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                <title>Political Controversy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Political Controversy RSS Feed</description>
                
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                <title>तेजप्रताप यादव पर FIR, अनुष्का मामले ने बढ़ाया सियासी विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[आकाश यादव के आरोपों में धमकी और जबरन घर में घुसने का दावा, तेजप्रताप ने बताया पूरी कार्रवाई को साजिश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/fir-against-tej-pratap-yadav-anushka-case-increases-political-controversy/article-56357"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tej-pratap-yadav-fir-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पटना में पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव के खिलाफ दर्ज FIR ने एक बार फिर राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़े विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। अनुष्का यादव के भाई आकाश यादव ने आरोप लगाया है कि तेजप्रताप यादव अपने सहयोगियों के साथ उनके घर पहुंचे और जबरन अंदर घुसने की कोशिश की। मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आरोपों में धमकी, दबाव और गंभीर परिणाम भुगतने जैसी बातें भी सामने आई हैं, जिससे पूरे मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। आकाश यादव का कहना है कि 6 जून को जब वह खाटूश्याम यात्रा पर थे, उस समय तेजप्रताप यादव और उनके सहयोगी मोतीलाल यादव उनके पाटलिपुत्र स्थित घर पहुंचे। आरोप है कि वहां परिवार को धमकाया गया और घर में घुसने का प्रयास किया गया। इसके बाद फोन कॉल के जरिए कथित धमकियां दी गईं, जिनमें एक व्यक्ति ने खुद को कुख्यात गैंग से जुड़ा बताते हुए चेतावनी दी कि किसी भी तरह की शिकायत या बयान देने के गंभीर परिणाम होंगे। आकाश ने दावा किया कि उनके पास इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसे उन्होंने अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आकाश यादव ने पहले थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं होने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। अब पटना व्यवहार न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और पुलिस भी जांच में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आवेदन में विदेश से आए कॉल का भी जिक्र किया गया है, जिसकी तकनीकी जांच की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को और जटिल बना दिया है, क्योंकि इसमें राजनीतिक प्रभाव और निजी विवाद दोनों जुड़े हुए नजर आ रहे हैं। इधर, तेजप्रताप यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबा बयान जारी कर कहा कि उनके खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत कहानियां फैलाई जा रही हैं ताकि उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वह कानून और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं और सच्चाई जल्द सामने आएगी। तेजप्रताप ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें बार-बार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश की गई है। इससे पहले भी वह अनुष्का यादव के साथ अपने संबंधों को लेकर सार्वजनिक बयान दे चुके हैं, जिसमें उन्होंने सभी आरोपों को गलत बताया था और सोशल मीडिया पोस्ट को हैकिंग का परिणाम बताया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले की जड़ 2025 में सामने आए सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी मानी जा रही है, जिसमें तेजप्रताप यादव और अनुष्का यादव के रिश्ते को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। हालांकि कुछ समय बाद वह पोस्ट डिलीट कर दिया गया और फिर से विवाद और बढ़ गया जब तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इसने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी थी। अब ताजा FIR और अदालत में शुरू हुई सुनवाई ने इस मामले को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पुलिस कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या यह मामला केवल निजी विवाद है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी है।  दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:33:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिल्हा के सुशासन तिहार में भिड़े नेता, मंच पर शुरू हुआ विवाद बना राजनीतिक मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[कृषक संगोष्ठी के दौरान बैनर में नाम और फोटो को लेकर शुरू हुई बहस ने तूल पकड़ा, कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला और विधायक धरमलाल कौशिक के समर्थक भी आमने-सामने आए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/leaders-clash-in-bilhas-good-governance-tihar-controversy-started-on/article-54555"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bilha-sushasan-tihar.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया जब मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की समस्याओं को सुनना और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की समीक्षा करना था, लेकिन कुछ ही देर में माहौल पूरी तरह बदल गया। देखते ही देखते दोनों नेताओं के बीच शुरू हुई नोकझोंक ने राजनीतिक रंग ले लिया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान किसानों के मुद्दों से हटकर विवाद पर केंद्रित हो गया।</p>
