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                <title>Hindu temple - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Hindu temple RSS Feed</description>
                
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                <title>चित्रकूट पहुंचे सीएम योगी, कामदगिरि परिक्रमा कर बरहा हनुमान मंदिर में की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-yogi-reached-chitrakoot-circumambulated-kamadgiri-and-worshiped-at-barha/article-58273"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/yogi-adityanath-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह धार्मिक नगरी चित्रकूट पहुंचकर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए और कामदगिरि की पवित्र परिक्रमा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह धार्मिक कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा। सुबह से ही चित्रकूट में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा बल तैनात रहे और पूरे कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जाती रही। मुख्यमंत्री के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़क किनारे और मंदिर परिसर में पहले से मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 7:10 बजे चित्रकूट के प्रसिद्ध बरहा हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। मंदिर में पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, शांति और जनकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और वहां मौजूद संतों से भी मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">बरहा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने कामदगिरि की लगभग पांच किलोमीटर लंबी पवित्र परिक्रमा शुरू की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामदगिरि पर्वत को भगवान श्रीराम का स्वरूप माना जाता है और इसकी परिक्रमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान चित्रकूट में लंबा समय बिताया था। इसी कारण देशभर से लाखों श्रद्धालु वर्षभर यहां दर्शन और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने भी पारंपरिक तरीके से पैदल चलते हुए परिक्रमा पूरी की।</p>
<p style="text-align:justify;">परिक्रमा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ साधु-संत, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा कर्मी भी मौजूद रहे। रास्ते में उन्होंने कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। परिक्रमा मार्ग पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री को करीब से देखने का खास उत्साह दिखाई दिया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उन पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पूरे मार्ग में 'जय श्रीराम' और 'जय कामतानाथ' के जयघोष लगातार सुनाई देते रहे, जिससे धार्मिक माहौल और भी भक्तिमय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के इस दौरे की एक और तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। परिक्रमा के दौरान उन्होंने रास्ते में मौजूद बंदरों को चना भी खिलाया। चित्रकूट में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं और श्रद्धालु उन्हें प्रसाद या चना खिलाना शुभ मानते हैं। मुख्यमंत्री ने भी कुछ समय रुककर बंदरों को चना खिलाया। वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में कैद किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किए जाने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के चित्रकूट दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग के हर प्रमुख स्थान पर पुलिस बल तैनात रहा। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए गए थे। प्रशासन का कहना था कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं।चित्रकूट धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी अनेक मान्यताएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं। कामदगिरि परिक्रमा, रामघाट, बरहा हनुमान मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के आगमन का स्वागत किया और इसे चित्रकूट के लिए गौरव का विषय बताया। व्यापारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में चित्रकूट में तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई योजनाओं पर भी काम होगा। कामदगिरि परिक्रमा पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बांदा के लिए रवाना होने का कार्यक्रम निर्धारित था। वहां भी उनके कई सरकारी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। हालांकि चित्रकूट में उनका यह दौरा पूरी तरह धार्मिक गतिविधियों पर केंद्रित रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना एवं परिक्रमा संपन्न की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की चांदी और नकदी पर उठे सवाल, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अब आगर मालवा स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की नकदी, चांदी और अभिलेखों को लेकर जांच शुरू, प्रशासन ने गठित की समिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-silver-and-cash-offered-in-baglamukhi-temple/article-58238"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/baglamukhi-temple2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चांदी और नकदी में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने मध्य प्रदेश में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आगर मालवा जिले