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                <title>Government Rules - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Government Rules RSS Feed</description>
                
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                <title>जनगणना में घर–गाड़ी की डिटेल छिपाई तो सीधा जाएंगे जेल, जुर्माना भी लगेगा</title>
                                    <description><![CDATA[जनगणना में घर, संपत्ति या गाड़ी की जानकारी छिपाने पर 3 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान। अधिकारियों ने प्रक्रिया में सख्ती बढ़ाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/if-you-hide-the-details-of-house-and-vehicle-in/article-53193"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t143838.600.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जनगणना की प्रक्रिया के बीच देशभर में लोगों में जागरूकता और थोड़ी चिंता दोनों देखने को मिल रही है। इसके तहत तय किया गया है कि अगर कोई अपने घर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संपत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अन्य जानकारियाँ छिपाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर कोई जानबूझकर तथ्य छिपाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे एक हजार रुपये तक का जुर्माना या तीन साल तक की जेल हो सकती है। खास बात यह है कि यह नियम सिर्फ आम लोगों पर ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जनगणना करने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गोरखपुर में जनगणना के पांचवे दिन भी स्वगणना का काम जारी रहा। इस दौरान कई स्थानों पर लोगों द्वारा जानकारी छिपाने या कम बताने की खबरें आई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रगणक और पर्यवेक्षक अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अगर हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में कोई अनियमितता पाई जाती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसकी जिम्मेदारी प्रगणक पर भी होगी। और अगर किसी क्षेत्र में जनसंख्या या घरों की संख्या सामान्य से कम दिखाई देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पुनरीक्षण कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि पूरा फील्ड वर्क अब भौतिक सत्यापन के आधार पर किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी भी गलती या जानबूझकर छिपाई गई जानकारी को पकड़ा जा सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिला प्रशासन के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनगणना के दौरान टीमें हर घर जाकर सभी विवरणों की जांच कर रही हैं। अगर किसी के पास बड़ा मकान है और वह कम कमरे बता रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अगर परिवार में दो-तीन गाड़ियां हैं लेकिन सिर्फ एक गाड़ी दर्ज करवाई जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसकी अलग-अलग तरीकों से जांच की जाएगी। इसमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और अन्य रिकॉर्ड भी देखे जाएंगे ताकि सही जानकारी सामने आ सके। जिला जनगणना अधिकारी का कहना है कि लोगों को किसी जानकारी को छिपाने की जरूरत नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जनगणना का डेटा आयकर या किसी वित्तीय कार्रवाई से नहीं जुड़ा होता। यह सिर्फ सांख्यिकीय जानकारी के लिए है। फिर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर कोई जानबूझकर गलत जानकारी देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनगणना फॉर्म में पूछे जा रहे कुछ सवालों को लेकर भी चर्चा चल रही है। 34 सवालों की सूची में परिवार की संरचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सदस्यों की संख्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दंपति से जुड़े सवाल शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कई लोगों को अजीब लग रहे हैं। उदाहरण के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी पूछा जा रहा है कि परिवार में कितनी पत्नियां हैं और इस आधार पर परिवार की संरचना तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल सामाजिक और सांख्यिकीय डेटा को सही तरीके से रिकॉर्ड करना है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्पष्ट किया गया है कि परिवार का मुखिया किसी भी उम्र का व्यक्ति या महिला हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह परिवार की सहमति और स्थिति पर निर्भर करेगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जनगणना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। जमीनी स्तर पर टीमें हर जानकारी की जाँच कर ही फीडिंग कर रही हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में किसी भी गड़बड़ी या विवाद की स्थिति न बने।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:05:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या 5 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर मिलेगा ग्रेच्युटी का पैसा या नहीं? जानिए नया नियम</title>
