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                <title>Law and Order - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दतिया में धारा-163 लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक; प्रशासन अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट विवाद के बाद हुए बवाल और हाईवे जाम की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे दतिया अनुभाग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन, रैली और पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/section-163-imposed-in-datia-ban-on-meetings-and-processions/article-58471"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-163.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 लागू कर दी है। यह आदेश 10 जुलाई की रात 9 बजे से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक लागू रहेगा। प्रशासन का कहना है कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे चक्का जाम और हिंसक घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। आदेश लागू होने के बाद अब बिना प्रशासन की अनुमति कोई भी सभा, जुलूस, रैली, धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, तलवार, भाला, फरसा, चाकू या अन्य घातक हथियार लेकर चलने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र या अन्य सार्वजनिक प्रसारण उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर, नारे, भाषण या अन्य माध्यमों से ऐसी किसी भी सामग्री के प्रचार-प्रसार पर भी रोक रहेगी, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के पालन के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं से भी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने अपने आदेश में हाल ही में झांसी-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए चक्का जाम का भी उल्लेख किया है। अधिकारियों के अनुसार 10 जुलाई की रात हुए प्रदर्शन के दौरान लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ स्थानों पर पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए एहतियात के तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। आदेश के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों को भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि यह आदेश पुलिस, होमगार्ड, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, सीआरपीएफ और अन्य प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों पर उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान लागू नहीं होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। धारा-163 लागू होने के बाद जिले में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दुर्ग पुलिस में बड़ा फेरबदल, 7 इंस्पेक्टरों का तबादला; कई थानों की बदलेगी कमान</title>
                                    <description><![CDATA[सुपेला, जामुल, उतई और खुर्सीपार समेत कई थानों में बदलाव तय, तीन नए निरीक्षक दुर्ग जिले में संभालेंगे जिम्मेदारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-reshuffle-in-durg-police-transfer-of-7-inspectors-command/article-58287"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/durg-police-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस मुख्यालय रायपुर ने बुधवार देर रात राज्यभर के 64 पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टरों) की तबादला सूची जारी की, जिसमें दुर्ग जिले के सात निरीक्षकों का अन्य जिलों में स्थानांतरण किया गया है। वहीं तीन नए निरीक्षकों की दुर्ग जिले में पदस्थापना की गई है। इस तबादले के बाद जिले के कई प्रमुख थानों की कमान बदलना लगभग तय माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर नई पदस्थापनाओं का आदेश जारी होने के बाद थाना प्रभारियों की नई जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। फिलहाल पुलिस महकमे में इस प्रशासनिक बदलाव को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार सुपेला थाना प्रभारी निरीक्षक अंबर सिंह भारद्वाज का तबादला कांकेर जिले में किया गया है। वहीं जामुल थाना प्रभारी रामेंद्र कुमार सिंह को कोंडागांव भेजा गया है। उतई थाना प्रभारी राजेश कुमार साहू को सुकमा जिले में नई जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा खुर्सीपार थाना में पदस्थ निरीक्षक आनंद शुक्ला का तबादला बीजापुर कर दिया गया है। ट्रैफिक शाखा में कार्यरत निरीक्षक मनीष शर्मा को दंतेवाड़ा भेजा गया है। निरीक्षक श्रद्धा पाठक (मिश्रा) और निरीक्षक वंदिता पानिकर का भी तबादला कोंडागांव जिले में किया गया है। इन सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर दुर्ग जिले को भी तीन नए निरीक्षक मिले हैं। आदेश के अनुसार नारायणपुर से निरीक्षक राकेश कुमार खुटेश्वर, कोंडागांव से निरीक्षक राजकुमारी पांडेय और बस्तर से निरीक्षक मोहम्मद तारीक हारिश का तबादला दुर्ग जिले में किया गया है। ये तीनों अधिकारी जल्द ही जिले में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि उन्हें किस थाना, शाखा या इकाई की कमान सौंपी जाएगी। इसके लिए जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से अलग से स्थानीय पदस्थापना आदेश जारी किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में सुपेला, उतई और कुछ अन्य थानों में थाना प्रभारियों की नई नियुक्तियां की गई थीं। ऐसे में ताजा तबादलों के बाद एक बार फिर थाना स्तर पर व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जिले के कई थानों में नए प्रभारी तैनात होंगे, जिससे पुलिस व्यवस्था में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव प्रशासनिक आवश्यकता और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं। दुर्ग जिला प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में शामिल है, जहां औद्योगिक क्षेत्र, शहरी आबादी और लगातार बढ़ती गतिविधियों के कारण पुलिस व्यवस्था की भूमिका काफी अहम रहती है। सुपेला, जामुल, खुर्सीपार और उतई जैसे थाना क्षेत्र संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में गिने जाते हैं। ऐसे में इन थानों के प्रभारियों में बदलाव का असर स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर भी दिखाई देगा। नए अधिकारी अपनी कार्यशैली के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण की दिशा में काम करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी तबादला सूची केवल दुर्ग जिले तक सीमित नहीं है। राज्यभर के विभिन्न जिलों में कुल 64 निरीक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। इसे पुलिस विभाग का नियमित प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। समय-समय पर अधिकारियों के स्थानांतरण के जरिए विभाग कार्यप्रणाली में संतुलन बनाए रखने और अनुभव का बेहतर उपयोग करने की कोशिश करता है। इसके साथ ही विभिन्न जिलों में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी जाती हैं। तबादला आदेश पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम के हस्ताक्षर हैं। