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                <title>Court Verdict - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Court Verdict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, आपसी सहमति से बने संबंध को रेप नहीं माना</title>
                                    <description><![CDATA[लंबे समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले बालिगों के मामले में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा, कहा- केवल शादी से इनकार करना दुष्कर्म नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/important-comment-of-chhattisgarh-high-court-consensual-relationship-is-not/article-57417"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि यदि दो बालिग व्यक्ति लंबे समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं और उनके बीच शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने हैं, तो बाद में पुरुष द्वारा शादी से इनकार करने मात्र से उसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निर्णय केवल किसी एक बयान या आरोप के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे संबंध की प्रकृति, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यह फैसला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनाया, जिसमें जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास शामिल थे। अदालत ने सरगुजा की फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए महिला की अपील खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक साथ रहने वाले बालिग व्यक्तियों के बीच बने शारीरिक संबंधों को सामान्य परिस्थितियों में सहमति से बना संबंध माना जा सकता है, जब तक कि उपलब्ध साक्ष्य इसके विपरीत स्पष्ट रूप से संकेत न दें। मामले के अनुसार शिकायतकर्ता महिला भिलाई नगर निगम में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि वर्ष 2019 में रायपुर में एमबीए की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात आरोपी से हुई थी। दोनों के बीच निकटता बढ़ी और बाद में वे लगभग दो वर्षों तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। महिला का आरोप था कि आरोपी ने उनसे शादी करने का वादा किया था और इसी भरोसे पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत में महिला ने आगे कहा कि एमबीए पूरा होने के बाद आरोपी ने शादी की बात टालनी शुरू कर दी। बाद में उसने कथित रूप से यह कहा कि उसके परिवार वाले इस विवाह के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि महिला उम्र में उससे बड़ी हैं, तलाकशुदा हैं और ईसाई समुदाय से संबंध रखती हैं। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि 28 नवंबर 2021 को जब वह शादी की बात करने आरोपी के घर पहुंचीं तो वहां उनके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए गए। इसी आधार पर उन्होंने दुष्कर्म और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया। मामले की सुनवाई पहले सरगुजा की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसके बाद महिला ने इस फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि केवल यह तथ्य कि दोनों विवाह करना चाहते थे, इससे यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि उनके बीच बने शारीरिक संबंध केवल शादी के वादे के कारण ही स्थापित हुए थे। अदालत ने कहा कि जब दो बालिग व्यक्ति लंबे समय तक एक साथ रहते हैं तो यह माना जा सकता है कि वे अपने संबंधों और उनके संभावित परिणामों से पूरी तरह परिचित थे। ऐसे मामलों में प्रत्येक परिस्थिति का अलग-अलग मूल्यांकन करना आवश्यक होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि न्यायालयों को इस प्रकार के मामलों को केवल तकनीकी या संकीर्ण कानूनी दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। किसी भी मामले में संबंध की अवधि, दोनों पक्षों का व्यवहार, परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अदालत ने कहा कि यदि लंबे समय तक दोनों की सहमति से संबंध रहे हों, तो बाद में विवाह न होने की स्थिति को स्वतः दुष्कर्म का मामला नहीं माना जा सकता। फैसले के दौरान हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2013 के एक निर्णय का भी उल्लेख किया। अदालत ने कैनी राजन बनाम केरल राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि सहमति का अर्थ केवल मौन स्वीकृति या आत्मसमर्पण नहीं होता, बल्कि यह सोच-समझकर लिया गया स्वतंत्र निर्णय होता है। न्यायालय ने कहा कि प्रत्येक मामले में यह देखना आवश्यक है कि सहमति किन परिस्थितियों में दी गई थी और क्या उसके पीछे किसी प्रकार का छल या दबाव था। हाई कोर्ट ने मेडिकल साक्ष्यों पर भी विचार किया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध चिकित्सकीय रिपोर्ट में दुष्कर्म की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई। साथ ही रिपोर्ट में दर्ज चोटों और कथित घटना के समय के बीच भी स्पष्ट सामंजस्य नहीं पाया गया। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य अभियोजन के आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल मनुआभान टेकरी केस में दो दोषियों को उम्रकैद सजा</title>
