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                <title>Enforcement Directorate - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Enforcement Directorate RSS Feed</description>
                
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                <title>रीवा में ठेकेदार के घर ईडी की रेड से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[पद्मधर कॉलोनी में दस्तावेजों की जांच जारी, परिजनों ने आईडी और समन की मांग की, कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चा तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/ed-raid-on-contractors-house-in-rewa-creates-stir/article-56380"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ed-raid-rewa-contractor-house.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा शहर के वार्ड क्रमांक-5 स्थित पद्मधर कॉलोनी में शुक्रवार सुबह उस समय अचानक हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने ठेकेदार के घर पर दबिश दी। लालता सदन नामक इस आवास पर सुबह-सुबह पहुंची ईडी की टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, पूरे इलाके में हलचल फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा होने लगे। अचानक हुई इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। ईडी की 4 से 5 सदस्यीय टीम सुबह करीब समय पर कृष्णकांत सोहगौरा और सौरभ सोहगौरा के निवास पर पहुंची। बताया जा रहा है कि टीम ने घर के भीतर प्रवेश करते ही दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू कर दी। विभिन्न फाइलों, लेन-देन के कागजात और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। घर के भीतर अधिकारियों की मौजूदगी के दौरान बाहर लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच कार्रवाई के दौरान एक अलग स्थिति तब देखने को मिली जब घर में मौजूद परिजनों ने ईडी अधिकारियों से पहचान पत्र दिखाने की मांग की। परिजनों का कहना था कि बिना किसी समन के घर के अंदर कैसे प्रवेश किया गया, इस पर स्पष्टता होनी चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी हुई, हालांकि इसके बावजूद जांच टीम ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जांच प्रक्रिया को रोका नहीं गया। ईडी की टीम घर में मौजूद कई दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। वित्तीय लेन-देन से जुड़े कागजातों को अलग-अलग करके देखा जा रहा है और कुछ फाइलों को अपने साथ ले जाने की भी तैयारी की जा रही है। कार्रवाई के दौरान घर के अंदर और बाहर सुरक्षा और निगरानी का विशेष ध्यान रखा गया। वहीं, आसपास के लोग लगातार घटनाक्रम को लेकर चर्चा करते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">कृष्णकांत सोहगौरा को रीवा के चर्चित ठेकेदारों में गिना जाता है। उनका नाम स्थानीय स्तर पर कई बड़े निर्माण कार्यों से जुड़ा बताया जाता है। वह भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा के भाई भी बताए जाते हैं, जिससे इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अब तक किसी भी राजनीतिक या सरकारी स्तर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ईडी की इस कार्रवाई के पीछे के कारणों को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। एजेंसी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किस मामले में यह जांच शुरू की गई है और इसमें किन वित्तीय लेन-देन की भूमिका हो सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल ईडी की टीम मौके पर मौजूद है और दस्तावेजों की जांच जारी है। जैसे-जैसे कार्रवाई आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इलाके में तनाव और उत्सुकता दोनों बढ़ते जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:08:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>DMF घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, छापों में एक करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के पांच जिलों में कार्रवाई, कारोबारियों और कांग्रेस नेता से जुड़े ठिकानों की जांच; दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी मिले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/eds-big-action-in-dmf-scam-more-than-rs-1/article-56211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-dmf-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। कथित 575 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत एजेंसी ने राज्य के पांच जिलों में एक साथ छापेमारी की, जिसमें एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी ने रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और अंबिकापुर में कई ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है। ईडी की टीमों ने कुल नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें चार आवासीय परिसरों के साथ पांच व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे। जांच के दौरान सबसे अधिक नकदी कोरबा और धमतरी जिले से बरामद होने की बात कही जा रही है। हालांकि एजेंसी की ओर से अब तक जब्त राशि का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि सभी दस्तावेजों और जब्त सामग्री के सत्यापन के बाद ईडी इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छापेमारी जिन लोगों और संस्थानों से जुड़ी बताई जा रही है, उनमें कई कारोबारी और सप्लाई से जुड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक कृषि और अन्य विभागों में आपूर्ति का काम करने वाले कुछ कारोबारियों के परिसरों की जांच की गई। इनमें कांग्रेस से जुड़े एक पूर्व जिला पदाधिकारी का नाम भी चर्चा में है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए जारी धनराशि का उपयोग किस तरह किया गया और कहीं उसमें वित्तीय अनियमितताएं तो नहीं हुईं। तलाशी के दौरान ईडी को कई महत्वपूर्ण बैंक लेनदेन रिकॉर्ड, अनुबंध संबंधी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्राप्त हुआ है। जांच अधिकारी अब इन रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों से कथित लेनदेन, भुगतान और फंड के प्रवाह से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। एजेंसी