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                <title>Raigarh - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Raigarh RSS Feed</description>
                
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                <title>असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में NOC विवाद, हाईकोर्ट ने 120 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति पर उठे सवाल, उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे मामले की जांच कर तय समय में निर्णय लेने के निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/noc-controversy-in-assistant-professor-recruitment-high-court-asked-for/article-58488"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(10).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता के मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच कर 120 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। मामला राजनीति शास्त्र विषय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति से जुड़ा है, जहां आरोप लगाया गया है कि हरियाणा सरकार में पहले से कार्यरत एक उम्मीदवार को आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना ही नियुक्ति दे दी गई। इस मामले को लेकर रायगढ़ निवासी अली हसन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य की सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता अली हसन ने अपनी याचिका में बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2019 में राजनीति शास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक के 59 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2021 में अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई, जिसमें अली हसन को अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहला स्थान मिला। चयन सूची का अध्ययन करने के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि मुख्य चयन सूची में शामिल रंजन तिवारी पहले से हरियाणा सरकार के उच्चतर शिक्षा निदेशालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इसके बाद अली हसन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत हरियाणा सरकार से संबंधित जानकारी मांगी। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार रंजन तिवारी 13 फरवरी 2020 से हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित शासकीय महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवा दे रहे थे। याचिका में दावा किया गया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में नियुक्ति के लिए अपने वर्तमान नियोक्ता से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया था और न ही उसे प्रस्तुत किया गया। इसके बावजूद 29 अप्रैल 2022 को उनकी नियुक्ति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा, जिला बलौदाबाजार में कर दी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नियुक्ति सेवा नियमों और भर्ती प्रक्रिया की शर्तों के विपरीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए नई नियुक्ति स्वीकार करने से पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी की सेवा स्थिति स्पष्ट रहे और नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। याचिका में यह भी कहा गया कि भर्ती नियमों के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी गलत जानकारी देता है या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी संभव है। मामले को मजबूत करने के लिए याचिकाकर्ता ने भाटापारा शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी। कॉलेज प्रशासन ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि रंजन तिवारी ने 23 मई 2022 को कार्यभार ग्रहण किया था, लेकिन उनके कार्यालय रिकॉर्ड में नियोक्ता का अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। इस तथ्य को अदालत ने भी गंभीरता से लिया। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ में हुई। अदालत ने तत्काल नियुक्ति रद्द करने का आदेश नहीं दिया, बल्कि उच्च शिक्षा सचिव और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और उपलब्ध दस्तावेजों, सेवा नियमों तथा संबंधित तथ्यों के आधार पर 120 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सरकारी नियुक्तियों में नियमों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी चूक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि जांच में याचिकाकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो नियुक्ति पर प्रभाव पड़ सकता है और प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी निर्णय लिया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायगढ़ में शादी का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म का आरोप, विवाहित युवक गिरफ्तार; किराए के मकान में साथ रखकर किया धोखा</title>
                                    <description><![CDATA[महिला का आरोप- आरोपी ने खुद को अविवाहित बताकर शादी का वादा किया, वर्षों तक साथ रखा और संबंध बनाए। सच्चाई सामने आने पर घर से निकाला, पुलिस ने बीएनएस की धारा 69 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-accused-of-raping-a-woman-on-the-pretext/article-57957"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raigarh-new.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक विवाहित युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने खुद को अविवाहित बताकर महिला का विश्वास जीता, शादी का वादा किया और कई वर्षों तक उसे किराए के मकान में अपने साथ रखकर शारीरिक संबंध बनाए। जब महिला को आरोपी की शादीशुदा होने की जानकारी मिली और उसने शादी का वादा पूरा करने की बात कही, तो आरोपी ने कथित रूप से उससे विवाद किया और उसे घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद पीड़िता ने महिला थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार यह मामला रायगढ़ के जूटमिल थाना क्षेत्र का है। महिला थाना में दर्ज शिकायत के मुताबिक 31 वर्षीय पीड़िता वर्ष 2018 से अपने पति से अलग रह रही थी और अपनी मां के साथ जीवन बिता रही थी। इसी दौरान उसकी पहचान जूटमिल क्षेत्र निवासी 31 वर्षीय महेंद्र पासवान से हुई। दोनों के बीच पहले मोबाइल पर बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे मुलाकातों का सिलसिला बढ़ गया। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि महेंद्र ने खुद को अविवाहित बताया और उससे शादी करने का भरोसा दिलाया। इसी विश्वास के आधार पर दोनों एक-दूसरे के करीब आए।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता का कहना है कि उसने शुरुआत में ही आरोपी को यह जानकारी दे दी थी कि उसकी पहले शादी हो चुकी है और वह अपने पति से अलग रह रही है। इसके बावजूद आरोपी ने उसे भरोसा दिलाया कि वह उससे शादी करेगा और दोनों साथ मिलकर नई जिंदगी शुरू करेंगे। महिला का आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर वह आरोपी के साथ किराए के मकान में रहने लगी। इस दौरान आरोपी ने उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। महिला का कहना है कि वह आरोपी की बातों पर विश्वास करती रही क्योंकि उसे लगातार शादी का आश्वासन दिया जाता रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">समय बीतने के साथ महिला को आरोपी के बारे में ऐसी जानकारी मिली, जिससे पूरा मामला बदल गया। शिकायत के अनुसार उसे पता चला कि महेंद्र पासवान पहले से विवाहित है और उसने यह बात उससे जानबूझकर छिपाई थी। जब महिला ने इस बारे में आरोपी से सवाल किया और शादी का वादा निभाने की बात कही तो दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। महिला का आरोप है कि 30 जून 2026 को आरोपी ने साफ तौर पर उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया और उसे घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद महिला ने न्याय पाने के लिए पुलिस की शरण ली।