के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। कलेक्टर ने एक जांच समिति का गठन करते हुए सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जांच केवल चांदी और नकदी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि श्रद्धालुओं की ओर से वर्षों से चढ़ाए गए सोना, चांदी, नकदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी बारीकी से पड़ताल की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने मंदिर प्रबंधन व्यवस्था और चढ़ावे के रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में गड़बड़ी करने वाले लोग किसी भी तरह की रियायत के पात्र नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग राक्षस की मानसिकता वाले हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालु मंदिरों में अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि उस विश्वास के साथ किसी तरह का खिलवाड़ किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कलेक्टर की ओर से जारी आदेश में जांच समिति को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति यह पता लगाएगी कि श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी, सोना और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है। इनकी एंट्री किस प्रकार की जाती रही है, सुरक्षित रखने की व्यवस्था कैसी है और संबंधित बैंक खातों में जमा राशि का पूरा विवरण क्या है। इसके अलावा मंदिर से जुड़े अभिलेखों की भी जांच होगी ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उपलब्ध रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में कहीं कोई अंतर तो नहीं है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन समिति या अन्य संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है तो उसका स्पष्ट उल्लेख रिपोर्ट में किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच दल को तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज, रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी होगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन चाहता है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो ताकि किसी भी तरह की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। सात दिनों में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं। शिकायतों के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और अब औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चढ़ावे का हिसाब-किताब निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रखा गया था या नहीं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण के दोषी नहीं माना जाएगा, लेकिन यदि अनियमितता साबित होती है तो कार्रवाई निश्चित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आगर मालवा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि यह पांडवकालीन मंदिर है और महाभारत काल में पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से यहां मां बगलामुखी की आराधना करते हुए शत्रु विजय यज्ञ किया था। इसी वजह से देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब बगलामुखी मंदिर का मामला भी चर्चा का विषय बन गया है। ऐसे समय में प्रशासन की यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर नई व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी चर्चा तेज हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर पहुंचे पीएम मोदी, प्रम्बानन में की पूजा-अर्चना</title>
                                    <description><![CDATA[एक हजार साल पुराने प्रम्बानन मंदिर की जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो रहे साथ, आसमान से मंदिर का वीडियो भी किया साझा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-reached-indonesias-largest-hindu-temple-and-offered-prayers/article-58167"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-indonesia.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन वहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन पहुंचकर भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। बुधवार को प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर की जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया, पूजा-अर्चना की और मंदिर के पुजारियों से आशीर्वाद भी लिया। प्रधानमंत्री ने इस यात्रा की कई तस्वीरें और एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें विमान से प्रम्बानन मंदिर का भव्य दृश्य दिखाई दे रहा है। उनकी इस यात्रा को दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री बुधवार शाम इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना होंगे, जहां उनका तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा प्रस्तावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। करीब एक हजार वर्ष पुराने इस मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। मंदिर परिसर अपनी भव्य वास्तुकला, पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी और विशाल शिखरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित मुख्य मंदिर स्थित हैं। इनमें भगवान शिव का मंदिर सबसे ऊंचा और सबसे प्रमुख माना जाता है। पूरे परिसर में लगभग 240 छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं, जो प्राचीन जावानी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर पहुंचने के बाद सबसे पहले जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। इस दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी प्रधानमंत्री के साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और इसके ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच सांस्कृतिक सहयोग और विरासत संरक्षण को लेकर भी बातचीत हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस यात्रा की तस्वीरें साझा करते हुए इंडोनेशिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने विमान से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें आसमान से दिखाई देता प्रम्बानन मंदिर बेहद आकर्षक नजर आता है। वीडियो में मंदिर का विशाल परिसर और उसकी ऐतिहासिक संरचना साफ दिखाई देती है। इस वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। कई लोगों ने इसे भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का खूबसूरत प्रतीक बताया। भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध कई सदियों पुराने हैं। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहां हिंदू संस्कृति और परंपराओं का प्रभाव आज भी कई क्षेत्रों में दिखाई देता है। विशेष रूप से बाली और जावा जैसे क्षेत्रों में रामायण और महाभारत से जुड़ी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। प्रम्बानन मंदिर इसी साझा विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मंदिर की दीवारों पर रामायण की कथा को दर्शाने वाली अद्भुत नक्काशी आज भी पर्यटकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक कूटनीति का भी अहम हिस्सा है। भारत पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में प्रम्बानन मंदिर का दौरा साझा विरासत और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी लगातार बढ़ रहा है। प्रम्बानन मंदिर हर वर्ष लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां नियमित रूप से धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। रामायण बैले नृत्य नाटिका यहां की सबसे प्रसिद्ध प्रस्तुतियों में शामिल है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक पहुंचते हैं। मंदिर परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार इंडोनेशिया सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, ताकि इसकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इंडोनेशिया में आधिकारिक कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री अब ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना होंगे। वहां 8 से 10 जुलाई तक विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, भारतीय समुदाय से संवाद और कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी तय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:45:51 +0530</pubDate>
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                <title>काल भैरव मंदिर में VIP दर्शन से 45 दिनों में ₹3.09 करोड़ की आय, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ बनी बड़ी वजह</title>
                                    <description><![CDATA[₹500 की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर प्रबंधन को मिली रिकॉर्ड आय, महाकाल मंदिर के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव धाम पहुंच रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-early-darshan-vip-ticket-system-of-%E2%82%B9-500-started/article-57942"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kal-bhairav-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में शुरू की गई ₹500 की शीघ्र दर्शन (VIP दर्शन) व्यवस्था मंदिर प्रबंधन के लिए आय का बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। महज 45 दिनों के भीतर इस व्यवस्था से 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय दर्ज की गई है। 20 मई से 3 जुलाई के बीच हुई इस कमाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और दर्शन की सुगम व्यवस्था के लिए शुरू किया गया यह प्रयोग सफल साबित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर के बाद उज्जैन में सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर पहुंचते हैं। विशेष रूप से शनिवार, रविवार, अवकाश और धार्मिक पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसी बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन कराने के उद्देश्य से ₹500 की शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था लागू की गई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>45 दिनों में तीन करोड़ से अधिक की आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 20 मई से 3 जुलाई तक VIP दर्शन टिकटों की बिक्री से कुल 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय हुई। यह आय केवल उन दिनों की है, जब टिकटों का नियमित वितरण हुआ। जिन दिनों अत्यधिक भीड़ के कारण टिकट वितरण रोक दिया गया था, उनकी आय इस आंकड़े में शामिल नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य सामान्य दर्शन व्यवस्था को प्रभावित किए बिना भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span>महाकाल के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर में</span></h3>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधक संध्या मार्कंडेय के अनुसार उज्जैन आने वाले अधिकांश श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद काल भैरव मंदिर अवश्य पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते, जब तक श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण वर्षभर यहां श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या