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                <title>DonaldTrump - दैनिक जागरण</title>
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                <description>DonaldTrump RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान युद्ध खर्च पर ट्रम्प ने मांगे ₹8.3 लाख करोड़, संसद में बढ़ा विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने अतिरिक्त रक्षा फंडिंग की मांग को सैन्य तैयारी और हथियार भंडार से जोड़ा, जबकि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सैन्य कार्रवाई को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-demands-%E2%82%B983-lakh-crore-on-iran-war-expenditure-opposition/article-56869"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपनी विदेश नीति और रक्षा रणनीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर यानी करीब 8.3 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त फंडिंग मंजूर करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि यह रकम ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य अभियानों, सेना की तैयारियों और हथियारों के भंडार को दोबारा मजबूत करने के लिए जरूरी है। हालांकि संसद में इस प्रस्ताव को लेकर विरोध बढ़ता दिखाई दे रहा है और कई सांसद इसे सैन्य खर्च बढ़ाने की दिशा में एक विवादित कदम मान रहे हैं। व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह अतिरिक्त फंडिंग पहले से स्वीकृत रक्षा बजट का हिस्सा नहीं है। पिछले साल अमेरिकी कांग्रेस करीब 1 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे चुकी थी, जबकि अगले वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर की नई मांग पहले से ही रखी जा चुकी है। इसके बावजूद ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि ईरान के साथ बढ़े तनाव और सैन्य अभियानों के कारण अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पैदा हुई है। अधिकारियों के अनुसार इस राशि का इस्तेमाल सैन्य ऑपरेशनों की लागत पूरी करने, आधुनिक हथियारों की खरीद, गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरने और कुछ गोपनीय रक्षा कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। ईरान और उसके समर्थक समूहों के साथ तनाव के बीच अमेरिका ने कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। इन अभियानों में बड़ी मात्रा में मिसाइलों, रक्षा प्रणालियों और अन्य सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल हुआ है। प्रशासन का तर्क है कि यदि समय रहते अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं कराया गया तो सेना की परिचालन क्षमता और भविष्य की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। रक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सैन्य भंडार अपेक्षा से अधिक तेजी से खर्च हुए हैं, जिनकी भरपाई जरूरी है। हालांकि संसद में इस मांग को लेकर माहौल पूरी तरह सरकार के पक्ष में नहीं दिख रहा। मंगलवार को अमेरिकी सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर ट्रम्प प्रशासन से ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई रोकने का आग्रह किया। इससे पहले प्रतिनिधि सभा यानी लोअर हाउस भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना स्पष्ट संसदीय मंजूरी के किसी बड़े सैन्य संघर्ष में अमेरिका की भागीदारी न बढ़े। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला सिर्फ रक्षा बजट तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रपति और संसद के बीच अधिकारों की बहस भी इससे जुड़ी हुई है। अमेरिका में युद्ध और सैन्य कार्रवाई से जुड़े फैसलों पर लंबे समय से विवाद रहा है। कई सांसदों का तर्क है कि बड़े सैन्य अभियानों से पहले कांग्रेस की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर ट्रम्प समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में राष्ट्रपति को तेजी से फैसले लेने की जरूरत होती है और ऐसे समय में राजनीतिक मतभेदों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। आर्थिक दृष्टि से भी यह प्रस्ताव चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका पहले से ही बड़े बजट घाटे और बढ़ते सरकारी कर्ज की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में अतिरिक्त 87.6 अरब डॉलर की मांग को लेकर वित्तीय विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं। रक्षा खर्च लगातार बढ़ने से अन्य घरेलू योजनाओं पर दबाव पड़ सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर खर्च को कम नहीं किया जा सकता और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सेना को पर्याप्त संसाधन देना जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:42:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान समझौते के संकेत तेज, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी सहमति की चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा- समझौता पहले से ज्यादा करीब, वहीं इजराइल पर बातचीत पटरी से उतारने की कोशिश का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/signs-of-us-iran-agreement-intensify-discussion-of-consensus-on-strait/article-55824"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी के बीच एक संभावित समझौते को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि दोनों देशों के बीच एक प्रस्तावित समझौता पहले की तुलना में कहीं अधिक करीब पहुंच गया है। हालांकि उन्होंने मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों से अपील की है कि अंतिम रूप दिए जाने से पहले समझौते की शर्तों को लेकर अटकलें लगाने से बचें। अराघची का कहना है कि जब भी किसी दस्तावेज पर अंतिम सहमति बनेगी, तब उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उनके बयान ने ऐसे समय में ध्यान खींचा है जब मध्य पूर्व पहले से ही युद्ध, समुद्री सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी मीडिया में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जिस प्रारूप समझौते पर चर्चा चल रही है, उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन व्यवस्था, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की बातचीत का ढांचा शामिल बताया जा रहा है। हालांकि ईरान ने साफ किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए इस जलमार्ग से जुड़ी किसी भी खबर का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक राजनीति दोनों पर पड़ता है। अराघची ने अपने बयान में इजराइल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही हैं। उनका इशारा स्पष्ट रूप से इजराइल की ओर माना जा रहा है। ईरान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि इजराइल क्षेत्रीय तनाव को बनाए रखना चाहता है और किसी भी ऐसे समझौते का विरोध करता है जिससे तेहरान और वाशिंगटन के संबंधों में सुधार हो सकता हो। दूसरी तरफ इजराइल का कहना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है तथा उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बयान दिया है कि वह और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के मुद्दे पर पूरी तरह एकमत हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से संभावित समझौते के संकेत दिए जा रहे हैं। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक बातचीत के समानांतर सुरक्षा और रणनीतिक चिंताएं भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई समझौता होता भी है तो उसमें परमाणु गतिविधियों पर निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े सख्त प्रावधान शामिल हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले किए हैं। उनके अनुसार ओमान तट के पास इस सप्ताह तीन जहाज हमले की चपेट में आए थे। इनमें से एक घटना में भारतीय चालक दल के तीन नाविकों की मौत हो गई। इस आरोप के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। हालांकि ईरान की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े देशों की नजर अब इस पूरे मामले पर टिकी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका और ईरान के बीच अगले 60 दिनों तक परमाणु समझौते को लेकर गहन बातचीत की जा सकती है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यह मसौदा केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं है बल्कि क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने और कई मोर्चों पर तनाव घटाने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने का प्रयास है। लेबनान सहित कई क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों को भी इस बातचीत से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि अमेरिका और ईरान किसी साझा समझ पर पहुंचते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है। वहीं यदि बातचीत किसी कारण से विफल होती है तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी। फिलहाल दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, लेकिन लगातार आ रहे बयानों से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण स्तर की बातचीत जारी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित समझौता वास्तव में अंतिम रूप ले पाता है या नहीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:11:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की कार्रवाई से क्षेत्र में हालात और गंभीर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-retaliatory-attack-on-american-bases-increases-tension-in-the/article-55550"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने बुधवार को बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। ईरान की ओर से दावा किया गया कि अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कुल 21 हमले किए गए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि ईरान नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। फिर भी इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब मध्य पूर्व की बदलती स्थिति पर टिक गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। ईरानी पक्ष का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास उसके कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल थे। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार उसके सैन्य ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और ताजा हमला उसी रणनीति का हिस्सा था। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत उस घटना के बाद और बढ़ गई जब होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना का एक एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर समुद्र में गिर गया था। घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए थे। ट्रम्प ने कहा था कि हेलिकॉप्टर को ईरान समर्थित ताकतों ने निशाना बनाया और अमेरिका इस कार्रवाई का जवाब जरूर देगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि ईरान ने हेलिकॉप्टर गिराने में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है और इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका ने हेलिकॉप्टर हादसे के कुछ समय बाद ही जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना का कहना था कि इन हमलों का उद्देश्य संभावित खतरों को समाप्त करना और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती चली गई। अब ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों पर हमला किए जाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अमेरिकी राजनीति में भी ईरान मुद्दा प्रमुख बन गया है। हाल ही में आयोजित एक रिपब्लिकन रैली में ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर अमेरिका "पूरी जीत" की घोषणा कर सकता है। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि क्षेत्र में स्थिरता लौटने के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी और तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर इजराइल ने भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया हुआ है। इजराइली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने हाल ही में कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ और बड़े सैन्य अभियान चलाने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि हालिया सैन्य कार्रवाई केवल शुरुआत थी और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्रीय शक्तियां भी इस संघर्ष पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान अमेरिका और इजराइल के रिश्तों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल की रणनीतियों में कुछ मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार ट्रम्प ने इजराइली नेतृत्व को संघर्ष को और अधिक न बढ़ाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव नियंत्रण से बाहर हुआ तो इसके व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।  बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:28:52 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प ने शेयर किया AI वीडियो, भारत में बाइक और शेर की सवारी करते दिखे</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए गए वीडियो में डोनाल्ड ट्रम्प के कई अनोखे अवतार नजर आए, सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-shared-ai-video-in-which-he-was-seen-riding/article-55212"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-ai-video.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह एक AI-जनरेटेड वीडियो है, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शेयर किया है। करीब एक मिनट लंबे इस वीडियो में ट्रम्प को अलग-अलग देशों और परिस्थितियों में दिखाया गया है। कहीं वह भारत की सड़कों पर बाइक चलाते नजर आते हैं तो कहीं शेर की सवारी करते दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे मनोरंजक और रचनात्मक बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे राजनीतिक प्रचार का नया तरीका मान रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो में ट्रम्प को कई काल्पनिक और असाधारण दृश्यों में दिखाया गया है। एक दृश्य में वह रेगिस्तान में ऊंट पर बैठे दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे दृश्य में पैराग्लाइडिंग करते नजर आते हैं। वीडियो में उन्हें अंतरिक्ष यात्री की तरह स्पेससूट पहनकर चांद पर अमेरिकी झंडा लगाते हुए भी दिखाया गया है। इसके अलावा ट्रम्प का चेहरा पिज्जा, बस, विशाल होर्डिंग, माउंट रशमोर और नॉर्दर्न लाइट्स जैसी जगहों पर भी दिखाई देता है। पूरा वीडियो इस तरह तैयार किया गया है कि ट्रम्प को दुनिया भर में लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में पेश किया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो के बैकग्राउंड में एक गाना भी चलता है, जिसमें लगातार ट्रम्प की लोकप्रियता का जिक्र किया गया है। गीत के बोलों में दावा किया गया है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के लोग ट्रम्प को पसंद करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। वीडियो में मेक्सिको, चीन, मिडिल ईस्ट और भारत का नाम भी लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में एक मिनट के भीतर ट्रम्प का नाम दर्जनों बार दोहराया जाता है, जिससे यह पूरी तरह उनके व्यक्तित्व और लोकप्रियता को केंद्र में रखकर तैयार किया गया कंटेंट नजर आता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह वीडियो ट्रुथ सोशल पर एक यूजर द्वारा तैयार किया गया था। बाद में ट्रम्प ने इसे अपनी आधिकारिक प्रोफाइल से शेयर किया। वीडियो के अंत में न्यूयॉर्क के रिपब्लिकन नेता और ट्रम्प समर्थक एंथनी कॉन्स्टैंटिनो को इसका श्रेय दिया गया है। ट्रम्प द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद कॉन्स्टैंटिनो ने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया। उनका कहना था कि राष्ट्रपति द्वारा उनके बनाए कंटेंट को साझा करना उनके लिए गर्व का विषय है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे मजेदार और मनोरंजक बताया। कुछ लोगों ने कहा कि वीडियो में ट्रम्प किसी हॉलीवुड फिल्म या कॉमिक बुक के सुपरहीरो की तरह दिखाई दे रहे हैं। वहीं आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक नेताओं द्वारा इस तरह के AI कंटेंट का इस्तेमाल जनता को प्रभावित करने की कोशिश नहीं है। कुछ यूजर्स का कहना था कि जब AI तकनीक इतनी तेजी से विकसित हो रही है, तब वास्तविकता और काल्पनिक प्रस्तुति के बीच फर्क करना आम लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने AI से तैयार कंटेंट साझा किया हो। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए हैं, जिनमें उन्हें अलग-अलग रूपों में दिखाया गया। कुछ समय पहले उन्होंने खुद को जेम्स बॉन्ड के अंदाज में पेश करते हुए एक तस्वीर शेयर की थी। इसके अलावा उन्होंने एक अन्य पोस्ट में खुद को दुनिया का सबसे बड़ा आकर्षण बताया था। इन पोस्टों को भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा मिली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अप्रैल में ट्रम्प द्वारा साझा की गई एक AI-जनरेटेड तस्वीर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उस तस्वीर में उन्हें यीशु मसीह जैसे रूप में दिखाया गया था। तस्वीर सामने आने के बाद कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा ली गई, लेकिन ट्रम्प ने इसके लिए माफी नहीं मांगी। बाद में उन्होंने कहा था कि उन्हें लगा था कि तस्वीर में वह किसी डॉक्टर की तरह दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान भी ट्रम्प ने AI तकनीक से बनी कई तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य शक्ति को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया था, जबकि ईरानी सेना को कमजोर और नुकसान झेलती हुई दिखाया गया था। हालांकि इन तस्वीरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी और इन्हें केवल AI आधारित विजुअल कंटेंट माना गया। इसके बावजूद तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रम्प AI तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं कर रहे हैं।  सोशल मीडिया के दौर में वायरल वीडियो और AI विजुअल्स नेताओं को लगातार चर्चा में बनाए रखने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे "डिजिटल पर्सनैलिटी कल्ट" बनाने की कोशिश बताते हैं, जहां किसी नेता को असाधारण, सर्वशक्तिमान या लगभग काल्पनिक नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस तरह के कंटेंट से गलतफहमियां भी पैदा हो सकती हैं। उनका तर्क है कि AI तकनीक के जरिए तैयार की गई तस्वीरें और वीडियो लोगों के लिए सच और कल्पना के बीच की दूरी को कम कर देती हैं। इससे भ्रम फैलने और गलत नैरेटिव बनने का खतरा बढ़ जाता है। बावजूद इसके, ट्रम्प लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>80 की उम्र के करीब भी फिट दिखे ट्रम्प, मेडिकल रिपोर्ट में सेहत को बताया बेहतरीन</title>
