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                <title>Local News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Local News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सरगुजा में दो भीषण सड़क हादसे, चार लोगों की मौत; मैनपाट में तीन युवकों ने गंवाई जान</title>
                                    <description><![CDATA[तेज रफ्तार दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की मौत, नेशनल हाईवे-43 पर ट्रक की चपेट में आने से महिला की जान गई; पुलिस जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/four-people-died-in-two-horrific-road-accidents-in-surguja/article-58490"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surguja-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में शुक्रवार रात दो अलग-अलग सड़क हादसों ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। जिले के मैनपाट क्षेत्र में तेज रफ्तार दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि कुछ ही घंटों बाद नेशनल हाईवे-43 पर एक अज्ञात ट्रक की टक्कर से बाइक सवार महिला की जान चली गई। दोनों हादसों के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है। शुरुआती जांच में मैनपाट हादसे में तेज रफ्तार को प्रमुख वजह माना जा रहा है, जबकि हाईवे हादसे में ट्रक चालक की लापरवाही की आशंका जताई गई है। मृतकों की पहचान अर्जुन लोहार (23), विफल कुमार माझी (21), गुड्डू राम (22) और रीता एक्का (48) के रूप में हुई है। पुलिस ने शवों का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। इन घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>पहला हादसा कमलेश्वरपुर थाना क्षेत्र के नर्मदापुर-बिजलहवा मुख्य मार्ग पर शुक्रवार रात करीब आठ बजे हुआ। पुलिस के अनुसार दो तेज रफ्तार बाइक आमने-सामने टकरा गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और सवार कई फीट दूर सड़क पर जा गिरे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन लुंड्रा निवासी अर्जुन लोहार और सीतापुर के कोट गांव निवासी गुड्डू राम की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। तीसरे युवक विफल कुमार माझी को गंभीर हालत में पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि विफल कुमार अपने दोस्त गुड्डू राम के साथ मैनपाट घूमने गया था और लौटते समय यह दर्दनाक हादसा हो गया। वहीं अर्जुन लोहार अपनी ससुराल नर्मदापुर जा रहा था। उसकी शादी करीब एक वर्ष पहले हुई थी और परिवार में उसकी अचानक मौत से मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दोनों क्षतिग्रस्त बाइकों को जब्त कर लिया है। प्रारंभिक जांच में मौसम सामान्य होने की बात सामने आई है, इसलिए दुर्घटना की प्रमुख वजह तेज रफ्तार और नियंत्रण खोना माना जा रहा है। हालांकि पुलिस तकनीकी जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरी घटना की पड़ताल कर रही है।</p>
<p>दूसरा हादसा नेशनल हाईवे-43 पर सेदम बाजार के पास हुआ, जहां बाइक से घर लौट रहे दंपती को पीछे से आ रहे एक अज्ञात ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में देवरी निवासी 48 वर्षीय रीता एक्का की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति सुखन एक्का गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार दोनों सीतापुर से अपने घर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ट्रक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए पुलिस ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।  सरगुजा जिले में एक ही रात चार लोगों की मौत ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर, 3 एकड़ की अवैध प्लाटिंग भी ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने जलभराव रोकने और अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाते हुए पंडरी, सुखराम नगर और ब्रम्हदेईपारा में अतिक्रमण हटाया, अवैध प्लाटिंग पर भी बड़ी कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/bulldozer-runs-on-illegal-encroachments-in-raipur-illegal-plotting-of/article-58486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">रायपुर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या और लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ नगर निगम ने बड़ा अभियान चलाया। निगम की टीम ने शुक्रवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए नालों पर किए गए अतिक्रमण हटाए, अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया और बिना अनुमति किए गए निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। इस अभियान के तहत पंडरी कपड़ा बाजार के दुर्गा नगर क्षेत्र में नाले पर बने अवैध पाटे को तोड़ा गया, जबकि सुखराम नगर में करीब तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को भी ध्वस्त कर दिया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में नालों पर कब्जों के कारण जल निकासी बाधित होती है, जिससे आसपास की बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनती है। इसी को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में बिना अनुमति किए गए कब्जों, अवैध प्लाटिंग और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर विभिन्न जोनों की टीमों ने जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन का कहना है कि शहर को जलभराव मुक्त बनाने और नियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।</p>
