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                <title>Iran conflict - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Iran conflict RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी हमले, होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिका ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक तेज की, ट्रम्प ने आगे भी कड़ी कार्रवाई के दिए संकेत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attacks-again-on-iran-tension-increased-after-attack-on/article-58239"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/us-iran-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में बना तनाव अब एक बार फिर खुले सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच लागू सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई शहरों में एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कोनारक, चाबहार और बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कई स्थानों पर धुएं के बड़े गुबार उठने की बात कही गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहरी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना ने इससे पहले मंगलवार को भी ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। अधिकारियों के अनुसार ताजा अभियान उसी कार्रवाई का विस्तार माना जा रहा है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में हमलों के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर ईरान की ओर से अभी तक सभी हमलों के नुकसान का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और राहत एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले ही ईरान पर जोरदार हमला कर चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी बड़े सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि ईरान लंबे समय से मध्य पूर्व में दबाव बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अब अमेरिका इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उनके इस बयान के कुछ समय बाद ही ईरान में नई एयरस्ट्राइक की खबरें सामने आने लगीं, जिससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने अपनी चेतावनी पर तुरंत अमल किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए जहाजों पर हमलों के बाद और तेज हुई। ईरान ने मंगलवार को तीन जहाजों को निशाना बनाने की पुष्टि करते हुए दावा किया कि संबंधित जहाज उसके निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे थे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की गई, जबकि अमेरिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला बताया। अमेरिका का कहना है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक जवाबी अभियान के तहत ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। बंदर अब्बास स्थित शाहिद हक्कानी पोर्ट पर भी एयरस्ट्राइक की गई, जिसके बाद वहां से धुएं का बड़ा गुबार उठता देखा गया। यह बंदरगाह ईरान के प्रमुख समुद्री केंद्रों में गिना जाता है और इसकी सामरिक अहमियत भी काफी अधिक मानी जाती है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि दोनों देशों के बीच यही स्थिति बनी रही तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग लागत बढ़ने की आशंका पहले से ही जताई जा रही है। कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए तत्काल तनाव कम होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति प्रभावित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:04:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच होर्मुज में फिर हमले, तीन टैंकर बने निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कमर्शियल जहाजों के तय समुद्री मार्ग छोड़ने पर जताई चिंता, अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/iran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमलों की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि कतर के तेल टैंकर अल-रकायत को निशाना बनाया गया, जबकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार ओमान तट के पास दो अन्य वाणिज्यिक जहाज भी हमलों की चपेट में आए। घटनाओं के बाद समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान ने कहा है कि कुछ व्यावसायिक जहाज उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा की गारंटी देना संभव नहीं होगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि होर्मुज की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और हालात पहले की तरह स्थिर नहीं माने जा सकते।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हमलों की खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा जारी है। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक शहर कोम पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी। शहर की सड़कों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी और लाखों समर्थकों की मौजूदगी के बीच धार्मिक रस्में पूरी की गईं। अंतिम यात्रा के दौरान कई लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दिए। शिया परंपरा में लाल झंडा अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध और बदले की मांग का प्रतीक माना जाता है। पार्थिव शरीर पर ईरान का राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाया गया था, जबकि ताबूत पर उनकी काली पगड़ी भी रखी गई, जो उच्च धार्मिक विद्वानों की पहचान मानी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई और पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के अनुसार इससे पहले तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में भी लाखों लोग शामिल हुए। भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर शव वाहन की रफ्तार धीमी करनी पड़ी और कुछ जगहों पर यात्रा थोड़ी देर के लिए रुक भी गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोम ले जाया गया। बताया गया है कि आगे की रस्मों के बाद उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, राजनीतिक प्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद रहे। कई लोगों ने नारे लगाए और खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर समुद्री मोर्चे पर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन करना जरूरी है। यदि जहाज तय रास्तों से अलग होकर आवाजाही करेंगे तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल होगा। हालांकि हमलों को लेकर स्वतंत्र स्तर पर विस्तृत पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है और संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के भीतर भी इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। देश के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा के दौरान कहा कि देश खामेनेई के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराता है। वहीं सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को उनके किए का जवाब देना होगा और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। दूसरी ओर क्षेत्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में जुटी भीड़ पूरे ईरान की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। वहीं इराक के प्रमुख शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की। अंतिम यात्रा के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियां पश्चिम एशिया की पहले से संवेदनशील स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि दुनिया की कई सरकारें और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:09 +0530</pubDate>
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                <title> स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ ईरान ने परमाणु बम न बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन संवर्धन अधिकार को बताया अटूट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-switzerland-talks-begin-amid-lebanon-crisis/article-56595"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-high-stakes-four-party-talks-begin-in-switzerland;-iran-assures-no-bomb-but-call-enrichment-non-negotiable-(2).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">अमेरिका और ईरान के बीच अत्यंत संवेदनशील और उच्च स्तरीय राजनयिक वार्ता रविवार दोपहर कड़ी सुरक्षा के बीच स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ की अगुवाई में हो रही इस चार-पक्षीय शिखर बैठक में पाकिस्तान और कतर के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">यह महत्वपूर्ण बैठक हाल ही में हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) के बाद आयोजित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी सैन्य संघर्ष को रोकना है। हालांकि, दोनों पक्ष 60 दिनों के अस्थाई युद्धविराम के साये में बातचीत की मेज पर आए हैं, लेकिन दोपहर के सत्र से पहले ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। तेहरान ने साफ कहा कि उसका यूरेनियम संवर्धन (Nuclear Enrichment) का अधिकार पूरी तरह से संप्रभु और गैर-परक्राम्य (जिस पर कोई समझौता न हो सके) है, हालांकि वह यह लिखित आश्वासन देने को तैयार है कि वह कभी भी परमाणु बम नहीं बनाएगा।</p>
<p dir="ltr">स्विस विदेश मंत्रालय के अनुसार, राजनयिक कार्यक्रम की शुरुआत बंद कमरे में हुई द्विपक्षीय बैठकों से हुई, जहां ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थ टीमों के साथ बातचीत की रूपरेखा तैयार की। इन तकनीकी वार्ताओं के बाद—जिसमें पाकिस्तान के थल सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर की अचानक मौजूदगी ने सबको चौंका दिया—दोपहर बाद आधिकारिक चार-पक्षीय पूर्ण सत्र (Plenary Session) की शुरुआत हुई।</p>
<h3 dir="ltr">लेबनान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य एजेंडे में सबसे ऊपर</h3>
<p dir="ltr">मूल रूप से यह बैठक अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते की तकनीकी बारीकियों को तय करने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालातों के कारण चर्चा का दायरा तुरंत बढ़ा दिया गया। दोनों प्रतिनिधिमंडलों के सूत्रों ने पुष्टि की है कि लेबनान में जारी संघर्ष की आपातकालीन समीक्षा को बैठक के प्राथमिक एजेंडे के रूप में शामिल किया गया है।</p>
<p dir="ltr">मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति इस समय बेहद नाजुक बनी हुई है। सप्ताहांत में दक्षिणी लेबनान के कफ़र तेबनित के पास हिजबुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमलों में कम से कम छह इजरायली सैनिक मारे गए और 20 अन्य घायल हो गए। इसके साथ ही लेबनान के पश्चिमी बेका और टायर क्षेत्रों में इजरायली हवाई हमलों में एक बच्चे और महिला सहित कम से कम सात नागरिकों की जान चली गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड पहुंचने से पहले कहा था कि लेबनान में स्थाई युद्धविराम सुनिश्चित करना वाशिंगटन की तात्कालिक प्राथमिकता है। वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने इजरायल पर लेबनान में अपनी प्रतिबद्धताओं को बार-बार तोड़ने का आरोप लगाया।</p>
<p dir="ltr">सैन्य तनाव के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन (समुद्री व्यापार मार्ग) को लेकर भी विवाद गहरा गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े फार्स न्यूज ने संकेत दिया है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अगले आदेश तक अनधिकृत वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। इस समुद्री नाकेबंदी ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया है, जिसके कारण कतर को खाड़ी देशों की ओर से सुबह के सत्र में आक्रामक रूप से हस्तक्षेप करना पड़ा, क्योंकि खाड़ी देशों की तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला इस बंदी के कारण सीधे तौर पर ठप हो गई है।</p>
<h3 dir="ltr">अरबों डॉलर का वित्तीय और कूटनीतिक गतिरोध</h3>
<p dir="ltr">बर्गनस्टॉक शिखर सम्मेलन के आर्थिक दांव बेहद ऊंचे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने रविवार को घोषणा की कि इस प्रारंभिक समझौते का एक मुख्य हिस्सा कतरी खातों में फ्रीज (जब्त) किए गए 6 अरब डॉलर के ईरानी फंड की तत्काल रिहाई है। पेज़ेशकियन ने दावा किया कि इस समझौते की शर्तें पूरी तरह से तेहरान के पक्ष में हैं, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन अधिकारों को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है जिन्हें वाशिंगटन पहले दबाना चाहता था।</p>