                                    <description><![CDATA[मानसिक क्षमता परीक्षण में मिले पूरे अंक, विशेषज्ञों ने राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह सक्षम बताया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-looked-fit-even-at-the-age-of-80-medical/article-54614"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/donald-trump-health-report.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले महीने 14 जून को 80 वर्ष के हो जाएंगे, लेकिन उनकी हालिया मेडिकल रिपोर्ट ने एक बार फिर उनकी सेहत को लेकर चर्चा तेज कर दी है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी तीन पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट में ट्रम्प को शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति की कार्यक्षमता, मानसिक सजगता और शारीरिक स्थिति उनकी उम्र के हिसाब से काफी बेहतर है। यही वजह है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही अमेरिका के राजनीतिक और मीडिया हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">ट्रम्प का स्वास्थ्य परीक्षण वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में कराया गया था। यह वही संस्थान है जहां अमेरिका के राष्ट्रपतियों और वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष चिकित्सा जांच होती है। इस बार उनकी जांच में विभिन्न क्षेत्रों के 22 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल रहे। मेडिकल टीम ने कई तरह के परीक्षण किए, जिनमें दिल, फेफड़ों, मस्तिष्क और शरीर की अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों का मूल्यांकन शामिल था। इसके अलावा कई प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग और इमेजिंग टेस्ट भी किए गए ताकि स्वास्थ्य की समग्र स्थिति का आकलन किया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा ट्रम्प की मानसिक क्षमता से जुड़ा परीक्षण रहा। उनकी कॉग्निटिव क्षमता जांचने के लिए मॉन्ट्रियल कॉग्निटिव असेसमेंट यानी एमओसीए टेस्ट कराया गया। यह एक मानक परीक्षण माना जाता है, जिसका उपयोग डिमेंशिया, अल्जाइमर और अन्य मानसिक विकारों के शुरुआती संकेतों की पहचान के लिए किया जाता है। ट्रम्प ने इस परीक्षण में 30 में से पूरे 30 अंक हासिल किए। मेडिकल टीम के अनुसार यह परिणाम दर्शाता है कि उनकी याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता, ध्यान केंद्रित करने की शक्ति और मानसिक सक्रियता उत्कृष्ट स्तर पर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">व्हाइट हाउस के चिकित्सक शॉन पी. बारबाबेला ने रिपोर्ट में कहा है कि ट्रम्प राष्ट्रपति के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। उनके अनुसार राष्ट्रपति का दिल, फेफड़े और तंत्रिका तंत्र अच्छी स्थिति में हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रम्प की तथाकथित “कार्डियक एज” यानी दिल की जैविक उम्र उनकी वास्तविक उम्र से लगभग 14 वर्ष कम आंकी गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत देता है कि हृदय की कार्यक्षमता उम्र के सामान्य मानकों से बेहतर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि रिपोर्ट में कुछ ऐसे बिंदु भी हैं जिन पर डॉक्टरों ने ध्यान देने की सलाह दी है। ट्रम्प का वर्तमान वजन लगभग 108 किलोग्राम बताया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में उनका वजन करीब 6 किलोग्राम बढ़ा है। डॉक्टरों ने माना कि यह वजन स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय बन सकता है यदि इसे नियंत्रित न किया जाए। इसी वजह से उन्हें वजन कम करने, संतुलित भोजन लेने और नियमित शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि उन्हें हृदय स्वास्थ्य और वजन नियंत्रण को लेकर विशेष परामर्श भी दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मेडिकल दस्तावेजों के अनुसार ट्रम्प वर्तमान में कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ दवाओं का सेवन कर रहे हैं। इनमें कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण के लिए निर्धारित दवाएं शामिल हैं, जबकि कम मात्रा में एस्पिरिन भी दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह उपचार उनकी उम्र और स्वास्थ्य प्रोफाइल को ध्यान में रखकर दिया जा रहा है। रिपोर्ट में किसी गंभीर बीमारी या तत्काल स्वास्थ्य जोखिम का उल्लेख नहीं किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले कुछ समय से ट्रम्प के हाथों और गर्दन पर दिखाई देने वाले निशानों को लेकर भी सार्वजनिक चर्चा होती रही है। सोशल मीडिया और राजनीतिक विरोधियों ने कई बार इन निशानों को लेकर सवाल उठाए थे। मेडिकल रिपोर्ट में इस विषय का भी उल्लेख किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार एस्पिरिन जैसी दवाओं का नियमित उपयोग करने वाले लोगों में त्वचा पर हल्के नीले निशान या चोट जैसे चिह्न दिखाई देना सामान्य बात है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह कोई गंभीर चिकित्सकीय समस्या नहीं है और इससे स्वास्थ्य पर कोई बड़ा खतरा नहीं माना जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ट्रम्प के पैरों के निचले हिस्से में पहले हल्की सूजन देखी गई थी, लेकिन अब उसकी स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है। हालांकि इसके बारे में अधिक चिकित्सकीय विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। विशेषज्ञों ने केवल इतना कहा कि उनकी नियमित निगरानी की जा रही है और वर्तमान स्थिति संतोषजनक है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ट्रम्प की सेहत हमेशा से राजनीतिक चर्चा का विषय रही है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर अमेरिका में विशेष रुचि रहती है। ट्रम्प देश के इतिहास में सबसे अधिक उम्र के राष्ट्रपति माने जाते हैं। ऐसे में उनकी मेडिकल रिपोर्ट को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थक इस रिपोर्ट को उनकी सक्रियता और क्षमता का प्रमाण बता रहे हैं, जबकि आलोचक पहले की तरह स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों में अधिक पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं। जारी मेडिकल रिपोर्ट में ट्रम्प की समग्र स्वास्थ्य स्थिति को मजबूत और स्थिर बताया गया है। रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि वे मानसिक और शारीरिक रूप से सक्रिय हैं तथा राष्ट्रपति के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:05:00 +0530</pubDate>
