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                <title>CBI - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ट्विशा शर्मा केस में आज फिर सुनवाई, CBI ने आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत में सीबीआई ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया, जांच अब भी जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/hearing-in-twisha-sharma-case-again-today-cbi-demanded-to/article-57400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बहुचर्चित ट्विशा शर्मा केस में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई, जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। यह सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत (कोर्ट जी-14) में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। मामले को लेकर अदालत परिसर में भी हलचल बनी रही, क्योंकि इस केस पर लगातार लोगों की नजर बनी हुई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंची है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जानी बाकी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच के हित में आवश्यक है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस पर अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में कई गवाहों के बयान अभी दर्ज किए जाने हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के अलावा कुछ नए तथ्यों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि किसी भी महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है। इन उपकरणों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे घटनाक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि डिजिटल जांच पूरी होने में अभी कुछ और समय लगेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान सीबीआई ने समर्थ सिंह के लैपटॉप का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा। एजेंसी के अनुसार जांच के लिए लैपटॉप में मौजूद डेटा तक पहुंच बेहद जरूरी है, लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं हो सका है। जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि पासवर्ड के बिना डिवाइस में मौजूद संभावित महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है। एजेंसी ने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ तकनीकी स्तर पर भी इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन जांच को गति देने के लिए पासवर्ड की आवश्यकता बनी हुई है। सीबीआई ने यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल न्यायिक हिरासत के दौरान भी जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है और विभिन्न तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले 16 जून को अदालत ने समर्थ सिंह और गिरिबाला को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। उसी आदेश की अवधि पूरी होने के बाद मंगलवार को दोनों आरोपियों को फिर अदालत में पेश किया गया। अब सीबीआई ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच को पूरा किया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सतर्क रखी गई। ट्विशा शर्मा केस लगातार चर्चा में बना हुआ है और हर सुनवाई पर पीड़ित पक्ष तथा आम लोगों की नजर बनी रहती है। परिवार की ओर से भी मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द न्याय की उम्मीद जताई गई है। दूसरी ओर सीबीआई का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच करना चाहती है। अब पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा। यदि अदालत सीबीआई की मांग स्वीकार कर लेती है तो दोनों आरोपी 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे और इस दौरान जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर काम जारी रखेगी। वहीं यदि अदालत कोई अलग आदेश देती है तो उसके अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:59:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुनवाई, सीबीआई ने 30 जून तक न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक नहीं मिली, समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/hearing-in-twisha-sharma-death-case-cbi-demands-extension-of/article-56087"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया गया। सीबीआई ने इस चरण में किसी भी आरोपी की पुलिस रिमांड नहीं मांगी और केवल न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और मामले की सुनवाई आगे जारी है। ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला पिछले कुछ समय से चर्चा में बना हुआ है। मामले की गंभीरता और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी लगातार दस्तावेजों और साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई है। मंगलवार को हुई सुनवाई में एक महत्वपूर्ण मुद्दा दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी उठा। ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने अदालत को बताया कि इस रिपोर्ट को उपलब्ध कराने के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन सीबीआई की ओर से कहा गया कि संबंधित रिपोर्ट अभी तक एजेंसी को प्राप्त नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत में सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच से जुड़ा एक अहम दस्तावेज है और उसके मिलने के बाद कई तथ्यों को और स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। हालांकि रिपोर्ट के उपलब्ध नहीं होने की वजह से फिलहाल जांच एजेंसी उसके आधार पर कोई निष्कर्ष प्रस्तुत करने की स्थिति में नहीं है। इस जानकारी के बाद अदालत ने मामले से जुड़े अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा की। सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में रहते हुए वर्चुअल माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए। दोनों आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। अदालत में मौजूद पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने जांच की प्रगति, उपलब्ध दस्तावेजों और आगे की प्रक्रिया पर अपने-अपने पक्ष रखे। