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                <title>government employees - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मानसून सत्र से पहले साय सरकार की बड़ी बैठक आज, कई अहम फैसलों के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[शाम 4 बजे मंत्रालय में होगी मंत्रिपरिषद की बैठक, खरीफ सीजन, मानसून की स्थिति और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी होगा मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-government-meeting-today-before-monsoon-session-indications-of-many/article-58202"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-cabinet-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार आज एक अहम कैबिनेट बैठक करने जा रही है। मंत्रालय स्थित महानदी भवन में शाम 4 बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को आगामी विधानसभा मानसून सत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में सरकार सदन में पेश किए जाने वाले विधेयकों, चालू वित्तीय वर्ष के अनुपूरक बजट और कई नीतिगत प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दे सकती है। इसके साथ ही प्रदेश में नई ट्रांसफर नीति पर भी फैसला होने की संभावना जताई जा रही है, जिसका लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले यह मंत्रिपरिषद की अंतिम महत्वपूर्ण बैठक होगी। ऐसे में सरकार सत्र के दौरान पेश होने वाले सभी प्रमुख प्रस्तावों और विधायी कार्यों पर अंतिम चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि कई संशोधन विधेयकों को भी कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए अनुपूरक बजट प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा होगी। विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार अतिरिक्त बजट आवंटन को मंजूरी दे सकती है। अनुपूरक बजट के जरिए विकास कार्यों, अधूरी परियोजनाओं और नई योजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके बाद इसे मानसून सत्र में सदन के सामने रखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट बैठक में प्रदेश में मानसून की मौजूदा स्थिति भी प्रमुख एजेंडा रहेगी। इस वर्ष अब तक राज्य में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है। सरकार इस स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय कर सकती है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कृषि विभाग बैठक में खाद, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर विस्तृत प्रस्तुति देगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों तक समय पर आवश्यक कृषि सामग्री पहुंचे और बुआई का काम प्रभावित न हो। यदि कम बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो वैकल्पिक फसल योजना, सिंचाई प्रबंधन और राहत उपायों पर भी निर्णय लिया जा सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और विभिन्न जिलों की वर्षा रिपोर्ट के आधार पर सरकार प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार कर सकती है। सिंचाई संसाधनों के बेहतर उपयोग, जल संरक्षण और सूखे की आशंका वाले इलाकों के लिए भी आवश्यक कदमों पर विचार होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर इसलिए भी टिकी हुई है क्योंकि नई स्थानांतरण नीति को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। पिछली नीति की अवधि समाप्त होने के बाद कर्मचारी और विभाग दोनों नई व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कैबिनेट इस संबंध में अंतिम फैसला ले सकती है। यदि नीति को मंजूरी मिलती है तो जल्द ही प्रदेशभर में तबादला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नई ट्रांसफर नीति लागू होने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत, लोक निर्माण और अन्य विभागों में लंबे समय से लंबित तबादलों का रास्ता साफ हो जाएगा। कई विभागों ने पहले ही स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं और सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में धान उपार्जन नीति से जुड़े कुछ प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य, खरीद व्यवस्था और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर विभागीय रिपोर्ट की समीक्षा कर सकती है। इसके अलावा कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। मंत्रिपरिषद के सामने किसानों, श्रमिकों, उद्योगों और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई अन्य प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं। इनमें विभिन्न विभागों की नई योजनाएं, प्रशासनिक सुधार और नीतिगत बदलाव शामिल हो सकते हैं। कुछ विभागों ने अपने प्रस्ताव पहले ही सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय आज की बैठक में लिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। विधानसभा मानसून सत्र में विपक्ष सरकार को महंगाई, किसानों की समस्याओं, बारिश की कमी, कानून व्यवस्था और विभिन्न विकास कार्यों को लेकर घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सत्र शुरू होने से पहले सभी विभाग पूरी तैयारी के साथ सदन में जाएं और आवश्यक प्रस्तावों को समय रहते मंजूरी मिल जाए। कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की प्राथमिकताओं की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। विशेष रूप से किसानों, कर्मचारियों और विकास योजनाओं से जुड़े फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। यदि नई ट्रांसफर नीति, अनुपूरक बजट और प्रमुख विधेयकों को मंजूरी मिलती है तो इसका असर आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज पर साफ दिखाई देगा। सरकार की कोशिश होगी कि मानसून सत्र के दौरान विकास, कृषि, वित्त और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लेकर प्रदेश के सामने अपनी कार्ययोजना स्पष्ट रूप से रखी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट से CMHO डॉ. हसानी को बड़ी राहत: 62 नहीं, 65 वर्ष की उम्र में होंगे रिटायर</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर खंडपीठ का अहम फैसला, कहा- मेडिकल अधिकारियों की सेवाएं स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जरूरी; डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रख सकेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-relief-to-cmho-dr-hasani-from-high-court-he/article-58179"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cmho-dr-madhav-prasad-hasani.