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                <title>Bureaucracy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Bureaucracy RSS Feed</description>
                
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                <title>एमएसएमई विभाग में जूनियर अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी, सीनियर अधिकारियों में बढ़ी नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश में हालिया प्रभार आदेशों के बाद विभाग के भीतर असंतोष गहरा गया है, वरिष्ठ अधिकारियों का आरोप है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/royal-adornment-of-mahakal-in-bhasma-aarti-devotees-had-divine/article-56633"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/msme-department-mp.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग में जारी हालिया तबादला और प्रभार आदेशों ने विभागीय माहौल को गर्मा दिया है। 15 और 16 जून को जारी आदेशों के बाद कई वरिष्ठ अधिकारी खुलकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। विभाग के भीतर चर्चा का विषय यह है कि जिन अधिकारियों का मूल पद सहायक प्रबंधक है और जो वर्तमान में प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्य कर रहे हैं, उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआईसी) के महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल विभागीय पदक्रम प्रभावित हुआ है बल्कि लंबे समय से सेवा दे रहे नियमित और वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी भी हुई है। बताया जा रहा है कि विभाग में इस फैसले को लेकर कई स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं और कर्मचारी इसे "चार्ज के ऊपर चार्ज" की व्यवस्था बता रहे हैं। प्रभार आदेशों के अनुसार सुबोध कुमार श्रीवास्तव को मंडीदीप, जेपी तिवारी को रीवा, शिवशंकर सिंह को निवाड़ी, सुरेश कुमार गोस्वामी को भिंड, राममूर्ति खरे को अनूपपुर, अजय तिवारी को शिवपुरी और बीएल अहिरवार को दमोह जिले के जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र का महाप्रबंधक प्रभार सौंपा गया है। यही नियुक्तियां अब पूरे विवाद का केंद्र बन गई हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई अधिकारियों का मानना है कि महाप्रबंधक का पद प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस स्तर की जिम्मेदारी ऐसे अधिकारियों को दी जानी चाहिए जो पदक्रम और वरिष्ठता के अनुसार पात्र हों। अधिकारियों का कहना है कि यदि विभाग में नियमित रूप से चयनित अधिकारी उपलब्ध हैं तो फिर प्रभारी व्यवस्था के जरिए इस तरह के प्रभार देने की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसका स्पष्ट उत्तर अभी तक सामने नहीं आया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विभाग के भीतर असंतोष की एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि एमपीपीएससी के माध्यम से चयनित वर्ष 2016, 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी वर्तमान में कार्यरत हैं। इनमें प्रबंधक और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों का मानना है कि जब विभाग में पर्याप्त संख्या में योग्य और नियमित अधिकारी मौजूद हैं, तब उन्हें दरकिनार कर प्रभारी प्रबंधकों को उच्च पदों का दायित्व सौंपना समझ से परे है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि इससे चयन प्रक्रिया और वरिष्ठता के महत्व पर भी सवाल खड़े होते हैं। विभाग के कई अधिकारी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उनका मानना है कि इस तरह के फैसले भविष्य में प्रशासनिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। नाराजगी का एक और कारण लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को भी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वर्षों से पदोन्नति की उम्मीद लगाए बैठे कई अधिकारी आज भी उसी पद पर कार्यरत हैं। दूसरी ओर प्रभारी व्यवस्था के माध्यम से जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों की जिम्मेदारी दी जा रही है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच यह भावना बढ़ रही है कि उनके अनुभव और सेवा अवधि को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कई अधिकारियों ने अनौपचारिक स्तर पर इस विषय को उठाया है और विभागीय नियमों की समीक्षा की मांग भी की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर को लेकर सामने आया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई जिलों में ऐसी स्थिति बनने जा रही है जहां वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी उन अधिकारियों के अधीन कार्य करेंगे जो मूल रूप से वर्ग-3 सेवा श्रेणी से आते हैं। ऐसी स्थिति में जूनियर अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट लिखेंगे। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक दृष्टि से यह एक असामान्य व्यवस्था है और इससे भविष्य में मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी विवाद खड़े हो सकते हैं। कई अधिकारियों का मानना है कि सेवा संरचना में इस तरह की व्यवस्था कर्मचारियों के मनोबल पर नकारात्मक असर डाल सकती है। विभाग के भीतर फिलहाल इस मुद्दे को लेकर चर्चा लगातार जारी है। अधिकारियों के बीच यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि यदि नियमित और अनुभवी अधिकारी उपलब्ध हैं तो फिर उच्च पदों का प्रभार देने के लिए किस आधार पर चयन किया गया। कुछ कर्मचारी इसे प्रशासनिक विवेक का मामला बता रहे हैं, जबकि अन्य अधिकारी इसे वरिष्ठता और पदक्रम की अनदेखी मान रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि विभाग के कई हिस्सों में असंतोष का माहौल दिखाई दे रहा है और अधिकारी भविष्य की कार्यप्रणाली को लेकर भी चिंता जता रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एमपी तबादला नीति में छूट से 17 हजार से अधिक ट्रांसफर हुए</title>
                                    <description><![CDATA[मोहन सरकार की एक दिन की छूट में विभागों में ताबड़तोड़ तबादले, 16 दिन में बड़ी प्रशासनिक हलचल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/more-than-17-thousand-transfers-took-place-due-to-relaxation/article-56267"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मोहन यादव सरकार द्वारा तबादलों पर दी गई अस्थायी छूट के बाद मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर जबरदस्त हलचल देखने को मिली है। मध्य प्रदेश तबादला नीति के तहत 16 दिन के भीतर 17 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण किए गए हैं। खास बात यह रही कि केवल एक दिन की विशेष छूट के दौरान ही करीब ढाई हजार तबादले महज़ कुछ घंटों में पूरे कर दिए गए। यह पूरा घटनाक्रम सोमवार और मंगलवार की रात के बीच अधिक सक्रिय रूप में देखा गया, जब विभागों ने देर रात तक आदेश जारी किए। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 15 जून को तबादला अवधि समाप्त होने के बाद मंत्रियों की मांग पर एक दिन की विशेष रियायत दी गई थी, जो मंगलवार रात 12 बजे तक प्रभावी रही। इस अवधि में कई विभागों ने तेजी से अपने स्तर पर तबादला आदेश जारी किए। स्कूल शिक्षा विभाग में प्रक्रिया अभी ऑनलाइन आवेदन स्तर पर होने के कारण आदेश पूरी तरह जारी नहीं हुए हैं, लेकिन बाकी विभागों में बड़े पैमाने पर स्थानांतरण हुए हैं। आबकारी विभाग, जेल विभाग, वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग, पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग और पर्यावरण विभाग जैसे अहम विभागों में तबादलों की लंबी सूची तैयार हुई है। इसके अलावा राजस्व, भू-संसाधन, पीएचई, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, आयुष, किसान कल्याण, कृषि विकास, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और सहकारिता विभागों में भी व्यापक स्तर पर अधिकारियों का फेरबदल किया गया है। कई जगहों पर फाइलें देर रात तक चलती रहीं और आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य स्तर पर विभागवार आंकड़ों की बात करें तो प्रशासनिक स्तर पर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार राजस्व विभाग में लगभग 400, नगरीय विकास एवं आवास में करीब 900, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में 1100 और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में लगभग 1700 तबादले हुए हैं। जनजातीय कार्य विभाग में करीब 1200, लोक निर्माण विभाग में 500 और वन विभाग में 200 से अधिक स्थानांतरण दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग में 200 से ज्यादा, आबकारी विभाग में 75, परिवहन विभाग में 50, वाणिज्यिक कर विभाग में लगभग 150 और जल संसाधन विभाग में 300 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। जिला स्तर पर भी हजारों की संख्या में आदेश जारी होने से प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि कई जिलों में एक ही दिन में बड़ी संख्या में फाइलें निपटाई गईं, जिससे विभागीय कामकाज की गति भी प्रभावित हुई। अधिकारियों के अनुसार तबादलों का आधिकारिक रिकॉर्ड सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति स्तर पर तैयार किया जाता है, लेकिन हर विभाग में वास्तविक संख्या का अलग-अलग संकलन होता है। यही वजह है कि कुल आंकड़े को जोड़ने