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                <title>Economic Offences - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Economic Offences RSS Feed</description>
                
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                <title>तीन कथित घोटालों के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल ने किया सरेंडर, EOW की पूछताछ शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष पर शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच; जब्त डायरी में कथित वित्तीय लेन-देन की एंट्री मिलने के बाद कार्रवाई तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ramgopal-aggarwal-accused-of-three-alleged-scams-surrenders-eow-inquiry/article-58276"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ramgopal-agrawal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने करीब तीन साल बाद रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इसके बाद EOW ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि उनसे कथित वित्तीय लेन-देन, जब्त दस्तावेजों और विभिन्न मामलों में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है। यह मामला उन तीन प्रमुख आर्थिक मामलों से जुड़ा है, जिनकी जांच पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां कर रही हैं। EOW के अनुसार, कोल लेवी मामले की जांच के दौरान कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से जब्त की गई एक डायरी में कथित तौर पर कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्रियां मिली थीं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन एंट्रियों के आधार पर यह संदेह पैदा हुआ कि कथित रकम रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से कांग्रेस भवन तक पहुंची। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धन का स्रोत क्या था, राशि किसने उपलब्ध कराई, किसने उसे प्राप्त किया और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया। इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि कथित शराब घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर और उससे जुड़े लोगों ने करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए थे। वहीं, कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले में भी कारोबारी रोशन चंद्राकर के माध्यम से बड़ी रकम कांग्रेस भवन तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है। रामगोपाल अग्रवाल या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से भी लगातार दो दिनों तक पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे पिछले तीन वर्षों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों, उनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और कथित नेटवर्क से जुड़े कई सवाल किए। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारियों का अन्य दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका, उनसे जुड़े लोगों के संपर्क, बैंकिंग लेन-देन, धन के स्रोत, उसकी प्राप्ति और उपयोग सहित कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी ने बताया कि पूछताछ के दौरान जब्त डायरी, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और विवेचना में जुटाए गए अन्य साक्ष्यों का उपयोग किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। रामगोपाल अग्रवाल का नाम जिन मामलों में सामने आया है, उनमें कथित 3,000 करोड़ रुपये का शराब घोटाला, लगभग 450 करोड़ रुपये का कोल लेवी मामला और करीब 127 करोड़ रुपये का कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला शामिल है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि इन मामलों में सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। जांच एजेंसियां उनकी गतिविधियों और लोकेशन से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही थीं। अब उनके सरेंडर के बाद जांच को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW के अनुसार वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी शेष है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन कारोबार से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों के अनुसार कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की कथित अवैध वसूली की गई। एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत में विचाराधीन है।कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। EOW के अनुसार वर्ष 2015 से 2023 के बीच नियमों का उल्लंघन कर कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>धमतरी में ठेकेदार दीपेश गांधी के घर ED की दबिश, भारतमाला घोटाले से जुड़ रहे तार</title>
                                    <description><![CDATA[चार घंटे से ज्यादा समय तक चली जांच, परिजनों के मोबाइल जब्त; दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में जुटी प्रवर्तन निदेशालय की टीम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a31037d5e4c2/article-56088"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ed-raid-dhamtari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने इलाके में हलचल बढ़ा दी। ईडी की टीम ने स्थानीय ठेकेदार दीपेश गांधी के आमापारा स्थित आवास पर दबिश देकर जांच शुरू की। सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई कई घंटों तक जारी रही। अधिकारियों के साथ सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके में लोगों की भीड़ जुटी रही और दिनभर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना में सामने आए कथित जमीन अधिग्रहण घोटाले या उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के मामलों से संबंधित हो सकती है। हालांकि ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी मामले की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि ईडी के अधिकारी दो वाहनों में धमतरी पहुंचे थे। टीम के साथ सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद थे। अधिकारियों ने पहुंचते ही घर के भीतर जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार छह से अधिक अधिकारी दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजातों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद परिजनों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिए गए हैं ताकि जांच प्रभावित न हो और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सके। अधिकारियों ने कई दस्तावेजों की छानबीन की और कुछ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने साथ ले जाने की जानकारी सामने आ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार हैं और सरकारी व निजी परियोजनाओं में काम करने वाले बड़े ठेकेदारों के साथ जुड़े रहे हैं। धमतरी और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों में उनकी भागीदारी बताई जाती है। ऐसे में ईडी की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की चर्चा को तेज कर दिया है। इससे पहले भी ईडी ने इसी मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। कुरूद क्षेत्र में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसी पहुंची थी। इसके अलावा राइस मिलर रौशन चंद्राकर के यहां भी ईडी ने कार्रवाई की थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को जांच एजेंसियों द्वारा घोटाले की परतें खोलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच में दावा किया गया कि जमीन के मूल रिकॉर्ड में बदलाव कर और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर जमीन को दर्जनों हिस्सों में बांटकर नए नाम जोड़े गए और फिर उन्हीं नामों के आधार पर अधिक मुआवजे का दावा पेश किया गया। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि जिस जमीन का मुआवजा लगभग 29.5 करोड़ रुपये होना चाहिए था, उसे बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने की कोशिश की गई। आरोप है कि कुछ राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और भू-माफिया के गठजोड़ ने बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर पूरे खेल को अंजाम दिया। अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई थी। जांच रिपोर्ट में लगभग 80 नए नाम जोड़े जाने और कई खसरों को छोटे हिस्सों में बांटने का उल्लेख किया गया था। इस मामले में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था। इससे पहले जगदलपुर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त निर्भय कुमार साहू के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं, जिसकी वजह से करोड़ों रुपये के भुगतान पर सवाल खड़े हुए। भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना योजनाओं में से एक मानी जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य देशभर में आर्थिक कॉरिडोर विकसित कर माल परिवहन को तेज और सुगम बनाना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर भी इसी परियोजना का हिस्सा है। ऐसे में इस परियोजना से जुड़े किसी भी कथित घोटाले को गंभीरता से देखा जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>PNB घोटाले में बड़ा कदम: नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की राह लगभग साफ</title>
                                    <description><![CDATA[CBI टीम लंदन पहुंची, ब्रिटेन में कानूनी विकल्प खत्म होने के कगार पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-move-in-pnb-bank-case--the-way-for-nirav-modi-s-extradition-is-almost-clear/article-51220"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/nirav-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नीरव मोदी</span></span> के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष टीम इस सिलसिले में लंदन पहुंच चुकी है, जहां वह ब्रिटिश अधिकारियों के साथ अंतिम औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन में नीरव मोदी के पास उपलब्ध अधिकांश कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं, जिससे उसके जल्द भारत लाए जाने की संभावना मजबूत हो गई है।</p>
<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से इस हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध मामले में प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। नीरव मोदी 2018 में घोटाले के उजागर होने के बाद देश छोड़कर फरार हो गया था और बाद में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वहीं की जेल में बंद है और लगातार अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करता रहा है।</p>
<p>हालांकि, ब्रिटेन की अदालतों ने उसकी कई याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मानवाधिकार, सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े उसके तर्कों को अदालतों ने पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और जेल की परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।</p>
<p>CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है। एजेंसियों ने ब्रिटेन को विस्तृत साक्ष्य सौंपे हैं, जिनमें फर्जी बैंक गारंटी, संदिग्ध लेनदेन और धन शोधन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय टीम ब्रिटेन के गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय कर रही है, ताकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।</p>
<p>PNB घोटाला देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में गिना जाता है। आरोप है कि नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने मुंबई स्थित बैंक शाखा से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी कर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। इस मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और नियामकीय ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते कानूनी सहयोग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ वैश्विक सख्ती के कारण इस मामले में तेजी आई है। यदि अंतिम मंजूरी मिलती है, तो सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में नीरव मोदी को भारत लाया जाएगा, जहां उसे न्यायिक हिरासत में भेजकर मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाएगी।</p>
<p>यह मामला भारत के लिए एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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