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                <title>world news - दैनिक जागरण</title>
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                <title>स्पेन के जंगल में भीषण आग से 12 की मौत, 19 लापता; राहत अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[एंडालूसिया के लॉस गैलार्डोस क्षेत्र में लगी भीषण आग ने बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती आशंका बिजली की गिरी हुई तार से आग लगने की है, हालांकि जांच अभी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/12-killed-19-missing-in-massive-fire-in-spains-forest/article-58451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/spain-wildfire.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">स्पेन के दक्षिणी हिस्से में स्थित एंडालूसिया क्षेत्र के लॉस गैलार्डोस में शुक्रवार को लगी भीषण जंगल की आग ने भारी तबाही मचा दी। इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 19 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार आठ लोग घायल हुए हैं और इनमें से चार की हालत गंभीर बनी हुई है। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका तक नहीं मिला। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश के लिए फायरफाइटर, पुलिस और सेना की इमरजेंसी यूनिट मिलकर काम कर रही है। भीषण गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग पर पूरी तरह काबू पाने में मुश्किलें आ रही हैं। कई इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था, लेकिन कुछ लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(2).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस आग की शुरुआत बिजली की गिरी हुई तार से होने की आशंका जताई गई थी। एंडालूसिया की इमरजेंसी सर्विस ने शुरुआती कॉल के आधार पर यही संभावना व्यक्त की, लेकिन बिजली कंपनी एंडेसा ने इस दावे से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि जिस बिजली लाइन की बात सामने आ रही है, उसमें उस समय बिजली का प्रवाह नहीं था। ऐसे में आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है। हादसे के दौरान सामने आई कई घटनाओं ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया। अधिकारियों के मुताबिक एक कार में सवार चार लोग आग की चपेट में आने से जिंदा जल गए। वाहन का स्टीयरिंग दाईं ओर होने के कारण आशंका जताई जा रही है कि वे ब्रिटिश नागरिक हो सकते हैं। इसके अलावा सात अन्य लोग भी मृत पाए गए, जिन्होंने अपनी गाड़ियां छोड़कर दूसरे रास्ते से निकलने की कोशिश की थी। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों ने निर्धारित निकासी मार्ग का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे वे तेजी से फैलती आग के बीच फंस गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(1).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने लोगों से आपातकालीन स्थिति में केवल प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करने की अपील की है। राहत दलों के सामने चुनौती यह भी है कि कई इलाकों में धुआं इतना घना है कि दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे खोज अभियान प्रभावित हो रहा है। 12 लोगों की मौत के साथ यह आग वर्ष 2005 के बाद स्पेन की सबसे घातक जंगल की आग मानी जा रही है। वर्ष 2005 में ग्वाडालाहारा प्रांत में लगी आग में 11 फायरफाइटरों की मौत हुई थी, जिसके बाद स्पेन ने जंगल की आग से निपटने की रणनीति और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में कई बड़े बदलाव किए थे। इसके बावजूद इस बार की आग ने एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आग बुझाने के लिए करीब 150 फायरफाइटर लगातार मोर्चे पर डटे हुए हैं और सेना की इमरजेंसी यूनिट भी राहत कार्य में शामिल है। एंडालूसिया के आपातकाल प्रमुख एंटोनियो सान्ज के अनुसार मृतकों में एक स्पेनिश नागरिक है, जबकि बाकी अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने अधिकारियों की घरों के भीतर सुरक्षित रहने की सलाह का पालन नहीं किया और कारों से निकलने का प्रयास किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire.jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान वे आग की लपटों में घिर गए। लॉस गैलार्डोस के मेयर फ्रांसिस्को मिगुएल रेयेस ने इस घटना को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा। उनके अनुसार पूरा इलाका ऐसा दिखाई दे रहा है मानो किसी बड़े विस्फोट ने सब कुछ तबाह कर दिया हो। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा पूरे देश के लिए बेहद दुखद है। यूरोपियन फॉरेस्ट फायर इंफॉर्मेशन सिस्टम के अनुसार इस वर्ष अब तक स्पेन में लगभग 57 हजार हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी हमले, होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिका ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक तेज की, ट्रम्प ने आगे भी कड़ी कार्रवाई के दिए संकेत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attacks-again-on-iran-tension-increased-after-attack-on/article-58239"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/us-iran-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में बना तनाव अब एक बार फिर खुले सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच लागू सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई शहरों में एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कोनारक, चाबहार और बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कई स्थानों पर धुएं के बड़े गुबार उठने की बात कही गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहरी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना ने इससे पहले मंगलवार को भी ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। अधिकारियों के अनुसार ताजा अभियान उसी कार्रवाई का विस्तार माना जा रहा है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में हमलों के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर