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                <title>cultural news - दैनिक जागरण</title>
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                <description>cultural news RSS Feed</description>
                
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                <title>भोपाल में 12 जून 2026 को कला, थिएटर और वेलनेस का बड़ा आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[रविंद्र भवन से लेकर जनजातीय संग्रहालय और गौशाला तक, भोपाल में थिएटर, कला प्रदर्शनी, सेमिनार और फैमिली इवेंट्स की पूरे दिन रौनक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/jagran-event/big-event-of-art-theater-and-wellness-in-bhopal-on/article-55689"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-events-12-june-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल में 12 जून 2026 को शहर भर में कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दिन की शुरुआत SIRT में IPR सेमिनार से होगी, जहां डिजिटल युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद जनजातीय संग्रहालय में गोंड कला की प्रदर्शनी “शलाका” कला प्रेमियों को आकर्षित करेगी। शाम होते ही रविंद्र भवन में प्रसिद्ध नाटक “Charandas Chor” का मंचन होगा, जो Habib Rang Alaap Theatre Festival का हिस्सा है। वहीं Bling Square पर पूरे दिन फैमिली एंटरटेनमेंट इवेंट Bling Splash लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके अलावा Vrindavan Aashram Gaushala में दो खास अनुभव आधारित कार्यक्रम—“Feed &amp; Play Kids Farm Fun Day” और “Wellness with Cows”—आयोजित किए जाएंगे, जहां बच्चे और परिवार ग्रामीण जीवन और वेलनेस गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।</p>
<p><strong>1.Charandas Chor – Habib Rang Alaap Theatre Festival</strong><br />तारीख: 12 जून 2026<br />समय: शाम 7:00 बजे से<br />स्थान: रविंद्र भवन, अंजनी सभागृह, भोपाल<br />यह नाटक “Charandas Chor” रंगमंच प्रेमियों के लिए एक खास प्रस्तुति है, जिसे Habib Rang Alaap Theatre Festival के तहत मंचित किया जा रहा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी नैतिकता और समाज के बीच के द्वंद्व को दर्शाती है। दर्शकों के लिए यह एक गंभीर और प्रभावशाली नाट्य अनुभव माना जा रहा है।</p>
<p><strong>2. IPR Seminar – SIRT (Intellectual Property Rights)</strong><br />तारीख: 12 जून 2026<br />समय: सुबह 10:00 बजे<br />स्थान: Conference Hall, CS-Block, SIRT, भोपाल<br />इस सेमिनार में डिजिटल युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह ज्ञानवर्धक सत्र माना जा रहा है, जिसमें विशेषज्ञ अपने विचार साझा कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य IPR से जुड़ी जागरूकता को बढ़ाना है।</p>
<p><strong>3. Shalaka Tribal Art Exhibition</strong><br />तारीख: 12 जून 2026<br />समय: सुबह 11:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक<br />स्थान: मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय, श्यामला हिल्स, भोपाल<br />इस प्रदर्शनी में गोंड कलाकार मनीषा धुर्वे की पारंपरिक और आधुनिक जनजातीय कला का प्रदर्शन किया जा रहा है। आदिवासी संस्कृति और रंगों की विविधता को दर्शाती यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। संग्रहालय में लगातार आगंतुकों की भीड़ देखी जा रही है।</p>
<p><strong>4. Bling Splash – Family Event</strong><br />तारीख: 12 जून 2026<br />समय: सुबह 10:00 बजे से (पूरे दिन जारी)<br />स्थान: Bling Square, भोपाल<br />यह फैमिली एंटरटेनमेंट इवेंट बच्चों और युवाओं के लिए मनोरंजन गतिविधियों से भरा हुआ है। गेम्स, एक्टिविटी ज़ोन और आउटडोर मज़ेदार अनुभव यहां देखने को मिलते हैं। स्थानीय लोग इसे वीकेंड आउटिंग ऑप्शन के रूप में पसंद कर रहे हैं।</p>
<p><strong>5. Feed &amp; Play – Kids Farm Fun Day</strong><br />तारीख: 12 जून 2026<br />समय: दोपहर 4:00 PM – 6:00 PM<br />स्थान: Vrindavan Aashram Gaushala, भोपाल<br />कीमत: ₹249 से शुरू<br />यह इवेंट बच्चों के लिए फार्म एनिमल्स के साथ इंटरैक्शन और आउटडोर एक्टिविटी पर आधारित है। यहां बच्चे गायों को खाना खिलाने, खेतों का अनुभव लेने और खेलों में हिस्सा लेने जैसी गतिविधियों का आनंद लेते हैं। परिवारों के लिए यह एक शैक्षिक और मनोरंजक अनुभव माना जा रहा है।</p>
<p><strong>6. Wellness with Cows – Stress &amp; Anxiety Healing Tour</strong><br />तारीख: 12 जून 2026<br />समय: शाम 4:00 PM<br />स्थान: Vrindavan Aashram Gaushala, भोपाल<br />कीमत: ₹249<br />यह वेलनेस आधारित गतिविधि तनाव कम करने और मानसिक शांति पर केंद्रित है। प्रतिभागी गायों के बीच समय बिताकर एक शांत और प्राकृतिक माहौल का अनुभव लेते हैं। युवाओं और परिवारों में यह गतिविधि धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है।<br /><br />यह दिन भोपाल में कला, संस्कृति, शिक्षा और मनोरंजन का एक जीवंत संगम पेश करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जागरण इवेन्ट</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 10:56:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वसीम बरेलवी की शायरी और मामे खान के सुरों में डूबा रायपुर</title>
