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                <title>MadhyaPradesh - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ग्वालियर में 'शक्ति दीदी' अभियान का विस्तार, पांच और महिलाएं बनेंगी फ्यूल डिलीवरी वर्कर</title>
                                    <description><![CDATA[जिला प्रशासन की पहल से 'शक्ति दीदी' की संख्या बढ़कर 123 होगी, आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने पर जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48ba035f322/article-57863"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/shakti-didi-campaign.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्वालियर में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन का "शक्ति दीदी" अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में शनिवार, 5 जुलाई को पांच और महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। नई नियुक्तियों के बाद जिले में "शक्ति दीदी" के रूप में काम करने वाली महिलाओं की संख्या 118 से बढ़कर 123 हो जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज में आत्मविश्वास के साथ अपनी पहचान भी बना सकें। इस अभियान के तहत महिलाओं को शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिलीवरी वर्कर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। शुरुआत में इस पहल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं, लेकिन अब यह अभियान महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर सामने आ रहा है। प्रशासन का मानना है कि रोजगार के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला कलेक्टर रुचिका चौहान के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। प्रशासन की योजना है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जाए ताकि उन्हें स्थायी आय का साधन मिल सके। शनिवार को होने वाले कार्यक्रम में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर महिलाओं को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी सौंपेंगे। कलेक्टर रुचिका चौहान दोपहर 12 बजे कम्पू स्थित जैन मोटर्स पेट्रोल पंप पहुंचेंगी, जहां हेमलता, ललिता और प्रियंका को फ्यूल डिलीवरी वर्कर के रूप में नियुक्त किया जाएगा। वहीं वीरपुर स्थित गंगा फिलिंग स्टेशन पर अपर जिला दंडाधिकारी सी.बी. प्रसाद आरती बघेल को "शक्ति दीदी" के रूप में कार्यभार सौंपेंगे। इसके अलावा सिंहपुर रोड, मुरार स्थित मां पेट्रोलियम पर संयुक्त कलेक्टर जुही गर्ग मनीषा को इस अभियान से जोड़ेंगी। प्रशासन के अनुसार सभी महिलाओं को संबंधित पेट्रोल पंपों पर आवश्यक प्रशिक्षण और कार्य से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे अपने दायित्वों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">"शक्ति दीदी" अभियान की शुरुआत महिलाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। आमतौर पर पेट्रोल पंपों पर पुरुष कर्मचारियों की संख्या अधिक देखने को मिलती थी, लेकिन अब इस अभियान के माध्यम से महिलाएं भी इस क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभा रही हैं। प्रशासन का कहना है कि इन महिलाओं ने अपने कार्य के दौरान अनुशासन, ईमानदारी और ग्राहक सेवा के मामले में सकारात्मक उदाहरण पेश किए हैं। यही कारण है कि अभियान को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। जिन महिलाओं को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। नियमित रोजगार मिलने से उनके परिवारों की आय बढ़ी है और वे अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला प्रशासन का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना सबसे जरूरी कदम है। इसी सोच के साथ "शक्ति दीदी" अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और समाज में उनकी भूमिका पहले से अधिक मजबूत हुई है। कई महिलाएं अब अपने परिवार की मुख्य कमाने वाली सदस्य बन चुकी हैं। इसके साथ ही समाज में भी महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है और लोग उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर देने की आवश्यकता को समझ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण और सम्मानजनक रोजगार मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। पेट्रोल पंप जैसे कार्यस्थलों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इसी बदलाव का संकेत है। जिला प्रशासन भविष्य में भी इस अभियान का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को इसका लाभ मिल सके। प्रशासन का कहना है कि रोजगार के साथ-साथ महिलाओं को प्रशिक्षण, कार्यस्थल पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। आने वाले समय में यदि अभियान इसी तरह आगे बढ़ता है तो यह अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्वालियर में "शक्ति दीदी" अभियान अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी का प्रतीक बनता जा रहा है। नई नियुक्तियों के बाद इस अभियान से जुड़ी महिलाओं की संख्या 123 हो जाएगी, जो यह दिखाती है कि जिला प्रशासन महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिग्विजय सिंह का ऐलान: महाकाल से अयोध्या तक करेंगे 1000 किमी पदयात्रा, राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[2 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा, कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी; यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की घोषणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48b697e584e/article-57851"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या की राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी दल या संगठन के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और न ही वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे। उनके अनुसार उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था और आज भी उस दान की रसीद तथा चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने बताया कि पदयात्रा शुरू होने से पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वकीलों से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी है। उनका कहना है कि न्यायालय से राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था बहुत गहरी होती है, इसलिए आर्थिक मामलों में भी स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या आम नागरिक को यदि चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की अपेक्षा है तो वह इस यात्रा में शामिल हो सकता है। उनके अनुसार यात्रा के दौरान वह अपने साथ दान की रसीद और चेक की प्रतियां भी रखेंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए स्वेच्छा से दान दिया था और ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो उनका समाधान भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वह अपना दिया गया चंदा वापस लेकर उसे किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में बने एक गेस्ट हाउस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी सभी संस्थाओं और ट्रस्टों के आर्थिक लेन-देन का समय-समय पर सार्वजनिक विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल एक ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान रूप से पारदर्शिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाने की भी घोषणा की, जिस पर लिखा होगा कि "मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।" इसे उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश बताया। