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                <title>खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच होर्मुज में फिर हमले, तीन टैंकर बने निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कमर्शियल जहाजों के तय समुद्री मार्ग छोड़ने पर जताई चिंता, अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/iran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमलों की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि कतर के तेल टैंकर अल-रकायत को निशाना बनाया गया, जबकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार ओमान तट के पास दो अन्य वाणिज्यिक जहाज भी हमलों की चपेट में आए। घटनाओं के बाद समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान ने कहा है कि कुछ व्यावसायिक जहाज उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा की गारंटी देना संभव नहीं होगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि होर्मुज की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और हालात पहले की तरह स्थिर नहीं माने जा सकते।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हमलों की खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा जारी है। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक शहर कोम पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी। शहर की सड़कों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी और लाखों समर्थकों की मौजूदगी के बीच धार्मिक रस्में पूरी की गईं। अंतिम यात्रा के दौरान कई लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दिए। शिया परंपरा में लाल झंडा अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध और बदले की मांग का प्रतीक माना जाता है। पार्थिव शरीर पर ईरान का राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाया गया था, जबकि ताबूत पर उनकी काली पगड़ी भी रखी गई, जो उच्च धार्मिक विद्वानों की पहचान मानी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई और पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के अनुसार इससे पहले तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में भी लाखों लोग शामिल हुए। भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर शव वाहन की रफ्तार धीमी करनी पड़ी और कुछ जगहों पर यात्रा थोड़ी देर के लिए रुक भी गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोम ले जाया गया। बताया गया है कि आगे की रस्मों के बाद उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, राजनीतिक प्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद रहे। कई लोगों ने नारे लगाए और खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर समुद्री मोर्चे पर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन करना जरूरी है। यदि जहाज तय रास्तों से अलग होकर आवाजाही करेंगे तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल होगा। हालांकि हमलों को लेकर स्वतंत्र स्तर पर विस्तृत पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है और संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के भीतर भी इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। देश के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा के दौरान कहा कि देश खामेनेई के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराता है। वहीं सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को उनके किए का जवाब देना होगा और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। दूसरी ओर क्षेत्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में जुटी भीड़ पूरे ईरान की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। वहीं इराक के प्रमुख शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की। अंतिम यात्रा के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियां पश्चिम एशिया की पहले से संवेदनशील स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि दुनिया की कई सरकारें और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, INS त्रिकंड ने समुद्री लुटेरों की साजिश की नाकाम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर हमले की कोशिश भारतीय नौसेना ने समय रहते विफल कर दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-navys-major-operation-in-the-gulf-of-aden-ins/article-57707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ins-trikand.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी तत्परता और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। बुधवार रात भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर समुद्री डाकुओं ने कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंड की त्वरित कार्रवाई के चलते उनका मंसूबा सफल नहीं हो सका। नौसेना के पहुंचते ही लुटेरे मौके से फरार हो गए। इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष कमांडो दस्ते मार्कोस (MARCOS) ने जहाज पर चढ़कर पूरी तलाशी ली और जहाज को सुरक्षित घोषित किया। इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने या जहाज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> MV Golden Arsenal एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज है, जो 1 जुलाई को यमन के अदन बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। जहाज पर कुल 21 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अदन की खाड़ी में डीजिबूती से करीब 300 नॉटिकल मील पूर्व-उत्तर-पूर्व की दिशा में यात्रा के दौरान समुद्री लुटेरों ने तेज रफ्तार छोटी नौकाओं के जरिए जहाज के करीब पहुंचकर उस पर चढ़ने की कोशिश की। हालात अचानक बिगड़ते देख चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया और खुद को जहाज के सुरक्षित कमरे में बंद कर लिया। चालक दल ने सुरक्षित स्थान से रेडियो संचार प्रणाली के जरिए तत्काल मदद की गुहार लगाई। संकट संदेश मिलते ही क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS त्रिकंड बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। जैसे ही युद्धपोत हमलावरों के करीब पहुंचा, समुद्री लुटेरों ने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए वहां से भागना ही बेहतर समझा। नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय युद्धपोत की तेज प्रतिक्रिया और उसकी मौजूदगी ने संभावित समुद्री डकैती की घटना को पूरी तरह