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने पीड़िता का विस्तृत बयान दर्ज किया और उसकी सहमति से चिकित्सीय परीक्षण भी कराया। प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और उसे उसके घर से हिरासत में लेकर पूछताछ की।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी से मामले से जुड़े कई सवाल किए गए। जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी का भी चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि कोई व्यक्ति अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाकर किसी महिला को शादी का झूठा भरोसा देता है और उस विश्वास के आधार पर शारीरिक संबंध बनाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार यह गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां दोनों पक्षों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करती हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला संगठनों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को बिना किसी भय के पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते कानूनी कार्रवाई हो सके। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं से जुड़े अपराधों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है और प्रत्येक मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">रायगढ़ जिले में सामने आया यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि किसी भी रिश्ते में विश्वास और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाकर दूसरे को गुमराह किया जाता है, तो उसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले सभी तथ्यों को केस डायरी में शामिल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:40:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायगढ़ में प्रोफेसर पर छात्रा से अश्लील हरकत का आरोप, थप्पड़ मारने का VIDEO वायरल; शिकायत के बाद हुआ समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[युवती ने प्रोफेसर पर अश्लील संदेश और संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया, हंगामे के बाद मामला समझौते तक पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-video-of-professor-slapping-student-accused-of-obscene/article-57673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raigarh-human-trafficking1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत और समाज दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती ने शासकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लंबे समय से उसे अश्लील संदेश भेज रहा था और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। आरोपों से परेशान होकर युवती अपने मंगेतर के साथ प्रोफेसर के घर पहुंची, जहां दोनों के बीच विवाद हुआ और युवती ने गुस्से में प्रोफेसर को थप्पड़ मार दिए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर रेमन भार्गव लैलूंगा के शासकीय महाविद्यालय कुंजारा में पदस्थ हैं। युवती का कहना है कि वह प्रोफेसर की पड़ोसी है और पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। उसने आरोप लगाया कि प्रोफेसर व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अश्लील संदेश भेजता था और कई बार संबंध बनाने का दबाव भी डाल चुका था। कई बार समझाने और मना करने के बावजूद उसकी हरकतें बंद नहीं हुईं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती के मुताबिक उसकी जल्द ही शादी होने वाली है। ऐसे में वह लगातार मिल रही आपत्तिजनक गतिविधियों से बेहद परेशान थी। उसने बताया कि प्रोफेसर की हरकतों के कारण उसकी निजी जिंदगी और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही थीं। जब हालात असहनीय हो गए तो उसने परिवार और अपने मंगेतर को पूरी जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद युवती अपने मंगेतर के साथ आरोपी प्रोफेसर के घर पहुंची। वहां पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ने पर युवती ने प्रोफेसर का कॉलर पकड़ लिया और उसे थप्पड़ मार दिए। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वायरल वीडियो में युवती काफी नाराज दिखाई देती है। वह प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहती है कि उसकी शादी होने वाली है और वह उसकी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है। वीडियो में प्रोफेसर की पत्नी भी दिखाई देती हैं, जो विवाद शांत कराने और माफी मांगने की कोशिश करती नजर आती हैं। मौके पर मौजूद कुछ अन्य युवतियां भी दिखाई देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती ने आरोप लगाया कि वह अकेली पीड़ित नहीं है। उसके अनुसार प्रोफेसर ने पहले भी कई अन्य लड़कियों को परेशान किया है। उसने अपील की कि यदि कोई और युवती भी ऐसी प्रताड़ना का शिकार हुई है तो वह सामने आए और न्याय की लड़ाई में उसका साथ दे। युवती का कहना है कि यदि उसे उचित न्याय नहीं मिला तो वह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद युवती ने लैलूंगा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया। इसके चलते पुलिस ने आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव ने बताया कि युवती द्वारा शिकायत दी गई थी, लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया। समझौते के बाद शिकायतकर्ता ने आगे कार्रवाई नहीं चाही, इसलिए मामला वहीं समाप्त कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं शासकीय महाविद्यालय कुंजारा के प्राचार्य एमएल पटेल ने कहा कि यह घटना कॉलेज परिसर की नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों का निजी मामला है। उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रशासन को पहले इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली थी। यदि संस्थान को आधिकारिक शिकायत मिलती तो नियमानुसार उच्च अधिकारियों को जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई की जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग युवती के साहस की सराहना कर रहे हैं, जबकि कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो कानूनी कार्रवाई तक मामला क्यों नहीं पहुंचा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।  किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, अश्लील संदेश या मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इस तरह की हरकतें करता है तो पीड़ित को कानूनी सहायता लेने और संबंधित अधिकारियों को समय रहते सूचना देने की जरूरत होती है। वहीं आरोपित व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायगढ़ में नाबालिग को राजस्थान में बेचने की साजिश का खुलासा, चार साल से फरार आरोपी जशपुर से गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[17 वर्षीय लड़की को शादी के बहाने 20 हजार रुपये में बेचने की थी योजना, ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/conspiracy-to-sell-minor-to-rajasthan-exposed-in-raigarh-accused/article-57674"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-crime.