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनकी पूरी यात्रा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि दानदाताओं के मन में उठ रहे सवालों को उचित मंच पर रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नर्मदापुरम में नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक निलंबित, बच्चों से अभद्र व्यवहार के आरोप पर केस दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[इटारसी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय का मामला, शिक्षक पर छात्र-छात्राओं से दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप; मेडिकल रिपोर्ट में नशे की पुष्टि के बाद विभागीय कार्रवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/teacher-reached-school-drunk-in-narmadapuram-case-registered-against-him/article-57832"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmadapuram.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इटारसी के आदिवासी विकासखंड केसला के एक गांव स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक गोपाल गिरी गोस्वामी पर स्कूल में शराब के नशे में पहुंचने, बच्चों के साथ मारपीट करने और छात्राओं से कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण बड़ी संख्या में स्कूल पहुंच गए और शिक्षक के व्यवहार के वीडियो बनाकर अधिकारियों तक पहुंचाए। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के साथ बाल संरक्षण कानून के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जनजातीय कार्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार घटना गुरुवार की बताई जा रही है, जब शिक्षक कथित रूप से नशे की हालत में स्कूल पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे और बच्चों के सामने अनुचित व्यवहार कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने एक छात्र से अपने जूते साफ करने के लिए कहा और उसे अनुचित तरीके से व्यवहार करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। वहीं एक छात्रा को अनुचित संबोधन से बुलाने और अन्य छात्राओं के साथ भी आपत्तिजनक व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले के सामने आने के बाद पूरे गांव में नाराजगी फैल गई और अभिभावकों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीणों का आरोप है कि यह पहली बार नहीं था जब शिक्षक पर इस तरह के आरोप लगे हों। उनका कहना है कि वह लंबे समय से शराब के नशे में स्कूल आते थे और बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार करते थे, लेकिन इस बार घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंच गया। आरोप यह भी है कि शिक्षक ने बीड़ी लाने से इनकार करने पर एक छात्र के साथ मारपीट की। घटना के बाद स्कूल पहुंचे ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी आशा मौर्य, बीआरसी रत्ना सोनिया और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अभिभावकों और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग के निर्देश पर केसला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार बच्चों की काउंसलिंग भी कराई जा रही है ताकि घटना के बाद उनके मन में पैदा हुआ डर और मानसिक तनाव कम किया जा सके। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच संवेदनशीलता के साथ की जा रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। घटना से जुड़े वीडियो भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। शिक्षा विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जाएगी ताकि आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">केसला थाना प्रभारी राहुल रैकवार ने बताया कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय कानून की संबंधित धाराओं और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान मेडिकल परीक्षण भी कराया गया, जिसमें शिक्षक के नशे में होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग विवेक नागवंशी ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। शिक्षा विभाग का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय का वातावरण सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीईओ आशा मौर्य ने बताया कि पालकों, बच्चों और स्कूल से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। सभी तथ्यों को रिपोर्ट में शामिल कर कलेक्टर को भेजा जाएगा। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित निगरानी, समय-समय पर निरीक्षण और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त व्यवस्था लागू करने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गुजरात-एमपी से जैश-ए-मोहम्मद के 8 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, ATS ने नेटवर्क का किया खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात ATS का बड़ा ऑपरेशन, सोशल मीडिया के जरिए कथित भर्ती और पाकिस्तान स्थित हैंडलर से संपर्क की जांच तेज; कई जिलों में एक साथ कार्रवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/8-suspected-jaish-e-mohammed-terrorists-arrested-from-gujarat-mp-ats-reveals-network/article-57831"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gujarat-ats.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित रूप से जुड़े आठ संदिग्धों को गुजरात और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई कई दिनों से चल रही खुफिया निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर की गई। गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उनका नेटवर्क कितना व्यापक था और वे किन गतिविधियों में शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में दो युवकों की उम्र 18 और 19 वर्ष है। प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि सभी गुजरात के रहने वाले हैं और राज्य में जैश-ए-मोहम्मद का एक सक्रिय नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। एटीएस का कहना है कि यह नेटवर्क कथित तौर पर नए सदस्यों को जोड़ने, संगठन की विचारधारा फैलाने और भविष्य में आतंकी गतिविधियों के लिए आधार तैयार करने के उद्देश्य से काम कर रहा था। इसी सूचना के आधार पर एटीएस ने अलग-अलग टीमें बनाकर गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, नवसारी और पाटण के अलावा मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक साथ छापेमारी की। अभियान के दौरान सभी आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी से पूछताछ के साथ-साथ जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि सबसे पहले दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर छह अन्य लोगों तक जांच पहुंची