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी अभी मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है और कुछ रिपोर्टों तथा तकनीकी दस्तावेजों का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित के अनुसार, सीबीआई ने अदालत के समक्ष केवल न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध रखा है। पुलिस रिमांड की मांग नहीं किए जाने को लेकर भी अदालत में चर्चा हुई। जब जांच एजेंसी को तत्काल पूछताछ या हिरासत में लेकर जांच करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती, तब वह न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आवेदन प्रस्तुत करती है। हालांकि इस मामले में आगे की रणनीति जांच की प्रगति और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। मामले से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। ट्विशा शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या कारण रहे, यह अभी जांच का विषय है। इसी वजह से अदालत और जांच एजेंसी दोनों किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी इसी कड़ी में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की दिशा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। यह मामला शुरू से ही संवेदनशील माना जा रहा है और इससे जुड़े हर घटनाक्रम पर लोगों की नजर बनी हुई है। जांच एजेंसी भी किसी प्रकार की जल्दबाजी से बचते हुए क्रमबद्ध तरीके से तथ्यों को एकत्र कर रही है। अदालत में हुई ताजा सुनवाई के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट कब तक उपलब्ध होती है और अदालत न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आवेदन पर क्या फैसला सुनाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:39:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्विशा केस में जांच तेज, जेल में मिलीं गिरिबाला सिंह; CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[महिला आयोग ने भोपाल सेंट्रल जेल में की मुलाकात, मेडिकल और डिजिटल सबूतों की कड़ियां जोड़ने में जुटी CBI]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a2a537bb245b/article-55595"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-(5).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। एक ओर जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को खंगाल रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान गिरिबाला सिंह शांत नजर आईं और उन्होंने किसी तरह की परेशानी होने से इनकार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल में महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसी दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय में देवदत्त पटनायक की चर्चित पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती हुई मिलीं। बताया गया कि आयोग की टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान आयोग ने उनके स्वास्थ्य, भोजन और जेल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। गिरिबाला सिंह ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है और जेल में सभी व्यवस्थाएं सामान्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला आयोग ने भी अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा हो। हालांकि इस मामले को लेकर पहले से ऐसे आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम बढ़ा दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। जांच एजेंसी अब इस रिपोर्ट का मिलान पहले से उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और फोरेंसिक तथ्यों से कर रही है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी विशेष रूप से प्रेग्नेंसी, कथित अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी से जुड़े सबूतों की पड़ताल कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI की जांच का एक अहम हिस्सा डिजिटल सबूत भी हैं। एजेंसी मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, फोटो, वीडियो और डिलीट किए गए डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल जानकारी मामले की पूरी घटनाक्रम को समझने और विभिन्न दावों की पुष्टि करने में मदद कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ट्विशा के परिवार की ओर से लगातार जांच में शुरुआती स्तर पर हुई कथित चूकों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि घटनास्थल से जब्त किए गए सबूतों और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि जिस रस्सी या बेल्ट को मामले में अहम सबूत माना गया, उसकी जब्ती प्रक्रिया में कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वकील के अनुसार, घटनास्थल की तस्वीरों में दो अलग-अलग स्थानों पर दो बेल्ट दिखाई दे रही थीं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में केवल एक बेल्ट की जब्ती का उल्लेख किया गया। इसके अलावा जिस व्यक्ति ने उस बेल्ट या रस्सी की पहचान की, उसका नाम भी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया। परिवार का दावा है कि ऐसी खामियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल उन दस्तावेजों को लेकर उठाया गया है जो कथित तौर पर केस डायरी का हिस्सा थे। ट्विशा के परिवार के वकील का आरोप है कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंच गए थे, जिससे उन्हें कानूनी रणनीति बनाने में मदद मिली। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI अब शुरुआती जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों से भी दोबारा पूछताछ की तैयारी कर रही है। विशेष रूप से उस पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिसने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और सबूतों की जब्ती की प्रक्रिया पूरी की थी। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि जांच के शुरुआती चरण में कहीं कोई लापरवाही या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि तो नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में ट्विशा की मानसिक स्थिति को लेकर भी जांच जारी है। गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में कुछ मेडिकल दस्तावेज पेश किए गए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। अब CBI इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से भी पूछताछ की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेल प्रशासन के लिए भी यह मामला संवेदनशील बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान जिन आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से कई वर्तमान में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जेल परिसर में निगरानी बढ़ाई गई है और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे मामले में CBI विभिन्न सबूतों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच के अगले चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:52:23 +0530</pubDate>