                                    <description><![CDATA[काव्य कुंभ के अंतिम दिन साहित्य, शायरी और लोक संगीत का अनूठा संगम; देर रात तक जमे रहे श्रोता, ‘चौधरी’ पर झूम उठा पूरा सभागार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur-immersed-in-the-poetry-of-wasim-barelvi-and-the/article-55288"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kavya-kumbh-raipur.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर में आयोजित काव्य कुंभ का समापन इस बार यादगार अंदाज में हुआ। रविवार को कार्यक्रम के अंतिम दिन साहित्य, शायरी और लोक संगीत का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। डूंडा स्थित स्कूल परिसर में आयोजित ‘संगम’ सत्र में देश के चर्चित शायर, कवि और लोक कलाकार एक मंच पर नजर आए। कार्यक्रम भले ही तय समय से करीब दो घंटे देरी से शुरू हुआ, लेकिन जैसे-जैसे रात आगे बढ़ी, दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता चला गया। शुरुआत में इंतजार की वजह से लोगों के चेहरों पर थकान दिखाई दे रही थी, लेकिन मंच पर कलाकारों की मौजूदगी ने माहौल पूरी तरह बदल दिया।</p>
<p>कार्यक्रम में सबसे ज्यादा उत्सुकता मशहूर शायर वसीम बरेलवी को सुनने को लेकर थी। जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, सभागार तालियों और वाहवाही से गूंज उठा। मंच संभालते ही उन्होंने साहित्य और जीवन के संबंध पर बात की। उन्होंने कहा कि अगर समाज में संतुलन बनाए रखना है तो साहित्य से जुड़ाव बेहद जरूरी है। साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर बनाने का माध्यम भी है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि “अच्छे लोग मेरी कमजोरी भी हैं और मेरी ताकत भी।” उनकी यह बात सुनकर सभागार में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। वसीम बरेलवी ने अपनी चर्चित गजलों और शेरों का पाठ भी किया। उनकी शायरी में जीवन, रिश्तों और समय की गहरी समझ दिखाई दी। जब उन्होंने अपनी मशहूर पंक्तियां सुनाईं तो श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे। कई बार ऐसा लगा जैसे पूरा सभागार उनकी आवाज और शब्दों के साथ बह रहा हो। उनकी प्रस्तुति के दौरान लगातार "वाह-वाह" और "मुकर्रर अर्ज है" की आवाजें सुनाई देती रहीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सेहत अब पहले जैसी नहीं रही, इसलिए लंबे समय तक मंच पर बैठना मुश्किल होता है, लेकिन श्रोताओं के प्रेम और सम्मान के कारण वह यहां पहुंचे हैं।</p>
<p>वसीम बरेलवी के बाद मंच पर आए लोकप्रिय शायर जुबैर अली ताबिश ने अपनी नई गजलों से लोगों का दिल जीत लिया। उनकी शायरी में संघर्ष, उम्मीद और संवेदनाओं का रंग दिखाई दिया। उन्होंने ऐसी पंक्तियां सुनाईं जिनसे युवा वर्ग खुद को जोड़ता नजर आया। उनकी गजल के दौरान सभागार कई बार तालियों से गूंज उठा। कवयित्री मनिका दुबे और मीर अली मीर ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया। दोनों की प्रस्तुतियों को भी दर्शकों ने खूब सराहा। रात गहराती जा रही थी, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा था। इस बीच प्रसिद्ध कवि आलोक श्रीवास्तव भी मंच पर पहुंचे। समय की कमी के कारण उनका चर्चित ‘आलोकनामा’ प्रस्तुत नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने शिव तांडव स्तोत्र के हिंदी अनुवाद का पाठ कर श्रोताओं का मन जीत लिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि इसे एक तरह का "स्टार्टर" समझा जाए और अगली बार वह पूरी प्रस्तुति लेकर आएंगे। उनकी इस बात पर दर्शकों ने हंसते हुए उनका स्वागत किया।</p>
<p>रात करीब साढ़े बारह बजे कार्यक्रम का रंग एक बार फिर बदला। अब बारी थी राजस्थान के प्रसिद्ध लोक गायक मामे खान की, जिनका इंतजार पूरे कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा किया जा रहा था। जैसे ही वह मंच पर पहुंचे, पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत "केसरिया बालम आवो सा पधारो म्हारे देश" से की। कुछ ही देर में दर्शक अपनी सीटों से उठकर झूमने लगे। लोक संगीत और सूफियाना रंग का ऐसा मेल देखने को मिला जिसने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया। मामे खान ने अपने एक से बढ़कर एक लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। रात बढ़ती गई और दर्शकों की ओर से लगातार एक ही फरमाइश सुनाई देने लगी—‘चौधरी’। आखिरकार जब उन्होंने इस गीत को गाने की घोषणा की तो सभागार में उत्साह चरम पर पहुंच गया। गीत शुरू करने से पहले उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “यह गाना मेरा आधार कार्ड बन गया है।” उनकी इस बात पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाईं। इसके बाद जैसे ही ‘चौधरी’ की धुन शुरू हुई, पूरा परिसर झूम उठा।</p>