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में चार साल पुराने मानव तस्करी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र से वर्ष 2022 में लापता हुई 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को राजस्थान ले जाकर बेचने की कथित साजिश में शामिल एक फरार आरोपी को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले चार वर्षों से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था। पुलिस ने उसे जशपुर जिले के उसके गांव से दबिश देकर पकड़ा। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में पहले ही तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका था, जबकि चौथा आरोपी लगातार फरार था।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक पूरे मामले की शुरुआत 28 जून 2022 को हुई थी, जब नाबालिग लड़की के पिता ने धरमजयगढ़ थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी 17 वर्षीय बेटी 23 जून की शाम घर से बिना किसी को बताए चली गई थी। परिवार ने अपने स्तर पर उसकी काफी तलाश की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस से मदद मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मध्यप्रदेश के अनुपपुर रेलवे स्टेशन से मिली। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने एक ट्रेन में सफर कर रही नाबालिग लड़की को दो संदिग्ध व्यक्तियों के साथ बरामद किया। सूचना मिलने पर धरमजयगढ़ पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और लड़की को सुरक्षित अपने संरक्षण में लेकर वापस रायगढ़ लाई। इसके बाद उससे और संदिग्धों से पूछताछ की गई, जिसमें पूरे मामले का खुलासा हुआ।</p>
<p>पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मिलकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर राजस्थान ले जाने की योजना बनाई थी। प्रारंभिक जांच के अनुसार, वहां उसकी शादी कराने का झांसा देकर उसे 20 हजार रुपये में बेचने की कथित साजिश रची गई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मानव तस्करी सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। जांच में हीरालाल चौहान, देवलाल तिग्गा, रामपाल यादव और रामा चौहान के नाम सामने आए।</p>
<p>पुलिस ने वर्ष 2022 में कार्रवाई करते हुए हीरालाल चौहान, देवलाल तिग्गा और रामपाल यादव को गिरफ्तार कर लिया था। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। हालांकि मामले का चौथा आरोपी रामा चौहान गिरफ्तारी से बच निकला था। पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी, लेकिन वह अपना ठिकाना बदलता रहा और चार वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने में सफल रहा।</p>
<p>रायगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे <strong>ऑपरेशन क्लीन हंट</strong> के तहत फरार आरोपियों की धरपकड़ अभियान के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि रामा चौहान जशपुर जिले के अपने गांव जोराडोल आया हुआ है। सूचना मिलते ही धरमजयगढ़ थाना प्रभारी राजेश जांगड़े के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से गांव में दबिश दी और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने मामले से जुड़े कई तथ्यों की जानकारी दी। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना पहले से जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की जा रही हैं।</p>
<p>रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल किसी भी आरोपी को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत लंबे समय से फरार अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जा रही है। अभियान का उद्देश्य ऐसे मामलों में लंबित कार्रवाई को पूरा करना और फरार आरोपियों को न्यायालय के सामने पेश करना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा।</p>
<p>मानव तस्करी से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस लगातार लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि नाबालिग बच्चों और युवतियों को नौकरी, शादी या बेहतर भविष्य का झांसा देकर दूसरे राज्यों में ले जाने के कई मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में परिवारों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना देने की सलाह दी जाती है।</p>
<p>पुलिस का यह भी कहना है कि रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है ताकि इस तरह के मामलों को समय रहते रोका जा सके। इस मामले में रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस के बीच हुए समन्वय से नाबालिग को सुरक्षित बरामद किया जा सका, जिसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p>चार साल बाद फरार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि मानव तस्करी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार निगरानी और अभियान चलाने की बात कह रही हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में नाबालिग को भगाकर दुष्कर्म करने वाला आरोपी गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर ले गया</title>
                                    <description><![CDATA[विशाखापट्टनम और संबलपुर में ले जाकर बनाया शारीरिक संबंध, पुलिस ने अभियान चलाकर युवती को सकुशल बरामद किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-the-accused-who-abducted-and-raped-a-minor/article-57215"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पहले किशोरी को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम और उसके बाद ओडिशा के संबलपुर लेकर गया था। लगातार बदलती लोकेशन और तकनीकी निगरानी के बीच पुलिस ने कई दिनों तक तलाश अभियान चलाया और आखिरकार नाबालिग को सुरक्षित बरामद कर लिया। मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। कोतरारोड़ थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 27 अप्रैल 2026 को अपनी 17 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 25 अप्रैल की रात परिवार के सभी सदस्य घर में सो रहे थे। देर रात करीब दो बजे जब परिजन उठे तो घर का मुख्य दरवाजा खुला मिला और बेटी अपने कमरे में नहीं थी। परिवार ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद आशंका जताई गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर युवती की तलाश शुरू की। प्रारंभिक जांच में उसकी लोकेशन आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में मिली। पुलिस टीम वहां रवाना होने की तैयारी कर रही थी, तभी जानकारी मिली कि दोनों ओडिशा के संबलपुर की ओर चले गए हैं। पुलिस ने तुरंत अपनी रणनीति बदली और संबलपुर के लिए रवाना हुई। इसी बीच आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा, जिससे पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ गई। इसके बावजूद तकनीकी निगरानी जारी रखी गई और विभिन्न राज्यों की पुलिस से भी आवश्यक समन्वय किया गया। लगातार प्रयासों के बाद 26 जून 2026 को पुलिस को अहम सफलता मिली। कोड़ातराई क्षेत्र में दबिश देकर पुलिस ने नाबालिग किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया। मौके से संदेही धीरज निराला उर्फ नानू (19) को भी हिरासत में लिया गया। इसके बाद दोनों को रायगढ़ लाकर पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार किशोरी ने पूछताछ में बताया कि आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया था और इसी भरोसे पर वह उसके साथ चली गई। इसके बाद आरोपी उसे विशाखापट्टनम और फिर ओडिशा के संबलपुर लेकर गया, जहां उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 और 65(1) के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 भी जोड़ दी। पूछताछ पूरी होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में मेडिकल रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की जांच जारी रहेगी। