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                <title>Ujjain - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मालवा को विकास की नई रफ्तार, 5,017 करोड़ की उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना का होगा भूमि पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे 98.73 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन का शुभारंभ, 35 लाख लोगों और 62 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी मिलेगी मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-pace-of-development-for-malwa-bhoomi-pujan-of-5017/article-58373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-jaora-greenfield-fourlane.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को नई गति देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को 5,017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद मालवा क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को भी इसका व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। करीब 98.73 किलोमीटर लंबी यह आधुनिक फोरलेन सड़क उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगी। इससे प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मालवा क्षेत्र के आर्थिक विकास और निवेश को नई दिशा देने वाली आधारभूत परियोजना साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सड़क का निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा किया जाएगा। परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए दो वर्ष का लक्ष्य तय किया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। सड़क के दोनों ओर आधुनिक यातायात सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे भविष्य की बढ़ती ट्रैफिक जरूरतों को भी आसानी से पूरा किया जा सके। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना उज्जैन दक्षिण, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके दायरे में आने वाले लगभग 62 गांवों के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी। अनुमान है कि करीब 35 लाख नागरिक इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सड़क सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और तेज यातायात सुविधा उपलब्ध होगी। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और उज्जैन की पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी। परियोजना के अंतर्गत केवल फोरलेन सड़क का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग सुविधाओं का भी समावेश होगा। इसमें तीन रेल ओवरब्रिज, नौ बड़े पुल, 26 मध्यम पुल तथा 417 पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा जावरा बायपास पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज से महू-नीमच फोरलेन तक दोनों ओर सर्विस रोड विकसित की जाएगी। इससे स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अलग-अलग सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नई सड़क बनने से किसानों को सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने में समय कम लगेगा और परिवहन लागत में भी कमी आएगी। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही डेयरी, बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और नए उद्योगों के लिए निवेश का वातावरण मजबूत होगा। मालवा क्षेत्र पहले से ही कृषि, उद्योग और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। आधुनिक परिवहन सुविधाओं के जुड़ने से यहां औद्योगिक गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बाजार तक आसान पहुंच मिलने से प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।पर्यटन क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। उज्जैन विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से महाकाल लोक, श्री महाकालेश्वर मंदिर और आसपास के अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा। इससे होटल, परिवहन, पर्यटन सेवाओं और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:29:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उज्जैन में दो गायों की मौत के बाद बस में तोड़फोड़, आग से वाहन जलकर खाक</title>
                                    <description><![CDATA[पंथ पिपलाई के पास हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश, यात्रियों को सुरक्षित उतारने के बाद बस में आग लगी, पुलिस जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/after-the-death-of-two-cows-in-ujjain-the-bus/article-58068"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन-इंदौर मार्ग पर सोमवार रात एक सड़क हादसे के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। पंथ पिपलाई क्षेत्र में बलराम जाट ढाबे के पास उज्जैन की ओर जा रही एक यात्री बस की टक्कर सड़क पर बैठी दो गायों से हो गई। हादसे में दोनों गायों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और आक्रोश जताने लगे। स्थिति बिगड़ती देख सबसे पहले बस में मौजूद सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इसके बाद बस पर पथराव किया गया, जिससे उसके कई शीशे टूट गए। कुछ ही देर बाद बस में आग लग गई और देखते ही देखते पूरा वाहन आग की चपेट में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस तथा फायर ब्रिगेड को सूचना दी। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही समय में बस का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया। दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए थे, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि बस को भारी नुकसान पहुंचा है।हादसा उस समय हुआ जब बस उज्जैन की ओर जा रही थी। सड़क पर बैठी दो गायें अचानक बस की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद क्षेत्र में मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने बस को रोक लिया और घटना का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ गई। कुछ लोगों ने बस पर पत्थर फेंके, जिससे उसके कांच टूट गए। इसके बाद बस में आग लगने की घटना हुई। आग लगने के कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया कि दो गायों की मौत के बाद बस को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई है। वहीं, आग लगने के कारणों की भी जांच की जा रही है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट की भी जताई गई है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद कुछ समय के लिए उज्जैन-इंदौर मार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और भीड़ को शांत कराया। इसके बाद क्षतिग्रस्त बस को सड़क से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनती रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आग किन परिस्थितियों में लगी। संबंधित विभागों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>काल भैरव मंदिर में VIP दर्शन से 45 दिनों में ₹3.09 करोड़ की आय, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ बनी बड़ी वजह</title>
                                    <description><![CDATA[₹500 की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर प्रबंधन को मिली रिकॉर्ड आय, महाकाल मंदिर के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव धाम पहुंच रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-early-darshan-vip-ticket-system-of-%E2%82%B9-500-started/article-57942"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kal-bhairav-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में शुरू की गई ₹500 की शीघ्र दर्शन (VIP दर्शन) व्यवस्था मंदिर प्रबंधन के लिए आय का बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। महज 45 दिनों के भीतर इस व्यवस्था से 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय दर्ज की गई है। 20 मई से 3 जुलाई के बीच हुई इस कमाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और दर्शन की सुगम व्यवस्था के लिए शुरू किया गया यह प्रयोग सफल साबित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर के बाद उज्जैन में सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर पहुंचते हैं। विशेष रूप से शनिवार, रविवार, अवकाश और धार्मिक पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसी बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन कराने के उद्देश्य से ₹500 की शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था लागू की गई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>45 दिनों में तीन करोड़ से अधिक की आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 20 मई से 3 जुलाई तक VIP दर्शन टिकटों की बिक्री से कुल 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय हुई। यह आय केवल उन दिनों की है, जब टिकटों का नियमित वितरण हुआ। जिन दिनों अत्यधिक भीड़ के कारण टिकट वितरण रोक दिया गया था, उनकी आय इस आंकड़े में शामिल नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य सामान्य दर्शन व्यवस्था को प्रभावित किए बिना भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span>महाकाल के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर में</span></h3>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधक संध्या मार्कंडेय के अनुसार उज्जैन आने वाले अधिकांश श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद काल भैरव मंदिर अवश्य पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते, जब तक श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण वर्षभर यहां श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या बनी रहती है। विशेष अवसरों और छुट्टियों के दौरान मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिलती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अलग प्रवेश मार्ग से कराए जाते हैं शीघ्र दर्शन</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">VIP दर्शन व्यवस्था के तहत टिकट लेने वाले श्रद्धालुओं को अलग प्रवेश मार्ग से मंदिर में प्रवेश कराया जाता है। इससे उन्हें लंबी कतार में खड़े रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती और कम समय में दर्शन हो जाते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग संचालित की जाती हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>प्रतिदिन लाखों रुपये की होती है आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार सामान्य दिनों में शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक की आय होती है। वहीं यदि किसी धार्मिक पर्व, शनिवार, रविवार या अवकाश के कारण श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है तो यह आय बढ़कर 10 से 11 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>भीड़ बढ़ने पर रोकना पड़ता है टिकट वितरण</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">काल भैरव मंदिर का परिसर सीमित क्षमता वाला है। ऐसे में यदि अचानक श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाती है तो सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए VIP टिकटों का वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि कई बार आधे घंटे या उससे अधिक समय तक टिकट बिक्री बंद रखनी पड़ती है ताकि परिसर में धक्का-मुक्की जैसी स्थिति न बने और सभी श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अवकाश के दिनों में रहती है सबसे ज्यादा भीड़</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">शनिवार, रविवार, मुहर्रम सहित अन्य सार्वजनिक अवकाशों के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में सामान्य दर्शन के साथ-साथ शीघ्र दर्शन टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। हालांकि, अत्यधिक भीड़ होने पर प्रशासन को VIP टिकट जारी करना बंद करना पड़ता है ताकि मंदिर परिसर की क्षमता से अधिक लोगों का प्रवेश न हो। पहले छुट्टियों के दौरान भी टिकट जारी किए जाते थे, लेकिन बाद में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में बदलाव किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>धार्मिक पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव काल भैरव, हरसिद्धि, मंगलनाथ, चिंतामन गणेश और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है। बेहतर व्यवस्थाओं और सुविधाओं के कारण श्रद्धालुओं का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>व्यवस्था और सुविधाओं पर रहेगा जोर</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही VIP दर्शन व्यवस्था का संचालन भी पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगा। 45 दिनों में तीन करोड़ रुपये से अधिक की आय यह दर्शाती है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दिग्विजय सिंह का ऐलान: महाकाल से अयोध्या तक करेंगे 1000 किमी पदयात्रा, राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[2 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा, कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी; यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की घोषणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48b697e584e/article-57851"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या की राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी दल या संगठन के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और न ही वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे। उनके अनुसार उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था और आज भी उस दान की रसीद तथा चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने बताया कि पदयात्रा शुरू होने से पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वकीलों से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी है। उनका कहना है कि न्यायालय से राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था बहुत गहरी होती है, इसलिए आर्थिक मामलों में भी स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या आम नागरिक को यदि चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की अपेक्षा है तो वह इस यात्रा में शामिल हो सकता है। उनके अनुसार यात्रा के दौरान वह अपने साथ दान की रसीद और चेक की प्रतियां भी रखेंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए स्वेच्छा से दान दिया था और ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो उनका समाधान भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वह अपना दिया गया चंदा वापस लेकर उसे किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में बने एक गेस्ट हाउस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी सभी संस्थाओं और ट्रस्टों के आर्थिक लेन-देन का समय-समय पर सार्वजनिक विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल एक ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान रूप से पारदर्शिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाने की भी घोषणा की, जिस पर लिखा होगा कि "मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।" इसे उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश बताया। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनकी पूरी यात्रा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि दानदाताओं के मन में उठ रहे सवालों को उचित मंच पर रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>'क्षिप्रा' नहीं, 'शिप्रा' कहिए: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया नदी का वास्तविक नाम</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में सिंहस्थ और नर्मदा परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी अभिलेखों और प्रस्तुतियों में नदी का मूल एवं प्रामाणिक नाम 'शिप्रा' ही लिखा जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/call-it-shipra-not-kshipra-chief-minister-mohan-yadav-told/article-57742"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cm-mohan-yadav-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में गुरुवार को आयोजित सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और नर्मदा नदी परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिप्रा नदी के नाम को लेकर अधिकारियों का ध्यान एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर आकर्षित किया। बैठक में प्रस्तुत किए गए प्रेजेंटेशन में नदी का नाम "क्षिप्रा" लिखा गया था। इसे देखते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि नदी का वास्तविक, ऐतिहासिक और प्रामाणिक नाम "शिप्रा" है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में सभी सरकारी दस्तावेजों, प्रस्तुतियों और आधिकारिक अभिलेखों में "शिप्रा" नाम का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखने वाली नदियों के नामों को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर भी ऐतिहासिक तथ्यों और प्रामाणिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म, इंटरनेट स्रोतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणालियों में नदी का नाम "क्षिप्रा" भी दर्ज है। अधिकारियों का कहना था कि इसी आधार पर प्रस्तुतीकरण में यह नाम शामिल किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक उपयोगी है, लेकिन केवल एआई या इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि ऐतिहासिक और धार्मिक विषयों में मूल ग्रंथों और प्रामाणिक साहित्य का अध्ययन भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषय पर निर्णय लेते समय तकनीकी स्रोतों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और प्रमाणित साहित्य का भी सहारा लिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध संस्कृत काव्य <strong>'मेघदूतम्'</strong> तथा वैदिक ग्रंथों का अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन प्राचीन ग्रंथों में नदी का उल्लेख "शिप्रा" नाम से मिलता है, जो इसके मूल स्वरूप को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है और उसकी प्रमाणिकता प्राचीन साहित्य में सुरक्षित है। इसलिए प्रशासनिक निर्णय लेते समय उन स्रोतों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सुझाव के बाद उपलब्ध स्रोतों की दोबारा समीक्षा की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित माध्यमों से दोबारा जानकारी की पुष्टि की। पुनः जांच के दौरान एआई ने भी यह स्वीकार किया कि नदी का मूल नाम "शिप्रा" ही माना जाता है और पहले प्रस्तुत जानकारी पूरी तरह सटीक नहीं थी। इस घटनाक्रम के बाद अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण में आवश्यक संशोधन करने की सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियों से बचने के लिए तथ्यों का बहुस्तरीय सत्यापन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि तकनीकी साधन सहायक हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय प्रमाणिक स्रोतों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने "शिप्रा" और "क्षिप्र" शब्दों के अर्थ भी समझाए। उन्होंने कहा कि संस्कृत में "क्षिप्र" का अर्थ होता है तेज गति से चलने वाला, जबकि "शिप्रा" का अर्थ शांत, सौम्य और संतुलित प्रवाह वाली नदी माना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिप्रा नदी अपने शांत स्वभाव और धार्मिक महत्व के कारण जानी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में इसका प्रवाह संतुलित रहता है और यही इसकी विशेष पहचान भी है। उन्होंने कहा कि किसी नदी के नाम का संबंध केवल भाषा से नहीं बल्कि उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप से भी होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिप्रा नदी के नाम को लेकर यह पहली बार चर्चा नहीं हुई है। वर्ष 2016 के सिंहस्थ महापर्व से पहले भी "शिप्रा" और "क्षिप्रा" नामों को लेकर बहस सामने आई थी। उस समय भी विभिन्न प्रशासनिक दस्तावेजों और सार्वजनिक उपयोग में दोनों नाम देखने को मिले थे। धार्मिक विद्वानों और इतिहासकारों के बीच भी इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आए थे। हालांकि अनेक प्राचीन ग्रंथों और साहित्यिक संदर्भों में "शिप्रा" नाम का उल्लेख प्रमुख रूप से मिलता है। मुख्यमंत्री के ताजा निर्देश के बाद एक बार फिर यह विषय चर्चा में आ गया है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकारी स्तर पर एकरूपता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और नर्मदा परियोजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना के अनुसार सभी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आयोजन के लिए आधारभूत संरचना, यातायात, पेयजल, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी-अपनी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:53:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उज्जैन रामघाट शिप्रा आरती में महिलाओं-पुजारियों में मारपीट</title>