और उन्हें भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के पास से कुछ साहित्य, झंडे और अन्य सामग्री बरामद हुई है, जिसकी जांच की जा रही है। इसके अलावा कई मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। एटीएस का कहना है कि इन मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी मिली है, जिसकी साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच जारी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार सभी संदिग्ध सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में मौजूद एक कथित हैंडलर के संपर्क में थे, जिसकी पहचान 'अब्दुल्ला साहब' के नाम से हुई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी हैंडलर के निर्देश पर गुजरात में संगठन का नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपियों तक कथित तौर पर तीन लाख रुपये की रकम भी पहुंचाई गई थी। फिलहाल एजेंसियां इस धनराशि के स्रोत, लेन-देन के तरीके और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। एटीएस के अनुसार गिरफ्तार किए गए कुछ संदिग्ध पाटण जिले के एक मदरसे में रह रहे थे। वहां से भी कुछ दस्तावेज और प्रचार सामग्री बरामद की गई है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्धों ने कथित तौर पर 'तंजीम' नाम से एक समूह बनाया था, जिसके जरिए नए सदस्यों को जोड़ने और उन्हें संगठन की विचारधारा से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस का दावा है कि यह समूह स्थानीय स्तर पर युवाओं से संपर्क कर उनका ब्रेनवॉश करने की कोशिश कर रहा था। साथ ही प्रतिबंधित संगठन से जुड़े साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर उसे स्थानीय स्तर पर प्रसारित करने की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल चैट, वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं। जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान आधारित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2000 में मसूद अजहर ने की थी। भारत में कई बड़े आतंकी हमलों में इस संगठन का नाम सामने आ चुका है और इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क रहती हैं। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष अप्रैल में गुजरात एटीएस ने कथित तौर पर आईएसआईएस से जुड़े दो संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और नेटवर्क तैयार करने के आरोप लगाए गए थे। ताजा कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या संबंधित एजेंसी को सूचित करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कूनो के चीते मप्र-राजस्थान के 12 जिलों तक पहुंचे, शिकार के तरीके में भी आया बड़ा बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रोजेक्ट चीता की प्रोग्रेस रिपोर्ट में खुलासा, खुले जंगल में 50% शिकार पालतू पशुओं का, आसान शिकार को दे रहे प्राथमिकता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/kunos-leopards-reached-12-districts-of-madhya-pradesh-and-rajasthan/article-57650"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/project-cheetah.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए अफ्रीकी चीते अब भारतीय जंगलों और यहां के वातावरण में पूरी तरह से घुलमिल चुके हैं। प्रोजेक्ट चीता की ताजा प्रोग्रेस रिपोर्ट से पता चलता है कि इन चीतों ने न केवल अपने रहने और विचरण के तरीके में बदलाव किया है, बल्कि शिकार की रणनीति भी बदल ली है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सितंबर 2024 से दिसंबर 2025 तक की रिपोर्ट के अनुसार, खुले जंगल में विचरण कर रहे चीतों के कुल शिकार में अब लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पालतू पशुओं की हो गई है। इनमें करीब 30 प्रतिशत बकरियां और 20 प्रतिशत मवेशी शामिल हैं। वहीं 42 प्रतिशत शिकार चीतल का रहा, जबकि बाकी 8 प्रतिशत अन्य वन्यजीवों का शिकार किया गया। रिपोर्ट बताती है कि कम ऊर्जा खर्च होने और कम जोखिम होने की वजह से चीते अब आसान शिकार को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रोजेक्ट चीता के तहत कूनो में छोड़े गए चीतों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। अब तक ये चीते मध्यप्रदेश और राजस्थान के कुल 12 जिलों तक पहुंच चुके हैं। हाल ही में नर चीता 'अग्नि' रणथंभौर क्षेत्र तक पहुंच गया था, जिससे यह साफ हो गया कि चीते अपने लिए नए इलाकों की तलाश कर रहे हैं। वन विभाग लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और जीपीएस कॉलर की मदद से उनकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है और नए वातावरण में चीते धीरे-धीरे अपना क्षेत्र तय कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कूनो नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र में चीतलों की अच्छी संख्या मौजूद है। यहां प्रति वर्ग किलोमीटर औसतन 23 चीतल पाए जाते हैं, जो चीतों के लिए स्वाभाविक शिकार हैं। लेकिन जब चीते पार्क की सीमा से बाहर निकलकर टेरिटोरियल वन क्षेत्रों या गांवों के आसपास पहुंचते हैं, तब वहां जंगली शिकार की उपलब्धता कम हो जाती है। इसके विपरीत घरेलू पशु आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे में चीते कम मेहनत और कम जोखिम वाले शिकार को चुन रहे हैं, जिसके कारण बकरियां और मवेशी उनके शिकार का हिस्सा बन रहे हैं। यह व्यवहार पूरी तरह असामान्य नहीं है। दुनिया के कई देशों में बड़े मांसाहारी वन्यजीव अपने प्राकृतिक क्षेत्र से बाहर निकलने पर घरेलू पशुओं का शिकार करते हैं। यदि किसी क्षेत्र में जंगली शिकार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न हो तो शिकारी जानवर अपेक्षाकृत आसान विकल्प चुनते हैं। कूनो के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि चीतों को यथासंभव उनके प्राकृतिक आवास में बनाए रखने और पर्याप्त जंगली शिकार उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शावकों की परवरिश कर रही मादा चीता 'ज्वाला' और 'गामिनी' ने सबसे अधिक शिकार किए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार शावकों को पालने के दौरान मादा चीतों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भोजन की आवश्यकता होती है। इसी कारण वे अपेक्षाकृत अधिक शिकार करती हैं। आसान शिकार मिलने पर ऊर्जा की बचत होती है, जिससे शावकों की देखभाल भी बेहतर तरीके से हो पाती है। यह व्यवहार प्राकृतिक पारिस्थितिकी का हिस्सा माना जाता है। प्रोजेक्ट चीता भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से बसाने की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत अफ्रीका से लाए गए चीतों को पहले नियंत्रित बाड़ों में रखा गया और बाद में चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा गया। शुरुआती महीनों में उनके स्वास्थ्य, शिकार की क्षमता और अनुकूलन प्रक्रिया पर विशेष निगरानी रखी गई। अब ताजा रिपोर्ट से संकेत मिल रहे हैं कि अधिकांश चीते भारतीय परिस्थितियों में खुद को ढाल चुके हैं और स्वतंत्र रूप से शिकार करने में सक्षम हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि चीतों का गांवों की ओर बढ़ना वन विभाग के लिए नई चुनौती भी बन रहा है। ग्रामीण