<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/kuno-national-park/tag-7482" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Kuno National Park - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/7482/rss</link>
                <description>Kuno National Park RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कूनो नेशनल पार्क में दिखी दुर्लभ कैराकल बिल्ली, दशकों बाद वापसी से वन्यजीव विशेषज्ञ उत्साहित</title>
                                    <description><![CDATA[श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण के दौरान कैद हुई दुर्लभ कैराकल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/wildlife-experts-excited-by-the-return-of-rare-caracal-cat/article-55077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kuno-national-park.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पर्यावरण प्रेमियों, वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को उत्साहित कर दिया है। वर्षों बाद दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की मौजूदगी कूनो में दर्ज की गई है। कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण के दौरान कैद हुई इस दुर्लभ प्रजाति की तस्वीरों ने यह संकेत दिया है कि कूनो का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार मजबूत हो रहा है और यहां वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण विकसित हो रहा है। लंबे समय से इस प्रजाति के दर्शन न होने के कारण इसे लेकर चिंताएं जताई जाती रही थीं, लेकिन अब इसकी वापसी ने संरक्षण प्रयासों को नई उम्मीद दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामने आई इस जानकारी को राज्य सरकार ने भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए खुशी व्यक्त की और कहा कि प्रकृति ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में कैमरा ट्रैप के दौरान कैराकल का दिखाई देना कई वर्षों बाद इस क्षेत्र में उसकी वापसी का संकेत है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह केवल एक वन्यजीव की मौजूदगी नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर होने का प्रमाण भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैराकल एक बेहद दुर्लभ और शर्मीली जंगली बिल्ली मानी जाती है। इसकी पहचान इसके लंबे पैरों, तेज शिकार क्षमता और कानों के ऊपर मौजूद काले बालों के गुच्छों से होती है। भारत में कभी यह प्रजाति कई हिस्सों में पाई जाती थी, लेकिन बदलते पर्यावरण, प्राकृतिक आवास के नुकसान और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इसकी संख्या लगातार घटती चली गई। यही वजह है कि वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से इसके संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। कूनो में इसकी मौजूदगी दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यहां का जंगल और घासभूमि क्षेत्र इस प्रजाति के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण नियमित निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा था। इसी दौरान कैराकल की तस्वीरें रिकॉर्ड हुईं। प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार यह क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से मौजूद वन्यजीव गतिविधियों का हिस्सा हो सकती है। हालांकि इसके व्यवहार, संख्या और आवागमन के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में कैराकल जैसी संवेदनशील प्रजाति दिखाई देती है तो यह उस इलाके के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का सकारात्मक संकेत माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में कूनो नेशनल पार्क लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। विशेष रूप से प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीकी चीतों को यहां लाए जाने के बाद इस पार्क की पहचान और बढ़ी है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में देखा गया। अब कैराकल की मौजूदगी ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि कूनो केवल चीतों के पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई अन्य वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रोजेक्ट चीता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का प्रभाव केवल चीतों तक सीमित नहीं है बल्कि इससे पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ मिल रहा है। बेहतर संरक्षण, वन प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था के कारण विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ है। इससे जैव विविधता को भी मजबूती मिली है। किसी दुर्लभ प्रजाति की वापसी केवल संयोग नहीं होती। इसके पीछे वर्षों की संरक्षण नीति, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास शामिल होते हैं। कूनो में कैराकल का दिखाई देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य में और भी दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण को लेकर नई संभावनाएं खुल सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कूनो नेशनल पार्क में कैराकल की मौजूदगी ने वन्यजीव जगत में नई चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले समय में विशेषज्ञ इस प्रजाति की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और यह समझने का प्रयास करेंगे कि इसका आवास कितना विस्तृत है। लेकिन इतना तय है कि दशकों बाद मिली यह झलक मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संकेत बनकर सामने आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/wildlife-experts-excited-by-the-return-of-rare-caracal-cat/article-55077</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/wildlife-experts-excited-by-the-return-of-rare-caracal-cat/article-55077</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:44:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/kuno-national-park.jpg"                         length="145442"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कूनो मे मादा चीता जंगल में दौड़ेगी, टाइगर स्टेट से आगे MP बन रहा वाइल्डलाइफ मॉडल</title>