बनी रहती है। विशेष अवसरों और छुट्टियों के दौरान मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिलती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अलग प्रवेश मार्ग से कराए जाते हैं शीघ्र दर्शन</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">VIP दर्शन व्यवस्था के तहत टिकट लेने वाले श्रद्धालुओं को अलग प्रवेश मार्ग से मंदिर में प्रवेश कराया जाता है। इससे उन्हें लंबी कतार में खड़े रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती और कम समय में दर्शन हो जाते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग संचालित की जाती हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>प्रतिदिन लाखों रुपये की होती है आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार सामान्य दिनों में शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक की आय होती है। वहीं यदि किसी धार्मिक पर्व, शनिवार, रविवार या अवकाश के कारण श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है तो यह आय बढ़कर 10 से 11 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>भीड़ बढ़ने पर रोकना पड़ता है टिकट वितरण</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">काल भैरव मंदिर का परिसर सीमित क्षमता वाला है। ऐसे में यदि अचानक श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाती है तो सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए VIP टिकटों का वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि कई बार आधे घंटे या उससे अधिक समय तक टिकट बिक्री बंद रखनी पड़ती है ताकि परिसर में धक्का-मुक्की जैसी स्थिति न बने और सभी श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अवकाश के दिनों में रहती है सबसे ज्यादा भीड़</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">शनिवार, रविवार, मुहर्रम सहित अन्य सार्वजनिक अवकाशों के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में सामान्य दर्शन के साथ-साथ शीघ्र दर्शन टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। हालांकि, अत्यधिक भीड़ होने पर प्रशासन को VIP टिकट जारी करना बंद करना पड़ता है ताकि मंदिर परिसर की क्षमता से अधिक लोगों का प्रवेश न हो। पहले छुट्टियों के दौरान भी टिकट जारी किए जाते थे, लेकिन बाद में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में बदलाव किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>धार्मिक पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव काल भैरव, हरसिद्धि, मंगलनाथ, चिंतामन गणेश और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है। बेहतर व्यवस्थाओं और सुविधाओं के कारण श्रद्धालुओं का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>व्यवस्था और सुविधाओं पर रहेगा जोर</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही VIP दर्शन व्यवस्था का संचालन भी पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगा। 45 दिनों में तीन करोड़ रुपये से अधिक की आय यह दर्शाती है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बागेश्वर धाम पहुंचे अनंत अंबानी, बालाजी की पूजा और यज्ञ में हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[बागेश्वर धाम पहुंचे उद्योगपति अनंत अंबानी ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ बालाजी के दर्शन किए, महाआरती में शामिल हुए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ-हवन में आहुतियां अर्पित कर देश, धर्म और जनकल्याण की कामना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/anant-ambani-reached-bageshwar-dham-and-participated-in-the-worship/article-57739"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bageshwar-dham.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के प्रमुख उद्योगपति अनंत अंबानी गुरुवार शाम विशेष विमान से मध्य प्रदेश के खजुराहो पहुंचे, जहां उनका स्वागत बागेश्वर धाम सेवा समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने किया। स्वागत के दौरान खजुराहो सांसद एवं पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी मौजूद रहे। एयरपोर्ट से अनंत अंबानी सीधे बागेश्वर धाम रवाना हुए। उनके आगमन की सूचना पहले से होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम परिसर में मौजूद रहे और उन्होंने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। बागेश्वर धाम पहुंचने के बाद अनंत अंबानी की मुलाकात कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से हुई। दोनों ने एक-दूसरे का आत्मीय भाव से अभिवादन किया। इस दौरान फोटो सेशन के दौरान एक रोचक पल देखने को मिला, जब अनंत अंबानी ने मुस्कुराते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का हाथ पकड़कर अपने पास खींच लिया और सहज अंदाज में कहा, "आपने आने के लिए कहा था, तो मैं आ गया।" वहां मौजूद लोगों ने इस पल का स्वागत तालियों के साथ किया। दोनों के बीच हुई यह आत्मीय बातचीत चर्चा का विषय बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अनंत अंबानी को बागेश्वर बालाजी भगवान, सन्यासी बाबा और प्रेतराज सरकार के दर्शन कराए। दर्शन के दौरान उन्होंने धाम की धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक महत्व और यहां की मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अनंत अंबानी ने मंदिर परिसर में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और भगवान से देश की समृद्धि, समाज के कल्याण तथा सभी नागरिकों के सुख-शांति की प्रार्थना की। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दर्शन के बाद अनंत अंबानी और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्री बागेश्वर बालाजी भगवान की महाआरती में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच आयोजित महाआरती में दोनों ने पूरे श्रद्धाभाव से पूजा की। मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने भी आरती में भाग लेकर धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। आरती के दौरान देश, धर्म, समाज और मानव कल्याण की मंगलकामना की गई। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालु जयकारों के साथ पूजा-अर्चना में शामिल हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाआरती के बाद दोनों धाम परिसर स्थित यज्ञशाला पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ-हवन का आयोजन चल रहा था। अनंत अंबानी ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं और वैदिक परंपराओं का पालन करते हुए धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस अनुष्ठान के दौरान विशेष मंत्रों का उच्चारण किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यज्ञ को सकारात्मक ऊर्जा, लोककल्याण और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यज्ञ संपन्न होने के बाद अनंत अंबानी ने धाम में 11 कन्याओं का विधिवत पूजन किया। उन्होंने सभी कन्याओं को दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही काशी से आए विद्वान ब्राह्मणों का सम्मान किया और उनसे शुभाशीष लिया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे शुभ कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस अवसर पर मौजूद श्रद्धालुओं ने भी इस धार्मिक आयोजन को श्रद्धा और आस्था के साथ देखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अनंत अंबानी और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बीच पहले भी कई बार मुलाकातें हो चुकी हैं। दोनों के बीच लंबे समय से आत्मीय संबंध रहे हैं, जिसकी झलक विभिन्न धार्मिक आयोजनों में देखने को मिलती रही है। अनंत अंबानी समय-समय पर बागेश्वर धाम की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सहयोग भी करते रहे हैं। विशेष रूप से धाम में 24 घंटे संचालित होने वाली 'अन्नपूर्णा रसोई' (भंडारा) में उनके सहयोग का उल्लेख कई अवसरों पर किया गया है। यही कारण है कि धाम में उनके आगमन को केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि लंबे समय से जुड़े धार्मिक संबंधों की निरंतरता के रूप में भी देखा जा रहा है। अनंत अंबानी की इस यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात की निगरानी की। दर्शन, महाआरती, यज्ञ-हवन और कन्या पूजन जैसे सभी कार्यक्रम निर्धारित समय के अनुसार आयोजित किए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 09:58:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मंगलवार भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[चंदन, त्रिपुंड, भांग और रजत मुकुट से हुआ दिव्य श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/baba-mahakal-dressed-as-a-king-in-bhasma-aarti-on/article-54702"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रतिदिन की तरह भस्म आरती से पहले पुजारियों ने प्रथम घंटानाद के साथ गर्भगृह में प्रवेश किया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान का ध्यान किया गया और हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। आरती के पश्चात बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार प्रारंभ हुआ। जटाधारी स्वरूप में भगवान के मस्तक पर चंदन, तिलक, त्रिपुंड और भांग अर्पित की गई। इसके साथ ही उन्हें रजत मुकुट धारण कराया गया और राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दिव्य स्वरूप देखते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से भर उठीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित किया गया और पारंपरिक रीति से भस्म रमाई गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी विशेष पहचान रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल ही ऐसे देव हैं जिनकी आरती भस्म से की जाती है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत और दुर्लभ आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भक्तों के कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखी गई। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु देर रात ही मंदिर परिसर पहुंच गए थे ताकि वे भस्म आरती के दिव्य दर्शन कर सकें। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। मंगलवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। मंगलवार की भस्म आरती के दौरान भी मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोजशाला से फिर चर्चा में आई मां वाग्देवी की प्रतिमा, मुगल आक्रमण में हुई थी खंडित, 17 साल से ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है मूल प्रतिमा</title>
