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                <title>Indian diaspora - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Indian diaspora RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-became-emotional-in-auckland-and-said-i/article-58507"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने न्यूजीलैंड दौरे के अंतिम दिन ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए एक भावुक याद साझा की, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करीब 25 से 30 वर्ष पहले, जब वे किसी सरकारी पद पर नहीं थे, तब पहली बार न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। उसी यात्रा के दौरान उन्हें एक मफलर, एक कैप और दस्तानों का एक सेट उपहार में मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन उपहारों में मिला मफलर आज भी उन्होंने संभालकर रखा है और इसी दौरे के दौरान वही मफलर पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे हैं। उनके इस व्यक्तिगत अनुभव ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्षों पुराने आत्मीय संबंधों की झलक भी पेश की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि समय बदल सकता है, जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, लेकिन लोगों से मिले स्नेह और सम्मान की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यह मफलर केवल एक वस्तु नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि वर्षों बाद फिर उसी देश में आने और भारतीय समुदाय से मिलने का अवसर मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय मूल के लोगों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद भारतीय समुदाय का दिल हमेशा भारत के साथ धड़कता है। उन्होंने कहा कि भले ही शरीर न्यूजीलैंड में हो, लेकिन मन भारत में ही रहता है। यही कारण है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय देश की हर उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हैं और उसे अपनी सफलता मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि साझा मूल्यों, विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए किसी देश की जनसंख्या या आकार से अधिक महत्वपूर्ण उसकी जनकल्याण की भावना है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने कई ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जिनसे भारत लगातार सीखता रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश था जिसने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया और यह लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के भविष्य के सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग का है। यदि सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया की भाषा में कहा जाए तो यह "कोलेबरेशन" का समय है। भारत और न्यूजीलैंड कई क्षेत्रों में मिलकर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से खेल, शिक्षा, कृषि, तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।</p>
<p style="text-align:justify;">खेलों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड की रग्बी टीम पूरी दुनिया में अपनी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है। भारत भी रग्बी के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है और इसके लिए न्यूजीलैंड के अनुभव तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश इस दिशा में साथ काम करें तो भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब भारत का चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा था, तब न्यूजीलैंड में भी लोगों ने इस उपलब्धि का उत्साहपूर्वक स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत की सफलता नहीं थी, बल्कि विज्ञान और मानवता की साझा उपलब्धि थी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड की कई स्पेस कंपनियां भारत के साथ मिलकर काम कर चुकी हैं और आने वाले वर्षों में यह सहयोग और मजबूत होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाले 18 महत्वपूर्ण फैसलों और 10 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया। इसके अलावा निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा, नवाचार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में न्यूजीलैंड सरकार की ओर से गाला लंच का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों के उद्योगपतियों और प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान भारत और न्यूजीलैंड के कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री का पारंपरिक माओरी शैली में स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय समुदाय के बीच अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से दुनिया के हर कोने में भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हमेशा प्रवासी भारतीयों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:56 +0530</pubDate>
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                <title>सिंगापुर में बनेगा नया हिंदू मंदिर, सरकार ने दी जमीन, जानें कौन से देवता विराजेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर हिंदू मंदिर के लिए सरकार ने यिशुन में जमीन दी। SGAT मंदिर निर्माण की तैयारी शुरू, अगस्त-सितंबर से काम शुरू होने की संभावना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/a-new-hindu-temple-will-be-built-in-singapore-the/article-49972"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/guruvayurappan-ayyappan-hindu-temple-singapore.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सिंगापुर सरकार ने हिंदू समुदाय की धार्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नए सिंगापुर हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए यिशुन एवेन्यू 3 इलाके में जमीन आवंटित की है। यह मंदिर श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर (SGAT) के नाम से विकसित किया जाएगा, जिसे देश का 25वां हिंदू मंदिर माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य अगस्त या सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना विशेष रूप से केरल मूल के भक्तों और सबरीमला तथा गुरुवायूर परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। सरकार और हिंदू सलाहकार बोर्ड के बीच विस्तृत चर्चा के बाद इस जमीन को अंतिम रूप दिया गया है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मंदिर का स्वरूप और योजना</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का नाम श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर रखा गया है, जिसमें भगवान गुरुवायूरप्पन (श्रीकृष्ण का स्वरूप) और भगवान अय्यप्पा की मुख्य रूप से पूजा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह मंदिर यिशुन क्षेत्र में बसे भारतीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर में पारंपरिक गोपुरम शैली के बजाय केरल शैली की वास्तुकला अपनाई जाएगी, जिससे प्राकृतिक वेंटिलेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मलयाली समुदाय की मांग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यह सिंगापुर हिंदू मंदिर विशेष रूप से मलयाली समुदाय की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। गृह मंत्री के. शणमुगम के अनुसार, केवल मलयाली ही नहीं बल्कि तमिल, उत्तर भारतीय और अन्य हिंदू समुदाय भी इन देवताओं के भक्त हैं। सिंगापुर हिंदू मंदिर परियोजना को सबरीमला यात्रा से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक तैयारी का प्रारंभिक केंद्र बन सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग भक्तों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">डिजाइन और सामाजिक महत्व</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस सिंगापुर हिंदू मंदिर की डिजाइन को पारंपरिक और आधुनिक सोच का मिश्रण बताया जा रहा है। इसमें ‘सामंजस्य वृत्त</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> की अवधारणा को शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ और संवाद को बढ़ावा मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इसके साथ ही मंदिर परिसर में मल्टी-पर्पस हॉल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए अलग भवन भी बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सिंगापुर हिंदू मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता का केंद्र भी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधिकारिक बयान और आंकड़े</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">संस्कृति, समुदाय और युवा मामलों के राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने कहा कि उत्तरी सिंगापुर में भारतीय मूल के लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए यह सिंगापुर हिंदू मंदिर स्थानीय समुदाय की जरूरतों को पूरा करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">करीब 60 लाख की आबादी वाले सिंगापुर में भारतीय मूल के लोग लगभग 7 प्रतिशत हैं, जबकि चीनी समुदाय 75 प्रतिशत और मलय समुदाय 15 प्रतिशत है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर धार्मिक विविधता को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे की दिशा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माण कार्य तय समय पर शुरू होने के बाद यह सिंगापुर हिंदू मंदिर आने वाले वर्षों में पूरी तरह विकसित हो जाएगा। यह मंदिर न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होगा, बल्कि भारत-सिंगापुर सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:26:16 +0530</pubDate>
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