<p>युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी इस प्रस्तुति का हिस्सा बन गए। कई लोग अपनी जगह पर खड़े होकर नाचते नजर आए, जबकि कुछ मोबाइल फोन में इस पल को कैद करते दिखे। कार्यक्रम के दौरान मामे खान ने दर्शकों के बीच टी-शर्ट भी उछालीं, जिन्हें पकड़ने के लिए युवाओं में खास उत्साह देखने को मिला। मंच और दर्शकों के बीच का फासला पूरी तरह खत्म हो चुका था और पूरा सभागार एक साथ संगीत का आनंद ले रहा था। करीब रात 1:20 बजे मामे खान की प्रस्तुति समाप्त हुई। इसके साथ ही काव्य कुंभ के इस वर्ष के आयोजन का भी समापन हो गया। हालांकि कार्यक्रम खत्म हो गया, लेकिन शायरी, कविता और संगीत से सजी यह रात लोगों की यादों में लंबे समय तक बनी रहेगी। आयोजकों के अनुसार अंतिम दिन उम्मीद से ज्यादा लोगों की मौजूदगी रही और कार्यक्रम ने साहित्य तथा लोक संस्कृति के प्रति लोगों के प्रेम को एक बार फिर साबित कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पंडवानी गायिका तीजन बाई की तबीयत बिगड़ी, रायपुर एम्स में भर्ती, हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार MICU में भर्ती, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही इलाज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/pandwani-singer-teejan-bais-health-deteriorated-condition-critical-admitted-in/article-54403"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/teejan-bai.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और फिलहाल उनका इलाज मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी MICU में चल रहा है। तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर कला जगत, साहित्य जगत और उनके प्रशंसकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। देशभर से लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद तीजन बाई को रायपुर एम्स के ट्रॉमा और इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत MICU में शिफ्ट कर दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डी. के. सिंह ने बताया कि जनरल मेडिसिन विभाग के साथ पल्मोनरी मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ भी इलाज में शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल सूत्रों के अनुसार डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि डॉक्टरों ने अभी स्वास्थ्य संबंधी विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया है। एम्स परिसर में उनके परिजनों और करीबी लोगों की आवाजाही बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में लोक कला की एक बड़ी पहचान मानी जाती हैं। उन्होंने पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और भारतीय लोक परंपरा को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाई। उनकी तबीयत खराब होने की खबर सामने आते ही सोशल media पर भी लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। कई कलाकारों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने चिंता व्यक्त की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन अटारी गांव में हुआ था। बताया जाता है कि जिस दिन उनका जन्म हुआ था उस दिन तीज पर्व था, इसलिए उनका नाम तीजन रखा गया। बेहद साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने लोक कला की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज देश ही नहीं दुनिया भी जानती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने पंडवानी शैली में महाभारत की कथाओं को अपने अनोखे अंदाज में प्रस्तुत कर लोक गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मंच पर उनका प्रस्तुतीकरण, आवाज का उतार-चढ़ाव और अभिनय शैली दर्शकों को बांधे रखती थी। यही वजह रही कि उन्होंने गांवों की चौपालों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी खास पहचान बनाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साल 1980 के दशक में तीजन बाई ने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में कई देशों की यात्राएं कीं। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैंड, तुर्किये और माल्टा सहित कई देशों में उन्होंने भारतीय लोक कला का प्रदर्शन किया। विदेशी मंचों पर पंडवानी को मिली सराहना ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उनके कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा की मजबूत अभिव्यक्ति माना गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा। वर्ष 1988 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिला। इसके बाद संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। साल 2019 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भी उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीजन बाई ने केवल कला को आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि लोक कलाकारों की नई पीढ़ी को भी प्रेरित किया। उनके संघर्ष और उपलब्धियों को कई युवा कलाकार मिसाल के तौर पर देखते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर तक पहुंचने की उनकी यात्रा आज भी लोगों को प्रेरित करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में तीजन बाई को राज्य की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। उनकी आवाज और पंडवानी शैली ने प्रदेश की लोक परंपरा को नई ऊर्जा दी। राज्य के कई हिस्सों में लोग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना वाले संदेश साझा कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत की कई हस्तियों ने भी चिंता जताई है। कई लोगों ने कहा कि तीजन बाई केवल कलाकार नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति की जीवित विरासत हैं। ऐसे में उनका स्वस्थ रहना पूरे कला जगत के लिए जरूरी है। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है और जरूरत के अनुसार सभी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आने वाले दिनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:34 +0530</pubDate>