<p>कार्रवाई की शुरुआत पंडरी स्थित प्रकाश होलसेल मार्केट के सामने से की गई, जहां नाले पर करीब 100 वर्गफीट का अवैध पाटा बनाकर कब्जा किया गया था। नगर निगम के अनुसार संबंधित दुकान संचालक ने नाले के ऊपर निर्माण कर लिया था, जिससे नाले की नियमित सफाई प्रभावित हो रही थी। बारिश के दौरान यही अतिक्रमण दुर्गा नगर और आसपास की बस्तियों में जलभराव की बड़ी वजह बन रहा था। शिकायतों और निरीक्षण के बाद निगम की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की सहायता से अवैध निर्माण को हटा दिया। अधिकारियों ने बताया कि मानसून में नालों की सफाई और पानी की निर्बाध निकासी प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी कारण ऐसे सभी निर्माणों को हटाया जा रहा है, जो जल निकासी में बाधा बन रहे हैं। इसके साथ ही नगर निगम की जोन-1 नगर निवेश विभाग की टीम ने संत कबीर दास वार्ड क्रमांक-3 के सुखराम नगर में दो अलग-अलग स्थानों पर लगभग तीन एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग के खिलाफ भी कार्रवाई की। मौके पर पहुंची टीम ने प्लाटिंग के लिए बनाई गई मुरम सड़क को काट दिया, प्रवेश मार्ग बंद कर दिया और तैयार की गई नींव को भी ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के विकास को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है, ताकि भविष्य में लोगों को किसी प्रकार की कानूनी या मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। नगर निगम ने संबंधित भूमि के वास्तविक स्वामित्व की जानकारी प्राप्त करने के लिए रायपुर तहसीलदार को पत्र भी भेजा है। भूमि मालिक की जानकारी मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>इसी अभियान के दौरान वीर शिवाजी वार्ड क्रमांक-16 के ब्रम्हदेईपारा क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। यहां नाले के किनारे बनाई गई एक अवैध झोपड़ी को हटाया गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हो रही थी। निगम अधिकारियों के अनुसार मानसून में शहर के संवेदनशील इलाकों में जलभराव रोकने के लिए ऐसे सभी अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि बिना अनुमति किए गए निर्माण न केवल शहर की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि बारिश के दौरान नागरिकों के लिए गंभीर समस्याएं भी पैदा करते हैं। इसलिए भविष्य में भी अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण या प्लाटिंग न करें और नगर नियोजन से जुड़े नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि शहर के सुनियोजित विकास, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षित आवासीय वातावरण के लिए अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। नगर निगम लगातार ऐसे क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है, जहां अवैध प्लाटिंग या नालों पर कब्जे की शिकायतें मिल रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बृहस्पति कुंड में डूबे नर्सिंग छात्र का शव 36 घंटे बाद मिला, दो दिन चला रेस्क्यू ऑपरेशन</title>
                                    <description><![CDATA[सतना के निजी कॉलेज में पढ़ने वाला बिहार का छात्र दोस्तों के साथ घूमने आया था, नहाने के दौरान गहरे पानी और तेज बहाव में लापता हो गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/the-body-of-a-nursing-student-who-drowned-in-brihaspati/article-58376"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/brihaspati-kund.jpg" alt=""></a><br /><p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">सतना जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बृहस्पति कुंड में डूबे नर्सिंग छात्र का शव करीब 36 घंटे बाद गुरुवार को पानी में तैरता मिला। दो दिनों तक लगातार चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव दिखाई देने पर बरौंधा पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उसे बाहर निकाला गया। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस घटना से छात्र के साथियों और कॉलेज के विद्यार्थियों में शोक का माहौल है। मृतक की पहचान 25 वर्षीय <span class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text rFU14q_Emphasis">कुनाल ठाकुर</span> के रूप में हुई है, जो बिहार के समस्तीपुर जिले के नामपुर गांव का रहने वाला था। वह सतना के एक निजी नर्सिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और किराए के मकान में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई को वह अपने पांच दोस्तों के साथ बृहस्पति कुंड घूमने गया था। सभी दोस्त कुंड में नहाने के लिए उतरे थे। इसी दौरान कुनाल गहरे पानी की ओर चला गया। वहां तेज बहाव होने के कारण वह संतुलन नहीं बना सका और देखते ही देखते पानी में लापता हो गया। उसके दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन बहाव इतना तेज था कि वे सफल नहीं हो सके। घटना की सूचना तुरंत बरौंधा पुलिस और प्रशासन को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय गोताखोर और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। देर शाम तक छात्र की तलाश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। अगले दिन सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। रेस्क्यू टीम ने कुंड के अलग-अलग हिस्सों में खोजबीन की, जबकि स्थानीय ग्रामीण भी तलाश में जुटे रहे। लगातार करीब 36 घंटे तक चले अभियान के बाद गुरुवार सुबह पानी की सतह पर एक शव तैरता दिखाई दिया। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर शव को बाहर निकाला। पहचान होने पर पुष्टि हुई कि वह कुनाल ठाकुर का ही शव है। शव मिलने की खबर मिलते ही उसके साथियों की आंखें नम हो गईं और कॉलेज के कई छात्र भी मौके पर पहुंच गए।</p>
<p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">बरौंधा पुलिस ने मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और हादसे की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है। बृहस्पति कुंड सतना जिले का एक प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। बरसात के मौसम में यहां पानी का बहाव काफी तेज हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर पानी की गहराई अचानक बढ़ जाती है, जिससे अनजान पर्यटकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय भी कुंड में पानी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में अधिक था। कुनाल के दोस्तों ने बताया कि वह नहाते-नहाते थोड़ा आगे चला गया था। कुछ ही सेकंड में वह गहरे हिस्से में पहुंच गया और फिर नजरों से ओझल हो गया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में जलप्रपातों और कुंडों में नहाने के दौरान विशेष सतर्कता जरूरी है। तेज बहाव और गहरे पानी का अनुमान लगाना कई बार मुश्किल होता है, जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं। कुनाल ठाकुर के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। परिवार के सदस्य बिहार से सतना के लिए रवाना हो चुके हैं। कॉलेज प्रशासन ने भी छात्र के निधन पर शोक व्यक्त किया है और कहा है कि संस्थान हर संभव सहायता परिवार को उपलब्ध कराएगा। कुनाल के साथ पढ़ने वाले छात्रों ने बताया कि वह पढ़ाई में मेहनती और मिलनसार स्वभाव का था। उसके अचानक चले जाने से पूरे कॉलेज परिसर में गहरा दुख है। कई छात्र उसे याद कर भावुक हो गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मझगवां अस्पताल के डॉक्टर कक्ष में घुसा जहरीला सांप, वन विभाग ने रेस्क्यू कर टाला बड़ा हादसा</title>
