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                <title>Bilaspur - दैनिक जागरण</title>
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                <title>बिजली कटौती पर हाईकोर्ट की सख्ती, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को जमीन पर राहत दिखनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[बार-बार बिजली गुल होने पर शासन ने पेश किया एक्शन प्लान, हाईकोर्ट ने प्रगति रिपोर्ट मांगी; अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-strictness-on-power-cuts-said-not-just/article-58286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-power-cut.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारिश और आंधी-तूफान के दौरान बिलासपुर में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और बिजली विभाग के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया गया है और कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट होने के बजाय स्पष्ट कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं देगा और आम लोगों को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे दावों का कोई खास महत्व नहीं रहेगा। कोर्ट ने प्रशासन को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने और प्रगति रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से ऊर्जा सचिव और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक ने अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर शहर की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नौ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों के तहत बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की योजना तैयार की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल यह पूरा मामला बिलासपुर में कुछ दिनों पहले हुई भारी बारिश और तेज आंधी के बाद सामने आया था। शहर के कई हिस्सों में पूरी रात बिजली आपूर्ति बाधित रही। हालात ऐसे थे कि वीवीआईपी क्षेत्र माने जाने वाले कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन जैसे इलाकों में भी लंबे समय तक बिजली नहीं रही। इससे आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों ने लगातार बिजली गुल रहने, बार-बार फॉल्ट आने और विभाग की धीमी कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई थी। इस घटना के बाद मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में मामले की सुनवाई शुरू की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। शहर में अब पुराने और क्षतिग्रस्त सीमेंट के बिजली खंभों की जगह लोहे के पोल लगाए जाएंगे, ताकि तेज हवा या अन्य कारणों से बार-बार खंभे गिरने की समस्या कम हो सके। इसके अलावा जहां नए बिजली पोल लगाए जाएंगे, वहां भी स्टील के खंभों का ही उपयोग किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थायी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का तेजी से समाधान करने और बढ़ते लोड को नियंत्रित करने के लिए शहर में दो नए सप्लाई जोन बनाने की योजना भी तैयार की गई है। मंगला और कोनी क्षेत्रों को नए सप्लाई जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण एवं सामान्य विकास योजना के तहत करीब 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से ऐसे क्षेत्रों में खुले बिजली तार हटाकर कवर्ड केबल बिछाई जाएगी, जहां बार-बार फॉल्ट की समस्या सामने आती रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि शहर में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए नए सब-स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक मुख्य सब-स्टेशन और दो 33/11 केवी क्षमता वाले नए सब-स्टेशन बनाने के लिए जिला प्रशासन से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। वहीं पेड़ों की शाखाओं से बिजली लाइनों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अतिरिक्त स्काईलिफ्ट वाहन तैनात किए जाएंगे। विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियों की प्रक्रिया भी शुरू करने की जानकारी अदालत को दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से भी शपथ पत्र पेश किया गया। निगम आयुक्त ने बताया कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। यहां अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। निगम ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 से ही शहर के सभी आठ जोनों में नालियों की सफाई और गाद निकालने का अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्य की जियो-टैग्ड तस्वीरें भी अदालत में प्रस्तुत की गई हैं। जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए 14 विशेष वाहनों का बेड़ा भी चौबीसों घंटे तैयार रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इन सभी दावों के बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बनाई गई योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। यदि बारिश के दौरान फिर बिजली गुल होती है या सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनती है, तो इसका अर्थ होगा कि योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हुआ। अदालत ने निर्देश दिया कि मानसून के पूरे दौर में बिजली आपूर्ति यथासंभव निर्बाध रखी जाए और किसी भी शिकायत का तत्काल समाधान किया जाए। डिवीजन बेंच ने नगर निगम आयुक्त और ऊर्जा सचिव को निर्देश दिया है कि वे शपथ पत्र के साथ विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक घोषित योजनाओं पर कितना काम हुआ है और जनता को उसका क्या लाभ मिला है। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाकर फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका असर शहर की व्यवस्था में साफ दिखाई देना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>AI से बने शपथ-पत्र पर भड़के चीफ जस्टिस, CIMS की व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर स्थित CIMS अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि कागजों में सब कुछ ठीक दिखाने से हकीकत नहीं बदलती। जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज मिलना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chief-justice-angry-over-affidavit-made-by-ai-high-court/article-58199"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) की बदहाल व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए गए शपथ-पत्र को देखकर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दस्तावेज के कई हिस्सों में एक जैसी भाषा और दोहराव दिखाई देता है, जिससे यह प्रतीत होता है कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल व्यवस्थित और आकर्षक दस्तावेज पेश करने से अस्पताल की वास्तविक स्थिति नहीं बदल जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं वास्तव में संतोषजनक होतीं तो मामला अदालत तक पहुंचता ही नहीं। