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                <title>IndianPolitics - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दिग्विजय सिंह का ऐलान: महाकाल से अयोध्या तक करेंगे 1000 किमी पदयात्रा, राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[2 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा, कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी; यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की घोषणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48b697e584e/article-57851"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या की राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी दल या संगठन के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और न ही वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे। उनके अनुसार उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था और आज भी उस दान की रसीद तथा चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने बताया कि पदयात्रा शुरू होने से पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वकीलों से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी है। उनका कहना है कि न्यायालय से राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था बहुत गहरी होती है, इसलिए आर्थिक मामलों में भी स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या आम नागरिक को यदि चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की अपेक्षा है तो वह इस यात्रा में शामिल हो सकता है। उनके अनुसार यात्रा के दौरान वह अपने साथ दान की रसीद और चेक की प्रतियां भी रखेंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए स्वेच्छा से दान दिया था और ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो उनका समाधान भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वह अपना दिया गया चंदा वापस लेकर उसे किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में बने एक गेस्ट हाउस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी सभी संस्थाओं और ट्रस्टों के आर्थिक लेन-देन का समय-समय पर सार्वजनिक विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल एक ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान रूप से पारदर्शिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाने की भी घोषणा की, जिस पर लिखा होगा कि "मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।" इसे उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश बताया। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनकी पूरी यात्रा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि दानदाताओं के मन में उठ रहे सवालों को उचित मंच पर रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>TMC में सियासी संकट गहराया, बागी गुट आज चुनाव आयोग से करेगा नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[58 विधायक और 20 सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला तृणमूल कांग्रेस का बागी गुट नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मान्यता दिलाने के लिए चुनाव आयोग पहुंचेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-crisis-deepens-in-tmc-rebel-group-will-demand-from/article-57603"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी सियासी संकट अब एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। पार्टी का बागी गुट गुरुवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और हाल ही में गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (नेशनल वर्किंग कमेटी) को आधिकारिक मान्यता देने की मांग करेगा। बागी नेताओं का दावा है कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किए गए हैं और उन्हें संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज कर दी है। बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि चुनाव आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। करीब 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने उन सभी दस्तावेजों को पेश करेगा, जिनमें नई कार्यकारिणी के गठन और संगठनात्मक बदलावों का उल्लेख है। उनके अनुसार 22 जून को कोलकाता में आयोजित प्रतिनिधि बैठक में पार्टी के नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। इस बैठक की जानकारी पहले ही चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है और अब उसी के आधार पर औपचारिक मान्यता की मांग की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीएमसी में यह संकट विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद खुलकर सामने आया। तीन जून को पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की। बाद में इस मांग को मंजूरी भी मिल गई। इसके कुछ दिनों बाद लोकसभा में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया। बाद में इन सांसदों ने एक अलग राजनीतिक मंच के साथ विलय का निर्णय लिया, जिससे टीएमसी के भीतर संकट और गहरा गया। बागी गुट का कहना है कि उसके पास पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक और सांसदों का समर्थन है। दल-बदल कानून की दसवीं अनुसूची के तहत यदि किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य किसी अलग समूह का समर्थन करते हैं या विलय का फैसला लेते हैं, तो उन्हें कानूनी संरक्षण मिल सकता है। इसी आधार पर बागी गुट खुद को वैध संगठन बताते हुए चुनाव आयोग से नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग कर रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और आवश्यक होने पर न्यायपालिका के स्तर पर ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर अधिकार को लेकर भी कानूनी लड़ाई तेज हो सकती है। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम रहते हैं तो मामला उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीएमसी के भीतर पैदा हुआ यह संकट कई राजनीतिक विश्लेषकों को महाराष्ट्र में शिवसेना में हुई बगावत की याद दिला रहा है। वहां भी बड़ी संख्या में विधायक तत्कालीन नेतृत्व से अलग हो गए थे और बाद में संगठन, चुनाव चिन्ह और वैधता को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली थी। आखिरकार चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष के फैसलों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। अब पश्चिम बंगाल में भी कुछ वैसी ही स्थिति बनने की चर्चा तेज हो गई है, हालांकि अंतिम फैसला संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो ममता बनर्जी के पास विधानसभा में केवल 22 विधायक बचे होने का दावा किया जा रहा है, जबकि लोकसभा में भी उनके साथ सांसदों की संख्या काफी कम हो गई है। राज्यसभा में भी कुछ सांसदों के इस्तीफे के बाद उनकी संसदीय ताकत पहले की तुलना में कमजोर बताई जा रही है। हालांकि ममता समर्थक गुट इन दावों से सहमत नहीं है और पूरे घटनाक्रम को कानूनी चुनौती देने की तैयारी में जुटा हुआ है। यदि चुनाव आयोग बागी गुट के दावों पर विचार करता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दूसरी ओर यदि मामला अदालत तक जाता है तो अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है। इस दौरान दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों को मजबूत करने और संगठन पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेंगे। जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई नेताओं की भूमिका भी आने वाले दिनों में बदल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तृणमूल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्षी दल भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि पार्टी में टूट और गहराती है तो आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों, उपचुनावों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका और विपक्षी गठबंधन में उनकी स्थिति को लेकर नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। आयोग के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज, दोनों पक्षों के दावे और आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद का अगला अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 10:10:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पवन खेड़ा का RSS पर हमला, बोले- आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल, जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आज होगा समापन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/pawan-kheda-attacks-rss-says-no-contribution-in-freedom-struggle/article-57301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pawan-khera.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा रविवार देर रात रायपुर पहुंचे। सोमवार को वे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में शामिल होंगे। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), राम मंदिर ट्रस्ट और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई योगदान नहीं रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के नाम पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल को समझने का भी एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में पार्टी कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। यही वजह है कि इस प्रशिक्षण शिविर में संगठन, संवाद, मीडिया प्रबंधन और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान पवन खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोई भूमिका नहीं थी। उनका आरोप था कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में संघ का कोई योगदान दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि जो संगठन देश की आजादी की लड़ाई का हिस्सा नहीं रहे, वे आज इतिहास की नई व्याख्या करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार।</p>
<p class="isSelectedEnd">महात्मा गांधी को लेकर RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि ऐसे बयानों पर अधिक समय खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश इस समय महंगाई, बेरोजगारी और किसानों समेत कई अहम मुद्दों का सामना कर रहा है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को इन विषयों पर चर्चा करनी चाहिए, न कि ऐसे विवादित बयानों के जरिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर भी पवन खेड़ा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट का गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच और निगरानी में हुआ है तथा इसकी गतिविधियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भी नजर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं और उनके नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। खेड़ा ने कहा कि अयोध्या से लेकर उज्जैन तक सामने आए कुछ मामलों ने लोगों के मन में सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना था कि अगर कहीं भी अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।