर बच्चों को ऐसे स्थानों पर अकेले न जाने दें। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद जब लोग खुद नियम तोड़ते हैं, तो हादसों को रोकना मुश्किल हो जाता है। इसी बीच शहर में एक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां कजलीखेड़ा थाना क्षेत्र के धोली खदान के पास पानी से भरे गड्ढे में डूबने से तीन वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी, तभी वह अनजाने में तीन से चार फीट गहरे पानी के गड्ढे में गिर गई। काफी देर तक जब वह दिखाई नहीं दी तो परिजनों ने तलाश शुरू की और उसे बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले पानी के स्रोतों और निर्माण स्थलों के आसपास सुरक्षा घेराबंदी न होने से छोटे बच्चे और युवा आसानी से हादसों का शिकार हो जाते हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता बेहद जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:35:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP Monsoon Update: 45 जिलों में बारिश का अलर्ट, अगले 48 घंटे में भोपाल-उज्जैन पहुंचेगा मानसून</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार तेज होने के संकेत, कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी; भोपाल-उज्जैन संभाग को जल्द राहत मिलने की संभावना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mp-monsoon-update-rain-alert-in-45-districts-monsoon-will/article-57039"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-monsoon-update.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">भोपाल समेत मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज बदलने वाला है।अगले दो दिन राज्य के लिए अहम माने जा रहे हैं क्योंकि मानसून की सक्रियता बढ़ने के संकेत मिले हैं।मध्य प्रदेश में दक्षिण</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">पश्चिम मानसून की प्रगति के साथ मौसम विभाग ने </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">45</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi"> जिलों के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। अगले </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">48</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi"> घंटे के भीतर भोपाल और उज्जैन संभाग में मानसून के पहुंचने की संभावना जताई गई है। मौसम प्रणाली के सक्रिय होने के कारण कई हिस्सों में हल्की</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">फुलकी<span>  </span>बारिश और कुछ क्षेत्रों में तेज वर्षा दर्ज हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य में अब तक मानसून सामान्य गति से थोड़ा पीछे चल रहा है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">लेकिन आने वाले दिनों में इसमें तेजी आने के संकेत हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">IMD </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">के अनुसार पश्चिमी और दक्षिणी मध्य प्रदेश के कई जिलों में पहले से ही वर्षा गतिविधियां बढ़ी हैं। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और उमस से लोगों राहत मिलने लगी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मौजूदा सिस्टम के प्रभाव से मानसून आगे बढ़कर मध्य क्षेत्र को कवर करेगा। </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">राज्य में एक जून से अब तक औसत वर्षा सामान्य रूप से कम दर्ज की गई है। कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर से नीचे बना हुआ है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">हालांकि पिछले </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">24</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi"> घंटों की गतिविधियों ने स्थिति में कुछ सुधार नज़र है।</span></p>
<h5 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">ज्यादा असर कहां </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">?</span></strong></h5>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">IMD</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi"> के अनुमान के अनुसार इंदौर</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">नर्मदापुरम</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">मालवा और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां ज्यादा सक्रिय रह सकती हैं। वहीं भोपाल और उज्जैन संभाग में अगले </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">48</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi"> घंटे के भीतर मानसून की औपचारिक आगमन होने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर ग्वालियर</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">चंबल और रीवा</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">सागर संभाग के कुछ हिस्सों को अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">तेज हवाओं और गरज</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">चमक के साथ बारिश का दौर कई जिलों में स्थानीय स्तर पर प्रभाव डाल सकता है। प्रशासन ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले क्षेत्रों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">किसानों और शहरों पर असर :-</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">मानसून की सक्रियता कृषि गतिविधियों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों को पर्याप्त नमी मिलने की उम्मीद है। वहीं शहरी इलाकों में बारिश के साथजलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">IMD</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">का कहना है कि शुरुआती मानसूनी दौर में अल्प अवधि में अधिक बारिश की स्थिति बन सकती है। </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">IMD </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">ने लोगों को नियमितमौसम अपडेट देखते रहने की सलाह दी है। यदि वर्तमान स्थति रूप</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">सक्रिय बनी रहती है तो आने वाले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में मानसून पूरी तरह फैल सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">MP Monsoon Update </span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Kokila, 'sans-serif';" xml:lang="hi">फिलहाल प्रदेश के लिए राहत और सतर्कता दोनों का