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                <title>WhatsApp - दैनिक जागरण</title>
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                <description>WhatsApp RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रायगढ़ में प्रोफेसर पर छात्रा से अश्लील हरकत का आरोप, थप्पड़ मारने का VIDEO वायरल; शिकायत के बाद हुआ समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[युवती ने प्रोफेसर पर अश्लील संदेश और संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया, हंगामे के बाद मामला समझौते तक पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-video-of-professor-slapping-student-accused-of-obscene/article-57673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raigarh-human-trafficking1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत और समाज दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती ने शासकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लंबे समय से उसे अश्लील संदेश भेज रहा था और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। आरोपों से परेशान होकर युवती अपने मंगेतर के साथ प्रोफेसर के घर पहुंची, जहां दोनों के बीच विवाद हुआ और युवती ने गुस्से में प्रोफेसर को थप्पड़ मार दिए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर रेमन भार्गव लैलूंगा के शासकीय महाविद्यालय कुंजारा में पदस्थ हैं। युवती का कहना है कि वह प्रोफेसर की पड़ोसी है और पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। उसने आरोप लगाया कि प्रोफेसर व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अश्लील संदेश भेजता था और कई बार संबंध बनाने का दबाव भी डाल चुका था। कई बार समझाने और मना करने के बावजूद उसकी हरकतें बंद नहीं हुईं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती के मुताबिक उसकी जल्द ही शादी होने वाली है। ऐसे में वह लगातार मिल रही आपत्तिजनक गतिविधियों से बेहद परेशान थी। उसने बताया कि प्रोफेसर की हरकतों के कारण उसकी निजी जिंदगी और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही थीं। जब हालात असहनीय हो गए तो उसने परिवार और अपने मंगेतर को पूरी जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद युवती अपने मंगेतर के साथ आरोपी प्रोफेसर के घर पहुंची। वहां पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ने पर युवती ने प्रोफेसर का कॉलर पकड़ लिया और उसे थप्पड़ मार दिए। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वायरल वीडियो में युवती काफी नाराज दिखाई देती है। वह प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहती है कि उसकी शादी होने वाली है और वह उसकी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है। वीडियो में प्रोफेसर की पत्नी भी दिखाई देती हैं, जो विवाद शांत कराने और माफी मांगने की कोशिश करती नजर आती हैं। मौके पर मौजूद कुछ अन्य युवतियां भी दिखाई देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती ने आरोप लगाया कि वह अकेली पीड़ित नहीं है। उसके अनुसार प्रोफेसर ने पहले भी कई अन्य लड़कियों को परेशान किया है। उसने अपील की कि यदि कोई और युवती भी ऐसी प्रताड़ना का शिकार हुई है तो वह सामने आए और न्याय की लड़ाई में उसका साथ दे। युवती का कहना है कि यदि उसे उचित न्याय नहीं मिला तो वह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद युवती ने लैलूंगा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया। इसके चलते पुलिस ने आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव ने बताया कि युवती द्वारा शिकायत दी गई थी, लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया। समझौते के बाद शिकायतकर्ता ने आगे कार्रवाई नहीं चाही, इसलिए मामला वहीं समाप्त कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं शासकीय महाविद्यालय कुंजारा के प्राचार्य एमएल पटेल ने कहा कि यह घटना कॉलेज परिसर की नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों का निजी मामला है। उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रशासन को पहले इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली थी। यदि संस्थान को आधिकारिक शिकायत मिलती तो नियमानुसार उच्च अधिकारियों को जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई की जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग युवती के साहस की सराहना कर रहे हैं, जबकि कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो कानूनी कार्रवाई तक मामला क्यों नहीं पहुंचा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।  किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, अश्लील संदेश या मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इस तरह की हरकतें करता है तो पीड़ित को कानूनी सहायता लेने और संबंधित अधिकारियों को समय रहते सूचना देने की जरूरत होती है। वहीं आरोपित व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार की सख्ती, मेटा को नोटिस जारी कर तीन दिन में मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने मेटा से तीन दिन में जवाब मांगा, ऑनलाइन ठगी और फर्जी पहचान के खतरे के चलते फीचर पर रोक।