ईरान की ओर से अभी तक सभी हमलों के नुकसान का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और राहत एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले ही ईरान पर जोरदार हमला कर चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी बड़े सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि ईरान लंबे समय से मध्य पूर्व में दबाव बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अब अमेरिका इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उनके इस बयान के कुछ समय बाद ही ईरान में नई एयरस्ट्राइक की खबरें सामने आने लगीं, जिससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने अपनी चेतावनी पर तुरंत अमल किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए जहाजों पर हमलों के बाद और तेज हुई। ईरान ने मंगलवार को तीन जहाजों को निशाना बनाने की पुष्टि करते हुए दावा किया कि संबंधित जहाज उसके निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे थे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की गई, जबकि अमेरिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला बताया। अमेरिका का कहना है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक जवाबी अभियान के तहत ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। बंदर अब्बास स्थित शाहिद हक्कानी पोर्ट पर भी एयरस्ट्राइक की गई, जिसके बाद वहां से धुएं का बड़ा गुबार उठता देखा गया। यह बंदरगाह ईरान के प्रमुख समुद्री केंद्रों में गिना जाता है और इसकी सामरिक अहमियत भी काफी अधिक मानी जाती है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि दोनों देशों के बीच यही स्थिति बनी रही तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग लागत बढ़ने की आशंका पहले से ही जताई जा रही है। कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए तत्काल तनाव कम होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति प्रभावित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:04:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर पहुंचे पीएम मोदी, प्रम्बानन में की पूजा-अर्चना</title>
                                    <description><![CDATA[एक हजार साल पुराने प्रम्बानन मंदिर की जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो रहे साथ, आसमान से मंदिर का वीडियो भी किया साझा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-reached-indonesias-largest-hindu-temple-and-offered-prayers/article-58167"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-indonesia.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन वहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन पहुंचकर भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। बुधवार को प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर की जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया, पूजा-अर्चना की और मंदिर के पुजारियों से आशीर्वाद भी लिया। प्रधानमंत्री ने इस यात्रा की कई तस्वीरें और एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें विमान से प्रम्बानन मंदिर का भव्य दृश्य दिखाई दे रहा है। उनकी इस यात्रा को दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री बुधवार शाम इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना होंगे, जहां उनका तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा प्रस्तावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। करीब एक हजार वर्ष पुराने इस मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। मंदिर परिसर अपनी भव्य वास्तुकला, पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी और विशाल शिखरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित मुख्य मंदिर स्थित हैं। इनमें भगवान शिव का मंदिर सबसे ऊंचा और सबसे प्रमुख माना जाता है। पूरे परिसर में लगभग 240 छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं, जो प्राचीन जावानी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर पहुंचने के बाद सबसे पहले जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। इस दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी प्रधानमंत्री के साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और इसके ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच सांस्कृतिक सहयोग और विरासत संरक्षण को लेकर भी बातचीत हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस यात्रा की तस्वीरें साझा करते हुए इंडोनेशिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने विमान से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें आसमान से दिखाई देता प्रम्बानन मंदिर बेहद आकर्षक नजर आता है। वीडियो में मंदिर का विशाल परिसर और उसकी ऐतिहासिक संरचना साफ दिखाई देती है। इस वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। कई लोगों ने इसे भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का खूबसूरत प्रतीक बताया। भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध कई सदियों पुराने हैं। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहां हिंदू संस्कृति और परंपराओं का प्रभाव आज भी कई क्षेत्रों में दिखाई देता है। विशेष रूप से बाली और जावा जैसे क्षेत्रों में रामायण और महाभारत से जुड़ी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। प्रम्बानन मंदिर इसी साझा विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मंदिर की दीवारों पर रामायण की कथा को दर्शाने वाली अद्भुत नक्काशी आज भी पर्यटकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक कूटनीति का भी अहम हिस्सा है। भारत पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में प्रम्बानन मंदिर का दौरा साझा विरासत और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी लगातार बढ़ रहा है। प्रम्बानन मंदिर हर वर्ष लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां नियमित रूप से धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। रामायण बैले नृत्य नाटिका यहां की सबसे प्रसिद्ध प्रस्तुतियों में शामिल है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक पहुंचते हैं। मंदिर परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार इंडोनेशिया सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, ताकि इसकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इंडोनेशिया में आधिकारिक कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री अब ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना होंगे। वहां 8 से 10 जुलाई तक विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, भारतीय समुदाय से संवाद और कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी तय है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:45:51 +0530</pubDate>