                                    <description><![CDATA[सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सांप दिखते ही मरीजों और स्टाफ में मची अफरातफरी, वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/a-poisonous-snake-entered-the-doctors-room-of-majhgawan-hospital/article-58333"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/majhgawan-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जिले के मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय अफरातफरी का माहौल बन गया, जब अस्पताल के डॉक्टर कक्ष के भीतर एक जहरीला सांप दिखाई दिया। सांप को देखते ही अस्पताल में मौजूद मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्य कर्मियों में दहशत फैल गई। कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में हड़कंप जैसी स्थिति बन गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर हटने लगे। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक सांप को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह अस्पताल की नियमित गतिविधियां चल रही थीं। मरीज उपचार के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जबकि डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी अपने कार्य में व्यस्त थे। इसी दौरान डॉक्टर कक्ष में अचानक एक जहरीला सांप दिखाई दिया। जैसे ही इसकी जानकारी अस्पताल के कर्मचारियों को मिली, उन्होंने तत्काल कमरे को खाली कराया और मरीजों को भी सुरक्षित दूरी पर रहने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ही मिनटों में यह खबर पूरे अस्पताल परिसर में फैल गई। कई मरीज और उनके परिजन घबराकर अस्पताल के बाहर निकल आए। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को शांत बनाए रखने की कोशिश की और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलने से रोका। इसके बाद तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम बिना देर किए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। टीम के सदस्य विनोद पाण्डेय और लखन यादव ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और सांप की गतिविधियों पर नजर रखी। काफी सावधानी और अनुभव के साथ उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। रेस्क्यू के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचे और न ही सांप को किसी प्रकार की चोट आए।</p>
<p style="text-align:justify;">रेस्क्यू टीम ने बताया कि सांप जहरीली प्रजाति का था। यदि समय रहते उसे नहीं पकड़ा जाता तो अस्पताल में मौजूद लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता था। सांप को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित कंटेनर में रखा गया और वन क्षेत्र में ले जाकर प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बरसात के मौसम में इस तरह की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लगातार बारिश के कारण बिलों और झाड़ियों में रहने वाले सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले इलाकों, मकानों, स्कूलों और सरकारी भवनों तक पहुंच जाते हैं। अस्पताल, जहां हर समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं, वहां इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लेना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल प्रशासन ने वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि यदि रेस्क्यू टीम समय पर नहीं पहुंचती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली कि बिना किसी नुकसान के पूरे घटनाक्रम का सफलतापूर्वक समाधान हो गया। घटना के बाद अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और निरीक्षण भी कराया गया। अधिकारियों ने भवन के आसपास झाड़ियों और घास की सफाई कराने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की संभावना कम हो सके। साथ ही अस्पताल परिसर में मौजूद पुराने सामान और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाने की भी योजना बनाई गई है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर अक्सर सांप और अन्य जीव छिप जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:08:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोचिंग संस्थानों को निगम का 48 घंटे का अल्टीमेटम, शपथ पत्र नहीं दिया तो 10 जुलाई से होगी सीलिंग</title>
                                    <description><![CDATA[फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर नगर निगम सख्त, 69 कोचिंग संस्थानों को 30 दिन में सभी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई तय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a4dd98f78cd2/article-58148"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/coaching-institutes.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छात्रों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने शहर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 70 से अधिक कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तय समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया तो 10 जुलाई से संस्थानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीधे कार्रवाई होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने शहर के 69 कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अगले 48 घंटे के भीतर, यानी 9 जुलाई की शाम तक 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करें। इस शपथ पत्र में यह लिखित आश्वासन देना होगा कि संबंधित संस्थान अगले 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर देंगे। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को 15 दिन के भीतर यह भी बताना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी पाई गई तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने यह तर्क दिया कि जिस भवन में वे संस्थान चला रहे हैं, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है और भवन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी के इंतजाम करें। इस पर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भवन स्वामी पर नहीं छोड़ी जा सकती। निगम के अधिकारियों ने कहा कि चाहे भवन किराए का हो या स्वयं का, कोचिंग संस्थान संचालकों को ही फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने और उसका खर्च वहन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए लगभग 20 बिंदुओं वाली सुरक्षा गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि किसी भी भवन में ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे। सभी भवनों में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होना अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सकें। इन निकास मार्गों के आसपास किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, विद्युत उपकरण या अन्य अवरोधक सामग्री नहीं रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा। यदि किसी भवन का बेसमेंट 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का है तो वहां स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भवनों में लगाए गए फायर पंपों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी वे जनरेटर की बायपास लाइन के माध्यम से लगातार काम करते रहें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जनरेटर को किसी भी स्थिति में निकास मार्ग या रिफ्यूज एरिया में नहीं रखा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने नियमित फायर ऑडिट और विद्युत ऑडिट को भी अनिवार्य किया है। प्रत्येक वर्ष भवन का फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी। इसके साथ ही हर चार महीने में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी होगा। संस्थान के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देना होगा, जबकि सुरक्षा गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन की जानकारी होना आवश्यक होगा। निगम का मानना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग भी सभी संबंधित लोगों को आना चाहिए।</p>
<p>नगर निगम का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में समय रहते आवश्यक सुधार कराना जरूरी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज किया जाएगा तथा जिन संस्थानों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर करंट हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, बिजली विभाग से मांगा विस्तृत जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[तीन लोगों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान, हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था, इलेक्ट्रिक फेंसिंग और रोकथाम नीति पर मांगा शपथपत्र।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-strict-on-bilaspur-current-accident-demands-detailed-answer/article-58077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-news-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत के मामले ने अब न्यायपालिका का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और राज्य के ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में बिजली व्यवस्था की निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू हैं तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य के कई हिस्सों में खेतों, फार्महाउसों और निजी परिसरों के आसपास बिजली प्रवाहित फेंसिंग लगाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई लोग अपनी फसल, पशुओं या संपत्ति की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली युक्त तारों का उपयोग करते हैं, लेकिन इसकी चपेट में आने से अनजान लोगों की जान चली जाती है। अदालत ने माना कि यह केवल व्यक्तिगत लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान में ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए जाते हैं, लेकिन केवल एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। यदि लगातार एक जैसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं, तो इसका अर्थ है कि रोकथाम के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। अदालत ने सरकार और बिजली विभाग से पूछा है कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्पष्ट नीति, दिशा-निर्देश या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू है। यदि नहीं, तो इसे तैयार करने और लागू करने की समय-सीमा भी बताई जाए। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले में CSPDCL के मैनेजिंग डायरेक्टर को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाए। साथ ही ऊर्जा विभाग के सचिव और बिजली कंपनी से विस्तृत शपथपत्र मांगा गया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि बिजली ढांचे का निरीक्षण कितनी नियमितता से किया जाता है, जर्जर तारों और खुले विद्युत स्रोतों की पहचान और मरम्मत की क्या व्यवस्था है तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिस घटना के आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया, वह बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव की है। यहां करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल बन गया था। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए स्वतः सुनवाई शुरू की। अदालत का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। पिछले दो महीनों में बिलासपुर जिले में करंट लगने की अलग-अलग घटनाओं में आठ लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई मामले खेतों के आसपास लगे बिजली प्रवाहित तारों या जर्जर विद्युत लाइनों से जुड़े बताए गए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने बिजली सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पुराने और ढीले बिजली तार लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कई बार घरेलू पशु और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। इसलिए यह विषय मानव सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सके। पूरे मामले पर राज्य सरकार और बिजली विभाग की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है। अदालत के निर्देशों के बाद अब यह स्पष्ट होगा कि बिजली सुरक्षा को लेकर वर्तमान व्यवस्था कितनी प्रभावी है और भविष्य में किन सुधारात्मक कदमों की योजना बनाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उज्जैन में दो गायों की मौत के बाद बस में तोड़फोड़, आग से वाहन जलकर खाक</title>