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                <title>नीट पेपर लीक मामले में CBI ने दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार, 5 राज्यों तक फैला नेटवर्क उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र और राजस्थान में सबसे ज्यादा बिक्री, कोचिंग सेंटर से छात्रों तक पहुंचा ‘क्वेश्चन बैंक’, जांच तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cbi-arrested-two-more-accused-in-neet-paper-leak-case/article-54321"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-paper-leak-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस केस में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियों ने 49 स्थानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं। जांच में यह सामने आया है कि पेपर लीक का नेटवर्क पांच राज्यों तक फैला हुआ था, जिसमें महाराष्ट्र और राजस्थान प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आए हैं। पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए CBI लगातार सबूतों और पैसों के लेन-देन की कड़ी जोड़ रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कोचिंग सेंटर और शिक्षकों की भूमिका उजागर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए पहले आरोपी की पहचान डॉक्टर मनोज शिरूरे के रूप में हुई है, जो लातूर के रहने वाले हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने एक कोचिंग सेंटर मालिक के बेटे समेत तीन छात्रों को आरोपी पीवी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे आरोपी तेजस हर्षदकुमार शाह को भी गिरफ्तार किया गया है, जो पुणे स्थित डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी (APMA) में फिजिक्स पढ़ाता है। आरोप है कि उसे फिजिक्स के लीक हुए प्रश्न मनीषा हवलदार से मिले थे, जिन्हें आगे छात्रों तक पहुंचाया गया। CBI के अनुसार, इस नेटवर्क में कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने परीक्षा से पहले छात्रों को प्रश्नों की जानकारी देकर एक संगठित तरीके से लीक को अंजाम दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पांच राज्यों में फैला पेपर लीक नेटवर्क</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी के अनुसार, NEET पेपर लीक का मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि यह नेटवर्क महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों तक फैला हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि सबसे ज्यादा पेपर की बिक्री महाराष्ट्र में हुई, जबकि राजस्थान दूसरे स्थान पर है। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह है, जो कोचिंग सेंटरों और एजुकेशन नेटवर्क के जरिए पेपर को छात्रों तक पहुंचाता था। सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर पेपर की प्रिंट कॉपी निकालकर उसे “क्वेश्चन बैंक” के रूप में बेचा गया, जिससे छात्रों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नों की जानकारी मिल गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पैसों के लेन-देन की कड़ी खंगाल रही CBI</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI अब उन सभी अभिभावकों और छात्रों की लिस्ट तैयार कर रही है, जिनके बैंक खातों से आरोपियों के खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं। जांच में शिवराज मोटेगांवकर, पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघामारे जैसे नाम सामने आए हैं, जिनके खातों के जरिए लेन-देन हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">एजेंसी का कहना है कि यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि इसमें एक फाइनेंशियल नेटवर्क भी शामिल है, जो पूरे ऑपरेशन को सपोर्ट कर रहा था। इसी वजह से अब बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल डेटा की गहराई से जांच की जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>49 जगहों पर छापेमारी, कई डिजिटल सबूत जब्त</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI ने अब तक देशभर में 49 स्थानों पर छापेमारी की है। इस दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>छात्रों तक कैसे पहुंचा पेपर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र था, जहां से प्रश्नों की कॉपी राजस्थान और अन्य राज्यों में भेजी गई। इसके बाद कोचिंग सेंटर और बिचौलियों के जरिए इसे छात्रों तक पहुंचाया गया। इस पूरे नेटवर्क में कुछ कोचिंग संस्थानों के कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं, जिन्होंने परीक्षा से पहले ही छात्रों को तैयारी के नाम पर असली प्रश्न उपलब्ध कराए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>NTA की प्रतिक्रिया और परीक्षा प्रक्रिया</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">7 मई को परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिलने के बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया था। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और री-एग्जाम की घोषणा की गई। NTA ने अब फीस रिफंड के लिए 22 मई से 27 मई तक पोर्टल खोला है, जहां उम्मीदवार अपने बैंक विवरण जमा कर सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI का कहना है कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है और नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कितने छात्रों ने वास्तव में लीक हुए पेपर का लाभ उठाया। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी जल्द छापेमारी की संभावना है। जांच एजेंसियां डिजिटल ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और चैट डेटा के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ रही हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>परीक्षा प्रणाली पर सवाल और सख्ती की तैयारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  यदि इस तरह के नेटवर्क को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। सरकारी स्तर पर अब परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल सिक्योरिटी और निगरानी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:34:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET पेपर लीक आरोपी का वीडियो हुआ वायरल, छात्रों पर छिड़का ‘मंत्र सिद्ध जल’</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक आरोपी शिवराज मोटेगांवकर का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह छात्रों पर ‘मंत्र सिद्ध जल’ छिड़कता नजर आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/neet-paper-leak-accuseds-video-goes-viral-sprinkles-mantra-siddha/article-54127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-paper-leak-shivraj-motegaonkar.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक केस में गिरफ्तार आरोपी शिवराज मोटेगांवकर एक बार फिर सुर्खियों में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार वजह कोई जांच एजेंसी की कार्रवाई नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो है। इस वीडियो में मोटेगांवकर छात्रों पर कलश से पानी छिड़कते हुए नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि वह इसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्र सिद्ध जल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">बता रहा था और कह रहा था कि इससे परीक्षा में नंबर बढ़ेंगे। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने हैरानी जताई है और सोशल मीडिया पर इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शिवराज मोटेगांवकर को महाराष्ट्र के लातूर स्थित </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RCC <span lang="hi" xml:lang="hi">इंस्टीट्यूट का संचालक बताया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया था। अब इस वायरल वीडियो ने मामले को और भी ज्यादा तूल दे दिया है। वीडियो में कई छात्र एक साथ बैठे दिख रहे हैं और मोटेगांवकर उनके बीच घूमते हुए कलश से पानी छिड़क रहा है। वहां कुछ लोग धार्मिक मंत्रों का जाप करते भी सुनाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये कहा जा रहा है कि यह </span>RCC <span lang="hi" xml:lang="hi">इंस्टीट्यूट के किसी कार्यक्रम का हिस्सा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोग जानना चाह रहे हैं कि छात्रों और अभिभावकों के भरोसे के साथ आखिर क्या खेल चल रहा था। कुछ यूजर्स ने इसे अंधविश्वास से जोड़कर सवाल उठाए हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ लोग इसे छात्रों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने की कोशिश बता रहे हैं। इस मामले में अभी तक </span>RCC <span lang="hi" xml:lang="hi">इंस्टीट्यूट या शिवराज मोटेगांवकर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी तेज हो रही है। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीआई को जांच के दौरान कई बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इस आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (</span>ED) <span lang="hi" xml:lang="hi">भी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह एजेंसियां यह पता करने में जुटी हैं कि पेपर लीक नेटवर्क के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ और यह पैसे किन-किन लोगों तक पहुंचे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीबीआई की जांच में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RCC <span lang="hi" xml:lang="hi">इंस्टीट्यूट के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। शुरुआती जाँच के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 में इस संस्थान के 21 छात्रों का </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">में चयन हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से 19 को </span>AIIMS <span lang="hi" xml:lang="hi">में दाखिला मिला। जांच एजेंसियां अब इन मामलों की भी गहनता से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क को पेशेवर ढंग से चलाया जा रहा था और इसमें कई स्तरों पर लोगों की भागीदारी हो सकती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह वायरल वीडियो पूरे मामले को और गंभीर बना चुका है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को लगातार शेयर कर रहे हैं और इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन से लेकर संस्थान की गतिविधियों तक हर पहलू की जांच में जुटी हुई हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:06:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IRCTC घोटाला मामला: फिर टला फैसला, लालू परिवार पर अब 9 जून को आएगा कोर्ट का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला टाल दिया है। लालू परिवार पर अब 9 जून को आदेश सुनाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irctc-scam-case-decision-postponed-again-now-court-order-on/article-53980"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/irctc-scam-lalu-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">IRCTC <span lang="hi" xml:lang="hi">घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का फैसला फिर नहीं आया। अदालत ने सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून तय की है। इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी पत्नी राबड़ी देवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेटे तेजस्वी यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेज प्रताप यादव और बेटी मीसा भारती सहित कई अन्य लोग आरोपी हैं। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस केस के चारों ओर राजनीतिक और कानूनी हलचल बढ़ती जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पिछली सुनवाई के बाद से ही उम्मीद थी कि आज कोर्ट कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मामला फिर से टल गया। इससे पहले </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को भी अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को जो आदेश आएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो इस पूरे केस की दिशा तय कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई इसी पर निर्भर करेगी। अदालत पहले ही आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और अब ट्रायल से पहले का ये अहम फैसला सबकी निगाहों में है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह पूरा मामला </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2004<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2009<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच का है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उस समय </span>IRCTC <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत रांची और पुरी में बीएनआर होटलों के संचालन के लिए हुए टेंडर में गंभीर अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों का कहना है कि नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को ये टेंडर दिया गया और इसके बदले में लालू परिवार को पटना में बेशकीमती जमीन मिली।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीबीआई और ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि यह जमीन डिलाइट मार्केटिंग लिमिटेड से लारा प्रोजेक्ट्स के नाम पर सिर्फ </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">65<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये में ट्रांसफर की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि इसकी बाजार कीमत लगभग </span>94<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये और सर्कल रेट करीब </span>32<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लेन-देन सीधे सत्ता के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप के काफी सबूत सामने आए हैं और इससे कथित तौर पर लालू परिवार को आर्थिक लाभ हुआ। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और इसे मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला बताया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:06:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में मिली बड़ी कामयाबी, CBI ने पकड़ा असली आरोपी </title>
                                    <description><![CDATA[चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में CBI ने असली मास्टरमाइंड पकड़ा। गलत गिरफ्तारी का खुलासा, अब तक 4 आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-success-in-shubhendu-adhikaris-murder-case-cbi-caught-the/article-53907"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/suvendu-adhikari-pa-murder.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलचलों में उस समय काफी हलचल मच गई जब शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ के हत्या मामले में सीबीआई ने बड़ा खुलासा किया। अब यह मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआती जांच में जहां स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं अब पता चला है कि इस केस में पहचान में बड़ी गलती हुई थी और एक निर्दोष शख्स को गलत तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया था। सीबीआई की जांच में असली साजिशकर्ता तक पहुंचने के बाद पूरा मामला बदल गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले बंगाल पुलिस के इनपुट पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें बिहार के बक्सर से मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उत्तर प्रदेश के बलिया से राज सिंह नाम का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद उसे लगभग 13 दिनों तक हिरासत में रखा गया। लेकिन बाद में यह बड़ा तथ्य सामने आया कि जिस व्यक्ति को राज सिंह समझकर गिरफ्तार किया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह दरअसल गलत पहचान का शिकार था। उसके परिवार ने पहले ही दावा किया था कि वह घटना के समय यूपी के अयोध्या में मौजूद था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन शुरुआती जांच में इसका ध्यान नहीं दिया गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे-जैसे सीबीआई मामले की जांच करती गई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">परतें खुलती गईं। जब सीबीआई की टीम ने दोबारा पूरे नेटवर्क की जांच की तो पता चला कि असली साजिशकर्ता कोई और है। इसके बाद एजेंसी ने मुजफ्फरनगर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी पहचान राजकुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि यही इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड है और वह लंबे समय से इस साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही पहले गिरफ्तार किए गए राज सिंह को कोर्ट ने रिहा कर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उसकी भूमिका इस मामले में साबित नहीं हो सकी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में एक और महत्वपूर्ण गिरफ्तारी भी सामने आई है। सीबीआई ने वाराणसी से विनय राय नाम के एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है। अब तक इस पूरे मामले में कुल चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच अभी भी जारी है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा नेटवर्क अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है और आगे और नाम सामने आ सकते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह पूरा मामला अब जांच एजेंसियों की शुरुआती लापरवाहियों और गलत पहचान के सवालों को भी उजागर कर रहा है। वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक स्तर पर भी इस केस को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीआई की टीम आगे की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हत्या की असली साजिश कितनी गहरी थी और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 15:35:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET पेपर लीक होने में अंदर से मदद मिलने का शक! NTA अधिकारी की जांच कर रही है CBI </title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG 2026 पेपर लीक जांच में बड़ा खुलासा, NTA अधिकारी CBI रडार पर। रद्द परीक्षा और नए आरोपों से बढ़ी हलचल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a09608135b65/article-53582"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-ug-2026-paper-leak-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>NEET-UG </strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>2026:</strong> </span>नीट <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच रही है। </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 पेपर लीक के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (</span>CBI) <span lang="hi" xml:lang="hi">का ध्यान अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (</span>NTA) <span lang="hi" xml:lang="hi">के एक अनाम अधिकारी पर केंद्रित हो गया है। मामला और भी गंभीर हो गया है क्योंकि इस मामले में पहले ही दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें मनीषा संजय वाघमारे और रसायन शास्त्र के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी शामिल हैं। इन्हें 10 दिन की </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत में भेजा गया है और उनसे लगातार पूछताछ चल रही है। 3 मई को हुई परीक्षा को इस विवाद के चलते रद्द कर दिया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे छात्रों में भारी नाराजगी और भ्रम की स्थिति बन गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों की बात करें तो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंदरूनी साजिश का पर्दाफाश होता जा रहा है। </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने अदालत में जो रिमांड आवेदन पेश किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें यह इशारा किया गया है कि यह सिर्फ बाहरी नेटवर्क का मामला नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अंदरूनी मिलीभगत भी हो सकती है। आरोप है कि वाघमारे को एक संगठित नेटवर्क के जरिए 27 अप्रैल को प्रश्न पत्र और उत्तर देकर दिए गए थे। इसमें एक </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">के अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि वाघमारे की मुलाकात कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी से एक अन्य लेक्चरर मनीषा मंडारे के जरिए हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">की पेपर सेटिंग कमेटी से जुड़ी बताई जा रही हैं और उन्हें भी 14 दिन की </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत में भेजा गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच एजेंसी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा नेटवर्क धीरे-धीरे उजागर हो रहा है और इसमें कई लोगों की भूमिका विभिन्न स्तरों पर पाए जाने की आशंका है। </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">का दावा है कि वाघमारे ने कथित तौर पर कुलकर्णी से प्रश्न पत्र प्राप्त किए और फिर धनंजय लोकहांडे समेत अन्य लोगों तक पहुंचाए। लोकहांडे को 13 मई को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से गिरफ्तार किया गया था और उस पर पेपर को फैलाने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा के बाद कई लिखित प्रश्न और दस्तावेज नष्ट कर दिए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सबूत मिटाए जा सकें। कुछ स्रोतों से मिली जानकारी में यह भी पता चला है कि हाथ से लिखे गए प्रश्न पत्र भी गायब कर दिए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जांच में और मुश्किलें आ गई हैं। इस पूरे मामले में पैसे के लेन-देन की बातें भी सामने आ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने हालात को देखते हुए </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून 2026 को कराने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (</span>CBT) <span lang="hi" xml:lang="hi">मोड में कराने पर विचार किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। हालांकि इस पूरे विवाद ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों और अभिभावकों में अब भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है और जांच एजेंसियों पर जल्द और पारदर्शी निष्कर्ष निकालने का दबाव बढ़ता जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:33:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET-UG 2026 पेपर लीक केस में महिला लेक्चरर गिरफ्तार, CBI का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने पुणे की महिला लेक्चरर को गिरफ्तार किया। जांच में बायोलॉजी और केमिस्ट्री पेपर लीक का खुलासा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/female-lecturer-arrested-in-neet-ug-2026-paper-leak-case-big/article-53538"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-ug-2026-paper-leak.