<p>जानकारी के अनुसार यह कार्यक्रम बिल्हा क्षेत्र के गोड़ी गांव में पंचायत स्तर पर आयोजित किया गया था। बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण यहां पहुंचे थे। शिविर में सड़क, बिजली, पानी, खाद और सिंचाई जैसी समस्याओं पर चर्चा हो रही थी। किसान भी खुलकर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान मंच पर लगाए गए बैनर में नाम और फोटो को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आया, जो कुछ ही समय में बहस में बदल गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पहले इसे सामान्य राजनीतिक असहमति माना, लेकिन बाद में स्थिति लगातार गर्म होती चली गई।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों नेताओं के समर्थक भी अपनी-अपनी बात को लेकर सक्रिय हो गए। माहौल ऐसा बन गया कि कुछ समय के लिए कार्यक्रम की व्यवस्था प्रभावित होती दिखाई दी। हालांकि वहां मौजूद अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। कार्यक्रम में शामिल कई किसानों का कहना था कि वे अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन राजनीतिक विवाद ने पूरे आयोजन का केंद्र बदल दिया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन नेताओं के बीच विवाद के कारण वह मुद्दा पीछे छूट गया।</p>
<p>घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मंच के पास काफी हलचल दिखाई दे रही है और दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच बहस का माहौल नजर आता है। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस तरह की स्थिति से बचा जाना चाहिए।</p>
<p>पंचायत और ग्रामीण स्तर के कार्यक्रम अक्सर स्थानीय राजनीति का केंद्र बन जाते हैं। ऐसे आयोजनों में विभिन्न दलों के नेताओं की मौजूदगी के कारण कई बार श्रेय लेने या राजनीतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर विवाद की स्थिति बन जाती है। बिल्हा की घटना को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि अब तक किसी पक्ष की ओर से इस मामले को लेकर कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो ने मामले को व्यापक चर्चा में ला दिया है।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम के बीच किसानों के मुद्दे भी चर्चा में बने हुए हैं। कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने सड़क निर्माण, नाली व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, खाद की उपलब्धता और पेयजल जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था। ग्रामीणों का कहना है कि इन मुद्दों का समाधान उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ऐसे में वे चाहते हैं कि जनप्रतिनिधि राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर स्थानीय समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें। यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस घटना पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फलता री-पोलिंग से पहले TMC उम्मीदवार जहांगीर खान को HC से बड़ी राहत, 25 मई तक गिरफ्तारी पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[फलता री-पोलिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत मिली। 25 मई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-relief-to-tmc-candidate-jahangir-khan-from-hc-before/article-53708"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/falta-seat-re-polling-tmc-jahangir-khan-calcutta-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर री-पोलिंग से पहले सियासी हलचल और बढ़ गई है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को कलकत्ता हाई कोर्ट से काफी राहत मिली है। अदालत ने ये साफ कर दिया है कि </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">25</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मई तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। लेकिन कोर्ट ने ये भी बताया कि उन्हें जांच में पूरी मदद करनी होगी और चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का पालन करना जरूरी रहेगा। फलता री-पोलिंग को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और अब हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यहां चर्चा और तेज हो गई है। सोमवार दोपहर ये मामला सुर्खियों में आया</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब टीएमसी उम्मीदवार ने तत्काल सुनवाई की मांग की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहांगीर खान ने अदालत में कहा कि उन पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ कई झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बात ये है कि फलता सीट पर चुनाव प्रचार अब अपने अंतिम दौर में है। इसी बीच</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गिरफ्तारी की आशंका को लेकर जहांगीर खान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से वरिष्ठ वकील किशोर दत्ता ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य के सामने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बहुत गंभीर मामला सामने आता है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो जांच एजेंसियां अदालत को इसकी जानकारी दे सकती हैं। लेकिन फिलहाल</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, 25</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मई तक गिरफ्तारी से राहत रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि री-पोलिंग से ठीक पहले उम्मीदवार को राहत मिलना चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है। दूसरी तरफ</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विपक्ष लगातार टीएमसी पर हमले कर रहा है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक प्रताड़ना बता रहा है। सूत्रों के अनुसार</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहांगीर खान ने अपनी याचिका में कहा कि गिरफ्तारी का डर उनके चुनाव प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फलता विधानसभा सीट पर </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">21 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मई को दोबारा मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने पहले