                                    <description><![CDATA[पंथ पिपलाई के पास हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश, यात्रियों को सुरक्षित उतारने के बाद बस में आग लगी, पुलिस जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/after-the-death-of-two-cows-in-ujjain-the-bus/article-58068"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन-इंदौर मार्ग पर सोमवार रात एक सड़क हादसे के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। पंथ पिपलाई क्षेत्र में बलराम जाट ढाबे के पास उज्जैन की ओर जा रही एक यात्री बस की टक्कर सड़क पर बैठी दो गायों से हो गई। हादसे में दोनों गायों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और आक्रोश जताने लगे। स्थिति बिगड़ती देख सबसे पहले बस में मौजूद सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इसके बाद बस पर पथराव किया गया, जिससे उसके कई शीशे टूट गए। कुछ ही देर बाद बस में आग लग गई और देखते ही देखते पूरा वाहन आग की चपेट में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस तथा फायर ब्रिगेड को सूचना दी। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही समय में बस का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया। दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए थे, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि बस को भारी नुकसान पहुंचा है।हादसा उस समय हुआ जब बस उज्जैन की ओर जा रही थी। सड़क पर बैठी दो गायें अचानक बस की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद क्षेत्र में मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने बस को रोक लिया और घटना का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ गई। कुछ लोगों ने बस पर पत्थर फेंके, जिससे उसके कांच टूट गए। इसके बाद बस में आग लगने की घटना हुई। आग लगने के कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया कि दो गायों की मौत के बाद बस को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई है। वहीं, आग लगने के कारणों की भी जांच की जा रही है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट की भी जताई गई है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद कुछ समय के लिए उज्जैन-इंदौर मार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और भीड़ को शांत कराया। इसके बाद क्षतिग्रस्त बस को सड़क से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनती रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आग किन परिस्थितियों में लगी। संबंधित विभागों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल-राजगढ़ वैकल्पिक मार्ग बंद, पार्वती नदी का बढ़ा जलस्तर बना वजह</title>
                                    <description><![CDATA[बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर अस्थायी डायवर्जन जलमग्न, प्रशासन ने आवागमन पर तत्काल रोक लगाई और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-rajgarh-alternative-route-closed-due-to-increased-water-level-of/article-58066"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-news-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पर बारिश का असर साफ दिखाई देने लगा है। पार्वती नदी पर बने अस्थायी वैकल्पिक मार्ग को प्रशासन ने अगले आदेश तक पूरी तरह बंद कर दिया है। सोमवार देर रात बैरसिया के एसडीएम आशुतोष शर्मा ने आदेश जारी करते हुए इस मार्ग से सभी प्रकार के आवागमन पर रोक लगा दी। प्रशासन का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण पार्वती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे नदी के बीच बनाया गया अस्थायी डायवर्जन पूरी तरह पानी में डूब गया है। तेज बहाव को देखते हुए इस रास्ते से गुजरना बेहद जोखिमपूर्ण माना गया है। ऐसे में किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसडीएम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर निर्मित अस्थायी वैकल्पिक रास्ता अब सुरक्षित नहीं है। नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर और तेज बहाव के कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में पर्याप्त बैरिकेडिंग की जाए, चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और सुरक्षा संकेतक स्पष्ट रूप से स्थापित किए जाएं ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर इस मार्ग का उपयोग न करे। अधिकारियों को मौके पर लगातार निगरानी रखने और लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासन ने आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पुलिस विभाग, जनपद पंचायत और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को सौंपी है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किया जाए, ताकि कोई भी वाहन या व्यक्ति बंद किए गए रास्ते से गुजरने का प्रयास न कर सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह आदेश आगामी निर्देश जारी होने तक प्रभावी रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह अस्थायी वैकल्पिक मार्ग उस समय तैयार किया गया था जब पार्वती नदी पर बना करीब 49 वर्ष पुराना पुल जनवरी 2025 में क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल के एक हिस्से में धंसाव आने के बाद एहतियातन उस पर आवागमन रोक दिया गया था। इसके बाद स्टॉप डैम से पानी खाली कर नदी के बीच अस्थायी डायवर्जन बनाया गया, जिससे बैरसिया और नरसिंहगढ़ के बीच यातायात फिर से शुरू हो सका। बारिश शुरू होने से पहले तक इसी मार्ग से बसें, ट्रक, कारें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और दोपहिया वाहन नियमित रूप से गुजर रहे थे। लेकिन अब नदी का जलस्तर बढ़ने से यह रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से कई वाहन चालक खतरा उठाकर पानी से भरे इस मार्ग को पार करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि प्रशासन लगातार लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा था। पिछले वर्ष भी इसी मार्ग पर कई हादसे हो चुके हैं। अक्टूबर में एक यात्री बस पानी के बीच तिरछी होकर फंस गई