                                    <description><![CDATA[कूनो नेशनल पार्क में मादा चीतों को जंगल में छोड़ा गया। MP वाइल्डलाइफ संरक्षण, टाइगर रिजर्व और इको-टूरिज्म में नया मॉडल बन रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/female-cheetah-will-run-in-the-forest-mp-is-becoming/article-53117"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t132729.875.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में एक खास कदम उठाया जाएगा। यहां</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से खुले जंगल में छोड़ने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10-11 मई को कूनो का दौरा करेंगे और इसी दौरान यह प्रक्रिया पूरी होगी। वन विभाग के अधिकारी इसे प्रोजेक्ट चीता के अगले बड़े पड़ाव के रूप में देख रहे हैं। उम्मीद है कि इन मादा चीतों को अब जंगल के बड़े हिस्से में आज़ाद घूमने का मौका मिलेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ये गतिविधि सिर्फ वन्यजीवों की रिहाई नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसे मध्यप्रदेश के व्यापक मॉडल से भी जोड़ा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें वन्यजीव संरक्षण को सरकारी योजनाओं से आगे बढ़ाकर एक व्यापक नीति और सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो चुकी है और अब इसे एक वैश्विक संरक्षण प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की योजनाएं हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिसंबर 2023 में कार्यभार संभालने के बाद से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई सोच लाने का काम किया है। इसे अब न केवल पर्यावरण तक सीमित रखा जा रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पर्यटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण रोजगार और सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा जा रहा है। इसी वजह से पिछले डेढ़ साल में राज्य में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। रातापानी टाइगर रिजर्व का देश के आठवें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित होना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसकी निकटता भोपाल के कारण इको-टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी तरह</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च 2025 में घोषित माधव टाइगर रिजर्व को लेकर विशेषज्ञों की राय भी सकारात्मक है। यहां बन रही सुरक्षा दीवार को मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने की एक ठोस पहल माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते टकराव के संदर्भ में।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश का गिद्ध संरक्षण मॉडल भी चर्चा में है। यहां गिद्धों की संख्या 14 हजार से अधिक है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश में सबसे अधिक है। वन विहार नेशनल पार्क और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से चल रहे रेस्क्यू सेंटर में घायलों का इलाज किया जा रहा है। हाल ही में एक गिद्ध के उज्बेकिस्तान तक पहुंचने की घटना को विभाग ने बड़ी उपलब्धि बताया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कूनो के साथ-साथ गांधी सागर और नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि नौरादेही में सॉफ्ट रिलीज बोमा का निर्माण अगले चरण की तैयारी है। वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">नए वन्यजीव अभ्यारण्यों और कंजर्वेशन रिजर्व के जरिए राज्य अपने सुरक्षित क्षेत्रों का दायरा लगातार बढ़ा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वन विभाग के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करना भी एक बड़ी सफलता है। इस क्षेत्र में </span>Tigers, Leopards <span lang="hi" xml:lang="hi">और अन्य दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी इसे संवेदनशील बनाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल स्थानीय समुदाय और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाथी संरक्षण योजना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घड़ियाल और मगरमच्छों के संरक्षण कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना जैसी योजनाएं भी राज्य में चल रही हैं। टाइगर कॉरिडोर परियोजना को भविष्य की सबसे बड़ी योजना माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत कई टाइगर रिजर्व को जोड़ने की तैयारी है। इससे वन्यजीवों की आवाजाही भी सुरक्षित हो सकेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वन्यजीव विभाग का कहना है कि इको-टूरिज्म और संरक्षण गतिविधियों से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। कूनो और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर देखा जा रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुल मिलाकर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कूनो में मादा चीतों की जंगल में रिहाई सिर्फ एक घटना नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह मध्यप्रदेश में एक बड़े बदलाव का हिस्सा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें राज्य खुद को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">टाइगर स्टेट</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">से आगे बढ़ाकर </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">वाइल्डलाइफ लीडर</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">की दिशा में प्रगति कर रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/female-cheetah-will-run-in-the-forest-mp-is-becoming/article-53117</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/female-cheetah-will-run-in-the-forest-mp-is-becoming/article-53117</guid>