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत उन्हें 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त किया जाना था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने के पात्र हैं और राज्य सरकार को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि प्रदेश के चिकित्सा अधिकारियों के सेवा नियमों और सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार द्वारा चिकित्सा अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित करने का उद्देश्य अनुभवी डॉक्टरों की सेवाओं का अधिक समय तक लाभ स्वास्थ्य व्यवस्था को उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 30 जनवरी 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त करने के निर्देश दिए गए थे। याचिका में कहा गया कि उन्होंने वर्ष 1999 में संविदा ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। इसके बाद वर्ष 2005 में उनकी सेवाओं का नियमितीकरण किया गया और तब से उन्होंने लगातार चिकित्सा सेवाएं प्रदान की हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि डॉ. हसानी ने लंबे समय तक क्लीनिकल सेवाएं दीं और बाद में विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते हुए मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनके अनुभव और सेवा अवधि को देखते हुए उन्हें 65 वर्ष तक सेवा का लाभ मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि मध्यप्रदेश सरकार पहले ही मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित कर चुकी है। इसके अलावा हाईकोर्ट पूर्व में भी डॉ. कांतिलाल साहू सहित कई मामलों में इसी प्रकार का फैसला दे चुका है। ऐसे में समान परिस्थितियों में डॉ. हसानी को अलग तरीके से सेवानिवृत्त करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि 65 वर्ष तक सेवा जारी रखने का लाभ केवल उन्हीं अधिकारियों को मिल सकता है, जो नियमों में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करते हों। सरकार का कहना था कि याचिकाकर्ता उन निर्धारित शर्तों के अनुरूप पात्र नहीं हैं, इसलिए उन्हें 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी किया गया था। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने मामले का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि डॉ. हसानी वर्ष 1999 से लगातार चिकित्सा सेवाओं से जुड़े रहे हैं और उनके मामले के तथ्य पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णयों से काफी हद तक मेल खाते हैं। अदालत ने यह भी माना कि उन्होंने लंबे समय तक चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है और स्वास्थ्य सेवाओं में उनका अनुभव महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का उद्देश्य केवल सेवा अवधि बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस नीति की भावना को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया सेवानिवृत्ति आदेश विधिसम्मत नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि डॉ. माधव प्रसाद हसानी को 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी जाए और राज्य सरकार आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस फैसले के बाद स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जिन चिकित्सा अधिकारियों के मामले समान परिस्थितियों वाले हैं, वे भी इस निर्णय का हवाला देते हुए कानूनी राहत की मांग कर सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:54:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्यप्रदेश में 4 लाख कर्मचारियों को प्रमोशन, हाईकोर्ट स्टे नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जीएडी ने जारी किए निर्देश, डीपीसी बैठकें शुरू करने की प्रक्रिया तेज, कोर्ट के अंतिम फैसले पर रहेगा प्रमोशन निर्भर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/high-court-no-stay-on-promotion-of-4-lakh-employees/article-57477"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-promotion.jpg" alt=""></a><br /><div class="text-base my-auto mx-auto [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में चार लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद अब पदोन्नति की राह खुलती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि पदोन्नति प्रक्रिया पर हाई कोर्ट की तरफ से कोई अंतरिम रोक नहीं है, ऐसे में मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत रुकी हुई प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जा सकता है। इस फैसले के बाद पूरे प्रशासनिक ढांचे में हलचल देखी जा रही है और अलग-अलग विभागों में तैयारियां भी तेज हो गई हैं। कई कर्मचारी संगठनों ने इसे राहत भरा कदम बताया है, क्योंकि पिछले कई सालों से प्रमोशन की फाइलें अटकी हुई थीं और वरिष्ठ पद खाली पड़े थे। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को सभी विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार करें और पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की बैठकें आयोजित करने को भी कहा गया है। यह पूरा फैसला राज्य सरकार ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की कानूनी राय के आधार पर लिया है। आदेश में यह भी साफ किया गया है कि भले ही पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन हर प्रमोशन आदेश में यह उल्लेख अनिवार्य होगा कि यह मामला अदालत में लंबित अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। मतलब यह कि अगर भविष्य में कोर्ट का निर्णय इसके विपरीत आता है तो सरकार को आवश्यक बदलाव या संशोधन करने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में कानूनी स्थिति काफी अहम रही है। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट में पदोन्नति नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं, लेकिन अभी तक उन पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। इसी आधार पर सरकार को यह राय दी गई कि पदोन्नति प्रक्रिया को रोका जाना जरूरी नहीं है। आने वाले समय में कोर्ट का अंतिम फैसला इस पूरी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। इसी वजह से प्रशासनिक स्तर पर सावधानी बरतते हुए हर कदम रिकॉर्ड में रखा जा रहा है ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी अड़चन न आए। विभागीय स्तर पर अधिकारी अब पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार करने और रिक्त पदों का आकलन करने में जुट गए हैं, ताकि डीपीसी की बैठकों में किसी तरह की देरी न हो। इधर, प्रदेश के प्रशासनिक हालात को लेकर सरकार ने यह भी बड़ा दावा किया है कि वर्तमान में स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल लगभग 40 प्रतिशत स्टाफ के भरोसे ही पूरा सिस्टम चल रहा है। कई विभागों में वर्षों से पदोन्नति न होने के कारण वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं, जिससे कामकाज की गति प्रभावित हो रही है। निचले स्तर पर कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है और नई भर्तियों की प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई है। ऐसे में सरकार का मानना है कि पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करना न केवल प्रशासनिक जरूरत है बल्कि यह जनहित से भी जुड़ा हुआ कदम है। बताया जा रहा है कि अगर यह प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ती है तो लगभग चार लाख कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिलेगा और इसके साथ ही करीब 1.5 लाख नए पद भी रिक्त हो सकते हैं, जिन पर आने वाले समय में नई भर्तियों का रास्ता खुलेगा। इस फैसले को लेकर पूरी स्थिति पूरी तरह आसान भी नहीं मानी जा रही है। अगर भविष्य में कोर्ट का फैसला सरकार के नियमों के खिलाफ आता है तो जिन कर्मचारियों को प्रमोशन मिला होगा, उनकी स्थिति प्रभावित हो सकती है। उन्हें फिर से पुराने पदों पर लौटना भी पड़ सकता है, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर संभावित चुनौतियों पर चर्चा चल रही है। </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 09:48:09 +0530</pubDate>