                                    <description><![CDATA[जानिए Gratuity Rule के नए नियम: 5 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर ग्रेच्युटी मिलेगी या नहीं, 4 साल 240 दिन नियम और नए लेबर कोड की पूरी जानकारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/will-you-get-gratuity-money-if-you-leave-the-job/article-52827"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(99).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Gratuity Rule:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">आज के समय में नौकरी बदलना काफी आम हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर प्राइवेट सेक्टर में जहां बेहतर सैलरी और करियर ग्रोथ के लिए लोग जल्दी-जल्दी बदलाव कर रहे हैं। इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला मुद्दा है ग्रेच्युटी नियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कई कर्मचारी यह समझ नहीं पाते कि अगर वे 5 साल से पहले नौकरी छोड़ दें तो उन्हें ग्रेच्युटी मिलेगी या नहीं। यह सवाल आज भी </span>HR <span lang="hi" xml:lang="hi">डिपार्टमेंट से लेकर कर्मचारियों तक हर जगह पूछा जा रहा है और नए लेबर कोड्स के बाद इस पर और भी कन्फ्यूजन बढ़ गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असल में ग्रेच्युटी एक तरह का इनाम है जो कंपनी कर्मचारी को उसकी लंबी सेवा के बदले देती है। अभी तक के नियमों के मुताबिक किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक लगातार एक ही कंपनी में काम करना जरूरी होता है। अगर कोई कर्मचारी बीच में नौकरी छोड़ देता है तो सामान्य स्थिति में उसे यह लाभ नहीं मिलता। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौत या स्थायी दिव्यांगता जैसे मामलों में यह नियम लागू नहीं होता और परिवार को ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है। लेकिन नए लेबर कोड्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर सोशल सिक्योरिटी कोड को लेकर जो बदलाव चर्चा में हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने इस पूरे सिस्टम को थोड़ा अलग मोड़ दिया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी और विशेषज्ञों की मानें तो नए नियमों में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए राहत दी गई है। यानी अगर कोई कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे 5 साल पूरे करने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऐसे कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की लगातार सेवा के बाद भी ग्रेच्युटी मिलने की संभावना बनती है। यह बदलाव खासकर गिग वर्कर्स और अस्थायी कर्मचारियों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। सरकार की मंशा यही बताई जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि अभी इसे लेकर पूरी तरह से स्पष्टता सभी मामलों में नहीं है और कई नियम लागू होने बाकी हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब बात आती है उस स्थिति की जिसे अक्सर कर्मचारी नजरअंदाज कर देते हैं। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रेच्युटी कानून में एक अहम प्रावधान है जिसे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">4 साल 240 दिन नियम</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है। इसके अनुसार अगर किसी कर्मचारी ने 4 साल पूरे कर लिए हैं और पांचवें साल में कम से कम 240 दिन काम कर लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे भी ग्रेच्युटी का हकदार माना जा सकता है। इस पर अलग-अलग अदालतों के फैसले भी सामने आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें कई बार कर्मचारी के पक्ष में निर्णय दिया गया है। मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले में भी यह माना गया था कि 240 दिन की सेवा को एक पूरा वर्ष माना जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है। हालांकि हर केस में यह ऑटोमैटिक लागू नहीं होता और कंपनी की पॉलिसी भी इसमें भूमिका निभाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि नौकरी छोड़ने या बदलने से पहले कर्मचारी अपने सभी दस्तावेज जैसे नियुक्ति पत्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैलरी स्लिप और अटेंडेंस रिकॉर्ड को ठीक से संभालकर रखें। कई बार इन्हीं कागजों के आधार पर यह साबित होता है कि कर्मचारी ने कितनी अवधि तक लगातार काम किया है। छोटे-छोटे रिकॉर्ड बाद में बड़े फायदे दिला सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा </span>HR <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोफेशनल्स का कहना है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देखा जाए तो ग्रेच्युटी नियम को लेकर अभी भी पूरी तरह स्पष्ट तस्वीर हर कर्मचारी के लिए एक जैसी नहीं है। कुछ कैटेगरी में राहत बढ़ी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वहीं