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                <title>US foreign policy - दैनिक जागरण</title>
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                <title>सुबह ईरान को चेतावनी, रात में शांति समझौता; एक दिन में बदला ट्रम्प का रुख</title>
                                    <description><![CDATA[G7 समिट में सख्त बयान देने वाले ट्रम्प ने कुछ घंटों बाद फ्रांस के वर्साय पैलेस में ईरान के साथ शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/warning-to-iran-in-the-morning-peace-agreement-at-night/article-56330"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच बुधवार का दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ही दिन में ऐसा रुख दिखाया जिसने दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया। सुबह तक ईरान को कड़ी चेतावनी देने वाले ट्रम्प ने रात होते-होते उसी देश के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। यह घटनाक्रम फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया, जहां ट्रम्प के बयानों और फैसलों ने वैश्विक कूटनीति को नई दिशा दे दी। दिन की शुरुआत में ट्रम्प ने G7 समिट के दौरान आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि यदि आने वाले समय में समझौता नहीं हुआ और हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया और माना गया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ दबाव की नीति जारी रखेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान ट्रम्प की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले नेता हैं। ट्रम्प की यह टिप्पणी भी दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा नजरें ईरान को लेकर उनके अगले कदम पर टिकी हुई थीं। G7 सम्मेलन समाप्त होने के बाद ट्रम्प अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस के लिए रवाना हुए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उन्हें विशेष रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया था। बताया गया कि G7 नेताओं में ट्रम्प अकेले ऐसे नेता थे जिन्हें इस विशेष आयोजन के लिए न्योता मिला था। वर्साय पहुंचने पर मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्साय पैलेस अपने भव्य इतिहास और शानदार वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ट्रम्प ने यहां के ऐतिहासिक हिस्सों का दौरा किया और विशेष रूप से शीशमहल को काफी देर तक देखा। बताया जाता है कि 357 बड़े आइनों से सजी इस ऐतिहासिक गैलरी की भव्यता ने उन्हें प्रभावित किया। सोने की नक्काशी और शाही सजावट के प्रति रुचि रखने वाले ट्रम्प ने इस इमारत की खुलकर प्रशंसा भी की। इस दौरान माहौल पूरी तरह औपचारिक और मैत्रीपूर्ण नजर आ रहा था। हालांकि असली घटनाक्रम डिनर शुरू होने से ठीक पहले सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्साय पैलेस में मौजूद कई अधिकारियों और मेहमानों को आखिरी समय तक यह जानकारी नहीं थी कि ईरान से जुड़े समझौते पर उसी रात हस्ताक्षर हो सकते हैं। कुछ तस्वीरों में ट्रम्प और मैक्रों को एक फोन कॉल के दौरान बातचीत करते हुए देखा गया। माना जा रहा है कि इसी दौरान अंतिम स्तर की चर्चा हुई और समझौते को मंजूरी मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद ट्रम्प ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। हस्ताक्षर के समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उनके साथ मौजूद थे, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी वहां उपस्थित थे। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रम्प की तस्वीरें सामने आते ही पूरी दुनिया में यह खबर तेजी से फैल गई। खास बात यह रही कि जिस समझौते को आधिकारिक तौर पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में अंतिम रूप दिया जाना था, उस पर अपेक्षा से पहले फ्रांस में ही हस्ताक्षर कर दिए गए। हस्ताक्षर के बाद ट्रम्प ने मीडिया के सामने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। जब एक पत्रकार ने उनसे समझौते के बारे में पूछा तो उन्होंने जोर से जवाब दिया, “साइन किए।” इस एक वाक्य ने पूरे दिन की राजनीतिक कहानी को समेट दिया। सुबह जहां ट्रम्प ईरान के खिलाफ सख्त बयान दे रहे थे, वहीं रात तक वे समझौते के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा चुके थे। ट्रम्प की यह रणनीति दबाव और बातचीत के मिश्रण पर आधारित रही। पहले उन्होंने कड़ा संदेश देकर अपनी स्थिति मजबूत की और बाद में बातचीत के जरिए समझौते का रास्ता चुना। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे ट्रम्प की पारंपरिक वार्ता शैली का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें वह पहले सख्त रुख अपनाते हैं और फिर अचानक समझौते की ओर बढ़ जाते हैं। इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:57:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिज्बुल्लाह हमलों पर बढ़ा तनाव, ट्रंप ने नेतन्याहू से जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान में सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका ने संयम बरतने की दी सलाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tension-increases-over-hezbollah-attacks-trump-expresses-displeasure-with-netanyahu/article-54733"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/trump-netanyahu-call.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजराइल की ओर से किए गए ताजा हमलों के बाद क्षेत्रीय हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई फोन पर बातचीत सुर्खियों में आ गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप ने इजराइल की हालिया सैन्य कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान उन्होंने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और हालात को और अधिक न बिगाड़ने पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाल के दिनों में इजराइल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के बाद सीमा क्षेत्रों में तनाव और बढ़ गया है। क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमेरिका सहित कई देशों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत काफी स्पष्ट और गंभीर रही। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइली प्रधानमंत्री को मौजूदा हालात में संयम बरतने की सलाह दी। उनका मानना था कि लगातार सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है तथा शांति प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि इस बातचीत के संबंध में आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी ही सार्वजनिक की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स में इसे दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण संवाद बताया गया है। अमेरिका और इजराइल लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन कई बार सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय नीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आते रहे हैं। मौजूदा घटनाक्रम को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। अमेरिका की प्राथमिकता जहां क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, वहीं इजराइल अपनी सुरक्षा चुनौतियों को प्रमुख आधार बताकर सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराता रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इजराइली सरकार का कहना है कि उसकी कार्रवाई पूरी तरह सुरक्षा जरूरतों के तहत की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार हिज्बुल्लाह की ओर से होने वाले संभावित खतरों और हमलों को देखते हुए जवाबी कदम उठाना आवश्यक है। इजराइल का तर्क है कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च जिम्मेदारी है और किसी भी खतरे का जवाब देना जरूरी है। दूसरी ओर लेबनान और क्षेत्र के कई पक्षों ने इन हमलों पर चिंता जताई है और तनाव कम करने की अपील की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में कई कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ईरान और अमेरिका के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव बढ़ता है तो इससे कई महत्वपूर्ण वार्ताओं और शांति प्रयासों पर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार मध्य पूर्व पहले से ही कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में किसी भी नए संघर्ष या सैन्य कार्रवाई का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर की सरकारें इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। हाल के वर्षों में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच कई बार तनावपूर्ण हालात बने हैं। सीमा क्षेत्रों में समय-समय पर झड़पें और हमले होते रहे हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रयास भी किए जाते रहे हैं। मौजूदा स्थिति में भी कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने की संभावनाओं पर चर्चा जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप बिना समझौते जीत की घोषणा कर सकते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव के बीच व्हाइट हाउस युद्ध से बाहर निकलने की रणनीति पर काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-trump-can-declare-victory-without-deal/article-52340"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-tensions.jpg" alt=""></a><br /><p>इन दिनों अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बना हुआ है साथ ही व्हाइट हाउस भी  युद्ध से बाहर निकलने की संभावनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन बिना किसी औपचारिक समझौते के भी जीत की घोषणा कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में यह रणनीति ऐसे समय पर तैयार की जा रही है, जब ईरान के साथ बातचीत ठप पड़ी है और युद्ध लंबा खिंचने का खतरा बना हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को यह आकलन करने का जिम्मा दिया गया है कि अगर अमेरिका एकतरफा जीत का ऐलान करता है तो ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या होगी। इस कदम को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं, क्योंकि बिना समझौते युद्ध खत्म करने की घोषणा कूटनीतिक जोखिम भी पैदा कर सकती है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन इस युद्ध को राजनीतिक और आर्थिक रूप से बोझ मान रहा है। खासकर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और घरेलू राजनीति पर पड़ रहे असर को देखते हुए जल्द समाधान की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया एजेंसियां दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही हैं। पहला विकल्प यह है कि अमेरिका एकतरफा जीत की घोषणा कर अपने सैनिकों को मध्य-पूर्व से वापस बुला ले।दूसरा विकल्प यह है कि बातचीत को लंबा खींचकर रणनीतिक बढ़त हासिल की जाए। हालांकि, दोनों ही विकल्पों में जोखिम मौजूद है, खासकर ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। ईरान ने नए प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय मांगा है और कहा है कि अंतिम निर्णय उसके शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका ने आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए प्रतिबंधों और नाकाबंदी को और सख्त करने का संकेत दिया है। यह रणनीति ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए अपनाई जा रही है।</p>
<h5><strong>राजनीतिक और आर्थिक दबाव</strong></h5>
<p>इस पूरे घटनाक्रम का संबंध अमेरिकी घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। साल के अंत में प्रस्तावित मिडटर्म चुनावों को देखते हुए ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और वैश्विक बाजार में अस्थिरता का असर अमेरिकी मतदाताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में जल्द समाधान की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम राजनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव का असर पहले से ही दिखाई दे रहा है। मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ने से तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। बताया जा रहा है कि  अगर अमेरिका बिना समझौते जीत की घोषणा करता है, तो इससे उसकी वैश्विक छवि पर असर पड़ सकता है। साथ ही, ईरान की प्रतिक्रिया के आधार पर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:30:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान में US-ईरान बातचीत पर असमंजस, आमने-सामने वार्ता पर मतभेद</title>
                                    <description><![CDATA[US-ईरान बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत, पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में; बैठक पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है, लेकिन तस्वीर अब भी साफ नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/confusion-over-us-iran-talks-in-pakistan-disagreement-over-face-to-face-talks/article-52061"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-talks-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर स्थिति उलझी हुई नजर आ रही है। एक ओर अमेरिका सीधे संवाद की उम्मीद जता रहा है, वहीं ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह आमने-सामने वार्ता के बजाय पाकिस्तान के जरिए अपनी बात रखेगा। इसी बीच दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं, जिससे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी और क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है।</p>
