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                <title>Financial Crime - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Financial Crime RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रायपुर में ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 14.37 लाख की धोखाधड़ी, तीन कर्मचारियों पर गबन का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कबीर नगर स्थित दुकान में बिक्री की रकम जमा न कर कर्मचारियों पर लाखों रुपए हड़पने का आरोप, पुलिस ने केस दर्ज कर स्टॉक, बिल और लेनदेन की जांच शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/fraud-of-rs-1437-lakh-from-auto-parts-businessman-in/article-57885"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऑटो पार्ट्स कारोबारी के साथ लाखों रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कबीर नगर क्षेत्र में स्थित एक ऑटो पार्ट्स दुकान के तीन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने ग्राहकों को सामान बेचने के बाद बिक्री से प्राप्त रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और उसे अपने पास रख लिया। कारोबारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में करीब 14 लाख 37 हजार 226 रुपए के गबन की बात सामने आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहम्मद अनवर रायपुर के फेस-1, कबीर नगर क्षेत्र के निवासी हैं और वे इंडियन मोटर्स ऑटो पार्ट्स नाम से व्यवसाय संचालित करते हैं। उनकी दुकान पर कई कर्मचारी बिक्री और ग्राहकों से लेनदेन का कार्य संभालते थे। आरोप है कि दुकान में कार्यरत मोहम्मद फाजिल, सर्वर खान और कायनात ने लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से बिक्री की रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और आर्थिक गड़बड़ी को छिपाते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के मुताबिक, यह कथित धोखाधड़ी 11 मार्च 2025 से 5 नवंबर 2025 के बीच की गई। इस दौरान आरोपियों ने कई ग्राहकों को ऑटो पार्ट्स बेचे, लेकिन बिक्री से मिली राशि दुकान के कैश या बैंक खाते में जमा नहीं कराई। जब कारोबारी ने नियमित रूप से स्टॉक और नकदी का मिलान कराया तो बिक्री और जमा रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की गई, जिसमें लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितता का पता चला।</p>
<p style="text-align:justify;">कारोबारी का कहना है कि दुकान में सभी बिक्री का रिकॉर्ड बिलों और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कई ऐसे लेनदेन सामने आए, जिनमें सामान तो ग्राहकों को दिया गया था, लेकिन उसकी राशि दुकान के खातों में दर्ज नहीं थी। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों पर भरोसे का गलत फायदा उठाकर गबन करने का आरोप लगाया।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत पुलिस तक पहुंचाई गई। कबीर नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों कर्मचारियों के खिलाफ अमानत में खयानत और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज मिले हैं, लेकिन पूरे मामले की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस दुकान के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर, बिल बुक, कैश बुक, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। इसके अलावा जिन ग्राहकों को सामान बेचा गया था, उनसे भी संपर्क कर बिक्री और भुगतान से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि भुगतान किस माध्यम से किया गया था और रकम दुकान तक क्यों नहीं पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने जानबूझकर बिक्री की रकम अपने पास रखी और कारोबारी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कराई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारिक संस्थानों में इस प्रकार की घटनाएं कारोबारियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कई बार कर्मचारियों पर अत्यधिक भरोसा और वित्तीय निगरानी में कमी का फायदा उठाकर इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारियों को नियमित रूप से स्टॉक ऑडिट, कैश वेरिफिकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करते रहना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी का समय रहते पता चल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आधुनिक बिलिंग सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और ऑनलाइन अकाउंटिंग व्यवस्था अपनाने से ऐसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करना और समय-समय पर आंतरिक ऑडिट कराना भी जरूरी माना जाता है। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 18:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>₹1400 करोड़ घोटाला: ED ने समुद्र किनारे ₹60 करोड़ का बंगला कुर्क किया</title>
                                    <description><![CDATA[एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड के पूर्व सीएमडी नितिन कसलीवाल पर शिकंजा, लंदन में बकिंघम पैलेस के पास स्थित संपत्ति समेत अब तक ₹179.55 करोड़ की परिसंपत्तियां जब्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/%E2%82%B91400-crore-scam-ed-attaches-sea-shore-bungalow-worth-%E2%82%B960/article-55613"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ed-action.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1400 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक ऋण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड (SKNL) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नितिन शंभुकुमार कासलीवाल की महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग क्षेत्र में स्थित आलीशान समुद्र तटीय संपत्ति को कुर्क कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार अरब सागर के किनारे स्थित इस लग्जरी बंगले की मौजूदा बाजार कीमत करीब 60 करोड़ रुपये आंकी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी इंदौर की ओर से की गई इस कार्रवाई को 1400 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति बैंक ऋण के दुरुपयोग और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अर्जित की गई थी। इसी आधार पर इसे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी के मुताबिक एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड ने विभिन्न बैंकों के कंसोर्टियम से भारी मात्रा में ऋण प्राप्त किया था। आरोप है कि कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने इन फंड्स का उपयोग निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में किया और बड़ी रकम को विभिन्न शेल कंपनियों तथा संबंधित संस्थाओं के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी की जांच में सामने आया है कि कंपनी के तत्कालीन प्रमुख