इलाकों में पालतू पशुओं के शिकार की घटनाएं बढ़ने से स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ी है। ऐसे मामलों में विभाग प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया अपनाता है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है कि वे रात के समय पशुओं को सुरक्षित बाड़ों में रखें और जंगल से लगे इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतें। आने वाले समय में यदि कूनो और आसपास के क्षेत्रों में जंगली शिकार की संख्या और बढ़ाई जाती है तो चीतों का घरेलू पशुओं पर निर्भर होना कम हो सकता है। इसके लिए आवास प्रबंधन, शिकार प्रजातियों के संरक्षण और वन क्षेत्रों के विस्तार पर लगातार काम करने की आवश्यकता होगी। वहीं चीतों की बढ़ती आवाजाही यह भी दिखाती है कि वे नए क्षेत्रों को तलाश रहे हैं और भारतीय जंगलों में अपना प्राकृतिक विस्तार स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:40:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में भीषण सड़क हादसा, खड्डा टोल प्लाजा के पास ट्रक ने पिकअप को मारी टक्कर; दो लोगों की मौके पर मौत</title>
                                    <description><![CDATA[सीधी से लौट रही पिकअप को देर रात तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में चालक समेत दो लोगों की जान चली गई, जबकि एक व्यक्ति सुरक्षित बच गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/horrific-road-accident-in-rewa-truck-hits-pickup-near-khadda/article-57644"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rewa-road-accident-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रीवा जिले में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। जिले के खड्डा टोल प्लाजा के पास देर रात करीब तीन बजे तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से एक पिकअप वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे खंभे से जा टकराई और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में पिकअप चालक और उसमें सवार एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं वाहन के पिछले हिस्से में सो रहा एक व्यक्ति चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पिकअप वाहन सीधी जिले से शराब की पेटियां उतारकर वापस रीवा की ओर लौट रहा था। वाहन खड्डा टोल प्लाजा के पास पहुंचा ही था कि पीछे से तेज गति से आ रहे ट्रक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रक की रफ्तार काफी अधिक थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। टक्कर के बाद पिकअप कई फीट तक घिसटती हुई सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से जा भिड़ी। हादसे की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर दौड़े और पुलिस को सूचना दी। हादसा इतना भीषण था कि पिकअप का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों मृतकों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर मलबा फैल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस हादसे में पिकअप चालक चंदन दुबे, जो पडरा गांव का निवासी था, की मौके पर ही मौत हो गई। उसके साथ वाहन में सवार राजेश रावत, निवासी रसिया मोहल्ला, ने भी घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। वहीं वाहन के पिछले हिस्से में सो रहे लाला रावत सुरक्षित बच गए। बताया जा रहा है कि हादसे के समय वह वाहन के पीछे आराम कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें गंभीर चोट नहीं आई। इस घटना को देखकर लोग भी हैरान रह गए कि इतनी भीषण दुर्घटना में एक व्यक्ति पूरी तरह सुरक्षित कैसे बच गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और डायल 100 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने सड़क पर यातायात सामान्य कराया और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को किनारे हटवाया। दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद हादसे की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में पुलिस ट्रक चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार को हादसे का मुख्य कारण मान रही है। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि ट्रक और चालक की पहचान जल्द की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी चालक की गिरफ्तारी के बाद दुर्घटना के कारणों की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी। इस दुर्घटना के बाद मृतकों के परिवारों में शोक का माहौल है। परिजनों को जैसे ही हादसे की सूचना मिली, वे अस्पताल और घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि दोनों मृतक मेहनत-मजदूरी और वाहन चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। अचानक हुई इस घटना से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">रीवा जिले में पिछले कुछ समय से सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण आए दिन हादसे सामने आ रहे हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद कई चालक यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रफ्तार पर नियंत्रण और सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन ही ऐसे हादसों को कम कर सकता है। पुलिस अधिकारियों ने वाहन चालकों से अपील की है कि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान सावधानी बरतें और निर्धारित गति सीमा का पालन करें। खासकर रात के समय वाहन चलाते समय अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है। यदि चालक को थकान महसूस हो तो कुछ देर आराम करने के बाद ही यात्रा जारी रखनी चाहिए। साथ ही भारी वाहनों के चालकों को भी सुरक्षित दूरी बनाए रखने और गति नियंत्रित रखने की सलाह दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:53:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में पानी के जार में छिपाकर बेच रहा था नशीली कोरेक्स, ऑपरेशन प्रहार 2.0 में पुलिस ने दबोचा</title>
                                    <description><![CDATA[अमहिया थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर पुलिया के पास ग्राहक का इंतजार कर रहे युवक को गिरफ्तार किया। पानी के जार में छिपाकर रखी अवैध नशीली कफ सिरप जब्त की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/in-rewa-the-drug-corex-was-selling-by-hiding-it/article-57636"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rewa-news-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रीवा जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन प्रहार 2.0 के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। अमहिया थाना पुलिस ने अवैध रूप से नशीली कफ सिरप (कोरेक्स) की बिक्री कर रहे एक युवक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पुलिस की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाए हुए था। वह पानी के जार के अंदर नशीली कफ सिरप छिपाकर ग्राहकों तक पहुंचा रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया और उसके कब्जे से अवैध कफ सिरप बरामद कर ली। 