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                <title>Global News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी हमले, होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिका ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक तेज की, ट्रम्प ने आगे भी कड़ी कार्रवाई के दिए संकेत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attacks-again-on-iran-tension-increased-after-attack-on/article-58239"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/us-iran-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में बना तनाव अब एक बार फिर खुले सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच लागू सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई शहरों में एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कोनारक, चाबहार और बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कई स्थानों पर धुएं के बड़े गुबार उठने की बात कही गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहरी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना ने इससे पहले मंगलवार को भी ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। अधिकारियों के अनुसार ताजा अभियान उसी कार्रवाई का विस्तार माना जा रहा है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में हमलों के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर ईरान की ओर से अभी तक सभी हमलों के नुकसान का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और राहत एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले ही ईरान पर जोरदार हमला कर चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी बड़े सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि ईरान लंबे समय से मध्य पूर्व में दबाव बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अब अमेरिका इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उनके इस बयान के कुछ समय बाद ही ईरान में नई एयरस्ट्राइक की खबरें सामने आने लगीं, जिससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने अपनी चेतावनी पर तुरंत अमल किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए जहाजों पर हमलों के बाद और तेज हुई। ईरान ने मंगलवार को तीन जहाजों को निशाना बनाने की पुष्टि करते हुए दावा किया कि संबंधित जहाज उसके निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे थे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की गई, जबकि अमेरिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला बताया। अमेरिका का कहना है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक जवाबी अभियान के तहत ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। बंदर अब्बास स्थित शाहिद हक्कानी पोर्ट पर भी एयरस्ट्राइक की गई, जिसके बाद वहां से धुएं का बड़ा गुबार उठता देखा गया। यह बंदरगाह ईरान के प्रमुख समुद्री केंद्रों में गिना जाता है और इसकी सामरिक अहमियत भी काफी अधिक मानी जाती है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि दोनों देशों के बीच यही स्थिति बनी रही तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग लागत बढ़ने की आशंका पहले से ही जताई जा रही है। कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए तत्काल तनाव कम होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति प्रभावित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:04:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वेनेजुएला में फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप, मौतों का आंकड़ा 1430 पहुंचा, हजारों अब भी लापता</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार आ रहे झटकों से बढ़ी तबाही, राहत और बचाव अभियान जारी; भारत समेत कई देशों ने भेजी मदद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a40c99786e64/article-57184"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वेनेजुएला में भूकंप का संकट लगातार गहराता जा रहा है। रविवार को एक बार फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे पहले से तबाह इलाकों में दहशत और बढ़ गई। यूरो-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक, इस बार भूकंप का केंद्र अरागुआ तट के पास समुद्र में लगभग 30 किलोमीटर की गहराई में था। इससे पहले 24 जून को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए थे, जबकि शनिवार को भी 4.9 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था। लगातार आ रहे झटकों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कई इमारतें, जो पहले से कमजोर हो चुकी थीं, अब पूरी तरह ढह गई हैं। अब तक इस आपदा में 1430 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप आने के 72 घंटे बाद भी करीब 68,900 लोग लापता हैं। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीदें कम होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े भूकंप के बाद शुरुआती 48 से 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान जीवित लोगों को सुरक्षित निकालने की संभावना सबसे अधिक रहती है। कई प्रभावित इलाकों में हालात बेहद कठिन बने हुए हैं। राहत टीमों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय लोग अपने परिजनों की तलाश खुद कर रहे हैं। कई जगहों पर परिवार हथौड़े, फावड़े और दूसरे साधारण औजारों की मदद से मलबा हटाते दिखाई दे रहे हैं। कहीं कोई अपने बेटे को ढूंढ रहा है तो कहीं कोई अपने माता-पिता के जिंदा मिलने की उम्मीद में लगातार मलबा हटाने में जुटा है। हालात ऐसे हैं कि लोग बिना थके घंटों तक राहत कार्य में लगे हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी कराकस सहित कई शहरों में सैकड़ों इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जबकि कई इमारतें रहने लायक नहीं बची हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर सड़कों, पार्कों और खुले मैदानों में अस्थायी टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सेवाएं