स्थायी कर्मचारियों के लिए पुराना 5 साल वाला नियम अब भी लागू है। ऐसे में नौकरी बदलने से पहले नियमों को अच्छे से समझना और कंपनी की पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरना बाद में आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:51:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल में पब-बार रात 12 बजे तक बंद करना अनिवार्य, सख्ती बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल पब-बार नियम के तहत 11:30 बजे तक सर्विस, उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द भोपाल में नाइटलाइफ को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब तय समय से अधिक खुलने वाले पब-बार पर सीधी कार्रवाई होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strictness-increased-in-bhopal-mandatory-closure-of-pubs-and-bars/article-52082"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/bhopal-news-(1)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल में पब और बार संचालन को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। शहर में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब सभी पब और बार को रात 12 बजे तक हर हाल में बंद करना अनिवार्य कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने शुक्रवार को आयोजित बैठक में यह स्पष्ट निर्देश जारी किए। इसके साथ ही शराब परोसने का समय रात 11:30 बजे तक सीमित कर दिया गया है।  नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।</p>
<p>बैठक में शहर के सभी पब और बार संचालकों व मैनेजरों को बुलाकर नए दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। पुलिस कमिश्नर ने साफ किया कि निर्धारित समय के बाद किसी भी प्रकार की गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम हाल के दिनों में बढ़ती नाइटलाइफ गतिविधियों और उससे जुड़े सुरक्षा मुद्दों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</p>
<h5><strong>मॉनिटरिंग की नई व्यवस्था</strong></h5>
<p>प्रशासन ने निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम भी तैयार किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार जूम एप के जरिए एक विशेष मॉनिटरिंग ग्रुप बनाया जाएगा, जिसमें सभी पब और बार संचालकों को जोड़ा जाएगा।</p>
<p>हर दिन रात 12 बजे तक बंद होने के प्रमाण के तौर पर संचालकों को फोटो भेजनी होगी। यह सिस्टम पुलिस कंट्रोल रूम से मॉनिटर किया जाएगा, जिससे नियमों के पालन की रियल टाइम निगरानी संभव हो सकेगी।</p>
<h5><strong>सुरक्षा पर जोर</strong></h5>
<p>बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई अहम निर्देश दिए गए। सभी पब और बार में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक पर्याप्त रोशनी, प्रशिक्षित सुरक्षा स्टाफ और प्रवेश-निकास पर निगरानी जरूरी होगी। इससे किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सकेगा। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा मानकों में ढिलाई मिलने पर भी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>भोपाल में यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब बड़े शहरों की तरह यहां भी नाइटलाइफ तेजी से बढ़ रही है। इंदौर की तर्ज पर यह मॉडल लागू किया जा रहा है, जहां पहले से ही इसी तरह की मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू है।</p>
<h5><strong>नियमों का सख्त पालन</strong></h5>
<p>पुलिस कमिश्नर ने बैठक में स्पष्ट किया कि यह केवल निर्देश नहीं बल्कि अनिवार्य नियम हैं। यदि कोई पब या बार तय समय के बाद खुला पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सीधे लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।आने वाले दिनों में अचानक निरीक्षण भी किए जा सकते हैं, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि सख्ती से ही व्यवस्था को नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<h5><strong>जनता और व्यवसाय पर असर</strong></h5>
<p>इस फैसले का सीधा असर शहर की नाइटलाइफ और पब-बार व्यवसाय पर पड़ेगा। जहां एक ओर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर कारोबारियों को अपने संचालन समय में बदलाव करना होगा।</p>
<p>आने वाले समय में पुलिस इस सिस्टम की समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर और सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।अधिकारियों का कहना है कि भोपाल पब-बार नियमों का उद्देश्य शहर में सुरक्षित और नियंत्रित नाइटलाइफ सुनिश्चित करना है। यदि सभी संचालक नियमों का पालन करते हैं, तो यह मॉडल अन्य शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 12:28:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>PAN Card New Rules: अब पैन कार्ड बनवाना हुआ कठिन, अब लगेंगे कई तरह के डॉक्यूमेंट, देखें डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[PAN Card New Rules के तहत पैन कार्ड बनाने की प्रक्रिया सख्त हुई, आधार के साथ अतिरिक्त दस्तावेज जरूरी किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/pan-card-new-rules-now-making-pan-card-has-become/article-49941"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/pan-card-new-rules.