रायपुर में चल रहे कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को लेकर भी उन्होंने विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि पिछले दस दिनों से पार्टी के जिला अध्यक्षों को संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, चुनावी तैयारी, जनसंपर्क अभियान और मीडिया के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। उनका कहना था कि बदलते राजनीतिक माहौल में केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं। कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग की भी जानकारी होना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि संवाद स्थापित करना और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को समझना भी है। जिला अध्यक्षों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न राज्यों में संगठन के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। इससे पार्टी नेतृत्व को भी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का अवसर मिला। गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण शिविर में इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए थे। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने, आम जनता के बीच सक्रिय रहने और विचारधारा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से कहा था कि संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उनके संबोधन के बाद सोमवार को होने वाला समापन समारोह भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। रायपुर में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि जिला स्तर के पदाधिकारियों को नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि वे जनता के बीच अधिक प्रभावी तरीके से पार्टी का संदेश पहुंचा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:53:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उद्धव गुट में और टूट के दावे तेज, शिवसेना नेता बोले- सातवें सांसद ने भी की थी शिंदे गुट में जाने की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ी। शिवसेना नेता रामदास कदम ने दावा किया कि एक और सांसद भी आने को तैयार थे, लेकिन मंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बन सकी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/claims-of-further-split-in-uddhav-faction-intensified-shiv-sena/article-56720"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/udhav.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद सियासी सरगर्मी और तेज हो गई है। इस बीच शिवसेना नेता रामदास कदम ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट का एक सातवां सांसद भी शिंदे खेमे में शामिल होना चाहता था। उनके अनुसार संबंधित सांसद ने पार्टी बदलने के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे, लेकिन केंद्रीय मंत्री पद की मांग पूरी नहीं होने के कारण अंतिम समय में फैसला बदल दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदास कदम ने सांसद का नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि वह सांसद उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी हैं और अक्सर उनके बगल में बैठते हैं। कदम के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सोमवार को शिवसेना (UBT) के नौ में से छह लोकसभा सांसद आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इसके साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई है, जिससे संसद में उनकी राजनीतिक ताकत और मजबूत हुई है।</p>
<h2>सांसदों की बगावत से बढ़ी चुनौती</h2>
<p class="isSelectedEnd">मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने छह सांसदों के शामिल होने को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक लड़ाई बालासाहेब ठाकरे के विचारों और मूल शिवसेना की पहचान को बनाए रखने के लिए है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा सांसदों के इस कदम से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर दबाव बढ़ सकता है। वर्ष 2022 में पार्टी में हुई बड़ी टूट के बाद यह दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है।</p>
<h2>विधायकों को लेकर भी अटकलें</h2>
<p class="isSelectedEnd">सांसदों के बाद अब विधायकों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में तीन विधायक और एक विधान परिषद सदस्य शामिल नहीं हुए। इसके बाद संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर कयास लगाए जाने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि अनुपस्थित विधायकों में शामिल सुनील शिंदे ने सोशल मीडिया के जरिए स्पष्ट किया कि वह निजी कारणों से अपने गृह क्षेत्र में थे और बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने पार्टी छोड़ने संबंधी अटकलों को निराधार बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलती रही है। 2022 में शिवसेना में विभाजन और उसके बाद सत्ता परिवर्तन के बाद अब लोकसभा स्तर पर हुए इस नए घटनाक्रम को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में और जनप्रतिनिधि पाला बदलते हैं तो इसका असर राज्य की विपक्षी राजनीति और महाविकास अघाड़ी की रणनीति पर भी पड़ सकता है।</p>
<p>फिलहाल सभी निगाहें शिवसेना (UBT) के अगले कदम और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में जारी इस उथल-पुथल को राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह मामला प्रमुख राजनीतिक चर्चाओं में शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:00:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी का 56वां जन्मदिन, कांग्रेस मुख्यालय में मनाया जश्न</title>