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/governments-strictness-on-username-feature-of-whatsapp-issued-notice-to/article-57609"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/whatsapp-username-feature.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में डिजिटल सुरक्षा को लेकर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के प्रस्तावित ‘यूजरनेम’ फीचर पर केंद्र सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है और इसकी मूल कंपनी मेटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सरकार का कहना है कि यदि यह फीचर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लॉन्च किया गया तो देश में ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान से जुड़े साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से मेटा से तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा गया है। जब तक सरकार उसके जवाब से संतुष्ट नहीं होती, तब तक इस फीचर को भारत में शुरू करने की अनुमति नहीं मिलेगी। सरकार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग सुविधा साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। अभी तक WhatsApp पर किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका मोबाइल नंबर जरूरी होता है, जिससे पहचान का एक आधार मौजूद रहता है। लेकिन यदि केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क करने की सुविधा मिलती है तो अपराधियों के लिए अपनी असली पहचान छिपाना आसान हो जाएगा। इससे लोगों को फर्जी पहचान के जरिए निशाना बनाने का खतरा काफी बढ़ सकता है। नोटिस में सरकार ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि जब कंपनी को पहले से इस बात की जानकारी है कि इस फीचर का दुरुपयोग ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों में किया जा सकता है, तब भी इसे लॉन्च करने की तैयारी क्यों की जा रही है। सरकार ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि इस फीचर से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन होता है तो मेटा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। कंपनी को इन सभी बिंदुओं पर लिखित और विस्तृत जवाब देना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की सबसे बड़ी चिंता डिजिटल अरेस्ट जैसे तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अपराधियों ने खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या बैंक अधिकारी बताकर लोगों को फोन या वीडियो कॉल के जरिए डराया और लाखों रुपये की ठगी की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूजरनेम के जरिए आसानी से लोगों तक पहुंच बनाई जा सकेगी तो इस तरह के अपराधों को अंजाम देना और आसान हो सकता है। फर्जी पहचान भी सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण है। यूजरनेम फीचर आने के बाद कोई भी व्यक्ति किसी प्रसिद्ध कंपनी, सरकारी संस्था या लोकप्रिय व्यक्ति के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकता है। आम उपयोगकर्ता के लिए असली और नकली अकाउंट की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मजबूत सत्यापन प्रणाली नहीं बनाई गई तो इसका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो सकता है।हाल के वर्षों में भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फिशिंग लिंक, नकली निवेश योजनाएं, बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी ठगी और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराध पहले से ही बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में सरकार किसी भी ऐसे फीचर को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना चाहती है, जिससे अपराधियों को नया माध्यम मिल सके। यही वजह है कि यूजरनेम फीचर को लेकर पहले सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने का फैसला लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूजरनेम फीचर कई मामलों में उपयोगी साबित हो सकता है। इससे उपयोगकर्ताओं को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना दूसरे लोगों से संपर्क करने की सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रह सकती है। कई अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पहले से ही यूजरनेम आधारित प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फीचर को लागू करने से पहले मजबूत पहचान सत्यापन, रिपोर्टिंग सिस्टम और सुरक्षा नियंत्रण बेहद जरूरी हैं। WhatsApp की ओर से फिलहाल इस नोटिस पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि कंपनी सरकार के सवालों का जवाब तैयार कर रही है और सुरक्षा उपायों से जुड़े अपने प्रस्ताव भी पेश कर सकती है। यदि कंपनी