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                <title>West Bengal politics - दैनिक जागरण</title>
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                <description>West Bengal politics RSS Feed</description>
                
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                <title>टीएमसी में बड़ी टूट, 20 सांसदों ने NCPI में विलय कर NDA को समर्थन दिया</title>
                                    <description><![CDATA[ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बागी सांसदों ने नई राजनीतिक राह चुनी; चर्चा में आई छोटी पार्टी NCPI]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-mps-split.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इन सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है। इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों का एक साथ अलग होना पार्टी की ताकत को सीधे प्रभावित करता है। सांसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सदस्यता बचाने की थी। यदि वे सीधे किसी अन्य दल में शामिल होते या एनडीए का समर्थन करने का ऐलान करते, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती थी। इसी वजह से उन्होंने एक अलग रणनीति अपनाई और सामूहिक रूप से एनसीपीआई में विलय का रास्ता चुना। चूंकि सांसदों की संख्या दो-तिहाई से अधिक बताई जा रही है, इसलिए दल-बदल कानून के प्रावधानों के तहत उन्हें राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिस पार्टी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया है, वह है नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई। राजनीतिक हलकों में यह नाम अब तक बहुत कम लोगों ने सुना था, लेकिन टीएमसी सांसदों के विलय के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस पार्टी का अब तक न कोई सांसद था और न कोई विधायक, वह एक झटके में लोकसभा में 20 सांसदों वाली पार्टी बनने का दावा कर रही है। एनसीपीआई का गठन 20 जनवरी 2023 को किया गया था। यह एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। पार्टी का पंजीकरण पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन इसकी सक्रियता मुख्य रूप से त्रिपुरा में देखने को मिली। गठन के समय पार्टी ने खुद को सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की आवाज बताने का प्रयास किया था। इसके चुनावी संदेशों में दलबदल की राजनीति का विरोध भी प्रमुख रूप से शामिल था। यही वजह है कि अब टीएमसी से आए सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में बताया जाता है। पार्टी के अध्यक्ष शेली कुंडू हैं, जबकि संगठनात्मक गतिविधियों में उनके सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक बहुत सीमित आर्थिक सहयोग मिला है और इसके संसाधन भी अपेक्षाकृत छोटे स्तर के रहे हैं। एनसीपीआई ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में लड़ा था। उस चुनाव में पार्टी ने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने की कोशिश की थी, लेकिन कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए थे। अंततः पार्टी सीमित सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई और उसे कोई सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद पार्टी ने खुद को राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास जारी रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टीएमसी सांसदों के इस कदम के पीछे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को भी एक कारण माना जा रहा है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावी नतीजों के बाद संगठन के भीतर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग राय दिखाई दे रही थी। अब सांसदों के इस बड़े समूह के अलग होने के बाद यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस राजनीतिक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि उनका समूह भविष्य में एनडीए के साथ मिलकर काम करेगा। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। इस घटनाक्रम का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रात 3 बजे अभिषेक बनर्जी घर पुलिस रेड, सियासी हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में तड़के हुई कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमाया, टीएमसी ने लगाए गंभीर आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2ce67146ff8/article-55781"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee-raid.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोलकाता के कालीघाट इलाके में शनिवार तड़के करीब 3 बजे जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के घर पर पुलिस की अचानक हुई कार्रवाई को लेकर “अभिषेक बनर्जी घर रेड” अब राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक बहसों में शामिल हो गया है। जानकारी के मुताबिक कोलकाता पुलिस सेंट्रल फोर्स के जवानों के साथ उनके आवास पर पहुंची और करीब चार घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। बाहर भारी सुरक्षा तैनात रही और इलाके में देर रात से ही हलचल बढ़ गई थी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में की गई, जो पश्चिम मिदनापुर के सालबनी थाने में दर्ज है। हालांकि, इस पूरी घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेजी से शुरू हो गई है और माहौल लगातार गरमाता गया। पुलिस टीम जब रात लगभग 3 बजे कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची तो कई बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जो स्थिति बनी, उस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। टीएमसी का आरोप है कि पुलिस ने ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया और पूरे परिसर की तलाशी ली, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा थी और सभी नियमों का पालन किया गया। घर के बाहर सेंट्रल फोर्स के जवानों को तैनात किया गया था, जबकि अंदर पुलिस टीम और कुछ महिला अधिकारी मौजूद थे। लगभग चार घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और स्थानीय लोग भी अचानक हुई इस घटना से हैरान रह गए। “अभिषेक बनर्जी घर रेड” को लेकर सुबह तक राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी रहा और टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ धीरे-धीरे उनके आवास के बाहर जमा होने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच जैसे ही इस कार्रवाई की खबर फैली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कालीघाट स्थित आवास पर पहुंचीं। उनके पहुंचते ही राजनीतिक माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। टीएमसी नेताओं और समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक दबाव में की गई है, जबकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां अपने काम के तहत कार्रवाई कर रही हैं और इसमें किसी तरह की असामान्यता नहीं है। अभिषेक बनर्जी ने बाद में मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उनके घर में जबरन प्रवेश किया गया और पूरे घर की तलाशी ली गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना उचित जवाब का इंतजार किए कार्रवाई की, हालांकि पुलिस का पक्ष है कि जांच के लिए जरूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी और यह एक चल रही जांच का हिस्सा है। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। कुछ दिन पहले ही सीआईडी ने उनसे विधानसभा से जुड़े कथित सिग्नेचर फर्जीवाड़े मामले में पूछताछ की थी, जबकि साइबर शिकायत से जुड़े एक मामले में भी उन्हें नोटिस दिया गया था। इसके अलावा उन्हें 16 जून को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है। वहीं ईडी ने भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में 15 जून को पेश होने के लिए समन जारी किया है। लगातार चल रही इन जांचों के बीच “अभिषेक बनर्जी घर रेड” ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं और फिलहाल किसी भी कठोर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई हुई है, फिर भी जांच एजेंसियों की सक्रियता और लगातार हो रही पूछताछ ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया बताया है और कहा है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, इसमें किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर टीएमसी का आरोप है कि यह सब विपक्षी नेताओं को दबाने की कोशिश है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इलाके में सुबह तक पुलिस की मौजूदगी बनी रही, हालांकि तलाशी अभियान समाप्त होने के बाद टीम वहां से रवाना हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:37:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में आज 2 बजे होगी BJP विधायक दल की बैठक, पार्टी तय करेगी नया CM चेहरा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में BJP विधायक दल की बैठक आज दोपहर 2 बजे होगी। CM चयन पर फैसला संभव, अमित शाह रहेंगे पर्यवेक्षक, कोलकाता में सियासी हलचल तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bjp-legislative-party-meeting-will-be-held-in-bengal-today/article-52901"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t114327.376.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>West Bengal CM Announcement:</strong><span> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को लेकर आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल कोलकाता में शुक्रवार दोपहर </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे बीजेपी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पार्टी अपने नए नेता का चयन करेगी। यह वही बैठक है जिसमें तय होगा कि राज्य की कमान किसके हाथ में जाएगी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस बैठक में बतौर पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी को सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है। दोनों नेता मिलकर विधायकों से बातचीत करेंगे और उनका मन टटोलने की कोशिश करेंगे कि किस नाम पर सहमति बन रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक बैठक में विधायकों से राय लेने के बाद विधायक दल के नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। इसके बाद बीजेपी विधायक दल का प्रतिनिधिमंडल राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेगा। प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। कोलकाता में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पार्टी कार्यालय के आसपास हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि बीजेपी इस बार किसी भी तरह की देरी नहीं करना चाहती और तेजी से सत्ता गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। पश्चिम बंगाल </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CM <span lang="hi" xml:lang="hi">घोषणा को लेकर पार्टी के अंदर भी कई स्तरों पर लगातार मंथन चलता रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि अंतिम निर्णय आज की बैठक के बाद ही साफ हो पाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इधर राजनीतिक हलचल सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है। तमिलनाडु में भी सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज खत्म हो सकता है। जोसेफ विजय चंद्रशेखर की पार्टी </span>TVK <span lang="hi" xml:lang="hi">के नेताओं ने </span>CPI <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>CPM <span lang="hi" xml:lang="hi">से मुलाकात की है और इसके बाद आज वाम दलों की अहम बैठक होने की संभावना है। माना जा रहा है कि </span>CPI <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>CPM <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलकर विजय को समर्थन देने का ऐलान कर सकते हैं। फिलहाल विजय के पास अपनी पार्टी और कांग्रेस के साथ मिलकर </span>112<span lang="hi" xml:lang="hi"> विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सरकार बनाने के लिए उन्हें अभी भी कुछ और विधायकों की जरूरत है। ऐसे में लेफ्ट का रुख बेहद अहम माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं दूसरी तरफ केरल में कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AICC <span lang="hi" xml:lang="hi">के पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने बीते दिन विधायकों से मुलाकात कर उनकी राय जानी है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस पर अंतिम फैसला ले सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 11:49:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल में खिला कमल: बीजेपी के वो 5 अचूक दांव जिनसे ढह गया ममता का किला</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के पीछे रहे वे 5 बड़े वादे जिन्होंने टीएमसी के गढ़ को ढहा दिया। जानिए कैसे घुसपैठ और विकास के मुद्दों ने बदली बंगाल की