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                <title>Rewa News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>रीवा-सीधी हाईवे पर दर्दनाक हादसा, चौड़ियार मोड़ के पास दो युवकों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[देर रात बाइक सवार दो युवकों की सड़क हादसे में मौके पर ही मौत, तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर की आशंका; पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6a4c9bab774db/article-58056"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rewa-sidhi-highway-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा-सीधी हाईवे पर सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। चौड़ियार मोड़ के पास पेट्रोल पंप के सामने बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही देर में पुलिस टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई और पूरे इलाके को सुरक्षित करते हुए जांच शुरू कर दी। सड़क पर काफी देर तक लोगों की भीड़ लगी रही। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसा देर रात हुआ, जब दोनों युवक किसी काम से बाइक पर सवार होकर जा रहे थे। रास्ते में उनकी बाइक हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने दोनों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिए हैं। रीवा-सीधी हाईवे पर हुए इस हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मृतकों की पहचान मनसुख चतुर्वेदी और गणेश पटेल के रूप में हुई है। दोनों सिलपरा क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों युवक किसी जरूरी काम से घर से निकले थे और रीवा-सीधी मार्ग से गुजर रहे थे। जब वे चौड़ियार मोड़ के पास पेट्रोल पंप के सामने पहुंचे, तभी उनकी बाइक हादसे का शिकार हो गई। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि हादसे के बाद सड़क पर काफी दूर तक बाइक के टूटे हुए हिस्से बिखरे पड़े थे। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि टक्कर बेहद तेज रही होगी। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी, लेकिन तब तक दोनों युवकों की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास मौजूद लोगों से भी पूछताछ शुरू की। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि किसी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने बाइक को पीछे या सामने से टक्कर मारी होगी। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और बिना पर्याप्त साक्ष्यों के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटनास्थल पर पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मंगलवार सुबह जैसे ही हादसे की खबर सिलपरा गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए, जहां माहौल बेहद गमगीन रहा। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों युवक मिलनसार स्वभाव के थे और इलाके में सभी उन्हें अच्छी तरह जानते थे। अचानक हुई इस घटना ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। कई लोगों ने हाईवे पर बढ़ते सड़क हादसों को लेकर चिंता भी जताई। उनका कहना है कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है और कई बार भारी वाहन लापरवाही से चलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अब हादसे की असली वजह जानने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि चौड़ियार मोड़ और पेट्रोल पंप के आसपास लगे कैमरों से महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सड़क पर मिले टायर के निशान, बाइक की स्थिति और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी परीक्षण कराया जा रहा है। यदि किसी वाहन की पहचान होती है तो उसके चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आसपास के लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी ने हादसे के समय कोई संदिग्ध वाहन देखा हो या उसके पास घटना से जुड़ी कोई जानकारी हो तो वह पुलिस को अवश्य बताए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> हादसे के समय सड़क की स्थिति कैसी थी और क्या उस समय दृश्यता प्रभावित थी। हालांकि अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि मौसम या सड़क की खराब स्थिति दुर्घटना का मुख्य कारण रही हो। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच की जा रही है और जल्द ही मामले का खुलासा करने का प्रयास किया जाएगा। रीवा-सीधी हाईवे पर पिछले कुछ समय में सड़क दुर्घटनाओं के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे हादसों के बाद अक्सर सड़क सुरक्षा, तेज रफ्तार और यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल उठते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर निगरानी बढ़ाने, गति नियंत्रण के प्रभावी उपाय करने और नियमित पुलिस गश्त से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:37:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>डॉक्टर्स डे पर रीवा में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल बोले- डॉक्टरों का पेशा जीवन को सार्थक बनाने वाला, समाज में भगवान जैसा सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान, दो पुस्तकों का हुआ विमोचन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/on-doctors-day-deputy-chief-minister-rajendra-shukla-said-in/article-57537"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm-(2).mp4" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">डॉक्टर्स डे के अवसर पर रीवा स्थित श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा सेवा, मानवता और समाज के प्रति डॉक्टरों के समर्पण को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री <strong>राजेंद्र शुक्ल</strong> ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का पेशा केवल एक रोजगार नहीं, बल्कि मानव जीवन को बचाने और उसे नई उम्मीद देने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज में डॉक्टरों को भगवान के समान सम्मान इसलिए मिलता है क्योंकि वे कठिन परिस्थितियों में भी लोगों के जीवन की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करते हैं।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm-(2).mp4" controls=""></video>
<p>उप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी रूप में डॉक्टरों की सेवाओं का लाभ लेता है। जब कोई व्यक्ति बीमारी, दुर्घटना या गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझता है, तब सबसे पहले डॉक्टर ही उसकी उम्मीद बनते हैं। यही कारण है कि चिकित्सा सेवा को समाज में सबसे सम्मानजनक और जिम्मेदारी भरा कार्य माना जाता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का दायित्व केवल उपचार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वे मरीजों और उनके परिवारों में विश्वास और आत्मबल भी जगाते हैं।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.20-pm.mp4" controls=""></video>