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                <title>अक्षरधाम मंदिर पहुंचीं टिफनी ट्रंप, भारतीय संस्कृति और विरासत से हुईं प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी ने पति माइकल बूलोस के साथ किया दिल्ली दौरा, अक्षरधाम मंदिर को बताया अद्भुत अनुभव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a1a8a2c8d00e/article-54552"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/tiffany-trump-india-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली में इन दिनों एक खास अंतरराष्ट्रीय मेहमान की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप अपने पति माइकल बूलोस के साथ भारत दौरे पर हैं। इस निजी यात्रा के दौरान उन्होंने राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दर्शन किया। मंदिर परिसर की भव्यता, वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें काफी प्रभावित किया। टिफनी ट्रंप ने इस अनुभव को बेहद खास बताते हुए भारतीय संस्कृति और विरासत की खुलकर सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार टिफनी ट्रंप अपने कुछ करीबी मित्रों के साथ अक्षरधाम मंदिर पहुंचीं। मंदिर परिसर में उन्होंने विभिन्न स्थलों का भ्रमण किया और यहां की कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को करीब से देखा। अक्षरधाम मंदिर की ओर से भी उनकी यात्रा की जानकारी साझा की गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिफनी ट्रंप ने अपनी यात्रा से जुड़े कुछ अनुभव साझा करते हुए लिखा कि यह उनके लिए एक अविश्वसनीय और यादगार अनुभव रहा। उन्होंने मंदिर की सुंदरता और वहां के शांत वातावरण की प्रशंसा की।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और शिल्पकला का एक प्रमुख प्रतीक माना जाता है। हर साल लाखों देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। मंदिर की नक्काशी, विशाल परिसर और सांस्कृतिक प्रदर्शनी लोगों को आकर्षित करती है। ऐसे में टिफनी ट्रंप का यहां पहुंचना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। उनके दौरे के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे, हालांकि यात्रा को निजी रखा गया और किसी तरह का औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम इसमें शामिल नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि टिफनी ट्रंप भारत की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से देखने की इच्छा रखती थीं। इसी वजह से उनके कार्यक्रम में देश के कुछ प्रमुख पर्यटन और विरासत स्थलों को शामिल किया गया है। अक्षरधाम मंदिर का दौरा उनकी इस यात्रा का पहला बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। मंदिर के दर्शन के बाद उन्होंने वहां मौजूद व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुति की भी सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए अक्षरधाम मंदिर लंबे समय से एक प्रमुख आकर्षण रहा है। दुनिया के कई बड़े नेता, राजनयिक और प्रसिद्ध हस्तियां यहां का दौरा कर चुकी हैं। टिफनी ट्रंप की यात्रा भी इसी कड़ी में देखी जा रही है। मंदिर परिसर में उन्होंने काफी समय बिताया और भारतीय परंपराओं तथा आध्यात्मिक मूल्यों के बारे में जानकारी हासिल की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मंदिर की स्थापत्य कला को बेहद प्रभावशाली बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली प्रवास के बाद टिफनी ट्रंप और माइकल बूलोस के कार्यक्रम में आगरा का दौरा भी शामिल है। वे चार्टर्ड विमान से आगरा पहुंचेंगे, जहां विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का भ्रमण करेंगे। बताया जा रहा है कि वे ताजमहल परिसर में करीब डेढ़ घंटे तक रुकेंगे और इस ऐतिहासिक स्मारक को करीब से देखेंगे। ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में शामिल है और हर साल लाखों विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। ऐसे में टिफनी ट्रंप की यात्रा का यह हिस्सा भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आगरा के बाद उनका अगला पड़ाव राजस्थान का जैसलमेर होगा। जैसलमेर अपने सुनहरे किले, ऐतिहासिक हवेलियों और रेगिस्तानी पर्यटन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान वे राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव भी लेंगी। हालांकि उनके पूरे कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">टिफनी ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत वैश्विक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के क्षेत्र में लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। विदेशी हस्तियों द्वारा भारतीय विरासत स्थलों का दौरा देश की सांस्कृतिक छवि को और मजबूत करता है। अक्षरधाम मंदिर, ताजमहल और जैसलमेर जैसे स्थान भारत की विविधता और समृद्ध इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:34 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए के फंड का प्रस्ताव, परमाणु समझौते पर नए दावे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम समझौते की चर्चा तेज, ट्रम्प ने परमाणु कार्यक्रम पर सहमति का दावा किया, तेहरान ने किया खंडन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/fund-proposal-of-rs-28-lakh-crore-to-iran-new/article-54559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-reconstruction-fund.