नितिन कासलीवाल ने कथित तौर पर अपने परिवार और करीबी सहयोगियों के नाम पर कई कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया था। इन कंपनियों के जरिए धन को कई स्तरों पर घुमाया गया, जिसे वित्तीय भाषा में ‘लेयरिंग’ कहा जाता है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के माध्यम से बैंक ऋण की रकम को वैध दिखाने की कोशिश की गई और बाद में उससे देश-विदेश में महंगी संपत्तियां खरीदी गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">अलीबाग में स्थित यह बंगला भी कथित रूप से इसी धन से खरीदा गया था। समुद्र के सामने बनी यह संपत्ति लग्जरी सुविधाओं से लैस बताई जा रही है और इसे मामले की सबसे मूल्यवान भारतीय संपत्तियों में से एक माना जा रहा है। ईडी अधिकारियों के अनुसार संपत्ति के स्वामित्व और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही इसे कुर्क करने की कार्रवाई की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">यह इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में ईडी ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। जांच के दौरान विदेशी ट्रस्ट, ऑफशोर कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी को विदेशों में निवेश और संपत्ति खरीद से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं सुरागों के आधार पर ईडी ने लंदन में स्थित एक हाई-वैल्यू संपत्ति को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी के अनुसार यह संपत्ति ब्रिटेन के प्रतिष्ठित क्षेत्र में स्थित है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 119.55 करोड़ रुपये है। रिपोर्टों के मुताबिक यह प्रॉपर्टी बकिंघम पैलेस के आसपास के प्रीमियम इलाके में स्थित है। एजेंसी का मानना है कि इस संपत्ति की खरीद में भी कथित रूप से बैंक ऋण से जुड़े धन का उपयोग किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी के अनुसार मौजूदा कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक कुल 179.55 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। इनमें भारत और विदेश दोनों स्थानों की अचल संपत्तियां शामिल हैं। हालांकि एजेंसी का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले समय में कई अन्य संपत्तियों की पहचान भी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस तरह के बड़े लोन फ्रॉड मामलों में धन को विभिन्न कंपनियों और विदेशी संस्थाओं के जरिए छिपाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में वित्तीय ट्रेल का पता लगाने में लंबा समय लगता है। ईडी और अन्य जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, विदेशी लेन-देन, संपत्ति खरीद दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा किन माध्यमों से धन को भारत से बाहर भेजा गया। इसके अलावा लाभार्थियों की पहचान और अन्य संपत्तियों की ट्रैकिंग का काम भी जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंकिंग संस्थानों और नियामक एजेंसियों की भी नजर इस जांच पर बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। ईडी का कहना है कि यदि जांच में और संपत्तियों या निवेशों का पता चलता है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अलीबाग में स्थित 60 करोड़ रुपये के इस आलीशान बंगले की कुर्की को 1400 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले में ईडी की बड़ी सफलता माना जा रहा है। एजेंसी की कार्रवाई ने यह संकेत भी दिया है कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 13:56:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>PNB घोटाले में बड़ा कदम: नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की राह लगभग साफ</title>
                                    <description><![CDATA[CBI टीम लंदन पहुंची, ब्रिटेन में कानूनी विकल्प खत्म होने के कगार पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-move-in-pnb-bank-case--the-way-for-nirav-modi-s-extradition-is-almost-clear/article-51220"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/nirav-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नीरव मोदी</span></span> के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष टीम इस सिलसिले में लंदन पहुंच चुकी है, जहां वह ब्रिटिश अधिकारियों के साथ अंतिम औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन में नीरव मोदी के पास उपलब्ध अधिकांश कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं, जिससे उसके जल्द भारत लाए जाने की संभावना मजबूत हो गई है।</p>
<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से इस हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध मामले में प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। नीरव मोदी 2018 में घोटाले के उजागर होने के बाद देश छोड़कर फरार हो गया था और बाद में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वहीं की जेल में बंद है और लगातार अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करता रहा है।</p>
<p>हालांकि, ब्रिटेन की अदालतों ने उसकी कई याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मानवाधिकार, सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े उसके तर्कों को अदालतों ने पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और जेल की परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।</p>
<p>CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है। एजेंसियों ने ब्रिटेन को विस्तृत साक्ष्य सौंपे हैं, जिनमें फर्जी बैंक गारंटी, संदिग्ध लेनदेन और धन शोधन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय टीम ब्रिटेन के गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय कर रही है, ताकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।</p>
<p>PNB घोटाला देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में गिना जाता है। आरोप है कि नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने मुंबई स्थित बैंक शाखा से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी कर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। इस मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और नियामकीय ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते कानूनी सहयोग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ वैश्विक सख्ती के कारण इस मामले में तेजी आई है। यदि अंतिम मंजूरी मिलती है, तो सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में नीरव मोदी को भारत लाया जाएगा, जहां उसे न्यायिक हिरासत में भेजकर मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाएगी।</p>
<p>यह मामला भारत के लिए एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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