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो आवश्यक कानूनी धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में तकनीकी निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लगातार बदलती लोकेशन के बावजूद टीम ने मोबाइल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर आरोपी तक पहुंच बनाई। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है। इसी वजह से युवती को सुरक्षित बरामद करने में सफलता मिली। रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि जिले में अभियान "संवेदना" के तहत गुम हुए बच्चों और किशोरियों की जल्द से जल्द सुरक्षित बरामदगी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें बहला-फुसलाकर ले जाने, मानव तस्करी, यौन अपराध और अन्य गंभीर मामलों में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दोषियों को कानून के दायरे में लाना है। इस मामले में भी लगातार प्रयास के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:40:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायगढ़ में सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाने वालों पर निगम की कार्रवाई, 11 हजार का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[विशेष अभियान में 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त, 10 से अधिक लोगों को दी गई चेतावनी और समझाइश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/corporations-action-against-those-spreading-construction-material-on-the-road/article-56397"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nagar-nigam-action.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायगढ़ शहर में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भवन निर्माण सामग्री फैलाकर यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद निगम की टीम ने विशेष अभियान चलाकर अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान सड़क पर निर्माण मलबा और अन्य सामग्री फैलाने वाले लोगों पर कुल 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया, जबकि 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त की गई। निगम की इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप की स्थिति देखी गई जो लंबे समय से सार्वजनिक स्थानों का उपयोग निजी निर्माण कार्यों के लिए कर रहे थे। नगर निगम की सफाई और प्रवर्तन टीम सुबह से शहर के विभिन्न इलाकों में निरीक्षण के लिए निकली थी। अभियान के दौरान जूटमिल, कबीर चौक, छातामुड़ा, विजयपुर चौक सहित कई प्रमुख मार्गों की जांच की गई। निरीक्षण के समय कई जगहों पर सड़क के किनारे और बीच हिस्सों में निर्माण सामग्री, रेत, गिट्टी और सीएंडडी वेस्ट यानी कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट फैला हुआ मिला। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा था बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी परेशानी पैदा हो रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार शहर में पिछले कुछ समय से सड़क पर निर्माण सामग्री डालने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। कई स्थानों पर लोगों ने भवन निर्माण कार्य के दौरान मलबा और सामग्री सीधे सड़क पर रख दी थी, जिससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई थी। ऐसे हालात में दुर्घटना होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निगम ने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया। कार्रवाई के दौरान जूटमिल, कबीर चौक और छातामुड़ा क्षेत्र में गुरुजी आटा चक्की के पास सड़क पर सीएंडडी वेस्ट फैला हुआ पाया गया। इस मामले में संबंधित व्यक्ति पर 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं सुदर्शन देवांगन द्वारा सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाकर सार्वजनिक मार्ग को प्रभावित करने पर 3 हजार रुपए की पेनाल्टी वसूली गई। इसी तरह डीएम साव के खिलाफ सड़क पर निर्माण मलबा फैलाने के मामले में 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। विजयपुर चौक क्षेत्र में रवि सोनी द्वारा सड़क पर निर्माण सामग्री रखकर आवागमन बाधित किए जाने पर 2 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। अभियान के दौरान निगम अधिकारियों ने केवल जुर्माना लगाने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी। संबंधित लोगों को मौके पर ही सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से मलबा हटाने के निर्देश भी दिए गए। कई स्थानों पर निगम की टीम ने स्वयं कार्रवाई करते हुए निर्माण सामग्री को हटवाया और जब्ती की कार्रवाई की। पूरे अभियान के दौरान कुल 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त की गई, जिसे निगम के कब्जे में लिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान 10 से अधिक लोगों को समझाइश भी दी गई। अधिकारियों ने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि सड़क, नाली और सार्वजनिक स्थानों पर निर्माण सामग्री डालना नियमों का उल्लंघन है। इससे आम लोगों को परेशानी होती है और शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित होती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि दोबारा ऐसी स्थिति पाई गई तो और अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम का कहना है कि शहर के कई इलाकों में भवन निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग सुविधा के लिए सड़क और सार्वजनिक जगहों का उपयोग सामग्री रखने के लिए कर लेते हैं। हालांकि यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती है। कई बार सड़क पर फैली रेत, गिट्टी और मलबे के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। वहीं बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि शहर को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिन क्षेत्रों से शिकायतें मिलेंगी वहां नियमित निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना और जब्ती जैसी कार्रवाई लगातार की जाएगी। निगम प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सामग्री अपने निजी परिसर में रखें और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग न करें। निगम का मानना है कि नागरिकों के सहयोग से ही शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। इसलिए लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए और ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए जिनसे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो या दुर्घटनाओं का खतरा बढ़े। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:13:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायगढ़ में एल्युमिनियम व्यापारी से 50 हजार की ठगी, सस्ता माल देने का झांसा देकर आरोपी फरार</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर की फर्जी फर्म बताकर लिया ऑर्डर, एडवांस राशि लेने के बाद न माल पहुंचाया और न लौटाए पैसे, लैलूंगा थाने में मामला दर्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-the-accused-cheated-an-aluminum-trader-of-rs/article-56396"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एल्युमिनियम कारोबारी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी से आरोपी ने खुद को रायपुर का एल्युमिनियम सप्लायर बताकर 50 हजार रुपए की ठगी कर ली। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बाजार से कम कीमत पर एल्युमिनियम सेक्शन उपलब्ध कराने का दावा किया था। सस्ते दाम और जल्दी डिलीवरी का भरोसा देकर उसने व्यापारी से ऑर्डर लिया और एडवांस भुगतान हासिल कर लिया। रकम मिलने के बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांधी नगर वार्ड क्रमांक 7 निवासी विजय राणा एल्युमिनियम सेक्शन और ग्लास का कारोबार करते हैं। उनकी दुकान विजय एल्युमिनियम एंड ग्लास शॉप के नाम से संचालित होती है। 29 मई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एल्युमिनियम सेक्शन का व्यापारी बताते हुए अपना नाम मुकेश शर्मा बताया। उसने दावा किया कि उसकी फर्म रायपुर के भनपुरी स्थित बंजारी माता मंदिर के पास संचालित होती है और वह लंबे समय से एल्युमिनियम व्यापार से जुड़ा हुआ है। बातचीत के दौरान आरोपी ने बाजार की तुलना में कम कीमत पर माल उपलब्ध कराने की बात कही। व्यापारी को सौदा लाभदायक लगा और दोनों के बीच माल सप्लाई को लेकर चर्चा आगे बढ़ी। बताया गया कि आरोपी ने पांच बंडल एल्युमिनियम सेक्शन का ऑर्डर बुक किया, जिसकी कुल कीमत 1 लाख 23 हजार 843 रुपए तय हुई। सौदा तय होने के बाद आरोपी ने भुगतान के लिए एक क्यूआर कोड और मोबाइल नंबर भेजा। यह क्यूआर कोड शिवम कुमार नाम के व्यक्ति के नाम पर बताया गया। आरोपी ने माल भेजने से पहले 50 हजार रुपए एडवांस जमा करने की मांग की। कारोबारी ने भरोसा करते हुए उसी दिन बताए गए खाते में ऑनलाइन माध्यम से 50 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। आरोपी ने कहा कि दो दिनों के भीतर पूरा माल निर्धारित पते पर पहुंच जाएगा और बाकी भुगतान डिलीवरी के समय लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि तय समय गुजरने के बाद भी सामान नहीं पहुंचा। शुरुआत में व्यापारी ने सोचा कि परिवहन में देरी हो सकती है, लेकिन जब लगातार दो दिन और बीत गए तो उन्हें शक होने लगा। उन्होंने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल नंबर पर बात नहीं हो सकी। कई बार कॉल करने और संदेश भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच व्यापारी ने अपने स्तर पर आरोपी और उसकी बताई गई फर्म के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि जिस नाम और पते का उपयोग कर सौदा किया गया था, वह संदिग्ध है। कथित फर्म का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला और व्यापारी को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद विजय राणा ने पूरे मामले की शिकायत लैलूंगा थाना पहुंचकर दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने भुगतान की रसीद, मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध जानकारी पुलिस को सौंपी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन लेनदेन और मोबाइल नंबर से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की जानकारी भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।पुलिस का कहना है कि वर्तमान समय में व्यापारियों को इस तरह के फर्जी सौदों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कई मामलों में आरोपी खुद को बड़े सप्लायर या प्रतिष्ठित कारोबारी बताकर कम कीमत का लालच देते हैं और एडवांस राशि लेकर गायब हो जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी नए सप्लायर की पहचान, फर्म का पंजीकरण और व्यवसायिक रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। केवल मोबाइल पर हुई बातचीत या सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर आर्थिक लेनदेन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:12:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में मालगाड़ी की चपेट में आई मादा हाथी, उपचार के दौरान मौत</title>
                                    <description><![CDATA[चारमार गांव के पास रेल लाइन पार करते समय हुआ हादसा, वन विभाग ने किया रेस्क्यू लेकिन नहीं बच सकी हाथी की जान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/female-elephant-hit-by-goods-train-in-raigarh-dies-during/article-56105"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-elephant-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां मालगाड़ी की चपेट में आने से एक मादा हाथी गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को बचाने के लिए रेस्क्यू व उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इलाज के लिए उसे बिलासपुर ले जाने की तैयारी की जा रही थी, तभी उसकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक और हाथियों के आवागमन के बीच बढ़ते टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह घटना रायगढ़ वन मंडल के घरघोड़ा रेंज अंतर्गत चारमार गांव के पास सोमवार रात करीब नौ बजे हुई। बताया जा रहा है कि 10 से अधिक हाथियों का एक दल जंगल से निकलकर रेलवे लाइन पार कर रहा था। उसी दौरान खरसिया की ओर से धरमजयगढ़ की दिशा में कोयला लेने जा रही एक मालगाड़ी वहां से गुजर रही थी। हाथियों के झुंड के बीच मौजूद एक मादा हाथी ट्रेन की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के मुताबिक टक्कर इतनी जोरदार थी कि मादा हाथी के शरीर के पिछले हिस्से में गंभीर चोटें आईं। उसका पिछला पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण वह उठने और चलने की स्थिति में नहीं थी। हादसे के बाद हाथी रेलवे लाइन के पास ही घायल अवस्था में पड़ी रही। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचने लगे और इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया कि हाथी की हालत बेहद गंभीर है और उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है। वन विभाग ने घायल हाथी के उपचार के लिए आवश्यक इंतजाम शुरू किए और विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी संपर्क किया गया। हालांकि स्थिति को संभालना आसान नहीं था, क्योंकि जिस हाथी को चोट लगी थी उसके साथ मौजूद पूरा झुंड आसपास ही डटा हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd">वन अधिकारियों के अनुसार हाथियों का दल लगातार घायल मादा हाथी के आसपास घूम रहा था। ऐसे में बचाव दल के लिए उसके करीब पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। हाथियों का व्यवहार स्वाभाविक रूप से संवेदनशील और सुरक्षात्मक था, जिसके कारण वन अमले को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी। कई बार ऐसा लगा कि झुंड आक्रामक हो सकता है, इसलिए रेस्क्यू टीम को दूरी बनाकर रणनीति तैयार करनी पड़ी। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंचने लगे। वन विभाग ने लोगों से घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि जंगली हाथियों का व्यवहार किसी भी समय बदल सकता है और वे खतरा महसूस होने पर आक्रामक हो सकते हैं। इसके बावजूद कई लोग हाथी को देखने के लिए मौके की ओर बढ़ते रहे, जिससे वन विभाग की चिंता और बढ़ गई। घायल हाथी की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। वन विभाग के अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। रायगढ़ वनमंडल के अधिकारियों ने बिलासपुर स्थित मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) मनोज पांडेय को घटना से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने तत्काल निगरानी बढ़ाने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही वन्यजीव विशेषज्ञों को भी मौके पर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया गया कि कानन पेंडारी जू के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन को भी रायगढ़ के लिए रवाना किया गया था ताकि घायल हाथी का बेहतर इलाज किया जा सके। वन विभाग की योजना थी कि प्राथमिक उपचार के बाद हाथी को विशेष चिकित्सा सुविधा के लिए बिलासपुर ले जाया जाए। लेकिन हाथी की हालत लगातार बिगड़ती रही और इलाज के प्रयासों के बीच ही उसने दम तोड़ दिया। मादा हाथी की मौत के बाद वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि हादसे के समय ट्रेन की गति क्या थी और क्या रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी की कोई सूचना पहले से उपलब्ध थी। इसके अलावा वन विभाग और रेलवे के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में रेलवे ट्रैक पार करते समय हाथियों के घायल होने और मौत की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग और रेलवे लाइनों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। जंगलों के सिकुड़ते दायरे और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण हाथियों को अक्सर रेलवे ट्रैक पार करने पड़ते हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञ लंबे समय से हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा, ट्रेनों की गति नियंत्रण और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की मांग करते रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:20:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में अवैध स्क्रैप से भरा ट्रक पकड़ा, 9.22 लाख की संपत्ति जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[सूरजगढ़ पुल के पास पुलिस की कार्रवाई, 20 टन से अधिक लोहे का कबाड़ बरामद; दस्तावेज नहीं मिलने पर चालक गिरफ्तार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/truck-full-of-illegal-scrap-caught-in-raigarh-property-worth/article-55638"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायगढ़ जिले में अवैध कबाड़ के कारोबार पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लोहे के स्क्रैप से भरे एक ट्रक को पकड़ लिया है। पुसौर थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 20 टन 700 किलोग्राम लोहे का स्क्रैप और परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे ट्रक को जब्त किया है। दोनों की कुल कीमत लगभग 9.22 लाख रुपए आंकी गई है। मामले में ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सरिया-सारंगढ़ की ओर से एक ट्रक में बड़ी मात्रा में अवैध लोहे का स्क्रैप लोड कर रायगढ़ की तरफ ले जाया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सूरजगढ़ पुल के पास घेराबंदी की। इस दौरान आने-जाने वाले भारी वाहनों की जांच शुरू की गई। कुछ देर बाद एक संदिग्ध ट्रक वहां पहुंचा, जिसे रोककर पुलिस ने पूछताछ की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस टीम ने जब ट्रक चालक से वाहन में लदे सामान के बारे में जानकारी मांगी तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पूछताछ के दौरान चालक ने अपना नाम रामा विश्वकर्मा (38) निवासी नुआसाही वार्ड क्रमांक-12, थाना करंजिया, जिला मयूरभंज, ओडिशा बताया। इसके बाद पुलिस ने ट्रक की तलाशी ली। तलाशी के दौरान वाहन में बड़ी मात्रा में लोहे का स्क्रैप लदा मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में चालक ने बताया कि ट्रक में करीब 20 टन 700 किलोग्राम लोहे का कबाड़ लोड है। पुलिस ने जब स्क्रैप के खरीद-बिक्री और परिवहन से जुड़े दस्तावेज मांगे तो चालक कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस को स्क्रैप के अवैध होने का संदेह हुआ। अधिकारियों के अनुसार स्क्रैप कहां से लाया गया और इसे कहां पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से नहीं दी जा सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद पुलिस ने ट्रक और स्क्रैप को जब्त कर थाने ले जाया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बरामद स्क्रैप की कीमत करीब 1.22 लाख रुपए और ट्रक की कीमत लगभग 8 लाख रुपए आंकी गई है। इस तरह कुल 9.22 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस को आशंका है कि अवैध रूप से लाया जा रहा यह स्क्रैप किसी औद्योगिक इकाई या निजी प्लांट में खपाने की तैयारी थी। रायगढ़ और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में स्क्रैप की खपत होती है। ऐसे में चोरी या अवैध तरीके से एकत्र किए गए कबाड़ को प्लांटों तक पहुंचाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। इसी वजह से पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अब स्क्रैप की वास्तविक उत्पत्ति का पता लगाने में जुटी है। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं यह सामग्री किसी फैक्ट्री, निर्माण स्थल या औद्योगिक क्षेत्र से चोरी तो नहीं की गई। जांच के दौरान परिवहन श्रृंखला, संबंधित कारोबारियों और संभावित खरीदारों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। यदि मामले में किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायगढ़ जिले में हाल के महीनों में अवैध कबाड़ और चोरी के माल के कारोबार पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। संपत्ति संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में कबाड़ के अवैध परिवहन, भंडारण और खरीद-बिक्री पर विशेष नजर रखी जा रही है। पुलिस का मानना है कि चोरी की घटनाओं के पीछे अक्सर अवैध कबाड़ कारोबार की भूमिका होती है, इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने बताया कि जिले में संपत्ति संबंधी अपराधों की रोकथाम को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अवैध कबाड़ के परिवहन और संग्रहण पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि चोरी के माल की खरीद-फरोख्त करने वाले और अवैध परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। जब्त किए गए स्क्रैप और ट्रक को पुलिस अभिरक्षा में रखा गया है। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:03:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में हाथी शावकों की मौत का खुलासा, संक्रमण बना वजह</title>