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक पहल की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच प्रस्तावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते में ईरान को 300 अरब डॉलर यानी करीब 28.5 लाख करोड़ रुपए के पुनर्निर्माण फंड का प्रस्ताव दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस आर्थिक पैकेज के तहत अमेरिकी कंपनियों को भी ईरान में निवेश की अनुमति मिल सकती है। हालांकि समझौते को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आई जानकारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव उस व्यापक समझौते का हिस्सा माना जा रहा है, जिस पर पिछले कुछ समय से विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। एक ईरानी अधिकारी ने इसे रीकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम बताते हुए कहा कि यदि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं तो ईरान को आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए बड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। वर्षों से प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और सैन्य टकरावों का सामना कर रहे ईरान के लिए यह फंड बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं। ट्रम्प के अनुसार संभावित समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और उसके संवर्धित यूरेनियम को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौता सफल होता है तो अमेरिका कुछ आर्थिक और समुद्री प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि ट्रम्प के इन दावों को ईरान ने तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने स्पष्ट कहा कि परमाणु मुद्दे पर इस समय किसी तरह की बातचीत नहीं चल रही है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जो बातें सामने आ रही हैं, वे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। इसके अलावा ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी सूत्रों के हवाले से बताया कि समझौते के किसी मसौदे में परमाणु सामग्री को नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह विरोधाभास दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक बयानों और बंद कमरे में चल रही वार्ताओं के बीच अंतर होना असामान्य नहीं है। अक्सर ऐसे संवेदनशील समझौतों में अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग संदेश देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रम्प ने कहा कि संभावित समझौते के बाद इस क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जा सकती है और जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त टोल नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान की किसी टोल व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका के प्रति अविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि तेहरान केवल बयानों पर नहीं बल्कि वास्तविक कार्रवाई पर भरोसा करता है। उनके अनुसार जब तक अमेरिका अपने व्यवहार में ठोस बदलाव नहीं दिखाता, तब तक ईरान भी किसी प्रकार की रियायत देने के पक्ष में नहीं है। यह बयान दोनों देशों के बीच मौजूद गहरे अविश्वास को दर्शाता है, जो वर्षों से विभिन्न विवादों के कारण बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में 24 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई। ईरान का कहना है कि समुद्री यातायात को नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा रहा है। हालांकि पश्चिमी देशों की ओर से लगातार इस क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>क्षेत्रीय हालात को और जटिल बनाते हुए इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में नई चेतावनी जारी की है। इजराइली सेना का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ संभावित अभियान की तैयारी कर रही है और नागरिकों को सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/fund-proposal-of-rs-28-lakh-crore-to-iran-new/article-54559</link>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प का दावा—ईरान यूरेनियम सौंपने को तैयार, मिडिल ईस्ट में सीजफायर की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान बातचीत तेज, इजराइल-लेबनान में 10 दिन का युद्धविराम लागू; वैश्विक तनाव के बीच कूटनीतिक हल की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-iran-ready-to-hand-over-uranium-steps/article-51409"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/donaldtrump-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता अब बेहद करीब है और बातचीत “बहुत सफल” चल रही है।</p>
<p>ट्रम्प के मुताबिक, यदि यह समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर यह डील इस्लामाबाद में साइन होती है, तो वे पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि ईरान की सरकारी मीडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे “हवाई किले” बताया है।</p>
<h5><strong>इजराइल-लेबनान में सीजफायर लागू</strong></h5>
<p>इस बीच, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Israel</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Lebanon</span></span> के बीच 10 दिन का युद्धविराम लागू हो गया है। यह सीजफायर भारतीय समयानुसार देर रात 3:30 बजे से प्रभावी हुआ। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह सहमति लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के बाद बनी।</p>
<p>हालांकि, युद्धविराम के कुछ ही समय बाद दक्षिणी लेबनान में गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही।</p>
<h5><strong>परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ता दबाव</strong></h5>
<p>ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास 5-6 टन तक एनरिच्ड यूरेनियम है, जिसमें से करीब 120-130 किलोग्राम 60% तक शुद्ध किया जा चुका है। यदि यह स्तर 90% तक पहुंचता है, तो इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।</p>