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्थानांतरित अधिकारी तत्काल प्रभाव से अपनी नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। इसके साथ ही संबंधित इकाइयों को भी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नई नियुक्तियों में किसी प्रकार की देरी न हो। थाना स्तर पर नेतृत्व बदलने से कई बार कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। नए अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सामुदायिक पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई रणनीति अपनाते हैं। वहीं पुराने अधिकारियों के अनुभव का लाभ दूसरे जिलों को मिलता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल किए जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>13 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, 1033 सवालों के साथ सरकार को घेरेगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट और मानसून की तैयारियों जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will-start-from-july-13/article-58083"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अब तक विधायकों की ओर से 1033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रश्न विपक्षी कांग्रेस की ओर से हैं। कांग्रेस ने इस बार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़कों की स्थिति और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और अपनी योजनाओं तथा उपलब्धियों को सदन के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधानसभा का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय मुद्दे चर्चा में हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठने वाले हैं। खरीफ सीजन के बीच खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि कई क्षेत्रों से किसानों को समय पर उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं सरकार का दावा है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सदन में इन दावों और आरोपों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कृषि से जुड़े सवालों की संख्या भी इस बार अधिक बताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा सत्र के दौरान प्रमुख बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनने की संभावना है। अतिक्रमण हटाने, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार हो रही है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कई सवाल उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट और खराब सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल हैं। कई जिलों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल की समस्या की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़कों की खराब स्थिति, जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले जिन तैयारियों का दावा किया गया था, उनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है। हालिया बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर भी प्रश्न लगाए गए हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार प्रश्नों की संख्या को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल काफी व्यस्त रहने की संभावना है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य कार्यवाही के दौरान भी कई महत्वपूर्ण विषय सदन में उठ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जा सके। मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर भी विभागवार समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास कार्य लगातार जारी हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा। सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में प्रमुखता से रखने की रणनीति बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बारुईपुर रेप-मर्डर केस में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच में कई अहम खुलासे</title>
                                    <description><![CDATA[पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दावा- दुष्कर्म के बाद नाबालिग को जिंदा तालाब में फेंका गया; मामले में तीन गिरफ्तार, जांच तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/main-accused-arrested-in-baruipur-rape-murder-case-many-important-revelations/article-58050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/baruipur-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी आनंद सरदार को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार देर शाम चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान उसे शहर के बाजार इलाके से पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद इलाके में लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बच्ची 4 जुलाई को घर से अपनी सहेली के लिए उपहार खरीदने निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश की और कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। अगले दिन सूर्यपुर हाट इलाके के एक तालाब से उसका शव बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आए शुरुआती निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के फेफड़ों और पेट में पानी मिला है, जिससे आशंका जताई गई कि दुष्कर्म के बाद उसे