                                    <description><![CDATA[डीएनए रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-two-convicts-sentenced-to-life-imprisonment-in-manuabhan-tekri/article-56255"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-manubhan-tekri-case.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में सात साल बाद आखिरकार अदालत का फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने बुधवार को इस मामले में अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी करार देते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों आरोपियों पर 8-8 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह वही मामला है जिसने वर्ष 2019 में पूरे मध्यप्रदेश को झकझोर कर रख दिया था और लंबे समय तक लोगों के बीच गुस्सा और चिंता का माहौल बना रहा था। अदालत का यह फैसला उन परिवारजनों के लिए राहत लेकर आया है जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे, हालांकि घटना की भयावहता आज भी लोगों के जहन में ताजा है। यह पूरी घटना 30 अप्रैल 2019 की बताई जाती है, जब भोपाल में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। बताया जाता है कि यह एक सामान्य घूमने-फिरने का दिन था, लेकिन कुछ ही घंटों में हालात पूरी तरह बदल गए। आरोप है कि टेकरी पर ही दोनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया और उसके बाद बेहद क्रूर तरीके से पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को करीब 100 फीट गहरी खाई में स्थित एक गुफा में छिपा दिया गया ताकि किसी को इसकी भनक न लग सके। शुरुआती घंटों में यह मामला गुमशुदगी जैसा लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पूरा सच सामने आने लगा और मामला बेहद गंभीर हो गया।</p>
<p>घटना की जानकारी मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस ने देर रात से ही सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया था। अंधेरे, खड़ी चढ़ाई और गहरी खाई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आईं, लेकिन पुलिस लगातार इलाके में तलाश करती रही। इसी दौरान पूछताछ में अविनाश साहू के बयान बार-बार बदलने लगे, जिससे पुलिस को उस पर शक गहरा गया। सख्ती से पूछताछ किए जाने पर उसने कथित तौर पर पूरी वारदात कबूल कर ली। इसके बाद पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर जाकर खाई से छात्रा का शव बरामद किया, जो बुरी तरह क्षत-विक्षत हालत में था। शव मिलने के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश दोनों फैल गए थे और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुटने लगे थे। इसके बाद पुलिस ने इस पूरे मामले में पॉक्सो एक्ट और हत्या सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जांच को आगे बढ़ाया। मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों को केस की सबसे अहम कड़ी बनाया गया। शुरुआती जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने चालान पेश किया। बाद में राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश भी की। लेकिन सीबीआई ने अपने स्तर पर जांच करने के बाद जो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, उसमें दोनों आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई थी। इस रिपोर्ट को लेकर भी काफी सवाल उठे और अदालत ने स्वयं इस पर आपत्ति जताते हुए सीबीआई से स्पष्टीकरण मांगा था, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया।</p>
<p>लंबी कानूनी प्रक्रिया और कई चरणों की सुनवाई के बाद आखिरकार ट्रायल पूरा हुआ और अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और पुलिस जांच को विश्वसनीय मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध सबूतों की श्रृंखला अपराध की पुष्टि करती है और इस तरह की घटनाओं में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में संदेश जाए। फैसले के दौरान अदालत कक्ष में भी माहौल गंभीर रहा। वहीं, बाहर मौजूद लोगों में भी इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली, लेकिन अधिकतर लोग इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर अपराधों की जांच और न्याय प्रक्रिया में इतना लंबा समय क्यों लगता है। पीड़ित परिवार के लिए यह सात साल का इंतजार आसान नहीं रहा, और हर सुनवाई के साथ उम्मीद और दर्द दोनों साथ चलते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:36:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बच्चे को ले जाने के विवाद में साले की हत्या, जीजा को उम्रकैद</title>
                                    <description><![CDATA[रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद ने लिया खूनी मोड़, अदालत ने हत्या के दोषी जीजा को सुनाई आजीवन कारावास की सजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/life-imprisonment-to-brother-in-law-for-murder-of-brother-in-law-in-dispute/article-55304"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p>रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद से जुड़ा एक हत्या का मामला करीब तीन साल बाद अदालत के फैसले के साथ अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गया। बच्चे को जबरन अपने साथ ले जाने के दौरान हुए विवाद में बड़े साले की चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है और मृतक के परिवार को क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की अनुशंसा की है। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था क्योंकि घटना परिवार के सदस्यों के सामने हुई थी और विवाद की वजह एक साल का मासूम बच्चा था।</p>
<p>अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना की शुरुआत पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक मतभेदों से हुई थी। ग्राम मुनुंद निवासी दाताराम सारथी की शादी उर्मिला सारथी से हुई थी, लेकिन दोनों के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ था। बताया गया कि आपसी विवाद के कारण उर्मिला अक्सर अपने मायके ग्राम पत्थलगांव खुर्द में रहती थी। इसी दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया और वह अपने बच्चे के साथ मायके में ही रह रही थी। परिवार के लोगों का कहना था कि पति-पत्नी के बीच संबंध सामान्य नहीं थे और कई बार समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। घटना 1 मई 2022 की शाम की है। बताया जाता है कि दाताराम सारथी अपने ससुराल पहुंचा और वहां मौजूद अपने एक साल के बेटे को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। आरोप है कि उसने बच्चे को जबरन अपनी पत्नी से छीन लिया और उसे लेकर जाने लगा। उस समय उर्मिला सारथी, उसकी भाभी और भतीजी ने उसे रोकने की कोशिश की। परिवार की महिलाओं ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। बच्चे को लेकर वह मुख्य सड़क की ओर बढ़ गया। इसी बीच परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बात की जानकारी मिली और माहौल तनावपूर्ण हो गया।</p>