<p>इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहे हैं। ट्रम्प का ताजा बयान इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>सैन्य गतिविधियां और वैश्विक चिंता</strong></h5>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि मिडिल ईस्ट में उसकी सेना हाई अलर्ट पर है। क्षेत्र में 12 युद्धपोत, 100 से अधिक विमान और हजारों सैनिक तैनात किए गए हैं। वहीं G-7 देशों ने भी इस संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है और शांति प्रक्रिया को तेज करने की अपील की है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो यह मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा। हालांकि जमीनी हालात और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि स्थायी शांति की राह अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 09:58:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प ने खुद को वेनेजुएला का ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति’ बताया, सोशल मीडिया पोस्ट से मचा वैश्विक सियासी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रुथ सोशल पर जनवरी 2026 से पद संभालने का दावा, व्हाइट हाउस की चुप्पी; लैटिन अमेरिका में बढ़ी चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-calls-himself-acting-president-of-venezuela-social-media-post/article-42860"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/business-(89).jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज एक असाधारण और विवादास्पद दावा करते हुए खुद को वेनेजुएला का “कार्यवाहक राष्ट्रपति” बताया। ट्रम्प ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा एक पोस्ट के जरिए दिया, जिसमें उनकी तस्वीर के साथ “Acting President of Venezuela” लिखा हुआ था। पोस्ट में जनवरी 2026 से पद संभालने का उल्लेख किया गया है। इस दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।</p>
<p>पोस्ट में ट्रम्प ने खुद को अमेरिका का 45वां और 47वां राष्ट्रपति भी बताया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक न तो व्हाइट हाउस और न ही अमेरिकी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या स्पष्टीकरण सामने आया है। प्रशासन की चुप्पी ने इस बयान को लेकर अटकलों को और बढ़ा दिया है।</p>
<p><strong>वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम</strong><br />यह बयान ऐसे समय आया है, जब 3 जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर सैन्य और प्रशासनिक कार्रवाई की थी। उस ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क लाया गया था। इसके बाद वेनेजुएला में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल गया।</p>
<p>मादुरो के हटने के बाद वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई थी। इसके बावजूद ट्रम्प का खुद को “कार्यवाहक राष्ट्रपति” घोषित करना अमेरिकी नीति में एक नए और आक्रामक रुख की ओर इशारा कर रहा है।</p>
<p><strong>अमेरिका की भूमिका और तेल समझौते का संकेत</strong><br />ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि वेनेजुएला का प्रशासन अमेरिका के नियंत्रण में रहेगा, जब तक वहां “सुरक्षित सत्ता परिवर्तन” नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतरिम सरकार अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल उच्च गुणवत्ता वाला, प्रतिबंधित तेल सौंपेगी, जिसे बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा।</p>
<p>ट्रम्प के अनुसार, इस तेल बिक्री से मिलने वाली राशि उनके नियंत्रण में रहेगी और इसका उपयोग अमेरिका और वेनेजुएला—दोनों देशों के लोगों के हित में किया जाएगा। उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट को इस योजना को तुरंत लागू करने के निर्देश देने की बात भी कही।</p>
<p><strong>तेल कंपनियों के साथ बैठक और निवेश संकेत</strong><br />9 जनवरी को ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स जैसी प्रमुख अमेरिकी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की थी। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि वेनेजुएला में किन कंपनियों को निवेश की अनुमति मिलेगी, इसका फैसला अमेरिका करेगा। शेवरॉन के वाइस चेयरमैन मार्क नेल्सन ने कहा कि उनकी कंपनी वेनेजुएला में निवेश के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p><strong>क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और चिंता</strong><br />वेनेजुएला के गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि 3 जनवरी की कार्रवाई में करीब 100 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी। वहीं, लैटिन अमेरिका के कई देशों में इस घटनाक्रम को लेकर चिंता जताई जा रही है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान न सिर्फ वेनेजुएला, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा सकता है।</p>
<p>फिलहाल, ट्रम्प के दावे की कानूनी और कूटनीतिक वैधता पर सवाल बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस पर है कि अमेरिकी प्रशासन इस बयान को औपचारिक नीति के रूप में अपनाता है या इसे सिर्फ एक राजनीतिक संदेश मानकर छोड़ दिया जाता है।</p>
<p>------------------------------</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 16:28:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान में उबाल, अमेरिका सख्त: ट्रम्प ने ‘रेड लाइन’ चेताई, हिंसा में सैकड़ों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में उबाल, अमेरिका सख्त: ट्रम्प ने ‘रेड लाइन’ चेताई, हिंसा में सैकड़ों की मौत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/69649fd3576ce/article-42824"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/desha-(84).jpg" alt=""></a><br /><p>ईरान में जारी सरकार‑विरोधी प्रदर्शनों ने अब अंतरराष्ट्रीय तनाव का रूप लेना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने के दौरान एक “रेड लाइन” के करीब पहुंच चुकी है। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है और उसके पास आगे बढ़ने के लिए कड़े विकल्प मौजूद हैं।</p>