                                    <description><![CDATA[धार भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा फिर चर्चा में आ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-statue-of-maa-vagdevi-came-into-limelight-again-from/article-53549"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-mother-vagdevi-idol.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने धार के भोजशाला को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए इसे हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले के दौरान कोर्ट ने पुरातात्विक साक्ष्यों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र किया। इसके बाद एक बार फिर भोजशाला और मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा की चर्चा शुरू हो गई है। कहा जाता है कि यह वही प्रतिमा है जिसे हिंदू संगठन भोजशाला की आराध्य देवी मानते हैं। मुग़ल आक्रमण के दौरान यह प्रतिमा खंडित हो गई थी और बाद में इसे अंग्रेजों ने खुदाई में निकाला। अब यह प्रतिमा पिछले 117 साल से लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम के ग्रेट रसल स्ट्रीट में एक कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखी गई है। धार से लगभग 7350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग वर्षों से उठती रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार के कृष पाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लंदन में रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ने ब्रिटिश म्यूजियम जाकर इस प्रतिमा को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे भोजशाला और मां वाग्देवी के बारे में सुनते आए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उन्हें इसे देखने की इच्छा थी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां पहुंचना आसान नहीं था। म्यूजियम में भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अफ्रीका और अन्य देशों की ऐतिहासिक धरोहरें रखी गई हैं। मां वाग्देवी की यह प्रतिमा एक बड़े कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे छूने की अनुमति नहीं है। प्रतिमा करीब चार से पांच फीट ऊंची है और इसकी दो भुजाएं टूटी हुई हैं। विवरण के अनुसार इसे जैन देवी अंबिका बताया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि हिंदू संगठन इसे मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा मानते हैं। जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिमा 1909 में लंदन ले जाई गई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ब्रिटिश म्यूजियम में भारत से लाकर रखी गई कई मूर्तियां हैं। मां वाग्देवी की प्रतिमा के पास देवी दुर्गा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणेशजी और भगवान महावीर समेत अन्य जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं भी रखी गई हैं। बताया जा रहा है कि इस सफेद पत्थर की प्रतिमा के नीचे 1034 ईस्वी का शिलालेख भी मौजूद है। भोजशाला से जुड़े लोग दावा करते हैं कि यह प्रतिमा राजा भोज की नगरी धार की विद्या की देवी की है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद और संघर्ष होते आए हैं। हिंदू पक्ष इसे मंदिर मानता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता है। इतिहास में यहां कई बार संघर्ष और विरोध की घटनाएं देखी गई हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि 1952 से लगातार इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए कई सरकारों और नेताओं को ज्ञापन भी दिए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उमा भारती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से प्रतिमा लौटाने की मांग की जा चुकी है। 1961 में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहासकार पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर भी लंदन गए थे और उन्होंने यह साबित किया था कि यह धार की मां वाग्देवी की प्रतिमा है। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला और प्रतिमा की वापसी का मुद्दा फिर से गरमाने लगा है। धार और आसपास के क्षेत्र में इस फैसले के बाद धार्मिक और ऐतिहासिक चर्चाएं भी बढ़ गई हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:43:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन में महाकाल के दरबार पहुंचे रवि किशन, भस्म आरती के बाद किए दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[गोरखपुर की खुशहाली और देश-प्रदेश के कल्याण की मांगी कामनामहाकाल की नगरी उज्जैन में बुधवार सुबह आस्था का खास नजारा देखने को मिला।सांसद और अभिनेता रवि किशन ने बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/ravi-kishan-reached-mahakals-court-in-ujjain-and-had-darshan/article-51819"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ravi-kishan.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन स्थित <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">श्री महाकालेश्वर मंदिर</span></span> में बुधवार सुबह भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के अभिनेता व गोरखपुर सांसद <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">रवि किशन</span></span> ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। भस्म आरती के पश्चात मंदिर पहुंचे रवि किशन ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और देश-प्रदेश की समृद्धि की कामना की।मंदिर परिसर में प्रवेश के बाद उन्होंने नंदी हॉल में पूजा की और पारंपरिक तरीके से नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना व्यक्त की।</p>
<p>इसके बाद वे चांदी द्वार से गर्भगृह के दर्शन के लिए पहुंचे, जहां उन्होंने जल अर्पित कर भगवान महाकाल का स्मरण किया।करीब 15 मिनट तक मंदिर में रहकर उन्होंने श्रद्धा के साथ पूजा की और लगातार महाकाल का जाप करते नजर आए। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी मौजूद रही।</p>
<h4><strong>आस्था का भाव</strong></h4>