तस्वीर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/lotus-blossomed-in-bengal-those-5-surefire-moves-of-bjp/article-52628"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-election-results-2021-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">पश्चिम बंगाल के चुनावी गलियारों से जो रुझान और नतीजे सामने आ रहे हैं, उन्होंने भारतीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस, जो पिछले डेढ़ दशक से बंगाल की सत्ता पर काबिज थी, इस बार भारतीय बीजेपी की सुनियोजित रणनीति के सामने टिक नहीं पाई। प्रदेश की जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में अपना मत दिया है। बीजेपी की इस अप्रत्याशित सफलता के पीछे वे पांच प्रमुख वादे रहे हैं, जिनका तोड़ टीएमसी के पास नहीं था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">बीजेपी ने अपने चुनावी अभियान में घुसपैठ के मुद्दे को सबसे ऊपर रखा। पार्टी ने साफ तौर पर कहा कि बंगाल की सुरक्षा के लिए अवैध नागरिकों की पहचान करना अनिवार्य है। सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लोगों के लिए यह एक संवेदनशील विषय था, जिसे बीजेपी ने राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ दिया। स्थानीय निवासियों के बीच यह संदेश प्रभावी रहा कि उनके संसाधनों और अधिकारों पर बाहरी लोगों का कब्जा हो रहा है। इस वादे ने सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले मतदाताओं को बीजेपी की ओर मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">बीजेपी ने चुनावी घोषणापत्र में जनकल्याणकारी योजनाओं का जो खाका पेश किया, उसने ग्रामीण और गरीब तबके को काफी आकर्षित किया। विशेष रूप से महिलाओं के लिए हर महीने 3000 रुपए की आर्थिक सहायता और बेरोजगार युवाओं के लिए समान राशि का भत्ता देने के वादे ने गेम चेंजर की भूमिका निभाई। केंद्र की योजनाओं को राज्य में बिना किसी बाधा के लागू करने की बात ने लोगों में यह विश्वास जगाया कि डबल इंजन की सरकार उनके जीवन स्तर को सुधार सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर जनता में उपजी नाराजगी को बीजेपी ने बखूबी पहचाना। आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं ने प्रशासन की छवि पर गहरे घाव किए थे। इसके जवाब में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक मॉडल का उदाहरण देते हुए वादा किया कि अपराधियों और सिंडिकेट चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गुंडागर्दी को खत्म करने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आश्वासन ने मध्यम वर्ग और शहरी आबादी का भरोसा जीतने में मदद की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">भ्रष्टाचार बंगाल की राजनीति का एक कड़वा सच रहा है। बीजेपी ने टीएमसी के 'सिंडिकेट राज' पर सीधा हमला बोला और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने का वचन दिया। पार्टी ने वादा किया कि सत्ता में आते ही उन सभी बिचौलियों पर लगाम कसी जाएगी जो आम जनता के हक का पैसा डकार जाते हैं। इस मुद्दे ने उन युवाओं और ईमानदार करदाताओं को प्रभावित किया जो लंबे समय से व्यवस्था में सुधार की राह देख रहे थे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">कभी उद्योगों का गढ़ रहा बंगाल पिछले कुछ दशकों में पिछड़ गया था। बीजेपी ने बंद पड़ी मिलों को फिर से खोलने और नए निवेश को लाने का विजन पेश किया। उन्होंने यह बात दोहराई कि बिना उद्योगों के राज्य का विकास संभव नहीं है। युवाओं को पलायन से रोकने के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम दिलाने जैसे वादों ने समाज के उत्पादक वर्ग को एक नई उम्मीद दी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 12:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>“बंगाल गया तो हो जाऊंगा गिरफ्तार!” विजयवर्गीय का बड़ा बयान, 38 केस का किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[रतलाम में बोले मंत्री—पार्टी ने भी रोका, कहा ‘नया लफड़ा हो जाएगा’; ममता सरकार पर भी साधा निशाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/%E2%80%9Cif-i-go-to-bengal-i-will-be-arrested%E2%80%9D-vijayvargiyas/article-50925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(32).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल जाने से इनकार करते हुए कहा है कि वहां उनके खिलाफ 38 मामले दर्ज हैं और जाने पर उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। शनिवार रात रतलाम में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह दावा किया और बताया कि पार्टी ने भी उन्हें बंगाल चुनाव प्रचार से दूर रहने की सलाह दी है।</p>
<p>विजयवर्गीय ने स्पष्ट कहा कि वे इस बार पश्चिम बंगाल में चुनावी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेंगे। उनके अनुसार, “मेरे खिलाफ कई वारंट हैं। अगर मैं वहां गया तो मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी नेतृत्व ने संभावित विवाद से बचने के लिए उन्हें बंगाल नहीं जाने की सलाह दी है।</p>
<p>उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि वहां राजनीतिक माहौल असामान्य है और कई तरह के दबाव काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने पिछले अनुभवों का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां काम करना चुनौतीपूर्ण रहा है।</p>
<p>रतलाम प्रवास के दौरान विजयवर्गीय ने अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुए विवाद पर उन्होंने कहा कि देश के प्रति सम्मान हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, राष्ट्र और उसकी पहचान का सम्मान करना किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है।</p>
<p>प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले विधेयक लाया जाएगा और उसके बाद इसे लागू किया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण सरकारी अपडेट माना जा रहा है, जिस पर आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है।</p>
<p>विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अपने संबंधों को लेकर भी स्पष्ट किया कि उनके बीच अच्छे संबंध हैं और सरकार सामूहिक रूप से काम कर रही है। निगम-मंडलों में नियुक्तियों को फिलहाल रोके जाने की बात भी उन्होंने कही, जिसे चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।फिलहाल, विजयवर्गीय के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 14:13:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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