जीवित अवस्था में तालाब में फेंका गया था। चिकित्सकीय जांच में यह भी सामने आया कि सिर पर गंभीर चोट लगी थी और शरीर के कई हिस्सों पर खरोंच तथा काटने के निशान मिले हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया था या उसे किसी कठोर सतह पर जोर से पटका गया। अधिक खून बहने और डूबने की वजह से उसकी मौत होने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस जांच में घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांचकर्ताओं को कुछ फुटेज में बच्ची चार लोगों के साथ जाती हुई दिखाई दी है। पुलिस इन लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की पुष्टि करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और फोरेंसिक जांच के आधार पर मामले की हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। इसी बीच मुख्य आरोपी आनंद सरदार की गिरफ्तारी को जांच में अहम सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि उससे पूछताछ के आधार पर आगे और महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भी सामने आया। बच्ची का शव मिलने के कुछ ही देर बाद भीड़ ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ लिया, जिस पर इस वारदात में शामिल होने का संदेह था। उसकी पहचान इंद्रजीत तांती के रूप में हुई। भीड़ ने उसकी कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस दौरान इलाके में तनाव बढ़ गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने भीड़ की हिंसा से जुड़े मामलों की भी अलग से जांच शुरू की है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे सामान्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया। घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विभिन्न दल सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राज्य पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तेजी से आगे बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट में न केवल इस जघन्य अपराध की जांच की प्रगति शामिल होनी चाहिए, बल्कि इसके बाद हुई भीड़ की हिंसा, पुलिस पर हुए हमलों और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं का भी पूरा विवरण होना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम समय पर उठाए जाने चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार देश में हर वर्ष बच्चों के संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत हजारों मामले दर्ज होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई घटनाएं सामाजिक डर, बदनामी या अन्य कारणों से दर्ज ही नहीं हो पातीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल के होटल में हथियारबंद बदमाशों का तांडव, तलवार-चाकू से हमला; CCTV में कैद हुई पूरी वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[मिसरोद क्षेत्र के जैन ब्रदर्स होटल में 10-15 बदमाशों ने चार युवकों, शेफ और कर्मचारियों पर किया हमला। एक युवक गंभीर रूप से घायल, पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/attack-by-armed-miscreants-in-bhopal-hotel-with-sword-and/article-57941"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-hotel-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित बंगरसिया-भोजपुर रोड पर शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 10 से 15 हथियारबंद बदमाश एक होटल में घुस आए और वहां मौजूद लोगों पर जानलेवा हमला कर दिया। तलवार, चाकू, हॉकी स्टिक और बेसबॉल बैट से लैस आरोपियों ने पहले होटल के भीतर तोड़फोड़ की, फिर चार युवकों को निशाना बनाया। बीच-बचाव करने पहुंचे होटल के शेफ और कर्मचारियों के साथ भी मारपीट की गई। पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना शनिवार रात करीब 10:45 बजे जैन ब्रदर्स होटल में हुई। हमले में 24 वर्षीय लीलाधर कुशवाहा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल लीगल केस (MLC) रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें 10 से 12 लोगों के समूह द्वारा धारदार हथियारों से हमला किए जाने का उल्लेख किया गया है। एक अन्य युवक भी घायल हुआ, जिसका प्राथमिक उपचार कराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">घायल लीलाधर कुशवाहा ने बताया कि वह अपने तीन दोस्तों के साथ मंडीदीप स्थित फैक्ट्री से ड्यूटी खत्म कर पैदल होटल में खाना खाने जा रहे थे। राजपूत भवन के पास तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चला रहे कुछ युवकों ने उन्हें टक्कर मार दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो बाइक सवार युवकों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई। जान बचाने के लिए चारों युवक पास के जैन ब्रदर्स होटल के अंदर चले गए, लेकिन कुछ ही मिनट बाद हालात और भयावह हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के कुछ ही देर बाद करीब 10 से 15 युवक तलवार, चाकू, हॉकी और बेसबॉल बैट लेकर होटल में घुस आए। उन्होंने होटल में मौजूद लोगों के बीच दहशत फैलाते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके बाद बदमाशों ने चारों युवकों पर हमला कर दिया। जब होटल के शेफ और अन्य कर्मचारी बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। अचानक हुए हमले से होटल में मौजूद ग्राहक भी घबरा गए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">घायल लीलाधर का आरोप है कि हमलावरों ने पहले होटल के अंदर उसकी बेरहमी से पिटाई की और फिर उसे घसीटकर बाहर ले गए। वहां गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर धारदार हथियारों से कई वार किए गए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार शरीर पर कई गहरे घाव पाए गए हैं। पीड़ित का कहना है कि यदि उसने किसी तरह अपना बचाव नहीं किया होता तो उसकी जान भी जा सकती थी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि कई युवक हथियारों के साथ होटल में प्रवेश करते हैं और फिर हमला शुरू कर देते हैं। पीड़ित पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दिए हैं। पुलिस अब वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही मिसरोद थाना पुलिस एम्स भोपाल पहुंची, जहां घायलों का उपचार चल रहा है। पुलिस ने अस्पताल में पीड़ितों के प्रारंभिक बयान दर्ज किए हैं। थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। घायलों के विस्तृत बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद इलाके के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद बदमाशों का पहुंच जाना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 16:28:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला जज को धमकियों पर हाईकोर्ट सख्त, ACS गृह और DGP से मांगा हलफनामा</title>