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। आयकर विभाग ने PAN Card New Rules लागू करते हुए दस्तावेज सत्यापन को पहले से अधिक सख्त कर दिया है। अब केवल आधार और ओटीपी के आधार पर पैन जारी नहीं होगा, बल्कि अतिरिक्त पहचान और पते के प्रमाण भी मांगे जा सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नई व्यवस्था में बदलाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आयकर विभाग द्वारा लागू PAN Card New Rules के अनुसार अब पैन कार्ड आवेदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया गया है। पहले जहां आधार और मोबाइल ओटीपी के जरिए तुरंत पैन जारी हो जाता था, वहीं अब कई मामलों में विस्तृत दस्तावेज जांच अनिवार्य कर दी गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव फर्जी या डुप्लीकेट पैन कार्ड की समस्या को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। इसके तहत अब हर आवेदन का बहु-स्तरीय सत्यापन किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">दस्तावेज प्रक्रिया सख्त</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नए PAN Card New Rules में दस्तावेजों की सूची को भी स्पष्ट और विस्तृत किया गया है। अब आवेदन के समय निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">—</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पहचान प्रमाण के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस मान्य होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जन्मतिथि प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट स्वीकार किए जाएंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पते के प्रमाण के रूप में आधार, वोटर आईडी, बिजली या पानी का बिल उपयोग किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यदि किसी व्यक्ति के नाम में बदलाव हुआ है, जैसे विवाह के बाद नाम परिवर्तन, तो उसके लिए मैरिज सर्टिफिकेट या सरकारी गजट नोटिफिकेशन अनिवार्य होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">फर्जीवाड़े पर रोक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">PAN Card New Rules का मुख्य उद्देश्य सिस्टम में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकना है। पहले कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से अधिक पैन कार्ड बनाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आयकर विशेषज्ञों के मुताबिक, आधार आधारित सिस्टम के बावजूद कई स्तरों पर गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है। इसी को देखते हुए अब अतिरिक्त दस्तावेज सत्यापन जोड़ा गया है, जिससे पहचान की पुष्टि और मजबूत हो सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इसके अलावा आवेदन प्रक्रिया को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा ताकि डिजिटल फ्रॉड और पहचान चोरी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण रखा जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पैन-आधार लिंक अनिवार्य</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सरकार ने PAN Card New Rules के तहत पैन और आधार लिंकिंग को पहले की तरह अनिवार्य रखा है। यदि दोनों दस्तावेज लिंक नहीं होते हैं, तो पैन निष्क्रिय हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ऐसी स्थिति में व्यक्ति आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएगा और बैंकिंग, निवेश तथा वित्तीय लेनदेन में भी परेशानी आ सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों का कहना है कि नाम, जन्मतिथि और अन्य विवरण दोनों दस्तावेजों में समान होना जरूरी है, अन्यथा लिंकिंग में बाधा आ सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों की राय</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आयकर विशेषज्ञ सुरेश कोठारी के अनुसार PAN Card New Rules का उद्देश्य पूरी प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। उनके मुताबिक अब दस्तावेजों की जांच पहले की तुलना में अधिक गहराई से की जाएगी, जिससे गलत पहचान के आधार पर पैन जारी होने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे क्या होगा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आने वाले समय में पैन कार्ड आवेदन प्रक्रिया और अधिक डिजिटल और सुरक्षित की जा सकती है। सरकार लगातार ऐसे बदलाव कर रही है जिससे कर प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और पहचान से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">PAN Card New Rules लागू होने के बाद उम्मीद है कि पैन जारी करने की प्रक्रिया भले ही थोड़ी लंबी हो जाए, लेकिन इसकी विश्वसनीयता और सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:43:03 +0530</pubDate>
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