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                <title>मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया फिर होगी शुरू, सरकार ने सभी विभागों को दिए तैयारी के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए, हालांकि सभी प्रमोशन अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/promotion-process-will-start-again-in-madhya-pradesh-government-has/article-57451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-promotion-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर सामने आई है। करीब एक दशक से विभिन्न कानूनी कारणों और न्यायालय में लंबित मामलों के चलते रुकी हुई पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया अब दोबारा शुरू होने की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सोमवार को राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को पत्र जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभागों को यह कार्रवाई महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर करने के लिए कहा गया है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिए जाने वाले सभी प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। राज्य सरकार के इस फैसले को लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कई विभागों में वर्षों से पदोन्नति नहीं होने के कारण अधिकारी एक ही पद पर लंबे समय से कार्यरत हैं। इसका असर न केवल कर्मचारियों के करियर पर पड़ा, बल्कि विभागों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई। अब सरकार के ताजा निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकें बुलाने की तैयारी शुरू होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर न्यायालय में कई याचिकाएं लंबित हैं। इन मामलों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने महाधिवक्ता से कानूनी राय प्राप्त की थी। महाधिवक्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की राय सरकार को भेजी, जिसके आधार पर विभागों को आगे की कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। कानूनी राय में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम-2025 पर किसी प्रकार की अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। पहले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रमोशन नहीं करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह न्यायालय के आदेश का हिस्सा नहीं था और न ही किसी आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए जाएगा। ऐसे में सरकार अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि कानूनी राय में यह भी कहा गया है कि सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। इसका मतलब यह है कि यदि भविष्य में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अलग आता है, तो सरकार को उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर प्रशासनिक कार्यों को सुचारु बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी सुनिश्चित करना है। सरकार ने अपने पक्ष में यह भी कहा है कि लंबे समय से प्रमोशन नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। अनेक विभाग अपनी स्वीकृत क्षमता के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं। वरिष्ठ पद रिक्त होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और निचले स्तर पर नई भर्तियां भी समय पर नहीं हो पा रही हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यदि पदोन्नति प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो इसका सकारात्मक असर पूरे प्रशासनिक ढांचे पर दिखाई देगा। वरिष्ठ पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति होने से विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और खाली पदों पर नई भर्ती का रास्ता भी साफ होगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं। राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई अधिकारी और कर्मचारी पिछले आठ से दस वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति नहीं मिलने के कारण न केवल उनका वेतन और सेवा लाभ प्रभावित हुए, बल्कि मनोबल पर भी असर पड़ा। संगठनों का कहना है कि यदि न्यायालय की शर्तों का पालन करते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब सभी विभागों की नजर सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद होने वाली विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकों पर रहेगी। माना जा रहा है कि विभाग अपने-अपने स्तर पर पात्र कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची, सेवा अभिलेख और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण शुरू करेंगे। इसके बाद डीपीसी की अनुशंसा के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी किए जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी आदेश न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। यदि भविष्य में अदालत कोई अलग निर्देश देती है तो उसी के अनुसार संशोधित कार्रवाई की जाएगी। इसलिए कर्मचारियों को प्रमोशन मिलने के बावजूद अंतिम कानूनी स्थिति का इंतजार करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:04:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्यप्रदेश पदोन्नति नियमों पर आज अहम बैठक, विरोध तेज</title>
                                    <description><![CDATA[20 विभागों के अधिकारियों के साथ जीएडी करेगा मंथन, SPEAK संगठन ने नियमों को जल्दबाजी बताते हुए जताया विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/important-meeting-today-on-madhya-pradesh-promotion-rules-protest-intensifies/article-57294"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-double-murder-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सोमवार को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) मंत्रालय में 20 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में सरकार पदोन्नति नियमों को लेकर अपना रुख स्पष्ट करेगी और आगे की प्रक्रिया पर रणनीति तय करने की कोशिश करेगी। एक साल पहले जारी इन नियमों पर अभी तक हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन सरकार अब प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। बैठक में 20 प्रमुख विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उप सचिव स्तर के अधिकारियों को बैठक में भेजें। बैठक की अध्यक्षता सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव करेंगे। माना जा रहा है कि इसमें नियम-5 के तहत X और Y श्रेणी के निर्धारण को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी, जो पदोन्नति ढांचे का अहम हिस्सा है।