<p>कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पुस्तकों <strong>"दिल की बात"</strong> और <strong>"बच्चों में बढ़ता दृष्टि दोष"</strong> का विधिवत विमोचन किया गया। इन पुस्तकों का लेखन वरिष्ठ चिकित्सक <strong>डॉ. बी.डी. त्रिपाठी</strong> और <strong>डॉ. नेहा त्रिपाठी</strong> ने किया है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने इन पुस्तकों को चिकित्सा जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि सरल भाषा में तैयार की गई ऐसी पुस्तकें आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी विषयों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेंगी। <strong>"दिल की बात"</strong> पुस्तक में हृदय रोगों, उनके कारणों, बचाव और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। वहीं <strong>"बच्चों में बढ़ता दृष्टि दोष"</strong> पुस्तक में वर्तमान समय में बच्चों में तेजी से बढ़ रही आंखों की समस्याओं, डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग, समय पर जांच और उचित देखभाल के बारे में उपयोगी जानकारी दी गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पुस्तकें जनजागरूकता अभियान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm-(1).mp4" controls=""></video>
<p>कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण चिकित्सा क्षेत्र में लंबे समय से उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान समारोह भी रहा। विभिन्न विशेषज्ञताओं से जुड़े डॉक्टरों को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं, चिकित्सा अनुसंधान, मरीजों के प्रति समर्पण और समाज में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले चिकित्सकों ने इसे अपने पूरे चिकित्सा जीवन के लिए प्रेरणादायक बताया और भविष्य में भी सेवा कार्य को उसी समर्पण के साथ जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन डॉक्टरों की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण आज भी चिकित्सा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक, आधुनिक उपकरण और उन्नत उपचार पद्धतियां तभी प्रभावी होती हैं जब उनके पीछे सेवा भाव और मरीज के प्रति समर्पण की भावना हो। उन्होंने युवाओं से भी चिकित्सा क्षेत्र को सेवा का माध्यम मानकर आगे आने का आह्वान किया। उनका कहना था कि डॉक्टर बनना केवल एक पेशा चुनना नहीं बल्कि समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करना है। आने वाले समय में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित और संवेदनशील डॉक्टरों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm.mp4" controls=""></video>
<p>कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने, संतुलित आहार अपनाने और नियमित व्यायाम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कई गंभीर बीमारियों से केवल जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से बचा जा सकता है। लोगों को स्वास्थ्य संबंधी छोटी समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने भी डॉक्टरों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा सेवा केवल शरीर का उपचार नहीं करती, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी लोगों को नई ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सेवा, करुणा और सकारात्मक सोच किसी भी डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान होती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक, मेडिकल कॉलेज के शिक्षक, मेडिकल छात्र, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान डॉक्टरों की सेवा भावना, चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धियों और स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर सार्थक चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने भी वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। डॉक्टर्स डे के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम चिकित्सा सेवा के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बना। डॉक्टरों के अनुभव और आमजन की जागरूकता मिलकर ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे आयोजन चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों का उत्साह बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी सेवा और समर्पण की प्रेरणा देते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:51:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रीवा में दो चचेरी बहनों ने एक साथ खाया जहर, आईसीयू में भर्ती; पुलिस जांच में जुटी</title>
                                    <description><![CDATA[लौर क्षेत्र की 15-15 वर्षीय किशोरियों की हालत गंभीर, मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी; घटना के कारणों का अब तक खुलासा नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/two-cousin-sisters-consumed-poison-together-in-rewa-admitted-in/article-56999"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-poison-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां दो चचेरी बहनों ने एक साथ कथित तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। घटना के बाद दोनों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते परिजन उन्हें तत्काल संजय गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें आईसीयू में भर्ती कर लिया है। फिलहाल दोनों किशोरियों का इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी अस्पताल पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। दोनों किशोरियां रीवा जिले के लौर क्षेत्र की रहने वाली हैं और दोनों की उम्र करीब 15 वर्ष बताई जा रही है। गुरुवार सुबह परिजन उन्हें गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) के रूप में दर्ज किया है, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को इसकी सूचना दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों ने एक साथ किसी जहरीले पदार्थ का सेवन किया था, लेकिन यह पदार्थ क्या था और उसे कैसे हासिल किया गया, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जब दोनों किशोरियों को इमरजेंसी में लाया गया, तब उनकी हालत काफी गंभीर थी। डॉक्टरों ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया और आवश्यक जांच के बाद दोनों को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। चिकित्सकों का कहना है कि अगले कुछ घंटे दोनों की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण हैं। मेडिकल टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है और जरूरी दवाएं एवं उपचार दिए जा रहे हैं। घटना के बाद परिवार के सदस्यों में चिंता का माहौल है। परिजनों का कहना है कि उन्हें फिलहाल यह समझ नहीं आ रहा कि दोनों किशोरियों ने ऐसा कदम क्यों उठाया। परिवार के मुताबिक घटना से पहले किसी तरह के विवाद या तनाव की जानकारी उनके सामने नहीं आई थी। हालांकि पुलिस इस बयान की भी जांच कर रही है और परिवार के अन्य सदस्यों तथा आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि घटना से जुड़ी परिस्थितियों को समझा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों किशोरियां अभी बयान देने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए जांच फिलहाल परिजनों, पड़ोसियों और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जहरीला पदार्थ कहां से आया, दोनों ने उसका सेवन कब किया और घटना से पहले उनके साथ क्या हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल कॉलेज में मामला दर्ज होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने भी उपचार से संबंधित सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की स्थिति में सुधार लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। यदि उनकी हालत में सुधार होता है और वे बयान देने की स्थिति में आती हैं, तो पुलिस उनसे भी पूछताछ करेगी। फिलहाल प्राथमिकता दोनों की जान बचाने और उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराने पर है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटना ने इलाके के लोगों को भी हैरान कर दिया है। दो किशोरियों के एक साथ बीमार पड़ने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में चर्चा शुरू हो गई। हालांकि पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी तरह की अफवाह या अपुष्ट जानकारी साझा न करें। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही, दबाव या अन्य कारण सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घटना का कारण स्पष्ट नहीं है और जांच जारी है। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोनों किशोरियों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और स्वास्थ्य में होने वाले हर बदलाव की जानकारी पुलिस को भी दी जा रही है। रीवा जिले की यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि किशोरों से जुड़े ऐसे मामलों में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों के सामने आने का इंतजार करना जरूरी होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:24:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईको पार्क शुल्क विवाद पर आप नेता प्रमोद शर्मा पर केस दर्ज, प्रदर्शन के दौरान मारपीट के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिना अनुमति धरना, सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने और हाथापाई के आरोप; अवैध वसूली का मुद्दा उठाकर कर रहे थे विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/case-registered-against-aap-leader-pramod-sharma-on-eco-park/article-56638"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/eco-park-fee-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा शहर के ईको पार्क में प्रवेश शुल्क को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। रविवार को पार्क परिसर में हुए हंगामे के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया, सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न की और पार्क परिसर में विवाद की स्थिति पैदा की। वहीं दूसरी ओर प्रमोद शर्मा का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह जनहित में था और वे पार्क में हो रही कथित अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।  ईको पार्क में लगाए गए प्रवेश शुल्क को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा था। आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा लगातार इस मुद्दे को उठा रहे थे और प्रशासन से शुल्क व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे थे। रविवार को उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पार्क परिसर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग पार्क के प्रवेश द्वार और परिसर के आसपास एकत्र हो गए थे, जिससे कुछ समय के लिए अव्यवस्था की स्थिति बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन कुछ देर बाद पार्क प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि प्रवेश शुल्क और उसके औचित्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात धीरे-धीरे तनावपूर्ण होते गए और कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान पार्क परिसर में मौजूद पर्यटकों और परिवारों के बीच भी असहज माहौल बन गया। कई लोग अचानक हुए विवाद से घबरा गए और पार्क से बाहर निकलने लगे। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार समय रहते हस्तक्षेप किए जाने से बड़ा विवाद टल गया। हालांकि घटना के बाद पार्क प्रबंधन और पुलिस की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर प्रमोद शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और विरोध के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। प्रमोद शर्मा का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ और उनके समर्थकों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क कर्मचारियों ने विरोध को दबाने की कोशिश की और विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाया। दूसरी तरफ पार्क प्रबंधन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के व्यवहार के कारण कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रमोद शर्मा ने कहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य ईको पार्क में कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाना था। उनका दावा है कि पार्क में प्रति व्यक्ति 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं और इस संबंध में स्पष्ट जानकारी आम लोगों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क में प्रवेश शुल्क के नाम पर लोगों से अनुचित राशि ली जा रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद पुलिस ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि पार्क परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विवाद किस परिस्थिति में शुरू हुआ और हाथापाई की नौबत कैसे आई। जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फिलहाल पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। ईको पार्क शुल्क को लेकर उठा यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक वर्ग जहां प्रवेश शुल्क व्यवस्था का समर्थन कर रहा है, वहीं कुछ लोग शुल्क की दरों और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और दोनों पक्षों के आरोपों में कितनी सच्चाई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक्सपायर दवा का आरोप, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[आईसीयू में भर्ती मरीज के परिजनों ने उठाए सवाल, अस्पताल अधीक्षक बोले- शिकायत गंभीर, दोषियों पर होगी कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/investigation-started-into-allegations-of-expired-medicine-in-rewas-sanjay/article-56381"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-sanjay-gandhi-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में मरीजों को एक्सपायर दवा और इंजेक्शन दिए जाने के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला उस समय उजागर हुआ जब अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने दावा किया कि उनके परिजन को उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी दवा दी गई। शिकायत सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऐसी दवाओं से मरीज की जान को तत्काल कोई खतरा नहीं होता, फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। विवेक त्रिपाठी ने अस्पताल प्रबंधन और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं। उनका कहना है कि 18 जून को इलाज के दौरान जो दवा और इंजेक्शन दिए गए, उनकी एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी थी। परिजनों ने दवा के पैकेट और इंजेक्शन की तस्वीरें भी साझा की हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद मरीजों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है। मामले के सार्वजनिक होते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई और दवाओं के स्टॉक की जांच शुरू की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्पताल में दवाओं की वैधता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है। यदि