                                    <description><![CDATA[गौहत्या से जुड़े चर्चित मामले में उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद मिली जान से मारने की धमकियों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सुरक्षा इंतजामों का पूरा ब्यौरा मांगा, अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-strict-on-threats-to-female-judge-seeks-affidavit/article-57651"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/woman-judge-threats.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">गौहत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने वाली सिवनी मालवा की महिला न्यायिक अधिकारी को मिल रही जान से मारने की धमकियों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने पूछा है कि महिला न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है। न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़े इस घटनाक्रम ने एक बार फिर न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला अगस्त 2022 में हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रदेश में काफी चर्चा बटोरी थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती जा रहे एक ट्रक को नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा क्षेत्र के बराखड़ गांव के पास रोक लिया गया था। ट्रक में करीब 30 मवेशी मौजूद थे। इसके बाद मौके पर ग्रामीणों और गो-रक्षकों की भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि भीड़ ने ट्रक में सवार तीन लोगों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की, जिसमें नाजिर अहमद की मौत हो गई थी। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की अदालत में चल रही थी। सुनवाई पूरी होने के बाद 12 जून को अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद न्यायालय परिसर का माहौल भी तनावपूर्ण हो गया था। बताया गया कि जब पुलिस दोषियों को जेल ले जाने की प्रक्रिया पूरी कर रही थी, उसी दौरान अदालत परिसर में हंगामा हुआ और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">फैसले के कुछ समय बाद ही सोशल मीडिया पर महिला न्यायिक अधिकारी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आने लगीं। अधिकारियों के अनुसार कई प्लेटफॉर्म पर सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिश करते हुए न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। कुछ पोस्ट में जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दो फेसबुक उपयोगकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की। हालांकि लगातार सामने आ रहे संदेशों और धमकियों को देखते हुए न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। न्यायपालिका से जुड़े कई लोगों ने भी इस तरह की घटनाओं को गंभीर बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसी दौरान वर्ष 2016 से लंबित न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। अदालत ने कहा कि यदि किसी न्यायिक अधिकारी को न्यायिक दायित्व निभाने के कारण धमकियां मिलती हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में राज्य की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि महिला न्यायिक अधिकारी को 1-5 श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक पोस्ट और धमकी भरे संदेशों को हटाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। पुलिस की ओर से मामले की जांच जारी है और जिन लोगों की पहचान हुई है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अदालत ने इन जानकारियों को रिकॉर्ड पर लिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि केवल मौखिक जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। इसलिए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को शपथपत्र के माध्यम से यह बताना होगा कि सुरक्षा के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं और भविष्य में क्या व्यवस्था की गई है। हाईकोर्ट ने अपने निर्देशों में यह भी संकेत दिया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि न्यायाधीश कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय देते हैं। यदि फैसलों के बाद उन्हें धमकियों का सामना करना पड़े और पर्याप्त सुरक्षा न मिले तो इसका असर न्यायिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में राज्य सरकार को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत अब 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र का परीक्षण करेगी। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे के निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:40:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोरिया ट्रिपल मर्डर केस की जांच अब CBI करेगी, छत्तीसगढ़ सरकार ने दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नौगई गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या के मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश, अवैध रेत खनन से जुड़े विवाद के आरोपों की भी होगी पड़ताल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/now-cbi-will-investigate-korea-triple-murder-case-chhattisgarh-government/article-57524"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/koriya-triple-murder.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में चर्चा का विषय बने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के चर्चित नौगई ट्रिपल मर्डर मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। राज्य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की औपचारिक सिफारिश करते हुए आवश्यक अनुमति प्रदान कर दी है। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब सीबीआई इस मामले से जुड़े दोनों प्रकरणों की जांच अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस फैसले को मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह मामला 16 जून की रात को कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव में हुई दर्दनाक घटना से जुड़ा है। घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दो पक्षों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि पीड़ितों की फॉर्च्यूनर गाड़ी को पहले एक टिपर वाहन से कई बार टक्कर मारी गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त होकर रुक गया। इसके बाद वाहन में आग लगा दी गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मृतकों की पहचान भारत सिंह, नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। पीड़ित परिवार लगातार इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहा था। परिवार का आरोप है कि हत्या के पीछे अवैध रेत खनन से जुड़ा विवाद और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। राज्य सरकार ने अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 के तहत आवश्यक सहमति जारी की गई है, जिससे केंद्रीय एजेंसी को इस मामले की जांच का अधिकार मिल गया है। अधिसूचना में सोनहत थाना में दर्ज दोनों एफआईआर का उल्लेख किया गया है, जिनकी जांच अब सीबीआई करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार सीबीआई पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करेगी। इसके बाद राज्य पुलिस से केस डायरी, साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य जांच सामग्री अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू की जाएगी। जांच एजेंसी घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण भी कर सकती है और अब तक दर्ज किए गए बयानों के अलावा नए सिरे से गवाहों से पूछताछ भी संभव है। घटना के लगभग दो सप्ताह बाद जांच सीबीआई को सौंपे जाने का निर्णय सामने आया है। इस दौरान पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा। इसी बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। यह मुलाकात मृतकों के तेरहवीं संस्कार के दिन हुई, जिसके बाद सरकार की ओर से सीबीआई जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी गंभीर आपराधिक मामले में जब जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाती है तो उसका उद्देश्य सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करना होता है। सीबीआई तकनीकी साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने का प्रयास करेगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। जिस तरह वाहन को रोककर उस पर हमला किया गया और बाद में आग लगा दी गई, उसने कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए। हालांकि पुलिस ने घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की थी और कई पहलुओं पर काम किया था। अब सीबीआई के आने के बाद जांच नए चरण में प्रवेश करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में वैज्ञानिक जांच और सभी उपलब्ध साक्ष्यों का गहराई से विश्लेषण बेहद महत्वपूर्ण होता है। फॉरेंसिक जांच, घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य, वाहन की तकनीकी जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सीबीआई आमतौर पर इसी प्रक्रिया के तहत जांच को आगे बढ़ाती है। इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी और यदि किसी स्तर पर कोई साजिश या संगठित अपराध से जुड़ा पहलू होगा तो उसकी भी जांच की जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच एजेंसी को हर स्तर पर पूरा सहयोग दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:14:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर के लालखदान ब्रिज पर युवक पर चाकू और बेल्ट से हमला, नकदी-मोबाइल लूटे</title>
                                    <description><![CDATA[देर रात नाइट ड्यूटी से लौट रहे युवक को अज्ञात बदमाशों ने बनाया निशाना, चार दिन में दूसरी वारदात से पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/young-man-attacked-with-knife-and-belt-on-lalkhadan-bridge/article-57209"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-crime-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर शहर में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने एक बार फिर पुलिस की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार देर रात लालखदान फ्लाई ओवर ब्रिज पर नाइट ड्यूटी से लौट रहे एक युवक पर अज्ञात बदमाशों ने चाकू और बेल्ट से हमला कर दिया। हमलावरों ने युवक के साथ मारपीट करने के बाद उससे नकदी और मोबाइल फोन लूट लिया और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल युवक सड़क किनारे पड़ा रहा, जिसे वहां से गुजर रहे राहगीरों ने देखा। लोगों ने तुरंत डायल-112 को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। घायल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना देर रात उस समय हुई जब इलाके में आवाजाही काफी कम थी। बताया जा रहा है कि युवक अपनी नाइट शिफ्ट पूरी कर घर लौट रहा था। जैसे ही वह लालखदान फ्लाई ओवर ब्रिज पर पहुंचा, कुछ अज्ञात युवकों ने उसे रोक लिया। पहले उसके साथ कहासुनी हुई और फिर बेल्ट तथा धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। हमलावरों ने युवक को गंभीर रूप से घायल करने के बाद उसकी जेब में रखी नकदी और मोबाइल फोन छीन लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। घटना के बाद कुछ राहगीरों ने घायल युवक को सड़क पर पड़े देखा। लोगों ने बिना देर किए डायल-112 को सूचना दी। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे निगरानी में रखा है। फिलहाल युवक की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उसे गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस का कहना है कि युवक के बयान के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तोरवा थाना प्रभारी रजनीश सिंह ने बताया कि अभी घायल युवक का विस्तृत बयान दर्ज नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि युवक के परिजन उसकी मोटरसाइकिल लेने थाने पहुंचे थे, लेकिन अब तक इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला केवल लूटपाट के उद्देश्य से किया गया था या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश भी हो सकती है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही घायल का बयान दर्ज होगा, उसके आधार पर मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमलावर किस दिशा से आए और वारदात के बाद किस ओर भागे। यदि आसपास के कैमरों में कोई संदिग्ध गतिविधि रिकॉर्ड हुई होगी तो उससे आरोपियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि कुछ दिन पहले ही शहर के हेमूनगर फ्लाई ओवर ब्रिज के पास भी इसी तरह की वारदात हुई थी। वहां भी एक युवक के साथ मारपीट कर उससे लूटपाट की गई थी। उस मामले में भी आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। लगातार दूसरी घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि रात के समय फ्लाई ओवर और सुनसान इलाकों में पुलिस गश्त पर्याप्त नहीं होने के कारण बदमाश बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लालखदान फ्लाई ओवर ब्रिज पर पहले भी कई बार संदिग्ध लोगों की आवाजाही देखी गई है। रात के समय यहां रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि नियमित गश्त बढ़ाई जाए और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। कई लोगों ने इस मार्ग पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने और रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने की भी मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। यदि घायल युवक के बयान में किसी संदिग्ध का नाम सामने आता है तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि यह मामला लूटपाट का निकलता है तो इलाके में सक्रिय अपराधियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:40:13 +0530</pubDate>
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                <title>सक्ती में दिनदहाड़े युवती की गोली मारकर हत्या, हमलावर मौके से फरार</title>
                                    <description><![CDATA[घर में घुसकर बाइक सवार दो बदमाशों ने की फायरिंग, सिर में गोली लगने से युवती की मौत, पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/the-attacker-absconded-from-the-spot-after-shooting-a-girl/article-57031"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sakti-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में शुक्रवार सुबह दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सक्ती थाना क्षेत्र में रहने वाली 25 वर्षीय युवती पूर्णिमा चौहान की अज्ञात बदमाशों ने उसके घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी। घटना उस समय हुई जब वह अपने घर पर मौजूद थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाइक पर सवार होकर आए दो युवक घर पहुंचे। इनमें से एक युवक बाहर खड़ा रहा, जबकि दूसरा घर के भीतर गया और पूर्णिमा के बारे में पूछताछ करने लगा। जैसे ही युवती सामने आई, आरोपी ने उस पर ताबड़तोड़ तीन राउंड फायरिंग कर दी। गोली उसके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ी। फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों हमलावर फरार हो चुके थे। सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और गंभीर हालत में युवती को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्णिमा चौहान पिछले करीब चार वर्षों से स्वामिनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत थी। बताया जा रहा है कि कंपनी का मुख्य संचालन पंजाब से होता है। शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे दो अज्ञात युवक बाइक से उसके घर पहुंचे। घर के भीतर घुसे आरोपी ने पहले सामान्य तरीके से पूर्णिमा के बारे में पूछा, जिससे किसी को कोई संदेह नहीं हुआ। जैसे ही वह बाहर आई, आरोपी ने बिना किसी बहस या विवाद के उस पर लगातार गोलियां चला दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पूरी घटना कुछ ही सेकंड में हुई और हमलावर तुरंत बाइक पर बैठकर फरार हो गए। परिवार के लोगों ने जब पूर्णिमा को खून से लथपथ हालत में देखा तो तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में घटना सुनियोजित प्रतीत हो रही है, हालांकि हत्या के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि आरोपी युवती को पहले से जानते थे या नहीं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञ और जांच टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और आसपास के लोगों से पूछताछ भी शुरू कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वारदात के दौरान हमलावर जिस बाइक से आए थे, उसकी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा शहर से बाहर जाने वाले मार्गों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद है। घटना के बाद मृतका के परिजन अस्पताल पहुंचे, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे क्षेत्र में इस वारदात को लेकर लोगों में चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनदहाड़े इस तरह घर में घुसकर हत्या की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि हत्या के पीछे की वजह फिलहाल सामने नहीं आई है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत रंजिश, पेशेवर विवाद या अन्य कारणों सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह और आरोपियों की पहचान का खुलासा किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:02:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हेमकुंड साहिब मार्च के दौरान कुल्हाल बॉर्डर पर हंगामा, बैरिकेड तोड़ उत्तराखंड में दाखिल हुए निहंग</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब से निकले निहंगों को रोकने के लिए कुल्हाल चेकपोस्ट पर कड़ी सुरक्षा तैनात थी, लेकिन कई निहंग बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ गए। पुलिस ने पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-at-kulhal-border-during-hemkund-sahib-march-nihangs-entered/article-56971"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nihang-march.