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 पेपर लीक मामले में </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">को एक बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने बायोलॉजी पेपर लीक के मामले में पुणे की सीनियर बॉटनी लेक्चरर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनीषा गुरुनाथ मंधारे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि कथित मास्टरमाइंड हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">को गिरफ्तार किया है। </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">का कहना है कि मनीषा को </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने परीक्षा प्रक्रिया में एक विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी कारण उसे बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि परीक्षा से पहले कुछ छात्रों को संभावित सवाल बताए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इनमें से कई सवाल असली </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा में भी आए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल 2026 में मनीषा मंधारे ने पुणे की मनीषा वाघमारे के जरिए छात्रों से संपर्क किया। वाघमारे को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। बताया गया है कि पैसे के बदले उन छात्रों को खास </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">स्पेशल क्लासेस</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">में शामिल किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां परीक्षा में आने वाले सवालों पर ध्यान केंद्रित किया जाता था। जांच अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनीषा मंधारे अपने घर पर क्लास चलाती थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के सवाल लिखवाए और किताबों में मार्किंग करवाई जाती थी। कुछ टॉपिक्स को बेहद अहम बताते हुए तैयार भी कराया गया। जब 3 मई 2026 को </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">की परीक्षा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कई सवाल हूबहू या मिलते-जुलते पाए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जांच एजेंसियों को शक हुआ।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मामले में केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी का नाम भी आया है। सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुलकर्णी और मनीषा मंधारे दोनों को </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने परीक्षा प्रक्रिया में सामिल किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने मनीषा वाघमारे की मदद से अंदर की जानकारी बाहर पहुंचाई। वाघमारे कथित तौर पर उन छात्रों और परिवारों तक पहुंचती थी जो मोटी रकम देने के लिए तैयार थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग बैच बनाकर स्पेशल क्लासेस चलाई जाती थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें महत्वपूर्ण सवाल पहले ही बताए जाते थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक बायोलॉजी और केमिस्ट्री पेपर लीक के सोर्स का काफी हद तक पता चल चुका है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने पिछले 24 घंटों में देशभर के कई शहरों में छापेमारी की है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुणे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नासिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुग्राम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर और अहिल्यानगर समेत छह जगहों पर कार्रवाई के दौरान लैपटॉप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल फोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक दस्तावेज और कई डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें और कौन लोग शामिल थे। कुछ संदिग्ध बैंक खातों में लेनदेन भी मिले हैं। मनीषा वाघमारे का अकाउंट फिलहाल सीज कर दिया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह मामला शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत पर 12 मई 2026 को </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने दर्ज किया था। केस के उजागर होने के बाद कई राज्य एक साथ जांच में जुट गए। अब तक दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुग्राम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुणे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नासिक और अहिल्यानगर से कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से पांच आरोपियों को अदालत ने सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि हाल में गिरफ्तार दो आरोपियों को पुणे से ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल</span>, CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 17:27:25 +0530</pubDate>
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                <title>NEET-UG पेपरलीक केस: सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला, याचिका में की गई NTA को हटाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG पेपरलीक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिका में NTA हटाने, नई संस्था बनाने और CBI जांच की मांग की गई है। परीक्षा दोबारा कराने पर जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/neet-ug-paperleak-case-reaches-supreme-court-demand-for-removal-of/article-53255"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t122822.604.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक का मामला अब देश की सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में परीक्षा कराने वाली संस्था</span>, National Testing Agency (NTA) <span lang="hi" xml:lang="hi">को हटाने की मांग की गई है और इसके स्थान पर एक नई स्वतंत्र संस्था बनाने का अनुरोध किया गया है। यह याचिका </span>Federation of All India Medical Association (FAIMA) <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा प्रस्तुत की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पूरे परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब नीट-यूजी पेपर लीक के मुद्दे पर पहले से ही पूरे देश में विवाद और छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि केवल जांच या छोटे सुधार पर्याप्त नहीं हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी प्रणाली को बदलने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">को या तो पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए या इसमें व्यापक स्तर पर संरचनात्मक परिवर्तन किए जाने चाहिए। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक नई हाई-टेक और स्वतंत्र परीक्षा संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग (</span>NEIC) <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम दिया जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक यह नई संस्था स्थापित नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक परीक्षा की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा की जानी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हों। इस समिति में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को शामिल करने की भी मांग की गई है ताकि पेपर की सुरक्षा और तकनीकी जांच को मजबूत किया जा सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">याचिका में </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 परीक्षा को फिर से कराने की अपील भी की गई है। ये कहा गया है कि पुनः परीक्षा कराने की प्रक्रिया कोर्ट की नजर में होनी चाहिए और प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए डिजिटल लॉक सिस्टम को अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचने के लिए पूरी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित यानी </span>CBT <span lang="hi" xml:lang="hi">मोड में आयोजित करने का सुझाव दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि पेपर की आवाजाही को खत्म किया जा सके और लीक का जोखिम कम हो सके। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं और इन्हें केवल तकनीकी सुधारों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे ढांचे को बदलकर ही ठीक किया जा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह विवाद तब और बढ़ गया जब राजस्थान में पेपर लीक की शिकायतों के बाद परीक्षा को लेकर कार्रवाई शुरू की गई। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CBI) <span lang="hi" xml:lang="hi">को सौंप दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर पेपर प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पूरे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कई सवाल हूबहू परीक्षा में शामिल किए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मामला और गंभीर बन गया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा में इस बार करीब 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पेपर लीक की खबर ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र और परीक्षा एजेंसियों की तरफ से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन छात्रों और अभिभावकों के बीच असमंजस और नाराजगी साफ नजर आ रही है। अगले दिनों में यह मामला और बड़ा हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसमें सिस्टम सुधार और परीक्षा फिर से कराने की मांग सीधे तौर पर रखी गई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:31:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>PNB घोटाले में बड़ा कदम: नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की राह लगभग साफ</title>
                                    <description><![CDATA[CBI टीम लंदन पहुंची, ब्रिटेन में कानूनी विकल्प खत्म होने के कगार पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-move-in-pnb-bank-case--the-way-for-nirav-modi-s-extradition-is-almost-clear/article-51220"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/nirav-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नीरव मोदी</span></span> के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष टीम इस सिलसिले में लंदन पहुंच चुकी है, जहां वह ब्रिटिश अधिकारियों के साथ अंतिम औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन में नीरव मोदी के पास उपलब्ध अधिकांश कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं, जिससे उसके जल्द भारत लाए जाने की संभावना मजबूत हो गई है।</p>
<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से इस हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध मामले में प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। नीरव मोदी 2018 में घोटाले के उजागर होने के बाद देश छोड़कर फरार हो गया था और बाद में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वहीं की जेल में बंद है और लगातार अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करता रहा है।</p>
<p>हालांकि, ब्रिटेन की अदालतों ने उसकी कई याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मानवाधिकार, सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े उसके तर्कों को अदालतों ने पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और जेल की परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।</p>
<p>CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है। एजेंसियों ने ब्रिटेन को विस्तृत साक्ष्य सौंपे हैं, जिनमें फर्जी बैंक गारंटी, संदिग्ध लेनदेन और धन शोधन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय टीम ब्रिटेन के गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय कर रही है, ताकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।</p>
<p>PNB घोटाला देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में गिना जाता है। आरोप है कि नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने मुंबई स्थित बैंक शाखा से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी कर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। इस मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और नियामकीय ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते कानूनी सहयोग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ वैश्विक सख्ती के कारण इस मामले में तेजी आई है। यदि अंतिम मंजूरी मिलती है, तो सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में नीरव मोदी को भारत लाया जाएगा, जहां उसे न्यायिक हिरासत में भेजकर मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाएगी।</p>
<p>यह मामला भारत के लिए एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:57 +0530</pubDate>
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