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                <title>सिंगापुर में बनेगा नया हिंदू मंदिर, सरकार ने दी जमीन, जानें कौन से देवता विराजेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर हिंदू मंदिर के लिए सरकार ने यिशुन में जमीन दी। SGAT मंदिर निर्माण की तैयारी शुरू, अगस्त-सितंबर से काम शुरू होने की संभावना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/a-new-hindu-temple-will-be-built-in-singapore-the/article-49972"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/guruvayurappan-ayyappan-hindu-temple-singapore.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सिंगापुर सरकार ने हिंदू समुदाय की धार्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नए सिंगापुर हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए यिशुन एवेन्यू 3 इलाके में जमीन आवंटित की है। यह मंदिर श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर (SGAT) के नाम से विकसित किया जाएगा, जिसे देश का 25वां हिंदू मंदिर माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य अगस्त या सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना विशेष रूप से केरल मूल के भक्तों और सबरीमला तथा गुरुवायूर परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। सरकार और हिंदू सलाहकार बोर्ड के बीच विस्तृत चर्चा के बाद इस जमीन को अंतिम रूप दिया गया है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मंदिर का स्वरूप और योजना</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का नाम श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर रखा गया है, जिसमें भगवान गुरुवायूरप्पन (श्रीकृष्ण का स्वरूप) और भगवान अय्यप्पा की मुख्य रूप से पूजा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह मंदिर यिशुन क्षेत्र में बसे भारतीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर में पारंपरिक गोपुरम शैली के बजाय केरल शैली की वास्तुकला अपनाई जाएगी, जिससे प्राकृतिक वेंटिलेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मलयाली समुदाय की मांग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यह सिंगापुर हिंदू मंदिर विशेष रूप से मलयाली समुदाय की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। गृह मंत्री के. शणमुगम के अनुसार, केवल मलयाली ही नहीं बल्कि तमिल, उत्तर भारतीय और अन्य हिंदू समुदाय भी इन देवताओं के भक्त हैं। सिंगापुर हिंदू मंदिर परियोजना को सबरीमला यात्रा से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक तैयारी का प्रारंभिक केंद्र बन सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग भक्तों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">डिजाइन और सामाजिक महत्व</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस सिंगापुर हिंदू मंदिर की डिजाइन को पारंपरिक और आधुनिक सोच का मिश्रण बताया जा रहा है। इसमें ‘सामंजस्य वृत्त</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> की अवधारणा को शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ और संवाद को बढ़ावा मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इसके साथ ही मंदिर परिसर में मल्टी-पर्पस हॉल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए अलग भवन भी बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सिंगापुर हिंदू मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता का केंद्र भी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधिकारिक बयान और आंकड़े</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">संस्कृति, समुदाय और युवा मामलों के राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने कहा कि उत्तरी सिंगापुर में भारतीय मूल के लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए यह सिंगापुर हिंदू मंदिर स्थानीय समुदाय की जरूरतों को पूरा करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">करीब 60 लाख की आबादी वाले सिंगापुर में भारतीय मूल के लोग लगभग 7 प्रतिशत हैं, जबकि चीनी समुदाय 75 प्रतिशत और मलय समुदाय 15 प्रतिशत है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर धार्मिक विविधता को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे की दिशा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माण कार्य तय समय पर शुरू होने के बाद यह सिंगापुर हिंदू मंदिर आने वाले वर्षों में पूरी तरह विकसित हो जाएगा। यह मंदिर न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होगा, बल्कि भारत-सिंगापुर सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:26:16 +0530</pubDate>
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