भी कई इलाकों में प्रभावित हैं। सरकारी बिजली कंपनी के कर्मचारी क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों की मरम्मत में जुटे हुए हैं, लेकिन लगातार आफ्टरशॉक आने से काम में दिक्कतें आ रही हैं। वेनेजुएला सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अमेरिका, मेक्सिको, कोलंबिया, अल सल्वाडोर, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों से बचावकर्मी मौके पर पहुंचे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 861 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बचावकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी 25 अंतरराष्ट्रीय सर्च एंड रेस्क्यू टीमों के करीब 1000 आपातकालीन कर्मियों को भेजने की घोषणा की है। भारी मशीनें, दमकल विभाग की टीमें और मेडिकल स्टाफ लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंचाए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत ने भी वेनेजुएला की मदद के लिए 'ऑपरेशन अमिस्ताद' शुरू किया है। स्पेनिश भाषा में 'अमिस्ताद' का अर्थ दोस्ती होता है। इस अभियान के तहत भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमानों से लगभग 35 टन राहत सामग्री भेजी गई है। इनमें आवश्यक दवाइयां, मेडिकल उपकरण और राहत सामग्री शामिल हैं। इसके साथ ही 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम भी वेनेजुएला पहुंची है। डॉक्टरों और नर्सों की यह टीम घायलों का इलाज करेगी और जरूरत पड़ने पर अस्थायी अस्पताल भी स्थापित करेगी। राहत कार्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के मुख्य एयरपोर्ट का क्षतिग्रस्त होना है। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (IRC) की चीफ एलिनोर रेक्स ने बताया कि एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचने के कारण बड़ी मात्रा में राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश कोलंबिया में पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध है, लेकिन उसे वेनेजुएला तक पहुंचाने में परिवहन सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। आने वाले दिनों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार, इस भीषण भूकंप से करीब 67.6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें लगभग 20 लाख लोग राजधानी कराकस में रहते हैं। हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। स्कूल, अस्पताल और कई सरकारी इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 14:10:12 +0530</pubDate>
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                <title>यूएस-ईरान न्यूक्लियर डील पर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप बोले—ईरान को 300 अरब डॉलर देने की खबर फर्जी, वेंस ने समझौते को बताया ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-nuclear-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच अब परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा राजनीतिक दावा सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार कभी न बनाने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जो यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर दे रहा है, वह पूरी तरह “फर्जी खबर” है। ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दिया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने स्पष्ट रूप से परमाणु हथियार न रखने पर सहमति दी है और 300 मिलियन या अरब डॉलर देने की बात गलत तरीके से फैलायी जा रही है। ट्रंप ने इस तरह की खबरों को राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया और कहा कि यह जानकारी अमेरिकी जनता को भ्रमित करने के लिए फैलाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरें सामने आई हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे युद्ध जैसे हालात को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक स्थायी ढांचा तैयार करना बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस डील के सभी विस्तृत बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे कई सवाल बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। वेंस ने कहा कि पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यही था कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समझौता अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच ईरान की तरफ से भी सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अभी अंतिम शांति समझौता तैयार होना बाकी है। ईरानी पक्ष का कहना है कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए विस्तृत बातचीत और ठोस शर्तों पर सहमति जरूरी है। सबसे बड़ा विवाद उस 300 अरब डॉलर के कथित पैकेज को लेकर है, जिस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ट्रंप ने जहां इसे पूरी तरह झूठ बताया है, वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह रकम किसी प्रत्यक्ष भुगतान के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक पुनर्निर्माण और निवेश कार्यक्रम से जुड़ी हो सकती है। ईरानी मीडिया का दावा है कि यह राशि युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और प्रतिबंधों में राहत के तौर पर मांगी गई संभावित आर्थिक पैकेज का हिस्सा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान ने 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों की रिहाई की मांग की है और साथ ही तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील की भी बात शामिल है। ईरानी पक्ष का तर्क है कि देश को हुए नुकसान का आकलन कई सौ अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, इसलिए आर्थिक राहत किसी भी समझौते का अहम हिस्सा होना चाहिए। दूसरी ओर पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स में इस आंकड़े को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार यह 300 अरब डॉलर का पैकेज सीधे भुगतान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश और पुनर्निर्माण सहयोग से जुड़ा एक प्रस्ताव हो सकता