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                <title>USPolitics - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ट्रम्प ने शेयर किया AI वीडियो, भारत में बाइक और शेर की सवारी करते दिखे</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए गए वीडियो में डोनाल्ड ट्रम्प के कई अनोखे अवतार नजर आए, सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-shared-ai-video-in-which-he-was-seen-riding/article-55212"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-ai-video.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह एक AI-जनरेटेड वीडियो है, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शेयर किया है। करीब एक मिनट लंबे इस वीडियो में ट्रम्प को अलग-अलग देशों और परिस्थितियों में दिखाया गया है। कहीं वह भारत की सड़कों पर बाइक चलाते नजर आते हैं तो कहीं शेर की सवारी करते दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे मनोरंजक और रचनात्मक बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे राजनीतिक प्रचार का नया तरीका मान रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो में ट्रम्प को कई काल्पनिक और असाधारण दृश्यों में दिखाया गया है। एक दृश्य में वह रेगिस्तान में ऊंट पर बैठे दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे दृश्य में पैराग्लाइडिंग करते नजर आते हैं। वीडियो में उन्हें अंतरिक्ष यात्री की तरह स्पेससूट पहनकर चांद पर अमेरिकी झंडा लगाते हुए भी दिखाया गया है। इसके अलावा ट्रम्प का चेहरा पिज्जा, बस, विशाल होर्डिंग, माउंट रशमोर और नॉर्दर्न लाइट्स जैसी जगहों पर भी दिखाई देता है। पूरा वीडियो इस तरह तैयार किया गया है कि ट्रम्प को दुनिया भर में लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में पेश किया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो के बैकग्राउंड में एक गाना भी चलता है, जिसमें लगातार ट्रम्प की लोकप्रियता का जिक्र किया गया है। गीत के बोलों में दावा किया गया है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के लोग ट्रम्प को पसंद करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। वीडियो में मेक्सिको, चीन, मिडिल ईस्ट और भारत का नाम भी लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में एक मिनट के भीतर ट्रम्प का नाम दर्जनों बार दोहराया जाता है, जिससे यह पूरी तरह उनके व्यक्तित्व और लोकप्रियता को केंद्र में रखकर तैयार किया गया कंटेंट नजर आता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह वीडियो ट्रुथ सोशल पर एक यूजर द्वारा तैयार किया गया था। बाद में ट्रम्प ने इसे अपनी आधिकारिक प्रोफाइल से शेयर किया। वीडियो के अंत में न्यूयॉर्क के रिपब्लिकन नेता और ट्रम्प समर्थक एंथनी कॉन्स्टैंटिनो को इसका श्रेय दिया गया है। ट्रम्प द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद कॉन्स्टैंटिनो ने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया। उनका कहना था कि राष्ट्रपति द्वारा उनके बनाए कंटेंट को साझा करना उनके लिए गर्व का विषय है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे मजेदार और मनोरंजक बताया। कुछ लोगों ने कहा कि वीडियो में ट्रम्प किसी हॉलीवुड फिल्म या कॉमिक बुक के सुपरहीरो की तरह दिखाई दे रहे हैं। वहीं आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक नेताओं द्वारा इस तरह के AI कंटेंट का इस्तेमाल जनता को प्रभावित करने की कोशिश नहीं है। कुछ यूजर्स का कहना था कि जब AI तकनीक इतनी तेजी से विकसित हो रही है, तब वास्तविकता और काल्पनिक प्रस्तुति के बीच फर्क करना आम लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने AI से तैयार कंटेंट साझा किया हो। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए हैं, जिनमें उन्हें अलग-अलग रूपों में दिखाया गया। कुछ समय पहले उन्होंने खुद को जेम्स बॉन्ड के अंदाज में पेश करते हुए एक तस्वीर शेयर की थी। इसके अलावा उन्होंने एक अन्य पोस्ट में खुद को दुनिया का सबसे बड़ा आकर्षण बताया था। इन पोस्टों को भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा मिली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अप्रैल में ट्रम्प द्वारा साझा की गई एक AI-जनरेटेड तस्वीर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उस तस्वीर में उन्हें यीशु मसीह जैसे रूप में दिखाया गया था। तस्वीर सामने आने के बाद कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा ली गई, लेकिन ट्रम्प ने इसके लिए माफी नहीं मांगी। बाद में उन्होंने कहा था कि उन्हें लगा था कि तस्वीर में वह किसी डॉक्टर की तरह दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान भी ट्रम्प ने AI तकनीक से बनी कई तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य शक्ति को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया था, जबकि ईरानी सेना को कमजोर और नुकसान झेलती हुई दिखाया गया था। हालांकि इन तस्वीरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी और इन्हें केवल AI आधारित विजुअल कंटेंट माना गया। इसके बावजूद तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रम्प AI तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं कर रहे हैं।  