बैठक में उन संवर्गों पर खास फोकस रहेगा जिनमें X और Y की संख्या 0 या 1 तय की जानी है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए पदों की गणना और आरक्षण के प्रावधानों पर भी अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह पूरा ढांचा पदोन्नति प्रक्रिया को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, लेकिन इसे लेकर विभिन्न वर्गों में असंतोष भी बढ़ता जा रहा है। इस बीच सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (SPEAK) ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। संस्था का कहना है कि न्यायालय में मामला लंबित रहते हुए इस तरह नियमों को आगे बढ़ाना जल्दबाजी होगी और इससे कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। संस्था के अध्यक्ष डॉ. के.एस. तोमर ने कहा कि सरकार को पहले कोर्ट का अंतिम निर्णय आने तक इंतजार करना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">SPEAK संगठन का आरोप है कि यदि नए नियम केवल 2025 से लागू किए जाते हैं तो 2016 से अब तक पदोन्नति से वंचित रहे कर्मचारियों और इस दौरान सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि यह मुद्दा केवल वर्तमान कर्मचारियों का नहीं है, बल्कि एक लंबी अवधि से प्रभावित हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। 2016 से प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है, जिससे प्रशासनिक ढांचे में असंतुलन की स्थिति बन गई है। सरकार इस समस्या को हल करने के लिए नए नियमों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन विवादित प्रावधानों को लेकर सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा है। SPEAK संगठन ने वरिष्ठता निर्धारण, कॉमन विचारण सूची, आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को अनारक्षित पदों पर भी विचार करने, प्रतीक्षा सूची और बैकलॉग पदों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने जैसे प्रावधानों पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इन प्रावधानों से सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों के अवसर सीमित हो सकते हैं और यह संतुलन को प्रभावित करेगा। पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और वर्षों से लंबित मामलों को सुलझाने के लिए नए नियम जरूरी हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि यदि जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो विभागों में कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमपी तबादला नीति में छूट से 17 हजार से अधिक ट्रांसफर हुए</title>
                                    <description><![CDATA[मोहन सरकार की एक दिन की छूट में विभागों में ताबड़तोड़ तबादले, 16 दिन में बड़ी प्रशासनिक हलचल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/more-than-17-thousand-transfers-took-place-due-to-relaxation/article-56267"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मोहन यादव सरकार द्वारा तबादलों पर दी गई अस्थायी छूट के बाद मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर जबरदस्त हलचल देखने को मिली है। मध्य प्रदेश तबादला नीति के तहत 16 दिन के भीतर 17 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण किए गए हैं। खास बात यह रही कि केवल एक दिन की विशेष छूट के दौरान ही करीब ढाई हजार तबादले महज़ कुछ घंटों में पूरे कर दिए गए। यह पूरा घटनाक्रम सोमवार और मंगलवार की रात के बीच अधिक सक्रिय रूप में देखा गया, जब विभागों ने देर रात तक आदेश जारी किए। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 15 जून को तबादला अवधि समाप्त होने के बाद मंत्रियों की मांग पर एक दिन की विशेष रियायत दी गई थी, जो मंगलवार रात 12 बजे तक प्रभावी रही। इस अवधि में कई विभागों ने तेजी से अपने स्तर पर तबादला आदेश जारी किए। स्कूल शिक्षा विभाग में प्रक्रिया अभी ऑनलाइन आवेदन स्तर पर होने के कारण आदेश पूरी तरह जारी नहीं हुए हैं, लेकिन बाकी विभागों में बड़े पैमाने पर स्थानांतरण हुए हैं। आबकारी विभाग, जेल विभाग, वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग, पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग और पर्यावरण विभाग जैसे अहम विभागों में तबादलों की लंबी सूची तैयार हुई है। इसके अलावा राजस्व, भू-संसाधन, पीएचई, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, आयुष, किसान कल्याण, कृषि विकास, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और सहकारिता विभागों में भी व्यापक स्तर पर अधिकारियों का फेरबदल किया गया है। कई जगहों पर फाइलें देर रात तक चलती रहीं और आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य स्तर पर विभागवार आंकड़ों की बात करें तो प्रशासनिक स्तर पर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार राजस्व विभाग में लगभग 400, नगरीय विकास एवं आवास में करीब 900, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में 1100 और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में लगभग 1700 तबादले हुए हैं। जनजातीय कार्य विभाग में करीब 1200, लोक निर्माण विभाग में 500 और वन विभाग में 200 से अधिक स्थानांतरण दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग में 200 से ज्यादा, आबकारी विभाग में 75, परिवहन विभाग में 50, वाणिज्यिक कर विभाग में लगभग 150 और जल संसाधन विभाग में 300 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। जिला स्तर पर भी हजारों की संख्या में आदेश जारी होने से प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि कई जिलों में एक ही दिन में बड़ी संख्या में फाइलें निपटाई गईं, जिससे विभागीय कामकाज की गति भी प्रभावित हुई। अधिकारियों के अनुसार तबादलों का आधिकारिक रिकॉर्ड सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति स्तर पर तैयार किया जाता है, लेकिन हर विभाग में वास्तविक संख्या का अलग-अलग संकलन होता है। यही वजह है कि कुल आंकड़े को जोड़ने में भी प्रशासनिक स्तर पर थोड़ा अंतर देखा जाता है। बावजूद इसके, एक दिन की छूट के भीतर हुई यह तेज़ी इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकार की रियायत के बाद विभागों में लंबित तबादलों को तेजी से निपटाया गया। अब आने वाले दिनों में स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश भी जारी होने की संभावना है, जिसके बाद कुल आंकड़ा और बढ़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पटवारियों के लिए नई संविलयन नीति जारी, गृह तहसील में नहीं मिलेगी पोस्टिंग</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्व विभाग ने संविलयन नीति 2026 लागू की, नए जिले की सीनियरिटी से तय होगी वरिष्ठता, 2022 परीक्षा वाले पटवारियों के लिए विशेष शर्तें निर्धारित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-merger-policy-issued-for-patwaris-posting-will-not-be/article-55804"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-patwari-policy-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्व विभाग मध्य प्रदेश ने पटवारियों के अंतर जिला संविलयन को लेकर नई संविलयन नीति 2026 जारी कर दी है। तबादला अवधि समाप्त होने से ठीक पहले जारी इस नीति में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि किसी भी पटवारी को उसकी गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा। साथ ही संविलयन के बाद संबंधित पटवारी की वरिष्ठता नए जिले की सीनियरिटी सूची के आधार पर तय होगी। विभाग का कहना है कि पटवारी जिला संवर्ग का पद होने के कारण उसके लिए अलग से संविलयन नीति लागू की गई है ताकि जिलेवार