<p>प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जब दाताराम बच्चे को लेकर जा रहा था, तभी उसका बड़ा साला महेश सारथी वहां पहुंचा। महेश ने उसे रोकने का प्रयास किया और बच्चे को जबरन ले जाने का विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। बताया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों में बहस इतनी तीखी हो गई कि मामला हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि गुस्से में आकर दाताराम ने अपने पास मौजूद चाकू निकाल लिया और महेश सारथी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। चाकू के वार महेश के पेट, पीठ और गर्दन पर किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना इतनी अचानक हुई कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही महेश जमीन पर गिर पड़ा। उसकी पत्नी, बहन और बेटी के सामने यह पूरा घटनाक्रम हुआ। परिवार के सदस्यों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा और घर में मातम का माहौल बन गया।</p>
<p>घटना के बाद मृतक की पत्नी कुसुम सारथी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण साबित हुए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी दाताराम सारथी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी को हत्या का दोषी पाया। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके आधार पर अदालत ने दाताराम सारथी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।</p>
<p>फैसले के साथ ही न्यायालय ने मृतक के परिवार की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। अदालत ने मृतक के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है।  यह राशि परिवार को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से दी जाती है, हालांकि किसी परिजन की मृत्यु से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती। इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि पारिवारिक विवाद और रिश्तों में बढ़ता तनाव कभी-कभी बेहद दुखद परिणाम लेकर आ सकता है। एक बच्चे को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हत्या जैसे गंभीर अपराध में बदल गया और अंततः एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, जबकि दूसरे परिवार का व्यक्ति आजीवन कारावास की सजा तक पहुंच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:44:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल पंप संचालक पर चाकू से हमला कर कैश लूटने वाला दोषी, कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[रायगढ़ के घरघोड़ा में हुई वारदात, पेट में चाकू मारकर कैश बैग लूटा था, गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को ठहराया दोषी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/court-sentenced-the-culprit-who-attacked-petrol-pump-operator-with/article-55189"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-petrol-pump-loot.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र में पेट्रोल पंप संचालक पर जानलेवा हमला कर कैश से भरा बैग लूटने के मामले में अदालत ने आरोपी को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। करीब एक साल पहले हुई इस घटना में आरोपी ने पेट्रोल पंप कार्यालय में घुसकर नकदी से भरा बैग उठाया था और विरोध करने पर संचालक के पेट में चाकू मार दिया था। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक यह मामला घरघोड़ा थाना क्षेत्र के कसैया स्थित गोमती फ्यूल्स पेट्रोल पंप से जुड़ा है। 28 अप्रैल 2024 की देर रात करीब 11 से 12 बजे के बीच पेट्रोल पंप के कर्मचारी राजकुमार यादव और उमेश यादव कार्यालय परिसर में सो रहे थे। वहीं पेट्रोल पंप संचालक खीरू राय कार्यालय के भीतर कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान अस्मित नाग नाम का युवक कार्यालय में दाखिल हुआ और वहां रखा नकदी से भरा बैग उठाकर बाहर निकलने लगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">पेट्रोल पंप संचालक खीरू राय की नजर आरोपी पर पड़ गई। उन्होंने तुरंत उसका पीछा किया और बैग छीनने की कोशिश की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक संचालक ने आरोपी से बैग ले जाने का कारण भी पूछा, लेकिन आरोपी ने कोई जवाब देने के बजाय हमला कर दिया। विरोध होते देख उसने अपने पास रखे चाकू से खीरू राय के पेट में लगातार दो वार कर दिए। हमला इतना अचानक हुआ कि संचालक संभल भी नहीं पाए और गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़े।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर घरघोड़ा शासकीय कॉलेज की दिशा में भाग निकला। पेट्रोल पंप परिसर में मची अफरा-तफरी और शोर-शराबे की आवाज सुनकर अन्य कर्मचारी भी जाग गए। कर्मचारियों ने तत्काल अपने वरिष्ठों को सूचना दी और घायल संचालक को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रायगढ़ रेफर कर दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना की शिकायत पेट्रोल पंप कर्मचारी राजकुमार यादव द्वारा घरघोड़ा थाने में दर्ज कराई गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी। तत्कालीन उपनिरीक्षक करमू साय पैंकरा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न साक्ष्य जुटाए और संदेह के आधार पर अस्मित नाग को हिरासत में लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस पूछताछ में आरोपी से लगातार सवाल-जवाब किए गए। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध करना स्वीकार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य एकत्र किए और विवेचना पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया। मामले में घायल पक्ष, प्रत्यक्षदर्शियों और जांच अधिकारियों के बयान भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने न्यायालय के समक्ष बताया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से कार्यालय में प्रवेश कर नकदी लूटने की कोशिश की थी और विरोध होने पर जानलेवा हमला किया था। वहीं बचाव पक्ष ने भी अपने तर्क रखे, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी माना।