                                    <description><![CDATA[प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ केक काटा, देशभर में कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किए, नेताओं ने दी शुभकामनाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rahul-gandhis-56th-birthday-celebrated-at-congress-headquarters/article-56417"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi-birthday.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपना 56वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, बहन प्रियंका गांधी वाड्रा, वरिष्ठ नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में केक काटा। सुबह से ही कांग्रेस मुख्यालय में उत्साह का माहौल दिखाई दिया और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अपने नेता को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने पहुंचे। राहुल गांधी के जन्मदिन को लेकर केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर राहुल गांधी के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए, जिनमें उन्हें संविधान हाथ में लिए हुए दिखाया गया था। कई कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का जन्मदिन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता के मुद्दों और सामाजिक सरोकारों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को याद करने का अवसर भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ इंदिरा भवन पहुंचे। यहां मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनका स्वागत किया। इसके बाद राहुल गांधी ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर केक काटा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके स्वस्थ एवं लंबे जीवन की कामना की। कुछ बच्चों ने भी राहुल गांधी को उनकी तस्वीरें और शुभकामना संदेश भेंट किए। कांग्रेस मुख्यालय में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। राहुल गांधी के जन्मदिन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के मुद्दों को लगातार सामने लाते रहे हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी का सार्वजनिक जीवन सामाजिक न्याय, समावेशिता और समानता जैसे मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। खड़गे ने कहा कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना और सत्ता से सवाल पूछना राहुल गांधी की राजनीति की पहचान बन चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी को जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। इसके अलावा कांग्रेस नेता शशि थरूर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने भी उन्हें बधाई संदेश भेजे। सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी के समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में शुभकामनाएं साझा कीं। देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने तरीके से जन्मदिन मनाया। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी की तस्वीर का दुग्धाभिषेक किया। वहीं मध्य प्रदेश के भोपाल में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के पोस्टर को केक खिलाकर जन्मदिन की खुशियां मनाईं। कई शहरों में रक्तदान शिविर, पौधारोपण अभियान और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर यूथ कांग्रेस ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक जॉब फेयर का आयोजन भी किया। पार्टी के अनुसार इस रोजगार मेले में हजारों युवाओं ने पंजीकरण कराया। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना था। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी लगातार युवाओं और रोजगार के मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाते रहे हैं, इसलिए उनके जन्मदिन को इस तरह के कार्यक्रमों से जोड़ना सार्थक पहल है। राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली में हुआ था। वे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली और देहरादून में हुई। सुरक्षा कारणों और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उनकी पढ़ाई कई चरणों में अलग-अलग संस्थानों में पूरी हुई। बाद में उन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की और कुछ समय तक निजी क्षेत्र में भी काम किया। राजनीति में उनकी औपचारिक एंट्री वर्ष 2004 में हुई, जब उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले दो दशकों में राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में सक्रिय भूमिका निभाई है। हाल के वर्षों में वे महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक न्याय और संविधान जैसे मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। 56वें जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के उत्साह और देशभर से मिली शुभकामनाओं ने यह साफ कर दिया कि राहुल गांधी पार्टी की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:40:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>BJP छोड़ेंगे या नई राह चुनेंगे? अन्नामलाई की दिल्ली मुलाकातों ने बढ़ाई अटकलें</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बीएल संतोष से मिले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, 7 जून को समर्थकों के साथ बैठक के बाद बड़े फैसले के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/annamalais-delhi-meetings-increase-speculations-about-whether-he-will-leave/article-54762"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/k-annamalai.