थी, जिसे काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया था। वहीं हाल ही में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भी अस्थायी सड़क से फिसलकर स्टॉप डैम के पानी में गिर गई थी। सौभाग्य से उसमें सवार चारों लोग सुरक्षित बच गए, लेकिन इन घटनाओं ने इस मार्ग की जोखिमपूर्ण स्थिति को फिर उजागर कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्वती नदी पर बना यह पुल केवल भोपाल और राजगढ़ जिलों के बीच संपर्क का माध्यम नहीं है, बल्कि कई अन्य जिलों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यह पुल भोपाल, राजगढ़, गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, आगर-मालवा, शाजापुर, उज्जैन और इंदौर आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए प्रमुख रास्ता रहा है। साथ ही यह आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है। जब पुल पूरी तरह चालू था, तब प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग और मालवाहक वाहन इस मार्ग का उपयोग करते थे। पुल बंद होने के बाद भी अस्थायी डायवर्जन से हजारों लोगों की आवाजाही जारी रही, लेकिन अब बारिश के कारण यह विकल्प भी बंद हो गया है। पार्वती नदी का यह पुल वर्ष 1976 में बनाया गया था। पिछले करीब पांच दशकों में इसकी केवल दो बार मरम्मत हुई। अंतिम बार वर्ष 2019-20 में पुल की मरम्मत कराई गई थी। नियमित रखरखाव की कमी और समय के साथ बढ़ते दबाव के कारण पुल की स्थिति लगातार खराब होती गई। जनवरी 2025 में पुल के धंसने के बाद इसकी जर्जर हालत सामने आई और सुरक्षा कारणों से इसे बंद करना पड़ा। अब स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि हर मानसून में इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:37:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल के होटल में हथियारबंद बदमाशों का तांडव, तलवार-चाकू से हमला; CCTV में कैद हुई पूरी वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[मिसरोद क्षेत्र के जैन ब्रदर्स होटल में 10-15 बदमाशों ने चार युवकों, शेफ और कर्मचारियों पर किया हमला। एक युवक गंभीर रूप से घायल, पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/attack-by-armed-miscreants-in-bhopal-hotel-with-sword-and/article-57941"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-hotel-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित बंगरसिया-भोजपुर रोड पर शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 10 से 15 हथियारबंद बदमाश एक होटल में घुस आए और वहां मौजूद लोगों पर जानलेवा हमला कर दिया। तलवार, चाकू, हॉकी स्टिक और बेसबॉल बैट से लैस आरोपियों ने पहले होटल के भीतर तोड़फोड़ की, फिर चार युवकों को निशाना बनाया। बीच-बचाव करने पहुंचे होटल के शेफ और कर्मचारियों के साथ भी मारपीट की गई। पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना शनिवार रात करीब 10:45 बजे जैन ब्रदर्स होटल में हुई। हमले में 24 वर्षीय लीलाधर कुशवाहा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल लीगल केस (MLC) रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें 10 से 12 लोगों के समूह द्वारा धारदार हथियारों से हमला किए जाने का उल्लेख किया गया है। एक अन्य युवक भी घायल हुआ, जिसका प्राथमिक उपचार कराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">घायल लीलाधर कुशवाहा ने बताया कि वह अपने तीन दोस्तों के साथ मंडीदीप स्थित फैक्ट्री से ड्यूटी खत्म कर पैदल होटल में खाना खाने जा रहे थे। राजपूत भवन के पास तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चला रहे कुछ युवकों ने उन्हें टक्कर मार दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो बाइक सवार युवकों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई। जान बचाने के लिए चारों युवक पास के जैन ब्रदर्स होटल के अंदर चले गए, लेकिन कुछ ही मिनट बाद हालात और भयावह हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के कुछ ही देर बाद करीब 10 से 15 युवक तलवार, चाकू, हॉकी और बेसबॉल बैट लेकर होटल में घुस आए। उन्होंने होटल में मौजूद लोगों के बीच दहशत फैलाते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके बाद बदमाशों ने चारों युवकों पर हमला कर दिया। जब होटल के शेफ और अन्य कर्मचारी बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। अचानक हुए हमले से होटल में मौजूद ग्राहक भी घबरा गए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">घायल लीलाधर का आरोप है कि हमलावरों ने पहले होटल के अंदर उसकी बेरहमी से पिटाई की और फिर उसे घसीटकर बाहर ले गए। वहां गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर धारदार हथियारों से कई वार किए गए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार शरीर पर कई गहरे घाव पाए गए हैं। पीड़ित का कहना है कि यदि उसने किसी तरह अपना बचाव नहीं किया होता तो उसकी जान भी जा सकती थी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि कई युवक हथियारों के साथ होटल में प्रवेश करते हैं और फिर हमला शुरू कर देते हैं। पीड़ित पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दिए हैं। पुलिस अब वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही मिसरोद थाना पुलिस एम्स भोपाल पहुंची, जहां घायलों का उपचार चल रहा है। पुलिस ने अस्पताल में पीड़ितों के प्रारंभिक बयान दर्ज किए हैं। थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। घायलों के विस्तृत बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद इलाके के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद बदमाशों का पहुंच जाना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 16:28:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन रामघाट शिप्रा आरती में महिलाओं-पुजारियों में मारपीट</title>