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत में हुई। न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी अस्मित नाग को भारतीय दंड संहिता की धारा 458, 394 और 307 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि आरोपी का कृत्य गंभीर प्रकृति का है और इससे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यायालय ने आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत के फैसले के बाद मामले का कानूनी निपटारा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फैसले से अपराध करने वालों को सख्त संदेश जाएगा और कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा और मजबूत होगा। इस मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और अंततः अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया। रायगढ़ जिले में यह मामला काफी चर्चित रहा था क्योंकि घटना में पेट्रोल पंप संचालक पर सीधे जानलेवा हमला किया गया था। अब अदालत के निर्णय के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की बात कही जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:27:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्वालियर में 15 साल से रखी है भोजशाला की मां वाग्देवी प्रतिमा, अब बढ़ीं स्थापना की उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[भोजशाला पर कोर्ट फैसले के बाद ग्वालियर में रखी मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा फिर चर्चा में है। 15 साल से स्थापना का इंतजार जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhojshalas-mother-vagdevi-statue-has-been-kept-in-gwalior-for/article-53814"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-dispute,-gwalior-dhar-goddess-vagdevi.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला के बारे में आए कोर्ट के फैसले के बाद मध्य प्रदेश का धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल अचानक बदल गया है। फैसले के बाद धार में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ग्वालियर में एक ऐसा घर है जो पिछले 15 साल से मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा को स्थापित करने की उम्मीद कर रहा है। यह वही प्रतिमा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे 2011 में भोजशाला के गर्भगृह में रखा जाना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विवाद और प्रशासनिक कारणों के चलते इसे धार नहीं ले जाया जा सका। अब जब कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर मान कर पूजा-अर्चना की इजाजत दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्वालियर में इस प्रतिमा को लेकर चर्चा फिर से तेज हो गई है। खास बात यह है कि यह प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी प्रतिमा की हूबहू नकल मानी जाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्वालियर के मशहूर मूर्तिकार प्रभात राय और उनकी टीम ने इसे तैयार किया था। उनके बेटे अनुज राय के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिमा अष्टधातु से बनाई गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी ऊंचाई लगभग 3.5 फीट है और वजन ढाई क्विंटल से अधिक बताया जा रहा है। इसे बनाने में 2011 में करीब ढाई से तीन लाख रुपए खर्च हुए थे। उस समय 26 कलाकारों ने लगभग 35 से 40 दिन लगातार काम करके इसे तैयार किया था। प्रतिमा की बनावट और नक्काशी इस तरह से की गई कि यह लंदन म्यूजियम में रखी मूल प्रतिमा से मेल खाती है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता नवल किशोर ने इस मूर्ति के निर्माण का जिम्मा लिया था। मूर्ति बनकर तैयार थी और बसंत पंचमी पर धार भेजने की योजना थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसी समय भोजशाला के मामले में माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोक दिया। हालात इतने संवेदनशील हो गए थे कि कुछ समय के लिए मूर्तिकार के घर पर पुलिस सुरक्षा भी लगानी पड़ी। अनुज बताते हैं कि 2011 से 2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस निगरानी में प्रतिमा को कुछ समय के लिए बाहर रखा जाता था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब कोर्ट के फैसले के बाद इस प्रतिमा को लेकर फिर से उम्मीदें जगी हैं। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन या किसी संगठन ने अभी तक प्रतिमा को धार ले जाने के लिए आधिकारिक संपर्क नहीं किया है। ऐसा कहा जा रहा है कि सभी पक्ष कोर्ट के विस्तृत आदेश और कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार की भोजशाला में माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा दिखाई दे रहा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मां वाग्देवी की आरती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूजा और अखंड ज्योति स्थापना के बाद परिसर में धार्मिक उल्लास फैल गया है। इंदौर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झाबुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरगोन और आसपास के जिलों से लोग परिवार के साथ भोजशाला पहुंच रहे हैं। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूर्तिकार परिवार ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। अनुज राय ने कहा कि अगर भविष्य में कोई इस प्रतिमा को लेने नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे इसे अपने पास सम्मान के साथ रखेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और आस्था का प्रतीक है। ग्वालियर में रखी यह प्रतिमा एक बार फिर चर्चा में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 11:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: सार्वजनिक जगहों से हटेंगे आवारा कुत्ते, सड़कों पर खाना खिलाना भी बंद</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने आदेश बरकरार रखते हुए सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और शेल्टर में रखने का निर्देश दिया। खाना खिलाने पर भी रोक जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-order-of-supreme-court-stray-dogs-will-be-removed/article-53759"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/supreme-court-verdict-on-stray-dogs.