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                <title>MSME India - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से सस्ते होंगे व्हिस्की, कार और कपड़े</title>
                                    <description><![CDATA[15 जुलाई से लागू होगा ऐतिहासिक समझौता, 99% सामानों पर टैरिफ में भारी कटौती, व्यापार 2030 तक दोगुना होने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a337b3f0ab00/article-56253"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-uk-fta.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के लागू होते ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर भारत में UK से आने वाली व्हिस्की, लग्जरी कारें, कपड़े और फुटवियर जैसे प्रोडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। वहीं भारत से UK को निर्यात होने वाले लगभग 99% सामानों पर जीरो टैरिफ की सुविधा मिलेगी। इस डील को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देगा। सरकारी और व्यापारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, UK से भारत आने वाले सामानों पर औसत टैरिफ अब 15% से घटकर लगभग 3% रह जाएगा। इस बदलाव के बाद 85% सामान अगले 10 वर्षों में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त हो जाएंगे। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा क्योंकि कई आयातित प्रोडक्ट्स की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी। खासकर स्कॉच व्हिस्की, जिन, लग्जरी कारें और फैशन से जुड़े सामान अब पहले की तुलना में काफी सस्ते मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हिस्की और लग्जरी कारों के सेगमेंट में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। स्कॉच व्हिस्की और जिन पर पहले जहां लगभग 150% टैरिफ लगता था, वह धीरे-धीरे घटकर 40% तक आ जाएगा। वहीं जगुआर, लैंड रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी ब्रिटिश कारों पर भी टैक्स में बड़ी राहत दी जाएगी, जिससे इनकी कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है। इसी तरह चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन, लैंब और सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे फूड प्रोडक्ट्स भी सस्ते हो सकते हैं। फैशन और लाइफस्टाइल सेक्टर में भी इस समझौते का असर साफ दिखेगा। UK से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, होमवेयर, फर्नीचर और कॉस्मेटिक्स पर कम टैरिफ के कारण उनकी कीमतों में गिरावट आएगी। साथ ही मेडिकल डिवाइस और एयरोस्पेस पार्ट्स जैसे हाई-टेक सेक्टर में भी लागत कम होने की उम्मीद है। इससे भारत में इन प्रोडक्ट्स की उपलब्धता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की ओर से भी इस डील को बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। टेक्सटाइल, गारमेंट्स, ज्वेलरी, चमड़ा उद्योग और इंजीनियरिंग सामान जैसे सेक्टर को UK बाजार में अब बिना टैक्स के पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और निर्यात में तेजी आने की संभावना है। विशेषकर सूरत, तिरुप्पुर और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं। फार्मा सेक्टर के लिए भी यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। भारतीय दवाइयों को UK में आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का लाभ मिलेगा, जिससे जेनेरिक दवाइयों की पहुंच ब्रिटेन की हेल्थ सर्विस तक तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा बासमती चावल, समुद्री उत्पाद, मसाले और चाय जैसे कृषि उत्पादों पर भी टैक्स हटने से भारतीय किसानों और निर्यातकों को सीधा फायदा मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते के तहत भारत और UK के बीच व्यापार 2030 तक दोगुना होकर लगभग 120 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके लिए दोनों देशों ने करीब 3 साल और 14 राउंड की बातचीत के बाद इस डील को अंतिम रूप दिया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय माना जा रहा है। यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय में बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ निर्यात बढ़ेगा, बल्कि लाखों नए रोजगार भी पैदा होंगे। खासकर MSME सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, जो भारत के कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी, EV टेक्नोलॉजी और क्लीनटेक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है।  इस डील के लागू होने से पहले दोनों देशों को अपनी घरेलू प्रक्रियाओं और अनुमोदन को पूरा करना होगा। भारत की ओर से केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि UK में संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:36:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सरकार का बड़ा फैसला: 40 केमिकल-पॉलिमर पर आयात शुल्क जीरो किया, 30 जून तक कई उद्योग को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने 40 केमिकल-पॉलिमर पर आयात शुल्क शून्य किया। इससे उद्योग को राहत और लागत में कमी आएगी, फैसला 30 जून तक लागू रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/governments-big-decision-import-duty-on-40-chemicals-and-polymers/article-49931"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/_chemical-polymer-import-duty-zero.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">केंद्र सरकार ने 40 प्रमुख केमिकल, मोनोमर्स और पॉलिमर पर आयात शुल्क शून्य करने का फैसला लिया है, जिससे पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक और उर्वरक उद्योग को तत्काल राहत मिलेगी। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 1 अप्रैल 2026 को गजट अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। इस फैसले के तहत बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है, जो 2 अप्रैल से लागू होकर 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके साथ ही अमोनियम नाइट्रेट पर कृषि अवसंरचना और विकास उपकर भी शून्य कर दिया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यह निर्णय ऐसे समय आया है जब कच्चे माल की वैश्विक कीमतों और सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव से उद्योग दबाव में था। सरकार का मानना है कि आयात शुल्क शून्य करने से उत्पादन लागत कम होगी और घरेलू बाजार में उत्पादों की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">उद्योग पर असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्लास्टिक और पॉलिमर क्षेत्र को इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि ये उद्योग बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं। पेंट, कोटिंग्स और रेजिन बनाने वाली कंपनियों की लागत घटने की संभावना है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">उर्वरक और फार्मास्यूटिकल सेक्टर को भी सस्ता कच्चा माल उपलब्ध होगा, जिससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। टेक्सटाइल, पैकेजिंग और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पृष्ठभूमि और कारण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में केमिकल और पॉलिमर की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसके चलते भारतीय उद्योगों की लागत बढ़ी थी और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सरकार ने पहले भी अस्थायी राहत उपाय अपनाए हैं, लेकिन इस बार का फैसला व्यापक दायरे में लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम निर्यात क्षमता बढ़ाने और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधिकारिक प्रतिक्रिया</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के अध्यक्ष योगेश मेहता ने कहा कि यह निर्णय उद्योगों के लिए “संजीवनी</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> की तरह है। उनके अनुसार, इससे विशेष रूप से MSME सेक्टर को राहत मिलेगी, जो आयातित कच्चे माल पर अधिक निर्भर है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला लोकहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि उत्पादन लागत कम हो और उपभोक्ताओं पर कीमतों का दबाव न बढ़े।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">MSME को राहत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए यह कदम राहत भरा माना जा रहा है। ये इकाइयां सीमित संसाधनों के कारण आयात लागत में बदलाव से सीधे प्रभावित होती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">लागत कम होने से इन उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे की स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यह छूट फिलहाल 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। इसके बाद सरकार बाजार की स्थिति और उद्योग की मांग के आधार पर आगे का फैसला ले सकती है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसका सकारात्मक असर दिखता है, तो इस तरह के उपायों को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। आयात शुल्क शून्य का यह कदम भारत समाचार अपडेट और आज की ताज़ा ख़बरें के बीच उद्योग नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:46:30 +0530</pubDate>
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