एक्सपायर दवाओं के उपयोग की पुष्टि होती है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत केवल एक्सपायर दवाओं तक सीमित नहीं है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के लिए शुल्क लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। कई मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं क्योंकि अस्पताल में जरूरी दवाओं का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि पैनटॉप इंजेक्शन सहित कई आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है। दिल के मरीजों को दी जाने वाली कुछ दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों के परिजनों को मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। अस्पताल की एक अन्य बड़ी समस्या वार्ड ब्वाय और सहायक स्टाफ की कमी को लेकर सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर से लेकर वार्ड तक मरीजों को ले जाने की जिम्मेदारी भी कई बार परिवार के सदस्यों को ही निभानी पड़ती है। हाल ही में कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों के परिजन खुद स्ट्रेचर धकेलते दिखाई दिए। यही स्थिति न्यूरो और अन्य विभागों में भी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में 51 वार्ड ब्वाय तैनात होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन मरीजों और परिजनों का कहना है कि जरूरत के समय वे दिखाई नहीं देते। कई लोगों का आरोप है कि वार्ड ब्वाय का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है, जबकि मरीजों की मूलभूत जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी। अस्पताल की स्थापना का उद्देश्य रीवा और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े शहरों में जाने से राहत देना था। लेकिन हाल के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक्सपायर दवा देने की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस बीच मरीजों और उनके परिजनों की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:08:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में ठेकेदार के घर ईडी की रेड से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[पद्मधर कॉलोनी में दस्तावेजों की जांच जारी, परिजनों ने आईडी और समन की मांग की, कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चा तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/ed-raid-on-contractors-house-in-rewa-creates-stir/article-56380"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ed-raid-rewa-contractor-house.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा शहर के वार्ड क्रमांक-5 स्थित पद्मधर कॉलोनी में शुक्रवार सुबह उस समय अचानक हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने ठेकेदार के घर पर दबिश दी। लालता सदन नामक इस आवास पर सुबह-सुबह पहुंची ईडी की टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, पूरे इलाके में हलचल फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा होने लगे। अचानक हुई इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। ईडी की 4 से 5 सदस्यीय टीम सुबह करीब समय पर कृष्णकांत सोहगौरा और सौरभ सोहगौरा के निवास पर पहुंची। बताया जा रहा है कि टीम ने घर के भीतर प्रवेश करते ही दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू कर दी। विभिन्न फाइलों, लेन-देन के कागजात और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। घर के भीतर अधिकारियों की मौजूदगी के दौरान बाहर लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच कार्रवाई के दौरान एक अलग स्थिति तब देखने को मिली जब घर में मौजूद परिजनों ने ईडी अधिकारियों से पहचान पत्र दिखाने की मांग की। परिजनों का कहना था कि बिना किसी समन के घर के अंदर कैसे प्रवेश किया गया, इस पर स्पष्टता होनी चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी हुई, हालांकि इसके बावजूद जांच टीम ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जांच प्रक्रिया को रोका नहीं गया। ईडी की टीम घर में मौजूद कई दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। वित्तीय लेन-देन से जुड़े कागजातों को अलग-अलग करके देखा जा रहा है और कुछ फाइलों को अपने साथ ले जाने की भी तैयारी की जा रही है। कार्रवाई के दौरान घर के अंदर और बाहर सुरक्षा और निगरानी का विशेष ध्यान रखा गया। वहीं, आसपास के लोग लगातार घटनाक्रम को लेकर चर्चा करते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">कृष्णकांत सोहगौरा को रीवा के चर्चित ठेकेदारों में गिना जाता है। उनका नाम स्थानीय स्तर पर कई बड़े निर्माण कार्यों से जुड़ा बताया जाता है। वह भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा के भाई भी बताए जाते हैं, जिससे इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अब तक किसी भी राजनीतिक या सरकारी स्तर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ईडी की इस कार्रवाई के पीछे के कारणों को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। एजेंसी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किस मामले में यह जांच शुरू की गई है और इसमें किन वित्तीय लेन-देन की भूमिका हो सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल ईडी की टीम मौके पर मौजूद है और दस्तावेजों की जांच जारी है। जैसे-जैसे कार्रवाई आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इलाके में तनाव और उत्सुकता दोनों बढ़ते जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:08:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM हेल्पलाइन में फर्जी शिकायतों का खेल, कुंवारे व्यक्ति की 20 साल की बेटी बताकर दर्ज कराया मामला</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के मऊगंज में 233 शिकायतों की जांच में बड़ा खुलासा, डायल-112 कर्मियों और पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने से उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/a-case-was-lodged-against-the-cm-helpline-by-pretending/article-56291"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्यप्रदेश सरकार की सीएम हेल्पलाइन-181 आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई व्यवस्था है। लेकिन रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने इस पूरी प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के रिकॉर्ड की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि शिकायतों के निपटारे का प्रतिशत बढ़ाने और रैंकिंग सुधारने के लिए फर्जी शिकायतें दर्ज कर उनका समाधान भी दिखाया गया। जांच में सामने आया कि कुल 233 शिकायतें केवल 21 मोबाइल नंबरों से दर्ज की गई थीं। रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर कई शिकायतों में समान पैटर्न दिखाई दिया। कुछ मोबाइल नंबरों से कुछ ही मिनटों के अंतराल में लगातार कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, जबकि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं के नाम और शिकायतों की प्रकृति भी संदेह पैदा करने वाली मिली। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ शिकायतें वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खाती थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया नाम के व्यक्ति से जुड़ा सामने आया। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर उनके नाम से दर्ज शिकायत में दावा किया गया था कि उनकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका चौरसिया स्कूल जाने के बाद लापता हो गई है और पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। लेकिन जब संबंधित व्यक्ति तक पहुंचकर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उनकी अभी तक शादी ही नहीं हुई है। ऐसे में 20 वर्षीय बेटी होने का सवाल ही नहीं उठता। इस खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया। इसी तरह अन्य कई शिकायतों में भी विसंगतियां सामने आईं। कुछ शिकायतों में पत्नी के लापता होने, बच्चों के गुम होने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने, चोरी, मारपीट और पुलिस कार्रवाई नहीं होने जैसे आरोप दर्ज किए गए थे। लेकिन जांच के दौरान कई शिकायतकर्ताओं के बारे में जो जानकारी सामने आई, वह शिकायतों के विवरण से मेल नहीं खाती थी। इससे यह संदेह और गहरा गया कि शिकायतें वास्तविक नागरिकों द्वारा नहीं बल्कि किसी संगठित तरीके से दर्ज की गई हो सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दस्तावेजों की पड़ताल में डायल-112 चालक प्रवेश चतुर्वेदी, डायल-112 कर्मचारी कृष्णा कुशवाहा और हवलदार विवेक यादव के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि मामले के सामने आने के बाद संबंधित पक्षों ने सीधे तौर पर किसी भी अनियमितता से इनकार किया है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज विवरण और उपलब्ध दस्तावेज कई सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शिकायतों के पैटर्न और दर्ज किए गए विवरणों की गहन जांच की आवश्यकता है। सीएम हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था की सफलता उसकी विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। यदि शिकायतें फर्जी तरीके से दर्ज की जाती हैं या उनके समाधान के आंकड़े कृत्रिम रूप से बढ़ाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर वास्तविक शिकायतकर्ताओं पर पड़ता है। ऐसे मामलों में न केवल व्यवस्था की साख प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि कई शिकायतों में घटना का विवरण सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शिकायत दर्ज कराने के लिए आमतौर पर घटना की पूरी जानकारी, शिकायतकर्ता की पहचान और अन्य जरूरी विवरण देना होता है, लेकिन कई मामलों में यह जानकारी अधूरी या संदिग्ध पाई गई। कुछ शिकायतों में समान भाषा और एक जैसी शैली का इस्तेमाल भी देखने को मिला, जिससे संगठित तरीके से शिकायतें दर्ज किए जाने की आशंका बढ़ गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। मऊगंज से सामने आया यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह केवल कुछ फर्जी शिकायतों का मामला है या फिर शिकायत निवारण प्रणाली के भीतर किसी बड़े खेल का हिस्सा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>8 साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण में नई नियुक्तियां, संसाधनों के बिना विकास की बड़ी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व विधायक पंचू लाल प्रजापति बने अध्यक्ष, 10 जिलों के विकास की जिम्मेदारी; कांग्रेस ने नियुक्तियों को बताया राजनीतिक डैमेज कंट्रोल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/new-appointments-in-vindhya-development-authority-after-8-years-big/article-56290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/vindhya-vikas-pradhikaran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार ने करीब आठ साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण को नई नेतृत्व टीम सौंपते हुए क्षेत्रीय विकास को लेकर एक नई शुरुआत का संकेत दिया है। सरकार ने पूर्व विधायक पंचू लाल प्रजापति को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि रीवा के डॉ. अजय सिंह और सतना के संजय तीर्थनी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े इस प्राधिकरण में हुई इन नियुक्तियों के बाद विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि नियुक्तियों के साथ ही कई सवाल भी सामने आए हैं, क्योंकि प्राधिकरण के पास फिलहाल न तो स्थायी कार्यालय है और न ही कोई अलग बजट निर्धारित किया गया है। विंध्य विकास प्राधिकरण का गठन क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास के उद्देश्य से किया गया था। इसके अंतर्गत रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, मैहर, मऊगंज और डिंडोरी जैसे दस जिले आते हैं। यह पूरा इलाका लंबे समय से विकास के कई मानकों पर प्रदेश के अन्य हिस्सों से पीछे माना जाता रहा है। सड़क, उद्योग, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं होने की शिकायतें लगातार उठती रही हैं। ऐसे में सरकार की ओर से प्राधिकरण को फिर से सक्रिय करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि नियुक्तियों के तुरंत बाद सबसे बड़ा सवाल संसाधनों को लेकर खड़ा हो गया है। प्राधिकरण के पास वर्तमान में अपना कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। बताया जा रहा है कि पहले जिस भवन से इसका संचालन होता था, वहां अब आईटी पार्क का निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में नए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के लिए अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही प्राधिकरण के लिए अलग से किसी बजट की घोषणा भी अब तक नहीं की गई है। जानकारों का कहना है कि बिना वित्तीय संसाधनों और प्रशासनिक ढांचे के विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। विंध्य क्षेत्र के लोग भी इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर प्राधिकरण की भूमिका आने वाले समय में कितनी प्रभावी होगी। क्षेत्र में लंबे समय से रोजगार के अवसर बढ़ाने, औद्योगिक निवेश आकर्षित करने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठती रही है। कई परियोजनाएं कागजों में बनीं लेकिन उन्हें अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। ऐसे में लोगों की उम्मीद है कि नई टीम केवल औपचारिक नियुक्तियों तक सीमित न रहकर वास्तविक विकास योजनाओं पर काम करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर, कांग्रेस ने इन नियुक्तियों को लेकर सरकार को घेरा है। रीवा जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंजीनियर राजेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास की बजाय राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि जिन नेताओं को संगठन या सत्ता में स्थान नहीं मिल पाया, उन्हें समायोजित करने के लिए ऐसे पदों का उपयोग किया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि यदि सरकार वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर होती तो पहले कार्यालय, बजट और कार्ययोजना की स्पष्ट व्यवस्था करती। वहीं, प्राधिकरण के नव नियुक्त पदाधिकारियों ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही कार्यालय तथा अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल रीवा के सिविल लाइन क्षेत्र में अस्थायी कार्यालय की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा। अध्यक्ष पंचू लाल प्रजापति ने भी कहा कि विंध्य के लिए नई विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी और क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकताएं तय होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विंध्य