है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल हो सकती है। इस अंतर ने पूरे समझौते को और अधिक विवादित बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">समझौते के प्रारंभिक ढांचे को लेकर उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि यह दस्तावेज अभी केवल डेढ़ पेज का है और बहुत सामान्य प्रकृति का है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में इसके और विवरण सामने आएंगे। वेंस के अनुसार समझौते में परमाणु निरीक्षकों की वापसी, यूरेनियम स्टॉकपाइल के प्रबंधन और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान में दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है, ताकि परमाणु गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार को लेकर एक साझा समाधान निकाला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते से पहले ईरान को कई अहम शर्तों को पूरा करना होगा, जिनमें परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों से दूरी बनाना शामिल है। हालांकि ईरान की ओर से इन शर्तों पर औपचारिक प्रतिक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने ईरान युद्ध का विरोध किया, बोले- आम लोग कीमत चुका रहे</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पोस्ट में युद्ध खत्म करने की मांग, कहा- बिना मंजूरी शुरू हुए संघर्ष ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-york-mayor-mamdani-opposed-the-iran-war-and-said/article-54508"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-war-news.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने ईरान युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस पूरे संघर्ष का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि यह युद्ध अब खत्म होना चाहिए, क्योंकि इसकी सबसे ज्यादा कीमत आम लोग चुका रहे हैं। ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में जिस तरह हालात बिगड़े हैं, उसने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्ध के लिए किसी आम नागरिक ने वोट नहीं किया था, लेकिन सबसे ज्यादा असर उन्हीं लोगों पर पड़ा जिनकी इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं थी।</p>
<p dir="ltr">ममदानी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि युद्ध के दौरान हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि 13 अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में मारे गए हैं और वे अब कभी अपने परिवारों के पास वापस नहीं लौट पाएंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध की असली मार हमेशा आम परिवारों पर पड़ती है, चाहे वह किसी भी देश के हों। उनके मुताबिक संघर्ष सिर्फ सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगता है।</p>
<p dir="ltr">मेयर ने कहा कि अमेरिका में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं। इससे मिडिल क्लास और वर्किंग क्लास परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोग पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव झेल रहे थे, ऐसे में युद्ध ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। ममदानी के मुताबिक विदेश नीति के फैसलों का बोझ आखिरकार आम टैक्स देने वाले लोगों पर ही आता है।</p>
<p dir="ltr">उन्होंने आरोप लगाया कि यह संघर्ष अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस की मंजूरी के बिना शुरू किया गया। ममदानी ने कहा कि विदेश में जाने वाली हर जान और अमेरिका के भीतर आम परिवारों पर पड़ने वाला हर आर्थिक बोझ एक लापरवाह फैसले की कीमत है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जोड़कर आलोचना भी कर रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की नई टोल वसूली व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि यह चेतावनी तेल व्यापार और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ती चिंता के कारण दी गई है।</p>
<p dir="ltr">उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन लगातार गलत फैसले ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओमान को दी गई धमकी यह दिखाती है कि ईरान युद्ध धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर जा रहा है। अमेरिकी विपक्ष का कहना है कि हालात संभालने के बजाय और ज्यादा तनाव पैदा किया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">ईरान की तरफ से भी लगातार तीखे बयान सामने आ रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि दोनों देश सैन्य मोर्चे पर नाकाम रहने के बाद अब ईरान को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं। खामेनेई के बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।</p>
<p dir="ltr">दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है और इसके जरिए क्षेत्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p dir="ltr">इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला किया। ईरान के मुताबिक यह हमला बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। हालांकि अमेरिका की तरफ से इस दावे पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">दुनियाभर में अब इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और नेता लगातार शांति की अपील कर रहे हैं। न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी का बयान भी ऐसे समय आया है जब आम लोग युद्ध के असर को सीधे महसूस कर रहे हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:12:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी सांसद का पाकिस्तान पर हमला, अमेरिका के पक्ष में झुकने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान ने पाकिस्तान की भूमिका पर जताई आपत्ति, इब्राहिम रेजई का बयान ऐसे समय आया जब क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iranian-mp-attacks-pakistan-and-accuses-it-of-bowing-in/article-52235"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/iran-pakistan-relations.