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                <title>Bengal politics news - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Bengal politics news RSS Feed</description>
                
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                <title>तृणमूल कांग्रेस में सबसे बड़ा सियासी झटका, 28 साल बाद खुलकर दिखी अंदरूनी दरार</title>
                                    <description><![CDATA[विधायकों के बदले रुख से बंगाल की राजनीति में हलचल, कोलकाता से दिल्ली तक तेज हुई बैठकों और रणनीतियों की चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/biggest-political-shock-in-trinamool-congress-internal-rift-openly-visible/article-54952"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-internal-crisis-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीते कुछ दिनों के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने राज्य की सत्ता और विपक्ष दोनों के समीकरणों को नई दिशा दे दी है। लंबे समय से मजबूत संगठनात्मक पकड़ और केंद्रीकृत नेतृत्व के लिए पहचानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस अब अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौरों में से एक का सामना करती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर उभरी असहमति अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गई है और इसका असर सीधे सत्ता संरचना पर दिखाई देने लगा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सब कुछ अचानक नहीं हुआ। पिछले कुछ महीनों से पार्टी के अंदर कई स्तरों पर असंतोष पनप रहा था। संगठनात्मक फैसलों, नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर कुछ नेताओं और विधायकों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही थी। हालांकि शुरुआत में इसे सामान्य राजनीतिक मतभेद माना गया, लेकिन मई के अंतिम सप्ताह में घटनाओं ने तेजी से करवट लेनी शुरू कर दी। दिल्ली में हुई कुछ महत्वपूर्ण मुलाकातों और उसके बाद बंगाल लौटे नेताओं की गतिविधियों ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में हुई एक मुलाकात ने पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दिया। इसके बाद लगातार संपर्क, बैठकों और राजनीतिक बातचीत का सिलसिला तेज हुआ। देखते ही देखते बड़ी संख्या में विधायक एक साझा रुख की ओर बढ़ने लगे। राज्य की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि जिस गति से घटनाएं आगे बढ़ीं, उसने कई वरिष्ठ नेताओं को भी चौंका दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता में पिछले कुछ दिनों से पार्टी कार्यालयों, नेताओं के आवासों और राजनीतिक केंद्रों पर बैठकों का दौर लगातार जारी रहा। कई ऐसे चेहरे, जिन्हें लंबे समय से शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीबी माना जाता था, अचानक नई राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में दिखाई देने लगे। इससे अटकलों का दौर और तेज हो गया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि केवल विधायकों की संख्या ही नहीं, बल्कि प्रभावशाली नेताओं की बदलती सक्रियता ने पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच राज्य प्रशासन से जुड़ी बैठकों में कुछ वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही। राजनीतिक विरोधियों ने इसे बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत बताया, जबकि संबंधित नेताओं की ओर से इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया कहा गया। इसके बावजूद बंगाल की राजनीति में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह केवल संयोग है या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक पुनर्संतुलन चल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता नगर निगम की राजनीति भी इस घटनाक्रम से प्रभावित होती नजर आई। शहर के प्रमुख प्रशासनिक पदों से जुड़े नेताओं को लेकर दिनभर अलग-अलग तरह की चर्चाएं होती रहीं। कुछ नेताओं के संभावित फैसलों को लेकर कयास लगाए गए, जबकि आधिकारिक स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कई नेता अभी सार्वजनिक रूप से कोई बड़ा कदम उठाने से बच रहे हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस का माहौल देखा जा रहा है। जिलों से लेकर महानगर तक संगठन के स्थानीय पदाधिकारी लगातार बैठकों में व्यस्त हैं। कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में पार्टी की दिशा क्या होगी और नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करेगा। कई जगहों पर संगठन के भीतर संवाद बढ़ाने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कोशिशें भी जारी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में यह केवल एक संगठनात्मक विवाद नहीं है। इसका असर आगामी चुनावी रणनीतियों, गठबंधनों और सत्ता समीकरणों पर भी पड़ सकता है। राज्य की राजनीति हमेशा से व्यक्तित्व आधारित रही है और ऐसे में नेतृत्व से जुड़े किसी भी बड़े घटनाक्रम का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है। यही कारण है कि दिल्ली से लेकर कोलकाता तक राजनीतिक दलों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर कानूनी और प्रशासनिक मोर्चों पर भी कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनकी चर्चा राजनीतिक बहस के साथ-साथ चल रही है। अदालतों में चल रही सुनवाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से बयान दे रहे हैं। इससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में दिनभर बैठकों, फोन कॉल्स और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी रहा, जबकि कार्यकर्ता और समर्थक लगातार अगले घटनाक्रम का इंतजार करते दिखाई दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">कोलकाता में राजनीतिक गतिविधियां सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक तेज नजर आ रही हैं। कई वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रम अचानक बढ़ गए हैं, जबकि कुछ चेहरे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं क्योंकि मौजूदा घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में अनिश्चितता और उत्सुकता दोनों को बढ़ा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">---</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 13:18:09 +0530</pubDate>
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                <title>“बंगाल गया तो हो जाऊंगा गिरफ्तार!” विजयवर्गीय का बड़ा बयान, 38 केस का किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[रतलाम में बोले मंत्री—पार्टी ने भी रोका, कहा ‘नया लफड़ा हो जाएगा’; ममता सरकार पर भी साधा निशाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/%E2%80%9Cif-i-go-to-bengal-i-will-be-arrested%E2%80%9D-vijayvargiyas/article-50925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(32).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल जाने से इनकार करते हुए कहा है कि वहां उनके खिलाफ 38 मामले दर्ज हैं और जाने पर उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। शनिवार रात रतलाम में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह दावा किया और बताया कि पार्टी ने भी उन्हें बंगाल चुनाव प्रचार से दूर रहने की सलाह दी है।</p>
<p>विजयवर्गीय ने स्पष्ट कहा कि वे इस बार पश्चिम बंगाल में चुनावी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेंगे। उनके अनुसार, “मेरे खिलाफ कई वारंट हैं। अगर मैं वहां गया तो मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी नेतृत्व ने संभावित विवाद से बचने के लिए उन्हें बंगाल नहीं जाने की सलाह दी है।</p>
<p>उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि वहां राजनीतिक माहौल असामान्य है और कई तरह के दबाव काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने पिछले अनुभवों का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां काम करना चुनौतीपूर्ण रहा है।</p>
<p>रतलाम प्रवास के दौरान विजयवर्गीय ने अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुए विवाद पर उन्होंने कहा कि देश के प्रति सम्मान हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, राष्ट्र और उसकी पहचान का सम्मान करना किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है।</p>
<p>प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले विधेयक लाया जाएगा और उसके बाद इसे लागू किया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण सरकारी अपडेट माना जा रहा है, जिस पर आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है।</p>
<p>विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अपने संबंधों को लेकर भी स्पष्ट किया कि उनके बीच अच्छे संबंध हैं और सरकार सामूहिक रूप से काम कर रही है। निगम-मंडलों में नियुक्तियों को फिलहाल रोके जाने की बात भी उन्होंने कही, जिसे चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।फिलहाल, विजयवर्गीय के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 14:13:27 +0530</pubDate>
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