ही दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान कई बूथों पर ईवीएम गड़बड़ी और मतदान प्रक्रिया को लेकर मिली शिकायतों के बाद री-पोलिंग का आदेश दिया था। आयोग के निर्देश के मुताबिक</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्षेत्र के सभी </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">285 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मतदान केंद्रों पर सुबह सात से शाम पांच बजे तक मतदान होगा। सहायक बूथ भी इसमें शामिल रहेंगे। प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए कहा गया है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस बार हर बूथ पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी ताकि कोई विवाद न हो। मतगणना </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">24 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मई को होगी। वहीं</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहांगीर खान पहले भी चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक आईपीएस अजय पाल शर्मा को लेकर दिए गए अपने बयानों की वजह से विवादों में रह चुके हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:18:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>केजरीवाल आवास विवाद: भाजपा ने तस्वीरें जारी कीं, AAP ने बताया फर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[केजरीवाल आवास को लेकर सियासत तेज, भाजपा ने लगाए आलीशान जीवन के आरोप, AAP ने तस्वीरों को बताया भ्रामक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/kejriwal-residence-dispute-bjp-released-pictures-aap-called-them-fake/article-52086"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/kejriwal-house-controversy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी आवास को लेकर शनिवार को राजनीतिक विवाद गहरा गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 95 लोधी एस्टेट स्थित आवास की कुछ तस्वीरें जारी करते हुए उन पर आलीशान जीवनशैली अपनाने का आरोप लगाया, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन तस्वीरों को फर्जी और भ्रामक बताया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केजरीवाल हाल ही में इस नए आवास में शिफ्ट हुए हैं। आरोपों और सफाई के बीच यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं।</p>
<p>भाजपा की ओर से दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तस्वीरें सार्वजनिक कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता सादगी की राजनीति की बात करते रहे, वे अब एक भव्य और महंगे सरकारी आवास में रह रहे हैं। उनके मुताबिक, इस आवास को अत्याधुनिक सुविधाओं और महंगे इंटीरियर से सजाया गया है, जो आम जनता की अपेक्षाओं के विपरीत है।</p>
<h5><strong>आरोप और जवाब</strong></h5>
<p>AAP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी नेता आतिशी ने कहा कि जो तस्वीरें सामने लाई गई हैं, उनका केजरीवाल के वास्तविक आवास से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पारदर्शिता की बात है तो सभी पक्ष अपने-अपने आवास जनता के लिए खोलें, जिससे सच्चाई सामने आ सके।</p>
<p>यह विवाद केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री आवास को लेकर खर्च और सुविधाओं को लेकर राजनीतिक बहस हो चुकी है। भाजपा लंबे समय से केजरीवाल के पिछले सरकारी आवास को “शीशमहल” कहकर आलोचना करती रही है।</p>
<p>अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के रूप में केंद्र सरकार द्वारा 95 लोधी एस्टेट में आवास आवंटित किया गया था। यह टाइप-VII श्रेणी का सरकारी बंगला है, जो उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में गिना जाता है। इसमें कई कमरे, लॉन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।</p>
<p>इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में उनके पूर्व मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण पर निर्धारित अनुमान से अधिक खर्च का उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान आवास आवंटन प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है और इसमें कोई अनियमितता सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक बयानबाजी के चलते यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।</p>
<p>फिलहाल, इस मामले में कोई आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यदि विवाद बढ़ता है तो जांच या तथ्यात्मक सत्यापन की मांग उठ सकती है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से और खुलासे या जवाबी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 13:07:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खड़गे के बयान पर सियासी घमासान, CM मोहन यादव ने मांगी माफी</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दी सफाई पीएम मोदी पर बयान को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। बयान के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और माफी की मांग उठने लगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/political-turmoil-over-kharges-statement-cm-mohan-yadav-apologized/article-51847"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(58).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश की राजधानी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भोपाल</span></span> से सामने आए घटनाक्रम में मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मोहन यादव</span></span> ने कांग्रेस अध्यक्ष <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मल्लिकार्जुन खड़गे</span></span> के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> को लेकर दिए गए कथित बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। सीएम ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।</p>