में भी प्रशासनिक स्तर पर थोड़ा अंतर देखा जाता है। बावजूद इसके, एक दिन की छूट के भीतर हुई यह तेज़ी इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकार की रियायत के बाद विभागों में लंबित तबादलों को तेजी से निपटाया गया। अब आने वाले दिनों में स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश भी जारी होने की संभावना है, जिसके बाद कुल आंकड़ा और बढ़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एमपी में बड़ा प्रशासनिक बदलाव तय, कलेक्टर-एसपी बदले जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश में प्रशासनिक बदलाव की तैयारी तेज, कलेक्टर और एसपी के तबादले संभव। प्रदर्शन और फीडबैक के आधार पर होंगे फैसले।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-administrative-change-decided-in-mp-collector-sp-will-be-changed/article-50044"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/madhya-pradesh-administrative-reshuffle.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार कई जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को बदलने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठ स्तर पर लगातार मंथन चल रहा है और मुख्यमंत्री मोहन यादव तथा मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच इस विषय पर चर्चा भी हो चुकी है। प्रशासनिक दक्षता, राजस्व प्रदर्शन और जनसंपर्क जैसे मानकों के आधार पर अधिकारियों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसके बाद व्यापक स्तर पर तबादलों की सूची तैयार की जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">बताया जा रहा है कि यह फेरबदल केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसमें कई जिलों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से अधिकारियों के कामकाज, व्यवहार और स्थानीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता को लेकर फीडबैक जुटाया गया है। इसी के आधार पर कुछ अधिकारियों को नई जिम्मेदारी देने और कुछ को वर्तमान पद से हटाने का निर्णय लिया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">परफॉर्मेंस पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने के बाद अब नए वर्ष 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में राजस्व संग्रहण के लक्ष्य और उनकी उपलब्धि भी प्रशासनिक समीक्षा का अहम आधार बनी है। अधिकारियों के काम करने के तरीके के साथ-साथ आम लोगों से उनके व्यवहार को भी गंभीरता से परखा गया है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के स्थानीय नेताओं, सांसदों और विधायकों से मिले फीडबैक को भी इस प्रक्रिया में महत्व दिया गया है। जिन अधिकारियों को लेकर नकारात्मक रिपोर्ट मिली है, उन्हें मौजूदा जिम्मेदारियों से हटाकर अन्य पदों पर भेजा जा सकता है। इस विषय पर चार दौर की बैठकों में विस्तार से चर्चा हो चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पुलिस महकमे में बदलाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रशासनिक फेरबदल के साथ-साथ पुलिस विभाग में भी बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी है। पीएचक्यू द्वारा तैयार सूची पर डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की चर्चा पूरी हो चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 से अधिक जिलों के एसपी का तबादला किया जा सकता है। वहीं, कुछ ऐसे अधिकारी भी हैं जो प्रमोशन के बाद भी एसपी पद पर कार्यरत हैं। खंडवा, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ सहित कई जिलों में ऐसे अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को बड़े और संवेदनशील जिलों की कमान सौंपी जा सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस पूरे प्रशासनिक बदलाव का उद्देश्य शासन-प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ाना और जमीनी स्तर पर बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित करना है। सरकार चाहती है कि जिलों में प्रशासनिक मशीनरी ज्यादा जवाबदेह और सक्रिय बने, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आने वाले दिनों में तबादलों की आधिकारिक सूची जारी हो सकती है। माना जा रहा है कि यह बदलाव प्रदेश की प्रशासनिक संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित करेगा और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप कामकाज को गति देगा। मध्यप्रदेश में यह प्रशासनिक बदलाव आने वाले समय में शासन की दिशा और कार्यशैली पर भी असर डाल सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:03:00 +0530</pubDate>
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