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                <title>contaminated water - दैनिक जागरण</title>
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                <description>contaminated water RSS Feed</description>
                
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                <title>गुना में दूषित पानी पीने से 18 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[टूटी पाइपलाइन से घरों में पहुंचा गंदा पानी, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/18-children-admitted-to-hospital-after-drinking-contaminated-water-in/article-55283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के गुना शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में गंदा पानी सप्लाई होने के बाद करीब 18 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण पेयजल में गंदगी और दूषित तत्व मिल गए, जिससे यह स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी का रंग भी सामान्य नहीं था, लेकिन शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया। बाद में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो मामला गंभीर हो गया। एक-एक कर कई बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। कुछ बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण भी दिखाई दिए, जिसके बाद परिजन घबरा गए और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चों में डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी पीने से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे जल्दी प्रभावित होते हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार बच्चों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। माना जा रहा है कि टूटी पाइपलाइन के जरिए नालियों और आसपास जमा गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया। प्रशासन ने मुख्य वाटर टैंक और संबंधित पाइपलाइन क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही जिन स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, वहां मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत की जाती तो बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, वहां लोग पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही उपयोग करें। इसके अलावा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उबालने से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने को कहा है। यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने ओआरएस घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। गुना में सामने आया यह मामला एक बार फिर शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पेयजल की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:04:59 +0530</pubDate>
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                <title>भिलाई में पीलिया का खतरा बढ़ा, बीएसपी ने पाइपलाइन बदलने का काम तेज किया</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी, प्रभावित इलाकों में कैंप और सैंपलिंग बढ़ाई गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/risk-of-jaundice-increased-in-bhilai-bsp-expedited-the-work/article-51029"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(14).jpg" alt=""></a><br /><p>भिलाई में पीलिया (जॉन्डिस) के बढ़ते मामलों ने प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। शहर के कई इलाकों में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और सैंपलिंग तेज कर दी है। वहीं, बीएसपी प्रबंधन ने वर्षों पुरानी पाइपलाइन को बदलने का काम भी शुरू कर दिया है, जिसे संक्रमण का संभावित कारण माना जा रहा है।</p>
<p>भिलाई नगर में लगातार पीलिया के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। प्रभावित क्षेत्रों में पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं और उनकी जांच की जा रही है। इसके साथ ही विभाग की टीम नियमित रूप से स्थिति की मॉनिटरिंग कर रही है ताकि संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा सके।</p>
<p><strong>कैसे फैल रहा संक्रमण</strong><br />प्राथमिक जांच में सामने आया है कि पुराने और जर्जर पाइपलाइन सिस्टम से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई पाइपलाइनें नालों के भीतर से गुजरती थीं, जिससे दूषित पानी की आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण बीएसपी प्रबंधन ने पाइपलाइन को बदलने का काम शुरू किया है और उन्हें सड़क के ऊपर से सुरक्षित तरीके से शिफ्ट किया जा रहा है।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाने की तैयारी की है, ताकि लोगों की जांच की जा सके और शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज शुरू हो सके। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों को साफ पानी के उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है।</p>
<p><strong>लक्षणों को लेकर चेतावनी</strong><br />विभाग ने स्पष्ट किया है कि पीलिया के शुरुआती लक्षणों में भूख कम लगना, पेशाब का पीला होना, उल्टी, सिर दर्द, थकान और आंखों तथा त्वचा का पीला पड़ना शामिल है। संक्रमण आमतौर पर दूषित पानी और खराब भोजन से फैलता है और इसके लक्षण 15 से 50 दिनों के भीतर सामने आ सकते हैं।</p>
<p>फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और बीएसपी की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार कार्य तेजी से जारी है। प्रशासन का दावा है कि हालात पर नियंत्रण पाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:11:22 +0530</pubDate>
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