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह भी कहा कि अदालत को गुमराह करने की बजाय अस्पताल की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित याचिका का उद्देश्य किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार सुनिश्चित करना है ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि किसी सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाला मरीज केवल मशीनों और इमारतों पर भरोसा नहीं करता, बल्कि उसे समय पर उपचार और आवश्यक सुविधाओं की उम्मीद होती है। यदि जरूरतमंद व्यक्ति को सही समय पर इलाज मिलेगा तो वह अस्पताल और वहां कार्यरत लोगों के लिए दुआ करेगा। इसलिए केवल कागजों पर दावे करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक सुधार दिखाई देना भी जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष मार्च और अप्रैल महीने में किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट भी रखी गई। कोर्ट कमिश्नरों ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल की कई गंभीर खामियों का उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल की इमारत में कई स्थानों पर पानी का रिसाव हो रहा था और हाल ही में हुई बारिश के बाद अस्पताल के कुछ हिस्सों में पानी भर गया था। इसके अलावा अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम भी लंबे समय से बंद पड़ा हुआ मिला, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के लिए 15 जून 2026 को आदेश जारी कर दिया गया था और वर्तमान में मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। अधिकारियों ने दावा किया कि जल्द ही यह प्रणाली पूरी तरह चालू कर दी जाएगी। हालांकि अदालत ने इस दावे पर संतोष व्यक्त करने के बजाय कहा कि इन कार्यों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने भी अदालत में एक अलग शपथ-पत्र प्रस्तुत किया। इसमें CIMS के लिए खरीदी जा रही आधुनिक चिकित्सा मशीनों और उपकरणों की विस्तृत जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल के लिए कुल 31 अत्याधुनिक मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इनमें से 13 मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं, जबकि दो मशीनों के लिए जून महीने में खरीद आदेश जारी किए जा चुके हैं। दो अन्य मशीनों की कीमत अधिक होने के कारण उनकी खरीद के लिए CIMS प्रशासन से अतिरिक्त स्वीकृति मांगी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">शपथ-पत्र में यह भी बताया गया कि कुछ मशीनें अभी तकनीकी परीक्षण के चरण में हैं। परीक्षण पूरा होने के बाद उनकी वित्तीय बोली खोली जाएगी। वहीं कुछ अन्य उपकरणों के टेंडर का मूल्यांकन जारी है और शेष मशीनों की निविदाएं भी तय कार्यक्रम के अनुसार खोली जानी हैं। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी दर्ज करते हुए कहा कि मशीनों की खरीद तभी सार्थक मानी जाएगी जब वे अस्पताल में स्थापित होकर मरीजों के इलाज में उपयोग होने लगें।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत केवल सरकारी दावों पर निर्भर नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट कमिश्नर किसी भी समय अस्पताल का निरीक्षण कर सकते हैं और यह जांच सकते हैं कि अदालत में प्रस्तुत किए गए दावों के अनुरूप वास्तव में काम हुआ है या नहीं। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि न्यायालय के समक्ष तथ्यों को पूरी ईमानदारी के साथ रखना उनकी जिम्मेदारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">AI से तैयार किए गए शपथ-पत्र को लेकर की गई टिप्पणी भी सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी दस्तावेज को आधुनिक तकनीक की सहायता से तैयार किया जाता है, तब भी उसमें वास्तविक तथ्यों का सही और स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। केवल भाषा को आकर्षक बनाकर या एक जैसी सामग्री दोहराकर अदालत को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। न्यायालय ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे भविष्य में ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करें जो वास्तविक स्थिति का सटीक चित्र प्रस्तुत करें।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला पिछले कुछ समय से CIMS अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, भवन की स्थिति, चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा में है। जनहित याचिका के माध्यम से अस्पताल की कई कमियों को अदालत के सामने रखा गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने नियमित रूप से इस मामले की निगरानी शुरू की। अदालत का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:52:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर करंट हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, बिजली विभाग से मांगा विस्तृत जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[तीन लोगों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान, हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था, इलेक्ट्रिक फेंसिंग और रोकथाम नीति पर मांगा शपथपत्र।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-strict-on-bilaspur-current-accident-demands-detailed-answer/article-58077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-news-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत के मामले ने अब न्यायपालिका का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और राज्य के ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में बिजली व्यवस्था की निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू हैं तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य के कई हिस्सों में खेतों, फार्महाउसों और निजी परिसरों के आसपास बिजली प्रवाहित फेंसिंग लगाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई लोग अपनी फसल, पशुओं या संपत्ति की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली युक्त तारों का उपयोग करते हैं, लेकिन इसकी चपेट में आने से अनजान लोगों की जान चली जाती है। अदालत ने माना कि यह केवल व्यक्तिगत लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान में ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए जाते हैं, लेकिन केवल एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। यदि लगातार एक जैसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं, तो इसका अर्थ है कि रोकथाम के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। अदालत ने सरकार और बिजली विभाग से पूछा है कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्पष्ट नीति, दिशा-निर्देश या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू है। यदि नहीं, तो इसे तैयार करने और लागू करने की समय-सीमा भी बताई जाए। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले में CSPDCL के मैनेजिंग डायरेक्टर को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाए। साथ ही ऊर्जा विभाग के सचिव और बिजली कंपनी से विस्तृत शपथपत्र मांगा गया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि बिजली ढांचे का निरीक्षण कितनी नियमितता से किया जाता है, जर्जर तारों और खुले विद्युत स्रोतों की पहचान और मरम्मत की क्या व्यवस्था है तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिस घटना के आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया, वह बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव की है। यहां करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल बन गया था। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए स्वतः सुनवाई शुरू की। अदालत का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। पिछले दो महीनों में बिलासपुर जिले में करंट लगने की अलग-अलग घटनाओं में आठ लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई मामले खेतों के आसपास लगे बिजली प्रवाहित तारों या जर्जर विद्युत लाइनों से जुड़े बताए गए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने बिजली सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पुराने और ढीले बिजली तार लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कई बार घरेलू पशु और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। इसलिए यह विषय मानव सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सके। पूरे मामले पर राज्य सरकार और बिजली विभाग की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है। अदालत के निर्देशों के बाद अब यह स्पष्ट होगा कि बिजली सुरक्षा को लेकर वर्तमान व्यवस्था कितनी प्रभावी है और भविष्य में किन सुधारात्मक कदमों की योजना बनाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर के स्कूलों में बिना किताबों के पढ़ाई, नए शिक्षा सत्र के 15 दिन बाद भी नहीं पहुंचीं पाठ्य पुस्तकें</title>
                                    <description><![CDATA[70 और 80 जीएसएम कागज विवाद, टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी देरी बनी वजह। जिला शिक्षा अधिकारी ने जल्द वितरण का भरोसा दिया, लाखों छात्र अब भी नई किताबों का इंतजार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/studying-without-books-in-bilaspur-schools-text-books-did-not/article-57950"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-schools.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों को अब तक नई पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं लग रही हैं, शिक्षक पढ़ाई भी करवा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में छात्र बिना किताबों के ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई बच्चे पुराने नोट्स, पिछले सत्र की किताबों या शिक्षकों द्वारा ब्लैकबोर्ड पर लिखाए गए पाठ के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही किताबों की अनुपलब्धता ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार इस बार किताबों के वितरण में देरी का मुख्य कारण कागज की गुणवत्ता को लेकर चला विवाद, टेंडर प्रक्रिया में विलंब और प्रशासनिक स्तर पर हुई तकनीकी दिक्कतें हैं। पाठ्य पुस्तक निगम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष 70 जीएसएम और 80 जीएसएम कागज के उपयोग को लेकर लंबे समय तक निर्णय नहीं हो सका। इसी वजह से किताबों की छपाई निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो पाई और वितरण प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों पर दिखाई दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर जिले में करीब तीन लाख विद्यार्थियों के लिए नए शिक्षा सत्र में लगभग 15 लाख पाठ्य पुस्तकों की आवश्यकता है। कक्षा के अनुसार प्रत्येक छात्र को तीन से छह किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को तीन से चार पुस्तकें, मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों को लगभग पांच और हाईस्कूल स्तर पर छह तक किताबें दी जाती हैं। राज्य सरकार की योजना के तहत कक्षा पहली से दसवीं तक पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। इन पुस्तकों की छपाई और स्कूलों तक वितरण की जिम्मेदारी पाठ्य पुस्तक निगम की होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार नया सत्र शुरू होने से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि सभी स्कूलों में समय पर किताबें पहुंच जाएंगी। कुछ समय पहले बिलासपुर दौरे पर आए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नए सत्र की शुरुआत से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं और विद्यार्थियों तक किताबें समय पर पहुंचाई जाएं। हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है। जिले के कई सरकारी और कुछ निजी विद्यालयों में अब तक विद्यार्थियों को पूरी पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बिना किताबों के पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें फिलहाल पुराने नोट्स या पिछले साल की पुस्तकों से पढ़ने को कहा गया है। कई बच्चों ने बताया कि शिक्षक बोर्ड पर पाठ लिखवाकर पढ़ाई करा रहे हैं, लेकिन किताबें नहीं होने से घर पर दोबारा पढ़ाई करने में परेशानी होती है। जिन विद्यार्थियों के पास पुराने संस्करण की किताबें भी नहीं हैं, उन्हें सहपाठियों की मदद लेनी पड़ रही है। इससे पढ़ाई की गति भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अभिभावकों ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब शिक्षा विभाग को पहले से स्कूल खुलने की तारीख की जानकारी थी, तो किताबों की छपाई और वितरण की प्रक्रिया समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए थी। उनका मानना है कि शिक्षा सत्र के शुरुआती दिनों में ही पढ़ाई की मजबूत नींव रखी जाती है। यदि इसी समय विद्यार्थियों को जरूरी अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं होगी तो इसका असर पूरे सत्र की पढ़ाई पर पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार इस बार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के नए दिशा-निर्देशों के कारण भी प्रकाशन प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ा। पहले विभाग 70 जीएसएम कागज पर किताबें छपवाता था, लेकिन इस बार 80 जीएसएम कागज पर छपाई का प्रस्ताव सामने आया। बाद में इस पर यह तर्क दिया गया कि मोटे कागज से किताबों का वजन बढ़ जाएगा और बच्चों के स्कूल बैग अधिक भारी हो जाएंगे। इस मुद्दे पर आपत्तियां आने के बाद प्रस्ताव में संशोधन करना पड़ा, जिससे टेंडर प्रक्रिया दोबारा प्रभावित हुई और किताबों की छपाई में अपेक्षा से अधिक समय लग गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसएम यानी ग्राम प्रति वर्ग मीटर, कागज की मोटाई और वजन मापने का मानक होता है। 70 जीएसएम कागज सामान्य रूप से कॉपियों और पुस्तकों में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि 80 जीएसएम कागज अधिक मजबूत और बेहतर गुणवत्ता वाला माना जाता है। हालांकि इसकी मोटाई अधिक होने से किताबों का कुल वजन भी बढ़ जाता है। यही वजह रही कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक विचार-विमर्श चलता रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ने कहा है कि पाठ्य पुस्तक निगम से नई किताबें जिले में पहुंच चुकी हैं और उनका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों सहित अन्य विद्यालयों में भी अगले दो से तीन दिनों के भीतर किताबें पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। निजी स्कूलों के लिए भी जल्द वितरण शुरू होने की बात कही गई है। हर नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को समय पर किताबें उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। शुरुआती दिनों में पढ़ाई का आधार मजबूत किया जाता है और यदि इसी दौरान अध्ययन सामग्री उपलब्ध न हो तो सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में विभाग के लिए जरूरी है कि भविष्य में टेंडर, छपाई और वितरण की पूरी प्रक्रिया पहले से तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए ताकि विद्यार्थियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शादी का झांसा देकर तीन साल तक दुष्कर्म का आरोप, बिलासपुर में आरक्षक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर हुई थी पहचान, युवती का आरोप- शादी का भरोसा देकर बनाए संबंध, बाद में खुद को शादीशुदा और दो बच्चों का पिता बताया; पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को भेजा जेल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/constable-arrested-in-bilaspur-accused-of-raping-for-three-years/article-57894"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/korba-murder-case-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक आरक्षक पर शादी का झांसा देकर युवती के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। युवती का आरोप है कि आरोपी ने पहले सोशल मीडिया के माध्यम से उससे दोस्ती की, फिर शादी का वादा कर करीब तीन वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। जब उसने विवाह की बात को लेकर दबाव बनाया तो आरोपी ने खुद को पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता बताते हुए शादी से इनकार कर दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसके बाद आरोपी ने युवती को धमकाना शुरू कर दिया। मामला तखतपुर थाना क्षेत्र का है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में 22 वर्षीय युवती की पहचान सोशल मीडिया के जरिए तखतपुर में पदस्थ आरक्षक सुमंत मिरी से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। युवती का आरोप है कि इसी दौरान आरक्षक ने उससे शादी करने का वादा किया और भरोसा दिलाया कि वह भविष्य में उससे विवाह करेगा। युवती का कहना है कि इसी भरोसे के आधार पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। शिकायत के मुताबिक आरोपी लगातार शादी का आश्वासन देता रहा, जिससे उसे विश्वास था कि दोनों का रिश्ता जल्द ही विवाह में बदल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती का आरोप है कि यह सिलसिला करीब तीन साल तक चलता रहा। इस दौरान आरोपी आरक्षक अलग-अलग मौकों पर उससे मिलता रहा और हर बार शादी की बात दोहराता रहा। पुलिस के अनुसार, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में आरक्षक का तबादला बिलासपुर पुलिस लाइन हो गया, लेकिन इसके बावजूद उसने युवती से संपर्क नहीं तोड़ा। वह उससे मिलता रहा और शादी का भरोसा देता रहा। युवती का कहना है कि उसे लंबे समय तक इस बात का पता नहीं था कि आरोपी पहले से विवाहित है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में नया मोड़ तब आया जब युवती ने शादी को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा। शिकायत के अनुसार, इस दौरान आरोपी ने बताया कि वह पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। युवती का आरोप है कि आरोपी ने यह तथ्य शुरुआत से उससे छिपाकर रखा था। जब उसे सच्चाई का पता चला तो उसने इसका विरोध किया और शादी के वादे की याद दिलाई। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया और उससे दूरी बनाने लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में यह भी कहा गया है कि सच्चाई सामने आने के बाद आरोपी ने युवती को धमकाना शुरू कर दिया। लगातार मानसिक दबाव और कथित धमकियों से परेशान होकर युवती ने अंततः तखतपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आरक्षक सुमंत मिरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, बयान और अन्य कानूनी पहलुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही उसके निलंबन की कार्रवाई भी नियमों के अनुसार की जा रही है। विभाग का कहना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आते हैं तो विभागीय नियमों के तहत स्वतंत्र जांच भी कराई जाती है। शादी का झांसा देकर बनाए गए संबंधों से जुड़े मामलों में जांच के दौरान परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों का विस्तार से परीक्षण किया जाता है। ऐसे मामलों में न्यायालय और जांच एजेंसियां प्रत्येक तथ्य का कानूनी आधार पर मूल्यांकन करती हैं। इसलिए मामले की अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 18:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ न्यायपालिका में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 17 न्यायिक अधिकारियों के तबादले</title>
                                    <description><![CDATA[अजय सिंह राजपूत बने NIA कोर्ट के स्पेशल जज, ओमप्रकाश जायसवाल को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) की जिम्मेदारी; कई जिलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के पदों पर बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-administrative-reshuffle-in-chhattisgarh-judiciary-transfer-of-17-judicial/article-57783"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए उच्च न्यायिक सेवा संवर्ग के 17 न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापनाओं के आदेश जारी किए हैं। रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी इस आदेश के तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायालयों के न्यायाधीशों और हाईकोर्ट में पदस्थ कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। न्यायपालिका में इस व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन को न्यायिक कार्यों की बेहतर निगरानी, प्रशासनिक संतुलन और मामलों के प्रभावी निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जारी आदेश के अनुसार, जगदलपुर के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत को अब स्पेशल जज (NIA कोर्ट), जगदलपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जुड़े संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली इस अदालत में उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है। वहीं, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के सचिव ओमप्रकाश जायसवाल को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) नियुक्त किया गया है। न्यायिक प्रशासन और अदालतों के संचालन में रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, बलौदाबाजार के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल जाहिद कुरैशी को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (विजिलेंस) नियुक्त किया गया है। यह पद न्यायिक व्यवस्था में अनुशासन, निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं, बलौदाबाजार के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा को छत्तीसगढ़ न्यायिक अकादमी, बिलासपुर में एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया है, जहां वे न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने बिलासपुर, रायपुर, बलरामपुर, सारंगढ़ और अन्य जिलों में भी कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। द्वितीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर रूपनारायण पात्रे को हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, सिद्धार्थ अग्रवाल को द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर से पदोन्नत करते हुए प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार किरण कुमार जांगड़े को प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलरामपुर-रामानुजगंज