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                <title>Environmental News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Environmental News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एनसीआर में वायु प्रदूषण पर सख्ती तेज, 17 दिनों में 173 निरीक्षण; 62 मामलों में नियम उल्लंघन मिला</title>
                                    <description><![CDATA[सीएक्यूएम की प्रवर्तन टास्क फोर्स ने उद्योगों, निर्माण स्थलों और डीजल जनरेटर सेटों की व्यापक जांच की। उल्लंघन मिलने पर कई इकाइयों को बंद करने, डीजी सेट सील करने और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की कार्रवाई प्रस्तावित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/strictness-on-air-pollution-intensified-in-ncr-173-inspections-in/article-58097"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/caqm.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रवर्तन कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की प्रवर्तन टास्क फोर्स (ईटीएफ) की 134वीं बैठक में पिछले 17 दिनों के दौरान की गई निरीक्षण कार्रवाई, अनुपालन की स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों में नियमों के पालन की समीक्षा की गई। बैठक में सामने आए आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि आयोग प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रहा है और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। बैठक में बताया गया कि 14 जून से 30 जून 2026 के बीच आयोग की फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों ने कुल 173 निरीक्षण किए। इन निरीक्षणों का उद्देश्य निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सी एंड डी) गतिविधियों, औद्योगिक इकाइयों और डीजल जनरेटर (डीजी) सेटों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी करना था। जांच के दौरान कई स्थानों पर पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया जाता पाया गया, जिसके बाद संबंधित मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। निरीक्षण के दौरान कुल 173 स्थानों में से 15 निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों की जांच की गई, जबकि 91 निरीक्षण औद्योगिक क्षेत्र में किए गए। इसके अलावा 67 निरीक्षण डीजल जनरेटर सेटों से जुड़े मामलों में किए गए। इन सभी निरीक्षणों के दौरान कुल 62 मामलों में नियमों का उल्लंघन सामने आया। इनमें निर्माण स्थलों पर सात, औद्योगिक क्षेत्र में 31 और डीजल जनरेटर से जुड़े 24 मामलों में अनियमितताएं दर्ज की गईं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आयोग के अनुसार, निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर चार परियोजनाओं या इकाइयों को बंद करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं करने वाले 27 डीजल जनरेटर सेटों को सील करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त छह मामलों में संबंधित संस्थानों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के लिए निर्देश जारी करने का निर्णय लिया गया है। पर्यावरण को हुए नुकसान के मद्देनजर 17 मामलों में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (एनवायरमेंटल कंपेनसेशन) लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। बैठक में पिछली यानी 133वीं प्रवर्तन टास्क फोर्स बैठक में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई। आयोग ने संतोष व्यक्त किया कि औद्योगिक क्षेत्र, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण गतिविधियों तथा डीजल जनरेटर सेटों से जुड़े सभी कार्रवाई योग्य मामलों में संबंधित विभागों ने आवश्यक कदम उठाए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पहले की तुलना में बेहतर हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अनुपालन की समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि जिन परियोजनाओं या निर्माण स्थलों ने निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित कर लिया है, उन्हें दोबारा काम शुरू करने की अनुमति दी जा रही है। अब तक सात निर्माण परियोजनाओं को अनुपालन की पुष्टि के बाद पुनः संचालन की अनुमति दी गई है। इनमें उत्तर प्रदेश की दो और हरियाणा की पांच परियोजनाएं शामिल हैं। आयोग का मानना है कि यह प्रक्रिया नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ अन्य इकाइयों को भी मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित करेगी। बैठक में अब तक की कुल प्रवर्तन कार्रवाई का भी विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। आयोग के अनुसार 6 जुलाई 2026 तक फ्लाइंग स्क्वॉड द्वारा कुल 27,750 इकाइयों, परियोजनाओं और अन्य संस्थानों का निरीक्षण किया जा चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि आयोग लगातार बड़े स्तर पर निगरानी अभियान चला रहा है ताकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन निरीक्षणों के आधार पर अब तक कुल 1,802 बंदी निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें से 1,424 मामलों में संबंधित इकाइयों द्वारा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के बाद दोबारा संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। वहीं 123 मामलों को अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को भेजा गया है। इसके अलावा 255 इकाइयों के मामलों की समीक्षा अभी भी जारी है और उनके अनुपालन की जांच के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रवर्तन टास्क फोर्स ने बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि वायु प्रदूषण की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल निरीक्षण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई और नियमों का कड़ाई से पालन भी आवश्यक है। आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि निरीक्षण की गुणवत्ता में सुधार किया जाए, उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि औद्योगिक उत्सर्जन, डीजल जनरेटर सेटों का संचालन और निर्माण एवं ध्वस्तीकरण गतिविधियां एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में निगरानी और प्रवर्तन को प्राथमिकता देना जरूरी है। यदि कोई संस्था निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग में बदलाव, प्लास्टिक पाउच पर रोक की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग में प्लास्टिक हटाने का प्रस्ताव, FSSAI ने इको-फ्रेंडली मटेरियल अनिवार्य करने का ड्राफ्ट जारी किया देश में गुटखा और पान मसाला की पैकिंग बदलने वाली है।