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                <title>खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच होर्मुज में फिर हमले, तीन टैंकर बने निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कमर्शियल जहाजों के तय समुद्री मार्ग छोड़ने पर जताई चिंता, अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/iran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमलों की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि कतर के तेल टैंकर अल-रकायत को निशाना बनाया गया, जबकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार ओमान तट के पास दो अन्य वाणिज्यिक जहाज भी हमलों की चपेट में आए। घटनाओं के बाद समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान ने कहा है कि कुछ व्यावसायिक जहाज उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा की गारंटी देना संभव नहीं होगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि होर्मुज की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और हालात पहले की तरह स्थिर नहीं माने जा सकते।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हमलों की खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा जारी है। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक शहर कोम पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी। शहर की सड़कों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी और लाखों समर्थकों की मौजूदगी के बीच धार्मिक रस्में पूरी की गईं। अंतिम यात्रा के दौरान कई लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दिए। शिया परंपरा में लाल झंडा अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध और बदले की मांग का प्रतीक माना जाता है। पार्थिव शरीर पर ईरान का राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाया गया था, जबकि ताबूत पर उनकी काली पगड़ी भी रखी गई, जो उच्च धार्मिक विद्वानों की पहचान मानी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई और पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के अनुसार इससे पहले तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में भी लाखों लोग शामिल हुए। भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर शव वाहन की रफ्तार धीमी करनी पड़ी और कुछ जगहों पर यात्रा थोड़ी देर के लिए रुक भी गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोम ले जाया गया। बताया गया है कि आगे की रस्मों के बाद उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, राजनीतिक प्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद रहे। कई लोगों ने नारे लगाए और खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर समुद्री मोर्चे पर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन करना जरूरी है। यदि जहाज तय रास्तों से अलग होकर आवाजाही करेंगे तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल होगा। हालांकि हमलों को लेकर स्वतंत्र स्तर पर विस्तृत पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है और संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के भीतर भी इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। देश के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा के दौरान कहा कि देश खामेनेई के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराता है। वहीं सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को उनके किए का जवाब देना होगा और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। दूसरी ओर क्षेत्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में जुटी भीड़ पूरे ईरान की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। वहीं इराक के प्रमुख शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की। अंतिम यात्रा के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियां पश्चिम एशिया की पहले से संवेदनशील स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि दुनिया की कई सरकारें और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटे 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, कई बड़े देशों ने नहीं भेजे शीर्ष नेता</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम विदाई की रस्में शुरू, ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने दी श्रद्धांजलि, भारत सहित कई देशों ने मंत्री स्तर के प्रतिनिधिमंडल भेजे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4892cddd218/article-57814"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/khamenei-funeral-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला तेहरान में शुरू हो गया है। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे। श्रद्धांजलि समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए नागरिकों के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भी मौजूदगी रही। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, चीफ जस्टिस गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई, संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ और सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री समारोह में शामिल हुए और खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे प्रभावशाली देशों ने अपने सर्वोच्च नेताओं को नहीं भेजा। इन देशों की ओर से मंत्री स्तर या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से समारोह में मौजूद नहीं रहे। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी चर्चा देखने को मिली। हालांकि ईरान की ओर से कई देशों के शीर्ष नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा कारणों को देखते हुए अधिकांश देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर श्रद्धांजलि दी। वहीं पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया के शीर्ष नेता स्वयं समारोह में शामिल हुए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अलग-अलग देशों की मौजूदगी और प्रतिनिधित्व का स्तर मौजूदा कूटनीतिक समीकरणों को भी दर्शाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि समारोह के दौरान तेहरान में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए। राजधानी की प्रमुख सड़कों, सरकारी भवनों और संवेदनशील इलाकों में सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात रहे। कई प्रमुख मार्गों पर सैन्य वाहनों की लगातार गश्त देखने को मिली। अधिकारियों के अनुसार समारोह में बड़ी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में प्रवेश करने वाले लोगों की अलग-अलग सुरक्षा जांच की गई और पूरे परिसर की निगरानी आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई। आम लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने राजधानी में मेट्रो और सरकारी बस सेवाओं को नि:शुल्क रखा। दूसरे शहरों से आने वाले लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जबकि कई स्कूलों, मस्जिदों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई। कुछ होटलों ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए किराए में विशेष छूट दी। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देना था। सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं और बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग लाल झंडे लिए भी नजर आए। समारोह के दौरान कुछ समूहों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए और क्षेत्रीय घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान हालात पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और किसी अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई। कई महिलाओं को भावुक होकर रोते हुए भी देखा गया, जबकि लोगों ने शांतिपूर्वक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">खामेनेई का ताबूत इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला पहुंचने के बाद अंतिम श्रद्धांजलि की औपचारिक रस्में शुरू हुईं। अधिकारियों के अनुसार परिवार के सदस्यों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे समारोह का सीधा प्रसारण देश के कई समाचार माध्यमों पर किया गया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा। समारोह में मौजूद नेताओं ने खामेनेई के लंबे सार्वजनिक जीवन और ईरान की राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का औपचारिक राजनीतिक संबोधन नहीं हुआ, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें देश के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक बताया। इस बीच दुनिया की नजर भी तेहरान पर बनी रही, क्योंकि खामेनेई के निधन के बाद ईरान की राजनीति, क्षेत्रीय रणनीति और भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और उसकी विदेश नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और प्रशासन लगातार सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार पूरे किए जाएंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी ईरान में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, क्योंकि इसका असर पश्चिम एशिया के व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए तेहरान में हजारों लोग पहुंचे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि युद्धविराम के बीच अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की गईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-delegation-bids-final-farewell-to-ayatollah-ali-khamenei-in/article-57767"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ayatollah-ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की राजधानी तेहरान शुक्रवार को उस समय भावुक माहौल का गवाह बनी, जब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर लाया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग परिसर के बाहर एकत्र होने लगे थे। देशभर से आए नागरिकों, धार्मिक नेताओं, राजनीतिक हस्तियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला पहुंचकर दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न कराई जा रही है। हाल के क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने तेहरान के कई हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में प्रवेश करने वाले सभी लोगों की सघन जांच की गई और पूरे कार्यक्रम की निगरानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम दर्शन के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए और कुछ क्षणों का मौन रखकर सम्मान प्रकट किया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के अधिकारियों से भी मुलाकात की और शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, समुद्री संपर्क, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी रही है। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले आयोजित किया जाना था, लेकिन हालिया सैन्य संघर्ष के चलते कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। सुरक्षा कारणों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। अब जब संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू हुआ है, तब प्रशासन ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि क्षेत्र में अभी भी तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अंतिम संस्कार से एक दिन पहले देशवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और संकल्प प्रदर्शित करने का भी समय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश की जनता की एकजुटता दुनिया तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए। उनके अनुसार, बड़ी जनभागीदारी ईरान की सामूहिक शक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह से ही हजारों लोग ग्रैंड मोसल्ला परिसर पहुंचने लगे थे। लोगों के हाथों में ईरानी झंडे और धार्मिक प्रतीक दिखाई दिए। कई लोग अपने परिवारों के साथ अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में धार्मिक छात्र और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे। परिसर के भीतर धार्मिक अनुष्ठान किए गए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी की गईं। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रम को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी कैमरों और विशेष सुरक्षा इकाइयों की मदद से पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी गई। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष प्रोटोकॉल लागू किए। कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया ताकि भीड़ और सुरक्षा दोनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और ईरान के बीच व्यापार, ऊर्जा, चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण विषय सहयोग के प्रमुख आधार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात के बावजूद दोनों देश आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को महत्व देता है और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का समर्थक बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:30:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, INS त्रिकंड ने समुद्री लुटेरों की साजिश की नाकाम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर हमले की कोशिश भारतीय नौसेना ने समय रहते विफल कर दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-navys-major-operation-in-the-gulf-of-aden-ins/article-57707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ins-trikand.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी तत्परता और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। बुधवार रात भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर समुद्री डाकुओं ने कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंड की त्वरित कार्रवाई के चलते उनका मंसूबा सफल नहीं हो सका। नौसेना के पहुंचते ही लुटेरे मौके से फरार हो गए। इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष कमांडो दस्ते मार्कोस (MARCOS) ने जहाज पर चढ़कर पूरी तलाशी ली और जहाज को सुरक्षित घोषित किया। इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने या जहाज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> MV Golden Arsenal एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज है, जो 1 जुलाई को यमन के अदन बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। जहाज पर कुल 21 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अदन की खाड़ी में डीजिबूती से करीब 300 नॉटिकल मील पूर्व-उत्तर-पूर्व की दिशा में यात्रा के दौरान समुद्री लुटेरों ने तेज रफ्तार छोटी नौकाओं के जरिए जहाज के करीब पहुंचकर उस पर चढ़ने की कोशिश की। हालात अचानक बिगड़ते देख चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया और खुद को जहाज के सुरक्षित कमरे में बंद कर लिया। चालक दल ने सुरक्षित स्थान से रेडियो संचार प्रणाली के जरिए तत्काल मदद की गुहार लगाई। संकट संदेश मिलते ही क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS त्रिकंड बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। जैसे ही युद्धपोत हमलावरों के करीब पहुंचा, समुद्री लुटेरों ने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए वहां से भागना ही बेहतर समझा। नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय युद्धपोत की तेज प्रतिक्रिया और उसकी मौजूदगी ने संभावित समुद्री डकैती की घटना को पूरी तरह विफल कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष बल मार्कोस कमांडो हेलीकॉप्टर और तेज नौकाओं की मदद से व्यापारी जहाज पर पहुंचे। कमांडो ने जहाज के हर हिस्से की गहन तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई हमलावर जहाज पर छिपा न हो। जांच पूरी होने के बाद जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। नौसेना ने बताया कि चालक दल के सभी 21 सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अपनी निर्धारित यात्रा आगे जारी रखने की स्थिति में है। जहाज पर मौजूद कार्गो भारत के लिए रणनीतिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कार्गो की प्रकृति या उसके गंतव्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी जहाजों की सुरक्षा भारतीय नौसेना की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है, विशेषकर उन समुद्री मार्गों पर जहां समुद्री डकैती की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब INS त्रिकंड ने समुद्री डकैती की कोशिश को नाकाम किया हो। बीते दो महीनों में यह तीसरी ऐसी घटना है जिसमें इस युद्धपोत ने समय रहते हस्तक्षेप कर व्यापारी जहाजों को सुरक्षित बचाया है। इससे पहले 19 जून को पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Fareeda से संकट संदेश मिलने पर भी INS त्रिकंड ने तत्काल कार्रवाई की थी और संभावित समुद्री डकैती को विफल कर दिया था। उस समय भी भारतीय नौसेना ने जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा 27 मई को भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने भी पश्चिमी हिंद महासागर में MV Mashallah नामक व्यापारी जहाज के पास संदिग्ध समुद्री डकैती की गतिविधियों को विफल किया था। उस अभियान में नौसेना ने हेलीकॉप्टर, निगरानी उपकरणों और बोर्डिंग टीम की मदद से पूरे क्षेत्र की तलाशी ली थी। समय