                                    <description><![CDATA[25 दिनों में चार शावकों की मौत से बढ़ी चिंता, देहरादून और बरेली लैब की रिपोर्ट में हेपेटाइटिस व सेप्टिसीमिया की पुष्टि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/infection-became-the-reason-for-the-death-of-elephant-cubs/article-55393"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/elephant-calf-death.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडलों में पिछले कुछ सप्ताह से हाथी शावकों की लगातार हो रही मौतों के मामले में अब जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिन शावकों की मौत हुई, उनमें से एक की जान हेपेटाइटिस यानी लिवर संक्रमण और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया यानी गंभीर रक्त संक्रमण के कारण हुई। इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि हो चुकी थी। महज 25 दिनों के भीतर एक ही हाथी दल के चार शावकों की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने विशेषज्ञों की मदद से जांच कराई थी और अब रिपोर्ट आने के बाद मौतों के पीछे की वजह काफी हद तक साफ हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">8 मई से 1 जून के बीच रायगढ़ और धरमजयगढ़ क्षेत्र के जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर हाथी शावकों के शव मिले थे। शुरुआती स्तर पर यह स्पष्ट नहीं था कि मौतों की वजह क्या है। कई मामलों में शावकों के शव जल स्रोतों और तालाबों के आसपास पाए गए थे, जिससे वन अमले के सामने कई सवाल खड़े हो गए थे। चूंकि सभी शावक एक ही हाथी दल से जुड़े बताए जा रहे थे, इसलिए संक्रमण फैलने की आशंका भी जताई जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार पोस्टमॉर्टम के दौरान आवश्यक नमूने एकत्र किए गए और उन्हें जांच के लिए देहरादून तथा बरेली स्थित प्रयोगशालाओं में भेजा गया था। अब आई रिपोर्ट में दो अलग-अलग तरह के संक्रमण की पुष्टि हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस ऐसा संक्रमण है जो सीधे लिवर को प्रभावित करता है। इसके कारण शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं। दूसरी ओर सेप्टिसीमिया एक गंभीर स्थिति होती है जिसमें रक्त संक्रमित हो जाता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैलने लगता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे शावकों में ऐसी बीमारियां तेजी से असर दिखाती हैं और समय पर इलाज या पहचान नहीं होने पर जान का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि हाथी शावकों की मौत के मामलों को लेकर विभाग अब पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद वन विभाग ने हाल ही में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन भी किया। दो दिन तक चले इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिकों, वन्यजीव विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के दौरान हाथियों में होने वाली बीमारियों, संक्रमण के कारणों, स्वास्थ्य निगरानी और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को भी यह बताया गया कि जंगलों में किसी हाथी या शावक के असामान्य व्यवहार को कैसे पहचानना है और बीमारी की आशंका होने पर तत्काल क्या कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि रायगढ़ और धरमजयगढ़ के जंगलों में इस समय कुल 137 हाथी मौजूद हैं। इनमें 37 नर, 62 मादा और 35 शावक शामिल हैं। शावकों की लगातार मौत के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर्स और वनकर्मियों की टीमें लगातार जंगलों में सक्रिय हैं। हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरों और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। रात के समय थर्मल ड्रोन की मदद से हाथियों की लोकेशन और गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">वन अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में रहने वाले हाथियों के स्वास्थ्य की निगरानी आसान नहीं होती। कई बार बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते और जब तक स्थिति स्पष्ट होती है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। ऐसे में तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से निगरानी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। विभाग का उद्देश्य सिर्फ मौतों के कारणों की पहचान करना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम कराया गया था। जांच रिपोर्ट में एक शावक की मौत हेपेटाइटिस और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया के कारण होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि विभाग अब एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है ताकि हाथी शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जंगलों में संक्रमण से जुड़े मामलों की समय रहते पहचान हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:57:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बच्चे को ले जाने के विवाद में साले की हत्या, जीजा को उम्रकैद</title>
                                    <description><![CDATA[रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद ने लिया खूनी मोड़, अदालत ने हत्या के दोषी जीजा को सुनाई आजीवन कारावास की सजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/life-imprisonment-to-brother-in-law-for-murder-of-brother-in-law-in-dispute/article-55304"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p>रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद से जुड़ा एक हत्या का मामला करीब तीन साल बाद अदालत के फैसले के साथ अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गया। बच्चे को जबरन अपने साथ ले जाने के दौरान हुए विवाद में बड़े साले की चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है और मृतक के परिवार को क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की अनुशंसा की है। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था क्योंकि घटना परिवार के सदस्यों के सामने हुई थी और विवाद की वजह एक साल का मासूम बच्चा था।</p>
<p>अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना की शुरुआत पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक मतभेदों से हुई थी। ग्राम मुनुंद निवासी दाताराम सारथी की शादी उर्मिला सारथी से हुई थी, लेकिन दोनों के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ था। बताया गया कि आपसी विवाद के कारण उर्मिला अक्सर अपने मायके ग्राम पत्थलगांव खुर्द में रहती थी। इसी दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया और वह अपने बच्चे के साथ मायके में ही रह रही थी। परिवार के लोगों का कहना था कि पति-पत्नी के बीच संबंध सामान्य नहीं थे और कई बार समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। घटना 1 मई 2022 की शाम की है। बताया जाता है कि दाताराम सारथी अपने ससुराल पहुंचा और वहां मौजूद अपने एक साल के बेटे को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। आरोप है कि उसने बच्चे को जबरन अपनी पत्नी से छीन लिया और उसे लेकर जाने लगा। उस समय उर्मिला सारथी, उसकी भाभी और भतीजी ने उसे रोकने की कोशिश की। परिवार की महिलाओं ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। बच्चे को लेकर वह मुख्य सड़क की ओर बढ़ गया। इसी बीच परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बात की जानकारी मिली और माहौल तनावपूर्ण हो गया।</p>