<p>मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस तरह की टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए। उनके मुताबिक, इस तरह के बयान राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ हैं और इससे लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा प्रभावित होती है।</p>
<p>विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में एक सभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि, मामला बढ़ने पर खड़गे ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है।</p>
<p>खड़गे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर आतंकवादी नहीं कहा, बल्कि उनका आशय यह था कि सरकार का रवैया विरोधियों के प्रति कठोर और डराने वाला है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर देखा जा रहा है।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और इसे प्रधानमंत्री के पद का अपमान बताया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बताया जा रहा है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी माहौल में इस तरह के बयान अक्सर विवाद का कारण बनते हैं और इसका सीधा असर जनमत पर पड़ता है। खासकर जब बात देश के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी हो, तो प्रतिक्रिया और भी तीखी हो जाती है।</p>
<p>इस विवाद के बीच अब नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया देता है या मामला राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है। वहीं भाजपा इस मुद्दे को आगे भी उठाने के संकेत दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 14:21:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर पर FIR के आदेश, 500 की शर्त बनी विवाद का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर पर कबड्डी मैच में ₹500 की शर्त को लेकर कोर्ट सख्त, FIR दर्ज करने का निर्देश ₹500 की एक कथित दोस्ताना शर्त ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामला अब कानूनी दायरे में पहुंच चुका है और जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/order-of-fir-against-karnataka-home-minister-g-parameshwara-became/article-51832"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/g-parameshwara-fir.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक के गृह मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जी. परमेश्वर</span></span> एक मामूली दिखने वाले मामले में कानूनी विवाद में घिर गए हैं। बेंगलुरु की एक अदालत ने कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान ₹500 की कथित शर्त लगाने के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह घटना तुमकुरु में आयोजित एक राज्य स्तरीय प्री-यूनिवर्सिटी कबड्डी प्रतियोगिता से जुड़ी बताई जा रही है, जहां मंत्री ने कथित तौर पर जिला कलेक्टर के साथ मैच के परिणाम को लेकर शर्त लगाई थी। हालांकि मंत्री ने इसे महज मजाक बताया है, लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि मामला एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार अब पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट पेश करनी होगी।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />रिपोर्ट्स के अनुसार, तुमकुरु में आयोजित कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान मंत्री ने एक टीम की जीत पर ₹500 की शर्त लगाई थी। बाद में सार्वजनिक मंच से उन्होंने खुद इस शर्त का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें यह रकम हारनी पड़ी।इस बयान के सामने आने के बाद एचआर नागभूषण नामक व्यक्ति ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई। उनका तर्क था कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की शर्त लगाना कानून के दायरे में आता है और इसे बढ़ावा देना गलत संदेश देता है।</p>
<p><strong>कोर्ट का रुख सख्त</strong><br /><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">बेंगलुरु कोर्ट</span></span> ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए पुलिस को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने माना कि आरोपों की जांच जरूरी है, चाहे मामला छोटा ही क्यों न हो।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, आदेश में कहा गया है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के आचरण की जांच पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पुलिस विभाग स्वयं गृह मंत्रालय के अधीन आता है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।</p>
<p>इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जी. परमेश्वर</span></span> ने कहा कि यह कोई गंभीर सट्टेबाजी नहीं थी, बल्कि खेल के दौरान हुआ हल्का-फुल्का मजाक था।उन्होंने कहा, “क्या एक गृह मंत्री इस स्तर की सट्टेबाजी करेगा? इसे अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है।” हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद मामला कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है।</p>
<p>अब पुलिस को अदालत के निर्देश के अनुसार FIR दर्ज कर जांच शुरू करनी होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि मामला केवल मजाक तक सीमित था या इसमें किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:34:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला आरक्षण पर सियासत तेज, भूपेश बघेल का तंज—CM बदलने की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण बिल विवाद के बीच भूपेश बघेल का बयान, छत्तीसगढ़ में विशेष सत्र की तैयारी महिला आरक्षण पर जारी राजनीतिक टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। बयानबाजी के बीच सियासत और तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/politics-intensifies-bhupesh-baghels-taunt-on-womens-reservation-advice/article-51770"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(27).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भूपेश बघेल</span></span> ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।</p>