प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित न हो। नई नीति के अनुसार पटवारी भर्ती परीक्षा 2022 का परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्त हुए कर्मचारी अंतर जिला संविलयन के लिए पात्र होंगे। हालांकि वर्ष 2022 की परीक्षा के माध्यम से नियुक्त हुए पटवारियों को भी कुछ विशेष परिस्थितियों में आवेदन करने का अवसर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संविलयन प्रक्रिया पूरी तरह रिक्त पदों की उपलब्धता और आरक्षण नियमों के पालन के आधार पर होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नीति में कहा गया है कि यदि किसी पटवारी का पति या पत्नी शासकीय कर्मचारी है और दोनों की एक ही जिले में पदस्थापना आवश्यक है, तो रिक्त पद होने की स्थिति में संबंधित जिले में संविलयन किया जा सकेगा। इसी तरह विवाहित महिला, विधवा, तलाकशुदा अथवा परित्यकता महिला पटवारियों को भी आवेदन की अनुमति होगी। गंभीर बीमारियों से पीड़ित पटवारी जैसे कैंसर, किडनी रोग, डायलिसिस पर निर्भर कर्मचारी या ओपन हार्ट सर्जरी से गुजर चुके कर्मचारियों को भी विशेष श्रेणी में संविलयन का लाभ मिल सकेगा। विभाग ने आपसी सहमति के आधार पर संविलयन के मामलों को भी मान्यता दी है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार संविलयन के बाद परिवीक्षा अवधि से जुड़ी समस्त कार्रवाई नए जिले में पूरी की जाएगी। हालांकि कर्मचारी को विभागीय नियमों और सेवा शर्तों का पालन पहले की तरह करना होगा। किसी पटवारी के विरुद्ध चल रही विभागीय जांच, दंडात्मक कार्रवाई, विशेष दायित्व या व्यक्तिगत सेवा अभिलेख की जानकारी पुराने जिले द्वारा नए जिले को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संविलयन के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। आवेदन करते समय कर्मचारियों को अपनी श्रेणी से संबंधित जानकारी दर्ज करनी होगी। इसमें सामान्य, पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओपन वर्ग, महिला वर्ग, भूतपूर्व सैनिक और दिव्यांग श्रेणी जैसी जानकारियां शामिल होंगी। विभाग ने साफ किया है कि ऑनलाइन आवेदन के साथ कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे और सभी जानकारी कर्मचारी को स्वयं दर्ज करनी होगी। नीति में कुछ अपात्रता की शर्तें भी तय की गई हैं। जिन पटवारियों के खिलाफ लोकायुक्त या किसी अन्य एजेंसी द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज है, वे संविलयन के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे मामलों में आवेदन स्वतः निरस्त माना जा सकता है। संविलयन संबंधी अंतिम आदेश आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन द्वारा जारी किए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि संविलयन केवल उसी स्थिति में किया जाएगा जब संबंधित जिले में उस वर्ग के रिक्त पद उपलब्ध हों। आरक्षण नियमों और जिला स्तरीय रोस्टर का पालन करना अनिवार्य रहेगा। किसी भी जिले में आरक्षित पदों की संख्या से अधिक पदस्थापना नहीं की जाएगी और न ही आरक्षण नियमों के विपरीत किसी कर्मचारी को समायोजित किया जाएगा। जिले के भीतर पदस्थापना का अधिकार कलेक्टर के पास रहेगा, लेकिन नई नीति के अनुसार किसी भी पटवारी को उसकी गृह तहसील में नियुक्ति नहीं दी जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहेगी। संविलयन आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारी को 15 दिनों के भीतर नए जिले में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। नीति में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक बार संविलयन के माध्यम से जिला आवंटित हो जाने के बाद दोबारा जिला परिवर्तन की पात्रता नहीं रहेगी। नए जिले में कार्यभार ग्रहण करने के बाद कर्मचारी की वरिष्ठता वहीं की संचालित वरिष्ठता सूची के आधार पर निर्धारित की जाएगी। इससे कई कर्मचारियों की वरीयता स्थिति में बदलाव भी संभव माना जा रहा है। राजस्व विभाग का कहना है कि नई संविलयन नीति का उद्देश्य पारदर्शी, व्यवस्थित और नियम आधारित पदस्थापना व्यवस्था सुनिश्चित करना है ताकि जिलेवार प्रशासनिक जरूरतों और कर्मचारियों की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:40:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की सीमा हटेगी, सीएम ने ड्राफ्ट निरस्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विवादित प्रस्तावित नियम वापस लेने के निर्देश दिए, अब दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को अपात्र ठहराने वाला प्रावधान हटाकर नया मसौदा तैयार किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-limit-of-two-children-for-government-jobs-in-madhya/article-55515"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-government-jobs.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लेते हुए दो बच्चों की सीमा संबंधी विवादित प्रावधान को वापस लेने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 के उस प्रस्तावित मसौदे को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल प्रभाव से ड्राफ्ट हटाने और संशोधित प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस कदम को लाखों युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से इस प्रस्तावित नियम को लेकर प्रदेशभर में चर्चा चल रही थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इस प्रावधान को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कई लोगों का मानना था कि यह नियम बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 जून 2026 को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 का प्रारूप जारी किया था। इस मसौदे में यह प्रावधान शामिल किया गया था कि जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक जीवित संतान होंगी, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जा सकता है। जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई वर्गों ने इसे कठोर और विवादास्पद कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण से जोड़कर समर्थन भी किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि सरकार को विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मौजूदा ड्राफ्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसे सरकारी पोर्टल से हटाया जाए। साथ ही नया संशोधित मसौदा तैयार किया जाए, जिसमें दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़ा प्रावधान शामिल न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल में प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा रही। अधिकारियों के अनुसार सरकार का उद्देश्य ऐसा नियम बनाना है जो व्यावहारिक हो और व्यापक जनहित को ध्यान में रखे। इसी वजह से नए प्रारूप पर दोबारा काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि विभाग जल्द ही संशोधित मसौदा सार्वजनिक कर सकता है, जिस पर फिर से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की पात्रता प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अभ्यर्थियों के बीच राहत का माहौल देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्तमान में कार्यरत कई सरकारी कर्मचारी भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे। कर्मचारियों के बीच यह आशंका थी कि भविष्य