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                <title>MP government - दैनिक जागरण</title>
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                <description>MP government RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एमपी के 48 लाख ग्रामीण परिवारों को बड़ी सौगात, अब मुफ्त होगी भूमि रजिस्ट्री</title>
                                    <description><![CDATA[स्वामित्व अधिकार योजना के तहत स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ, राजस्व अधिकारियों को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार; ग्रामीणों को आसानी से मिलेगा मालिकाना हक और बैंक ऋण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-gift-to-48-lakh-rural-families-of-mp-now/article-58367"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की भूमि पर वर्षों से काबिज लाखों परिवारों को बड़ी राहत देते हुए स्वामित्व अधिकार योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सब रजिस्ट्रार के अधिकार प्रदान कर दिए हैं। अब ये अधिकारी भी ग्रामीणों की भूमि की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के 48 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मिलेगा, जिन्हें बिना किसी स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क के अपनी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक प्राप्त होगा। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के स्वामित्व से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद कम होंगे और लोगों को अपनी संपत्ति के वैध दस्तावेज आसानी से मिल सकेंगे। अब तक ग्रामीणों को रजिस्ट्री कराने के लिए उप-पंजीयक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन नए आदेश के बाद तहसील स्तर पर ही यह प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। इससे समय की बचत होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक सरल बनेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के तहत स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ करने का निर्णय पहले ही लिया था। इसके साथ अब पंचायत उपकर की राशि भी लाभार्थियों से नहीं ली जाएगी। पंचायतों को मिलने वाली यह राशि राज्य सरकार स्वयं उपलब्ध कराएगी। इस फैसले को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विभागों ने अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। सरकार के अनुसार इस पूरी योजना पर लगभग 3,800 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि यह खर्च ग्रामीणों को कानूनी अधिकार दिलाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे गांवों में संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत जिन ग्रामीण परिवारों को आबादी भूमि का स्वामित्व प्रमाणपत्र दिया जाएगा, उनकी रजिस्ट्री अब केवल उप-पंजीयक कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेश के तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी सब रजिस्ट्रार के अधिकारों का उपयोग करते हुए रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे प्रदेश के 235 सब रजिस्ट्रार कार्यालयों पर कार्यभार भी कम होगा और ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में सुविधा मिल सकेगी। भूमि का कानूनी स्वामित्व मिलने के बाद ग्रामीण परिवारों के लिए बैंक से ऋण प्राप्त करना भी आसान हो जाएगा। अभी तक कई लोगों के पास जमीन पर कब्जा तो था, लेकिन स्वामित्व संबंधी वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण मिलने में कठिनाई होती थी। अब पंजीकृत दस्तावेज मिलने के बाद लोग गृह निर्माण, कृषि कार्य, छोटे उद्योग, स्वरोजगार और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए आसानी से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का उद्देश्य केवल रजिस्ट्री कराना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। कानूनी स्वामित्व मिलने से संपत्ति का आर्थिक मूल्य बढ़ेगा और लोग अपनी भूमि का उपयोग विकास और निवेश के लिए कर सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। योजना के प्रभावी संचालन के लिए राज्य सरकार आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक सदस्य होंगे। आवश्यकता पड़ने पर विषय विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समिति योजना के दिशा-निर्देश तय करेगी, कार्यप्रणाली की निगरानी करेगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करेगी। साथ ही योजना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करने और आवश्यक स्पष्टीकरण जारी करने का अधिकार भी राजस्व विभाग को दिया गया है। राज्य सरकार ने योजना के प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता अभियान के लिए 10 करोड़ रुपये का अलग बजट भी स्वीकृत किया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर आयोजित किए जाएंगे, लोगों को स्वामित्व अधिकार के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मालवा को विकास की नई रफ्तार, 5,017 करोड़ की उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना का होगा भूमि पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे 98.73 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन का शुभारंभ, 35 लाख लोगों और 62 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी मिलेगी मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-pace-of-development-for-malwa-bhoomi-pujan-of-5017/article-58373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-jaora-greenfield-fourlane.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को नई गति देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को 5,017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद मालवा क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को भी इसका व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। करीब 98.73 किलोमीटर लंबी यह आधुनिक फोरलेन सड़क उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगी। इससे प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मालवा क्षेत्र के आर्थिक विकास और निवेश को नई दिशा देने वाली आधारभूत परियोजना साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सड़क का निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा किया जाएगा। परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए दो वर्ष का लक्ष्य तय किया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। सड़क के दोनों ओर आधुनिक यातायात सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे भविष्य की बढ़ती ट्रैफिक जरूरतों को भी आसानी से पूरा किया जा सके। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना उज्जैन दक्षिण, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके दायरे में आने वाले लगभग 62 गांवों के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी। अनुमान है कि करीब 35 लाख नागरिक इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सड़क सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और तेज यातायात सुविधा उपलब्ध होगी। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और उज्जैन की पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी। परियोजना के अंतर्गत केवल फोरलेन सड़क का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग सुविधाओं का भी समावेश होगा। इसमें तीन रेल ओवरब्रिज, नौ बड़े पुल, 26 मध्यम पुल तथा 417 पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा जावरा बायपास पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज से महू-नीमच फोरलेन तक दोनों ओर सर्विस रोड विकसित की जाएगी। इससे स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अलग-अलग सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नई सड़क बनने से किसानों को सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने में समय कम लगेगा और परिवहन लागत में भी कमी आएगी। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही डेयरी, बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और नए उद्योगों के लिए निवेश का वातावरण मजबूत होगा। मालवा क्षेत्र पहले से ही कृषि, उद्योग और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। आधुनिक परिवहन सुविधाओं के जुड़ने से यहां औद्योगिक गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बाजार तक आसान पहुंच मिलने से प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।पर्यटन क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। उज्जैन विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से महाकाल लोक, श्री महाकालेश्वर मंदिर और आसपास के अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा। इससे होटल, परिवहन, पर्यटन सेवाओं और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:29:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, नई याचिका की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट दिलाने की कवायद तेज, स्कूल शिक्षा विभाग ने कानूनी राय लेने के बाद नई याचिका दायर करने की तैयारी शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-will-go-to-supreme-court-to-get-relief-from/article-57917"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-tet,.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Eligibility Test-TET) की अनिवार्यता से राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में नई कानूनी रणनीति तैयार कर ली है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत में नई याचिका दायर की जा सकती है। यह मामला वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि इन शिक्षकों का चयन तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से हुआ था। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों को दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>विधि विभाग से ली गई कानूनी सलाह</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग ने इस मामले में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी विस्तृत कानूनी राय ली है। कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि नए तथ्यों और तर्कों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में राहत की मांग की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि विभाग नई याचिका में उन सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को शामिल करेगा, जिनके आधार पर इन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट मिल सके। सरकार की प्रस्तावित याचिका का सबसे महत्वपूर्ण आधार यह होगा कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने पहले ही एक कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन शिक्षकों की नियुक्ति व्यापमं द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई थी। सरकार का कहना है कि जब उम्मीदवार पहले ही योग्यता सिद्ध कर चुके हैं और वर्षों से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तब उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए कहना व्यावहारिक नहीं है। विभाग का मानना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और कार्यक्षमता को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व मिलना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><span><strong>70 हजार शिक्षकों पर टिकी हैं उम्मीदें</strong></span></h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का असर प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ने वाला है। यदि सुप्रीम कोर्ट सरकार की दलीलों को स्वीकार कर लेता है तो इन शिक्षकों को TET परीक्षा से स्थायी राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं यदि राहत नहीं मिलती है तो संबंधित शिक्षकों को भविष्य में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रदेशभर के शिक्षक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>कई वर्षों से चल रहा है विवाद</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर विवाद नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से TET को अनिवार्य बनाया गया था। हालांकि, इससे पहले भर्ती हो चुके हजारों शिक्षकों के मामले में लगातार यह सवाल उठता रहा कि क्या पहले से चयनित और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पहले भी न्यायालयों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी और अब राज्य सरकार फिर से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने की तैयारी कर रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षकों का पक्ष भी मजबूत माना जा रहा</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक संगठनों का कहना है कि संबंधित शिक्षकों ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति प्राप्त की थी। इसके बाद वर्षों तक उन्होंने सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं और लाखों विद्यार्थियों को शिक्षित किया है। शिक्षकों का तर्क है कि सेवा के इतने लंबे अनुभव के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता उनके साथ अन्याय होगा। उनका यह भी कहना है कि भर्ती के समय लागू नियमों के आधार पर ही उनकी नियुक्ति हुई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों को TET से जुड़ा विवाद झेलना पड़ता है तो इसका असर स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा पर कानूनी अनिश्चितता बनी रहती है तो शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण सरकार भी इस विवाद का स्थायी समाधान चाहती है ताकि शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों में स्थिरता बनी रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>एक सप्ताह में दायर हो सकती है नई याचिका</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई याचिका लगभग तैयार है। कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में इसे दायर कर दिया जाएगा। याचिका में व्यापमं की चयन प्रक्रिया, शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव, भर्ती नियमों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:41:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया फिर होगी शुरू, सरकार ने सभी विभागों को दिए तैयारी के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए, हालांकि सभी प्रमोशन अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/promotion-process-will-start-again-in-madhya-pradesh-government-has/article-57451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-promotion-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर सामने आई है। करीब एक दशक से विभिन्न कानूनी कारणों और न्यायालय में लंबित मामलों के चलते रुकी हुई पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया अब