1 जुलाई को की गई। अमहिया थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नरेंद्र नगर स्थित खमरिया हाउस के पास बनी पुलिया पर एक युवक संदिग्ध अवस्था में बैठा हुआ है। सूचना में यह भी बताया गया था कि युवक नीले रंग की जींस और स्काई ब्लू रंग की टी-शर्ट पहने हुए है। उसके पास एक पानी का जार रखा है, जिसमें अवैध नशीली कफ सिरप छिपाकर रखी गई है। वह वहां संभावित ग्राहकों का इंतजार कर रहा है और मौका मिलते ही नशीली दवा की बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। पुलिस जैसे ही बताए गए स्थान पर पहुंची, वहां मौजूद युवक ने पुलिस को देखते ही भागने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस टीम पहले से सतर्क थी और चारों तरफ घेराबंदी कर ली गई थी। कुछ ही दूरी पर युवक को पकड़ लिया गया। पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम मयंक मिश्रा उर्फ अमन गौतम (24) निवासी सुंदर नगर, बोदाबाग बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी की तलाशी लेने पर पुलिस को उसके पास रखा पानी का जार संदिग्ध लगा। जब जार की जांच की गई तो उसके अंदर अवैध रूप से रखी गई नशीली कफ सिरप की बोतलें बरामद हुईं। पुलिस ने मौके पर ही सभी बोतलों को जब्त कर लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस तरीके से नशीली कफ सिरप की बिक्री कर रहा था। पानी के जार में कफ सिरप छिपाने के कारण आम लोगों के साथ-साथ पुलिस को भी उस पर आसानी से शक नहीं होता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशीली कफ सिरप का दुरुपयोग युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग चिकित्सकीय उपयोग के बजाय इसका इस्तेमाल नशे के रूप में करते हैं। इसी कारण बिना वैध अनुमति या निर्धारित नियमों के विपरीत इसकी बिक्री कानूनन अपराध है। पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी को यह नशीली कफ सिरप कहां से मिलती थी और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि उसके अन्य साथियों और सप्लाई चेन की जानकारी जुटाई जा सके। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में नशे के कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। इसके आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अमहिया थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल ने बताया कि जिले में नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऑपरेशन प्रहार 2.0 के तहत पुलिस की विशेष टीमें लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया है, ताकि अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री में शामिल लोगों तक आसानी से पहुंचा जा सके। उन्होंने कहा कि समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस पूरी गंभीरता से काम कर रही है और ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। रीवा पुलिस पिछले कुछ महीनों से नशे के कारोबार पर लगातार कार्रवाई कर रही है। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में अवैध शराब, गांजा, नशीली गोलियां और कफ सिरप की तस्करी करने वालों के खिलाफ कई अभियान चलाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए अवैध कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में लगातार कार्रवाई होने से अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा और समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। लोगों ने पुलिस से इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रखने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी प्रकार की नशीले पदार्थों की बिक्री या तस्करी की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। पुलिस का कहना है कि जनता के सहयोग से ही नशे के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:52:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल-नोएडा के बीच सीधी फ्लाइट सेवा शुरू, पहली उड़ान का वाटर कैनन सलामी से स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[इंडिगो की नई सीधी उड़ान से भोपाल और नोएडा के बीच हवाई सफर आसान हुआ। पहले दिन 41 यात्री भोपाल पहुंचे, जबकि 12 यात्रियों ने भोपाल से नोएडा के लिए उड़ान भरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/direct-flight-service-started-between-bhopal-noida-first-flight-welcomed-with/article-57634"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-noida-flight.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल से नोएडा के बीच सीधी हवाई सेवा की शुरुआत हो गई है। बुधवार को इंडिगो की पहली फ्लाइट के भोपाल पहुंचने के साथ ही इस नई सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। एयरपोर्ट पर विमान का पारंपरिक वाटर कैनन सलामी देकर स्वागत किया गया, जो किसी नई उड़ान सेवा की शुरुआत पर सम्मान और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। इस नई सुविधा से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और दिल्ली-एनसीआर के बीच यात्रा करने वाले लोगों को अब एक नया और सुविधाजनक विकल्प मिल गया है। पहले दिन नोएडा से भोपाल पहुंची इंडिगो की फ्लाइट में 41 यात्री सवार थे, जबकि भोपाल से नोएडा जाने वाली पहली उड़ान में 12 यात्रियों ने सफर किया। शुरुआती दिन होने के कारण यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन एयरलाइन और एयरपोर्ट प्रबंधन का मानना है कि आने वाले दिनों में इस रूट पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ेगी। खासतौर पर कारोबारी यात्रियों, छात्रों और नियमित हवाई यात्रा करने वालों के लिए यह सेवा काफी उपयोगी साबित हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई सेवा के तहत इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-7653 रोजाना शाम 5:20 बजे नोएडा से उड़ान भरती है और शाम 6:50 बजे भोपाल पहुंचती है। इसके बाद वापसी की फ्लाइट 6E-7654 शाम 7:10 बजे भोपाल से रवाना होकर रात 9:25 बजे नोएडा पहुंचती है। इस रूट पर एयरलाइन ने 72 सीटों वाले एटीआर विमान की तैनाती की है। फिलहाल इस सेवा का शुरुआती एकतरफा किराया करीब 4,600 रुपये रखा गया है, जो यात्रा की तारीख और बुकिंग के समय के अनुसार बदल सकता है।भोपाल और नोएडा के बीच सीधी उड़ान शुरू होने से यात्रियों का समय भी बचेगा और यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी। अभी तक दिल्ली या नोएडा पहुंचने के लिए कई यात्रियों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकल्प चुनना पड़ता था। लेकिन अब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन के साथ यह नया रूट लोगों को सीधे एनसीआर के एक अन्य महत्वपूर्ण केंद्र तक पहुंचने की सुविधा देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस नई हवाई सेवा का सबसे अधिक लाभ व्यापारिक यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। दिल्ली-एनसीआर देश का प्रमुख कारोबारी और औद्योगिक क्षेत्र है, जहां मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग कामकाज, बैठकों और निवेश से जुड़े कार्यक्रमों के लिए आते-जाते हैं। सीधी उड़ान शुरू होने से उनकी यात्रा अधिक सुविधाजनक और समय बचाने वाली होगी। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और निजी कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यात्रियों को देश और विदेश के कई शहरों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट की सुविधा भी मिलने लगेगी। इससे भोपाल के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों तक पहुंच और आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस रूट की मांग बढ़ने पर एयरलाइन उड़ानों की संख्या और विमान की क्षमता में भी वृद्धि कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस नई उड़ान के शुरू होने से भोपाल और दिल्ली-एनसीआर के बीच हवाई सेवाओं के विकल्प भी बढ़ गए हैं। वर्तमान में भोपाल से दिल्ली के लिए एयर इंडिया की दो और इंडिगो की तीन नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं। अब नोएडा की सीधी उड़ान जुड़ने से यात्रियों के पास समय, किराए और गंतव्य के अनुसार अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना भी है, जिसका फायदा यात्रियों को बेहतर सेवाओं और प्रतिस्पर्धी किराए के रूप में मिल सकता है। भोपाल एयरपोर्ट प्रबंधन ने इस नई सेवा को शहर की कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। मध्य प्रदेश में पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और सरकारी संस्थानों तक पहुंच आसान होने से राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:16:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP में जल्द बनेगा पुलिस भर्ती बोर्ड, एक ही छत के नीचे होंगी सभी वर्दीधारी विभागों की भर्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[जुलाई में कैबिनेट के सामने आएगा प्रस्ताव, पुलिस, जेल, फायर, फॉरेस्ट और ट्रांसपोर्ट विभाग की भर्ती प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी और तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/police-recruitment-board-will-soon-be-formed-in-mp-recruitment/article-57319"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-recruitment-board-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार जल्द ही पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन करने की तैयारी में है। गृह विभाग ने इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं और अब प्रस्ताव को जुलाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाती है तो प्रदेश में पहली बार पुलिस समेत सभी वर्दीधारी विभागों की भर्ती एक ही बोर्ड के माध्यम से की जाएगी। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक नए पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। इसके दायरे में जेल विभाग, फायर सर्विसेज, परिवहन विभाग, फॉरेस्ट गार्ड, आबकारी और अन्य वर्दीधारी सेवाओं की भर्तियां भी शामिल की जाएंगी। इससे अलग-अलग विभागों में भर्ती के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं पड़ेगी और सभी चयन प्रक्रियाएं एक ही मंच से संचालित होंगी। सरकार का मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और अभ्यर्थियों को भी काफी सुविधा मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> गृह विभाग ने नए भर्ती बोर्ड के संचालन के लिए करीब 200 पदों का प्रस्ताव तैयार किया था। हालांकि वित्त विभाग ने फिलहाल 95 पदों को ही मंजूरी दी है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती चरण में सीमित संसाधनों के साथ बोर्ड की शुरुआत की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार भविष्य में पदों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। बोर्ड के गठन से संबंधित तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है। प्रदेश सरकार का कहना है कि नया भर्ती बोर्ड कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के समानांतर काम करेगा। वर्तमान में पुलिस समेत कई विभागों की भर्ती परीक्षाएं कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से आयोजित होती हैं, जिसके कारण परीक्षाओं और परिणामों में कई बार देरी देखने को मिलती है। अलग भर्ती बोर्ड बनने के बाद ESB पर परीक्षाओं का दबाव कम होगा और वह अन्य विभागों की भर्ती पर अधिक ध्यान दे सकेगा। इससे भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन का सबसे बड़ा फायदा युवाओं को मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया में देरी कम होगी, परिणाम समय पर जारी किए जा सकेंगे और नियुक्ति प्रक्रिया भी पहले की तुलना में तेज होगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों के बीच भर्ती संबंधी समन्वय बेहतर होगा और प्रशासनिक स्तर पर भी कार्य में तेजी आएगी। लंबे समय से अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी और अलग-अलग एजेंसियों की वजह से होने वाली परेशानियों की शिकायत करते रहे हैं। ऐसे में यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। प्रस्तावित बोर्ड भर्ती प्रक्रिया के हर चरण की निगरानी करेगा। इसमें आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा आयोजन, शारीरिक दक्षता परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और अंतिम चयन सूची जारी करने जैसे सभी कार्य एक ही व्यवस्था के तहत किए जाएंगे। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है। साथ ही भर्ती से जुड़े विवाद और प्रशासनिक जटिलताएं भी कम हो सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार इस मॉडल को दूसरे राज्यों के अनुभव के आधार पर लागू करने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में पुलिस भर्ती बोर्ड पहले से कार्यरत हैं और वहां भर्ती प्रक्रिया अलग एजेंसी के माध्यम से संचालित की जाती है। प्रदेश सरकार का मानना है कि इसी तरह का मॉडल अपनाने से मध्य प्रदेश में भी भर्ती व्यवस्था अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाई जा सकेगी। वर्दीधारी विभागों में नियमित और समयबद्ध भर्ती होना बेहद जरूरी है। पुलिस, जेल, फायर सर्विस और फॉरेस्ट जैसे विभाग सीधे कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़े होते हैं। यदि इन विभागों में लंबे समय तक रिक्त पद बने रहते हैं तो इसका असर सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। ऐसे में अलग भर्ती बोर्ड बनने से रिक्त पदों को समय पर भरने में मदद मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का यह भी मानना है कि नई व्यवस्था से पुलिस विभाग को भर्ती प्रक्रिया के लिए अलग से अतिरिक्त संसाधन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक समर्पित बोर्ड पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगा, जिससे विभाग अपने मूल प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेगा। इससे कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यह पूरी योजना कैबिनेट की मंजूरी पर निर्भर है। यदि जुलाई में प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है तो बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद नियमावली, स्टाफ की नियुक्ति और प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में वर्दीधारी विभागों की सभी प्रमुख भर्तियां इसी नए बोर्ड के माध्यम से कराई जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:56:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा के इटमा वाटरफॉल में सेल्फी लेते समय युवक गहरे पानी में गिरा, तलाश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश से परिवार के साथ घूमने आया 21 वर्षीय युवक हादसे का शिकार, तेज बहाव और गहराई के बीच एसडीईआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/while-taking-selfie-in-itma-waterfall-of-rewa-a-young/article-57295"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-waterfall.