पर की गई कार्रवाई के कारण संभावित खतरा टल गया और व्यापारी जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना लगातार यह दोहराती रही है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्राथमिक सुरक्षा साझेदार' और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नौसेना का उद्देश्य केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हाल के वर्षों में समुद्री डकैती की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना लगातार निगरानी, गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाए हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बेटे मुजतबा खामेनेई को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी गई है, जबकि कई देशों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:03:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ट्रम्प ने तेल कंपनियों को दी चेतावनी, पेट्रोल के दाम तुरंत घटाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ग्राहकों से अब भी जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। उन्होंने तेल कंपनियों को जल्द कीमतें कम करने की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-warns-oil-companies-demands-immediate-reduction-in-petrol-prices/article-57415"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों से तुरंत कीमतें कम करने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ चुकी है, लेकिन इसका फायदा आम ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब कच्चा तेल करीब 68 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है, तब भी उपभोक्ताओं से पहले जैसी ऊंची कीमत वसूली जा रही है। उनके मुताबिक यह स्थिति न केवल अनुचित है बल्कि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी डाल रही है। डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने संदेश में कहा कि पेट्रोल की कीमतों में तुरंत कमी की जानी चाहिए ताकि लोग राहत महसूस कर सकें। उन्होंने तेल कंपनियों से अपील की कि पेट्रोल का दाम करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाया जाए। ट्रम्प का कहना है कि जब उत्पादन लागत और कच्चे तेल की कीमत घट रही है तो खुदरा कीमतों में भी उसी अनुपात में कमी दिखनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो इसका मतलब है कि कंपनियां ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूल रही हैं। उन्होंने इस तरह की स्थिति को गलत बताते हुए कंपनियों को जल्द कदम उठाने की सलाह दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी कहा कि ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा कीमत वसूलना गैरकानूनी है और अगर तेल कंपनियों ने जल्द दाम कम नहीं किए तो उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार इस दिशा में कौन से नए कदम उठा सकती है, लेकिन उन्होंने पहले भी अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की जांच के निर्देश दिए थे। माना जा रहा है कि यदि कीमतों में जल्द राहत नहीं मिलती है तो प्रशासन की ओर से जांच और निगरानी और सख्त की जा सकती है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। खासतौर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। उस समय कई देशों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें भी बढ़ गई थीं। हालांकि अब हालात पहले की तुलना में कुछ सामान्य हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हुआ है। इसके बावजूद कई इलाकों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। यही मुद्दा ट्रम्प ने अपने बयान में उठाया है। पेट्रोल की खुदरा कीमत केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती। इसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, टैक्स, वितरण व्यवस्था और स्थानीय बाजार की स्थिति भी शामिल होती है। कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद खुदरा स्तर पर कीमतों में बदलाव आने में कुछ समय लग जाता है। इसके बावजूद यदि लंबे समय तक राहत नहीं मिलती है तो उपभोक्ताओं और सरकार दोनों की ओर से सवाल उठना स्वाभाविक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में ईंधन की कीमतें राजनीतिक मुद्दा भी बन जाती हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब, महंगाई और परिवहन लागत पर पड़ता है। यही वजह है कि सरकारें अक्सर ईंधन की कीमतों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखती हैं। ट्रम्प का ताजा बयान भी ऐसे समय आया है जब महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है कि वे कीमतों की समीक्षा करें और उपभोक्ताओं को राहत देने पर विचार करें। तेल कंपनियों की ओर से ट्रम्प के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं है कि आने वाले दिनों में खुदरा पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:18:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर फिर दी चेतावनी, पानी रोकने पर भारत को धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले का विरोध दोहराया, जल अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज तेज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pakistan-again-warns-on-indus-water-treaty-threatens-india-if/article-57359"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पाकिस्तानी जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश हुई तो उसका जवाब दिया जाएगा। वहीं इस्लामाबाद ने दावा किया कि सिंधु जल संधि अब भी पूरी तरह प्रभावी है और भारत इसे एकतरफा समाप्त नहीं कर सकता। पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने सोमवार को इस्लामाबाद में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह को प्रभावित करना चाहता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को बहाल करने का कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।<br /><img alt="9k="></img></p>