नियुक्त किया गया है। विनय कुमार प्रधान को एफटीसी (POCSO), रायपुर से रायपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पदस्थ किया गया है। वहीं, डमरूधर चौहान को षष्ठम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर से स्थानांतरित कर दशम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तबादला सूची में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नए दायित्व भी तय किए गए हैं। विनिता वारनेर को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सूरजपुर से बलौदाबाजार भेजा गया है। वहीं, थामस एक्का को प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, सूरजपुर से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सूरजपुर नियुक्त किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेशल जज (NIA), जगदलपुर के पद पर कार्यरत संगीता नवीन तिवारी को प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलौदाबाजार बनाया गया है। डॉ. मनोज कुमार प्रजापति को प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलरामपुर-रामानुजगंज से सारंगढ़ स्थानांतरित किया गया है। अमित राठौर को द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सारंगढ़ से रायपुर भेजा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) पद पर कार्यरत सुमित कपूर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर नियुक्त किया गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ न्यायिक अकादमी के एडिशनल डायरेक्टर अमित कुमार कोहली को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलरामपुर-रामानुजगंज की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को न्यायिक अनुभव और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की ओर से जारी यह आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायिक प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि समय-समय पर इस तरह के स्थानांतरण से न्यायिक व्यवस्था में कार्यकुशलता बढ़ती है और विभिन्न जिलों में लंबित मामलों के प्रभावी निपटारे में भी सहायता मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:26:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिलासपुर की बदहाल बिजली व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, विभाग से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[आंधी-बारिश के बाद घंटों ब्लैकआउट और जलभराव पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए ऊर्जा विभाग व निगम अधिकारियों से जवाब तलब किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-demands-strict-response-from-the-department-on-the/article-57672"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-news-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बिजली व्यवस्था की लगातार बिगड़ती स्थिति अब न्यायपालिका की निगरानी में पहुंच गई है। शहर में आधे घंटे की आंधी और बारिश के बाद पूरी रात बिजली गुल रहने और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए ऊर्जा विभाग, नगर निगम और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p>दरअसल, सोमवार शाम बिलासपुर में तेज आंधी और बारिश के बाद शहर के अधिकांश हिस्सों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई थी। कई इलाकों में रात करीब तीन बजे तक ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही। गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली नहीं मिलने से लोग पूरी रात परेशान रहे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि नाराज नागरिक बिजली विभाग के नेहरू नगर जोन कार्यालय पहुंच गए और अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप था कि विभाग की लापरवाही और कमजोर व्यवस्था के कारण हर बार हल्की बारिश या तेज हवा के बाद शहर को लंबे बिजली संकट का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार सरकंडा क्षेत्र के बंधवापारा फीडर, महर्षि स्कूल फीडर, ओम नगर, सिंधी कॉलोनी, वेयरहाउस क्षेत्र और शेफर स्कूल सहित कई प्रमुख फीडर पूरी तरह बंद हो गए थे। कई स्थानों पर बिजली के खंभे गिर गए, इंसुलेटर क्षतिग्रस्त हो गए और कलेक्टर बंगले के पास एक बड़ा पेड़ गिरने से 11 केवी की मुख्य बिजली लाइन भी टूट गई। इसके अलावा बृहस्पति बाजार सब स्टेशन में तकनीकी खराबी आने से वहां देर रात तक सुधार कार्य प्रभावित रहा। कई इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण अगले दिन तक भी पूरी तरह बिजली बहाल नहीं हो सकी।</p>
<p>शहरवासियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से बिलासपुर में बिजली कटौती लगातार बढ़ती जा रही है। मामूली बारिश या तेज हवा के बाद कई घंटे तक बिजली गुल रहना अब सामान्य बात हो गई है। लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग समय रहते आवश्यक रखरखाव नहीं करता, जिसके कारण हर बार ऐसी स्थिति बनती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को रातभर बिजली नहीं मिलने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।</p>
<p>बिजली विभाग के अधिकारियों ने भी माना है कि वे संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। विभाग के अनुसार आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी रात केवल तीन मरम्मत टीमें मैदान में थीं, जिनमें कुल 12 कर्मचारी शामिल थे। एक साथ कई जगह फॉल्ट आने के कारण प्रत्येक लाइन की मरम्मत में दो से तीन घंटे का समय लग रहा था। अधिकारियों का कहना है कि सीमित स्टाफ और लगातार बढ़ती शिकायतों के कारण बिजली आपूर्ति बहाल करने में अपेक्षा से अधिक समय लगा।</p>
<p>इस पूरे मामले को मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लिया। अदालत ने माना कि यह केवल बिजली कटौती का मामला नहीं बल्कि आम नागरिकों के जीवन और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा गंभीर विषय है। इसी कारण इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए संबंधित विभागों से जवाब मांगा गया है।</p>
<p>हाईकोर्ट ने ऊर्जा विभाग के सचिव, बिलासपुर नगर निगम आयुक्त और सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पूछा है कि शहर में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या योजना तैयार की गई है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए विभाग किस प्रकार की कार्ययोजना पर काम कर रहा है।</p>