सरकार प्लास्टिक पाउच खत्म कर पर्यावरण अनुकूल विकल्प लागू करने की दिशा में बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/changes-in-gutkha-tobacco-packaging-preparation-to-ban-plastic-pouches/article-52306"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/gutkha-tobacco-packaging.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के लिए प्लास्टिक पाउच के उपयोग पर रोक लगाने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रस्ताव के तहत किसी भी प्रकार के प्लास्टिक या विनाइल आधारित मटेरियल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इसकी जगह कागज, पेपरबोर्ड और सेल्युलोज जैसे इको-फ्रेंडली मटेरियल को अनिवार्य करने की तैयारी है। यह कदम प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ड्राफ्ट पर 30 दिनों तक उद्योग, कंपनियों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे। यह प्रस्ताव लागू होने पर देशभर में गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p>ड्राफ्ट के मुताबिक, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकिंग में प्लास्टिक का किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसमें विनाइल एसीटेट और अन्य केमिकल युक्त मटेरियल भी शामिल हैं, जिन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।FSSAI का मानना है कि इन छोटे प्लास्टिक पाउच से बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण होता है और इन्हें रीसायकल करना भी मुश्किल होता है।</p>
<p><strong>क्या होंगे विकल्प</strong><br />प्रस्ताव के तहत कंपनियों को कागज, गत्ता (पेपरबोर्ड) और सेल्युलोज जैसे प्राकृतिक मटेरियल अपनाने होंगे।ये विकल्प पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।रेगुलेटर के अनुसार, उद्योग इन विकल्पों को आसानी से अपना सकता है और इससे उत्पादन प्रक्रिया पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p>भारत में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पहले भी कई स्तरों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। गुटखा और पान मसाला के छोटे पाउच प्लास्टिक कचरे का बड़ा स्रोत माने जाते हैं, जो सड़कों, नालियों और जल स्रोतों में बड़ी मात्रा में जमा होते हैं।सरकार लगातार प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए नीतिगत बदलाव कर रही है और यह कदम उसी दिशा में एक और पहल माना जा रहा है।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, जो कंपनियां पहले से टीन या कांच के कंटेनर्स का उपयोग कर रही हैं, वे उन्हें जारी रख सकती हैं।सूत्रों के मुताबिक, इससे उद्योग को आवश्यक लचीलापन मिलेगा और वे अपने व्यावसायिक मॉडल के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे।</p>
<p><strong>उद्योग पर असर</strong><br />इस प्रस्ताव का असर गुटखा और पान मसाला उद्योग पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।कंपनियों को नई पैकेजिंग व्यवस्था अपनाने के लिए निवेश और तकनीकी बदलाव करने होंगे हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित होगा।</p>
<p>ड्राफ्ट पर 30 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी। इसके बाद FSSAI अंतिम नियम अधिसूचित करेगा। यदि यह लागू होता है, तो देश में गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग पूरी तरह बदल जाएगी और प्लास्टिक पाउच इतिहास बन सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरबा में धमाके से फटा राखड़ बांध, जेसीबी ऑपरेटर की हुई मौत</title>
                                    <description><![CDATA[कोरबा राखड़ बांध हादसे में जेसीबी ऑपरेटर की मौत, जहरीली राख हसदेव नदी में पहुंची, पेयजल संकट गहराया, जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/rakhad-dam-burst-due-to-explosion-in-korba-jcb-operator/article-51650"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/korba-ash-dam-accident-chhattisgarh-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रविवार दोपहर बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब एचटीपीएस (छत्तीसगढ़ राज्य बिजली उत्पादन कंपनी) का राखड़ बांध अचानक फट गया। इस घटना में 21 वर्षीय जेसीबी ऑपरेटर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भारी मात्रा में जहरीली राख और पानी का मिश्रण आसपास के इलाकों और हसदेव नदी में फैल गया। अधिकारियों के अनुसार, हादसा दोपहर करीब 12 बजे लोतलोता गांव के पास हुआ, जहां राखड़ डंपिंग का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बांध के एक हिस्से पर अचानक दबाव बढ़ा और लगभग 30 मीटर का तटबंध तेज धमाके के साथ टूट गया, जिससे 150 फीट ऊंचाई से स्लरी का तेज बहाव नीचे गिरा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">हादसे के दौरान मौके पर काम कर रही मशीनें भी इस तेज बहाव में बह गईं। जेसीबी ऑपरेटर हुलेश्वर कश्यप मलबे में दब गए और उनकी मौत हो गई, जबकि एक अन्य पोकलेन ऑपरेटर ने किसी तरह खुद को बचा लिया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">गांवों पर असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राखड़ बांध फटने के बाद बड़ी मात्रा में राख सीधे हसदेव नदी में पहुंच गई। इससे नदी के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ा है। नदी किनारे बसे गांवों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह लापरवाही सीधे उनके जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बांध के रखरखाव में पहले से ही खामियां थीं, जिनकी अनदेखी की गई। पर्यावरणीय नुकसान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि जहरीली राख जलीय जीवों के लिए खतरा बन सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुआवजे पर विवाद</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित लोगों ने शव को उठाने से इनकार कर दिया और मुआवजे की मांग पर अड़ गए। करीब पांच घंटे तक चले इस विवाद के बाद प्रशासन के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को तत्काल 5 लाख रुपये की सहायता, कानूनी प्रक्रिया के बाद 18 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि और सवाल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कोरबा क्षेत्र में औद्योगिक हादसों का यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में वेदांता पावर प्लांट से जुड़ी घटना भी चर्चा में रही थी। लगातार हो रही घटनाओं ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सूत्रों के मुताबिक, राखड़ बांधों के रखरखाव और निगरानी में कई बार लापरवाही सामने आती रही है, लेकिन समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आधिकारिक बयान और जांच</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बिजली उत्पादन कंपनी के मुख्य अभियंता देवेन्द्र नाथ ने बताया कि घटना के समय बांध पर स्टैंडिंग का काम चल रहा था और वह स्वयं निरीक्षण के लिए मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और कारणों का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दबाव बढ़ने और संरचनात्मक कमजोरी को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आगे क्या</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रशासन ने प्रभावित इलाके का सर्वे शुरू कर दिया है और जल गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। साथ ही, आसपास के गांवों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कोरबा राखड़ बांध हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त निगरानी की जरूरत को उजागर किया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:03:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कूनो बना देश का चीता प्रजनन केंद्र, अब नौरादेही भेजे जाएंगे चीते, तैयारी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या के बीच नौरादेही में नए आवास की तैयारी तेज। जानिए प्रोजेक्ट चीता का ताजा अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/kuno-becomes-the-countrys-cheetah-breeding-center-now-4-cheetahs/article-50032"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cheetah-project,-kuno-national-park-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब देश में चीतों का प्रमुख प्रजनन केंद्र बनकर उभर रहा है। पिछले तीन वर्षों में यहां 45 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 33 जीवित हैं। वर्तमान में कूनो में कुल 50 चीते मौजूद हैं, लेकिन इनमें से केवल 12 ही खुले जंगल में सक्रिय हैं। शेष चीतों को अलग-अलग प्रबंधन श्रेणियों में रखा गया है, जिनमें 23 शावक अपनी माताओं के साथ बाड़ों में हैं, जबकि 9 चीते क्वारंटाइन में हैं। बढ़ती संख्या और सीमित क्षेत्र को देखते हुए अब वन विभाग ने चीतों को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू कर दी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रारंभिक योजना के तहत जून महीने में 2 नर और 2 मादा चीतों को नौरादेही भेजा जा सकता है। इसके लिए टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया मानसून से पहले पूरी की जाएगी। अंतिम निर्णय चीता स्टीयरिंग समिति द्वारा लिया जाएगा, जो इस परियोजना की निगरानी कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कूनो में चीतों की संख्या में हुई वृद्धि को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सीमित क्षेत्र में अधिक चीतों की मौजूदगी से उनके व्यवहार, शिकार और क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि नए आवास की जरूरत महसूस की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नया आवास तैयार</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को इस दिशा में तेजी से विकसित किया जा रहा है। करीब 5500 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य है, जहां पिछले दो वर्षों से चीता आवास के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यहां शिकार आधार मजबूत करने, निगरानी तंत्र विकसित करने और प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि विशेष बाड़ों का निर्माण अंतिम चरण में है और ट्रांसलोकेशन के लिए आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रबंधन रणनीति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, चीतों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया सावधानीपूर्वक और चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। मानसून से पहले टीकाकरण के दौरान चीतों को पकड़कर सुरक्षित तरीके से नौरादेही पहुंचाया जाएगा, ताकि उन्हें नए वातावरण में आसानी से अनुकूलित किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही नौरादेही को देश का तीसरा चीता आवास बनाने की घोषणा कर चुके हैं। इससे प्रोजेक्ट चीता को विस्तार मिलेगा और जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पृष्ठभूमि के तौर पर देखा जाए तो भारत में चीतों को पुनर्स्थापित करने की योजना के तहत अफ्रीकी चीतों को कूनो में बसाया गया था। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद अब प्रजनन दर में सुधार हुआ है, जो इस परियोजना की सफलता का संकेत माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों की बढ़ती संख्या को संतुलित रखने और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने के लिए अलग-अलग आवास विकसित करना जरूरी है। इससे न केवल चीतों का संरक्षण मजबूत होगा, बल्कि वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आने वाले महीनों में यदि नौरादेही में चीतों का सफल ट्रांसलोकेशन होता है, तो यह देश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। कूनो की सफलता के बाद अब सभी की नजरें इस नए आवास पर टिकी हैं, जो भारत के वन्यजीव मानचित्र में नई पहचान बना सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/kuno-becomes-the-countrys-cheetah-breeding-center-now-4-cheetahs/article-50032</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:25:37 +0530</pubDate>
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