में सेवा संबंधी नियमों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया था, लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर लगातार जारी था। अब ड्राफ्ट वापस लिए जाने के बाद इन आशंकाओं पर भी विराम लग गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार ने जनभावनाओं और विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। हाल के वर्षों में कई राज्यों में दो बच्चों की नीति को लेकर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इसे लेकर कानूनी और सामाजिक बहस भी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी प्रस्तावित नियम के सार्वजनिक होते ही इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुसार नया मसौदा तैयार करते समय भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वर्ग के साथ अनावश्यक भेदभाव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित प्रारूप तैयार करने से पहले सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस फैसले को राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी काफी हद तक समाप्त हो गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-limit-of-two-children-for-government-jobs-in-madhya/article-55515</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:06:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग में बड़ा फेरबदल, 165 अफसर-कर्मचारियों के तबादले</title>
                                    <description><![CDATA[परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विभाग ने व्यापक स्तर पर तबादला आदेश जारी किया है। कई जिलों और चेकपोस्टों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-reshuffle-in-chhattisgarh-transport-department-transfer-of-165-officers/article-55289"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-transport-department.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग में सोमवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला। विभाग की ओर से जारी आदेश में कुल 165 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। यह बदलाव राज्यभर में परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के उद्देश्य से किया गया है। परिवहन आयुक्त कार्यालय से जारी सूची में परिवहन निरीक्षक, परिवहन उपनिरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में हुए तबादलों को विभाग का महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जारी आदेश के अनुसार 46 परिवहन निरीक्षकों, 50 परिवहन उपनिरीक्षकों, 16 सहायक उपनिरीक्षकों, 35 प्रधान आरक्षकों और 18 आरक्षकों की नई पदस्थापना की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमित प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन इस बार बड़े पैमाने पर बदलाव कर मैदानी स्तर पर निगरानी को और मजबूत करने की कोशिश की गई है। अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से विभिन्न जिलों और चेकपोस्टों में पदस्थ कर्मचारियों का स्थानांतरण आवश्यक माना जा रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तबादला सूची में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी शामिल हैं। कोरबा उड़नदस्ता में पदस्थ परिवहन निरीक्षक अनुपम पटेल को नारायणपुर का प्रभारी जिला परिवहन अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं दुर्ग में कार्यरत परिवहन निरीक्षक सनत कुमार जागड़े को बीजापुर जिले का प्रभारी जिला परिवहन अधिकारी बनाया गया है। दोनों जिलों को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और ऐसे में इन नियुक्तियों को विभाग की रणनीतिक तैनाती के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा कई अधिकारियों को अलग-अलग जिलों और चेकपोस्टों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कृष्ण कुमार चौबे को अंबिकापुर से चिल्फी चेकपोस्ट भेजा गया है। वैभव शुक्ला को रायपुर से रामानुजगंज स्थानांतरित किया गया है, जबकि मोहम्मद आबिद खान को कोटा से धनपुंजी चेकपोस्ट की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं संतोष कुमार राठौर, चंद्र कुमार साहू और अरुणा साहू को रायपुर उड़नदस्ता में नई पदस्थापना दी गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इन पदस्थापनाओं से क्षेत्रीय स्तर पर निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिवहन विभाग ने कुछ अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। महेंद्र कुमार कुलदीप को बिलासपुर परिवहन कार्यालय में पदस्थ किया गया है। राजेंद्र कुमार बर्मन को पाटेकोहरा चेकपोस्ट से रायगढ़ उड़नदस्ता भेजा गया है। केशव प्रसाद राजवाड़े को दुर्ग उड़नदस्ता में जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जितेंद्र भूषण को पाटेकोहरा चेकपोस्ट का कार्यभार सौंपा गया है। विभाग का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को नई जगहों पर भेजने से कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और परिवहन नियमों के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। बताया जा रहा है कि परिवहन विभाग लंबे समय से अपनी फील्ड यूनिट्स को अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में काम कर रहा था। सड़क सुरक्षा, मालवाहक और यात्री वाहनों की निगरानी, टैक्स संग्रहण और नियमों के पालन जैसे विषयों पर विभाग लगातार समीक्षा कर रहा था। इसी क्रम में यह व्यापक तबादला सूची जारी की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि नई पदस्थापनाओं से कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी बिना अनावश्यक विलंब के नई जिम्मेदारी संभालें। इसके साथ ही स्थानीय कार्यालयों को भी निर्देश दिए गए हैं कि कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए ताकि प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो। राज्य में परिवहन व्यवस्था को लेकर समय-समय पर समीक्षा बैठकों में कार्यकुशलता बढ़ाने और मैदानी अमले को सक्रिय बनाने पर जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में 165 अधिकारियों और कर्मचारियों का एक साथ तबादला विभाग के बड़े प्रशासनिक फैसलों में से एक माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस फेरबदल के बाद परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था और मजबूत होगी तथा विभिन्न जिलों में लंबित कार्यों को गति मिलेगी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-reshuffle-in-chhattisgarh-transport-department-transfer-of-165-officers/article-55289</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:31:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तहसीलदारों की हड़ताल से छत्तीसगढ़ में राजस्व कामकाज ठप, विधायक की गिरफ्तारी की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[सरगुजा विवाद के बाद प्रदेशभर के 500 से अधिक तहसीलदार आंदोलन पर, आम लोगों को हो रही परेशानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/revenue-work-stalled-in-chhattisgarh-due-to-strike-of-tehsildars/article-54859"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-tehsildar-strike.