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। मंगलवार को उन्होंने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें लगातार तेज हो रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नामलाई अपने भविष्य को लेकर गंभीर मंथन कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अभी तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके हालिया बयान और गतिविधियां कई सवाल खड़े कर रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अन्नामलाई भाजपा से किसी टकराव या विवाद की स्थिति में अलग नहीं होना चाहते। बताया जा रहा है कि वे सम्मानजनक तरीके से अपनी आगे की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा तय करना चाहते हैं। चर्चा यह भी है कि वे तमिलनाडु में ‘राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन’ की विचारधारा पर आधारित एक गैर-राजनीतिक जनआंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर लोगों को जोड़ना बताया जा रहा है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भविष्य में यही आंदोलन एक राजनीतिक दल का रूप भी ले सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अन्नामलाई ने संकेत दिया है कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि 7 जून को वे अपने कोर समर्थकों और करीबी सहयोगियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक के बाद ही उनके अगले कदम की औपचारिक घोषणा हो सकती है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी लोकप्रियता और युवाओं के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। भाजपा के अलावा द्रमुक, अन्नाद्रमुक और अन्य क्षेत्रीय दल भी इस घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली रवाना होने से पहले चेन्नई एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने जब उनसे भाजपा छोड़ने की चर्चाओं को लेकर सवाल पूछा था, तब उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा था कि दो दिन इंतजार कीजिए, फिर बात करेंगे। उनके इस बयान ने अटकलों को और हवा दे दी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सब कुछ सामान्य होता तो इस तरह की प्रतिक्रिया शायद देखने को नहीं मिलती। ऐसे में उनके अगले बयान और फैसले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अन्नामलाई और भाजपा के बीच पिछले कुछ समय से मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी। इसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने माना था कि पार्टी नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में उन्होंने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा, जिससे भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुछ समय पहले अन्नामलाई ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को मौजूदा सत्र से लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया था कि इस नीति को 2029-30 शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाए ताकि छात्रों और अभिभावकों को पर्याप्त समय मिल सके। उनके इस रुख को भी पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया था। हालांकि उन्होंने अपनी बात को राज्य के हित और व्यावहारिक जरूरतों से जोड़कर प्रस्तुत किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दावा किया गया कि भाजपा और अन्नाद्रमुक के बीच गठबंधन को लेकर अन्नामलाई पूरी तरह सहमत नहीं थे। माना जाता है कि वे राज्य में भाजपा की स्वतंत्र पहचान मजबूत करने के पक्षधर थे। हालांकि बाद में उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया और पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बावजूद मतभेदों की चर्चाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तमिलनाडु में भाजपा के विस्तार में अन्नामलाई की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनकी ‘एन मन्न, एन मक्कल’ पदयात्रा ने राज्यभर में भाजपा की पहुंच बढ़ाने में मदद की थी। इसी दौरान भाजपा का वोट शेयर भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा था। हालांकि हालिया चुनावी परिणामों ने पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं दिलाई। ऐसे में अन्नामलाई के संभावित अलग रास्ता चुनने की चर्चाओं को भाजपा के लिए चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले चेन्नई और कोयम्बटूर सहित कई शहरों में उनके समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों पर उन्हें नेतृत्व संभालने की अपील की गई है। समर्थकों का कहना है कि अन्नामलाई ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई ऊर्जा पैदा की है और उन्हें सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना चाहिए। कुछ स्थानों पर नए लोगों को उनके संभावित आंदोलन से जोड़ने के प्रयास भी शुरू हो चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:58:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ओवैसी बोले- अजान और नमाज के मुद्दे जानबूझकर उठाए जाते, सभी धार्मिक जुलूसों पर भी हो समान नियम</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद के ईद मिलाप कार्यक्रम में AIMIM प्रमुख ने मीडिया, UCC, NEET और महंगाई जैसे मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/owaisi-said-there-should-be-similar-rules-on-all/article-54580"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/asaduddin-owaisi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हैदराबाद में आयोजित ईद मिलाप कार्यक्रम के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर कई राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। अपने संबोधन में उन्होंने नमाज, अजान, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), NEET पेपर लीक, महंगाई और मीडिया की भूमिका जैसे विषयों को उठाते हुए सरकार और कुछ मीडिया संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि नमाज और अजान से जुड़े मुद्दों को जानबूझकर इस तरह पेश किया जाता है, जिससे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने भाषण में उन्होंने कहा कि सड़क पर नमाज पढ़ने का मुद्दा बार-बार उठाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऐसा रोजाना नहीं होता। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में केवल जुमे या ईद के अवसर पर ही सीमित समय के लिए सड़क पर नमाज अदा की जाती है। इसके बावजूद इसे बड़ा मुद्दा बना दिया जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक यात्राओं और जुलूसों के दौरान भी सड़कें बंद होती हैं, अस्थायी ढांचे लगाए जाते हैं और यातायात प्रभावित होता है, लेकिन उन परिस्थितियों पर उतना विवाद नहीं होता जितना नमाज को लेकर किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ओवैसी ने कहा कि यदि सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर कोई नियम बनाया जाता है तो वह सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अजान से कम और राजनीतिक भाषणों से अधिक समस्या होनी चाहिए, क्योंकि आम जनता की असली चिंताएं रोजगार, शिक्षा और महंगाई से जुड़ी हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी समर्थन में प्रतिक्रिया दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसे बड़े मुद्दे से लाखों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन उस विषय पर उतनी गंभीर चर्चा नहीं हुई जितनी धार्मिक विवादों पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि देश के करीब 22 लाख छात्रों और उनके परिवारों ने परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता का सामना किया, लेकिन कई टीवी चैनलों ने उस मुद्दे को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। इसके बजाय धार्मिक पहचान, खानपान और अजान जैसे विषयों को लगातार बहस का हिस्सा बनाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर सामने आए विवाद का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि यदि कोई छात्र या नागरिक सरकार से सवाल पूछता है तो उसे देशविरोधी या पाकिस्तानी बताना गलत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है और सरकारों को जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि कुछ मामलों में आलोचना को राष्ट्रविरोध से जोड़ दिया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर भी ओवैसी ने अपनी पुरानी आपत्तियां दोहराईं। उन्होंने कहा कि असम में लागू किए जा रहे प्रावधानों में मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित किया जा रहा है, जबकि कुछ अन्य समुदायों को छूट दी गई है। उनके अनुसार यदि कोई कानून समानता के नाम पर लाया जाता है तो उसका स्वरूप वास्तव में सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चयनात्मक तरीके से नियम लागू करने से विवाद और असंतोष पैदा हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हिंदू त्योहारों के दौरान मांस और अंडे की बिक्री पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि यदि किसी धार्मिक अवसर पर कुछ दुकानों को बंद कराया जाता है तो फिर समान सिद्धांत अन्य समुदायों के धार्मिक अवसरों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रमजान के दौरान शराब की दुकानों को भी बंद करने पर चर्चा होनी चाहिए, यदि धार्मिक भावनाओं का सम्मान ही आधार बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का विरोध करना नहीं बल्कि समान व्यवहार की मांग करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महंगाई और बढ़ती तेल कीमतों का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि आम लोगों की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों का पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विषयों पर पर्याप्त सार्वजनिक बहस नहीं होती। उनके मुताबिक आम परिवार आज रोजमर्रा के खर्चों को लेकर परेशान हैं, लेकिन राजनीतिक विमर्श का बड़ा हिस्सा दूसरे मुद्दों में उलझा रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 16:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ाने का गणित समझाया, परिसीमन पर बोले अमित शाह—किसी राज्य को नुकसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने स्पष्ट किया फॉर्मूला, दक्षिणी राज्यों की सीटें भी बढ़ने का दावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/explained-the-mathematics-of-increasing-lok-sabha-seats-to-850/article-51403"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/loksabha-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Amit Shah</span></span> ने परिसीमन और लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा और कुल सीटों में बढ़ोतरी के बाद संतुलन बनाए रखा जाएगा।</p>
<h5><strong>क्या है 850 सीटों का फॉर्मूला</strong></h5>
<p>अमित शाह ने सदन में बताया कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। परिसीमन के बाद इन सीटों में लगभग 50% की वृद्धि की जा सकती है, जिससे कुल संख्या 816 तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि 850 सीटों का आंकड़ा केवल एक अनुमानित (राउंड फिगर) है। इसके साथ ही 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।</p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि 100 सीटों में 33% आरक्षण लागू करना हो, तो पहले सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 करनी होगी। इससे आरक्षण लागू करने के बाद संतुलन बना रहेगा।</p>
<h5><strong>दक्षिणी राज्यों को भी मिलेगा लाभ</strong></h5>
<p>विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए शाह ने कहा कि परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों को भी फायदा होगा। वर्तमान में दक्षिण के पांच राज्यों के पास 129 सीटें हैं, जो बढ़कर 195 हो सकती हैं। प्रतिशत के लिहाज से भी उनकी हिस्सेदारी लगभग समान बनी रहेगी।</p>
<p>राज्यों के अनुसार संभावित बढ़ोतरी:</p>
<p>तमिलनाडु: 39 से 59 सीट</p>
<p>केरल: 20 से 30 सीट</p>
<p>तेलंगाना: 17 से 26 सीट</p>
<p>आंध्र प्रदेश: 25 से 38 सीट</p>
<p>इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी सबसे अधिक अतिरिक्त सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।</p>