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित विकासनगर के कुल्हाल चेकपोस्ट पर गुरुवार रात उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब पंजाब से हेमकुंड साहिब की ओर मार्च कर रहे निहंगों का एक बड़ा जत्था पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड पार कर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करने लगा। मौके पर पहले से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था और पूरे इलाके को सुरक्षा के लिहाज से किले जैसी व्यवस्था में बदल दिया गया था। इसके बावजूद हालात अचानक बिगड़ गए और कुछ निहंगों ने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और निहंगों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। निहंगों का यह जत्था पंजाब के मोहाली से रवाना हुआ था। प्रशासन को पहले ही उनके उत्तराखंड पहुंचने की सूचना मिल गई थी, जिसके बाद कुल्हाल सीमा चौकी पर अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा नियंत्रण टीम और सुरक्षा बैरिकेड तैनात किए गए थे। पुलिसकर्मी सुरक्षा उपकरणों के साथ कई स्तरों की घेराबंदी में मौजूद थे ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। हालांकि देर रात जैसे ही जत्था सीमा पर पहुंचा, वहां माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि कई निहंग पारंपरिक नीले वस्त्र पहने हुए थे और उनके पास तलवारें, लाठियां तथा अन्य धारदार हथियार भी थे, जिन्हें वे धार्मिक परंपरा का हिस्सा बताते हैं। जब पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ देर बाद हालात और बिगड़ गए तथा बैरिकेड को हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी रही। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में देखा गया कि सीमा पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। कई परतों में लोहे के बैरिकेड लगाए गए थे और सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे थे। दूसरी ओर निहंगों का जत्था आगे बढ़ने की कोशिश करता दिखाई दिया। हालांकि अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखी और अतिरिक्त सुरक्षा बल भी मौके पर बुला लिए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार, उत्तराखंड प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी क्योंकि कुछ निहंग संगठनों ने राज्य की ओर मार्च करने की घोषणा की थी। यह पूरा मामला कर्णप्रयाग और नागरासू स्थित गुरुद्वारों से जुड़े विवाद के बीच सामने आया है। प्रशासन को आशंका थी कि बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ सीमा पर पहुंचने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बढ़ा दी गई थी। पुलिस का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह की हिंसक स्थिति को रोकना और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने लगातार निहंगों से बातचीत करने की कोशिश की और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से आगे की प्रक्रिया अपनाने के लिए समझाया। हालांकि कुछ समय तक तनाव बना रहा, लेकिन पुलिस ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और आसपास के क्षेत्रों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई। कुल्हाल बॉर्डर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रवेश मार्ग माना जाता है। इस रास्ते से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन और यात्री गुजरते हैं। ऐसे में सीमा पर हुई इस घटना के बाद प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया। स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर चर्चा का माहौल रहा, जबकि पुलिस लगातार इलाके में गश्त करती रही।  प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात है। वहीं, निहंगों के मार्च और गुरुद्वारा विवाद को लेकर आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:33:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली में 11 वर्षीय बच्ची की हत्या मामले में जांच तेज, आरोपी से पूछताछ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, घटनाक्रम और सबूतों के आधार पर मामले की कई पहलुओं से जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/investigation-intensified-in-the-murder-case-of-11-year-old/article-56863"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/delhi-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में 11 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। घटना सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है और लोग दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बच्ची अपने परिवार के साथ सड़क किनारे सो रही थी। परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला बताया जा रहा है और आर्थिक तंगी के कारण फुटपाथ पर रहने को मजबूर था। पुलिस के अनुसार घटना देर रात की है। बच्ची अपने माता-पिता और अन्य परिजनों के साथ सो रही थी, तभी वह अचानक लापता हो गई। परिजनों ने जब बच्ची को आसपास नहीं पाया तो उसकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें सक्रिय हो गईं। शुरुआती जांच में आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ फुटेज में एक संदिग्ध वाहन दिखाई दिया, जिसके बाद जांच उसी दिशा में आगे बढ़ाई गई। वाहन की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके रूट और मूवमेंट की जानकारी जुटाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले। तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध चालक की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों को वैज्ञानिक तरीके से परखा जा रहा है ताकि अदालत में मजबूत केस पेश किया जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि पीड़ित परिवार बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति में जीवन बिता रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार परिवार पहले किराए के मकान में रहता था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसे वह मकान छोड़ना पड़ा। इसके बाद परिवार फुटपाथ पर रहने लगा। घटना के बाद आसपास के लोगों ने भी गहरा दुख जताया है। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे परिवारों के लिए सुरक्षित आश्रय और बेहतर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर इस तरह के जोखिम कम किए जा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में फोरेंसिक जांच को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों और अन्य साक्ष्यों को विशेषज्ञों के पास भेजा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पुलिस आरोपी की गतिविधियों, उसके संपर्कों और उसके पिछले रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी पहले भी विभिन्न मामलों में कानून के दायरे में आ चुका है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पुराने मामलों से जुड़ी सभी जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी पेशे से कैब चालक था। इसी कारण पुलिस उन कंपनियों से भी जानकारी जुटा रही है जिनसे वह जुड़ा हुआ था। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि भर्ती और सत्यापन की प्रक्रिया में किन मानकों का पालन किया गया था। इस पहलू की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन और कैब सेवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं। सुरक्षा से जुड़ी किसी भी कमी की पहचान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे हालात बनने से पहले रोकथाम के उपाय भी उतने ही जरूरी हैं। विशेष रूप से उन बच्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और जिनकी सुरक्षा के संसाधन सीमित होते हैं। पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपुष्ट खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने की अपील की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस केवल पुष्टि किए गए तथ्यों को ही सार्वजनिक कर रही है। राजधानी में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, सामाजिक असमानता और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:19:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईको पार्क शुल्क विवाद पर आप नेता प्रमोद शर्मा पर केस दर्ज, प्रदर्शन के दौरान मारपीट के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिना अनुमति धरना, सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने और हाथापाई के आरोप; अवैध वसूली का मुद्दा उठाकर कर रहे थे विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/case-registered-against-aap-leader-pramod-sharma-on-eco-park/article-56638"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/eco-park-fee-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा शहर के ईको पार्क में प्रवेश शुल्क को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। रविवार को पार्क परिसर में हुए हंगामे के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया, सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न की और पार्क परिसर में विवाद की स्थिति पैदा की। वहीं दूसरी ओर प्रमोद शर्मा का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह जनहित में था और वे पार्क में हो रही कथित अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।  ईको पार्क में लगाए गए प्रवेश शुल्क को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा था। आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा लगातार इस मुद्दे को उठा रहे थे और प्रशासन से शुल्क व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे थे। रविवार को उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पार्क परिसर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग पार्क के प्रवेश द्वार और परिसर के आसपास एकत्र हो गए थे, जिससे कुछ समय के लिए अव्यवस्था की स्थिति बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन कुछ देर बाद पार्क प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि प्रवेश शुल्क और उसके औचित्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात धीरे-धीरे तनावपूर्ण होते गए और कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान पार्क परिसर में मौजूद पर्यटकों और परिवारों के बीच भी असहज माहौल बन गया। कई लोग अचानक हुए विवाद से घबरा गए और पार्क से बाहर निकलने लगे। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार समय रहते हस्तक्षेप किए जाने से बड़ा विवाद टल गया। हालांकि घटना के बाद पार्क प्रबंधन और पुलिस की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर प्रमोद शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और विरोध के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। प्रमोद शर्मा का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ और उनके समर्थकों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क कर्मचारियों ने विरोध को दबाने की कोशिश की और विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाया। दूसरी तरफ पार्क प्रबंधन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के व्यवहार के कारण कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रमोद शर्मा ने कहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य ईको पार्क में कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाना था। उनका दावा है कि पार्क में प्रति व्यक्ति 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं और इस संबंध में स्पष्ट जानकारी आम लोगों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क में प्रवेश शुल्क के नाम पर लोगों से अनुचित राशि ली जा रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद पुलिस ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि पार्क परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विवाद किस परिस्थिति में शुरू हुआ और हाथापाई की नौबत कैसे आई। जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फिलहाल पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। ईको पार्क शुल्क को लेकर उठा यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक वर्ग जहां प्रवेश शुल्क व्यवस्था का समर्थन कर रहा है, वहीं कुछ लोग शुल्क की दरों और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और दोनों पक्षों के आरोपों में कितनी सच्चाई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:35 +0530</pubDate>
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