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                <title>MP TET - दैनिक जागरण</title>
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                <description>MP TET RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, नई याचिका की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट दिलाने की कवायद तेज, स्कूल शिक्षा विभाग ने कानूनी राय लेने के बाद नई याचिका दायर करने की तैयारी शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-will-go-to-supreme-court-to-get-relief-from/article-57917"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-tet,.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Eligibility Test-TET) की अनिवार्यता से राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में नई कानूनी रणनीति तैयार कर ली है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत में नई याचिका दायर की जा सकती है। यह मामला वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि इन शिक्षकों का चयन तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से हुआ था। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों को दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>विधि विभाग से ली गई कानूनी सलाह</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग ने इस मामले में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी विस्तृत कानूनी राय ली है। कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि नए तथ्यों और तर्कों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में राहत की मांग की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि विभाग नई याचिका में उन सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को शामिल करेगा, जिनके आधार पर इन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट मिल सके। सरकार की प्रस्तावित याचिका का सबसे महत्वपूर्ण आधार यह होगा कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने पहले ही एक कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन शिक्षकों की नियुक्ति व्यापमं द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई थी। सरकार का कहना है कि जब उम्मीदवार पहले ही योग्यता सिद्ध कर चुके हैं और वर्षों से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तब उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए कहना व्यावहारिक नहीं है। विभाग का मानना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और कार्यक्षमता को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व मिलना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><span><strong>70 हजार शिक्षकों पर टिकी हैं उम्मीदें</strong></span></h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का असर प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ने वाला है। यदि सुप्रीम कोर्ट सरकार की दलीलों को स्वीकार कर लेता है तो इन शिक्षकों को TET परीक्षा से स्थायी राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं यदि राहत नहीं मिलती है तो संबंधित शिक्षकों को भविष्य में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रदेशभर के शिक्षक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>कई वर्षों से चल रहा है विवाद</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर विवाद नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से TET को अनिवार्य बनाया गया था। हालांकि, इससे पहले भर्ती हो चुके हजारों शिक्षकों के मामले में लगातार यह सवाल उठता रहा कि क्या पहले से चयनित और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पहले भी न्यायालयों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी और अब राज्य सरकार फिर से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने की तैयारी कर रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षकों का पक्ष भी मजबूत माना जा रहा</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक संगठनों का कहना है कि संबंधित शिक्षकों ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति प्राप्त की थी। इसके बाद वर्षों तक उन्होंने सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं और लाखों विद्यार्थियों को शिक्षित किया है। शिक्षकों का तर्क है कि सेवा के इतने लंबे अनुभव के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता उनके साथ अन्याय होगा। उनका यह भी कहना है कि भर्ती के समय लागू नियमों के आधार पर ही उनकी नियुक्ति हुई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों को TET से जुड़ा विवाद झेलना पड़ता है तो इसका असर स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा पर कानूनी अनिश्चितता बनी रहती है तो शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण सरकार भी इस विवाद का स्थायी समाधान चाहती है ताकि शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों में स्थिरता बनी रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>एक सप्ताह में दायर हो सकती है नई याचिका</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई याचिका लगभग तैयार है। कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में इसे दायर कर दिया जाएगा। याचिका में व्यापमं की चयन प्रक्रिया, शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव, भर्ती नियमों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:41:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MP में TET पर बड़ा अपडेट, किन शिक्षकों के लिए जरूरी होगी परीक्षा, जल्द आएगा आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[MP TET को लेकर नए नियम जल्द, शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता और छूट पर विभाग करेगा बड़ा फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-update-on-tet-in-mp-for-which-teachers-the/article-51108"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-tet-new-rules-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही नए निर्देश जारी करने की तैयारी में है, जिनमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा और किन्हें इससे छूट दी जा सकती है। यह निर्णय प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों पर सीधा असर डाल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">नए आदेश की तैयारी तेज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश में TET की अनिवार्यता और छूट से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए। विभाग का उद्देश्य है कि शिक्षकों के बीच किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे और नियम पारदर्शी तरीके से लागू किए जा सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कानूनी राय के बाद होगा अगला कदम</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस मामले में शासकीय अधिवक्ता से विधिक राय लेने की प्रक्रिया जारी है। जैसे ही यह राय प्राप्त होगी, राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर निर्णय लेगी। इससे पहले ही विभाग आंतरिक स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बैठक में लिए गए अहम फैसले</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सोमवार को लोक शिक्षण आयुक्त की अध्यक्षता में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए गए। तय किया गया कि जिन शिक्षकों के वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामले लंबित हैं, उन्हें जल्द निपटाया जाएगा और संबंधित आदेश जारी किए जाएंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की तैयारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यदि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं और TET अनिवार्य रहता है, तो परीक्षा देने वाले शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण तहसील और विकासखंड स्तर पर आयोजित होगा, जिसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन भी दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डीपीआई स्तर पर समाधान बैठक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है। इस बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे उनके सुझावों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कुछ संगठनों ने जताई नाराजगी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">हालांकि इस बैठक से शिक्षक संगठनों का एक वर्ग संतुष्ट नहीं दिखा। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि बैठक अचानक बुलाई गई थी, जिससे सभी संगठनों की उपस्थिति संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय को वे तभी स्वीकार करेंगे जब चर्चा अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ की जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इसी तरह आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि बैठक में जिन संगठनों को शामिल किया गया, वे TET से सीधे प्रभावित नहीं हैं, जबकि प्रभावित संगठनों को नजरअंदाज किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस पूरे मामले की जड़ में सर्वोच्च न्यायालय का सितंबर 2025 का आदेश है, जिसमें कहा गया था कि शिक्षण सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने के लिए सभी शिक्षकों को TET पास करना जरूरी होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक समय शेष है, उन्हें TET अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करना होगा, अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">TET परीक्षा का महत्व</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">TET एक पात्रता परीक्षा है जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई अभ्यर्थी कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए योग्य है या नहीं। इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया था और शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इसे अनिवार्य बनाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पूरा विवाद क्या है</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता को लेकर RTE कानून के तहत NCTE ने 2010 में TET को अनिवार्य किया था। इसके बाद शिक्षकों को इसे पास करने के लिए समय भी दिया गया। हालांकि कई मामलों में यह मुद्दा अदालत तक पहुंचा और अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग फैसले सामने आए। अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार को नियमों को फिर से स्पष्ट करना पड़ रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 13:09:04 +0530</pubDate>
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