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                <title>Cyber Security - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Cyber Security RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वॉट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार की नजर, साइबर फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल नंबर छिपाकर चैट की सुविधा पर केंद्र सतर्क, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-eyes-investigation-on-whatsapp-username-feature-amid-fear-of/article-57554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-khanna-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में करोड़ों लोग रोजमर्रा की बातचीत के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल करते हैं और अब इस लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नया यूजरनेम फीचर लॉन्च होने से पहले ही चर्चा में आ गया है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए फीचर की विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार की चिंता यह है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत कर सकेंगे, तो इसका गलत इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। विशेष रूप से साइबर अपराध, फर्जी पहचान बनाकर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने हाल ही में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसके जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। इस सुविधा में हर यूजर अपना एक अलग और यूनिक यूजरनेम बना सकेगा। भविष्य में कोई नया व्यक्ति मोबाइल नंबर की बजाय इसी यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स की निजता को पहले से अधिक मजबूत बनाना है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क में यदि फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इसी कारण सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों, पहचान सत्यापन प्रक्रिया और फर्जी खातों को रोकने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई डिजिटल सुविधा को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका उपयोग सुरक्षित तरीके से हो और आम नागरिक किसी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार न बनें। मेटा ने 29 जून से दुनिया के अलग-अलग देशों में यूजरनेम बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। आने वाले महीनों में इसे चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। जैसे ही किसी क्षेत्र में यह सुविधा शुरू होगी, संबंधित यूजर्स को वॉट्सएप के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा और वे अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकेंगे। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय और छोटे यूजरनेम पहले बुक होने की संभावना ज्यादा रहती है, इसलिए कई लोग इस फीचर का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वॉट्सएप का कहना है कि यह फीचर खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए उपयोगी होगा, जहां लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। उदाहरण के तौर पर किसी बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम, स्कूल के पैरेंट्स ग्रुप, नए सहकर्मी या किसी सामुदायिक कार्यक्रम में मिले व्यक्ति से संपर्क करते समय यूजर सिर्फ अपना यूजरनेम साझा कर सकेगा। इससे मोबाइल नंबर निजी रहेगा और यूजर की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित बनी रहेगी। कंपनी ने यूजरनेम बनाने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। यूजरनेम की लंबाई तीन से 35 कैरेक्टर के बीच होगी। इसमें केवल छोटे अंग्रेजी अक्षर, अंक, डॉट और अंडरस्कोर का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और जरूरत पड़ने पर उसे बदला या हटाया भी जा सकेगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जिनसे पहले बातचीत हो चुकी है, उनके लिए चैटिंग का तरीका नहीं बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कंपनी यूजरनेम की नाम का एक वैकल्पिक सुरक्षा फीचर भी ला रही है। यह एक अतिरिक्त सुरक्षा कोड की तरह काम करेगा। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो सिर्फ यूजरनेम जान लेने से कोई भी व्यक्ति उसे मैसेज नहीं भेज पाएगा। पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को पहले यह सुरक्षा की दर्ज करनी होगी, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी। कंपनी का दावा है कि इससे स्पैम मैसेज और अनचाहे संपर्कों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर यूजरनेम फीचर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी आड़ में फर्जी पहचान बनाकर अपराध करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार इस फीचर के तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:45:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ZIP फाइल खोलते ही फोन हो सकता है हैक, 'बॉस फ्रॉड' से बढ़ा साइबर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सीईओ या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज और ZIP फाइलों के जरिए साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। गृह मंत्रालय और साइबर विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/phone-can-be-hacked-as-soon-as-zip-file-is/article-57430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/boss-zip-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है, जिसे ‘बॉस ZIP फ्रॉड’ या ‘CEO इम्पर्सनेशन स्कैम’ कहा जा रहा है। इस साइबर ठगी में अपराधी किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं और कर्मचारियों को व्हाट्सएप, ई-मेल या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश भेजते हैं। इन संदेशों के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे जरूरी दस्तावेज, सिक्योरिटी अपडेट या तत्काल कार्रवाई से जुड़ी फाइल बताकर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कर्मचारी इस फाइल को डाउनलोड या खोलता है, उसका मोबाइल या सिस्टम मैलवेयर की चपेट में आ सकता है। इसके बाद साइबर ठग डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। गृह मंत्रालय ने भी लोगों को इस तरह के साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले 30 महीनों के दौरान केवल छत्तीसगढ़ में ही साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां फर्जी कॉल और ओटीपी फ्रॉड अधिक देखने को मिलते थे, वहीं अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाकर उनसे गलत कदम उठवाए जा रहे हैं। अपराधी अक्सर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला बिना सोचे-समझे ZIP फाइल डाउनलोड कर ले। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन ZIP फाइलों के अंदर कई बार EXE, DLL या अन्य हानिकारक फाइलें छिपी होती हैं। जैसे ही ऐसी फाइल सक्रिय होती है, डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद अपराधी मोबाइल या कंप्यूटर की कई जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में बैंकिंग ऐप, सेव किए गए पासवर्ड, मैसेज, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। कुछ मामलों में अपराधी डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और उपयोगकर्ता को इसकी भनक तक नहीं लगती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस तरह की ठगी का एक और खतरनाक पहलू यह है कि साइबर अपराधी मोबाइल में सेव संपर्कों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में असली अधिकारी या बॉस का नंबर हटाकर ठग अपना नंबर सेव कर देते हैं। इसके बाद कर्मचारी को लगता है कि वह अपने वरिष्ठ अधिकारी से ही बात कर रहा है। फिर तत्काल भुगतान, गोपनीय दस्तावेज भेजने या किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने जैसे निर्देश दिए जाते हैं। जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी रकम की ठगी कर लेते हैं।  किसी भी अनजान ZIP फाइल, EXE फाइल या DLL फाइल को बिना जांचे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक कोई संदिग्ध संदेश आए और उसमें तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाए तो पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। फोन कॉल, वीडियो कॉल या सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है। केवल व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के आधार पर कोई आर्थिक लेनदेन करना या फाइल डाउनलोड करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड सुरक्षा प्रणाली का उपयोग किया जाए। व्हाट्सएप सहित अन्य जरूरी ऐप्स में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखना चाहिए। मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें। किसी भी अज्ञात लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत की जांच जरूर करें। यदि कंपनी में काम करते हैं तो साइबर सुरक्षा से जुड़े आंतरिक दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स को गिरफ्तार किया था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने ऐसे गिरोह का भी खुलासा किया, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस लगातार संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने और समय रहते पीड़ितों की रकम रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ते मामलों के कारण चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए ताकि लेनदेन रोका जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार साबित होता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, कर्मचारी से ₹2.63 लाख उड़ाए</title>
                                    <description><![CDATA[एपीके फाइल डाउनलोड करते ही बैंक खाते से साफ हुई रकम, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/cyber-fraud-in-the-name-of-rto-e-challan-in-raipur/article-56475"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरटीओ ई-चालान के नाम पर एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर 2.63 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां साइबर अपराधियों ने एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में घुसपैठ कर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। पीड़ित की पहचान प्रेम नगर, मोवा निवासी 35 वर्षीय आशीष वर्मा के रूप में हुई है, जो हिंदूजा फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका कार्यालय आजाद चौक क्षेत्र में स्थित है। जानकारी के मुताबिक 6 जून की दोपहर करीब 12:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें आरटीओ ई-चालान का हवाला दिया गया था। संदेश के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे देखकर पीड़ित ने इसे आधिकारिक नोटिस समझ लिया। बिना किसी शक के उन्होंने उस फाइल को डाउनलोड कर ओपन कर लिया, और यहीं से साइबर ठगों ने अपने जाल को सक्रिय कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">फाइल खुलते ही मोबाइल में एक मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल गई। कुछ ही समय में पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए गए। शुरुआत में आशीष वर्मा को किसी तरह की जानकारी नहीं हुई, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड हो सकता है, जिसमें फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल को टारगेट किया जाता है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है, जिससे रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग आमतौर पर सरकारी विभागों जैसे आरटीओ, बैंक या ट्रैफिक चालान का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना जांच के लिंक या फाइल ओपन करता है, उसका फोन रिमोट एक्सेस में चला जाता है और बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या एपीके फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधिकारिक दिखने वाले संदेशों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सुरक्षा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डेटा