दोबारा शुरू होने की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सोमवार को राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को पत्र जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभागों को यह कार्रवाई महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर करने के लिए कहा गया है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिए जाने वाले सभी प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। राज्य सरकार के इस फैसले को लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कई विभागों में वर्षों से पदोन्नति नहीं होने के कारण अधिकारी एक ही पद पर लंबे समय से कार्यरत हैं। इसका असर न केवल कर्मचारियों के करियर पर पड़ा, बल्कि विभागों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई। अब सरकार के ताजा निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकें बुलाने की तैयारी शुरू होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर न्यायालय में कई याचिकाएं लंबित हैं। इन मामलों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने महाधिवक्ता से कानूनी राय प्राप्त की थी। महाधिवक्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की राय सरकार को भेजी, जिसके आधार पर विभागों को आगे की कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। कानूनी राय में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम-2025 पर किसी प्रकार की अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। पहले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रमोशन नहीं करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह न्यायालय के आदेश का हिस्सा नहीं था और न ही किसी आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए जाएगा। ऐसे में सरकार अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि कानूनी राय में यह भी कहा गया है कि सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। इसका मतलब यह है कि यदि भविष्य में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अलग आता है, तो सरकार को उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर प्रशासनिक कार्यों को सुचारु बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी सुनिश्चित करना है। सरकार ने अपने पक्ष में यह भी कहा है कि लंबे समय से प्रमोशन नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। अनेक विभाग अपनी स्वीकृत क्षमता के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं। वरिष्ठ पद रिक्त होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और निचले स्तर पर नई भर्तियां भी समय पर नहीं हो पा रही हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यदि पदोन्नति प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो इसका सकारात्मक असर पूरे प्रशासनिक ढांचे पर दिखाई देगा। वरिष्ठ पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति होने से विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और खाली पदों पर नई भर्ती का रास्ता भी साफ होगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं। राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई अधिकारी और कर्मचारी पिछले आठ से दस वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति नहीं मिलने के कारण न केवल उनका वेतन और सेवा लाभ प्रभावित हुए, बल्कि मनोबल पर भी असर पड़ा। संगठनों का कहना है कि यदि न्यायालय की शर्तों का पालन करते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब सभी विभागों की नजर सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद होने वाली विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकों पर रहेगी। माना जा रहा है कि विभाग अपने-अपने स्तर पर पात्र कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची, सेवा अभिलेख और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण शुरू करेंगे। इसके बाद डीपीसी की अनुशंसा के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी किए जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी आदेश न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। यदि भविष्य में अदालत कोई अलग निर्देश देती है तो उसी के अनुसार संशोधित कार्रवाई की जाएगी। इसलिए कर्मचारियों को प्रमोशन मिलने के बावजूद अंतिम कानूनी स्थिति का इंतजार करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:04:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन माह से पेंशन नहीं मिलने पर भड़के मुख्य सचिव, अधिकारियों को लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[समीक्षा बैठक में जताई नाराजगी, कहा- आपको तीन महीने वेतन न मिले तो कैसा लगेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/chief-secretary-angry-over-not-getting-pension-for-three-months/article-56901"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-pension.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में लाखों पेंशनधारकों को पिछले तीन माह से पेंशन नहीं मिलने के मामले ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मुद्दे पर कड़ी फटकार लगाई। बैठक में जब अप्रैल से जून तक बड़ी संख्या में पेंशन हितग्राहियों को भुगतान नहीं होने की स्थिति पर चर्चा हुई तो मुख्य सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी को लगातार तीन महीने तक वेतन न मिले तो उसे कैसा महसूस होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय के बाद भी विभाग समस्या की जड़ तक क्यों नहीं पहुंच पाया। बताया जा रहा है कि पेंशन भुगतान में देरी का मुख्य कारण हितग्राहियों का सत्यापन कार्य समय पर पूरा नहीं होना है। समीक्षा के दौरान सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन मुख्य सचिव ने बीच में ही उन्हें टोकते हुए कहा कि अब तक समस्या की पहचान और समाधान दोनों में देरी हुई है। बैठक में पूर्व वित्त सचिव भास्कर लाक्षकार का भी उल्लेख आया, जिस पर मुख्य सचिव ने कहा कि जब जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की थी तब आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर आम लोगों को प्रभावित करती है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने केवल पेंशन भुगतान का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि कई बार मंत्रालय स्तर के अधिकारी वास्तविक स्थिति से पूरी तरह अवगत नहीं होते। प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों का जिला प्रशासन और फील्ड अधिकारियों के साथ नियमित संवाद नहीं होने से योजनाओं की निगरानी कमजोर पड़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि समस्याएं लंबे समय तक लंबित रहती हैं और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे लोक सेवा गारंटी योजना और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं का सीधा संबंध जनता से है, उनमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। विभागाध्यक्षों को साप्ताहिक स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित कर लंबित मामलों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। साथ ही निचले स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया। अनुराग जैन ने बैठक में लंबित न्यायालयीन मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि अदालतों में लंबित मामलों में समय पर जवाब और दावा प्रस्तुत किया जाए ताकि अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके। इसके अलावा सभी विभागों से वार्षिक कार्ययोजना जल्द प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रिपरिषद से स्वीकृत मामलों में शत-प्रतिशत आदेश जारी किए जाएं और उनके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में वर्ष 1947 से पहले के पुराने कानूनों की समीक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसे कानून जिनकी वर्तमान समय में आवश्यकता नहीं है, उनका परीक्षण कर निरस्तीकरण या संशोधन के प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि ऐसे प्रस्ताव शीघ्र कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं ताकि आगामी विधानसभा सत्र में आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी की जा सके। आगामी मानसून सत्र को देखते हुए विधेयकों और संशोधन प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा बैठक में विधानसभा से जुड़े लंबित मामलों का भी उल्लेख हुआ। मुख्य सचिव ने कहा कि शून्यकाल, अपूर्ण प्रश्न, आश्वासन तथा लोकलेखा समिति की सिफारिशों से संबंधित जवाब समय सीमा के भीतर विधानसभा को उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने विभागों को आगाह किया कि इस प्रकार के मामलों में देरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। इसके अलावा प्रदेश के सभी शासकीय भवनों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इस कार्य में तेजी लाने और बेहतर समन्वय के लिए जिलावार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। बैठक में उद्योग विभाग से जुड़े डी-रेगुलेशन के मामलों, गृह विभाग के साइबर धोखाधड़ी प्रकरणों, पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों, मादक पदार्थों की रोकथाम तथा नई न्याय संहिता के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी विभागों को परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने और जनता से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:58:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>10 लेन सड़क परियोजना में पुनर्वास को प्राथमिकता, कोई परिवार बेघर नहीं होगा</title>
                                    <description><![CDATA[नयापुरा सेंट्रल जेल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि देने के निर्देश, मंत्री विश्वास सारंग ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rehabilitation-will-be-given-priority-in-10-lane-road-project/article-56284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-10-lane-road-project.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में प्रस्तावित 10 लेन सड़क परियोजना को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के बीच प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। नयापुरा सेंट्रल जेल के समीप सड़क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की तैयारी के दौरान बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन किसी भी गरीब परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि 10 लेन सड़क परियोजना शहर के यातायात को बेहतर बनाने और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। हालांकि सड़क निर्माण की जद में आने वाले कई परिवारों के सामने विस्थापन की स्थिति बन रही थी। स्थानीय लोगों ने अपनी चिंता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी थी। इसी के बाद मंत्री विश्वास सारंग ने स्वयं मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण दोनों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित परिवारों को पहले वैकल्पिक भूमि और आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। जब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी परिवार को हटाने की जल्दबाजी नहीं की जाए। उनका कहना था कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार वर्षों से यहां रह रहे हैं और उन्हें अचानक असुविधा में नहीं डाला जा सकता। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक परिवार को सम्मानपूर्वक नई जगह बसाया जाए। मौके पर मौजूद अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि स्थानांतरण की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से हो और लोगों को पर्याप्त समय दिया जाए। मंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को शिफ्टिंग की तैयारी के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय मिलना चाहिए। साथ ही एनएचएआई और प्रशासन मिलकर सामान के स्थानांतरण तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए जिससे उसकी आजीविका, बच्चों की पढ़ाई या दैनिक जीवन प्रभावित हो।</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्र के लोगों ने मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। कई परिवारों ने बताया कि वे लंबे समय से इसी इलाके में रह रहे हैं और यदि उन्हें दूर बसाया गया तो रोजगार और बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। इस पर मंत्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित परिवारों को उनके वर्तमान निवास क्षेत्र के आसपास ही वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए। उनका मानना है कि पुनर्वास केवल जमीन देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सड़क परियोजना शहर की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। इससे आने वाले वर्षों में यातायात व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। लेकिन इसके साथ ही पुनर्वास की प्रक्रिया को संवेदनशील और मानवीय तरीके से पूरा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है और पात्र लोगों को नियमानुसार लाभ देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, हुजूर तहसील के अंतर्गत आने वाले कोल्हूखेड़ी और मीरपुर क्षेत्र में भी प्रशासन ने शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। एसडीएम विनोद सोनकिया के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमणों को हटाने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान बुलडोजर की मदद से शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। शहर में चल रही इन कार्रवाइयों को लेकर प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजनाओं और शासकीय भूमि संरक्षण दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि पुनर्वास की प्रक्रिया किस तरह लागू होती है और प्रभावित परिवारों को कब तक वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्यप्रदेश पुलिस में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती फिर शुरू, हर साल 60 पदों पर मिलेगी नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नियमों में संशोधन, अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी बन सकेंगे पुलिस अधिकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/direct-recruitment-of-players-starts-again-in-madhya-pradesh-police/article-56283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-recruitment-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर दिया है। लंबे समय से खेल जगत से जुड़े खिलाड़ियों की मांग थी कि उन्हें उनकी उपलब्धियों के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर मिलें। अब राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में संशोधन किया है। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी है। नई व्यवस्था के तहत हर वर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें 10 पद उप निरीक्षक (एसआई) और 50 पद आरक्षक (कांस्टेबल) के लिए निर्धारित किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे खिलाड़ियों को रोजगार मिलेगा और प्रदेश में खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव पात्रता को लेकर किया गया है। पहले केवल पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र होंगे। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि उन खिलाड़ियों को भी अवसर मिल सके जिन्होंने देश और प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है, भले ही वे पदक जीतने में सफल न हुए हों। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है और ऐसे खिलाड़ियों को सम्मानजनक अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संशोधित नियमों के अनुसार पुलिस मुख्यालय प्रत्येक वर्ष भर्ती के लिए अलग से विज्ञापन जारी करेगा। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह खेल उपलब्धियों के आधार पर संचालित होगी। खिलाड़ियों को शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में विशेष छूट प्रदान की जाएगी। इससे खिलाड़ियों को लंबी और जटिल चयन प्रक्रिया से राहत मिलेगी। हालांकि अंतिम चयन के लिए खेल उपलब्धियों का सत्यापन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सरकार ने उप निरीक्षक और आरक्षक पदों के लिए पात्रता भी अलग-अलग निर्धारित की है। उप निरीक्षक पद के लिए वही खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया हो। वहीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ी आरक्षक पद के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इस व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप अवसर देने का प्रयास किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खेल विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से प्रदेश के हजारों खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि कई खिलाड़ी वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करते हैं, लेकिन खेल जीवन समाप्त होने के बाद रोजगार की चुनौती सामने आ जाती है। ऐसे में पुलिस विभाग में सीधी भर्ती उनके लिए सुरक्षित भविष्य का रास्ता खोल सकती है। साथ ही पुलिस बल को भी अनुशासित, फिट और प्रशिक्षित युवा मिलेंगे, जो विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले भी कई मंचों से खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की बात कह चुके हैं। सरकार का कहना है कि खिलाड़ियों को केवल पुरस्कार और सम्मान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसी सोच के तहत खेल कोटे की भर्ती को दोबारा सक्रिय किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खेल संगठनों और खिलाड़ियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। कई पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि इससे युवा पीढ़ी खेलों की ओर अधिक आकर्षित होगी। ग्रामीण और छोटे शहरों के खिलाड़ी, जो सीमित संसाधनों में मेहनत कर रहे हैं, उन्हें भी उम्मीद की नई किरण दिखाई देगी। प्रदेश में हॉकी, एथलेटिक्स, कुश्ती, कबड्डी, तीरंदाजी और अन्य खेलों में प्रतिभाएं लगातार उभर रही हैं। रोजगार की गारंटी मिलने से इन खिलाड़ियों का मनोबल और मजबूत होगा। खेल और रोजगार को जोड़ने वाली ऐसी नीतियां किसी भी राज्य के खेल विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। मध्यप्रदेश सरकार का यह निर्णय न केवल खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को राज्य सम्मान और अवसर दोनों देने के लिए तैयार है। आने वाले समय में इस भर्ती प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी पुलिस विभाग का हिस्सा बन सकते हैं और मैदान के साथ-साथ कानून व्यवस्था के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:01:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>20 जुलाई से शुरू होगा मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में सरकार पेश करेगी पहला अनुपूरक बजट, UCC और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी रह सकती है चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/monsoon-session-of-madhya-pradesh-assembly-will-start-from-july/article-56112"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 20 से 24 जुलाई तक पांच दिवसीय सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस दौरान राज्य सरकार वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सत्र को लेकर प्रशासनिक और विधायी स्तर पर तैयारियां भी तेज हो गई हैं। विधानसभा के नियमों के अनुसार किसी भी सत्र के आयोजन से कम से कम एक माह पहले उसकी अधिसूचना जारी करना आवश्यक माना जाता है। इसी क्रम में 19 जून तक मानसून सत्र की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद विधायकों को प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य विषयों से संबंधित सूचनाएं देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बार सदन में चर्चा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियम 139 के तहत होने वाली चर्चाओं और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के लिए समय सीमा तय करने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार के लिए यह सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्त विभाग पहले ही विभिन्न विभागों से अतिरिक्त बजटीय आवश्यकताओं के प्रस्ताव मंगवा चुका है। इन प्रस्तावों का परीक्षण और अध्ययन जारी है, जिसके आधार पर पहला अनुपूरक बजट तैयार किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बजट में अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए जा सकते हैं। सरकार का प्रयास रहेगा कि चल रही प्रमुख योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">मानसून सत्र में स्वामित्व योजना भी प्रमुख विषयों में शामिल रह सकती है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लाखों लोगों को संपत्ति संबंधी अधिकार देने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों के माध्यम से 48 लाख से अधिक अधिकार पत्रधारकों को आवास या भूखंड का स्वामित्व प्रदान करने के लिए निशुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था को कानूनी आधार देने की तैयारी है। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम और मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण नागरिकों को संपत्ति संबंधी अधिकारों में मजबूती मिलेगी और विवादों में कमी आएगी। सत्र के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी का मुद्दा भी चर्चा में रह सकता है। राज्य सरकार ने इस विषय पर सुझाव आमंत्रित करने के लिए 15 जून तक का समय दिया था। अब सुझाव प्राप्त होने के बाद सरकार उनके अध्ययन और विश्लेषण की प्रक्रिया में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई सार्वजनिक मंचों से यूसीसी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं। माना जा रहा है कि यूसीसी पर गठित पांच सदस्यीय समिति की प्रारंभिक सिफारिशों और सुझावों को मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखा जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि यूसीसी लागू करने के विषय में व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही आदिवासी समुदायों की विशेष परिस्थितियों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अलग दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यूसीसी