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                <title>Hamidia Hospital Scam - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Hamidia Hospital Scam RSS Feed</description>
                
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                <title>हमीदिया अस्पताल ठगी मामला: मरीजों की जानकारी लीक करने वाला कर्मचारी लापता, जांच में उलझी पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर बनकर परिजनों से वसूली का खुलासा, आउटसोर्स स्टाफ पर शक; पर्चों पर चेतावनी छापने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/hamidia-hospital-fraud-case-employee-who-leaked-patients-information-missing/article-45693"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/mp-(16)1.jpg" alt=""></a><br /><p>राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों से ठगी के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। जनवरी 2026 से अब तक सामने आए इस संगठित ठगी के पैटर्न में पुलिस और अस्पताल प्रबंधन की जांच आगे बढ़ने के बजाय उलझती दिख रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि ठग को मरीजों की गोपनीय जानकारी देने वाला अस्पताल कर्मचारी अब तक सामने क्यों नहीं आया।</p>
<p>अब तक कम से कम 10 से अधिक परिवार इस ठगी का शिकार हो चुके हैं। कोहेफिजा थाने में दर्ज तीन मामलों में 30 हजार रुपये से अधिक की ठगी की पुष्टि हुई है। पुलिस जांच में यह साफ हो चुका है कि ठग जितेंद्र खागरे को मरीजों की स्थिति, वार्ड और परिजनों के मोबाइल नंबर अस्पताल के भीतर से ही उपलब्ध कराए जा रहे थे।</p>
<p><strong>कैसे होता था ठगी का खेल</strong><br />जांच में सामने आया है कि मरीज की हालत बिगड़ते ही 10 मिनट के भीतर परिजनों को कॉल आ जाता था। कॉल करने वाला खुद को हमीदिया अस्पताल का डॉक्टर बताता और तत्काल इलाज या इंजेक्शन के नाम पर 5 से 10 हजार रुपये की मांग करता था। इसके बाद यूपीआई या क्यूआर कोड भेजकर रकम वसूली जाती थी।</p>
<p>क्राइम ब्रांच ने मुख्य आरोपी बैतूल निवासी जितेंद्र खागरे को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन उसके नेटवर्क से जुड़े अस्पताल कर्मचारियों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है।</p>
<p><strong>जांच के घेरे में सिर्फ आउटसोर्स स्टाफ</strong><br />इस मामले में जांच को लेकर विवाद भी गहराता जा रहा है। पुलिस को करीब 1400 आउटसोर्स कर्मचारियों की जानकारी सौंपी गई है, जिनके कॉल डिटेल और मोबाइल नंबर खंगाले जा रहे हैं। वहीं, नियमित कर्मचारियों की जानकारी पुलिस को अब तक नहीं दी गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मांग किए जाने पर विवरण उपलब्ध कराया जाएगा। इस स्थिति से आउटसोर्स कर्मचारी खुद को निशाना बनाए जाने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p><strong>20% कमीशन का खुलासा</strong><br />सिक्योरिटी एजेंसी और प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मरीजों की जानकारी देने के बदले कर्मचारियों को 20 प्रतिशत तक कमीशन दिया जा रहा था। नेटवर्क की जड़ें स्त्री रोग, पीडियाट्रिक और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग तक फैली होने की आशंका है। करीब सात कर्मचारियों की संलिप्तता की संभावना जताई गई है।</p>
<p><strong>अस्पताल प्रबंधन की तैयारी</strong><br />हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने बताया कि ठगी रोकने के लिए पर्चों और एडमिशन फॉर्म पर स्पष्ट चेतावनी छापी जाएगी। अस्पताल परिसर में सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनमें लिखा होगा कि कोई भी डॉक्टर या कर्मचारी इलाज के बदले अतिरिक्त पैसे नहीं मांगता।</p>
<p>उन्होंने मरीजों और परिजनों से अपील की है कि यदि कोई खुद को अस्पताल से जुड़ा बताकर पैसे मांगे, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या अस्पताल सुरक्षा को सूचना दें।</p>
<p>फिलहाल, पुलिस आरोपी के संपर्कों और अस्पताल के भीतर की कड़ी को जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ने और ठगी नेटवर्क के पूरे खुलासे की उम्मीद है।</p>
<p>------</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:13:52 +0530</pubDate>
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