<p>दर्शन के बाद रवि किशन ने कहा कि बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि हर बार यहां आकर एक अलग आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।उन्होंने विशेष रूप से गोरखपुर की जनता के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि क्षेत्र के लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहे।</p>
<h5><strong>धार्मिक महत्व</strong></h5>
<p>उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती यहां की विशेष परंपरा है, जिसे देखने और उसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।अधिकारियों के अनुसार, मंदिर में आने वाले वीआईपी और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं लगातार बेहतर की जा रही हैं, ताकि सभी को सुगम दर्शन मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/ravi-kishan-reached-mahakals-court-in-ujjain-and-had-darshan/article-51819</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 10:54:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंगापुर में बनेगा नया हिंदू मंदिर, सरकार ने दी जमीन, जानें कौन से देवता विराजेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर हिंदू मंदिर के लिए सरकार ने यिशुन में जमीन दी। SGAT मंदिर निर्माण की तैयारी शुरू, अगस्त-सितंबर से काम शुरू होने की संभावना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/a-new-hindu-temple-will-be-built-in-singapore-the/article-49972"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/guruvayurappan-ayyappan-hindu-temple-singapore.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सिंगापुर सरकार ने हिंदू समुदाय की धार्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नए सिंगापुर हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए यिशुन एवेन्यू 3 इलाके में जमीन आवंटित की है। यह मंदिर श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर (SGAT) के नाम से विकसित किया जाएगा, जिसे देश का 25वां हिंदू मंदिर माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य अगस्त या सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना विशेष रूप से केरल मूल के भक्तों और सबरीमला तथा गुरुवायूर परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। सरकार और हिंदू सलाहकार बोर्ड के बीच विस्तृत चर्चा के बाद इस जमीन को अंतिम रूप दिया गया है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मंदिर का स्वरूप और योजना</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का नाम श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर रखा गया है, जिसमें भगवान गुरुवायूरप्पन (श्रीकृष्ण का स्वरूप) और भगवान अय्यप्पा की मुख्य रूप से पूजा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह मंदिर यिशुन क्षेत्र में बसे भारतीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर में पारंपरिक गोपुरम शैली के बजाय केरल शैली की वास्तुकला अपनाई जाएगी, जिससे प्राकृतिक वेंटिलेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मलयाली समुदाय की मांग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यह सिंगापुर हिंदू मंदिर विशेष रूप से मलयाली समुदाय की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। गृह मंत्री के. शणमुगम के अनुसार, केवल मलयाली ही नहीं बल्कि तमिल, उत्तर भारतीय और अन्य हिंदू समुदाय भी इन देवताओं के भक्त हैं। सिंगापुर हिंदू मंदिर परियोजना को सबरीमला यात्रा से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक तैयारी का प्रारंभिक केंद्र बन सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग भक्तों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">डिजाइन और सामाजिक महत्व</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस सिंगापुर हिंदू मंदिर की डिजाइन को पारंपरिक और आधुनिक सोच का मिश्रण बताया जा रहा है। इसमें ‘सामंजस्य वृत्त</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> की अवधारणा को शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ और संवाद को बढ़ावा मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इसके साथ ही मंदिर परिसर में मल्टी-पर्पस हॉल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए अलग भवन भी बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सिंगापुर हिंदू मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता का केंद्र भी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधिकारिक बयान और आंकड़े</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">संस्कृति, समुदाय और युवा मामलों के राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने कहा कि उत्तरी सिंगापुर में भारतीय मूल के लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए यह सिंगापुर हिंदू मंदिर स्थानीय समुदाय की जरूरतों को पूरा करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">करीब 60 लाख की आबादी वाले सिंगापुर में भारतीय मूल के लोग लगभग 7 प्रतिशत हैं, जबकि चीनी समुदाय 75 प्रतिशत और मलय समुदाय 15 प्रतिशत है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर धार्मिक विविधता को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे की दिशा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माण कार्य तय समय पर शुरू होने के बाद यह सिंगापुर हिंदू मंदिर आने वाले वर्षों में पूरी तरह विकसित हो जाएगा। यह मंदिर न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होगा, बल्कि भारत-सिंगापुर सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:26:16 +0530</pubDate>
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