<p dir="ltr">दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन से इस पूरे मामले में एक नया और विवादित मोड़ जोड़ दिया है। ट्रंप ने पुष्टि की कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा, लेकिन भविष्य में यह मुफ्त आवाजाही सशर्त होगी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कोई व्यापक समझौता नहीं होता है, तो मध्य पूर्व की सुरक्षा में अमेरिका द्वारा निभाई गई "गार्जियन एंजेल" (रक्षक) की भूमिका और सुरक्षा खर्चों की भरपाई के लिए अमेरिका जहाजों पर ट्रांजिट फीस (टोल) लगा सकता है।</p>
<p dir="ltr">"अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम शांति समझौते की असली परीक्षा कागजों पर नहीं, बल्कि तेल क्षेत्र में होगी। हम वैश्विक भागीदारों के लिए सैकड़ों निवेश परियोजनाएं खोलने को तैयार हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब पश्चिमी देश प्रतिबंधों में ढील देने के अपने वादों का पूरी तरह पालन करेंगे।" — मोहसेन पाकनेजाद, ईरानी तेल मंत्री</p>
<h3 dir="ltr">कड़ा घरेलू विरोध और संशय के बादल</h3>
<p dir="ltr">स्विट्जरलैंड में चल रही इस कूटनीतिक कवायद के बावजूद, दोनों देशों के भीतर घरेलू स्तर पर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। वाशिंगटन में डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने भू-राजनीतिक गतिरोध से निपटने के राष्ट्रपति ट्रंप के तरीकों पर चौतरफा हमला बोला है। मैरीलैंड के डेमोक्रेटिक सांसद जॉनी ओल्शेवस्की ने सोशल मीडिया पर इस पहल की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "समझौते के रूप में पेश किया गया एक दिखावटी युद्धविराम" करार दिया, जो लागू होने से पहले ही बिखरना शुरू हो गया है।</p>
<p dir="ltr">ऐसा ही असंतोष यरूशलेम (इजरायल) में भी देखने को मिल रहा है। हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम और अगाम इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एक व्यापक जनमत संग्रह (Poll) से पता चला है कि 92.1% इजरायलियों का मानना है कि इस हालिया संघर्ष और अमेरिकी समझौते से ईरान और मजबूत होकर उभरा है। इसके अलावा, 82.9% उत्तरदाताओं को लगता है कि इससे इजरायल की दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता हुआ है।</p>
<p dir="ltr">इस कड़े रुख को दोहराते हुए इजरायल के दक्षिणपंथी वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने रविवार को दोटूक कहा कि जब तक हिजबुल्लाह पूरी तरह से अपने हथियार नहीं डाल देता, तब तक इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान से "एक मिलीमीटर भी पीछे नहीं हटेगी"। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका समय से पहले पीछे हटने की मांग करता है, तो इजरायल वाशिंगटन के दबाव के आगे नहीं झुकेगा।</p>
<p dir="ltr">फिलहाल, अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने के बाद ईरान ने अपने खार्ग द्वीप निर्यात टर्मिनल से कच्चे तेल की लोडिंग दोबारा शुरू कर दी है। आर्थिक मोर्चे पर यह समझौता राजनीतिक सहमति की तुलना में कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकारों, जिनमें मोहसेन रजाई और मोहम्मद मोखबर शामिल हैं, ने अपने वार्ताकारों को अमेरिकी हस्ताक्षरों पर अत्यधिक भरोसा न करने की चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि वाशिंगटन अपने आर्थिक वादों से मुकरता है, तो मध्य पूर्व के ऊर्जा गलियारों को एक बार फिर तत्काल व्यवधानों का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:24:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की कड़ी निंदा की, UNSC में शांति का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[UNSC में भारत ने कूटनीति, शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2a4066ac53f/article-55577"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-unsc-statement.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर साफ शब्दों में कहा है कि वह मर्चेंट शिपिंग यानी व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों का कड़ा विरोध करता है। भारत ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका सीधा असर न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरिष पर्नवथनेनी ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की खुली बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है, जिसकी शुरुआत रमज़ान के पवित्र महीने में हुई, जो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और किसी भी तरह की स्थिति को और बिगड़ने से रोकना चाहिए। भारत ने खास तौर पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पर्नवथनेनी ने कहा कि भारत के कई नागरिक खाड़ी क्षेत्र में काम करते हैं और हालिया हमलों में कई भारतीयों की मौत हुई है या वे लापता हैं। ऐसे में व्यापारिक जहाजों और समुद्री संचार मार्गों पर हमले सीधे तौर पर मानव जीवन और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थिरता भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों से भी सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इस बीच भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी प्रकार के सैन्य हमलों, नागरिकों पर हमलों और समुद्री व्यापार बाधित करने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है। भारत ने जोर देकर कहा कि सभी विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने गाजा की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि वहां मानवीय संकट गहराता जा रहा है। भारत ने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता और दो-राज्य समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना शामिल हो। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को 2.5 मिलियन डॉलर की पहली किस्त देने जा रहा है, जो उसके वार्षिक पांच मिलियन डॉलर योगदान का हिस्सा है। भारत ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में मानवीय सहायता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेबनान संकट का जिक्र करते हुए भारत ने उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही। भारत ने कहा कि शांति सैनिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और उन पर हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और बदलते वैश्विक हालात में इसमें सुधार जरूरी है। भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग दोहराई ताकि परिषद अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत; रुपया कमजोर हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार ने 10 जून 2026 को वैश्विक तनावों के बीच भी मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, लेकिन भारतीय निवेशकों ने फिलहाल घबराहट नहीं दिखाई। बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 74,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 23,350 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव पर बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गिराए जाने की घटना के जवाब में उठाया गया कदम बताया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इसका असर सीमित दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को संभाले रखा।</p>
<p>तेल बाजार पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं देखा गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेज उछाल आता तो इसका असर महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों पर पड़ सकता था। फिलहाल तेल बाजार की स्थिरता ने निवेशकों को कुछ राहत दी है।</p>
<p>हालांकि एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार से अलग दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 3.77 प्रतिशत टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एशियाई निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। इसके मुकाबले भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों से ज्यादा स्थानीय आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी शेयर बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोंस में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक दबाव में रहे। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी बरकरार है।</p>
<p>विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,566 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। पिछले सात और तीस दिनों के आंकड़े भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी है। घरेलू निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी ही बाजार को गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन इसी तरह बना रहा तो विदेशी बिकवाली का असर सीमित रह सकता है।</p>
<p>मुद्रा बाजार में हालांकि दबाव देखने को मिला। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.56 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह कुछ राहत भी लेकर आता है।</p>
<p>बाजार को मजबूती मिलने की एक वजह मंगलवार का सकारात्मक कारोबार भी माना जा रहा है। 9 जून को सेंसेक्स लगभग 395 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी का असर बुधवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG टैंकर, 20 हजार टन गैस लेकर कांडला पहुंची खेप</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान तनाव के बीच एक और LPG टैंकर सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचा। 20 हजार टन गैस लेकर जहाज कांडला पोर्ट पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lpg-tanker-crossed-hormuz-and-reached-india-consignment-reached-kandla/article-53608"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/hormuz-strait-lpg-news-india-energy.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए कुछ राहत की खबर आई है। एक और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच गया है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला टैंकर </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">सिमी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग 20 हजार टन </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकर भारत पहुंचा है। बताया जा रहा है कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद समुद्री रास्तों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि ऊर्जा सप्लाई प्रभावित न हो। </span>ANI <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 15</span> LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाज सुरक्षित रूप से भारत आ चुके हैं। जब दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह खेप भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">सिमी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार किया था। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार जहाज की मूवमेंट पर नज़र रखी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि भारत आने वाला एक और </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाज </span>‘MV <span lang="hi" xml:lang="hi">सनशाइन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भी हाल ही में सुरक्षित तरीके से इस समुद्री मार्ग को पार कर चुका है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल और गैस इसी रास्ते से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी तरह का सैन्य तनाव ऊर्जा सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। पिछले कुछ दिनों से इसी चिंता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचाई हुई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि भारतीय जहाजों और गैस टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना सहित कई एजेंसियां सक्रिय हैं। समुद्री निगरानी बढ़ा दी गई है और जहाजों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा अलर्ट के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में भरोसा दिलाया कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। उन्होंने कहा कि मित्र देशों को व्यापारिक सुरक्षा के मामले में ईरान पर भरोसा होना चाहिए। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी कहा कि क्षेत्र में हालात सामान्य होने पर होर्मुज स्ट्रेट और भी अधिक सुरक्षित बनेगा। इस समय भारत की नजर लगातार ऊर्जा सप्लाई पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि घरेलू जरूरतों के लिए देश काफी हद तक आयातित तेल और गैस पर निर्भर है। ऐसे में </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकरों का सुरक्षित भारत आना सरकार और बाजार दोनों के लिए राहत की बात है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:03:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प की चीन को चेतावनी: ईरान को सैन्य मदद दी तो लगेगा 50% टैरिफ, बढ़ा वैश्विक तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान पर अमेरिकी सख्ती, होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और संभावित सैन्य कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-warning-to-china-will-impose-50-tariff-if-military/article-50983"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/china-us-tension.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने चीन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह ईरान को सैन्य सहायता प्रदान करता पाया गया, तो अमेरिका उस पर 50% तक टैरिफ लगा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान-अमेरिका के बीच टकराव गहराता जा रहा है।</p>
<p>एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को मजबूत होने नहीं देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका “पूरी तरह तैयार” है। इससे पहले अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने “locked and loaded” शब्दों का इस्तेमाल कर सैन्य तैयारियों का इशारा किया था।</p>
<p>स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की है। ट्रम्प के मुताबिक, इस कार्रवाई में ब्रिटेन समेत कुछ अन्य सहयोगी देश भी शामिल होंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और रोकथाम की जाएगी, जिससे ईरान की तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।</p>
<p>वहीं, ईरान ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। ईरानी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नाकेबंदी विफल होगी और देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। ईरान ने यह भी दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को टोल देना होगा।</p>
<p>इसी बीच क्षेत्रीय तनाव का असर अन्य देशों पर भी दिख रहा है। लेबनान में इजराइली हमलों में मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक हो गई है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस बीच लेबनान ने युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक बातचीत की इच्छा जताई है और वॉशिंगटन में अहम बैठक प्रस्तावित है।</p>
<p>आर्थिक मोर्चे पर भी इस संकट का असर साफ दिख रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। वहीं एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 09:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप ने अलग रुख अपनाया, तो चीन-पाक ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उठाया ये कदम</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर चीन-पाक शांति प्रस्ताव और ट्रंप के बयान से वैश्विक कूटनीति तेज, अमेरिका-ईरान तनाव भी चर्चा में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/when-trump-took-a-different-stand-china-pak-took-this-step/article-49973"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/strait-of-hormuz-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है, जहां चीन और पाकिस्तान के शांति प्रस्ताव ने नए कूटनीतिक समीकरण खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">शांति वार्ता पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य संकट को लेकर चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से एक पांच सूत्रीय प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव में तत्काल शांति वार्ता शुरू करने और इस रणनीतिक जलमार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात की वजह अमेरिका और इज़रायल की ईरान के खिलाफ की गई “गैर-कानूनी सैन्य कार्रवाइयां</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका की प्रतिक्रिया</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस मुद्दे पर अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप<span>  </span>ने स्पष्ट कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की नहीं है और वॉशिंगटन का इस विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित देशों और स्थानीय शक्तियों को स्वयं निभानी चाहिए। उनके इस बयान को वैश्विक रणनीतिक नीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज की अहमियत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य संकट केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक तेल बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर डाल सकती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र में स्थिरता को प्राथमिकता देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">तनाव के कारण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक बयानबाजी के कारण तनाव बढ़ा है। चीन और पाकिस्तान का मानना है कि सैन्य समाधान से इस समस्या का स्थायी हल नहीं निकल सकता। माओ निंग ने जोर देकर कहा कि संघर्ष बढ़ाने के बजाय संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। तेल कीमतों में अस्थिरता, शिपिंग लागत में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर सकता है और विकासशील देशों पर अधिक दबाव डाल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे की दिशा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">फिलहाल चीन और पाकिस्तान की ओर से प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है, जबकि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास किसी ठोस वार्ता की ओर बढ़ते हैं या तनाव और गहराता है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है, जहां हर कदम अंतरराष्ट्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:26:08 +0530</pubDate>
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