संकेत लेकर आया है</span><span lang="hi" style="font-size:10.5pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">|</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">मानसून की शुरुआत के साथ ही अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम तेजी से बदल सकता है। कई स्थानों पर सुबह धूप रहने के बाद दोपहर या शाम के समय अचानक बादल छाने और तेज बारिश होने की संभावना बनी रहेगी। ऐसे में लोगों को घर से निकलने से पहले मौसम का ताजा अपडेट जरूर देखना चाहिए। खासकर उन इलाकों में जहां नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं या जलभराव की समस्या रहती है, वहां अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। बारिश बढ़ने के साथ बिजली गिरने की घटनाओं में भी इजाफा हो सकता है। मौसम विभाग ने किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि गरज-चमक के दौरान खुले खेतों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। वहीं शहरों में तेज बारिश के दौरान सड़क पर जलभराव होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। वाहन चालकों को भी सावधानी से सफर करने की सलाह दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र के लिए यह दौर काफी अहम माना जा रहा है। अच्छी बारिश होने पर सोयाबीन, धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आने की उम्मीद है। कई जिलों में किसान पहले से खेत तैयार कर चुके हैं और अब पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। यदि अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय बना रहता है तो खेती-किसानी को बड़ा लाभ मिल सकता है। वहीं लंबे समय से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को भी राहत मिलने की संभावना है।  प्रदेश में मानसून की रफ्तार अब धीरे-धीरे बढ़ रही है और आने वाले सप्ताह में मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्से पूरी तरह मानसूनी गतिविधियों की चपेट में आ सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:18:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>शिशुकुंज स्कूल मामला: बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद घर-घर पहुंची डॉक्टरों की टीम</title>
                                    <description><![CDATA[लंच के बाद 150 से अधिक छात्रों में दिखे बीमारी के लक्षण, किचन सील; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की निगरानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/shishu-kunj-school-case-team-of-doctors-reached-door-to/article-56784"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shishukunj-school-indore.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में छात्रों की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्कूल में लंच करने के बाद 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने के मामले ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद अब डॉक्टरों की टीमें प्रभावित बच्चों के घर-घर जाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही हैं। शुरुआती जांच में कई बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है और सभी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।मामला सामने आने के बाद मंगलवार को स्कूल का माहौल सामान्य दिनों से अलग नजर आया। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को घर से टिफिन देकर स्कूल भेजा। कई छात्रों ने स्कूल का भोजन लेने के बजाय घर का बना खाना ही खाना उचित समझा। वहीं कुछ अभिभावकों ने एहतियात के तौर पर बच्चों को स्कूल नहीं भेजा, जिसके चलते उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम रही। स्कूल प्रबंधन ने भी अभिभावकों को ई-मेल भेजकर फिलहाल बच्चों के लिए घर से भोजन भेजने का अनुरोध किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला शनिवार को सामने आया था। स्कूल में दोपहर का भोजन करने के कुछ समय बाद कई बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत की। धीरे-धीरे प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। अभिभावकों को सूचना मिलने के बाद वे बच्चों को अस्पताल और क्लीनिक लेकर पहुंचे। देखते ही देखते यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या चौथी कक्षा तक के बच्चों की बताई जा रही है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के निर्देश पर डॉक्टरों की टीम गठित की गई। मंगलवार को टीम ने करीब 30 बच्चों के घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने बच्चों की स्थिति का आकलन किया और अभिभावकों से बीमारी के लक्षणों तथा वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य प्रभावित बच्चों के घर भी जाकर जांच की जाएगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित भोजन या पानी के सेवन से ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल डॉक्टर बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने और स्वास्थ्य पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। इस घटना के बाद सोमवार को अभिभावकों का गुस्सा भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और पूरे मामले को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कई अभिभावकों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सोमवार को दोनों विभागों की संयुक्त टीम ने स्कूल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। करीब चार घंटे तक चली जांच के दौरान किचन और खाद्य भंडारण व्यवस्था की पड़ताल की गई। निरीक्षण के दौरान कुछ खाद्य सामग्री और मसालों की एक्सपायरी डेट समाप्त होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल के किचन को सील कर दिया। जांच दल ने किचन से विभिन्न खाद्य पदार्थों और पेय सामग्री के नमूने भी एकत्र किए हैं। इनमें पनीर, दूध, आइसक्रीम, दाल, तैयार भोजन, मसाले और पानी के नमूने शामिल हैं। कुल 23 नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि विभाग को अब तक कई अभिभावकों की ओर से शिकायतें और जानकारी प्राप्त हुई हैं। स्कूल प्रशासन ने भी अस्वस्थ महसूस करने वाले करीब 85 विद्यार्थियों को एहतियातन घर भेजा था। फिलहाल किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी है और सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अभिभावक, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। तब तक स्वास्थ्य विभाग बच्चों की निगरानी जारी रखेगा और एहतियाती कदम