का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि किन माध्यमों से खर्च हुई और उसमें किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियों को संदेह है कि जिला खनिज न्यास फंड से जारी रकम का एक हिस्सा ठेकेदारों, सप्लायरों और कथित बिचौलियों के माध्यम से डायवर्ट किया गया। आरोप यह भी हैं कि विभिन्न परियोजनाओं और सरकारी कार्यों के टेंडर आवंटन में नियमों की अनदेखी की गई और कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी आधार पर अब मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार कुछ मामलों में ठेकों और परियोजनाओं की मंजूरी के बदले कमीशन लिए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या सरकारी धन के उपयोग में ऐसी व्यवस्थाएं बनाई गई थीं जिनसे चुनिंदा लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई और लोगों से पूछताछ की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहला अवसर नहीं है जब DMF घोटाला चर्चा में आया हो। इससे पहले भी इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और कथित बिचौलियों के नाम जांच में सामने आ चुके हैं। पिछले दो वर्षों में ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने इस मामले में कई दौर की कार्रवाई की है। विभिन्न स्थानों पर छापेमारी के साथ करोड़ों रुपये की संपत्तियां भी अटैच की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क काफी व्यापक है, जिसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। जिला खनिज न्यास फंड का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए किया गया था। इस फंड का उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ जिलों में फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि कई टेंडरों में नियमों का पालन नहीं किया गया और सरकारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से पहले जारी की गई जानकारी में भी यह कहा गया था कि जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन में आर्थिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू सामने आने पर ईडी ने जांच शुरू की। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घोटाले से जुड़े धन का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया और इसके वास्तविक लाभार्थी कौन थे। ईडी की कार्रवाई के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद आगे और कार्रवाई की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:55:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धमतरी में ठेकेदार दीपेश गांधी के घर ED की दबिश, भारतमाला घोटाले से जुड़ रहे तार</title>
                                    <description><![CDATA[चार घंटे से ज्यादा समय तक चली जांच, परिजनों के मोबाइल जब्त; दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में जुटी प्रवर्तन निदेशालय की टीम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a31037d5e4c2/article-56088"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ed-raid-dhamtari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने इलाके में हलचल बढ़ा दी। ईडी की टीम ने स्थानीय ठेकेदार दीपेश गांधी के आमापारा स्थित आवास पर दबिश देकर जांच शुरू की। सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई कई घंटों तक जारी रही। अधिकारियों के साथ सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके में लोगों की भीड़ जुटी रही और दिनभर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना में सामने आए कथित जमीन अधिग्रहण घोटाले या उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के मामलों से संबंधित हो सकती है। हालांकि ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी मामले की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि ईडी के अधिकारी दो वाहनों में धमतरी पहुंचे थे। टीम के साथ सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद थे। अधिकारियों ने पहुंचते ही घर के भीतर जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार छह से अधिक अधिकारी दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजातों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद परिजनों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिए गए हैं ताकि जांच प्रभावित न हो और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सके। अधिकारियों ने कई दस्तावेजों की छानबीन की और कुछ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने साथ ले जाने की जानकारी सामने आ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार हैं और सरकारी व निजी परियोजनाओं में काम करने वाले बड़े ठेकेदारों के साथ जुड़े रहे हैं। धमतरी और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों में उनकी भागीदारी बताई जाती है। ऐसे में ईडी की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की चर्चा को तेज कर दिया है। इससे पहले भी ईडी ने इसी मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। कुरूद क्षेत्र में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसी पहुंची थी। इसके अलावा राइस मिलर रौशन चंद्राकर के यहां भी ईडी ने कार्रवाई की थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को जांच एजेंसियों द्वारा घोटाले की परतें खोलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच में दावा किया गया कि जमीन के मूल रिकॉर्ड में बदलाव कर और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर जमीन को दर्जनों हिस्सों में बांटकर नए नाम जोड़े गए और फिर उन्हीं नामों के आधार पर अधिक मुआवजे का दावा पेश किया गया। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि जिस जमीन का मुआवजा लगभग 29.5 करोड़ रुपये होना चाहिए था, उसे बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने की कोशिश की गई। आरोप है कि कुछ राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और भू-माफिया के गठजोड़ ने बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर पूरे खेल को अंजाम दिया। अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई थी। जांच रिपोर्ट में लगभग 80 नए नाम जोड़े जाने और कई खसरों को छोटे हिस्सों में बांटने का उल्लेख किया गया था। इस मामले में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था। इससे पहले जगदलपुर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त निर्भय कुमार साहू के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं, जिसकी वजह से करोड़ों रुपये के भुगतान पर सवाल खड़े हुए। भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना योजनाओं में से एक मानी जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य देशभर में आर्थिक कॉरिडोर विकसित कर माल परिवहन को तेज और सुगम बनाना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर भी इसी परियोजना का हिस्सा है। ऐसे में इस परियोजना से जुड़े किसी भी कथित घोटाले को गंभीरता से देखा जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ DMF घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, कांग्रेस नेता समेत कारोबारियों के ठिकानों पर रेड</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर, धमतरी, अंबिकापुर, दुर्ग और महासमुंद में एक साथ दबिश; दस्तावेजों, मोबाइल और वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी टीम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/eds-big-action-in-chhattisgarh-dmf-scam-raid-on-the/article-56100"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dmf-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से जुड़े कथित घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार सुबह राज्य के कई जिलों में एक साथ छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। रायपुर, धमतरी, अंबिकापुर, दुर्ग और महासमुंद सहित कई स्थानों पर ईडी की टीम पहुंची और कारोबारियों, ठेकेदारों तथा कथित रूप से मामले से जुड़े लोगों के ठिकानों पर जांच शुरू की। सुबह से शुरू हुई कार्रवाई देर शाम तक जारी रही। इस दौरान सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच अधिकारियों ने दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कागजातों की गहन पड़ताल की। रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास और कार्यालय से जुड़े ठिकानों पर ईडी की टीम पहुंची। वहीं सरगुजा जिले में पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता से जुड़ी फर्म मानसून एग्रो में भी जांच की गई। धमतरी जिले के आमापारा क्षेत्र में ठेकेदार दीपेश गांधी के घर पर भी अधिकारियों ने दबिश दी। अलग-अलग जिलों में चल रही इस कार्रवाई को लेकर पूरे दिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा बनी रही। हालांकि ईडी ने अभी तक आधिकारिक रूप से कार्रवाई के कारणों और बरामद दस्तावेजों को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धमतरी में ईडी की टीम सुरक्षा बलों के साथ दो वाहनों में पहुंची थी। कोतवाली थाना क्षेत्र के आमापारा वार्ड स्थित दीपेश गांधी के निवास पर पहुंचकर अधिकारियों ने जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि छह से अधिक अधिकारी घर के अंदर मौजूद रहे और विभिन्न दस्तावेजों की जांच करते रहे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार्रवाई के दौरान परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिए गए ताकि डिजिटल रिकॉर्ड और संचार से जुड़ी जानकारियों की जांच की जा सके। अधिकारियों ने वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य रिकॉर्ड की भी पड़ताल की। दीपेश गांधी स्थानीय स्तर पर ठेकेदारी कार्यों से जुड़े हुए हैं और विभिन्न सरकारी तथा निजी परियोजनाओं में काम कर चुके हैं। जांच एजेंसियां उनके वित्तीय लेन-देन और परियोजनाओं से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा कर रही हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि जांच में किस प्रकार की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह से ही इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण लोगों की भीड़ जुटी रही और कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में कारोबारी शाश्वत लुणावत के यहां भी ईडी अधिकारियों ने कई घंटे तक जांच की। सूत्रों के मुताबिक दस्तावेजों के साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। इसी तरह अंबिकापुर में राकेश गुप्ता से जुड़ी फर्म मानसून एग्रो के कार्यालय और अन्य परिसरों में भी जांच एजेंसी के अधिकारी पहुंचे। वहां भी रिकॉर्ड खंगाले गए और कारोबारी गतिविधियों से संबंधित जानकारियां जुटाई गईं। अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार किया और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही। DMF यानी जिला खनिज न्यास निधि का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए किया गया था। इस फंड का उपयोग सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाना होता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस निधि के उपयोग को लेकर कई तरह के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ मामलों में फर्जी भुगतान, अनियमित ठेके और वित्तीय गड़बड़ियों के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। इन्हीं आरोपों के आधार पर विभिन्न एजेंसियां लगातार जांच कर रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि ईडी की यह कार्रवाई पहले से दर्ज मामलों और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर की गई है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों से जुड़े धन का उपयोग नियमों के विपरीत तो नहीं किया गया। जांच के दायरे में कई कारोबारी, ठेकेदार और उनसे जुड़े संस्थान भी बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी नई गिरफ्तारी या बड़ी बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष से जुड़े प्रतिष्ठान पर जांच होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि संबंधित पक्षों की ओर से अब तक कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है तथा जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:20:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>₹1400 करोड़ घोटाला: ED ने समुद्र किनारे ₹60 करोड़ का बंगला कुर्क किया</title>