सोशल मीडिया के दौर में वायरल वीडियो और AI विजुअल्स नेताओं को लगातार चर्चा में बनाए रखने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे "डिजिटल पर्सनैलिटी कल्ट" बनाने की कोशिश बताते हैं, जहां किसी नेता को असाधारण, सर्वशक्तिमान या लगभग काल्पनिक नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस तरह के कंटेंट से गलतफहमियां भी पैदा हो सकती हैं। उनका तर्क है कि AI तकनीक के जरिए तैयार की गई तस्वीरें और वीडियो लोगों के लिए सच और कल्पना के बीच की दूरी को कम कर देती हैं। इससे भ्रम फैलने और गलत नैरेटिव बनने का खतरा बढ़ जाता है। बावजूद इसके, ट्रम्प लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:49 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका 66 वैश्विक संगठनों से अलग, भारत की अगुआई वाला सोलर अलायंस भी छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत व्हाइट हाउस का ऐलान, WHO और UN से जुड़े कई मंचों से हटने का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-will-withdraw-from-66-international-organizations-including-31-agencies/article-42460"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/us-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका ने वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ लेते हुए 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय मंचों से बाहर निकलने का फैसला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में एक आधिकारिक मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिका अब संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी 31 एजेंसियों और 35 अन्य वैश्विक संस्थाओं का हिस्सा नहीं रहेगा। इस सूची में भारत की पहल पर गठित इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भी शामिल है।</p>
<p>व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन संगठनों की कार्यप्रणाली अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं है। प्रशासन का दावा है कि कई संस्थाएं अनावश्यक खर्च, वैचारिक एजेंडे और वैश्विक शासन को बढ़ावा दे रही थीं, जिससे अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक प्राथमिकताओं पर असर पड़ रहा था।</p>
<h5><strong>WHO से भी अलग होगा अमेरिका</strong></h5>
<p>इस फैसले के तहत अमेरिका 22 जनवरी 2026 के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का सदस्य नहीं रहेगा। ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले ही WHO से हटने की घोषणा कर दी थी, जिसके लिए आवश्यक एक वर्षीय नोटिस अवधि अब पूरी होने वाली है। अमेरिका लंबे समय से WHO पर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के आरोप लगाता रहा है।</p>
<h5><strong>जलवायु मंचों से किनारा</strong></h5>
<p>अमेरिका अब संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) और इससे जुड़े अन्य जलवायु संस्थानों से भी अलग हो रहा है। यह वही मंच है, जो पेरिस जलवायु समझौते का आधार माना जाता है। ट्रंप पहले भी इस समझौते को अमेरिकी उद्योग और रोजगार के खिलाफ बता चुके हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु संगठनों से अमेरिका की दूरी वैश्विक प्रयासों को कमजोर कर सकती है, क्योंकि अमेरिका दुनिया के प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों में शामिल है।</p>
<h5><strong>भारत के लिए क्यों अहम</strong></h5>
<p>भारत की अगुआई में 2015 में शुरू हुए इंटरनेशनल सोलर अलायंस को स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का अहम मंच माना जाता है। अमेरिका 2021 में इसका सदस्य बना था। अब उसका बाहर निकलना भारत के नेतृत्व वाली बहुपक्षीय पहल के लिए कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि ISA में 120 से अधिक देश अब भी सक्रिय हैं।</p>
<h5><strong> समर्थन और विरोध</strong></h5>
<p>पूर्व अमेरिकी जलवायु अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका वैश्विक नेतृत्व की भूमिका खो सकता है। वहीं ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी करदाताओं के हितों की रक्षा और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को मजबूत करने के लिए जरूरी है।</p>
<p>अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिए हैं कि अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की समीक्षा भी जारी रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आने वाले समय में अमेरिका के वैश्विक रिश्तों, भारत-अमेरिका सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय नीतिगत संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 14:25:06 +0530</pubDate>
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