सुरक्षा भी सीमा सुरक्षा जितनी जरूरी, साइबर रिसर्च सेंटर बनेगा: मुख्यमंत्री मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में साइबर सुरक्षा कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- डेटा आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति, प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2fecf36a849/article-56019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cyber-security-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डिजिटल युग में तेजी से बढ़ती तकनीक और साइबर खतरों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज के दौर में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है और इसकी सुरक्षा देश की सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा करते हुए साइबर अपराधों से निपटने के लिए मजबूत और आधुनिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदला है। हर दिन नए प्रकार के साइबर हमले और डिजिटल अपराध सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के दौरान आधुनिक तकनीकों और ड्रोन आधारित गतिविधियों ने सुरक्षा के नए आयाम सामने रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य की चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल होंगी। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समय रहते साइबर अपराध, डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को गंभीरता से लिया और देशभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई पहल शुरू कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों का भरोसा बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा अनिवार्य है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना की घोषणा की। यह केंद्र महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह साइबर हमलों की पूर्व पहचान और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा, जिससे संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभिन्न योजनाओं और सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जा रहा है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने पारदर्शिता बढ़ाई है और लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाना संभव बनाया है। दुनिया आज भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली की सराहना कर रही है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामले कई बार ऐसे होते हैं जिनमें लोगों की वर्षों की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में ठगी का शिकार हो जाती है। ऐसे अपराध दिखाई नहीं देते, लेकिन उनका प्रभाव बेहद गंभीर होता है। इसलिए साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई और जनजागरूकता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेटा ब्रीच जैसी घटनाओं में सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय होती है, इसलिए डेटा सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में नागरिकों को बड़ी संख्या में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इन्हें सुरक्षित बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि और वित्तीय जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत नीतिगत और तकनीकी ढांचे की आवश्यकता है। एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इन प्रणालियों को और उन्नत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में एडीजी ए. साई मनोहर ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए लगातार क्षमता बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में साइबर कमांडो की विशेष टीम कार्यरत है और आने वाले समय में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि सिंहस्थ-2028 से पहले 44 साइबर कमांडो तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों और युवा स्वयंसेवकों को साइबर वॉरियर के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। कार्यशाला के दौरान डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल अवसंरचना सुरक्षा, सुरक्षित एआई तकनीक और डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुति दी। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने समूह चर्चाओं में भाग लेकर साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर सुझाव भी साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:09:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंस्टाग्राम से पानी बोतल ऑर्डर के बाद 2.99 लाख की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[रिफंड लिंक और अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी देकर छात्रा से लाखों की साइबर ठगी, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cheated-of-rs-299-lakh-after-ordering-water-bottle-from/article-55962"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/instagram-scam-indore.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर के खजराना क्षेत्र में रहने वाली एक कॉलेज छात्रा के साथ इंस्टाग्राम पर पानी की बोतल ऑर्डर करने के बाद साइबर ठगी और ब्लैकमेलिंग का बड़ा मामला सामने आया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक छात्रा ने एक इंस्टाग्राम पेज से दो पानी की बोतलें ऑर्डर की थीं और ऑनलाइन भुगतान भी कर दिया था। इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। इस घटना में ठगों ने पहले रिफंड का झांसा देकर लिंक भेजा और फिर धीरे-धीरे छात्रा को डराकर बड़ी रकम ऐंठ ली। पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला साइबर फ्रॉड का सुनियोजित पैटर्न दिखाता है जिसमें पहले छोटे लेनदेन का भरोसा दिलाया जाता है और बाद में मानसिक दबाव बनाकर पैसे वसूले जाते हैं। इस तरह के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है और युवा वर्ग खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अधिक निशाने पर आ रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपी पहले सामान्य ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर संपर्क करते हैं और फिर बातचीत को धोखाधड़ी की दिशा में ले जाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन शॉपिंग और इंस्टाग्राम आधारित पेजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खजराना पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि ठगों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से छात्रा को फंसाया और अलग-अलग चरणों में उसे मानसिक रूप से दबाव में रखा।