<p>प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता है और यह कानूनी रूप से अब भी लागू है। उनके अनुसार भारत इस संधि को न तो एकतरफा स्थगित कर सकता है, न समाप्त कर सकता है और न ही इसकी शर्तों में बदलाव कर सकता है। पाकिस्तानी मंत्रियों ने यह भी बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें जल विशेषज्ञ, कानूनी विशेषज्ञ और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सेमिनार में संधि के कानूनी, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके जल अधिकार सुरक्षित हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी कई बार कह चुके हैं कि पानी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और इस मुद्दे पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान इस विषय को वैश्विक स्तर पर उठाने की भी तैयारी कर रहा है।<br /><br /></p>
<p>इससे पहले 21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इसी मुद्दे पर भारत को चेतावनी दी थी। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यदि पाकिस्तान को अपनी जल सुरक्षा पर खतरा महसूस हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि हाल के महीनों में इस मामले में हुए सभी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। भारत का यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने वाला माना गया।<br /><br /><img alt="Z"></img></p>
<p>सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस समझौते पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल के उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिला, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज का उपयोग भारत के हिस्से में आया। पिछले छह दशकों से अधिक समय तक यह संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बनी रही। पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। वहां की लगभग 90 प्रतिशत सिंचित कृषि भूमि को इसी नदी तंत्र से पानी मिलता है। कृषि क्षेत्र पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका असर खेती, बिजली उत्पादन, उद्योग और ग्रामीण रोजगार पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय और जलविद्युत परियोजनाएं भी इसी नदी प्रणाली पर आधारित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:09:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों का दावा, 36 नागरिकों की मौत; सीमा पर फिर बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान सरकार ने महिलाओं और बच्चों समेत 36 लोगों के मारे जाने का दावा किया, पाकिस्तान बोला- हालिया आतंकी हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a423786ad3d6/article-57312"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/afghanistan-pakistan-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव गहरा गया है। तालिबान सरकार ने सोमवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से किए गए सीमा-पार हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 36 नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 163 लोग घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन का कहना है कि पक्तिया, पक्तिका और कुनर प्रांतों में कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी जनहानि और संपत्ति का नुकसान हुआ। दूसरी ओर पाकिस्तान ने इन आरोपों के बीच अपनी कार्रवाई को हाल के आतंकी हमलों के जवाब में चलाया गया खुफिया-आधारित सैन्य अभियान बताया है। तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बीती रात हुए हमलों में 36 नागरिकों की मौत हुई है और 163 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि हमलों में तीन रिहायशी मकान पूरी तरह नष्ट हो गए। उनके मुताबिक मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अफगान प्रशासन ने इस घटना को नागरिक आबादी पर सीधा हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।<br /><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">फितरत ने आरोप लगाया कि पक्तिया प्रांत के चमकनी जिले के मंडोखेल गांव में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने एक नागरिक के घर को निशाना बनाया। इस हमले में एक बुजुर्ग और एक बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि जब गांव के लोग घायलों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे तो उसी स्थान पर दूसरी बार भी बमबारी की गई। तालिबान प्रशासन का दावा है कि इस दूसरी कार्रवाई में 28 ग्रामीणों की मौत हो गई और 158 लोग घायल हो गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। तालिबान सरकार ने यह भी कहा कि पक्तिका प्रांत के गियान जिले के वालुस्त गांव में भी एक घर पर हमला किया गया। इस घटना में छह लोगों की मौत होने का दावा किया गया है, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे बताए गए हैं। वहीं कुनर प्रांत के मनोगई जिले के बारोलो गांव में भी एक रिहायशी मकान को नुकसान पहुंचा। इस हमले में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन मकान पूरी तरह तबाह हो गया और परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ की गई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर सीमावर्ती क्षेत्र में सुनियोजित सैन्य अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और कराची में हुए आतंकी हमलों के बाद यह कार्रवाई आवश्यक हो गई थी। पाकिस्तान का दावा है कि उसका निशाना केवल आतंकी ठिकाने थे, न कि आम नागरिक।