                                    <description><![CDATA[दीपक बेचने को लेकर विवाद बढ़ा, पीतल की आरती से हमला; वीडियो वायरल के बाद पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a44a5ea468b6/article-57491"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-shipra-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन के प्रसिद्ध रामघाट पर रोजाना होने वाली शिप्रा आरती रविवार शाम उस वक्त अचानक विवाद और हिंसा में बदल गई जब दीपक और पूजन सामग्री बेचने वाली महिलाओं और पुजारियों के बीच कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान हालात कुछ ही मिनटों में बेकाबू हो गए और दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरती खत्म होने के बाद भी घाट पर भीड़ मौजूद थी और उसी दौरान छोटी सी बात ने बड़ा रूप ले लिया। शिप्रा नदी के तट पर हुआ यह विवाद देखते ही देखते पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो गया, जिसमें मारपीट और धक्का-मुक्की साफ नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण रहा और श्रद्धालुओं में भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पूजन सामग्री बेचने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। इसी दौरान बात इतनी बढ़ गई कि पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि पुजारियों ने आरती में इस्तेमाल होने वाले पीतल के दीपक भी महिलाओं की ओर फेंके, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। दूसरी तरफ महिलाओं ने भी विरोध में जवाब दिया और देखते ही देखते पूरा घाट एक तरह से झगड़े का मैदान बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ अचानक हुआ और किसी को भी अंदाजा नहीं था कि धार्मिक आरती स्थल पर इस तरह की स्थिति पैदा हो जाएगी। कई श्रद्धालु बीच-बचाव करने की कोशिश करते रहे लेकिन तब तक मामला काफी आगे बढ़ चुका था। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में वायरल हो गया और पुलिस तक भी पहुंच गया।</p>
<p style="text-align:justify;">महाकाल क्षेत्र से जुड़ी इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन भी तुरंत सक्रिय हुआ। मामला <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mahakal Police Station</span></span> पहुंचा जहां दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। महिलाओं की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें दीपक बेचने से रोका गया और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। एक महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पीतल की आरती उनके सिर पर मारी गई जिससे उन्हें चोट आई। वहीं दूसरी तरफ पुजारियों का कहना है कि महिलाओं ने पहले गाली-गलौज शुरू की और फिर हमला किया। उनका आरोप है कि धक्का-मुक्की के दौरान आरती का जलता हुआ दीपक उनके ऊपर गिर गया जिससे उन्हें भी चोटें आईं। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा का आरोप लगा रहे हैं और अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक घटना में तीन से चार लोगों को चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद गवाहों के बयान के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस घटना के बाद घाट पर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिप्रा आरती जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में नियमित निगरानी और स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>इंदौर-उज्जैन यात्री बस डंपर से टकराई, छह यात्री घायल, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[गधा टेकरी के पास रविवार सुबह हुआ हादसा, ड्राइवर ने ब्रेक फेल होने की बात कही; सभी घायलों का एमवाय अस्पताल में इलाज जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/indore-ujjain-passenger-bus-collides-with-dumper-six-passengers-injured-investigation/article-57193"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-bus-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर से उज्जैन जा रही एक यात्री बस रविवार सुबह सड़क हादसे का शिकार हो गई। शहर के नावदा पंथ क्षेत्र में गधा टेकरी के पास बस आगे चल रहे डंपर से पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि बस में बैठे कई यात्री अपनी सीटों से उछल गए और अफरा-तफरी मच गई। हादसे में छह यात्री घायल हो गए, जिन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। प्रारंभिक जांच में बस चालक ने हादसे की वजह ब्रेक फेल होना बताया है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। चंदन नगर थाना प्रभारी तिलक करोले के अनुसार हादसा रविवार सुबह गधा टेकरी के पास हुआ। इंदौर से उज्जैन की ओर जा रही बस सामान्य रफ्तार से चल रही थी। इसी दौरान सामने सड़क पर चल रहे डंपर से बस पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद कुछ देर के लिए सड़क पर यातायात भी प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों ने तत्काल बस में फंसे यात्रियों की मदद की और पुलिस व एंबुलेंस को सूचना दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर के बाद बस में बैठे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई लोग घबरा गए और अपनी सीटों से उठकर बाहर निकलने लगे। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत बस का दरवाजा खोलकर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ घायलों को प्राथमिक उपचार मौके पर ही दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल यात्रियों को एंबुलेंस की मदद से एमवाय अस्पताल भेजा गया। हादसे में प्रकाश पुत्र मांगीलाल, शोभा, भूपेंद्र पुत्र मोतीलाल, रितू, दिलीप पुत्र बंशीलाल, घनश्याम नाथ और दिनेश घायल हुए हैं। सभी घायलों का चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार सभी की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने घायलों का प्राथमिक उपचार करने के बाद आवश्यक जांच शुरू कर दी है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी उनकी निगरानी करेगी। बस चालक ने पुलिस को बताया कि हादसे से ठीक पहले उसने बस को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन ब्रेक ने काम नहीं किया। चालक का दावा है कि ब्रेक फेल होने के कारण बस सीधे आगे चल रहे डंपर से जा टकराई। हालांकि पुलिस केवल चालक के बयान के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाल रही है। वाहन की तकनीकी जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में ब्रेक फेल हुए थे या हादसे की कोई अन्य वजह भी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस और डंपर को सड़क किनारे हटवाकर यातायात सामान्य कराया। इसके बाद दोनों वाहनों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों का कहना है कि मैकेनिकल एक्सपर्ट की रिपोर्ट मिलने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। यदि वाहन में तकनीकी खामी पाई जाती है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में विशेषज्ञ लगातार वाहन की नियमित फिटनेस जांच और समय पर रखरखाव की जरूरत बताते रहे हैं। खासकर यात्री बसों में ब्रेक, टायर और स्टीयरिंग सिस्टम की समय-समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। छोटी सी तकनीकी खराबी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में चालक को भी यात्रा शुरू करने से पहले वाहन की स्थिति का परीक्षण करना चाहिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि हादसे के समय की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। पुलिस घायलों के बयान भी दर्ज करेगी। प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>गुरुवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य राजा स्वरूप श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान हुआ भव्य पूजन, पंचामृत और भस्म अर्पण से सजा भगवान का स्वरूप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3386bb71ac9/article-56257"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(8).jpg" alt=""></a><br /><div class="text-base my-auto mx-auto [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<p>गुरुवार तड़के उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान एक बार फिर दिव्य और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पूरे गर्भगृह में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंज उठी। भस्म आरती के इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया गया। मंदिर परिसर में उस समय श्रद्धा और आस्था का माहौल ऐसा था कि हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन में लीन दिखाई दिया। पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया और इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। हरिओम जल से किए गए इस अभिषेक के दौरान वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की गई। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत पूजन और अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न की गई। बताया जा रहा है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर दिन भस्म आरती के समय इसी विधि का पालन किया जाता है।</p>
<p>इसके बाद प्रथम घंटाल के साथ ‘हरि ओम’ जल अर्पित किया गया और पूरे गर्भगृह में कपूर आरती की गूंज फैल गई। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस क्षण को अपने मोबाइल और आंखों में कैद करने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन व्यवस्था के चलते गर्भगृह के अंदर केवल सीमित लोग ही प्रवेश कर पाए। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को भांग, चंदन, रजत चंद्र और गुलाब के पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद रजत मुकुट और त्रिपुंड से भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। यह पूरा दृश्य अत्यंत मनमोहक था और ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे स्वयं कैलाश से भगवान भक्तों को दर्शन देने उतरे हों। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर परंपरागत रूप से भस्म अर्पित की गई। यह वही क्षण होता है जिसका इंतजार देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सबसे अधिक करते हैं। भस्म अर्पण के समय पूरा वातावरण शांत हो जाता है और केवल मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनाई देती है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से इस भस्म को अर्पित करने की परंपरा निभाई गई, जिसे सदियों पुरानी धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और उन्हें राजा स्वरूप में श्रृंगारित किया गया। इस दौरान भांग, ड्रायफ्रूट, आभूषण और सुगंधित पुष्पों से उनका भव्य श्रृंगार किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष माला और गुलाब के विशेष हार से भगवान को सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई दे रहा था। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु इस पूरे दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे और कई लोगों की आंखों में आस्था के आंसू भी नजर आए। सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिली और हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन पाने के लिए उत्सुक दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही मान्यता इस आरती को विशेष बनाती है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उज्जैन में आज 207 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देंगे सीएम मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[झारड़ा में 188.42 करोड़ के सामाकोटा बैराज का लोकार्पण, 18 गांवों के 11 हजार से ज्यादा किसान परिवारों को मिलेगा सिंचाई का लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a32456f9e388/article-56171"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को उज्जैन जिले के झारड़ा क्षेत्र के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही सामाकोटा बैराज परियोजना का लोकार्पण करेंगे। करीब 188.42 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस बैराज को मालवा अंचल की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार छोटी कालीसिंध नदी पर निर्मित यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र के किसानों की जरूरत रही है। बैराज के शुरू होने के बाद आसपास के गांवों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को फसल उत्पादन में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>सामाकोटा बैराज की जल संग्रहण क्षमता 17.57 मिलियन घन मीटर है। इस परियोजना के जरिए पाइपलाइन आधारित सिंचाई प्रणाली विकसित की गई है, जिससे करीब 7236 हेक्टेयर कृषि भूमि को पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि झारड़ा, नलखेड़ा, पनोडिया, नीमखेड़ा, घट्टियाजस्सा, मेलाखेड़ी, खोरियापदमा, खेरला, लसूड़ियानहाटा, नागपुरा, छज्जुखेड़ी, देलाखेड़ी, डूंगरखेड़ी, खेड़ामद्दा, कसोन, महिदपुरिया, सोमचिड़ी सहित कुल 18 गांवों के 11 हजार से अधिक किसान परिवारों को इस योजना का सीधा फायदा मिलेगा। क्षेत्र में लंबे समय से बारिश पर निर्भर खेती की समस्या रही है और कई बार कम वर्षा के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। ऐसे में बैराज से मिलने वाली सिंचाई सुविधा को खेती की स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में केवल बैराज का लोकार्पण ही नहीं होगा, बल्कि विभिन्न विभागों से जुड़े कई विकास कार्य भी जनता को समर्पित किए जाएंगे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार करीब 19 करोड़ रुपए से अधिक लागत के अन्य निर्माण कार्यों का उद्घाटन भी इसी अवसर पर किया जाएगा। इनमें उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 4.35 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित महाविद्यालय भवन प्रमुख है। इसके अलावा लोक शिक्षण विभाग के तहत सेमलिया, महिदपुर रोड और कुंडीखेड़ा में बनाए गए कन्या विद्यालय भवनों का भी लोकार्पण किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में इन भवनों को स्थानीय विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>विकास कार्यों की सूची में ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनाएं भी शामिल हैं। मोचीखेड़ा में तैयार किए गए 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र को भी जनता को समर्पित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण इलाकों में वोल्टेज संबंधी समस्याओं में कमी आने की संभावना है। वहीं झारड़ा क्षेत्र में निर्मित 13 नए उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री के हाथों होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से इन भवनों का निर्माण किया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो सकेंगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सुबह से ही बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, किसानों और स्थानीय नागरिकों के कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। क्षेत्र के किसानों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि सामाकोटा बैराज परियोजना को उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों में शामिल माना जाता रहा है। कई किसान संगठनों ने भी इस परियोजना के शुरू होने को कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली से जुड़े नए बुनियादी ढांचे का लाभ भी ग्रामीण आबादी को सीधे तौर पर मिलेगा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस दौरे के दौरान लगभग 207 करोड़ रुपए के विकास कार्य उज्जैन जिले की जनता को समर्पित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>नर्मदा एक्सप्रेस में 90 हजार की चोरी, सो रही महिला का बैग और पर्स लेकर फरार हुआ चोर</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन से बिलासपुर के बीच हुई वारदात, बाथरूम में मिला खाली पर्स; रायगढ़ पहुंचकर महिला ने दर्ज कराई शिकायत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/90-thousand-rupees-stolen-in-narmada-express-the-thief-escaped/article-56098"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/narmada-express-theft.