<p>केवल बिजली व्यवस्था ही नहीं, बल्कि शहर में जलभराव की समस्या भी अदालत की चिंता का विषय बनी है। हाईकोर्ट ने नगर निगम से सड़कों, गलियों और निचले इलाकों में पानी भरने से रोकने के लिए ड्रेनेज सिस्टम की वर्तमान स्थिति और उसके सुधार को लेकर भी विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत का मानना है कि बारिश के दौरान जलभराव और बिजली व्यवस्था दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इनका प्रभाव सीधे आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता का नवीनीकरण किया, अब 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आगामी सत्र में 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह निर्णय प्रदेश के उन हजारों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर वर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए बेहतर संस्थानों में प्रवेश का सपना देखते हैं। एनएमसी के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी आदेश के बाद सिम्स प्रशासन ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया है। मान्यता के नवीनीकरण का अर्थ है कि संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पताल की सुविधाओं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नियमित रूप से 150 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक मंजूरी नहीं बल्कि संस्थान की गुणवत्ता, मेहनत और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि है। उन्होंने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और अस्पताल में व्यापक क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के विद्यार्थियों को बाहर के राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश का प्रयास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई योग्य छात्रों को अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में सिम्स की 150 सीटों का नवीनीकरण मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर स्थित सिम्स लंबे समय से छत्तीसगढ़ के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल है। यहां न केवल एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाती है, बल्कि बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार भी होता है। मेडिकल छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अस्पताल में मरीजों के उपचार की वास्तविक प्रक्रिया को भी करीब से सीखते हैं। यही व्यावहारिक प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें बेहतर चिकित्सक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग समय-समय पर सभी मेडिकल कॉलेजों का मूल्यांकन करता है। इस दौरान फैकल्टी की संख्या, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, उपकरण, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, हॉस्टल, अनुसंधान सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्था सहित कई बिंदुओं की समीक्षा की जाती है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों की मान्यता का नवीनीकरण किया जाता है। सिम्स का इस प्रक्रिया में सफल होना संस्थान की निरंतर प्रगति का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मेडिकल शिक्षा का विस्तार बेहद जरूरी है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें बढ़ना या उनकी मान्यता का नवीनीकरण होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक माना जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च निजी संस्थानों की तुलना में काफी कम होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को भी डॉक्टर बनने का अवसर मिलता है। सीटों की निरंतर उपलब्धता से प्रतिस्पर्धा के बीच योग्य छात्रों के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में संस्थान में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा। नई तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने, अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऐसे निर्णय प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूत बनाते हैं। अधिक संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार होने से भविष्य में सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल नए विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर पुलिस व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव, कमिश्नरेट सिस्टम पर सरकार का फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[गृहमंत्री विजय शर्मा ने दिए संकेत, शहर और ग्रामीण पुलिसिंग होगी अलग, निर्णय प्रक्रिया होगी अधिक तेज और प्रभावी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/there-will-be-a-big-change-in-the-bilaspur-police/article-57299"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस व्यवस्था को लेकर जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने संकेत दिए हैं कि जिले के पुलिस फॉर्मेशन में व्यापक परिवर्तन करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि रायपुर में लागू पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इसी अनुभव के आधार पर आने वाले समय में बिलासपुर सहित अन्य बड़े शहरों में भी इस व्यवस्था को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है तो शहर की पुलिसिंग का पूरा ढांचा बदल जाएगा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई फैसले पहले की तुलना में अधिक तेजी से लिए जा सकेंगे। रविवार को बिलासपुर में आयोजित सराफा एसोसिएशन के महासम्मेलन में शामिल होने पहुंचे गृहमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है। बिलासपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में बढ़ती आबादी, व्यापारिक गतिविधियों और अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस फॉर्मेशन में बदलाव का उद्देश्य केवल प्रशासनिक ढांचा बदलना नहीं, बल्कि आम लोगों को बेहतर और तेज पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गृहमंत्री के इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय स्तर पर बिलासपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने को लेकर प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो सकती हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि भविष्य में बिलासपुर की पुलिसिंग मौजूदा व्यवस्था से अलग तरीके से संचालित हो सकती है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर पड़ेगा, जहां कई मामलों में पुलिस को प्रशासनिक अनुमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर को कई ऐसे अधिकार मिल सकते हैं, जो वर्तमान में जिला प्रशासन के पास होते हैं। इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक आदेश जारी करना, विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करना और कुछ प्रशासनिक निर्णय लेना शामिल हो सकता है। इससे अपराध नियंत्रण और आपात स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत भी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गृहमंत्री विजय शर्मा ने सराफा व्यापारियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 317 के तहत चोरी का सामान मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है। व्यापारियों ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और स्पष्ट बनाने की मांग सरकार के सामने रखी है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विचार करेगी और आवश्यक होने पर संबंधित विभागों से चर्चा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा ताकि व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर पूछे गए सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि सरकार हर आपराधिक घटना की लगातार समीक्षा कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अपराध की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन पुलिस भी तेजी से कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है। उनके अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से पुलिस तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि हर गंभीर मामले में पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है और अपराधियों को कानून के दायरे