विफल कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष बल मार्कोस कमांडो हेलीकॉप्टर और तेज नौकाओं की मदद से व्यापारी जहाज पर पहुंचे। कमांडो ने जहाज के हर हिस्से की गहन तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई हमलावर जहाज पर छिपा न हो। जांच पूरी होने के बाद जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। नौसेना ने बताया कि चालक दल के सभी 21 सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अपनी निर्धारित यात्रा आगे जारी रखने की स्थिति में है। जहाज पर मौजूद कार्गो भारत के लिए रणनीतिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कार्गो की प्रकृति या उसके गंतव्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी जहाजों की सुरक्षा भारतीय नौसेना की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है, विशेषकर उन समुद्री मार्गों पर जहां समुद्री डकैती की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब INS त्रिकंड ने समुद्री डकैती की कोशिश को नाकाम किया हो। बीते दो महीनों में यह तीसरी ऐसी घटना है जिसमें इस युद्धपोत ने समय रहते हस्तक्षेप कर व्यापारी जहाजों को सुरक्षित बचाया है। इससे पहले 19 जून को पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Fareeda से संकट संदेश मिलने पर भी INS त्रिकंड ने तत्काल कार्रवाई की थी और संभावित समुद्री डकैती को विफल कर दिया था। उस समय भी भारतीय नौसेना ने जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा 27 मई को भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने भी पश्चिमी हिंद महासागर में MV Mashallah नामक व्यापारी जहाज के पास संदिग्ध समुद्री डकैती की गतिविधियों को विफल किया था। उस अभियान में नौसेना ने हेलीकॉप्टर, निगरानी उपकरणों और बोर्डिंग टीम की मदद से पूरे क्षेत्र की तलाशी ली थी। समय पर की गई कार्रवाई के कारण संभावित खतरा टल गया और व्यापारी जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना लगातार यह दोहराती रही है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्राथमिक सुरक्षा साझेदार' और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नौसेना का उद्देश्य केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हाल के वर्षों में समुद्री डकैती की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना लगातार निगरानी, गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाए हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत–सेशेल्स में 19 समझौते, UPI और 1250 करोड़ का लोन घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य और समुद्री सुरक्षा में बड़ा सहयोग, मोदी दौरे में ऐतिहासिक फैसले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/19-agreements-and-loan-of-rs-1250-crore-announced-in/article-57255"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-seychelles-agreement-2026.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत और सेशेल्स के बीच रविवार को हुए उच्चस्तरीय समझौतों ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नई दिशा जोड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की मौजूदगी में कुल 19 बड़े समझौते और विकास परियोजनाओं पर सहमति बनी। ये समझौते रक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसे कई अहम क्षेत्रों से जुड़े हैं। बैठक के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जिस फैसले की रही, वह था भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI का सेशेल्स में विस्तार। अब सेशेल्स में भी भारतीय UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली शुरू की जाएगी। इसका मतलब यह है कि वहां लोग और पर्यटक आसानी से मोबाइल के जरिए भुगतान कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि भारत अब तक 23 से अधिक देशों के साथ UPI को जोड़ने पर सहमति बना चुका है और फिलहाल 9 देशों में यह सुविधा पहले से चल रही है। यह कदम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और फिनटेक क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने वाला माना जा रहा है। इस दौरान यह भी बताया गया कि डिजिटल भुगतान को लेकर दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलेंगे।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img alt="2Q=="></img></p>
<p>इसके साथ ही भारत ने सेशेल्स को 1250 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट देने का फैसला किया है। यह राशि वहां की विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने में उपयोग की जाएगी। बताया जा रहा है कि दोनों देशों ने इस आर्थिक सहयोग को दीर्घकालिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। बैठक में प्रत्यर्पण संधि, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले समय में एक नए राष्ट्रीय अस्पताल के निर्माण पर काम तेज किया जाएगा। भारत ने इस मौके पर सेशेल्स को कई जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई है, जिसमें फास्ट पेट्रोल वेसल, एम्बुलेंस, वाहन, नावें और हजारों टन खाद्य एवं निर्माण सामग्री शामिल हैं। इन कदमों को समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक स्थिति को देखते हुए दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि यह साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरे के दौरान सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह अवसर दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस दौरान पीएम मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली के विशेष सत्र को भी संबोधित किया, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा पहली बार किया गया संबोधन है। इससे पहले केवल तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस तरह का संबोधन किया था। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन” से भी सम्मानित किया गया, जिसे दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p><img alt="2Q=="></img></p>
