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                <title>PoliticalNews - दैनिक जागरण</title>
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                <description>PoliticalNews RSS Feed</description>
                
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                <title>TMC में सियासी संकट गहराया, बागी गुट आज चुनाव आयोग से करेगा नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[58 विधायक और 20 सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला तृणमूल कांग्रेस का बागी गुट नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मान्यता दिलाने के लिए चुनाव आयोग पहुंचेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-crisis-deepens-in-tmc-rebel-group-will-demand-from/article-57603"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी सियासी संकट अब एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। पार्टी का बागी गुट गुरुवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और हाल ही में गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (नेशनल वर्किंग कमेटी) को आधिकारिक मान्यता देने की मांग करेगा। बागी नेताओं का दावा है कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किए गए हैं और उन्हें संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज कर दी है। बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि चुनाव आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। करीब 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने उन सभी दस्तावेजों को पेश करेगा, जिनमें नई कार्यकारिणी के गठन और संगठनात्मक बदलावों का उल्लेख है। उनके अनुसार 22 जून को कोलकाता में आयोजित प्रतिनिधि बैठक में पार्टी के नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। इस बैठक की जानकारी पहले ही चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है और अब उसी के आधार पर औपचारिक मान्यता की मांग की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीएमसी में यह संकट विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद खुलकर सामने आया। तीन जून को पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की। बाद में इस मांग को मंजूरी भी मिल गई। इसके कुछ दिनों बाद लोकसभा में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया। बाद में इन सांसदों ने एक अलग राजनीतिक मंच के साथ विलय का निर्णय लिया, जिससे टीएमसी के भीतर संकट और गहरा गया। बागी गुट का कहना है कि उसके पास पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक और सांसदों का समर्थन है। दल-बदल कानून की दसवीं अनुसूची के तहत यदि किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य किसी अलग समूह का समर्थन करते हैं या विलय का फैसला लेते हैं, तो उन्हें कानूनी संरक्षण मिल सकता है। इसी आधार पर बागी गुट खुद को वैध संगठन बताते हुए चुनाव आयोग से नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग कर रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और आवश्यक होने पर न्यायपालिका के स्तर पर ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर अधिकार को लेकर भी कानूनी लड़ाई तेज हो सकती है। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम रहते हैं तो मामला उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीएमसी के भीतर पैदा हुआ यह संकट कई राजनीतिक विश्लेषकों को महाराष्ट्र में शिवसेना में हुई बगावत की याद दिला रहा है। वहां भी बड़ी संख्या में विधायक तत्कालीन नेतृत्व से अलग हो गए थे और बाद में संगठन, चुनाव चिन्ह और वैधता को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली थी। आखिरकार चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष के फैसलों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। अब पश्चिम बंगाल में भी कुछ वैसी ही स्थिति बनने की चर्चा तेज हो गई है, हालांकि अंतिम फैसला संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो ममता बनर्जी के पास विधानसभा में केवल 22 विधायक बचे होने का दावा किया जा रहा है, जबकि लोकसभा में भी उनके साथ सांसदों की संख्या काफी कम हो गई है। राज्यसभा में भी कुछ सांसदों के इस्तीफे के बाद उनकी संसदीय ताकत पहले की तुलना में कमजोर बताई जा रही है। हालांकि ममता समर्थक गुट इन दावों से सहमत नहीं है और पूरे घटनाक्रम को कानूनी चुनौती देने की तैयारी में जुटा हुआ है। यदि चुनाव आयोग बागी गुट के दावों पर विचार करता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दूसरी ओर यदि मामला अदालत तक जाता है तो अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है। इस दौरान दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों को मजबूत करने और संगठन पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेंगे। जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई नेताओं की भूमिका भी आने वाले दिनों में बदल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तृणमूल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्षी दल भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि पार्टी में टूट और गहराती है तो आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों, उपचुनावों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका और विपक्षी गठबंधन में उनकी स्थिति को लेकर नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। आयोग के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज, दोनों पक्षों के दावे और आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद का अगला अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 10:10:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पवन खेड़ा का RSS पर हमला, बोले- आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल, जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आज होगा समापन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/pawan-kheda-attacks-rss-says-no-contribution-in-freedom-struggle/article-57301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pawan-khera.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा रविवार देर रात रायपुर पहुंचे। सोमवार को वे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में शामिल होंगे। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), राम मंदिर ट्रस्ट और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई योगदान नहीं रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के नाम पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल को समझने का भी एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में पार्टी कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। यही वजह है कि इस प्रशिक्षण शिविर में संगठन, संवाद, मीडिया प्रबंधन और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान पवन खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोई भूमिका नहीं थी। उनका आरोप था कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में संघ का कोई योगदान दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि जो संगठन देश की आजादी की लड़ाई का हिस्सा नहीं रहे, वे आज इतिहास की नई व्याख्या करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार।</p>