विकास प्राधिकरण का इतिहास भी क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा रहा है। वर्ष 1948 में विंध्य प्रदेश एक अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में अस्तित्व में था और उसकी राजधानी रीवा हुआ करती थी। बाद में राज्य पुनर्गठन के साथ यह क्षेत्र मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया। क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और विकास को गति देने के उद्देश्य से 27 सितंबर 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विंध्य विकास प्राधिकरण की स्थापना की थी। अजय प्रताप सिंह इसके पहले अध्यक्ष बने थे, जबकि वर्ष 2017 में सुभाष सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पिछले आठ वर्षों से प्राधिकरण लगभग निष्क्रिय स्थिति में था और समय-समय पर इसके भविष्य को लेकर अटकलें भी लगती रहीं। कई बार इसके समाप्त किए जाने की चर्चाएं भी सामने आईं। अब नई नियुक्तियों के बाद एक बार फिर उम्मीदें जागी हैं। हालांकि असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी, जब यह देखा जाएगा कि प्राधिकरण केवल राजनीतिक नियुक्तियों तक सीमित रहता है या वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास का प्रभावी माध्यम बन पाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा का सुंदरजा आम बना ग्लोबल ब्रांड, अबूधाबी जाएगी बड़ी खेप</title>
                                    <description><![CDATA[जीआई टैग से मिली नई पहचान, बेमिसाल मिठास और खुशबू के दम पर विदेशों में बढ़ी मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/rewas-sundarja-mango-becomes-global-brand-large-consignment-will-go/article-55991"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sundarja-mango-rewa.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के रीवा जिले का विश्व प्रसिद्ध सुंदरजा आम अब देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास पहचान बना रहा है। अपनी अनोखी मिठास, मनमोहक खुशबू और रेशा-मुक्त बनावट के कारण यह आम लगातार लोकप्रिय होता जा रहा है। रीवा की धरती पर पैदा होने वाला यह खास आम अब वैश्विक बाजार में एक प्रीमियम उत्पाद के रूप में देखा जा रहा है। इस साल इसकी एक बड़ी खेप अबूधाबी भेजी जाने की तैयारी है, जिसकी अग्रिम बुकिंग पहले ही हो चुकी है। इससे न केवल रीवा के किसानों और बाग मालिकों में उत्साह है, बल्कि पूरे क्षेत्र को आर्थिक रूप से भी फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। सुंदरजा आम का इतिहास रीवा की रियासतकालीन विरासत से जुड़ा हुआ है। कभी यह आम केवल गोविंदगढ़ किले के शाही बगीचों तक सीमित था और राजघरानों की पसंद माना जाता था। समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और अब यह आम देश के कई बड़े शहरों के साथ विदेशों तक पहुंच चुका है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से हर साल बड़ी संख्या में लोग सुंदरजा आम की अग्रिम बुकिंग कराते हैं। इसके अलावा फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका और खाड़ी देशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा स्थित कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में आम की लगभग 237 प्रजातियों पर शोध कार्य किया जाता है। इन सभी प्रजातियों में सुंदरजा आम को विशेष महत्व प्राप्त है। इसकी गुणवत्ता और विशिष्ट पहचान को देखते हुए इसे भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी मिल चुका है। जीआई टैग मिलने के बाद इस आम की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग से न केवल उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य भी मिलता है। सुंदरजा आम की सबसे बड़ी खासियत इसकी रेशा-मुक्त बनावट है। आमतौर पर कई आमों में रेशे अधिक होते हैं, लेकिन सुंदरजा पूरी तरह मुलायम गूदे वाला होता है। इसके अलावा इसमें मिठास का स्तर संतुलित माना जाता है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जाता है कि मधुमेह के मरीज सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं, हालांकि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी सलाह के लिए विशेषज्ञ की राय जरूरी होती है। इसकी सुगंध इतनी खास होती है कि आम खाने के बाद लंबे समय तक हाथों में इसकी खुशबू महसूस की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गोविंदगढ़ और कुठुलिया अनुसंधान केंद्र में उगाए जाने वाले सुंदरजा आमों के रंग में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। गोविंदगढ़ का सुंदरजा आम हल्की सफेद आभा लिए होता है, जबकि अनुसंधान केंद्र में उगने वाला आम हल्के हरे रंग का दिखाई देता है। हालांकि स्वाद और सुगंध दोनों ही जगहों के आमों की सबसे बड़ी पहचान हैं। फल वैज्ञानिकों का मानना है कि गोविंदगढ़ क्षेत्र की मिट्टी और वहां की जलवायु इस आम को विशिष्ट स्वाद प्रदान करती है। बाजार में बढ़ती मांग का असर बगीचों की नीलामी पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जिन बगीचों की बोली कुछ साल पहले एक लाख रुपये के आसपास लगती थी, उनकी कीमत अब कई गुना बढ़ चुकी है। इस वर्ष कुछ बगीचों की नीलामी 20 लाख रुपये से अधिक में हुई है। ठेकेदारों और व्यापारियों का कहना है कि सुंदरजा आम की मांग इतनी अधिक है कि उपलब्ध उत्पादन उसकी तुलना में कम पड़ रहा है। यही वजह है कि हर साल इसकी कीमत और लोकप्रियता दोनों बढ़ रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाल ही में इंदौर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी सुंदरजा आम की चर्चा हुई थी। वहां मौजूद कई विदेशी प्रतिनिधियों ने इसके स्वाद और गुणवत्ता की सराहना की। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की रुचि और बढ़ी है। अबूधाबी भेजी जा रही खेप को इसी बढ़ती मांग का परिणाम माना जा रहा है। व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में सुंदरजा आम की पहुंच और अधिक देशों तक होगी। फल अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि उत्पादन और निर्यात को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया जाए तो सुंदरजा आम रीवा की पहचान को वैश्विक स्तर पर और मजबूत कर सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नया आधार मिलेगा। फिलहाल सुंदरजा आम की सफलता यह साबित कर रही है कि स्थानीय उत्पाद भी गुणवत्ता और पहचान के दम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग जगह बना सकते हैं। रीवा का यह खास आम अब केवल एक फल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और कृषि विरासत का प्रतीक बन चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रीवा में वकील से पुलिस की मारपीट का VIDEO वायरल, सड़क पर घसीटकर थाने ले जाने के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[आदिवासी परिवार की जमीन पर कार्रवाई के दौरान हुआ विवाद, अधिवक्ता ने पुलिस पर कपड़े फाड़ने और जान से मारने की आशंका जताई, प्रशासन ने जांच के दिए संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/video-of-police-assaulting-a-lawyer-in-rewa-goes-viral/article-55717"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-lawyer-assault.