<h5><strong>परिसीमन प्रक्रिया और आधार</strong></h5>
<p>गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग मौजूदा कानून के तहत ही काम करेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। इसके लिए संविधान के कई अनुच्छेदों—55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334(ए)—में संशोधन प्रस्तावित हैं।</p>
<h5><strong>विपक्ष ने जताई आपत्ति</strong></h5>
<p>बहस के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Priyanka Gandhi</span></span> ने पूछा कि मौजूदा 543 सीटों में ही 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Asaduddin Owaisi</span></span> ने तर्क दिया कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय कर सकता है। वहीं <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Akhilesh Yadav</span></span> ने इसे राजनीतिक रणनीति बताया।</p>
<p>सरकार का कहना है कि परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों प्रक्रियाएं संवैधानिक प्रावधानों के तहत होंगी और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर लागू की जाएंगी। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 09:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chhattisgarh Liquor Scam: शराब घोटाला केस में बड़ा मोड़, पूर्व मंत्री लखमा समेत 59 आरोपी कोर्ट में पेश, फैसला सुरक्षित रखा</title>
                                    <description><![CDATA[Chhattisgarh Liquor Scam मामले में 59 आरोपियों की पेशी के बाद ईडी की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा। जांच और सुनवाई में बड़े खुलासे सामने आए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-liquor-scam-big-twist-in-liquor-scam-case-59/article-49974"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/chhattisgarh-liquor-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"><strong>Chhattisgarh Liquor Scam:</strong> छत्तीसगढ़ में कथित बहुचर्चित शराब घोटाला केस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत में इस मामले से जुड़े कुल 59 आरोपियों को पेश किया गया, जहां लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब सभी की निगाहें अदालत के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के अनुसार, सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए गए और दस्तावेजी साक्ष्यों की विस्तृत जांच की गई। इस प्रक्रिया में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र चैतन्य बघेल, पूर्व अधिकारी सौम्या चौरसिया और निरंजन दास समेत कई वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट में मौजूद रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">घोटाले की जांच और आरोप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">शराब घोटाला केस की जांच में ईडी और एसीबी-ईओडब्ल्यू ने करीब 3200 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितताओं का दावा किया है। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला एक संगठित नेटवर्क के जरिए चलाया गया, जिसमें शराब के उत्पादन, वितरण और बिक्री प्रणाली को प्रभावित करने के आरोप शामिल हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जांच एजेंसियों का कहना है कि पहले चरण में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन वसूला गया। बाद में इस व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से बढ़ाकर शराब की कीमतों में भी हेरफेर किया गया, ताकि अवैध वसूली को छिपाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इसके अलावा दूसरे चरण में नकली होलोग्राम के जरिए अतिरिक्त शराब को सरकारी सप्लाई चैनल में शामिल करने के आरोप भी सामने आए हैं। कथित तौर पर इस प्रक्रिया में अलग-अलग जिलों में अवैध शराब की बिक्री कर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वित्तीय लेन-देन पर सवाल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">तीसरे चरण में देशी शराब सप्लाई से जुड़े टेंडर और जोन व्यवस्था में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि क्षेत्रीय विभाजन को इस तरह प्रभावित किया गया जिससे कुछ खास समूहों को आर्थिक लाभ मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूत्रों के मुताबिक, शराब घोटाला केस से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी जांच के दौरान सामने आए हैं। खासकर देशी शराब सप्लाई के नाम पर किए गए भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अदालती कार्यवाही और स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईडी की विशेष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क और दस्तावेज प्रस्तुत किए। अधिकारियों के अनुसार, अदालत ने सभी तथ्यों को रिकॉर्ड में लेने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस बीच, राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस प्रकरण को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे क्या होगा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अब शराब घोटाला केस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है। यह निर्णय न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि राज्य की राजनीति पर भी इसका असर देखा जा सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े नए तथ्य और भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-liquor-scam-big-twist-in-liquor-scam-case-59/article-49974</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:25:47 +0530</pubDate>
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