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा जिले के प्रसिद्ध इटमा वाटरफॉल में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। उत्तर प्रदेश के बरगढ़ निवासी 21 वर्षीय सोनू खान सेल्फी लेते समय अचानक संतुलन बिगड़ने से गहरे पानी में गिर गया। घटना के बाद से युवक का कोई पता नहीं चल सका है और उसकी तलाश के लिए एसडीईआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद लोगों ने युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण वह कुछ ही पलों में पानी में ओझल हो गया। घटना के बाद युवक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और प्रशासन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटा हुआ है। सोनू खान अपने परिवार और कुछ दोस्तों के साथ घूमने के लिए रीवा के इटमा वाटरफॉल पहुंचा था। बारिश के मौसम में यह पर्यटन स्थल बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। बताया जा रहा है कि सोनू झरने के किनारे खड़ा होकर अपने मोबाइल फोन से सेल्फी ले रहा था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह सीधे नीचे गहरे पानी में जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि साथ मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही युवक पानी की तेज धारा में बह गया। उसके साथ आए लोगों ने शोर मचाया और आसपास मौजूद पर्यटकों से मदद मांगी, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद स्थानीय लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। लोगों ने अपने स्तर पर युवक को तलाशने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी एएसआई महेंद्र बागरी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से शुरुआती सर्च अभियान शुरू कराया गया। काफी देर तक पानी में खोजबीन की गई, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद प्रशासन ने एसडीईआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया ताकि विशेष उपकरणों और प्रशिक्षित जवानों की मदद से तलाश अभियान चलाया जा सके। सूचना मिलने के बाद एसडीईआरएफ के उपनिरीक्षक विकास पाण्डेय अपनी टीम के साथ सुबह करीब छह बजे इटमा वाटरफॉल पहुंचे। टीम ने हालात का जायजा लेने के बाद तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। जवान गहरे पानी वाले हिस्सों और झरने के आसपास लगातार कॉम्बिंग सर्च कर रहे हैं। हालांकि रेस्क्यू टीम को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की गहराई काफी ज्यादा है और बारिश के कारण बहाव भी तेज बना हुआ है। ऐसे में गोताखोरों को बेहद सावधानी के साथ पानी में उतरना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि युवक की तलाश तब तक जारी रहेगी जब तक उसे खोज नहीं लिया जाता। एसडीईआरएफ अधिकारियों ने बताया कि जिस स्थान पर युवक गिरा है वहां का रास्ता काफी सकरा और दुर्गम है। इसके अलावा तेज बहाव के कारण रेस्क्यू बोट को पानी में उतारना संभव नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि जवानों को खुद पानी में उतरकर कॉम्बिंग सर्च करनी पड़ रही है। इस प्रक्रिया में समय भी अधिक लग रहा है और जोखिम भी बढ़ गया है। फिर भी पूरी टीम लगातार प्रयास कर रही है ताकि जल्द से जल्द युवक का पता लगाया जा सके। पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद इटमा वाटरफॉल पर मौजूद अन्य पर्यटक भी सहम गए। कई लोगों ने बताया कि बारिश के मौसम में झरनों के आसपास की चट्टानें बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं। इसके बावजूद कुछ लोग बेहतर फोटो और सेल्फी लेने के लिए खतरे वाले हिस्सों तक पहुंच जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग सावधानी बरतने से बचते हैं। प्रशासन समय-समय पर पर्यटकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील करता है, फिर भी कई लोग चेतावनी को नजरअंदाज कर देते हैं। पुलिस अधिकारियों ने भी लोगों से अपील की है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा नियमों का पालन करें और सेल्फी या वीडियो बनाने के लिए किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं। खासकर बारिश के मौसम में झरनों और नदियों के किनारे अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है क्योंकि पानी का बहाव और चट्टानों की फिसलन कभी भी हादसे का कारण बन सकती है। फिलहाल पूरे इलाके में युवक की तलाश जारी है। परिजन लगातार घटनास्थल पर मौजूद हैं और हर गुजरते घंटे के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:26:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्वालियर में 19 साल बताकर दर्ज कराई गुमशुदगी, दस्तावेजों में निकली नाबालिग</title>
                                    <description><![CDATA[नोएडा से बरामद किशोरी ने काउंसिलिंग में खोला बाल विवाह का राज, हाईकोर्ट ने 15 दिन में एफआईआर के दिए निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/a-missing-person-lodged-in-gwalior-as-19-years-old/article-57198"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में एक गुमशुदगी का मामला उस समय नया मोड़ ले गया, जब पुलिस जिस युवती को बालिग मानकर तलाश रही थी, वह बरामद होने के बाद दस्तावेजों में नाबालिग निकली। मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि किशोरी का कम उम्र में ही गुपचुप तरीके से बाल विवाह करा दिया गया था। इस खुलासे के बाद मामला केवल गुमशुदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाल विवाह और पॉक्सो एक्ट से जुड़ी गंभीर कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया। हाईकोर्ट ने भी मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को 15 दिन के भीतर बाल विवाह कराने वाले सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के सागरताल फेज-2 निवासी एक व्यक्ति ने 12 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 19 वर्षीय बेटी घर से लापता हो गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी। सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने दो दिन पहले युवती को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा से बरामद कर लिया। वह बहोड़ापुर निवासी किशन खटीक के साथ मिली। पुलिस दोनों को ग्वालियर लेकर आई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। मामले में सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब युवती को न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट की प्रक्रिया के दौरान उसकी मार्कशीट और जन्म प्रमाण पत्र की जांच की गई। दस्तावेजों में उसकी उम्र 19 वर्ष नहीं बल्कि 17 वर्ष दर्ज मिली। इसके बाद पूरा मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण गंभीर हो गया। पुलिस ने तत्काल अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और किशोरी से काउंसिलिंग कराई गई ताकि पूरे घटनाक्रम की सही जानकारी सामने आ सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">काउंसिलिंग के दौरान किशोरी ने जो जानकारी दी, उसने जांच को पूरी तरह नई दिशा दे दी। उसने बताया कि उसके पिता ने उसकी इच्छा के विरुद्ध कम उम्र में ही शादी करा दी थी। वह अपने कथित पति और ससुराल पक्ष के साथ नहीं रहना चाहती थी। इसी कारण उसने घर छोड़ने का फैसला किया और पड़ोस में रहने वाले किशन खटीक के साथ चली गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को भी बाल विवाह की पुष्टि से जुड़े तथ्य मिले हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बाल विवाह किस परिस्थिति में कराया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की भी अहम भूमिका रही। युवती के पिता ने पहले पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। जब युवती बरामद हुई और उसकी वास्तविक उम्र के साथ बाल विवाह का मामला सामने आया तो न्यायालय ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए। अदालत ने बहोड़ापुर थाना पुलिस को आदेश दिया कि 15 दिन के भीतर बाल विवाह कराने वाले सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। अदालत के इस आदेश के बाद पुलिस ने जांच को और तेज कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस ने किशन खटीक के खिलाफ नाबालिग को अपने साथ ले जाने के मामले में अपहरण और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं अब जांच का फोकस किशोरी के माता-पिता, कथित पति, ससुराल पक्ष और उन सभी लोगों पर है जो बाल विवाह की प्रक्रिया में शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आती है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत अलग से मामला दर्ज किया जाएगा। बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया कि नोएडा से बरामद किशोरी की उम्र दस्तावेजों के अनुसार 17 वर्ष है। जांच के दौरान बाल विवाह की पुष्टि हुई है और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सभी दस्तावेजों और बयानों की जांच कर रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का मौका न मिले। कानूनी रूप से बाल विवाह प्रतिबंधित होने के बावजूद कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। बाल विवाह से न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन होता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर असर पड़ता है। ऐसे मामलों में परिवार के साथ-साथ विवाह कराने वाले लोगों की भी जिम्मेदारी तय होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एमपी में 65 डीएसपी के तबादले, बालाघाट हॉक फोर्स में 18 अफसरों की तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर के सीएसपी बदले, कई जिलों में नई जिम्मेदारियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/65-dsps-transferred-in-mp-18-officers-posted-in-balaghat/article-57197"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-dsp-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के बड़े स्तर पर तबादले करते हुए शनिवार देर रात 65 डीएसपी स्तर के अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए। गृह विभाग द्वारा जारी इस तबादला सूची में ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे प्रमुख शहरों के नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) बदले गए हैं। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के कई अधिकारियों को शहरी क्षेत्रों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय बाद जारी हुई इस व्यापक तबादला सूची को पुलिस प्रशासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा जरूरत के अनुसार अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना है। इस तबादला आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात बालाघाट जिले में हॉक फोर्स को लेकर की गई बड़ी नियुक्तियां हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण बालाघाट में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों को सहायक सेनानी के रूप में हॉक फोर्स में पदस्थ किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों को देखते हुए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती जरूरी थी। इसी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में अधिकारियों को यहां भेजा गया है ताकि नक्सल विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिन अधिकारियों को बालाघाट हॉक फोर्स में सहायक सेनानी की जिम्मेदारी दी गई है उनमें उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, रितेश कुमार शिव, रविंद्र सिंह राठी, आयुष कुमार अलावा, सचिन पटेल, कुंदन मंडलोई, राहुल कुमार सय्याम, अक्षय चौधरी, अतुल कुमार सोनी, अमन मिश्रा, रोहित राठौर और राकेश आर्य सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों को जल्द ही अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इनकी तैनाती के बाद क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा अभियानों को नई गति मिलेगी।केवल हॉक फोर्स ही नहीं, बल्कि बालाघाट जिले में एसडीओपी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर तथा अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों को भी नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती आवश्यक थी। उधर ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में भी नगर पुलिस अधीक्षकों के बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन शहरों में कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों की नई तैनाती की गई है। इसके अलावा भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को शहरी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी देकर पुलिस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि सरकार की ओर से इन तबादलों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए इस तरह के तबादले किए जाते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संतुलन बना रहता है, बल्कि विभिन्न जिलों में बेहतर पुलिसिंग भी सुनिश्चित होती है। खासकर संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलती है। बालाघाट जैसे सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित जिले में अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय से अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की नई पदस्थापना को इन अभियानों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं जिन जिलों में नए सीएसपी और एसडीओपी की नियुक्ति हुई है, वहां स्थानीय पुलिस व्यवस्था में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को शीघ्र नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में नई तैनाती के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से बालाघाट में हॉक फोर्स की मजबूती से नक्सल विरोधी अभियानों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:48 +0530</pubDate>
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