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रीवा में पुलिस और एक अधिवक्ता के बीच हुए विवाद का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। दो दिन पहले हुई घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी अधिवक्ता नीरज वर्मा को कॉलर पकड़कर सड़क पर घसीटते और धक्का-मुक्की करते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान आसपास लोगों की भीड़ भी मौजूद थी। वीडियो वायरल होने के बाद अधिवक्ता संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना समान थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां प्रशासनिक टीम एक आदिवासी परिवार की जमीन पर कार्रवाई करने पहुंची थी। बताया जा रहा है कि प्रशासन संबंधित जमीन पर बने मकान को हटाने की कार्रवाई कर रहा था। इसी दौरान अधिवक्ता नीरज वर्मा मौके पर पहुंचे और उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए जमीन से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों को दिखाने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर काफी देर तक बहस होती रही और फिर हालात अचानक बिगड़ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि अधिवक्ता कुछ दस्तावेज हाथ में लेकर पुलिसकर्मियों से बात कर रहे हैं। इसी बीच पुलिसकर्मी उन्हें पकड़कर आगे बढ़ाते हैं। कुछ पुलिसकर्मी उनकी कॉलर पकड़कर सड़क पर ले जाते दिखाई देते हैं। वीडियो में धक्का-मुक्की की स्थिति भी नजर आ रही है। घटना के दौरान अधिवक्ता के कपड़े फटने की बात भी सामने आई है। अधिवक्ता का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी वकालती यूनिफॉर्म और काला कोट तक फाड़ दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिवक्ता नीरज वर्मा का कहना है कि जिस जमीन पर कार्रवाई की जा रही थी, वह आदिवासी पट्टे की भूमि है। उनके अनुसार श्यामलाल कोल, बृजलाल कोल, बबलू कोल और अर्जुन कोल के नाम पर यह जमीन कई दशक पहले से दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित मामले में अपील लंबित थी और न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुए बिना मकान गिराने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी वजह से वह दस्तावेज लेकर मौके पर पहुंचे थे ताकि प्रशासन को स्थिति से अवगत कराया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">नीरज वर्मा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाए तो पुलिसकर्मियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया मानो वह कोई गंभीर अपराधी हों। अधिवक्ता का कहना है कि उन्हें जबरन पकड़कर थाने ले जाया गया और कई घंटों तक वहीं बैठाए रखा गया। उनका आरोप है कि उस समय उन्हें अपनी जान का भी खतरा महसूस हो रहा था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। समान थाना प्रभारी विजय सिंह का कहना है कि प्रशासनिक टीम विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही थी। उनके अनुसार अधिवक्ता लगातार शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे थे और अधिकारियों के काम में हस्तक्षेप कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि उन्हें कई बार समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन जब स्थिति सामान्य नहीं हुई तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें मौके से हटाकर थाने ले जाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब कार्रवाई के आधार को लेकर सवाल उठे। बताया गया कि जब अधिकारियों से मकान हटाने के लिए कथित कोर्ट आदेश की प्रति मांगी गई तो मौके पर उसे प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इससे कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा है कि मामले की नए सिरे से जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उपलब्ध दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार यदि कहीं प्रक्रिया संबंधी त्रुटि पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय स्तर पर भी लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">वीडियो सामने आने के बाद यह मामला केवल पुलिस और अधिवक्ता के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसमें प्रशासनिक कार्रवाई, आदिवासी परिवार की जमीन, बेदखली प्रक्रिया और सरकारी अधिकारों के इस्तेमाल जैसे कई मुद्दे जुड़ गए हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक ओर अधिवक्ता खुद के साथ अन्याय होने की बात कह रहे हैं तो दूसरी ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रही है। अब सबकी नजर प्रशासन की प्रस्तावित जांच पर टिकी हुई है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और वायरल वीडियो की परिस्थितियों को किस तरह देखा जाता है, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:59:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>6 दिन बाद सिलपरा डैम से मिला सेना के जवान का शव</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के सिलपरा डैम में नहाते समय डूबे जवान गौरव द्विवेदी का शव एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की संयुक्त कार्रवाई में बरामद, नहर का पानी रोककर चलाया गया विशेष अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/dead-body-of-army-soldier-found-from-silpara-dam-after/article-55420"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gaurav-dwivedi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा जिले के सिलपरा डैम में छह दिन पहले लापता हुए सेना के जवान गौरव द्विवेदी का शव आखिरकार मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पिछले कई दिनों से लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को यह सफलता मिली। जवान के शव के मिलने के साथ ही परिवार और गांव के लोगों की उम्मीदें टूट गईं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया। बताया जा रहा है कि 28 वर्षीय गौरव द्विवेदी पिछले सप्ताह अपने भाई-बहनों के साथ सिलपरा डैम घूमने गए थे, जहां नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते लापता हो गए। घटना के बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी, लेकिन डैम की गहराई और पानी की स्थिति के कारण शुरुआती दिनों में सफलता नहीं मिल सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरव द्विवेदी रीवा जिले के बघवार गांव के रहने वाले थे और भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार के लोगों ने बताया कि वह छुट्टी पर घर आए हुए थे। बुधवार सुबह वह अपने भाई-बहनों और कुछ परिचितों के साथ सिलपरा डैम पहुंचे थे। मौसम सामान्य था और सभी लोग डैम के किनारे समय बिता रहे थे। इसी दौरान गौरव पानी में उतर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे हिस्से की ओर चले गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश भी की, लेकिन कुछ ही पलों में वह पानी में ओझल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। उसी दिन से जवान की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया था। शुरुआती चरण में स्थानीय गोताखोरों और एसडीईआरएफ की टीम ने डैम में सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों तक पानी में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया और एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। पिछले छह दिनों तक लगातार बोट, गोताखोरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से तलाश जारी रही। बावजूद इसके जवान का कोई पता नहीं चल सका।