उठाता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईको पार्क शुल्क विवाद पर आप नेता प्रमोद शर्मा पर केस दर्ज, प्रदर्शन के दौरान मारपीट के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिना अनुमति धरना, सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने और हाथापाई के आरोप; अवैध वसूली का मुद्दा उठाकर कर रहे थे विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/case-registered-against-aap-leader-pramod-sharma-on-eco-park/article-56638"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/eco-park-fee-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा शहर के ईको पार्क में प्रवेश शुल्क को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। रविवार को पार्क परिसर में हुए हंगामे के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया, सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न की और पार्क परिसर में विवाद की स्थिति पैदा की। वहीं दूसरी ओर प्रमोद शर्मा का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह जनहित में था और वे पार्क में हो रही कथित अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।  ईको पार्क में लगाए गए प्रवेश शुल्क को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा था। आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा लगातार इस मुद्दे को उठा रहे थे और प्रशासन से शुल्क व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे थे। रविवार को उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पार्क परिसर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग पार्क के प्रवेश द्वार और परिसर के आसपास एकत्र हो गए थे, जिससे कुछ समय के लिए अव्यवस्था की स्थिति बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन कुछ देर बाद पार्क प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि प्रवेश शुल्क और उसके औचित्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात धीरे-धीरे तनावपूर्ण होते गए और कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान पार्क परिसर में मौजूद पर्यटकों और परिवारों के बीच भी असहज माहौल बन गया। कई लोग अचानक हुए विवाद से घबरा गए और पार्क से बाहर निकलने लगे। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार समय रहते हस्तक्षेप किए जाने से बड़ा विवाद टल गया। हालांकि घटना के बाद पार्क प्रबंधन और पुलिस की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर प्रमोद शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और विरोध के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। प्रमोद शर्मा का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ और उनके समर्थकों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क कर्मचारियों ने विरोध को दबाने की कोशिश की और विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाया। दूसरी तरफ पार्क प्रबंधन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के व्यवहार के कारण कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रमोद शर्मा ने कहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य ईको पार्क में कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाना था। उनका दावा है कि पार्क में प्रति व्यक्ति 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं और इस संबंध में स्पष्ट जानकारी आम लोगों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क में प्रवेश शुल्क के नाम पर लोगों से अनुचित राशि ली जा रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद पुलिस ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि पार्क परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विवाद किस परिस्थिति में शुरू हुआ और हाथापाई की नौबत कैसे आई। जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फिलहाल पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। ईको पार्क शुल्क को लेकर उठा यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक वर्ग जहां प्रवेश शुल्क व्यवस्था का समर्थन कर रहा है, वहीं कुछ लोग शुल्क की दरों और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और दोनों पक्षों के आरोपों में कितनी सच्चाई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंदौर में MCA छात्रा ने फांसी लगाई, परीक्षा के तनाव की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[सहेलियां घूमकर लौटीं तो कमरे में फंदे पर लटका मिला शव, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/apprehension/article-56635"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-mca-student.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एमसीए की 22 वर्षीय छात्रा ने अपने किराए के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जानकारी में यह बात सामने आई है कि छात्रा परीक्षा के दबाव और पढ़ाई को लेकर मानसिक तनाव में थी। घटना के बाद इलाके में सन्नाटा और शोक का माहौल है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले को हर एंगल से खंगाला जा रहा है। मृतका की पहचान लेखा, उम्र 22 वर्ष, पुत्री उत्तम के रूप में हुई है। वह मूल रूप से बुरहानपुर जिले की रहने वाली थी और पिछले करीब एक साल से इंदौर में रहकर चमेली देवी कॉलेज से एमसीए की पढ़ाई कर रही थी। बताया जा रहा है कि वह पढ़ाई में सामान्य रूप से ठीक थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से परीक्षा और रिजल्ट को लेकर काफी दबाव महसूस कर रही थी। उसके साथ रहने वाली सहेलियों के अनुसार वह पहले की तुलना में ज्यादा शांत रहने लगी थी और कई बार अकेले बैठी रहती थी। हालांकि किसी को यह अंदाजा नहीं था कि हालात इस तरह अचानक बिगड़ जाएंगे। घटना उस वक्त सामने आई जब उसकी सहेलियां रविवार रात करीब 11 बजे कमरे पर वापस लौटीं। बताया जा रहा है कि शाम के समय सहेलियां उसे राजबाड़ा घूमने चलने के लिए कहकर गई थीं, लेकिन लेखा ने जाने से मना कर दिया था। सहेलियां जब बाहर से लौटकर आईं तो कमरे का दरवाजा खुला मिला और अंदर का दृश्य देखकर वे घबरा गईं। लेखा फंदे पर लटकी हुई मिली। इसके बाद आसपास के लोगों को सूचना दी गई और तुरंत पुलिस को बुलाया गया। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर जांच शुरू की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">परदेशीपुरा थाना प्रभारी आरडी कानवा के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि छात्रा एमसीए सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा दे रही थी और उसके कुछ पेपर अपेक्षा के अनुसार नहीं गए थे। इसी वजह से वह मानसिक रूप से परेशान चल रही थी। पुलिस ने उसके कमरे की तलाशी ली, लेकिन किसी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे के कारणों को लेकर अभी पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल फोन, बातचीत और सहेलियों के बयान के आधार पर आगे जांच की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से छात्रा का व्यवहार थोड़ा बदला हुआ था। वह पहले की तुलना में कम बोलती थी और ज्यादातर समय पढ़ाई या अकेले रहने में बिताती थी। सहेलियों ने बताया कि परीक्षा को लेकर वह काफी चिंतित रहती थी और कई बार अपने पेपर खराब होने की बात भी करती थी। हालांकि उसने कभी सीधे तौर पर किसी परेशानी या आत्महत्या जैसे विचार की बात नहीं कही थी। लेकिन अंदर ही अंदर वह तनाव से गुजर रही थी, ऐसा अब सामने आ रहा है। घटना के बाद पूरे हॉस्टल और आसपास के छात्र समुदाय में भी माहौल गंभीर हो गया है। कई छात्राएं इस घटना से सहमी हुई हैं और आपस में चर्चा कर रही हैं कि पढ़ाई का दबाव किस तरह मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। वहीं पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और सोमवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यह मामला संदिग्ध आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन सभी तकनीकी और परिस्थितिजन्य पहलुओं की जांच की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">परिजनों को जैसे ही घटना की सूचना मिली, वे तुरंत बुरहानपुर से इंदौर के लिए रवाना हो गए। परिवार में गहरा सदमा है और घर का माहौल पूरी तरह गमगीन बताया जा रहा है। पड़ोसियों के अनुसार लेखा शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती थी और अपने करियर को लेकर काफी गंभीर रहती थी। परिवार भी उसकी पढ़ाई को लेकर पूरी तरह सहयोग कर रहा था। लेकिन अचानक हुई इस घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और कॉलेज से जुड़ी जानकारी भी खंगाली जाएगी ताकि यह समझा जा सके कि छात्रा किस मानसिक स्थिति से गुजर रही थी। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:00 +0530</pubDate>
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                <title>इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का भूमिपूजन आज, 48 KM फोरलेन से बदलेगा सफर</title>
                                    <description><![CDATA[2935 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला ग्रीन फील्ड कॉरिडोर इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को तेज और सुगम बनाएगा, 28 गांव होंगे सीधे कनेक्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhoomi-pujan-of-indore-ujjain-green-field-corridor-today-journey-will/article-56450"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-ujjain-green-field-corridor.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना का भूमिपूजन आज शनिवार को किया जा रहा है। चंद्रावतीगंज, सांवेर विधानसभा क्षेत्र में सुबह 11 बजे इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यह परियोजना मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को पूरी तरह बदल सकती है। करीब 48 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर लगभग 2935 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। यह मार्ग इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर के पास सिंहस्थ बायपास तक पहुंचेगा। इस सड़क के बनने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगा। खासकर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग बड़ी सुविधा साबित होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस परियोजना को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सरकार इस कॉरिडोर को एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित कर रही है, ताकि भीड़भाड़ और ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित किया जा सके। इंदौर एयरपोर्ट से सीधे उज्जैन तक तेज कनेक्टिविटी मिलने से बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। यह मार्ग धार्मिक पर्यटन को भी नई गति देने वाला माना जा रहा है। ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना के तहत कुल 917 किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसकी कुल प्रभावित भूमि लगभग 242.939 हेक्टेयर है। इसके बदले सरकार ने किसानों को 816 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया है। प्रशासन के अनुसार यह पहली बार है जब किसानों को कलेक्टर गाइडलाइन की बजाय बाजार और बिक्री दरों के आधार पर 4 से 8 गुना अधिक मुआवजा दिया गया है। इस निर्णय से किसानों में संतोष और सहमति का माहौल देखा जा रहा है। परियोजना से इंदौर जिले के 20 गांव और उज्जैन जिले के 8 गांव सीधे तौर पर जुड़ेंगे। इसके अलावा आसपास के लगभग 40 से 50 गांवों के करीब 15 लाख लोगों को भी इस सड़क का अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से व्यापार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। यह मार्ग क्षेत्रीय विकास का एक नया केंद्र बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस कॉरिडोर के निर्माण से इंदौर और उज्जैन के बीच औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। माल परिवहन तेज होगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक संरचना को मजबूत करने वाली योजना है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और इसमें आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। सड़क की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और यातायात सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी विशेष उपाय किए जाएंगे। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना मध्यप्रदेश के लिए एक गेमचेंजर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साबित हो सकती है। यह न केवल यात्रा को तेज और आसान बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, धार्मिक पर्यटन और आर्थिक प्रगति को भी नई दिशा देगी। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर राज्य की सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में गिना जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:48:15 +0530</pubDate>
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