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उसने पहले दिए गए आदेश में किसी भी तरह की ढील देने से इंकार कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अस्पतालों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस स्टैंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेलवे स्टेशनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल परिसरों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद भी वहीं नहीं छोड़ा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा। इस निर्णय के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नगर निकायों और प्रशासनिक इकाइयों पर दबाव बढ़ गया है कि वे सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखने के लिए कठोर कदम उठाएं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक को बरकरार रखा है। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने यह भी कहा कि निर्धारित फीडिंग स्पॉट बनाए जा सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां नियमों के तहत ही आवारा कुत्तों को भोजन दिया जा सकेगा। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमलों के मामले निरंतर सामने आ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बहुत चिंताजनक हैं। अदालत ने यह भी बताया कि कई विदेशी यात्रियों को भी कुत्तों के काटने के मामले का सामना करना पड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह समस्या अब केवल स्थानीय ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि व्यापक स्तर की बन चुकी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस फैसले के पीछे सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन गंभीर रूप से कम हो रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके खिलाफ अवमानना और विभागीय कार्रवाई हो सकती है। अदालत ने यह भी माना कि यह समस्या अब शहरी क्षेत्रों के बाहर जाकर हवाई अड्डों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह मामला जुलाई 2025 में तब शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट ने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया। उस रिपोर्ट में एक बच्चे की कुत्ते के काटने से मौत का मामला बताया गया था। इसके बाद अगस्त में अदालत ने एनसीआर क्षेत्र के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर काफी विवाद हुआ। बाद में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले को तीन जजों की बड़ी पीठ को सौंपा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने कुछ संशोधित करते हुए कहा कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ा जा सकता है। लेकिन नए आदेश में सार्वजनिक संस्थानों से पकड़े गए कुत्तों को वापस छोड़ने पर रोक फिर से लगा दी गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अदालत ने यह भी दोहराया कि शैक्षणिक संस्थानों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पतालों और बस अड्डों जैसे संवेदनशील स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी को रोकना महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि बच्चों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कें और हाईवे से अन्य आवारा जानवरों को हटाने पर भी चर्चा की गई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख अब काफी सख्त नजर आ रहा है। अदालत ने यह संकेत दिया है कि अगर जरूरत पड़ी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कुत्तों के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों पर भारी मुआवज़े का बोझ डालने का भी विचार किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जो लोग लापरवाही बरतेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:16:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में शुरू हुई पूजा, परिसर में गूंजे मंत्रोच्चार और हनुमान चालीसा</title>
                                    <description><![CDATA[धार भोजशाला में हाईकोर्ट फैसले के बाद पहली बार पूजा शुरू। श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा पढ़ी, प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/gunja-puja-and-hanuman-chalisa-worship-started-in-bhojshala-after/article-53605"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-dhar-worship-rituals.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के धार जिले में मौजूद ऐतिहासिक स्थल भोजशाला फिर से सुर्खियों में है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि शनिवार को लंबे विवाद के बाद पहली बार पूजा-अर्चना शुरू हुई। हाल ही में आए नतीजे ने यहां का माहौल पूरी तरह बदल दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिसर में आने लगे। पूरे परिसर में </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">भोजशाला पूजा</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर खासा उत्साह था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग विधिपूर्वक आराधना में शामिल हो रहे थे। सुबह के वक्त मंदिर के परिसर में घंटियों की आवाज और हनुमान चालीसा की मंत्र गूंजती रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वातावरण पूरी तरह धार्मिक हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों बाद ऐसा नजारा देखने को मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब परिसर में खुलकर पूजा-पाठ हो रहा है। भीड़ बढ़ने के साथ ही प्रशासन ने निगरानी भी सख्त कर दी थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शनिवार सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी और श्रद्धालु एक साथ भोजशाला परिसर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना की विधिवत शुरुआत हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मंत्रोच्चार के बीच हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं में </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">भोजशाला पूजा</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर विशेष उत्साह था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग इसे एक ऐतिहासिक क्षण मान रहे थे। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह पहली बड़ी आराधना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आसपास के क्षेत्रों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आए। भीड़ को देखते हुए पुलिस बल पहले से मौजूद था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पूरे क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। किसी भी स्थिति को संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माहौल शांतिपूर्ण रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौकस थी ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह पूरा मामला हाल ही में आए एक फैसले से जुड़ा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को लेकर अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर यह परिसर धार्मिक दृष्टि से मंदिर के रूप में माना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यहां सरस्वती देवी की उपासना के प्रमाण मिलते हैं। इसी फैसले के बाद परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई। शुक्रवार को दिए गए आदेश के बाद पुरानी व्यवस्था बदल गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दोनों पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। फिलहाल प्रशासन इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती जारी है। आने वाले दिनों में यहां स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि यह मामला स्थानीय स्तर पर अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:03:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>एमपी कांग्रेस के लिए बुरी खबर! एक और विधायक की सदस्यता रद्द, कोर्ट सजा के बाद कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[एमपी कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द, 3 साल की सजा के बाद विधानसभा की कार्रवाई। जानिए पूरा मामला और राजनीतिक असर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bad-news-for-mp-congress-membership-of-another-mla-canceled/article-50042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-congress-mla-rajendra-bharti-disqualified.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मध्यप्रदेश की सियासत में शुक्रवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द कर दी गई। दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा 27 साल पुराने एफडी घोटाले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद यह कार्रवाई हुई। दो साल से अधिक सजा के प्रावधान के तहत विधानसभा सचिवालय ने देर रात आदेश जारी कर भारती की सदस्यता समाप्त कर दी। गुरुवार को सजा सुनाए जाने के बाद रात करीब 10:30 बजे सचिवालय खुला और कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए निर्णय लागू किया गया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्य विवरण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अदालत ने राजेंद्र भारती को दो धाराओं में तीन-तीन साल और एक अन्य धारा में दो साल की सजा सुनाई है। इस मामले में सह-आरोपी पूर्व बैंक क्लर्क रघुवीर शरण प्रजापति को भी तीन साल की सजा दी गई। हालांकि कोर्ट ने भारती को जमानत दे दी है और उन्हें उच्च न्यायालय में अपील के लिए 60 दिन का समय भी दिया गया है। विधानसभा सचिवालय ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर यह कार्रवाई की, जिसके अनुसार दो साल या उससे अधिक सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सियासी हलचल तेज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कोर्ट के फैसले और सदस्यता रद्द होने की खबर के बाद कांग्रेस नेताओं में सक्रियता बढ़ गई। देर रात पूर्व विधायक पीसी शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी विधानसभा पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा से कहा कि मामले में स्टे मिलने की संभावना है, ऐसे में सदस्यता समाप्त करना जल्दबाजी है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे केवल कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पृष्ठभूमि और मामला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यह मामला 27 साल पुराने एफडी घोटाले से जुड़ा है, जिसमें बैंकिंग लेनदेन में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को भारती को दोषी करार दिया और गुरुवार को सजा सुनाई। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह केस लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था और हाल ही में इसमें तेजी आई थी, जिसके बाद फैसला आया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधिकारिक स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा सचिवालय ने पूरी कानूनी समीक्षा के बाद ही आदेश जारी किया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के स्थापित नियमों के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार की विवेकाधीन छूट नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रभाव और विश्लेषण</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस घटनाक्रम का सीधा असर मध्यप्रदेश की राजनीति पर पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए यह एक और झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब पार्टी पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे आगामी राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं और दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति भी बन सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:03:22 +0530</pubDate>
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