<p class="isSelectedEnd">महात्मा गांधी को लेकर RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि ऐसे बयानों पर अधिक समय खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश इस समय महंगाई, बेरोजगारी और किसानों समेत कई अहम मुद्दों का सामना कर रहा है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को इन विषयों पर चर्चा करनी चाहिए, न कि ऐसे विवादित बयानों के जरिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर भी पवन खेड़ा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट का गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच और निगरानी में हुआ है तथा इसकी गतिविधियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भी नजर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं और उनके नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। खेड़ा ने कहा कि अयोध्या से लेकर उज्जैन तक सामने आए कुछ मामलों ने लोगों के मन में सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना था कि अगर कहीं भी अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।रायपुर में चल रहे कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को लेकर भी उन्होंने विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि पिछले दस दिनों से पार्टी के जिला अध्यक्षों को संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, चुनावी तैयारी, जनसंपर्क अभियान और मीडिया के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। उनका कहना था कि बदलते राजनीतिक माहौल में केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं। कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग की भी जानकारी होना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि संवाद स्थापित करना और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को समझना भी है। जिला अध्यक्षों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न राज्यों में संगठन के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। इससे पार्टी नेतृत्व को भी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का अवसर मिला। गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण शिविर में इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए थे। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने, आम जनता के बीच सक्रिय रहने और विचारधारा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से कहा था कि संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उनके संबोधन के बाद सोमवार को होने वाला समापन समारोह भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। रायपुर में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि जिला स्तर के पदाधिकारियों को नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि वे जनता के बीच अधिक प्रभावी तरीके से पार्टी का संदेश पहुंचा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:53:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आपातकाल दिवस पर भोपाल में बड़ा आयोजन, दो हजार मीसाबंदी परिवार होंगे सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया जाएगा याद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-event-to-be-organized-in-bhopal-on-emergency-day/article-56896"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/emergency-day-bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। शहर के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में होने वाले इस आयोजन में प्रदेशभर से आए करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहेंगे, जो आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों के भोपाल पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक सहित कई वरिष्ठ सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहेंगी। मंच से उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। बताया जा रहा है कि समारोह में आपातकाल के दौर से जुड़े अनुभवों और उस समय की परिस्थितियों पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले मीसाबंदी परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आपातकाल दिवस को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादित अध्याय के रूप में याद किया जाता है। 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद करीब 21 महीनों तक देश में विशेष परिस्थितियां बनी रहीं। इस दौरान कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा गया। विपक्षी दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को बिना नियमित न्यायिक प्रक्रिया के जेल भेजा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में भी उस समय अनेक राजनीतिक कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से कई लोगों को मीसा यानी मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत निरुद्ध किया गया था। ऐसे लोगों को बाद में मीसाबंदी के नाम से जाना गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद इन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देखा गया। यही कारण है कि हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उस दौर को याद किया जाता है और लोकतंत्र की मजबूती पर चर्चा होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार भोपाल में होने वाला कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में मीसाबंदी परिवारों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है। आयोजकों का कहना है कि केवल उन लोगों का सम्मान करना उद्देश्य नहीं है जिन्होंने जेल यात्रा की थी, बल्कि उनके परिवारों के त्याग और संघर्ष को भी याद करना जरूरी है। कई परिवारों ने उस समय सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया था। ऐसे में यह कार्यक्रम लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए सामूहिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने संबोधन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संविधान के मूल्यों पर भी विचार रख सकते हैं। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी और दस्तावेजों का प्रदर्शन भी किया जा सकता है। इसके अलावा कई लोकतंत्र सेनानी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे नई पीढ़ी को उस दौर के बारे में जानकारी मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य स्तर पर आपातकाल को लोकतंत्र पर लगाए गए प्रतिबंध के रूप में याद करने की परंपरा को और अधिक प्रमुखता मिली है। सरकार का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मान देना समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है। रवीन्द्र भवन में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजधानी में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शुक्रवार को सुबह से ही विभिन्न जिलों से आए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों की मौजूदगी से कार्यक्रम स्थल पर विशेष माहौल रहने की उम्मीद है। आपातकाल दिवस के अवसर पर होने वाला यह आयोजन न केवल इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को याद करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के महत्व को भी एक बार फिर रेखांकित करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन और सरकार के एजेंडे पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण देव की मौजूदगी में हुई चर्चा, आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक रणनीति पर रहा फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/brainstorming-on-the-agenda-of-the-organization-and-the-government/article-56794"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bjp-chhattisgarh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में बुधवार को भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन और सरकार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों की मौजूदगी में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की गई और आगामी कार्यक्रमों को लेकर रणनीति तैयार करने पर मंथन हुआ। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, डॉ. नवीन मार्कंडेय सहित कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। पार्टी के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लोकसभा चुनाव और नगरीय निकाय चुनावों के बाद संगठन की आगामी दिशा तय करने के लिए इसे अहम मंच के रूप में देखा जा रहा है। बैठक की शुरुआत संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ हुई। विभिन्न जिलों में चल रहे कार्यक्रमों, सदस्यता अभियान, बूथ स्तर के संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को लेकर फीडबैक लिया गया। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में संगठन की स्थिति का आकलन किया और उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही, जहां संगठन को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पदाधिकारियों को जमीनी स्तर पर पार्टी की पहुंच बढ़ाने और आम जनता से निरंतर संवाद बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में सरकार की योजनाओं और उनकी जमीनी पहुंच को लेकर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पर भी विचार किया गया। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सरकार की जनहितकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और उसका लाभ पात्र हितग्राहियों को समय पर मिल सके। इसी उद्देश्य से संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। माना जा रहा है कि आगामी महीनों में सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा सकते हैं। प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी रणनीति बनाई। पार्टी आने वाले समय में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनसंपर्क अभियानों के जरिए अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए जिला और मंडल स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने को लेकर चर्चा की गई। पदाधिकारियों से कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखें और संगठन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें। बैठक में कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया और संगठन विस्तार के लिए उनकी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में प्रदेशभर से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पदाधिकारियों से उनके क्षेत्रों की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर फीडबैक लिया गया। इससे पार्टी नेतृत्व को जमीनी स्थिति समझने और भविष्य की रणनीति तय करने में मदद मिलेगी। भाजपा नेतृत्व आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठनात्मक मजबूती दोनों को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाना चाहता है। यही वजह है कि ऐसी बैठकों को लगातार महत्व दिया जा रहा है। बैठक में संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाए रखने को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। पार्टी का मानना है कि सरकार की योजनाओं और निर्णयों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए दोनों के बीच बेहतर तालमेल से राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इस दौरान प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं और विकास कार्यों को लेकर भी चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की यह बैठक केवल नियमित संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद पार्टी अब अपने संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। वहीं नगरीय निकायों और अन्य स्थानीय चुनावों को देखते हुए भी कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। बैठक के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने विचार भी रखे और संगठन को मजबूत बनाने के लिए सुझाव दिए। प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पार्टी की ताकत उसके कार्यकर्ता हैं और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय बनाए रखना प्राथमिकता है। इसके साथ ही जनता के मुद्दों को गंभीरता से उठाने और सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करने की बात भी कही गई। कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में हुई यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक से निकले निष्कर्ष और दिशा-निर्देश आने वाले दिनों में प्रदेश भाजपा की कार्यशैली और कार्यक्रमों में दिखाई दे सकते हैं। फिलहाल पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक मजबूती, जनसंपर्क और सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक साथ आगे बढ़ने की रणनीति पर काम करता नजर आ रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:30:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC ने चुनाव आयोग को भेजी नई सूची, ममता बनर्जी को फिर बताया पार्टी प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[बागी