<p>प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जब दाताराम बच्चे को लेकर जा रहा था, तभी उसका बड़ा साला महेश सारथी वहां पहुंचा। महेश ने उसे रोकने का प्रयास किया और बच्चे को जबरन ले जाने का विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। बताया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों में बहस इतनी तीखी हो गई कि मामला हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि गुस्से में आकर दाताराम ने अपने पास मौजूद चाकू निकाल लिया और महेश सारथी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। चाकू के वार महेश के पेट, पीठ और गर्दन पर किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना इतनी अचानक हुई कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही महेश जमीन पर गिर पड़ा। उसकी पत्नी, बहन और बेटी के सामने यह पूरा घटनाक्रम हुआ। परिवार के सदस्यों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा और घर में मातम का माहौल बन गया।</p>
<p>घटना के बाद मृतक की पत्नी कुसुम सारथी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण साबित हुए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी दाताराम सारथी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी को हत्या का दोषी पाया। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके आधार पर अदालत ने दाताराम सारथी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।</p>
<p>फैसले के साथ ही न्यायालय ने मृतक के परिवार की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। अदालत ने मृतक के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है।  यह राशि परिवार को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से दी जाती है, हालांकि किसी परिजन की मृत्यु से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती। इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि पारिवारिक विवाद और रिश्तों में बढ़ता तनाव कभी-कभी बेहद दुखद परिणाम लेकर आ सकता है। एक बच्चे को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हत्या जैसे गंभीर अपराध में बदल गया और अंततः एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, जबकि दूसरे परिवार का व्यक्ति आजीवन कारावास की सजा तक पहुंच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:44:03 +0530</pubDate>
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                <title>पेट्रोल पंप संचालक पर चाकू से हमला कर कैश लूटने वाला दोषी, कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[रायगढ़ के घरघोड़ा में हुई वारदात, पेट में चाकू मारकर कैश बैग लूटा था, गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को ठहराया दोषी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/court-sentenced-the-culprit-who-attacked-petrol-pump-operator-with/article-55189"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-petrol-pump-loot.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र में पेट्रोल पंप संचालक पर जानलेवा हमला कर कैश से भरा बैग लूटने के मामले में अदालत ने आरोपी को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। करीब एक साल पहले हुई इस घटना में आरोपी ने पेट्रोल पंप कार्यालय में घुसकर नकदी से भरा बैग उठाया था और विरोध करने पर संचालक के पेट में चाकू मार दिया था। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक यह मामला घरघोड़ा थाना क्षेत्र के कसैया स्थित गोमती फ्यूल्स पेट्रोल पंप से जुड़ा है। 28 अप्रैल 2024 की देर रात करीब 11 से 12 बजे के बीच पेट्रोल पंप के कर्मचारी राजकुमार यादव और उमेश यादव कार्यालय परिसर में सो रहे थे। वहीं पेट्रोल पंप संचालक खीरू राय कार्यालय के भीतर कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान अस्मित नाग नाम का युवक कार्यालय में दाखिल हुआ और वहां रखा नकदी से भरा बैग उठाकर बाहर निकलने लगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">पेट्रोल पंप संचालक खीरू राय की नजर आरोपी पर पड़ गई। उन्होंने तुरंत उसका पीछा किया और बैग छीनने की कोशिश की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक संचालक ने आरोपी से बैग ले जाने का कारण भी पूछा, लेकिन आरोपी ने कोई जवाब देने के बजाय हमला कर दिया। विरोध होते देख उसने अपने पास रखे चाकू से खीरू राय के पेट में लगातार दो वार कर दिए। हमला इतना अचानक हुआ कि संचालक संभल भी नहीं पाए और गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़े।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर घरघोड़ा शासकीय कॉलेज की दिशा में भाग निकला। पेट्रोल पंप परिसर में मची अफरा-तफरी और शोर-शराबे की आवाज सुनकर अन्य कर्मचारी भी जाग गए। कर्मचारियों ने तत्काल अपने वरिष्ठों को सूचना दी और घायल संचालक को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रायगढ़ रेफर कर दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना की शिकायत पेट्रोल पंप कर्मचारी राजकुमार यादव द्वारा घरघोड़ा थाने में दर्ज कराई गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी। तत्कालीन उपनिरीक्षक करमू साय पैंकरा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न साक्ष्य जुटाए और संदेह के आधार पर अस्मित नाग को हिरासत में लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस पूछताछ में आरोपी से लगातार सवाल-जवाब किए गए। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध करना स्वीकार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य एकत्र किए और विवेचना पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया। मामले में घायल पक्ष, प्रत्यक्षदर्शियों और जांच अधिकारियों के बयान भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने न्यायालय के समक्ष बताया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से कार्यालय में प्रवेश कर नकदी लूटने की कोशिश की थी और विरोध होने पर जानलेवा हमला किया था। वहीं बचाव पक्ष ने भी अपने तर्क रखे, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी माना।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत में हुई। न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी अस्मित नाग को भारतीय दंड संहिता की धारा 458, 394 और 307 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि आरोपी का कृत्य गंभीर प्रकृति का है और इससे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यायालय ने आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत के फैसले के बाद मामले का कानूनी निपटारा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फैसले से अपराध करने वालों को सख्त संदेश जाएगा और कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा और मजबूत होगा। इस मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और अंततः अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया। रायगढ़ जिले में यह मामला काफी चर्चित रहा था क्योंकि घटना में पेट्रोल पंप संचालक पर सीधे जानलेवा हमला किया गया था। अब अदालत के निर्णय के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की बात कही जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:27:19 +0530</pubDate>
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