<p>पिछले दो हफ्तों से ईरान के कई शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन घटनाओं में अब तक 544 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 10,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। राजधानी तेहरान में कई इलाकों में अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे रहे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया कि ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई है। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी कहा कि बढ़ती मौतों और गिरफ्तारियों के बीच अमेरिका को पहले कोई ठोस कदम उठाना पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी प्रशासन के भीतर ईरान को लेकर रणनीतिक विकल्पों पर चर्चा तेज है।</p>
<p>ईरान सरकार का रुख इससे बिल्कुल अलग है। तेहरान का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों को बाहरी ताकतें हवा दे रही हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर जानलेवा हमले किए, जबकि संसद नेतृत्व ने चेतावनी दी कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब दिया जाएगा।</p>
<p>ईरानी राष्ट्रपति ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार आम नागरिकों की शिकायतें सुनने को तैयार है, लेकिन हिंसा और अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया।</p>
<p>इस बीच, ईरान के बाहर भी हालात गरमाए हुए हैं। अमेरिका और यूरोप के कई शहरों में ईरानी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए। लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई, जबकि लॉस एंजिलिस में एक मार्च के दौरान तनाव की स्थिति बन गई।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में मौजूदा संकट केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरे आर्थिक असंतोष से जुड़ा है। रिकॉर्ड महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन, बेरोजगारी और प्रस्तावित कर बढ़ोतरी ने आम लोगों की नाराजगी को चरम पर पहुंचा दिया है। यही कारण है कि देश में सत्ता परिवर्तन और वैकल्पिक नेतृत्व की मांग तेज हो रही है।</p>
<p>वर्तमान हालात में अमेरिका‑ईरान संबंधों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। कूटनीति और टकराव के बीच खड़ा यह संकट न केवल मध्य‑पूर्व, बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।</p>
<p>------------------------------</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 13:43:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका 66 वैश्विक संगठनों से अलग, भारत की अगुआई वाला सोलर अलायंस भी छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत व्हाइट हाउस का ऐलान, WHO और UN से जुड़े कई मंचों से हटने का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-will-withdraw-from-66-international-organizations-including-31-agencies/article-42460"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/us-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका ने वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ लेते हुए 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय मंचों से बाहर निकलने का फैसला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में एक आधिकारिक मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिका अब संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी 31 एजेंसियों और 35 अन्य वैश्विक संस्थाओं का हिस्सा नहीं रहेगा। इस सूची में भारत की पहल पर गठित इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भी शामिल है।</p>
<p>व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन संगठनों की कार्यप्रणाली अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं है। प्रशासन का दावा है कि कई संस्थाएं अनावश्यक खर्च, वैचारिक एजेंडे और वैश्विक शासन को बढ़ावा दे रही थीं, जिससे अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक प्राथमिकताओं पर असर पड़ रहा था।</p>
<h5><strong>WHO से भी अलग होगा अमेरिका</strong></h5>
<p>इस फैसले के तहत अमेरिका 22 जनवरी 2026 के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का सदस्य नहीं रहेगा। ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले ही WHO से हटने की घोषणा कर दी थी, जिसके लिए आवश्यक एक वर्षीय नोटिस अवधि अब पूरी होने वाली है। अमेरिका लंबे समय से WHO पर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के आरोप लगाता रहा है।</p>
<h5><strong>जलवायु मंचों से किनारा</strong></h5>
<p>अमेरिका अब संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) और इससे जुड़े अन्य जलवायु संस्थानों से भी अलग हो रहा है। यह वही मंच है, जो पेरिस जलवायु समझौते का आधार माना जाता है। ट्रंप पहले भी इस समझौते को अमेरिकी उद्योग और रोजगार के खिलाफ बता चुके हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु संगठनों से अमेरिका की दूरी वैश्विक प्रयासों को कमजोर कर सकती है, क्योंकि अमेरिका दुनिया के प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों में शामिल है।</p>
<h5><strong>भारत के लिए क्यों अहम</strong></h5>
<p>भारत की अगुआई में 2015 में शुरू हुए इंटरनेशनल सोलर अलायंस को स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का अहम मंच माना जाता है। अमेरिका 2021 में इसका सदस्य बना था। अब उसका बाहर निकलना भारत के नेतृत्व वाली बहुपक्षीय पहल के लिए कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि ISA में 120 से अधिक देश अब भी सक्रिय हैं।</p>
<h5><strong> समर्थन और विरोध</strong></h5>
<p>पूर्व अमेरिकी जलवायु अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका वैश्विक नेतृत्व की भूमिका खो सकता है। वहीं ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी करदाताओं के हितों की रक्षा और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को मजबूत करने के लिए जरूरी है।</p>
<p>अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिए हैं कि अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की समीक्षा भी जारी रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आने वाले समय में अमेरिका के वैश्विक रिश्तों, भारत-अमेरिका सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय नीतिगत संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 14:25:06 +0530</pubDate>
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