में लाया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि बिलासपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होती है तो शहर और ग्रामीण क्षेत्र की पुलिसिंग को अलग-अलग संचालित किया जाएगा। वर्तमान में पूरे जिले की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास होती है, लेकिन नई व्यवस्था में शहरी क्षेत्र को अलग-अलग जोन में विभाजित किया जा सकता है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी पुलिस उपायुक्त यानी डीसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी। इससे थानों की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और वरिष्ठ अधिकारी सीधे फील्ड में मौजूद रहकर कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस की जवाबदेही भी बढ़ेगी। बिलासपुर को पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के लिए उपयुक्त शहर माना जा रहा है क्योंकि यह केवल जिला मुख्यालय नहीं, बल्कि प्रदेश का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्र भी है। यहां हाईकोर्ट, रेलवे जोन, विश्वविद्यालय, बड़े अस्पताल और कोचिंग संस्थानों के कारण हर दिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है। इसके अलावा शहर की लगातार बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के चलते पुलिस के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। सिविल लाइन, सरकंडा, कोनी जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अपराध, साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टा और नशे से जुड़े मामलों ने भी पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस कराई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:27:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर के लालखदान ब्रिज पर युवक पर चाकू और बेल्ट से हमला, नकदी-मोबाइल लूटे</title>
                                    <description><![CDATA[देर रात नाइट ड्यूटी से लौट रहे युवक को अज्ञात बदमाशों ने बनाया निशाना, चार दिन में दूसरी वारदात से पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/young-man-attacked-with-knife-and-belt-on-lalkhadan-bridge/article-57209"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-crime-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर शहर में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने एक बार फिर पुलिस की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार देर रात लालखदान फ्लाई ओवर ब्रिज पर नाइट ड्यूटी से लौट रहे एक युवक पर अज्ञात बदमाशों ने चाकू और बेल्ट से हमला कर दिया। हमलावरों ने युवक के साथ मारपीट करने के बाद उससे नकदी और मोबाइल फोन लूट लिया और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल युवक सड़क किनारे पड़ा रहा, जिसे वहां से गुजर रहे राहगीरों ने देखा। लोगों ने तुरंत डायल-112 को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। घायल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना देर रात उस समय हुई जब इलाके में आवाजाही काफी कम थी। बताया जा रहा है कि युवक अपनी नाइट शिफ्ट पूरी कर घर लौट रहा था। जैसे ही वह लालखदान फ्लाई ओवर ब्रिज पर पहुंचा, कुछ अज्ञात युवकों ने उसे रोक लिया। पहले उसके साथ कहासुनी हुई और फिर बेल्ट तथा धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। हमलावरों ने युवक को गंभीर रूप से घायल करने के बाद उसकी जेब में रखी नकदी और मोबाइल फोन छीन लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। घटना के बाद कुछ राहगीरों ने घायल युवक को सड़क पर पड़े देखा। लोगों ने बिना देर किए डायल-112 को सूचना दी। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे निगरानी में रखा है। फिलहाल युवक की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उसे गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस का कहना है कि युवक के बयान के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तोरवा थाना प्रभारी रजनीश सिंह ने बताया कि अभी घायल युवक का विस्तृत बयान दर्ज नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि युवक के परिजन उसकी मोटरसाइकिल लेने थाने पहुंचे थे, लेकिन अब तक इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला केवल लूटपाट के उद्देश्य से किया गया था या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश भी हो सकती है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही घायल का बयान दर्ज होगा, उसके आधार पर मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमलावर किस दिशा से आए और वारदात के बाद किस ओर भागे। यदि आसपास के कैमरों में कोई संदिग्ध गतिविधि रिकॉर्ड हुई होगी तो उससे आरोपियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि कुछ दिन पहले ही शहर के हेमूनगर फ्लाई ओवर ब्रिज के पास भी इसी तरह की वारदात हुई थी। वहां भी एक युवक के साथ मारपीट कर उससे लूटपाट की गई थी। उस मामले में भी आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। लगातार दूसरी घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि रात के समय फ्लाई ओवर और सुनसान इलाकों में पुलिस गश्त पर्याप्त नहीं होने के कारण बदमाश बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लालखदान फ्लाई ओवर ब्रिज पर पहले भी कई बार संदिग्ध लोगों की आवाजाही देखी गई है। रात के समय यहां रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि नियमित गश्त बढ़ाई जाए और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। कई लोगों ने इस मार्ग पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने और रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने की भी मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। यदि घायल युवक के बयान में किसी संदिग्ध का नाम सामने आता है तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि यह मामला लूटपाट का निकलता है तो इलाके में सक्रिय अपराधियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर में अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई संगठनों का धरना, विकास में पिछड़ेपन का आरोप, चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/demand-to-make-arpa-par-area-a-separate-municipal-corporation/article-57043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर में अरपा पार सरकंडा क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। गुरुवार को नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अरपा पार क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद विकास और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। इसी असंतोष के बीच बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अलग नगर निगम बनाने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कहा कि यह मांग पिछले तीन दशकों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका आरोप था कि हर चुनाव के समय स्थानीय स्तर पर वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता। उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय स्थानीय विधायक ने अरपा पार क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अब जनता “जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा” जैसे अभियानों के जरिए अपनी आवाज को और मजबूत करेगी। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र में तेजी से शहरीकरण हुआ है, लेकिन इसके अनुपात में विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। कई लोगों का कहना था कि सड़क, जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं में लगातार कमी महसूस की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी इस क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भीड़ में मौजूद लोगों का कहना था कि जब तक अलग नगर निगम का गठन नहीं होता, तब तक स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से नहीं हो पाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन को लेकर मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत 10 जुलाई को मानव श्रृंखला बनाने की घोषणा की गई है। इसके बाद दूसरे चरण में मशाल जुलूस निकाला जाएगा और यदि मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो 15 अगस्त से आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया जा रहा है क्योंकि वर्षों से लगातार मांग के बावजूद कोई समाधान सामने नहीं आया है। उनका आरोप है कि क्षेत्र की उपेक्षा के कारण लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। धरना प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद रहे, जिनमें श्याम मोहन दुबे, गौरव तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, दिलीप पाटिल, रामकुमार यादव, अमित सोनकर, अजय कापसे, कमल साहू और अन्य लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा दिया जाए ताकि प्रशासनिक कामकाज में तेजी आए और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में दूर-दराज के क्षेत्रों तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता, जिससे आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि अरपा पार क्षेत्र में कुल 24 वार्ड शामिल हैं, जो वर्तमान नगर निगम व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और क्षेत्रफल के बावजूद अलग प्रशासनिक इकाई नहीं होने से विकास कार्यों में बाधाएं आती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अलग नगर निगम का गठन होता है तो योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी और तेज होगा। साथ ही नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:19:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- टेंडर नहीं, जमीन पर कब दिखेगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सुरक्षा व्यवस्था पर जताई नाराजगी, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी, जिला प्रशासन ने भी जांच अभियान तेज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3e422ac159a/article-57027"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देशभर में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की अग्निशमन व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल टेंडर जारी करने या योजनाओं की जानकारी देने से काम नहीं चलेगा। लोगों की सुरक्षा के लिए जमीन पर वास्तविक काम दिखाई देना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था भी सक्रिय नजर आने लगी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्षों से फायर सेफ्टी को मजबूत बनाने की बातें हो रही हैं, लेकिन कई योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित दिखाई देती हैं। यदि टेंडर जारी हो चुके हैं तो यह भी बताया जाना चाहिए कि वर्क ऑर्डर कब जारी हुए और काम किस स्तर तक पहुंचा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती। दरअसल यह मामला तब चर्चा में आया जब हाल ही में मोपका क्षेत्र में स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और आसपास की दुकानों में आग लगने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद मीडिया रिपोर्टों में राज्य की फायर सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को प्रमुखता से उठाया गया। इन्हीं खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। अदालत ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब भी तलब किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य में करीब 72.70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। हालांकि कई जिलों में अब तक फायर स्टेशन के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिसके कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि केवल योजनाओं और टेंडर की जानकारी पर्याप्त नहीं है। आम लोगों को सुरक्षा तभी मिलेगी जब ये परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 में कई नए फायर स्टेशन बनाने की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन वर्षों बाद भी कई स्थानों पर जमीन का चयन नहीं हो पाया। राज्य के कुछ जिलों में भूमि उपलब्ध करा दी गई है और वहां निर्माण के लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है, जबकि कई अन्य जिलों में अब तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। अदालत ने इस देरी पर भी चिंता जताई और शासन से स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा है। हाईकोर्ट की सख्ती के बीच जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने शहर के सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला इमारतों की व्यापक जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला स्तर और अनुविभाग स्तर पर अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया है। प्रत्येक समिति की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे, जबकि पुलिस, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और अन्य विभागों के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासन ने इन समितियों को दस दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थानों में फायर एनओसी है या नहीं, आपातकालीन निकासी मार्ग मौजूद हैं या नहीं और आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं या नहीं। यदि किसी भवन में गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो पहले सुधार के निर्देश दिए जाएंगे और निर्देशों का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में नगर निगम ने शहर के छह कोचिंग संस्थानों की जांच भी की थी। जांच में एक संस्थान में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता पाया गया, जिसके बाद उसे सील कर दिया गया। अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि किसी भी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि संबंधित विभागों के पास शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की पूरी और अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने फायर विभाग के रिकॉर्ड और फायर ऑडिट को जांच का मुख्य आधार बनाने का फैसला किया है। जिन संस्थानों ने अब तक फायर एनओसी नहीं ली है या जिनका फायर ऑडिट लंबित है, वहां विशेष रूप से निरीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। आम लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी, जब राज्य सरकार को फायर उपकरणों की खरीद, नए फायर स्टेशन निर्माण और अन्य लंबित कार्यों की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:02:39 +0530</pubDate>
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