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायगढ़ की रहने वाली एक महिला नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन में चोरी का शिकार हो गई। महिला अपने पति के साथ उज्जैन से बिलासपुर की यात्रा कर रही थी, तभी देर रात अज्ञात चोर ने उसका पर्स और बैग पार कर दिया। बैग में मोबाइल चार्जर, पावर बैंक, कॉस्मेटिक सामान, कपड़े और अन्य जरूरी सामग्री रखी हुई थी। महिला के अनुसार चोरी हुए सामान की कुल कीमत करीब 90 हजार रुपए है। घटना के बाद महिला ने रायगढ़ पहुंचकर जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रायगढ़ के इंदिरा नगर क्षेत्र स्थित केशर परिसर कॉलोनी में रहने वाली 34 वर्षीय पद्मावती थवाईत अपने पति अरुण कुमार थवाईत के साथ शनिवार को उज्जैन से बिलासपुर आने के लिए नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुई थीं। दोनों बी-4 कोच में सीट नंबर 5 और 6 पर यात्रा कर रहे थे। यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी और रात करीब 12 बजे के बाद दोनों अपनी सीट पर सो गए। बताया जा रहा है कि महिला ने अपना पर्स तकिए के पीछे रखा था, जबकि बैग सीट के नीचे रखा हुआ था। रात के समय ट्रेन में अधिकांश यात्री सो रहे थे और इसी दौरान अज्ञात चोर ने मौके का फायदा उठाकर चोरी की घटना को अंजाम दे दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला ने पुलिस को बताया कि सुबह करीब 6 बजे जब उसकी आंख खुली, तब ट्रेन नीवार स्टेशन के आसपास पहुंच रही थी। नींद खुलने के बाद उसने सबसे पहले अपने सामान की ओर देखा तो पर्स और बैग दोनों गायब मिले। शुरुआत में उसे लगा कि शायद सामान कहीं खिसक गया होगा, लेकिन काफी तलाश करने के बाद भी कुछ पता नहीं चला। इससे महिला और उसके पति की चिंता बढ़ गई। दोनों ने आसपास मौजूद यात्रियों से भी पूछताछ की, लेकिन किसी को घटना की जानकारी नहीं थी। काफी देर तक खोजबीन करने के बाद ट्रेन के एक बाथरूम में महिला का पर्स मिला। हालांकि पर्स पूरी तरह खाली था। उसमें रखी नकदी और अन्य जरूरी सामान गायब था। बैग का भी कहीं कोई पता नहीं चला। महिला को तब यह स्पष्ट हो गया कि किसी अज्ञात चोर ने उसका सामान चोरी कर लिया है। चोरी की इस घटना से महिला और उसका परिवार परेशान हो गया, क्योंकि बैग में दैनिक उपयोग की कई जरूरी वस्तुएं रखी हुई थीं। यात्रा के दौरान इस तरह की घटना होने से वे काफी तनाव में आ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद महिला और उसके पति बिलासपुर पहुंचे। वहां तत्काल रायगढ़ जाने वाली ट्रेन उपलब्ध होने के कारण उन्होंने उसी समय बिलासपुर में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। बाद में रायगढ़ पहुंचने के बाद उन्होंने जीआरपी थाने जाकर पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद जीआरपी पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 305(सी) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और ट्रेन के रूट, यात्रियों की जानकारी तथा उपलब्ध अन्य तथ्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा। रेल यात्रियों के बीच इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों का कहना है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में रात के समय चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। खासकर स्लीपर और एसी कोच में सफर करने वाले यात्री भी अब सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। कई बार चोर रात के समय सो रहे यात्रियों को निशाना बनाते हैं और स्टेशन आने से पहले ही सामान लेकर फरार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में चोरी का पता सुबह होने पर चलता है, जिससे आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दरअसल यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ दिनों में ट्रेनों में चोरी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। करीब एक सप्ताह पहले बिलासपुर-रायगढ़ मेमू ट्रेन में यात्रा कर रही एक महिला का सोने का मंगलसूत्र चोरी हो गया था। महिला अपनी बेटी के साथ अकलतरा जा रही थी, तभी भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने उसका मंगलसूत्र पार कर दिया। इसी तरह ओडिशा के सिंदरिया निवासी शेख इमामुद्दीन भी ट्रेन यात्रा के दौरान चोरी का शिकार हुए थे। वे बलसाड़-पुरी एक्सप्रेस के बी-1 कोच में सफर कर रहे थे, जहां अज्ञात चोर उनका बैग लेकर फरार हो गया था। बैग में लैपटॉप, पर्स, क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत करीब 45 हजार रुपए का सामान रखा हुआ था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों में गश्त बढ़ाई जानी चाहिए और संदिग्ध लोगों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाना चाहिए। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों को भी सफर के दौरान अपने सामान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:56:08 +0530</pubDate>
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