                                    <description><![CDATA[दीपक बेचने को लेकर विवाद बढ़ा, पीतल की आरती से हमला; वीडियो वायरल के बाद पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a44a5ea468b6/article-57491"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-shipra-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन के प्रसिद्ध रामघाट पर रोजाना होने वाली शिप्रा आरती रविवार शाम उस वक्त अचानक विवाद और हिंसा में बदल गई जब दीपक और पूजन सामग्री बेचने वाली महिलाओं और पुजारियों के बीच कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान हालात कुछ ही मिनटों में बेकाबू हो गए और दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरती खत्म होने के बाद भी घाट पर भीड़ मौजूद थी और उसी दौरान छोटी सी बात ने बड़ा रूप ले लिया। शिप्रा नदी के तट पर हुआ यह विवाद देखते ही देखते पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो गया, जिसमें मारपीट और धक्का-मुक्की साफ नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण रहा और श्रद्धालुओं में भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पूजन सामग्री बेचने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। इसी दौरान बात इतनी बढ़ गई कि पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि पुजारियों ने आरती में इस्तेमाल होने वाले पीतल के दीपक भी महिलाओं की ओर फेंके, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। दूसरी तरफ महिलाओं ने भी विरोध में जवाब दिया और देखते ही देखते पूरा घाट एक तरह से झगड़े का मैदान बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ अचानक हुआ और किसी को भी अंदाजा नहीं था कि धार्मिक आरती स्थल पर इस तरह की स्थिति पैदा हो जाएगी। कई श्रद्धालु बीच-बचाव करने की कोशिश करते रहे लेकिन तब तक मामला काफी आगे बढ़ चुका था। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में वायरल हो गया और पुलिस तक भी पहुंच गया।</p>
<p style="text-align:justify;">महाकाल क्षेत्र से जुड़ी इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन भी तुरंत सक्रिय हुआ। मामला <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mahakal Police Station</span></span> पहुंचा जहां दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। महिलाओं की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें दीपक बेचने से रोका गया और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। एक महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पीतल की आरती उनके सिर पर मारी गई जिससे उन्हें चोट आई। वहीं दूसरी तरफ पुजारियों का कहना है कि महिलाओं ने पहले गाली-गलौज शुरू की और फिर हमला किया। उनका आरोप है कि धक्का-मुक्की के दौरान आरती का जलता हुआ दीपक उनके ऊपर गिर गया जिससे उन्हें भी चोटें आईं। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा का आरोप लगा रहे हैं और अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक घटना में तीन से चार लोगों को चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद गवाहों के बयान के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस घटना के बाद घाट पर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिप्रा आरती जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में नियमित निगरानी और स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इतमा फॉल में डूबे युवक का शव दो दिन बाद बरामद, एसडीईआरएफ ने तेज बहाव के बीच चलाया कठिन रेस्क्यू अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के इतमा फॉल में दो दिन पहले डूबे चित्रकूट निवासी 21 वर्षीय युवक का शव तेज बहाव के बीच फंसा मिला, एसडीईआरएफ ने जोखिम उठाकर बाहर निकाला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/body-of-youth-drowned-in-itma-fall-recovered-after-two/article-57446"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/waterfall-accident.mp4" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल इतमा फॉल में दो दिन पहले डूबे युवक का शव आखिरकार मंगलवार को बरामद कर लिया गया। तेज बहाव और चट्टानों के बीच फंसे शव तक पहुंचना बेहद मुश्किल माना जा रहा था, लेकिन राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDERF) की टीम ने कई घंटे की मशक्कत और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान चलाकर शव को बाहर निकाल लिया। इसके बाद शव को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। घटना के बाद मृतक के परिजनों में शोक का माहौल है, वहीं इलाके में भी इस हादसे की चर्चा बनी हुई है।  मृतक की पहचान सोनू खान (21 वर्ष) पिता बन्ने खान, निवासी बरगढ़, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सोनू अपने साथियों के साथ घूमने के लिए रीवा जिले के इतमा फॉल पहुंचा था। इसी दौरान वह पानी में उतर गया और अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही पलों में वह आंखों से ओझल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। शुरुआती स्तर पर स्थानीय लोगों की मदद से युवक की तलाश शुरू की गई, लेकिन तेज धारा और गहरे पानी के कारण सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद एसडीईआरएफ की विशेष टीम को बुलाया गया, जिसने आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों और सुरक्षा संसाधनों के साथ खोज अभियान शुरू किया। लगातार दो दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान गोताखोरों ने फॉल के विभिन्न हिस्सों में तलाश की। पानी का स्तर अधिक होने और लगातार बहाव के कारण अभियान काफी चुनौतीपूर्ण बना रहा। कई स्थानों पर चट्टानों के बीच गहराई अधिक होने से गोताखोरों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार रेस्क्यू टीम ने मौसम और जलधारा की स्थिति को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया। मंगलवार को खोज अभियान के दौरान टीम को फॉल के बीचों-बीच चट्टानों के बीच एक शव फंसा हुआ दिखाई दिया। शव जिस स्थान पर था, वहां तक पहुंचना सामान्य परिस्थितियों में लगभग असंभव माना जा रहा था। तेज बहते पानी और फिसलन भरी चट्टानों के कारण किसी भी प्रकार की जल्दबाजी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती थी। इसके बावजूद एसडीईआरएफ के प्रशिक्षित जवानों ने रस्सियों, सुरक्षा बेल्ट और अन्य रेस्क्यू उपकरणों की मदद से धीरे-धीरे शव तक पहुंच बनाई।