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन और राजनीतिक गलियारों के बीच चल रहा विवाद अब बड़े आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के 500 से अधिक तहसीलदार और नायब तहसीलदार बुधवार को सामूहिक हड़ताल पर चले गए, जिसके चलते राज्य की अधिकांश तहसीलों में कामकाज प्रभावित रहा। नामांतरण, बंटवारा, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी प्रकरणों की सुनवाई और अन्य राजस्व सेवाएं लगभग ठप रहीं। इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ा, जिन्हें अपने जरूरी कामों के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने पड़े। हड़ताल का केंद्र बिंदु सरगुजा जिले में सामने आया वह विवाद है, जिसमें सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के बीच टकराव का मामला सामने आया था। राजस्व अधिकारियों का आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने नायब तहसीलदार के साथ मारपीट की थी। दूसरी ओर विधायक का कहना है कि उनकी चचेरी बहन के साथ कथित अभद्रता किए जाने के कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ। दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने काउंटर एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन अब तक किसी पक्ष पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होने से असंतोष बढ़ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्यभर के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने इस मामले को प्रशासनिक गरिमा और अधिकारी सुरक्षा से जोड़ते हुए आंदोलन का रास्ता अपनाया है। राजधानी रायपुर में बड़ी संख्या में अधिकारी एकत्र हुए और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी के साथ ड्यूटी के दौरान मारपीट होती है और उसके बाद भी कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र का मनोबल प्रभावित होता है। हड़ताल के कारण कई जिलों में राजस्व अदालतों की सुनवाई प्रभावित हुई। बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, अंबिकापुर, राजनांदगांव, धमतरी और अन्य जिलों से भी कामकाज प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। सुबह से ही लोग विभिन्न राजस्व कार्यों के लिए तहसीलों में पहुंचे, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। कई लोगों ने बताया कि भूमि संबंधी मामलों की सुनवाई पहले से लंबित है और अब हड़ताल के कारण और देरी होने की आशंका है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर और अधिक दिखाई दिया। किसानों, विद्यार्थियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों को प्रमाण पत्र और दस्तावेजों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कई आवेदकों ने कहा कि वे दूर-दराज गांवों से यात्रा कर तहसील मुख्यालय पहुंचे थे, लेकिन काम नहीं हो पाने से उन्हें अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ा। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सत्ता पक्ष के विधायक को बचाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि किसी आम व्यक्ति पर ऐसे आरोप होते तो तत्काल कार्रवाई की जाती, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के कारण मामले में देरी हो रही है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि जांच प्रक्रिया अपने स्तर पर चल रही है और कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संतुलन और कार्य संबंधों पर भी चर्चा शुरू कर दी है। जानकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोनों पक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाते हैं, जबकि अधिकारी उन समस्याओं के समाधान के लिए नीतियों और कानूनों के अनुसार कार्य करते हैं। ऐसे में टकराव की स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। हड़ताल कर रहे अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं है, बल्कि अधिकारी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास भी जारी हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार और अधिकारी संगठनों के बीच संवाद की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। यदि बातचीत सफल होती है तो हड़ताल समाप्त हो सकती है और प्रभावित सेवाएं फिर से शुरू हो सकती हैं। हालांकि फिलहाल आंदोलनकारी अधिकारी अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। राजस्व विभाग आम नागरिकों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे में लंबे समय तक कामकाज प्रभावित रहने से लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए सभी पक्षों की नजर अब सरकार की अगली रणनीति और संभावित समाधान पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बातचीत के जरिए रास्ता निकलता है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:29:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>MP की नई तबादला नीति जारी, टारगेट पूरे नहीं करने वालों पर होगी पहले कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश सरकार ने नई तबादला नीति 2026 जारी की। लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले प्राथमिकता से होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mps-new-transfer-policy-released-first-action-will-be-taken/article-53985"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-transfer-policy-2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश सरकार ने शुक्रवार को नई तबादला नीति 2026 पेश की। इस बार की नीति में सबसे ज्यादा चर्चा उस प्रावधान की हो रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया है कि जो अधिकारी और कर्मचारी तय लक्ष्य पूरे नहीं करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका तबादला प्राथमिकता के आधार पर होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके अनुसार 1 जून से 15 जून 2026 तक राज्यभर में तबादलों की प्रक्रिया चलेगी। उम्मीद है कि इस बार काफी संख्या में प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई नीति के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक ही जिले में तीन साल पूरे होने के बाद बाहर भेजा जा सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ये नियम तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों पर भी लागू होंगे। लेकिन सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि तीन साल की अवधि पूरी होना कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी का प्रदर्शन खराब पाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या उसने वित्तीय वर्ष के लक्ष्य पूरे नहीं किए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे तय समय से पहले भी हटाया जा सकता है। यही कारण है कि इस बार कई विभागों में प्रदर्शन आधारित तबादलों की चर्चा जोरों पर है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने विभागों को यह भी निर्देश दिया है कि केवल समय अवधि के आधार पर तबादले न किए जाएं। गंभीर शिकायतें</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट के आदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिक्त पदों की जरूरत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पदोन्नति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रतिनियुक्ति से वापसी जैसे मामलों में भी तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिक्त पद भरने के नाम पर लंबी चेन बनाकर तबादले करने पर पाबंदी रहेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बार की नीति में महिला कर्मचारियों और रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को राहत दी गई है। जिनकी सेवानिवृत्ति में एक साल या उससे कम समय बचा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका सामान्यतः तबादला नहीं किया जाएगा। अविवाहित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का भी प्रावधान है। पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पोस्टिंग देने के लिए आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंतिम फैसला प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से होगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है। कैंसर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसे मामलों में चिकित्सा बोर्ड की सिफारिश पर स्थानांतरण किया जा सकेगा। 