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार डैम में पानी की गहराई और तेज बहाव रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे। कई बार गोताखोरों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई सफलता नहीं मिली तो प्रशासन ने एक अलग रणनीति अपनाने का फैसला किया। मंगलवार को नहर का पानी पूरी तरह रोक दिया गया ताकि डैम में जलस्तर कम किया जा सके। बताया गया कि पानी की गहराई करीब 40 फीट तक कम होने के बाद खोज अभियान को नई दिशा मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार सुबह करीब छह बजे एनडीआरएफ की आगरा स्थित स्पेशल टास्क फोर्स और एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम ने एक बार फिर अभियान शुरू किया। इस दौरान डैम के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां जवान के होने की संभावना जताई जा रही थी। कई घंटे तक लगातार चली खोजबीन के बाद सुबह करीब नौ बजे जवान का शव पानी के भीतर से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की खबर मिलते ही मौके पर मौजूद परिजन भावुक हो गए। कई दिनों से चल रही तलाश का अंत तो हुआ, लेकिन परिणाम बेहद दुखद रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">शव को बाहर निकालने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने पूरे अभियान में शामिल रेस्क्यू टीमों के प्रयासों की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीमों ने लगातार मेहनत की और आखिरकार जवान को खोज निकालने में सफलता प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरव द्विवेदी की मौत की खबर से बघवार गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग उन्हें एक शांत स्वभाव और जिम्मेदार युवा के रूप में याद कर रहे हैं। सेना में उनकी सेवा को लेकर ग्रामीणों में गर्व था और उनके भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के गांवों से भी लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। यह घटना एक बार फिर जलाशयों और डैम क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम से पहले और बाद में ऐसे स्थानों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन भी समय-समय पर लोगों को गहरे पानी में न जाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देता रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:13:57 +0530</pubDate>
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                <title>सिलपरा डैम में दो लापता लोगों का सुराग नहीं, परिजनों का चक्का जाम</title>
                                    <description><![CDATA[18 मई से लापता युवक और 3 जून को डूबे सेना के जवान की तलाश जारी, वाराणसी से पहुंची एनडीआरएफ टीम; परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/there-is-no-trace-of-two-missing-people-in-silpara/article-55274"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/silpara-dam-rewa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा जिले के सिलपरा डैम और उससे जुड़ी नहर क्षेत्र में दो लोगों के लापता होने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। कई दिनों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद न तो 18 मई से लापता युवक अरुण कुमार विश्वकर्मा का कोई पता चल पाया है और न ही 3 जून को डैम में डूबे सेना के जवान गौरव द्विवेदी का सुराग मिला है। दोनों मामलों में लगातार असफल हो रहे खोज अभियान को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। रविवार को इसी नाराजगी ने विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया, जब बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम किया और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार अरुण कुमार विश्वकर्मा 18 मई की रात संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन शुरुआती दिनों में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। घटना के लगभग तीन दिन बाद बिछिया थाना पुलिस को सिलपरा नहर के किनारे उनकी बाइक और चप्पल लावारिस हालत में मिली थी। इसके बाद आशंका जताई गई कि वह नहर में गिर गए होंगे या किसी हादसे का शिकार हुए होंगे। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद से खोज अभियान शुरू किया। पिछले कई दिनों से नहर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">खोज अभियान को प्रभावी बनाने के लिए नहर का पानी भी दो बार बंद कराया गया। अधिकारियों को उम्मीद थी कि पानी का बहाव कम होने के बाद तलाशी अभियान आसान हो जाएगा और किसी तरह का सुराग मिल सकता है। हालांकि इतनी मशक्कत के बावजूद न तो युवक का कोई पता चला और न ही कोई ऐसा सबूत मिला जिससे घटना की दिशा स्पष्ट हो सके। यही वजह है कि परिवार के लोग लगातार चिंता और अनिश्चितता के बीच समय गुजार रहे हैं। इसी बीच 3 जून को एक और घटना ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दीं। बघवार गांव निवासी और भारतीय सेना में तैनात 28 वर्षीय जवान गौरव द्विवेदी सिलपरा डैम में नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते लापता हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें बचाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह पानी में डूब गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। कई दिनों तक डैम के विभिन्न हिस्सों में तलाश चलती रही, लेकिन जवान का भी कोई सुराग नहीं मिला। सेना के जवान के लापता होने से इलाके में चिंता और बढ़ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दो अलग-अलग घटनाओं में लगातार नाकामी मिलने के बाद परिजनों का धैर्य जवाब देने लगा। रविवार को दोनों परिवारों के सदस्य और ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़क पर एकत्र हुए और चक्का जाम कर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शुरुआती चरण में खोज अभियान उतनी गंभीरता से नहीं चलाया गया जितनी जरूरत थी। उनका कहना है कि यदि पहले दिन से ही पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ टीम लगाई जाती तो शायद अब तक कोई परिणाम सामने आ चुका होता। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन से जवाब मांगा और खोज अभियान में तेजी लाने की मांग की। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सिलपरा डैम और नहर क्षेत्र में पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर कोई स्थायी कदम नहीं उठाए गए। लोगों ने डैम क्षेत्र में सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस योजना बनाने की मांग भी की। प्रदर्शन के कारण कुछ समय तक यातायात प्रभावित रहा और मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन ने अब खोज अभियान को और मजबूत करने का फैसला लिया है। अधिकारियों ने वाराणसी से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की विशेष टीम को रीवा बुलाया है। टीम के सदस्य आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंच चुके हैं। एनडीआरएफ ने सिलपरा डैम और नहर क्षेत्र का प्रारंभिक निरीक्षण भी शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उन्नत तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से पानी के भीतर खोज अभियान को नई दिशा मिलेगी। प्रशासन का दावा है कि दोनों मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है और सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।  परिजनों की चिंता अभी कम नहीं हुई है। उनका कहना है कि जब तक उनके अपनों का पता नहीं चलता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 13:40:39 +0530</pubDate>
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