                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:04:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-11t132729.875.jpg"                         length="275603"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कूनो बना देश का चीता प्रजनन केंद्र, अब नौरादेही भेजे जाएंगे चीते, तैयारी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या के बीच नौरादेही में नए आवास की तैयारी तेज। जानिए प्रोजेक्ट चीता का ताजा अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/kuno-becomes-the-countrys-cheetah-breeding-center-now-4-cheetahs/article-50032"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cheetah-project,-kuno-national-park-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब देश में चीतों का प्रमुख प्रजनन केंद्र बनकर उभर रहा है। पिछले तीन वर्षों में यहां 45 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 33 जीवित हैं। वर्तमान में कूनो में कुल 50 चीते मौजूद हैं, लेकिन इनमें से केवल 12 ही खुले जंगल में सक्रिय हैं। शेष चीतों को अलग-अलग प्रबंधन श्रेणियों में रखा गया है, जिनमें 23 शावक अपनी माताओं के साथ बाड़ों में हैं, जबकि 9 चीते क्वारंटाइन में हैं। बढ़ती संख्या और सीमित क्षेत्र को देखते हुए अब वन विभाग ने चीतों को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू कर दी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रारंभिक योजना के तहत जून महीने में 2 नर और 2 मादा चीतों को नौरादेही भेजा जा सकता है। इसके लिए टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया मानसून से पहले पूरी की जाएगी। अंतिम निर्णय चीता स्टीयरिंग समिति द्वारा लिया जाएगा, जो इस परियोजना की निगरानी कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कूनो में चीतों की संख्या में हुई वृद्धि को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सीमित क्षेत्र में अधिक चीतों की मौजूदगी से उनके व्यवहार, शिकार और क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि नए आवास की जरूरत महसूस की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नया आवास तैयार</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को इस दिशा में तेजी से विकसित किया जा रहा है। करीब 5500 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य है, जहां पिछले दो वर्षों से चीता आवास के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यहां शिकार आधार मजबूत करने, निगरानी तंत्र विकसित करने और प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि विशेष बाड़ों का निर्माण अंतिम चरण में है और ट्रांसलोकेशन के लिए आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रबंधन रणनीति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, चीतों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया सावधानीपूर्वक और चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। मानसून से पहले टीकाकरण के दौरान चीतों को पकड़कर सुरक्षित तरीके से नौरादेही पहुंचाया जाएगा, ताकि उन्हें नए वातावरण में आसानी से अनुकूलित किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही नौरादेही को देश का तीसरा चीता आवास बनाने की घोषणा कर चुके हैं। इससे प्रोजेक्ट चीता को विस्तार मिलेगा और जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पृष्ठभूमि के तौर पर देखा जाए तो भारत में चीतों को पुनर्स्थापित करने की योजना के तहत अफ्रीकी चीतों को कूनो में बसाया गया था। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद अब प्रजनन दर में सुधार हुआ है, जो इस परियोजना की सफलता का संकेत माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों की बढ़ती संख्या को संतुलित रखने और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने के लिए अलग-अलग आवास विकसित करना जरूरी है। इससे न केवल चीतों का संरक्षण मजबूत होगा, बल्कि वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आने वाले महीनों में यदि नौरादेही में चीतों का सफल ट्रांसलोकेशन होता है, तो यह देश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। कूनो की सफलता के बाद अब सभी की नजरें इस नए आवास पर टिकी हैं, जो भारत के वन्यजीव मानचित्र में नई पहचान बना सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/kuno-becomes-the-countrys-cheetah-breeding-center-now-4-cheetahs/article-50032</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/kuno-becomes-the-countrys-cheetah-breeding-center-now-4-cheetahs/article-50032</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:25:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/cheetah-project%2C-kuno-national-park-%281%29.jpg"                         length="208424"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        