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि वे चाहें तो स्थानांतरण ले सकेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने कर्मचारी संगठनों के नेताओं को भी राहत दी है। मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी चार साल तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तबादले से छूट रहेगी। वहीं दूसरी तरफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर वित्तीय अनियमितता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें तुरंत संबंधित पद से हटाने का प्रावधान भी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नीति में यह भी कहा गया है कि शासन की हाई प्रायोरिटी योजनाओं में लगे कर्मचारियों के तबादले कम से कम किए जाएं। जबकि जिन अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें कार्यपालिक पद पर नहीं रखा जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन जारी होंगे और 15 जून के बाद जारी आदेश अमान्य माने जाएंगे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस नीति को प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना ये है कि विभाग किस स्तर पर प्रदर्शन के आधार पर कार्रवाई करते हैं और आने वाले दिनों में किन अफसरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बदलती हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:06:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>मध्य प्रदेश में तबादलों पर नई व्यवस्था तय, कल CM मोहन यादव कैबिनेट में लगेगी मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में तबादला नीति 2026 को बुधवार को कैबिनेट मंजूरी दे सकती है। प्रशासनिक और स्वैच्छिक ट्रांसफर नियमों में बदलाव संभव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-system-on-transfers-in-madhya-pradesh-will-be-approved/article-53805"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-transfer-policy-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>MP Transfer Policy 2026:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश में काफी समय से इंतजार कर रही तबादला नीति को </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव ने प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा कर ली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब इसे मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से हरी झंडी मिल जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके बाद विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा। इस बार की तबादला नीति में सबसे ज्यादा बातचीत स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के अलग-अलग लिमिट को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू कर सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले की नीतियों में कुल कर्मचारियों का एक सीमित प्रतिशत ही ट्रांसफर किया जा सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों तरह के तबादले शामिल होते थे। कई बार जरूरी पद खाली होने के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं हो पाता था। इस बार सरकार उस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक आधार पर तबादलों की गुंजाइश बढ़ाने पर सहमति बनी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्वैच्छिक तबादलों के लिए अलग नियम बनाने की तैयारी है। मंत्री विजय शाह ने पिछली कैबिनेट बैठक में स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट को खत्म करने का सुझाव दिया था। उस समय मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अगली बैठक में पूरी नीति का प्रस्ताव लाया जाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक स्थगित होने के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब बुधवार सुबह </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे मंत्रालय में बैठक होने जा रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की क्षेत्रीय परिषद बैठक में व्यस्त रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उस दिन भी कैबिनेट नहीं हो पाई। अब ये उम्मीद की जा रही है कि बुधवार की बैठक में तबादला नीति के साथ कुछ और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। कर्मचारियों के बीच नई नीति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। कई विभागों में पिछले कई महीनों से ट्रांसफर रुके हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कर्मचारी नई सूची का इंतजार कर रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि इस बार सभी विभागों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति अलग रखने की योजना है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हर साल होता आया है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनजातीय कार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा और राजस्व विभाग भी अलग गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से अलग कोई विभाग नीति नहीं बना सकेगा। प्रस्ताव में ये भी शामिल किया गया है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जिले के भीतर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की मंजूरी से किए जाएंगे। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की स्वीकृति जरूरी होगी। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले एक साल में ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में फिर से स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया है। अब राज्य मंत्री जरूरतमंदों के लिए </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए तक की सहायता राशि मंजूर कर सकेंगे। इससे पहले ये सीमा </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए थी। कैबिनेट मंत्रियों के लिए यह राशि पहले ही </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए कर दी गई थी। </span>11 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले को आगामी प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:58:40 +0530</pubDate>
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