<p>इसी कार्यक्रम में भारत ने 175 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज भी घोषित किया, जो लगभग 1651 करोड़ रुपये के बराबर है। यह पैकेज मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहल के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स में कोको डी मेर पौधा भी लगाया, जो वहां की अनोखी प्राकृतिक धरोहर माना जाता है। इस दौरे को भारत की विदेश नीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह समझौते न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। हिंद महासागर में बढ़ते वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत और सेशेल्स का यह सहयोग आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को नई दिशा दे सकता है।</p>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:37 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान ने NATO देशों पर लगाए गंभीर आरोप, होर्मुज में जहाज पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान का दावा—अमेरिका-इजराइल के साथ कुछ NATO देशों ने दिया सैन्य समर्थन, होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाज पर हमला, ब्रिज को नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-nato-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। Iran ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर उसके खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में कुछ NATO सदस्य देशों ने भी समर्थन दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में NATO की भूमिका की गंभीर जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की ओर से यह दावा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक मंच पर पहले से ही कई मुद्दों को लेकर असहमति बनी हुई है। बघई ने अपने बयान में कहा कि NATO प्रमुख मार्क रूट ने खुद इस बात की ओर इशारा किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का समर्थन किया था। हालांकि इस दावे पर अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी देश ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर और किस उद्देश्य से इस तरह के सैन्य सहयोग में हिस्सा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर किसी भी NATO देश ने इस प्रकार की कार्रवाई में भाग लिया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान ने यह भी मांग की है कि इन देशों को न केवल अपने नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर इस तरह की कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। Strait of Hormuz में एक कॉमर्शियल जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि की है। जहाज ओमान के तट के पास था, जब अचानक एक प्रोजेक्टाइल आकर जहाज के दाहिने हिस्से से टकरा गया। इस हमले से जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है, जहां से जहाज का संचालन किया जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी क्रू सदस्य को चोट नहीं आई है। घटना के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, और इस नए विवाद ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। NATO की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक NATO की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं अमेरिका और इजराइल की ओर से भी इन आरोपों पर चुप्पी बनी हुई है। ईरान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जबकि पश्चिमी देश इसे खारिज कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से होर्मुज क्षेत्र में हमला हुआ है, उसने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा और व्यापार बाजारों पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>G7 सम्मेलन में पीएम मोदी बोले, भारतीय नाविकों की मौत चिंता का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री व्यापार सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा उठा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modi-said-in-g7-conference-that-death-of-indian/article-56154"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pm-modi-g7-speech.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फ्रांस के इवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की स्थिरता और हाल की घटनाओं में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। इस बैठक में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई प्रमुख देशों के नेता मौजूद थे। पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का असर सिर्फ क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। पीएम ने कहा कि इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और वाणिज्यिक सामान दुनिया भर में भेजा जाता है और किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, “इस संघर्ष में हमारे कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है।” उन्होंने आगे कहा कि समुद्री व्यापार को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि हजारों नाविक रोजाना समुद्र के रास्ते देशों को जोड़ते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि वे बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। पीएम मोदी का यह बयान हाल ही में सामने आई उन घटनाओं से जुड़ा माना जा रहा है, जिनमें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी देश या घटना का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत उन्हीं घटनाओं की ओर माना जा रहा है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कई जहाजों पर कार्रवाई की गई थी। हाल के दिनों में अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में कुछ विदेशी झंडे वाले तेल टैंकरों पर कार्रवाई की थी। इन जहाजों पर भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे। इनमें से एक घटना में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि अन्य घटनाओं में कई नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और समुद्री सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि इस तरह की घटनाएं तुरंत रोकी जानी चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपने समुद्री समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को अत्यंत महत्व देता है। जब यह घटना हुई, तब भारत ने तुरंत अमेरिकी पक्ष के सामने अपनी गंभीर चिंता दर्ज कराई और कड़ा विरोध जताया। भारत ने अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को तलब कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है। पीएम मोदी का यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक शांति और व्यापार स्थिरता पर भी जोर देता है। भारत लंबे समय से समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात करता रहा है। G7 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह मुद्दा उठना इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर अपने नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार के मुद्दों को अधिक मजबूती से रख रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओमान के पास अमेरिकी स्ट्राइक में 3 भारतीयों की मौत, भारत ने जताया विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर कहा—व्यावसायिक जहाजों पर घातक कार्रवाई उचित नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/3-indians-killed-in-us-strike-near-oman-india-protests/article-55789"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jaishankar-rubio-call.