<br /><br /></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/waterfall-accident.mp4" controls=""></video>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काफी प्रयासों के बाद टीम ने शव को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू अभियान के दौरान पूरी सतर्कता बरती गई ताकि किसी भी जवान की जान जोखिम में न पड़े। शव बाहर लाने के बाद पुलिस ने मौके पर आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी की और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आगे की वैधानिक प्रक्रिया पुलिस द्वारा की जा रही है। स्थानीय लोगों ने एसडीईआरएफ की टीम के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना था कि जिस स्थान पर शव फंसा हुआ था, वहां पहुंचना बेहद कठिन था। यदि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम समय पर नहीं पहुंचती तो शव को निकालना और अधिक मुश्किल हो सकता था। लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में आपदा राहत बल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। घटना के बाद मृतक के परिजन भी मौके पर पहुंचे। शव की पहचान होने के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी करने की मांग की। आसपास मौजूद लोगों ने भी परिवार को सांत्वना दी। पूरे क्षेत्र में हादसे के बाद शोक का माहौल बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इतमा फॉल रीवा जिले का प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जहां बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। हालांकि मानसून के दौरान यहां पानी का बहाव काफी तेज हो जाता है। प्रशासन समय-समय पर लोगों से सावधानी बरतने और गहरे पानी में नहीं उतरने की अपील करता है। इसके बावजूद कई पर्यटक चेतावनी को नजरअंदाज कर जोखिम उठाते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और जरूरत पड़ने पर पुलिस व होमगार्ड की तैनाती भी की जाती है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में जलप्रपातों और नदी-नालों के पास विशेष सतर्कता बरतें तथा किसी भी स्थिति में तेज बहाव वाले पानी में प्रवेश न करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:03:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर प्रशासन का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास व्यवस्था को लेकर अपनी समस्याएं सामने रखीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/administrations-emphasis-on-rehabilitation-of-affected-families-action-taken-to/article-57418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जिसके बाद पूरे इलाके में दिनभर हलचल का माहौल बना रहा। सुबह करीब चार बजे से शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम की टीम और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया गया। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने खुले स्थानों पर दिन और रात बिताई। इनमें महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल थे। प्रभावित लोगों का कहना है कि अचानक शुरू हुई कार्रवाई के कारण उन्हें अपना सामान समेटने और वैकल्पिक व्यवस्था करने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों के पास ही बैठे रहे। कुछ लोग मलबे के बीच अपने घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की कोशिश करते दिखाई दिए। कई महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अब रहने की सुरक्षित जगह और बच्चों की देखभाल की है। बारिश का मौसम शुरू होने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं है और उन्हें जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाओं के साथ पुनर्वास की आवश्यकता है। रात में कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। इस दौरान कई लोगों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्वास के लिए जो मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वे बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि 12 से 14 सदस्यों वाले परिवारों को एक ही कमरा आवंटित किया जा रहा है। साथ ही बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से इन व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें भरोसा दिया गया था कि बरसात के मौसम तक किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं होगी। कार्रवाई शुरू होने के बाद कई ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी भी जताई। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर बयान दिए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पूरे अभियान को नियमानुसार की गई कार्रवाई बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए विरोध की स्थिति भी बनी। कई ग्रामीण अपने परिवारों के साथ मौके पर ही बैठ गए और कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल ने लोगों को वहां से हटाया ताकि अभियान प्रभावित न हो। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहा और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जाती रही। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। इस बीच प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में पात्र परिवारों को बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रभावित लोगों के सामान को भी नगर निगम की टीम की मदद से नए स्थान तक पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">दिनभर चली कार्रवाई के दौरान कई भावुक दृश्य भी सामने आए। कुछ बच्चे अपने टूटे हुए घरों के सामने बैठे दिखाई दिए, जबकि कई परिवार अपने सामान के साथ खुले में इंतजार करते रहे। प्रभावित लोगों का कहना है कि सुबह से उन्हें भोजन बनाने का अवसर नहीं मिला और छोटे बच्चों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर प्रशासनिक टीम की ओर से मौके पर मौजूद लोगों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए नाश्ते के पैकेट भी वितरित किए गए। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए बरसात के मौसम में इस तरह की कार्रवाई पर चिंता जताई। वहीं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था की मांग की। दूसरी ओर प्रशासन ने दोहराया कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आवास आवंटन की प्रक्रिया जारी है तथा सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। नकटी गांव में कार्रवाई के बाद हालात सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन का ध्यान पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर है, जबकि प्रभावित परिवार बेहतर आवास और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:49 +0530</pubDate>
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