सरकार को संतुष्ट करने में सफल रहती है तो भविष्य में कुछ अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधानों के साथ इस फीचर को मंजूरी मिल सकती है। फिलहाल इसकी लॉन्चिंग पर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार लगातार सख्त रुख अपनाती रही है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कई नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और साइबर अपराधों पर नियंत्रण रखना है। सरकार का मानना है कि नई तकनीकों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यदि उनसे आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका हो तो पहले आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करना जरूरी है। आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सरकार के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। एक ओर नई तकनीक उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधाएं देती है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधी भी नई तकनीकों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी नए फीचर को लागू करने से पहले सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक माना जा रहा है। अब सभी की नजर मेटा के जवाब और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है, जिससे तय होगा कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर भारत में कब और किन शर्तों के साथ उपलब्ध हो सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 11:26:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वॉट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार की नजर, साइबर फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल नंबर छिपाकर चैट की सुविधा पर केंद्र सतर्क, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-eyes-investigation-on-whatsapp-username-feature-amid-fear-of/article-57554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-khanna-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में करोड़ों लोग रोजमर्रा की बातचीत के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल करते हैं और अब इस लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नया यूजरनेम फीचर लॉन्च होने से पहले ही चर्चा में आ गया है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए फीचर की विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार की चिंता यह है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत कर सकेंगे, तो इसका गलत इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। विशेष रूप से साइबर अपराध, फर्जी पहचान बनाकर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने हाल ही में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसके जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। इस सुविधा में हर यूजर अपना एक अलग और यूनिक यूजरनेम बना सकेगा। भविष्य में कोई नया व्यक्ति मोबाइल नंबर की बजाय इसी यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स की निजता को पहले से अधिक मजबूत बनाना है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क में यदि फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इसी कारण सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों, पहचान सत्यापन प्रक्रिया और फर्जी खातों को रोकने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई डिजिटल सुविधा को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका उपयोग सुरक्षित तरीके से हो और आम नागरिक किसी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार न बनें। मेटा ने 29 जून से दुनिया के अलग-अलग देशों में यूजरनेम बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। आने वाले महीनों में इसे चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। जैसे ही किसी क्षेत्र में यह सुविधा शुरू होगी, संबंधित यूजर्स को वॉट्सएप के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा और वे अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकेंगे। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय और छोटे यूजरनेम पहले बुक होने की संभावना ज्यादा रहती है, इसलिए कई लोग इस फीचर का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वॉट्सएप का कहना है कि यह फीचर खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए उपयोगी होगा, जहां लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। उदाहरण के तौर पर किसी बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम, स्कूल के पैरेंट्स ग्रुप, नए सहकर्मी या किसी सामुदायिक कार्यक्रम में मिले व्यक्ति से संपर्क करते समय यूजर सिर्फ अपना यूजरनेम साझा कर सकेगा। इससे मोबाइल नंबर निजी रहेगा और यूजर की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित बनी रहेगी। कंपनी ने यूजरनेम बनाने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। यूजरनेम की लंबाई तीन से 35 कैरेक्टर के बीच होगी। इसमें केवल छोटे अंग्रेजी अक्षर, अंक, डॉट और अंडरस्कोर का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और जरूरत पड़ने पर उसे बदला या हटाया भी जा सकेगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जिनसे पहले बातचीत हो चुकी है, उनके लिए चैटिंग का तरीका नहीं बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कंपनी यूजरनेम की नाम का एक वैकल्पिक सुरक्षा फीचर भी ला रही है। यह एक अतिरिक्त सुरक्षा कोड की तरह काम करेगा। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो सिर्फ यूजरनेम जान लेने से कोई भी व्यक्ति उसे मैसेज नहीं भेज पाएगा। पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को पहले यह सुरक्षा की दर्ज करनी होगी, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी। कंपनी का दावा है कि इससे स्पैम मैसेज और अनचाहे संपर्कों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर यूजरनेम फीचर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी आड़ में फर्जी पहचान बनाकर अपराध करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार इस फीचर के तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:45:55 +0530</pubDate>
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                <title>मेटा लाएगा फेसबुक-इंस्टाग्राम-व्हाट्सऐप के ‘प्लस’ वर्जन, यूजर्स को मिलेंगे प्रीमियम फीचर्स</title>
                                    <description><![CDATA[नई सब्सक्रिप्शन सर्विस के तहत स्टोरी कंट्रोल, प्राइवेट व्यू, कस्टम लिस्ट और प्रीमियम AI टूल्स जैसे फीचर्स मिलेंगे, भारत में जल्द हो सकता है रोलआउट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/meta-will-bring-plus-version-of-facebook-instagram-whatsapp-users-will-get/article-54439"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/meta-plus.jpg" alt=""></a><br /><p>सोशल मीडिया की दुनिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। टेक कंपनी मेटा अब अपने लोकप्रिय प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के लिए प्रीमियम ‘प्लस’ वर्जन लॉन्च करने जा रही है। इन नए सब्सक्रिप्शन प्लान्स के जरिए यूजर्स को कई एडवांस फीचर्स और कस्टमाइजेशन ऑप्शंस मिलेंगे, जिनके लिए उन्हें मासिक शुल्क देना होगा। कंपनी का यह कदम विज्ञापन आधारित मॉडल से आगे बढ़कर नई कमाई के विकल्प तैयार करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p>मेटा ने साफ किया है कि ये नए प्लस प्लान उसके मौजूदा ‘मेटा वेरिफाइड’ प्लान की जगह नहीं लेंगे, बल्कि अलग श्रेणी के प्रीमियम फीचर्स के तौर पर पेश किए जाएंगे। फिलहाल कंपनी ने इन प्लान्स को वैश्विक स्तर पर रोलआउट करने की घोषणा की है, जबकि भारत में लॉन्चिंग की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p>इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस को खासतौर पर कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इन प्लान्स में यूजर्स यह देख सकेंगे कि उनकी स्टोरी को कितने लोगों ने दोबारा देखा। यह फीचर अभी सामान्य यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>इसके अलावा यूजर्स को ‘क्लोज फ्रेंड्स’ जैसी एक नहीं बल्कि कई अलग-अलग लिस्ट बनाने का विकल्प मिलेगा। यानी अब लोग अपनी पसंद के हिसाब से अलग-अलग ग्रुप तैयार कर पाएंगे और तय कर सकेंगे कि कौन-सी स्टोरी या पोस्ट किसे दिखाई जाए। इससे सोशल मीडिया पर प्राइवेसी और कंटेंट कंट्रोल पहले से ज्यादा मजबूत होगा।</p>
<p>मेटा का एक और बड़ा फीचर स्टोरी टाइम लिमिट को लेकर है। अभी इंस्टाग्राम और फेसबुक स्टोरी 24 घंटे बाद अपने आप हट जाती है, लेकिन प्लस वर्जन में यूजर्स चाहें तो अपनी स्टोरी को ज्यादा समय तक प्रोफाइल पर बनाए रख सकेंगे। इसके साथ ही हफ्ते में एक बार किसी स्टोरी को ‘स्पॉटलाइट’ करने का विकल्प मिलेगा, जिससे वह ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी।</p>
<p>सबसे ज्यादा चर्चा उस फीचर की हो रही है जिसमें यूजर किसी की स्टोरी देख सकेगा लेकिन सामने वाले को इसका पता नहीं चलेगा। यानी स्टोरी व्यूअर लिस्ट में उसका नाम दिखाई नहीं देगा। इसके अलावा स्टोरी देखने वालों के नाम को सर्च करने की सुविधा भी दी जाएगी।</p>
<p>मेटा ने प्रोफाइल अपडेट को लेकर भी नया बदलाव किया है। अब यूजर अपनी किसी फोटो या वीडियो को सीधे प्रोफाइल या हाइलाइट्स में सेव कर सकेंगे, बिना इस बात की जानकारी दोस्तों के फीड में जाए। इससे यूजर्स बिना अनावश्यक नोटिफिकेशन के अपनी प्रोफाइल अपडेट कर पाएंगे।</p>
<p>कंपनी ने यूजर्स को ज्यादा आकर्षक अनुभव देने के लिए नए फॉन्ट, कस्टम एप आइकॉन और स्क्रीन पर दिखने वाले ‘सुपर हार्ट’ रिएक्शन जैसे विजुअल फीचर्स भी शामिल किए हैं। इन फीचर्स का मकसद यूजर्स को सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यक्तिगत अनुभव देना है।</p>