<p>छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भूपेश बघेल</span></span> ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।</p>
<p>रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।</p>
<h5><strong>विशेष सत्र की तैयारी</strong></h5>
<p>राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">विष्णुदेव साय</span></span> ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।</p>
<h5><strong>राजनीतिक बयानबाजी तेज</strong></h5>
<p>बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।</p>
<p>पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी।इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेन्द्र मोदी</span></span> ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था।</p>
<h5><strong>असर और आगे की राह</strong></h5>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी। जनता के बीच भी इस विषय पर चर्चा बढ़ रही है, खासकर ग्रामीण और स्थानीय निकाय स्तर पर, जहां पहले से आरक्षण लागू है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा “पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी” बन चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर असर डाल सकता है।</p>
<p>आने वाले दिनों में विशेष सत्र और राजनीतिक प्रदर्शनों के जरिए यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है। फिलहाल, महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी बयानबाजी और राजनीतिक रणनीतियां देश की आज की ताज़ा ख़बरें और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में प्रमुख बनी हुई हैं।</p>
<p>में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।</p>
<h5><strong>विशेष सत्र की तैयारी</strong></h5>
<p>राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">विष्णुदेव साय</span></span> ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।</p>
<h5><strong>राजनीतिक बयानबाजी तेज</strong></h5>
<p>बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।</p>
<p>पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी। इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेन्द्र मोदी</span></span> ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:44:03 +0530</pubDate>
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                <title>सेक्स वीडियो मामले में विधायक ने दिए फोटो-वीडियो सैंपल, बोले- चुनाव से पहले छवि खराब करने की कोशिश हुई</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/health-departments-advice-to-protect-from-heat-appeal-to-be/article-50952"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-.jpg" alt=""></a><br /><div class="flex flex-col text-sm pb-25">

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<p>छत्तीसगढ़ के भिलाई में वायरल सेक्स वीडियो मामले को लेकर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। भिलाई नगर थाना क्षेत्र में दर्ज पुराने विवादित MMS केस में कांग्रेस विधायक ने रविवार को पुलिस को अपने फोटो और वीडियो सैंपल सौंप दिए। पुलिस ने इन्हें जांच के लिए रिकॉर्ड में सुरक्षित कर लिया है। मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा बताया जा रहा है।</p>
<p>विधायक पर आरोप था कि वायरल हुए एक आपत्तिजनक वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति उनसे मिलता-जुलता है। इसी विवाद के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। अब जांच को आगे बढ़ाने के लिए विधायक खुद थाने पहुंचे और पहचान से जुड़े सैंपल उपलब्ध कराए।</p>
<p>यह मामला भिलाई नगर थाना क्षेत्र का है, जहां 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले एक MMS सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो को लेकर उस समय राजनीतिक विवाद गहराया था और मामला थाने तक पहुंचा था।</p>
<p><strong>क्यों बढ़ा विवाद</strong><br />वायरल वीडियो को लेकर उस समय विपक्ष की ओर से दावा किया गया था कि इसमें दिख रहा व्यक्ति विधायक हैं। वहीं विधायक ने इसे फर्जी और मॉर्फ्ड बताते हुए अपनी छवि खराब करने की साजिश करार दिया था। बाद में उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की थी।</p>
<p>पुलिस ने शुरुआती जांच के दौरान वीडियो की फॉरेंसिक जांच भी कराई थी, जिसमें यह दावा किया गया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति विधायक नहीं है। इसके बावजूद मामला पूरी तरह बंद नहीं हुआ और समय-समय पर इसकी जांच आगे बढ़ती रही। अब विधायक द्वारा दिए गए सैंपल को भी जांच में शामिल किया जाएगा, ताकि तुलना और सत्यापन किया जा सके।</p>
<p><strong>विधायक का पक्ष</strong><br />थाने में सैंपल देने के बाद विधायक ने कहा कि चुनाव के समय जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले की जांच में देरी हुई है और यह उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश का हिस्सा था। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई और कहा कि वह पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं।</p>
<p>पुलिस का कहना है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों और नए सैंपल को जांच में शामिल किया जा रहा है। मामले की फॉरेंसिक और तकनीकी स्तर पर समीक्षा जारी है।जांच एजेंसियां अब पुराने फॉरेंसिक निष्कर्षों और नए सैंपल की तुलना कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में जुटी हैं।</p>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 17:11:28 +0530</pubDate>
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