                                    <description><![CDATA[एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड के पूर्व सीएमडी नितिन कसलीवाल पर शिकंजा, लंदन में बकिंघम पैलेस के पास स्थित संपत्ति समेत अब तक ₹179.55 करोड़ की परिसंपत्तियां जब्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/%E2%82%B91400-crore-scam-ed-attaches-sea-shore-bungalow-worth-%E2%82%B960/article-55613"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ed-action.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1400 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक ऋण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड (SKNL) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नितिन शंभुकुमार कासलीवाल की महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग क्षेत्र में स्थित आलीशान समुद्र तटीय संपत्ति को कुर्क कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार अरब सागर के किनारे स्थित इस लग्जरी बंगले की मौजूदा बाजार कीमत करीब 60 करोड़ रुपये आंकी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी इंदौर की ओर से की गई इस कार्रवाई को 1400 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति बैंक ऋण के दुरुपयोग और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अर्जित की गई थी। इसी आधार पर इसे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी के मुताबिक एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड ने विभिन्न बैंकों के कंसोर्टियम से भारी मात्रा में ऋण प्राप्त किया था। आरोप है कि कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने इन फंड्स का उपयोग निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में किया और बड़ी रकम को विभिन्न शेल कंपनियों तथा संबंधित संस्थाओं के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी की जांच में सामने आया है कि कंपनी के तत्कालीन प्रमुख नितिन कासलीवाल ने कथित तौर पर अपने परिवार और करीबी सहयोगियों के नाम पर कई कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया था। इन कंपनियों के जरिए धन को कई स्तरों पर घुमाया गया, जिसे वित्तीय भाषा में ‘लेयरिंग’ कहा जाता है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के माध्यम से बैंक ऋण की रकम को वैध दिखाने की कोशिश की गई और बाद में उससे देश-विदेश में महंगी संपत्तियां खरीदी गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">अलीबाग में स्थित यह बंगला भी कथित रूप से इसी धन से खरीदा गया था। समुद्र के सामने बनी यह संपत्ति लग्जरी सुविधाओं से लैस बताई जा रही है और इसे मामले की सबसे मूल्यवान भारतीय संपत्तियों में से एक माना जा रहा है। ईडी अधिकारियों के अनुसार संपत्ति के स्वामित्व और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही इसे कुर्क करने की कार्रवाई की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">यह इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में ईडी ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। जांच के दौरान विदेशी ट्रस्ट, ऑफशोर कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी को विदेशों में निवेश और संपत्ति खरीद से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं सुरागों के आधार पर ईडी ने लंदन में स्थित एक हाई-वैल्यू संपत्ति को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी के अनुसार यह संपत्ति ब्रिटेन के प्रतिष्ठित क्षेत्र में स्थित है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 119.55 करोड़ रुपये है। रिपोर्टों के मुताबिक यह प्रॉपर्टी बकिंघम पैलेस के आसपास के प्रीमियम इलाके में स्थित है। एजेंसी का मानना है कि इस संपत्ति की खरीद में भी कथित रूप से बैंक ऋण से जुड़े धन का उपयोग किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी के अनुसार मौजूदा कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक कुल 179.55 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। इनमें भारत और विदेश दोनों स्थानों की अचल संपत्तियां शामिल हैं। हालांकि एजेंसी का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले समय में कई अन्य संपत्तियों की पहचान भी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस तरह के बड़े लोन फ्रॉड मामलों में धन को विभिन्न कंपनियों और विदेशी संस्थाओं के जरिए छिपाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में वित्तीय ट्रेल का पता लगाने में लंबा समय लगता है। ईडी और अन्य जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, विदेशी लेन-देन, संपत्ति खरीद दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा किन माध्यमों से धन को भारत से बाहर भेजा गया। इसके अलावा लाभार्थियों की पहचान और अन्य संपत्तियों की ट्रैकिंग का काम भी जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंकिंग संस्थानों और नियामक एजेंसियों की भी नजर इस जांच पर बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। ईडी का कहना है कि यदि जांच में और संपत्तियों या निवेशों का पता चलता है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अलीबाग में स्थित 60 करोड़ रुपये के इस आलीशान बंगले की कुर्की को 1400 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले में ईडी की बड़ी सफलता माना जा रहा है। एजेंसी की कार्रवाई ने यह संकेत भी दिया है कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 13:56:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंदौर नगर निगम के 92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ड्रेनेज और सीवरेज परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा, 43 संपत्तियां अटैच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd3c560e30/article-54838"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम से जुड़े चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है। जांच एजेंसी ने नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर इंदौर नगर निगम का यह मामला सुर्खियों में आ गया है। ईडी की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि नगर निगम में ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन वास्तविकता में उन कार्यों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला कई वर्षों से जांच एजेंसियों के रडार पर था। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने आपसी मिलीभगत से ऐसी योजनाओं के भुगतान स्वीकृत कराए जो या तो पूरी तरह कागजों पर थीं या जिनका वास्तविक कार्य बेहद सीमित था। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण परियोजना बताकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। ईडी को जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि फर्जी बिलों के माध्यम से बड़ी रकम निकाली गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे घोटाले की परतें और खुल सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में गिरफ्तार पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख किरदार माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार कई परियोजनाओं की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगी, लेकिन ईडी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित रूप से घोटाले से अर्जित धन के उपयोग से भी जुड़ा हुआ है। ईडी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इसी कड़ी में एजेंसी ने अब तक 43 संपत्तियों को अटैच किया है। इन संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक परिसंपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईडी अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। बैंक खातों, निवेश, जमीन खरीद और अन्य वित्तीय गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से निकाली गई राशि किन-किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और उससे कौन-कौन लाभान्वित हुआ। इंदौर नगर निगम से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए और लंबे समय तक कथित अनियमितताओं का पता नहीं चल सका, उसने सरकारी परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि संबंधित विभागों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें प्रशासनिक जवाबदेही का पहलू भी जुड़ा हुआ है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है। फिलहाल एजेंसियां हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं। ईडी की हालिया कार्रवाई के बाद नगर निगम से जुड़े कई पुराने दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस कथित घोटाले का दायरा केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित था या फिर अन्य कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुईं। तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और ईडी को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आएंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PNB घोटाले में बड़ा कदम: नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की राह लगभग साफ</title>
                                    <description><![CDATA[CBI टीम लंदन पहुंची, ब्रिटेन में कानूनी विकल्प खत्म होने के कगार पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-move-in-pnb-bank-case--the-way-for-nirav-modi-s-extradition-is-almost-clear/article-51220"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/nirav-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नीरव मोदी</span></span> के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष टीम इस सिलसिले में लंदन पहुंच चुकी है, जहां वह ब्रिटिश अधिकारियों के साथ अंतिम औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन में नीरव मोदी के पास उपलब्ध अधिकांश कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं, जिससे उसके जल्द भारत लाए जाने की संभावना मजबूत हो गई है।</p>
<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से इस हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध मामले में प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। नीरव मोदी 2018 में घोटाले के उजागर होने के बाद देश छोड़कर फरार हो गया था और बाद में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वहीं की जेल में बंद है और लगातार अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करता रहा है।</p>
<p>हालांकि, ब्रिटेन की अदालतों ने उसकी कई याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मानवाधिकार, सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े उसके तर्कों को अदालतों ने पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और जेल की परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।</p>
<p>CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है। एजेंसियों ने ब्रिटेन को विस्तृत साक्ष्य सौंपे हैं, जिनमें फर्जी बैंक गारंटी, संदिग्ध लेनदेन और धन शोधन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय टीम ब्रिटेन के गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय कर रही है, ताकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।</p>
<p>PNB घोटाला देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में गिना जाता है। आरोप है कि नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने मुंबई स्थित बैंक शाखा से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी कर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। इस मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और नियामकीय ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते कानूनी सहयोग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ वैश्विक सख्ती के कारण इस मामले में तेजी आई है। यदि अंतिम मंजूरी मिलती है, तो सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में नीरव मोदी को भारत लाया जाएगा, जहां उसे न्यायिक हिरासत में भेजकर मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाएगी।</p>
<p>यह मामला भारत के लिए एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:57 +0530</pubDate>
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