<p>हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिख रहा है। अमेरिका का कहना है कि वह सीधे शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि कोई औपचारिक बैठक तय नहीं है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि बातचीत की प्रक्रिया अभी शुरुआती और अनिश्चित चरण में है।</p>
<h5><span><strong>बातचीत पर मतभेद</strong></span></h5>
<p>अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधी बातचीत कर सकता है। इसके लिए विशेष दूतों को भेजा गया है।</p>
<p>वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अलग रुख अपनाते हुए कहा है कि वह सीधे अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा। ईरान की ओर से कहा गया है कि उसकी बातें पाकिस्तान के अधिकारियों के जरिए साझा की जाएंगी।</p>
<p>इस रुख से यह साफ होता है कि बातचीत अगर होती भी है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप में हो सकती है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।</p>
<h5><span><strong>पहला दौर रहा बेनतीजा</strong></span></h5>
<p>इससे पहले अप्रैल के मध्य में पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी, जो करीब 21 घंटे चली लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।</p>
<p>मुख्य विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और निर्बाध रहे, जबकि ईरान इस पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की मांग करता रहा है। ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह इसे बंद नहीं करेगा।</p>
<h5><span><strong>बढ़ता क्षेत्रीय तनाव</strong></span></h5>
<p>इसी दौरान क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में एक ईरानी झंडे वाले जहाज को रोकने की कार्रवाई की। यह कदम समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंधों के पालन के तहत उठाया गया बताया गया है।</p>
<p>दूसरी ओर, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर दावा किया है कि वह अब देश में ही बड़ी संख्या में हथियारों का उत्पादन कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष दबाव की रणनीति भी साथ-साथ अपना रहे हैं।</p>
<h5><span><strong>आंतरिक मतभेद भी असरदार</strong></span></h5>
<p>ईरान के भीतर भी बातचीत को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। कुछ नेता बातचीत में लचीलापन दिखाने के पक्ष में हैं, जबकि कट्टर रुख रखने वाला धड़ा किसी भी समझौते के खिलाफ है। वार्ता टीम में बदलाव की चर्चा भी चल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के भीतर रणनीति को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं है।फिलहाल नजर इस बात पर टिकी है कि पाकिस्तान में दोनों पक्षों के बीच किसी तरह का संवाद स्थापित हो पाता है या नहीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/confusion-over-us-iran-talks-in-pakistan-disagreement-over-face-to-face-talks/article-52061</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:06:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप ने अलग रुख अपनाया, तो चीन-पाक ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उठाया ये कदम</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर चीन-पाक शांति प्रस्ताव और ट्रंप के बयान से वैश्विक कूटनीति तेज, अमेरिका-ईरान तनाव भी चर्चा में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/when-trump-took-a-different-stand-china-pak-took-this-step/article-49973"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/strait-of-hormuz-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है, जहां चीन और पाकिस्तान के शांति प्रस्ताव ने नए कूटनीतिक समीकरण खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">शांति वार्ता पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य संकट को लेकर चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से एक पांच सूत्रीय प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव में तत्काल शांति वार्ता शुरू करने और इस रणनीतिक जलमार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात की वजह अमेरिका और इज़रायल की ईरान के खिलाफ की गई “गैर-कानूनी सैन्य कार्रवाइयां</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका की प्रतिक्रिया</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस मुद्दे पर अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप<span>  </span>ने स्पष्ट कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की नहीं है और वॉशिंगटन का इस विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित देशों और स्थानीय शक्तियों को स्वयं निभानी चाहिए। उनके इस बयान को वैश्विक रणनीतिक नीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज की अहमियत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य संकट केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक तेल बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर डाल सकती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र में स्थिरता को प्राथमिकता देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">तनाव के कारण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक बयानबाजी के कारण तनाव बढ़ा है। चीन और पाकिस्तान का मानना है कि सैन्य समाधान से इस समस्या का स्थायी हल नहीं निकल सकता। माओ निंग ने जोर देकर कहा कि संघर्ष बढ़ाने के बजाय संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। तेल कीमतों में अस्थिरता, शिपिंग लागत में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर सकता है और विकासशील देशों पर अधिक दबाव डाल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे की दिशा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">फिलहाल चीन और पाकिस्तान की ओर से प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है, जबकि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास किसी ठोस वार्ता की ओर बढ़ते हैं या तनाव और गहराता है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है, जहां हर कदम अंतरराष्ट्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:26:08 +0530</pubDate>
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