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने पाकिस्तान को मध्यस्थ (मीडिएटर) के रूप में अस्वीकार करते हुए कहा है कि वह निष्पक्ष भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है। यह बयान ईरानी सांसद इब्राहिम रेजई ने तेहरान में दिया, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं। रेजई ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान भले ही ईरान का दोस्त हो, लेकिन वह किसी भी तरह की मध्यस्थता के लिए उपयुक्त नहीं है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेजई का कहना है कि एक सही मध्यस्थ वही हो सकता है जो दोनों पक्षों के बीच समान दूरी बनाए रखे, जबकि पाकिस्तान की स्थिति वैसी नहीं दिखती। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में 24 घंटे के भीतर दूसरी बार पाकिस्तान का दौरा किया था, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह बयान केवल पाकिस्तान पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि तेहरान किसी भी बाहरी पक्ष को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अमेरिका के साथ जटिल रिश्तों के बीच ईरान फिलहाल सीमित और भरोसेमंद साझेदारों पर ही निर्भर दिख रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ते कूटनीतिक संपर्कों के बीच यह साफ है कि मध्यस्थता की भूमिका को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने से आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति और अधिक जटिल हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:44:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जापान में 6.1 तीव्रता का भूकंप, होक्काइडो में झटके; तटीय इलाकों में सुनामी का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[USGS और जापान की एजेंसी ने की पुष्टि, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह; नुकसान सीमित, कोई जनहानि नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/61-magnitude-earthquake-in-japan-tremors-in-hokkaido-danger-of/article-52184"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/japan-earthquake.jpg" alt=""></a><br />
<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert w-full wrap-break-word light markdown-new-styling">
<p>जापान के उत्तरी क्षेत्र होक्काइडो में सोमवार को 6.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भूकंप का केंद्र साराबेत्सु के पास बताया गया है और इसकी गहराई करीब 81 किलोमीटर रही। झटकों के बाद तटीय क्षेत्रों में सुनामी का खतरा पैदा हो गया, जिसके चलते प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।</p>
<p>जापान की जियोफिजिक्स एजेंसी और यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भूकंप की पुष्टि की है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, हालांकि कुछ इमारतों और घरों को हल्का नुकसान पहुंचा है। भूकंप के झटके आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए, जिससे लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए।</p>
<p>भूकंप के तुरंत बाद प्रशासन ने होक्काइडो के तटीय क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी की। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर लोगों को समुद्र तट से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और यदि खतरा कम होता है तो अलर्ट वापस लिया जा सकता है।</p>
<p>जापान भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जहां अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। देश ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में आता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि अधिक रहती है। इसी कारण यहां छोटे-बड़े भूकंप आम बात हैं, लेकिन कभी-कभी इनका प्रभाव गंभीर भी हो सकता है।</p>
<p>मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भूकंपों के बाद सुनामी का खतरा बढ़ जाता है, खासकर तब जब केंद्र समुद्र के करीब हो। हालांकि इस बार भूकंप की गहराई अधिक होने के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान की संभावना कम बताई जा रही है।</p>
<p>स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और राहत व बचाव दल तैयार रखे गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:04:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वॉशिंगटन डिनर में फायरिंग, ट्रंप सुरक्षित; हमलावर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हड़कंप, मेहमान टेबल के नीचे छिपे; सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-safe-from-firing-at-washington-dinner-attacker-arrested/article-52158"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/trump-security-incident.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिकी राजधानी में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल डिनर कार्यक्रम उस समय अफरातफरी में बदल गया, जब अचानक गोलीबारी की घटना सामने आई। सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।</p>
<p>यह घटना शनिवार शाम वॉशिंगटन डीसी के एक प्रमुख होटल में आयोजित व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई। कार्यक्रम में राजनीतिक हस्तियों, वरिष्ठ पत्रकारों और कई प्रमुख मेहमानों की मौजूदगी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बॉलरूम के बाहर करीब 6-7 राउंड फायरिंग की आवाज सुनाई दी, जिससे हॉल के अंदर मौजूद लोग घबरा गए और कई लोग टेबल व कुर्सियों के नीचे छिप गए।</p>
<p>घटना के तुरंत बाद सीक्रेट सर्विस के एजेंट सक्रिय हुए और राष्ट्रपति ट्रंप को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि एक सुरक्षाकर्मी को गोली लगी, हालांकि बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण वह सुरक्षित है। कुछ देर बाद स्थिति नियंत्रण में आने पर कार्यक्रम को आंशिक रूप से फिर शुरू करने की घोषणा की गई।</p>