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ओमान के तट के पास हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य हमलों में तीन भारतीय समुद्री कर्मियों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। यह घटना उस समय सामने आई जब कई वाणिज्यिक जहाजों को लक्षित किया गया था, जिनमें भारतीय चालक दल मौजूद था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हमला उस क्षेत्र में हुआ जहां समुद्री सुरक्षा पहले से ही संवेदनशील मानी जाती है और लगातार निगरानी रखी जाती है। अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के दौरान एक वाणिज्यिक टैंकर पर हमला किया गया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। घटना के बाद से ही भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर गंभीर रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क साधते हुए इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बताया जा रहा है कि भारत ने अमेरिका से इस तरह की कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब भी मांगा है, क्योंकि इसमें नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा जुड़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की और भारत की चिंता को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक शिपिंग पर इस तरह की घातक कार्रवाई किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराई जा सकती। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर भी इस बातचीत का जिक्र करते हुए भारत की “strong protest” को दोहराया। उनका कहना था कि भारतीय नागरिकों की मौत बेहद गंभीर मामला है और इसकी पूरी जांच जरूरी है। इस घटना के बाद भारत ने दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उच्च अधिकारी को भी तलब किया और औपचारिक रूप से विरोध पत्र सौंपा। भारत की ओर से यह भी कहा गया कि समुद्री मार्गों पर इस तरह की हिंसक कार्रवाई से न केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। घटना को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक, यह हमला उस व्यापक समुद्री अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है जिसमें अमेरिका ने कुछ जहाजों को निशाना बनाया है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ये जहाज प्रतिबंधित क्षेत्र या ईरान से जुड़े तेल परिवहन में शामिल थे। हालांकि, भारत ने इस पूरे तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में नागरिक चालक दल की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार से इस मामले में और सख्त रुख अपनाने की मांग की है। वहीं समुद्री क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने भी चिंता जताई है कि इस तरह की घटनाएं भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री श्रम आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है। ओमान क्षेत्र में पहले भी इस तरह की घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय तनाव देखने को मिला है, लेकिन इस बार मामला और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो यह कूटनीतिक स्तर पर और जटिल हो सकती है। भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विदेश मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि भारत इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठा सकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:37:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान–अमेरिका तनाव चरम पर, समझौते पर अनिश्चितता कायम</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है, वहीं ट्रंप ने हमले रोकने और बातचीत आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/uncertainty-remains-over-agreement-as-iran-us-tensions-peak/article-55691"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-tensions-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से साफ कहा गया है कि अभी तक अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई और बातचीत दोनों को लेकर लगातार बदलते संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ उन्होंने नए हमलों को रोकने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पहले दिए गए कड़े बयानों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार (11 जून 2026) को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ बातचीत अब “उच्चतम नेतृत्व स्तर” तक पहुंच चुकी है और इसे आगे बढ़ाने के संकेत मिले हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी वजह से उन्होंने  नए सैन्य हमलों को रोकने का निर्णय लिया है। ट्रंप के अनुसार यह कदम बातचीत को अवसर देने के लिए उठाया गया है। हालांकि इससे कुछ ही घंटे पहले उन्होंने ईरान पर “बहुत बड़े हमले” करने की चेतावनी दी थी, जिससे स्थिति और अधिक अस्थिर हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले दिए गए एक बयान में ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका आने वाले समय में ईरान के खर्ग आइलैंड और अन्य तेल संसाधनों पर नियंत्रण की रणनीति अपना सकता है। इस तरह के बयानों ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विरोधाभासी संकेत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अनिश्चितता को बढ़ाते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। ओमान के पास एक और जहाज MV Jalveer पर हमले की जानकारी सामने आई है। यह घटना पिछले कुछ दिनों में हुई तीसरी ऐसी बड़ी घटना बताई जा रही है। इससे पहले टैंकर Settebello पर भी हमला हुआ था। लगातार हो रहे इन हमलों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">MV Jalveer को लेकर बताया गया है कि यह गिनी-बिसाऊ ध्वज वाला एक एस्फाल्ट टैंकर है, जो सामान्य व्यापारिक मार्ग पर था जब उस पर हमला हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। इन घटनाओं की वजह