<p>वहीं व्हाट्सऐप प्लस को पूरी तरह मैसेजिंग और पर्सनलाइजेशन पर केंद्रित किया गया है। इसमें यूजर्स को चैट थीम बदलने, कस्टम रिंगटोन्स लगाने, ज्यादा चैट्स पिन करने और प्रीमियम स्टिकर्स इस्तेमाल करने जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा चैट लिस्ट को भी अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज किया जा सकेगा।</p>
<p>मेटा अपने AI प्लेटफॉर्म के लिए भी दो नए सब्सक्रिप्शन प्लान्स की टेस्टिंग कर रही है। इनमें ‘मेटा वन प्लस’ और ‘मेटा वन प्रीमियम’ शामिल हैं। प्रीमियम प्लान लेने वाले यूजर्स को ज्यादा पावरफुल AI फीचर्स, हाई कंप्यूट क्वेरीज और बेहतर इमेज व वीडियो जनरेशन टूल्स मिलेंगे। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य यूजर्स के लिए बेसिक AI सुविधाएं मुफ्त रहेंगी।</p>
<p>क्रिएटर्स और बिजनेस यूजर्स के लिए भी मेटा ने महंगे एडवांस प्लान तैयार किए हैं। इन प्लान्स में वेरिफाइड बैज, फर्जी अकाउंट से सुरक्षा, बेहतर एनालिटिक्स, पोस्ट प्रमोशन और ऑटोमेटेड फॉलो इनविटेशन जैसे फीचर्स मिलेंगे। इससे छोटे बिजनेस और डिजिटल क्रिएटर्स को अपनी ऑडियंस बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>सोशल मीडिया कंपनियों का बिजनेस मॉडल तेजी से बदल रहा है। पहले कंपनियां केवल विज्ञापनों और यूजर डेटा से कमाई करती थीं, लेकिन अब यूजर ग्रोथ धीमी पड़ने और प्राइवेसी कानून सख्त होने के कारण उन्हें नए रेवेन्यू मॉडल तलाशने पड़ रहे हैं। यही वजह है कि मेटा अब प्रीमियम सब्सक्रिप्शन सर्विस पर फोकस कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फ्री और पेड यूजर्स के बीच फीचर्स का अंतर और ज्यादा बढ़ सकता है। यूजर्स को यह इंतजार है कि भारत में ये नए प्लस प्लान कब लॉन्च होंगे और उनकी कीमत कितनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 16:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वॉट्सएप पर प्राइवेसी विवाद गहराया: मस्क और डुरोव के आरोप, कोर्ट में हर्जाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[यूजर्स के मैसेज पढ़े जाने के आरोपों पर मेटा ने दी सफाई, कहा—एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/privacy-controversy-on-whatsapp-deepens-musk-and-durovs-allegations-demand/article-50836"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-11t110446.751.jpg" alt=""></a><br /><p>दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में शामिल <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">WhatsApp</span></span> एक बार फिर प्राइवेसी विवाद में घिर गया है। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Elon Musk</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pavel Durov</span></span> ने इसके डेटा सुरक्षा दावों पर सवाल उठाए हैं। यह विवाद अमेरिका में दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे के बाद और गहरा गया है, जिसमें यूजर्स के निजी संदेशों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर इस याचिका में आरोप है कि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Meta Platforms</span></span> का स्वामित्व वाला प्लेटफॉर्म यूजर्स के मैसेज को इंटरसेप्ट कर सकता है और उन्हें थर्ड पार्टी के साथ साझा कर सकता है। याचिकाकर्ताओं ने कंपनी के साथ-साथ <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Accenture</span></span> को भी पक्षकार बनाया है और हर्जाने की मांग की है।</p>
<p>मुकदमे के सामने आने के बाद मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वॉट्सएप पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म की चैट सेवा इस्तेमाल करने की सलाह दी और दावा किया कि वहां “वास्तविक प्राइवेसी” उपलब्ध है। वहीं, टेलीग्राम के प्रमुख डुरोव ने इस पूरे मामले को “इतिहास का सबसे बड़ा एन्क्रिप्शन फ्रॉड” करार दिया।</p>
<p>हालांकि, इन आरोपों को मेटा ने सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वॉट्सएप पिछले कई वर्षों से सुरक्षित ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ तकनीक का उपयोग कर रहा है, जिसके तहत संदेश केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के बीच ही सीमित रहते हैं। कंपनी ने मुकदमे में लगाए गए आरोपों को “पूरी तरह झूठा और आधारहीन” बताया है।</p>
<p>यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब टेक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। मस्क और मेटा प्रमुख <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mark Zuckerberg</span></span> के बीच पहले भी कई बार सार्वजनिक बयानबाजी हो चुकी है। ‘थ्रेड्स’ और ‘X’ जैसे प्लेटफॉर्म्स के बीच प्रतिस्पर्धा ने इस टकराव को और बढ़ाया है।</p>
<p>फिलहाल, अदालत में सुनवाई और मेटा की प्रतिक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला केवल आरोपों तक सीमित रहेगा या डिजिटल प्राइवेसी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 11:07:37 +0530</pubDate>
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