से जुड़ा कोई प्रारूप सदन में आता है तो इस पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है। उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े विधेयक भी मानसून सत्र के एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। राज्य सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलावों को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी शिक्षा संस्थानों से जुड़े कुछ संशोधन विधेयक सदन में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हालांकि इन प्रस्तावों की अंतिम रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। विपक्ष भी मानसून सत्र को लेकर रणनीति तैयार कर रहा है। प्रदेश में किसानों, बिजली, पानी, बेरोजगारी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। दूसरी ओर सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को सदन के माध्यम से जनता के सामने रखने का प्रयास करेगी। ऐसे में पांच दिन का यह सत्र राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में बजट, स्वामित्व योजना, यूसीसी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा आने वाले महीनों की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:52:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री की कैबिनेट बैठक आज, तबादला अवधि बढ़ाने और स्वास्थ्य नीति पर बड़ा फैसला संभव</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मिल सकती है मंजूरी, इंदौर मेट्रो, वन्यजीव पर्यटन और संविदा कर्मचारियों से जुड़े प्रस्तावों पर भी होगी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/chief-ministers-cabinet-meeting-today-big-decision-possible-on-extension/article-56076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-cabinet-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार की मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक कई महत्वपूर्ण फैसलों के कारण चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रस्तावों के साथ-साथ तबादला अवधि बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी फैसला लिया जा सकता है। राज्य के विभिन्न विभागों और कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है क्योंकि कई ऐसे प्रस्ताव एजेंडे में शामिल हैं जिनका सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है। कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और लोगों तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए नई नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस प्रस्ताव के तहत परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पतालों तथा डायग्नोस्टिक केंद्रों को प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। सरकार इन संस्थाओं को बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि प्रदेश के कई हिस्सों में निजी और सामाजिक संस्थाएं स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। ऐसे में यदि उन्हें आवश्यक संसाधन और सहयोग दिया जाता है तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार संभव होगा। उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री राजेंद्र शुक्ल के विभाग द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को लेकर पहले भी कई दौर की चर्चा हो चुकी है। अब अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा। प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती तथा चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं पहले से संचालित हैं। ऐसे में नई स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति को सरकार की स्वास्थ्य सुधार रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैबिनेट बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा तबादला अवधि को लेकर है। राज्य सरकार ने इस वर्ष एक जून से 15 जून तक स्थानांतरण की अवधि निर्धारित की थी। हालांकि कई विभागों में अब तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि कई मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों ने तबादला अवधि बढ़ाने की मांग रखी है ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले कई बार सार्वजनिक रूप से यह संकेत दे चुके हैं कि इस बार तबादला अवधि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बावजूद प्रशासनिक जरूरतों और विभागों की मांग को देखते हुए कैबिनेट में इस विषय पर चर्चा होने की संभावना बनी हुई है। यदि अवधि बढ़ाने का फैसला होता है तो हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों को इसका लाभ मिल सकता है। वहीं यदि सरकार अपने पुराने रुख पर कायम रहती है तो स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर ही समाप्त मानी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण शहरी परिवहन परियोजनाओं में शामिल इंदौर मेट्रो को लेकर सरकार पहले ही कई चरणों में मंजूरी दे चुकी है। अब परियोजना की लागत में संशोधन के बाद इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मंजूरी मिलने के बाद परियोजना की गति और तेज हो सकती है। वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं को जारी रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है। प्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के कारण वन्यजीव पर्यटन का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ है। सरकार इन योजनाओं को आगे बढ़ाकर पर्यटन और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन देना चाहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा गांवों के पुनर्वास से जुड़े मामलों में मुआवजा स्वीकृति पर भी चर्चा होने की संभावना है। श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं को जारी रखने और स्थानीय निधि संपरीक्षा से संबंधित कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है। प्रशासनिक दृष्टि से यह फैसले महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इनका असर बड़ी संख्या में हितग्राहियों पर पड़ता है। कैबिनेट के एजेंडे में रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन से जुड़ा एक पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार इन केंद्रों का संचालन आउटसोर्स प्रणाली के माध्यम से किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय विभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी बैठक में रखा जाएगा। इसके तहत विभाग की शासकीय संस्थाओं में मानदेय के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को विशेष प्रकरण मानते हुए संविदा कर्मचारी घोषित करने पर विचार किया जाएगा। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो संबंधित कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। मंगलवार की कैबिनेट बैठक कई महत्वपूर्ण निर्णयों के कारण बेहद अहम मानी जा रही है। स्वास्थ्य नीति, तबादला अवधि, इंदौर मेट्रो, पर्यटन, पुनर्वास और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर होने वाले फैसले आने वाले समय में प्रदेश की प्रशासनिक और विकास संबंधी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:40 +0530</pubDate>