से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान एक दुखद घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि की गई है। यह घटना कथित रूप से एक टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले से जुड़ी बताई जा रही है। भारत सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत ने अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब कर इस घटना पर स्पष्ट जवाब मांगा है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। समुद्री मार्गों पर नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हैं। इस पूरे मामले पर विस्तृत जांच की मांग की गई है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की स्थिति पर नजर डालें तो वहां की सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। ईरानी नेतृत्व के अनुसार, बातचीत जारी है लेकिन यह अभी शुरुआती या मध्य स्तर पर है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते में उसके राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इस बयान ने उन सभी अटकलों को विराम दिया है जिनमें जल्द किसी बड़े समझौते की संभावना जताई जा रही थी। मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है। एक ओर कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां और समुद्री हमले स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। तेल और गैस आपूर्ति मार्गों पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं पहले से ही दबाव में हैं और ऐसे में यह संकट और गहरा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:14:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की कड़ी निंदा की, UNSC में शांति का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[UNSC में भारत ने कूटनीति, शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2a4066ac53f/article-55577"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-unsc-statement.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर साफ शब्दों में कहा है कि वह मर्चेंट शिपिंग यानी व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों का कड़ा विरोध करता है। भारत ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका सीधा असर न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरिष पर्नवथनेनी ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की खुली बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है, जिसकी शुरुआत रमज़ान के पवित्र महीने में हुई, जो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और किसी भी तरह की स्थिति को और बिगड़ने से रोकना चाहिए। भारत ने खास तौर पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पर्नवथनेनी ने कहा कि भारत के कई नागरिक खाड़ी क्षेत्र में काम करते हैं और हालिया हमलों में कई भारतीयों की मौत हुई है या वे लापता हैं। ऐसे में व्यापारिक जहाजों और समुद्री संचार मार्गों पर हमले सीधे तौर पर मानव जीवन और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थिरता भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों से भी सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इस बीच भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी प्रकार के सैन्य हमलों, नागरिकों पर हमलों और समुद्री व्यापार बाधित करने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है। भारत ने जोर देकर कहा कि सभी विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने गाजा की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि वहां मानवीय संकट गहराता जा रहा है। भारत ने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता और दो-राज्य समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना शामिल हो। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को 2.5 मिलियन डॉलर की पहली किस्त देने जा रहा है, जो उसके वार्षिक पांच मिलियन डॉलर योगदान का हिस्सा है। भारत ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में मानवीय सहायता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेबनान संकट का जिक्र करते हुए भारत ने उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही। भारत ने कहा कि शांति सैनिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और उन पर हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और बदलते वैश्विक हालात में इसमें सुधार जरूरी है। भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग दोहराई ताकि परिषद अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ओमान के पास तेल टैंकर पर हमला, भारतीय क्रू के साथ जहाज में लगी आग</title>
                                    <description><![CDATA[सेटेबेलो टैंकर के इंजन रूम में मिसाइल हमले से आग, 24 भारतीयों में से 3 लापता, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/oil-tanker-attacked-near-oman-ship-with-indian-crew-caught/article-55587"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/settebello-tanker-attack.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ओमान के तट के पास अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के बीच एक तेल टैंकर पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। यह घटना उस वक्त हुई जब Palau-flagged तेल टैंकर “सेटेबेलो” सामान्य समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 28 क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक शामिल थे। अचानक हुए इस हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी मशीनरी में आग लग गई। यह घटना ओमान के सोहर पोर्ट से लगभग 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी 15 सेकंड के एक वीडियो में यह दृश्य सामने आया है जिसमें साफ दिखाई देता है कि जहाज को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद उसमें आग लग जाती है। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर बहस और तेज हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज को सटीक हथियारों से निशाना बनाया गया क्योंकि उसने कथित तौर पर दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। बयान के मुताबिक यह कार्रवाई एक चल रहे समुद्री अवरोध अभियान का हिस्सा थी, जिसमें कुछ जहाजों को रोका गया और कुछ को वापस भेजा गया। हालांकि इस कार्रवाई के तरीके और इसके परिणामों को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। हमले के तुरंत बाद जहाज के इंजन रूम में लगी आग तेजी से फैल गई। जहाज के भीतर अफरातफरी का माहौल बन गया और क्रू मेंबर्स को बचाने के प्रयास शुरू किए गए। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, जहाज पर मौजूद 28 लोगों में से 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 3 भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाकी क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद भारत सरकार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारत इस हमले की कड़ी निंदा करता है और यह स्वीकार्य नहीं है कि किसी भी नागरिक जहाज या व्यापारिक पोत को इस तरह निशाना बनाया जाए। भारत ने अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब कर इस मामले में औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। सरकार ने यह भी कहा कि इस पूरे क्षेत्र में बढ़ता तनाव बेहद चिंताजनक है और सभी पक्षों को तुरंत संयम बरतना चाहिए। भारत ने दोहराया कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की कार्रवाई जो इसे बाधित करे, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह भी कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल मानवीय संकट पैदा करती हैं बल्कि भारत की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डालती हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इस घटना की निंदा की है। संगठन ने कहा कि कोई भी कार्रवाई जो नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षा को खतरे में डालती है, पूरी तरह अस्वीकार्य है। IMO महासचिव ने कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना खाड़ी क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और गंभीर बना सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, लेकिन इसके परिणामस्वरूप नागरिकों की जान जोखिम में पड़ना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Quad बैठक के बाद जयशंकर का बड़ा ऐलान, भारत-अमेरिका बनाएंगे खास मिनरल फ्रेमवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में हुई Quad बैठक के बाद एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं पर नए फ्रेमवर्क का ऐलान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/jaishankars-big-announcement-after-quad-meeting-india-america-will-create-special/article-54231"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/quad,-s.-jaishankar-india-us-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली में मंगलवार को </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Quad <span lang="hi" xml:lang="hi">देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका खास खनिजों और दुर्लभ धातुओं की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए एक नया द्विपक्षीय ढांचा तैयार कर रहे हैं। इस बैठक में अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी भाग लिया। चर्चा में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर सुरक्षा</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन पर गहराई से बात की गई। वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व की स्थितियों का असर भी प्रमुख विषय रहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त प्रेस बयान में जयशंकर ने कहा कि चारों देशों के बीच समन्वय लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि समुद्री निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लॉजिस्टिक्स नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडरसी केबल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है और इसे और भी मजबूत किया जाएगा। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति हमेशा से रही है। उन्होंने ये भी बताया कि वर्तमान वैश्विक हालात के मद्देनज़र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन बनाना बहुत जरूरी हो गया है। इसी दिशा में भारत और अमेरिका के बीच नया ढांचा तैयार किया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के बाद दो बड़ी समुद्री सुरक्षा पहलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग पहल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शुरू हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सदस्य देशों के बीच समुद्री सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर होगा। इसके अलावा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्रीय देशों को रियल टाइम समुद्री डेटा मिल सके। रुबियो ने भारत को </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">क्वाड एट सी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">मिशन के अगले चरण की मेज़बानी के लिए धन्यवाद भी दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Quad <span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि क्षेत्र में रणनीतिक तनाव बढ़ रहा है और ऊर्जा सुरक्षा पर भी दबाव है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालात का हवाला देते हुए समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं के खनन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। जयशंकर ने कहा कि यह ढांचा सप्लाई चेन को और अधिक लचीला और सुरक्षित बनाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक व्हीकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेमीकंडक्टर और हाईटेक सेक्टर में इन खनिजों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:19:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG टैंकर, 20 हजार टन गैस लेकर कांडला पहुंची खेप</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान तनाव के बीच एक और LPG टैंकर सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचा। 20 हजार टन गैस लेकर जहाज कांडला पोर्ट पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lpg-tanker-crossed-hormuz-and-reached-india-consignment-reached-kandla/article-53608"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/hormuz-strait-lpg-news-india-energy.