गुट द्वारा समानांतर कार्यसमिति के गठन के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी। सूची में ममता बनर्जी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-sent-new-list-to-election-commission-and-again-declared/article-56718"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी ने चुनाव आयोग को अपने पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की अद्यतन सूची भेज दी है। पार्टी द्वारा आयोग को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में ममता बनर्जी को अध्यक्ष, सुभ्रत बक्शी को उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एक दिन पहले पार्टी के बागी गुट ने समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने और विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करने का दावा किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को भेजी गई सूची 20 जून 2026 तक की संगठनात्मक स्थिति के आधार पर तैयार की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व की वैधता और संगठनात्मक संरचना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इधर, तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट से जुड़े आठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी का आरोप है कि ये नेता संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आधिकारिक लाइन से अलग काम कर रहे हैं। हालांकि बागी गुट का दावा है कि उसने पार्टी संविधान के तहत संगठनात्मक रिक्तता को भरने के लिए नई कार्यसमिति गठित की है।</p>
<h2>कार्यसमिति पर विवाद</h2>
<p class="isSelectedEnd">चुनाव आयोग को भेजी गई सूची के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 24 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा, अमित मित्रा और चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यसमिति में स्थान मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता में बैठक कर समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया था। इस गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष तथा फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष घोषित किया था।</p>
<h2>नेतृत्व पर सियासी संदेश</h2>
<p class="isSelectedEnd">बागी नेताओं का कहना है कि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त हो गया था और नई समिति का गठन नहीं होने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस दावे को खारिज कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कोई समानांतर संगठन चलाने का अधिकार नहीं है। सांसद सौगत रॉय ने भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक और सर्वोच्च नेता हैं तथा संगठन की पहचान उनके नेतृत्व से ही जुड़ी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता के खिलाफ प्रदर्शन की घटना भी चर्चा में रही। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे स्थानीय स्तर का मामला बताया है और संगठनात्मक विवाद से जोड़ने से इनकार किया है।</p>
<p>राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागी गुट की गतिविधियों पर पार्टी क्या अनुशासनात्मक कदम उठाती है और चुनाव आयोग के समक्ष संगठनात्मक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट तथा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:54:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उद्धव की शिवसेना में फिर टूट की चर्चा, 7 सांसदों पर दावा</title>
                                    <description><![CDATA[शिंदे गुट के एमएलसी कृपाल तुमाने ने कहा- सात सांसद संपर्क में हैं, उद्धव ठाकरे बोले- जो जाना चाहता है उसे नहीं रोकेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a3138a1df29a/article-56120"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uddhav-thackeray.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने के एक दावे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। तुमाने ने कहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में फिर से संभावित दल-बदल और शक्ति संतुलन को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। कृपाल तुमाने ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पिछले करीब एक महीने से 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बातचीत चल रही है और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में वे बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर शिवसेना के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने भी अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में रहने या जाने का फैसला हर व्यक्ति का अपना है और जो जाना चाहता है, वह खुशी-खुशी जा सकता है। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी उन्हें हालात की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं की थी। उद्धव ठाकरे का यह बयान एक तरह से पार्टी नेताओं को खुली छूट देने जैसा संदेश भी माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की टूट की संभावना नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता लगातार शिंदे गुट के दावों को राजनीतिक प्रचार बता रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से सांसद संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने भी चर्चाओं को हवा दे दी। यह मुलाकात दिल्ली में हुई और इसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं। संजय देशमुख उस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए थे, जिसे उद्धव ठाकरे ने सांसदों के साथ आयोजित किया था। हालांकि उनके करीबी सूत्रों ने पारिवारिक कारणों को इसकी वजह बताया। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को अलग नजरिए से देखा जाने लगा। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। राउत ने कहा कि चार दिन पहले हुई बैठक में सभी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उनके मुताबिक कुछ नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। राउत ने यह भी कहा कि शिंदे गुट के दावे केवल भ्रम फैलाने की कोशिश हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> हाल ही में हुई बैठक में सभी सांसद मौजूद नहीं थे। कुछ सांसदों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया जबकि कुछ अनुपस्थित रहे। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला। हालांकि अनुपस्थित रहने के पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं और पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य स्थिति बता रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का विभाजन कोई नया विषय नहीं है। जून 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उस समय बड़ा झटका लगा था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। उस समय शिवसेना के 55 में से 40 विधायक शिंदे के साथ चले गए थे। इसके बाद राज्य की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदले और अंततः उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद दोनों गुटों के बीच असली शिवसेना को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष शुरू हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और फिर विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर भी सुनवाई हुई। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को बहुमत वाला गुट मानते हुए राहत दी। इसी दौरान चुनाव आयोग ने भी शिवसेना का पारंपरिक चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को आवंटित कर दिया। अब चार साल बाद फिर से टूट और दल-बदल की चर्चा ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है। अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी कंगना रनोट संग देखेंगे 'भारत भाग्य विधाता'</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में मुलाकात के बाद बना कार्यक्रम, चंडीगढ़ में फिल्म के विशेष प्रदर्शन में होंगे शामिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/6a2d42ce3621b/article-55854"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nayabsinghsaini.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार शाम अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट के साथ उनकी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ (BBV) का विशेष प्रदर्शन देखेंगे। चंडीगढ़ में आयोजित इस स्पेशल शो को लेकर राजनीतिक और फिल्मी दोनों हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री और कंगना रनोट एक साथ फिल्म देखने पहुंचेंगे, जिसे लेकर कार्यक्रम की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। यह कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कंगना रनोट की नई दिल्ली में मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों के बीच कई समसामयिक विषयों पर बातचीत हुई थी। सूत्रों के अनुसार, इसी मुलाकात के दौरान फिल्म के विशेष प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा हुई और बाद में इसे अंतिम रूप दिया गया। अब दोनों अगले ही दिन चंडीगढ़ में एक साथ दिखाई देंगे, जिससे इस कार्यक्रम को अतिरिक्त महत्व मिल गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंगना रनोट इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म में वह मुख्य भूमिका निभा रही हैं और कहानी देशभक्ति, नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय मूल्यों जैसे विषयों के इर्द-गिर्द घूमती बताई जा रही है। फिल्म के रिलीज होने के बाद से इसे लेकर अलग-अलग वर्गों में चर्चा जारी है। राजनीतिक पृष्ठभूमि और सामाजिक संदेश वाले विषयों के कारण यह फिल्म मनोरंजन जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी बातचीत का हिस्सा बनी हुई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का किसी फिल्म के विशेष प्रदर्शन में शामिल होना भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। आमतौर पर मुख्यमंत्री सरकारी कार्यक्रमों, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक बैठकों में व्यस्त रहते हैं, लेकिन इस बार उनका सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होना अलग नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसे केवल एक फिल्म शो के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों को समर्थन देने के संदेश के रूप में भी सामने आ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हरियाणा सरकार पिछले कुछ वर्षों में राज्य को फिल्म निर्माण के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने की दिशा में कई कदम उठा चुकी है। प्रदेश में शूटिंग को बढ़ावा देने, फिल्म निर्माताओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के लिए विभिन्न नीतियां लागू की गई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की इस कार्यक्रम में मौजूदगी को फिल्म और मनोरंजन उद्योग के प्रति सकारात्मक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। कंगना रनोट का नाम केवल फिल्म जगत तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई है और सांसद के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इसी वजह से उनकी सार्वजनिक गतिविधियां अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती हैं। मुख्यमंत्री और सांसद के रूप में दोनों नेताओं की मुलाकात तथा उसके बाद फिल्म प्रदर्शन में साथ शामिल होना स्वाभाविक रूप से लोगों की उत्सुकता बढ़ा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शुक्रवार को दिल्ली में हुई मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा हुई थी। समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इस मुलाकात को अलग-अलग नजरिए से देखा। कुछ लोगों ने इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया, जबकि कुछ ने इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक संवाद का हिस्सा माना। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से इसे सामान्य मुलाकात ही बताया गया। फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के विषय को लेकर भी लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। बताया जा रहा है कि फिल्म में राष्ट्रीय भावना, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक बदलाव जैसे पहलुओं को प्रमुखता से दिखाया गया है। कंगना रनोट की फिल्मों को लेकर पहले भी व्यापक बहस और चर्चा होती रही है, इसलिए इस फिल्म को लेकर भी दर्शकों की रुचि बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चंडीगढ़ में आयोजित होने वाला यह विशेष प्रदर्शन केवल फिल्म देखने तक सीमित नहीं माना जा रहा। कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और अन्य आमंत्रित मेहमानों के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन की ओर से तैयारियां की गई हैं। वर्तमान समय में जब राजनीति और मनोरंजन जगत के बीच संवाद लगातार बढ़ रहा है, तब ऐसे कार्यक्रम सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन जाते हैं। कंगना रनोट पहले भी कई सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी राज्य में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं। ऐसे में दोनों का एक मंच पर आना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:41:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, कल्याण बनर्जी के बयान से हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा सांसद के इस्तीफे और संगठन के भीतर उठते सवालों के बीच पार्टी नेतृत्व पर बढ़ा दबाव, कई दावों ने तेज की राजनीतिक चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-tussle-increased-in-tmc-stir-due-to-kalyan-banerjees/article-55673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। पार्टी के भीतर मतभेदों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी का बयान चर्चा के केंद्र में आ गया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह उनके साथ हैं या फिर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ। इस बयान ने न केवल पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर किया है, बल्कि आने वाले दिनों की राजनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें एक मामले से जुड़े वकीलों की सूची में बदलाव की जानकारी देर रात दी गई, जबकि वह भी उस मामले से जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया उन्हें अपमानजनक लगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उचित सम्मान मिलना चाहिए और संगठन में संवाद की कमी नहीं होनी चाहिए। उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही असहमति के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों और जनादेश को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी, इसका फैसला समय के साथ होगा। हालांकि उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। पिछले कुछ दिनों में पार्टी से जुड़े कई घटनाक्रमों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफे और पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं ने खुलकर कहा है कि वे अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पूरा भरोसा रखते हैं और पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता से राजनेता बने सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ तौर पर कहा कि ममता बनर्जी एक मजबूत नेता हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संघर्ष करने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के साथ हैं और नेतृत्व पर उनका भरोसा कायम है। इसी तरह अन्य कई नेताओं ने भी पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। इस बीच कुछ बागी नेताओं और पूर्व नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। कई नेताओं ने संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े दल में चुनावी नतीजों और संगठनात्मक बदलावों के बाद इस तरह की असहमति सामने आना असामान्य नहीं माना जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में उन दावों पर भी चर्चा हो रही है जिनमें कुछ सांसदों और विधायकों के अलग गुट बनाने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों को लेकर अब तक आधिकारिक स्तर पर कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। संबंधित नेताओं की ओर से भी कई मामलों में अलग-अलग बयान सामने आए हैं, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। ऐसे में सभी की नजर आने वाले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। इधर, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं को भी कांग्रेस नेतृत्व ने खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और दोनों दलों के नेताओं के बीच हुई मुलाकातें सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है। साथ ही जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है। इस मामले पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर पार्टी की आंतरिक राजनीति पर पड़ सकता है। तृणमूल कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखने की है। यदि नेतृत्व स्तर पर मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर चलने में सफल रहता है तो मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:53:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार, आज दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक और राष्ट्रपति से मुलाकात प्रस्तावित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/congress-reaches-supreme-court-on-meenakshi-natarajans-nomination-dispute/article-55599"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर चल रहा राजनीतिक घटनाक्रम अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। जानकारी के अनुसार यह याचिका बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात डिजिटल माध्यम से दाखिल की गई। पार्टी का कहना है कि नामांकन निरस्त करने का फैसला उचित नहीं है और मामले की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच चुनाव आयोग के रुख पर भी सभी की नजर बनी हुई है। कांग्रेस की ओर से आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा जा चुका है और अब फैसले का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में गुरुवार दोपहर 3 बजे तक की अवधि को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में नाम वापसी की अंतिम समयसीमा इसी समय तक निर्धारित है। ऐसे में आयोग की ओर से आने वाला कोई भी निर्णय आगे की चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल आयोग की तरफ से सार्वजनिक रूप से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में भी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई गई है जिसमें मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई वरिष्ठ नेता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और संगठन के प्रभारी शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में कानूनी पहलुओं के साथ-साथ राजनीतिक स्थिति पर भी विचार किया जाएगा। इसी क्रम में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का कार्यक्रम भी तय किया गया है। पार्टी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी राष्ट्रपति को देने और अपना पक्ष रखने की तैयारी में है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन 9 जून को जांच प्रक्रिया के दौरान निरस्त कर दिया गया था। नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के समय उनके हलफनामे से जुड़ी एक आपत्ति सामने आई थी। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उपलब्ध दस्तावेजों और आपत्तियों पर विचार करते हुए नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया। यही फैसला अब विवाद का विषय बना हुआ है और कांग्रेस इसे चुनौती दे रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि जिस मामले का उल्लेख किया जा रहा है वह किसी आपराधिक मुकदमे की श्रेणी में नहीं आता। कांग्रेस का तर्क है कि संबंधित अदालत की ओर से केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर पार्टी का कहना है कि हलफनामे में उस जानकारी का उल्लेख अनिवार्य नहीं था। पार्टी का मानना है कि पूरे मामले की कानूनी स्थिति को देखते हुए नामांकन रद्द किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब आगे की स्थिति चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर निर्भर करेगी। यदि आयोग किसी स्तर पर राहत देता है तो चुनाव प्रक्रिया में आगे बदलाव संभव हो सकता है। वहीं यदि आयोग अपने पूर्व निर्णय को बरकरार रखता है तो कानूनी लड़ाई अदालत में आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई कब होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार का दिन इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चुनावी प्रक्रिया की निर्धारित समयसीमाएं और संभावित कानूनी कदम आगे की दिशा तय कर सकते हैं। ऐसे में चुनाव आयोग और न्यायालय की अगली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 12:37:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बंगाल में TMC नेताओं के खिलाफ बढ़ा जनाक्रोश, कई जगह विरोध प्रदर्शन और हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[रिश्वतखोरी, रंगदारी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच नेताओं को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/public-anger-against-tmc-leaders-increased-in-bengal-protests-and/article-55211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/west-bengal-politics.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल इन दिनों काफी गर्म दिखाई दे रहा है। राज्य के विभिन्न इलाकों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और जनाक्रोश की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोग नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं। कहीं नेताओं को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा तो कहीं पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता में रविवार को एक ऐसी ही घटना सामने आई, जब गिरफ्तार TMC पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को अदालत ले जाया जा रहा था। इस दौरान उनकी गाड़ी पर लोगों ने अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया। पाटुली थाना क्षेत्र के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद और उनके सहयोगियों के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। गिरफ्तारी के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता नगर निगम के वार्ड-101 के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को उनके सहयोगी सौरव घोष के साथ गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर रंगदारी, धमकी देने, जबरन घुसपैठ और आग लगाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक स्थानीय वकील ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनसे घर में लीगल चैंबर खोलने की अनुमति के बदले 20 लाख रुपये की मांग की गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कई बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक अन्य वीडियो ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हावड़ा जिले में एक TMC नेता ब्रह्मानंद चक्रवर्ती कथित रूप से पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए साड़ियों के ढेर के नीचे छिपे हुए दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा चर्चा हावड़ा के अमरदाहा गांव की घटना को लेकर हो रही है। यहां ग्रामीणों ने TMC नेता सन्यासी मन्ना पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में नाम जोड़ने और लाभ दिलाने के बदले लोगों से पैसे लिए जाते थे। आरोपों से नाराज ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर उनका सिर मुंडवा दिया। इसके बाद उन्हें जूते-चप्पलों की माला पहनाकर गांव में घुमाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह नेता को भीड़ से बाहर निकाला। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य में पिछले कुछ दिनों के दौरान ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 जून को साल्ट लेक में गिरफ्तार TMC उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को जब पुलिस जांच के लिए एक फ्लैट पर लेकर गई, तब स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की थी। इस दौरान उन पर अंडे भी फेंके गए। उसी दिन दमदम इलाके में TMC पार्षद शंकर दास को कथित राहत सामग्री घोटाले के आरोपों को लेकर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि नाराज भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनके घर के बाहर भी हंगामा किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">3 जून को कूचबिहार जिले में भी एक ऐसी घटना सामने आई थी, जब TMC नेता शाहिदुल मियां को भीड़ के गुस्से से बचने के लिए कथित तौर पर एक घर में बिस्तर के नीचे छिपना पड़ा। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और थाने ले गई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं 30 मई को सोनारपुर दक्षिण इलाके में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित मारपीट की घटना भी चर्चा में रही। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया और उन पर अंडे, जूते तथा अन्य वस्तुएं फेंकीं। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> हाल के दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। विपक्षी दल इन मामलों को लेकर सरकार और सत्तारूढ़ दल पर लगातार हमले कर रहे हैं, जबकि TMC नेताओं का कहना है कि कई मामलों को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आरोपों की जांच करने की बात कह रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी तेज, आज विधायक दल की बैठक में होगा नया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार सबसे मजबूत दावेदार, नई सरकार और कैबिनेट गठन पर सभी की नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparations-for-change-of-leadership-in-karnataka-intensified-new-decision/article-54573"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद राज्य में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं अपने चरम पर पहुंच गई हैं। शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी बैठक में नए नेता का चुनाव किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नाम की है। माना जा रहा है कि विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो जाएगा। बैठक से पहले डीके शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात भी की, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बेंगलुरु में शाम चार बजे आयोजित होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है। पार्टी हाईकमान ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बताया जा रहा है कि बैठक में सबसे पहले विधायक दल के नेता के नाम पर चर्चा होगी और उसके बाद सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं। हालांकि कांग्रेस के भीतर अंतिम निर्णय को लेकर अभी भी औपचारिक घोषणा बाकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं। इस्तीफा देने के अगले ही दिन वे दिल्ली पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इन बैठकों को नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सत्ता संतुलन बनाए रखने और विभिन्न गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसी वजह से दिल्ली और बेंगलुरु के बीच लगातार राजनीतिक संवाद जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो 1 जून को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। केवल मुख्यमंत्री का चेहरा ही नहीं बदलेगा बल्कि मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चर्चा है कि मौजूदा कैबिनेट के कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है और नए चेहरों को मौका मिलेगा। पार्टी के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की स्थिति में भी सिद्धारमैया का प्रभाव सरकार में बना रह सकता है। नई कैबिनेट के गठन में उनके समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पार्टी नेतृत्व इस बात का ध्यान रख रहा है कि सत्ता परिवर्तन के दौरान किसी भी वर्ग या गुट में असंतोष की स्थिति पैदा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधायक दल की बैठक से पहले पार्टी नेताओं के बयानों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने कहा कि यह एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही कैबिनेट भंग हो चुकी है और अब नई सरकार के गठन का फैसला पार्टी हाईकमान के मार्गदर्शन में होगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अंतिम निर्णय संगठन स्तर पर पूरी सहमति के बाद लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच डीके शिवकुमार को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि लंबे समय से पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है और अब उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में शिवकुमार ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है और संगठन के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक ज्योतिषीय दावा भी चर्चा में है। डीके शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने दावा किया है कि शिवकुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। उन्होंने कुछ संभावित शपथ ग्रहण तिथियों का भी उल्लेख किया है। हालांकि राजनीतिक फैसले ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से नहीं बल्कि संगठन और विधायकों की राय से तय होते हैं, फिर भी यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:56:54 +0530</pubDate>
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                <title>अजीत जोगी की पुण्यतिथि पर अमित जोगी का बड़ा संदेश, शुरू करेंगे ‘बेटा बचाओ अभियान’</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जनजागरण अभियान की घोषणा, भावुक वीडियो जारी कर समाज और परिवारों से मांगा सहयोग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/on-the-death-anniversary-of-ajit-jogi-amit-jogis-big/article-54554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/amit-jogi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय अजीत जोगी की छठवीं पुण्यतिथि पर उनके बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी ने एक बड़ा सामाजिक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए “बेटा बचाओ अभियान” चलाने का ऐलान किया है। इस घोषणा के साथ उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की और समाज को इस दिशा में मिलकर काम करने का संदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित जोगी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनके पिता उन्हें जीवन में कई बातें सिखाकर गए थे और आज जब वह उनके बीच नहीं हैं, तब उनकी जिम्मेदारी है कि वह समाज के युवाओं तक एक जरूरी संदेश पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि यह किसी नेता का भाषण नहीं, बल्कि एक बेटे का दूसरे बेटे से संवाद है। उनका कहना था कि नशे को ‘ना’ कहना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में अमित जोगी ने यह भी कहा कि नशे की समस्या किसी एक परिवार या समुदाय तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी चुनौती बन चुकी है जिसका असर पूरे समाज पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने माना कि इस समस्या का कोई आसान समाधान नहीं है, लेकिन जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के जरिए युवाओं को इस रास्ते पर जाने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवारों को भी अपनी भूमिका समझनी होगी और बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना होगा ताकि वे गलत संगति और नशे जैसी आदतों से दूर रह सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">“बेटा बचाओ अभियान” के तहत प्रदेशभर में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस मुहिम में युवाओं, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों को जोड़ा जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना और उन्हें सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस अभियान को लेकर विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अजीत जोगी का नाम छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य गठन के बाद वह छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने थे और लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उनकी पुण्यतिथि पर हर साल विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस बार भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम हुए, लेकिन अमित जोगी की इस घोषणा ने पूरे आयोजन को एक नई दिशा दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल एक सामाजिक अभियान नहीं बल्कि युवाओं से जुड़ने की एक कोशिश भी है। हालांकि अमित जोगी ने अपने संदेश में किसी राजनीतिक मुद्दे का उल्लेख नहीं किया और पूरी तरह सामाजिक सरोकारों पर ही जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह अभियान किसी दल या विचारधारा का नहीं बल्कि हर उस परिवार का है जो अपने बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य देना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में बीते कुछ वर्षों के दौरान नशे से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी को लेकर समय-समय पर चिंता व्यक्त की जाती रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी कई बार सरकार और समाज से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है। ऐसे में “बेटा बचाओ अभियान” को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी अमित जोगी के वीडियो को बड़ी संख्या में लोग साझा कर रहे हैं और अभियान के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:57:29 +0530</pubDate>
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