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला 11 मई का बताया जा रहा है जब छात्रा वरीदा की बहन अलीना ने इंस्टाग्राम पेज “सॉफ क्यूक इंडिया” से पानी की दो बोतलें ऑर्डर की थीं। ऑर्डर के बाद कुछ समय तक सब सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद एक कॉल आया जिसमें कहा गया कि ऑर्डर कैंसिल हो गया है और रिफंड के लिए एक लिंक भेजा जा रहा है। ठगों ने यह भी कहा कि छोटी राशि सीधे वापस नहीं हो सकती, इसलिए लिंक के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जैसे ही छात्रा ने उस लिंक पर क्लिक किया, उसके बैंक डिटेल्स कथित तौर पर ठगों के हाथ लग गए। इसके बाद धीरे-धीरे खाते से लेनदेन शुरू हो गया। इसी बीच 20 मई को फिर एक कॉल आया जिसमें आरोपियों ने दावा किया कि उनके पास छात्रा की अश्लील तस्वीरें हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। इस धमकी के बदले 30 हजार रुपये की मांग की गई और डर के कारण छात्रा ने बताए गए यूपीआई खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि ठग लगातार अलग-अलग नंबरों से संपर्क कर रहे थे ताकि पीड़िता पर दबाव बना रहे और वह किसी को जानकारी न दे सके। यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और हर कदम पर पीड़िता को उलझाया जा रहा था।</p>
<p>मामला तब सामने आया जब 9 जून को छात्रा कॉलेज फीस जमा करने बैंक पहुंची। वहां उसे पता चला कि उसके खाते में पैसे नहीं हैं। बैंक से जानकारी लेने पर सामने आया कि अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए उसके खाते से करीब 2 लाख 99 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। इसके बाद छात्रा ने तुरंत खजराना थाने और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन बैंक खातों और यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उनकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और तकनीकी टीम आरोपियों के लोकेशन ट्रेस करने में लगी हुई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और सोशल मीडिया पर आने वाले ऑफर्स या रिफंड कॉल्स पर तुरंत भरोसा न करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:42:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वॉट्सएप पर प्राइवेसी विवाद गहराया: मस्क और डुरोव के आरोप, कोर्ट में हर्जाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[यूजर्स के मैसेज पढ़े जाने के आरोपों पर मेटा ने दी सफाई, कहा—एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/privacy-controversy-on-whatsapp-deepens-musk-and-durovs-allegations-demand/article-50836"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-11t110446.751.jpg" alt=""></a><br /><p>दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में शामिल <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">WhatsApp</span></span> एक बार फिर प्राइवेसी विवाद में घिर गया है। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Elon Musk</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pavel Durov</span></span> ने इसके डेटा सुरक्षा दावों पर सवाल उठाए हैं। यह विवाद अमेरिका में दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे के बाद और गहरा गया है, जिसमें यूजर्स के निजी संदेशों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर इस याचिका में आरोप है कि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Meta Platforms</span></span> का स्वामित्व वाला प्लेटफॉर्म यूजर्स के मैसेज को इंटरसेप्ट कर सकता है और उन्हें थर्ड पार्टी के साथ साझा कर सकता है। याचिकाकर्ताओं ने कंपनी के साथ-साथ <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Accenture</span></span> को भी पक्षकार बनाया है और हर्जाने की मांग की है।</p>
<p>मुकदमे के सामने आने के बाद मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वॉट्सएप पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म की चैट सेवा इस्तेमाल करने की सलाह दी और दावा किया कि वहां “वास्तविक प्राइवेसी” उपलब्ध है। वहीं, टेलीग्राम के प्रमुख डुरोव ने इस पूरे मामले को “इतिहास का सबसे बड़ा एन्क्रिप्शन फ्रॉड” करार दिया।</p>
<p>हालांकि, इन आरोपों को मेटा ने सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वॉट्सएप पिछले कई वर्षों से सुरक्षित ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ तकनीक का उपयोग कर रहा है, जिसके तहत संदेश केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के बीच ही सीमित रहते हैं। कंपनी ने मुकदमे में लगाए गए आरोपों को “पूरी तरह झूठा और आधारहीन” बताया है।</p>
<p>यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब टेक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। मस्क और मेटा प्रमुख <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mark Zuckerberg</span></span> के बीच पहले भी कई बार सार्वजनिक बयानबाजी हो चुकी है। ‘थ्रेड्स’ और ‘X’ जैसे प्लेटफॉर्म्स के बीच प्रतिस्पर्धा ने इस टकराव को और बढ़ाया है।</p>
<p>फिलहाल, अदालत में सुनवाई और मेटा की प्रतिक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला केवल आरोपों तक सीमित रहेगा या डिजिटल प्राइवेसी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 11:07:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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