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए कुछ राहत की खबर आई है। एक और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच गया है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला टैंकर </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">सिमी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग 20 हजार टन </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकर भारत पहुंचा है। बताया जा रहा है कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद समुद्री रास्तों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि ऊर्जा सप्लाई प्रभावित न हो। </span>ANI <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 15</span> LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाज सुरक्षित रूप से भारत आ चुके हैं। जब दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह खेप भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">सिमी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार किया था। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार जहाज की मूवमेंट पर नज़र रखी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि भारत आने वाला एक और </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाज </span>‘MV <span lang="hi" xml:lang="hi">सनशाइन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भी हाल ही में सुरक्षित तरीके से इस समुद्री मार्ग को पार कर चुका है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल और गैस इसी रास्ते से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी तरह का सैन्य तनाव ऊर्जा सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। पिछले कुछ दिनों से इसी चिंता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचाई हुई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि भारतीय जहाजों और गैस टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना सहित कई एजेंसियां सक्रिय हैं। समुद्री निगरानी बढ़ा दी गई है और जहाजों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा अलर्ट के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में भरोसा दिलाया कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। उन्होंने कहा कि मित्र देशों को व्यापारिक सुरक्षा के मामले में ईरान पर भरोसा होना चाहिए। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी कहा कि क्षेत्र में हालात सामान्य होने पर होर्मुज स्ट्रेट और भी अधिक सुरक्षित बनेगा। इस समय भारत की नजर लगातार ऊर्जा सप्लाई पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि घरेलू जरूरतों के लिए देश काफी हद तक आयातित तेल और गैस पर निर्भर है। ऐसे में </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकरों का सुरक्षित भारत आना सरकार और बाजार दोनों के लिए राहत की बात है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:03:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज स्ट्रेट में गुजरात का मालवाहक जहाज डूबा, 14 क्रू सुरक्षित बचाए गए</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट के पास गुजरात का मालवाहक जहाज डूब गया। ओमान कोस्टगार्ड ने 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचाया। हादसे की जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/gujarat-cargo-ship-sinks-in-hormuz-strait-14-crew-rescued/article-53344"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t145622.540.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज स्ट्रेट में ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते एक बार फिर समुद्री हलचल बढ़ गई है। बुधवार तड़के</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओमान के तट के पास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात का एक मालवाहक जहाज हादसे का शिकार हो गया और कुछ समय बाद डूब गया। </span>‘MSV <span lang="hi" xml:lang="hi">हाजी अली</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम का ये जहाज 13 मई की सुबह बेरबेरा पोर्ट से शारजाह की तरफ जा रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी समुद्री क्षेत्र में अचानक एक बड़ा हादसा हुआ। इस घटना के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ गई हैं। गुजरात का जहाज डूबने की खबर आते ही समुद्री सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहाज के मालिक और द्वारका के निवासी सुलतान अहमद अंसार ने बताया कि हादसा सुबह करीब 3:30 बजे हुआ। उन्होंने कहा कि जब जहाज ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस समय अचानक किसी विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनाई दी। कुछ क्रू मेंबर्स ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे कोई ड्रोन या मिसाइल जैसी चीज जहाज से टकराई। इसके बाद जहाज में आग लग गई और हालात तेजी से बिगड़ गए। आग फैलने पर क्रू मेंबर्स के पास ज्यादा समय नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सभी ने झटपट लाइफ बोट की मदद से जहाज छोड़ दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ओमान कोस्टगार्ड ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और जहाज पर मौजूद सभी 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई मौत तो नहीं हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कई लोग हादसे के बाद सदमे में हैं। समुद्री क्षेत्र में मौजूद अन्य जहाजों को भी अलर्ट कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हादसे की असली वजह अभी साफ नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह जांच की जा रही है कि क्या ये तकनीकी खराबी थी या फिर किसी बाहरी हमले का नतीजा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इससे पहले भी इसी इलाके में गुजरात से जुड़े एक अन्य मालवाहक जहाज पर हमले की खबर आई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही संवेदनशील माना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब लगातार आ रही घटनाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में किसी भी छोटे हादसे का असर वैश्विक तेल और व्यापार आपूर्ति पर पड़ सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई देशों ने अपने समुद्री मार्गों को लेकर अलर्ट जारी किया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने भी ये कहा है कि व्यापारिक जहाजों पर किसी भी हमले को स्वीकार नहीं किया जाएगा और ओमान प्रशासन के बचाव प्रयासों की सराहना की गई है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे मामले की जांच चल रही है और ये अभी साफ नहीं है कि हादसा किसी बाहरी हमले का नतीजा था या तकनीकी कारणों से जहाज में आग लगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:39:02 +0530</pubDate>
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