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">सीमा पर बढ़े तनाव की एक बड़ी वजह हाल में पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ हमला भी माना जा रहा है। कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के प्रांतीय मुख्यालय पर शनिवार रात हमला हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार हमलावरों ने एक वाहन से मुख्य द्वार को टक्कर मारी, जिसके बाद गोलीबारी और विस्फोट हुए। इस हमले में तीन अर्द्धसैनिक जवान और तीन हमलावर मारे गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया था। कराची हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से अलग हुए एक संगठन ने ली है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की सीमा से संचालित आतंकी संगठन उसके भीतर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। वहीं तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और कहती है कि वह किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद, आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई बार सीमा पार गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटनाओं का सबसे अधिक असर सीमावर्ती गांवों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ता है, जिन्हें बार-बार विस्थापन और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। यदि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत नहीं हुई तो सीमा पर हालात और जटिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पहले कई मौकों पर दोनों पक्षों से संयम बरतने और विवादों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की अपील कर चुका है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से अपने-अपने दावों पर कायम रहने के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अफगानिस्तान में हुए इन हमलों ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालिबान सरकार नागरिकों के मारे जाने की बात कह रही है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:55:12 +0530</pubDate>
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                <title>वेनेजुएला में 39 सेकेंड में दो बड़े भूकंप, 164 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[7.5 और 7.2 तीव्रता के झटकों से 60 सेकेंड तक कांपी धरती, 971 घायल, देश में इमरजेंसी घोषित और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/two-major-earthquakes-in-39-seconds-in-venezuela-164-dead/article-56953"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम महज 39 सेकेंड के अंतराल में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। पहले 7.2 तीव्रता का झटका और उसके ठीक एक मिनट के भीतर 7.5 तीव्रता का दूसरा बड़ा झटका दर्ज किया गया। इन दोनों झटकों के बाद करीब 60 सेकेंड तक धरती लगातार हिलती रही, जिससे लोगों में दहशत फैल गई और कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन भूकंपों का केंद्र पश्चिमी वेनेजुएला के तटीय इलाके के पास बताया जा रहा है, जो राजधानी कराकस से लगभग 290 किलोमीटर दूर है। झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसका असर राजधानी कराकस सहित कई बड़े शहरों तक महसूस किया गया। कई इमारतें या तो ढह गईं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। कराकस एयरपोर्ट की छत का हिस्सा गिरने की भी पुष्टि हुई है, जिससे यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अब तक की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में 164 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 971 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई लोग अभी भी लापता हैं और आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे बड़ी संख्या में लोग फंसे हो सकते हैं। रेस्क्यू टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन कई इलाकों में सड़कें टूटने और मलबा जमा होने के कारण पहुंचने में कठिनाई हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भूकंप के बाद कम से कम 20 आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में डर और बढ़ गया है। कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों में रात बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। यह भूकंप ऐसे समय में आया जब देश में राष्ट्रीय अवकाश था और लोग ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे। इसी कारण अधिकतर लोग अपने घरों में मौजूद थे, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह झटके किसी सामान्य कार्य दिवस पर आते तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी जियोलॉजिकल एजेंसी के अनुमान के अनुसार, इस भूकंप से बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 44 प्रतिशत संभावना है कि मृतकों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है, जबकि 30 प्रतिशत संभावना यह भी जताई गई है कि यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि ये अनुमान प्रारंभिक हैं और स्थिति की गंभीरता पर लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं। वेनेजुएला सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति ने सभी आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया है और सेना को राहत कार्यों में लगाया गया है। अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं और मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भूकंप का सबसे ज्यादा असर ला गुआइरा और आसपास के इलाकों में देखा गया है, जहां कई रिहायशी इमारतें गिर गई हैं। मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक झटके इतने तेज थे कि कुछ ही सेकेंड में इमारतें हिलने लगीं और देखते ही देखते कई ढह गईं। कराकस एयरपोर्ट पर भी स्थिति गंभीर रही, जहां छत का हिस्सा गिरने के बाद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। धूल और मलबे के कारण एयरपोर्ट संचालन भी प्रभावित हुआ है। कई उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह भूकंप पिछले कई दशकों में इस क्षेत्र का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। इससे पहले 1900 में 7.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। 126 साल बाद आए इस भयानक झटके ने पूरे देश को झकझोर दिया है। भूकंप के बाद कई शहरों में बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। हालांकि लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण बचाव कार्यों में बाधा आ रही है। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मिलकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं। राहत शिविर लगाए जा रहे हैं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 17:48:35 +0530</pubDate>
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