<p>प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमलावर होटल में ही ठहरा हुआ था। उसके पास से हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें आग्नेयास्त्र और अन्य घातक सामान शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी की पहचान 31 वर्षीय व्यक्ति के रूप में की है, जो पेशे से शिक्षक और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। उसे हिरासत में लेकर हमले के मकसद की जांच की जा रही है।</p>
<p>घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद ट्रंप ने मीडिया को संबोधित करते हुए सुरक्षा एजेंसियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। साथ ही उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी जताई।</p>
<p>इस घटना ने एक बार फिर उच्च सुरक्षा वाले आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के बावजूद हमलावर का हथियारों के साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना की प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत समेत कई देशों के नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है।फिलहाल, जांच एजेंसियां हमलावर के नेटवर्क, पृष्ठभूमि और संभावित मंशा की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:18:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वॉशिंगटन फायरिंग पर PM मोदी की प्रतिक्रिया, ट्रंप सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[होटल हिल्टन गोलीबारी के बाद ट्रंप और अन्य नेताओं के सुरक्षित होने पर जताई राहत, हमलावर हिरासत में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modis-reaction-on-washington-firing-trump-safe/article-52156"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/pm-modi-(12).jpg" alt=""></a><br />
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<p>अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में एक होटल में हुई गोलीबारी की घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फर्स्ट लेडी और उपराष्ट्रपति के सुरक्षित होने की जानकारी को राहत भरी खबर बताया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और इन्हें पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व के सुरक्षित रहने की कामना भी की। यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम के दौरान अचानक गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>घटना वॉशिंगटन के प्रतिष्ठित हिल्टन होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां बड़ी संख्या में राजनेता, पत्रकार और अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षाबलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में लिया और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, हमलावर ने कई राउंड फायरिंग की थी और उसके पास अत्याधुनिक हथियार था। सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही हिरासत में ले लिया। पूछताछ जारी है और हमले के पीछे की मंशा की जांच की जा रही है।</p>
<p>घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया देते हुए सुरक्षा एजेंसियों और सीक्रेट सर्विस की तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि समय रहते कार्रवाई होने से बड़ा नुकसान टल गया। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह के आयोजनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने की आवश्यकता है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि गोलीबारी के दौरान एक सुरक्षाकर्मी घायल हुआ, हालांकि उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की गंभीरता सामने आई है।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:10:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>ट्रम्प की चीन को चेतावनी: ईरान को सैन्य मदद दी तो लगेगा 50% टैरिफ, बढ़ा वैश्विक तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान पर अमेरिकी सख्ती, होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और संभावित सैन्य कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-warning-to-china-will-impose-50-tariff-if-military/article-50983"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/china-us-tension.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने चीन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह ईरान को सैन्य सहायता प्रदान करता पाया गया, तो अमेरिका उस पर 50% तक टैरिफ लगा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान-अमेरिका के बीच टकराव गहराता जा रहा है।</p>
<p>एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को मजबूत होने नहीं देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका “पूरी तरह तैयार” है। इससे पहले अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने “locked and loaded” शब्दों का इस्तेमाल कर सैन्य तैयारियों का इशारा किया था।</p>
<p>स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की है। ट्रम्प के मुताबिक, इस कार्रवाई में ब्रिटेन समेत कुछ अन्य सहयोगी देश भी शामिल होंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और रोकथाम की जाएगी, जिससे ईरान की तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।</p>
<p>वहीं, ईरान ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। ईरानी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नाकेबंदी विफल होगी और देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। ईरान ने यह भी दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को टोल देना होगा।</p>
<p>इसी बीच क्षेत्रीय तनाव का असर अन्य देशों पर भी दिख रहा है। लेबनान में इजराइली हमलों में मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक हो गई है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस बीच लेबनान ने युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक बातचीत की इच्छा जताई है और वॉशिंगटन में अहम बैठक प्रस्तावित है।</p>
<p>आर्थिक मोर्चे पर भी इस संकट का असर साफ दिख रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। वहीं एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 09:00:44 +0530</pubDate>
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