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                <title>पंचायत सचिवों के तबादलों पर नई सख्त गाइडलाइन जारी, गृहग्राम में पोस्टिंग पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिवों के लिए नई स्थानांतरण नीति लागू, 10 साल से अधिक पदस्थ कर्मचारियों का प्राथमिकता से होगा ट्रांसफर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-strict-guidelines-issued-on-transfers-of-panchayat-secretaries-ban/article-55559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/panchayat-secretary-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई और सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। तबादला सीजन के बीच जारी इस आदेश के बाद अब राज्य की हजारों पंचायतों में कार्यरत सचिवों की तैनाती व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई नीति के अनुसार अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही यदि किसी सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुने जाते हैं तो ऐसी स्थिति में संबंधित सचिव का तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदेश में यह निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। राज्य में वर्तमान में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं, जिन पर इस नई नीति का सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक केवल जिले के भीतर ही पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद ही लागू होंगे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया 1 जून से प्रभावी मानी जाएगी। सभी स्थानांतरण आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही जिला और अंतरजिला स्तर पर स्थानांतरण की विस्तृत प्रक्रिया भी तय कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस निर्णय के पीछे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और स्थानीय स्तर की समस्याएं प्रमुख कारण बताई जा रही हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी, जो आज पंचायत सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उस समय कई मामलों में सरपंच, उपसरपंच या प्रभावशाली व्यक्तियों के रिश्तेदारों को ही नियुक्त किया गया था। इसके कारण कई जगहों पर हितों के टकराव और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का मानना है कि कई मामलों में जनप्रतिनिधि और सचिवों के बीच पारिवारिक संबंधों या व्यक्तिगत समीकरणों के कारण कार्य निष्पक्ष तरीके से प्रभावित हुआ है। जांचों में भी कई बार यह पाया गया कि कुछ स्थानों पर सरपंच, उपसरपंच और सचिवों की मिलीभगत से वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने यह सख्त नीति लागू करने का निर्णय लिया है ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई गाइडलाइन के अनुसार कुछ परिस्थितियों में स्थानांतरण को अनिवार्य किया गया है। यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाता है, तो वहां से तत्काल स्थानांतरण किया जाएगा। इसके अलावा किसी भी सचिव को उसके गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रखा जाएगा। साथ ही जो सचिव 10 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पंचायत में कार्यरत हैं, उनका प्राथमिकता के आधार पर तबादला किया जाएगा। यदि स्थानांतरण की सीमा से अधिक ऐसे सचिव पाए जाते हैं जो लंबे समय से एक ही जगह कार्यरत हैं, तो सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का पहले स्थानांतरण किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक स्थिरता के साथ-साथ निष्पक्ष कार्य प्रणाली को बढ़ावा देना बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी स्थानांतरण संभव होगा। इनमें भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जैसी जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े मामलों में भी सचिवों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से निर्देश मिलने पर भी तबादला किया जा सकता है। ऐसे सभी मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त या पंचायत राज संचालनालय द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गंभीर मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई में कोई देरी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरजिला स्थानांतरण को लेकर नीति में स्पष्ट किया गया है कि यह केवल स्वैच्छिक आधार पर ही किया जाएगा। महिला पंचायत सचिवों को विशेष सुविधा दी गई है, जिसके तहत विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं अपने पति, ससुराल या माता-पिता के जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव भी अपने मूल जिले में स्थानांतरण के लिए पात्र होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानांतरण के लिए आवेदन वर्तमान पदस्थ जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को देना होगा। इसके बाद रिक्त पदों की उपलब्धता की जांच की जाएगी। यदि संबंधित जिले में पद खाली होता है तो प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा। प्रशासनिक स्वीकृति के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे। स्थानांतरण के बाद संबंधित सचिव को वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा और यह सुविधा केवल एक बार ही दी जाएगी। नई नीति के लागू होने के बाद पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 09:58:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की सीमा हटेगी, सीएम ने ड्राफ्ट निरस्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विवादित प्रस्तावित नियम वापस लेने के निर्देश दिए, अब दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को अपात्र ठहराने वाला प्रावधान हटाकर नया मसौदा तैयार किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-limit-of-two-children-for-government-jobs-in-madhya/article-55515"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-government-jobs.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लेते हुए दो बच्चों की सीमा संबंधी विवादित प्रावधान को वापस लेने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 के उस प्रस्तावित मसौदे को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल प्रभाव से ड्राफ्ट हटाने और संशोधित प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस कदम को लाखों युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से इस प्रस्तावित नियम को लेकर प्रदेशभर में चर्चा चल रही थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इस प्रावधान को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कई लोगों का मानना था कि यह नियम बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 जून 2026 को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 का प्रारूप जारी किया था। इस मसौदे में यह प्रावधान शामिल किया गया था कि जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक जीवित संतान होंगी, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जा सकता है। जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई वर्गों ने इसे कठोर और विवादास्पद कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण से जोड़कर समर्थन भी किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि सरकार को विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मौजूदा ड्राफ्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसे सरकारी पोर्टल से हटाया जाए। साथ ही नया संशोधित मसौदा तैयार किया जाए, जिसमें दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़ा प्रावधान शामिल न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल में प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा रही। अधिकारियों के अनुसार सरकार का उद्देश्य ऐसा नियम बनाना है जो व्यावहारिक हो और व्यापक जनहित को ध्यान में रखे। इसी वजह से नए प्रारूप पर दोबारा काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि विभाग जल्द ही संशोधित मसौदा सार्वजनिक कर सकता है, जिस पर फिर से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की पात्रता प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अभ्यर्थियों के बीच राहत का माहौल देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्तमान में कार्यरत कई सरकारी कर्मचारी भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे। कर्मचारियों के बीच यह आशंका थी कि भविष्य में सेवा संबंधी नियमों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया था, लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर लगातार जारी था। अब ड्राफ्ट वापस लिए जाने के बाद इन आशंकाओं पर भी विराम लग गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार ने जनभावनाओं और विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। हाल के वर्षों में कई राज्यों में दो बच्चों की नीति को लेकर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इसे लेकर कानूनी और सामाजिक बहस भी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी प्रस्तावित नियम के सार्वजनिक होते ही इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुसार नया मसौदा तैयार करते समय भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वर्ग के साथ अनावश्यक भेदभाव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित प्रारूप तैयार करने से पहले सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस फैसले को राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी काफी हद तक समाप्त हो गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:06:00 +0530</pubDate>
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                <title>मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगी UCC, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनता से मांगे सुझाव</title>
                                    <description><![CDATA[समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार ने तेज की प्रक्रिया, विभिन्न धर्मों और समाजों से राय जुटा रही समिति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1fccc85ab1f/article-54835"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-ucc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारी चल रही है और इसके लिए गठित समिति विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों तथा आम नागरिकों से सुझाव प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने और अपने सुझाव साझा करने का आग्रह किया है। सरकार का मानना है कि जनता की भागीदारी से तैयार होने वाला प्रारूप अधिक प्रभावी और व्यापक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समय के साथ समाज में कई बदलाव आए हैं और अब विभिन्न सामाजिक तथा पारिवारिक मामलों में एक समान व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान अवसर प्रदान करना है। सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है और जल्द ही महत्वपूर्ण कदम देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर सकारात्मक वातावरण है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में समिति लगातार लोगों से संवाद कर रही है और उनके विचारों को सुन रही है। सरकार चाहती है कि हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो, ताकि तैयार होने वाला प्रारूप समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की राय सबसे महत्वपूर्ण होती है और इसी भावना के साथ सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार द्वारा गठित समिति का नेतृत्व न्यायिक और विधिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को सौंपा गया है। समिति विभिन्न जिलों में जाकर सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, महिलाओं के समूहों, युवा प्रतिनिधियों और अन्य वर्गों से चर्चा कर रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह समझना है कि प्रदेश के नागरिक समान नागरिक संहिता को किस रूप में देखते हैं और वे इसमें क्या अपेक्षाएं रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। उनका मानना है कि जब सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था होगी तो प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सरल और प्रभावी बनेंगी। साथ ही नागरिकों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्ट जानकारी भी मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार ने यूसीसी से जुड़े सुझाव प्राप्त करने के लिए एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया है। इसके माध्यम से नागरिक अपने विचार और सुझाव सीधे समिति तक पहुंचा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और प्रदेश के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी राय अवश्य दें। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी के साथ एक संतुलित और व्यवहारिक व्यवस्था तैयार की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर समिति एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद सरकार आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लेगी। इस पहल को प्रशासनिक सुधार और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुशासन और जनहित से जुड़े अनेक कार्य किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार भी नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सुधारात्मक कदम उठा रही है। समान नागरिक संहिता को भी इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि प्रदेश विकास और सामाजिक समरसता के नए मानक स्थापित करे।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में यूसीसी को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच बड़ी संख्या में लोग अपने सुझाव देने में रुचि दिखा रहे हैं। विभिन्न सामाजिक मंचों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी इस विषय पर संवाद हो रहा है। सरकार का मानना है कि इस तरह की भागीदारी से नीति निर्माण की प्रक्रिया और अधिक मजबूत होती है। यही कारण है कि सुझाव लेने की प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश लंबे समय से प्रशासनिक नवाचारों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में समान नागरिक संहिता को लेकर शुरू की गई यह पहल भी व्यापक ध्यान आकर्षित कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी नागरिकों को समान अवसर और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि जनता के सहयोग और सुझावों के आधार पर तैयार होने वाला ढांचा प्रदेश के विकास और सामाजिक एकता को नई दिशा देगा। समिति विभिन्न जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है और सुझावों का संग्रह जारी है। आने वाले समय में इस प्रक्रिया के और तेज होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि जनता की भागीदारी के साथ तैयार होने वाली यह पहल मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। प्रदेश के नागरिक भी उत्सुकता के साथ इस प्रक्रिया को देख रहे हैं और अपने विचार साझा कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:33:29 +0530</pubDate>
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