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                <title>Cyber Fraud - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Cyber Fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बीमा रिफंड के नाम पर 1.60 करोड़ की साइबर ठगी, दिल्ली से तीन आरोपी गिरफ्तार; नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़े तार</title>
                                    <description><![CDATA[खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी बताकर पीड़ित से कई किश्तों में रकम वसूली, बैंक खातों के जरिए संचालित हो रहा था अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क; दुर्ग पुलिस ने मोबाइल, पासबुक और चेकबुक समेत अहम साक्ष्य किए जब्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cyber-fraud-of-rs-160-crore-in-the-name-of/article-57787"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल एक नाइजीरियन साइबर नेटवर्क कर रहा था, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन किए गए।</p>
<p>दुर्ग रेंज साइबर थाना में दर्ज इस मामले की जांच कई दिनों से चल रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का रिफंड मंजूर हो गया है और राशि प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी बहाने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई।</p>
<p>पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी और बीमा क्लेम भी जारी हो जाएगा। लेकिन हर बार नई वजह बताकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती रही। इस तरह आरोपी लगातार पीड़ित को झांसे में रखते हुए उससे कुल करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने में सफल रहे।</p>
<p>जब लंबे समय तक न तो रिफंड मिला और न ही कोई भुगतान हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने दुर्ग रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले एक बैंक खाताधारक की पहचान की, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। उससे पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर पुलिस की विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां से मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और पैसों के लालच में इन्हें साइबर ठगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर की जाती थी, ताकि वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन एक नाइजीरियन साइबर गिरोह द्वारा किया जा रहा था। यही गिरोह बैंक खातों का उपयोग कर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कई साइबर अपराधों में शामिल हो सकता है।</p>
<p>दिल्ली से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 1 जुलाई को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची।</p>
<p>तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, छह बैंक पासबुक, चार चेकबुक और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में इन आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।</p>
<p>एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे। पहले वे बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाते, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन, बीमा क्लियरेंस और अन्य शुल्क के नाम पर किस्तों में रकम जमा कराते थे। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता, तब तक रकम कई बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। बीमा रिफंड, केवाईसी अपडेट, निवेश योजना, लॉटरी, इनाम और सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज या ईमेल पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<p>दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे जमा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दे। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी की गई रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ZIP फाइल खोलते ही फोन हो सकता है हैक, 'बॉस फ्रॉड' से बढ़ा साइबर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सीईओ या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज और ZIP फाइलों के जरिए साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। गृह मंत्रालय और साइबर विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/phone-can-be-hacked-as-soon-as-zip-file-is/article-57430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/boss-zip-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है, जिसे ‘बॉस ZIP फ्रॉड’ या ‘CEO इम्पर्सनेशन स्कैम’ कहा जा रहा है। इस साइबर ठगी में अपराधी किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं और कर्मचारियों को व्हाट्सएप, ई-मेल या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश भेजते हैं। इन संदेशों के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे जरूरी दस्तावेज, सिक्योरिटी अपडेट या तत्काल कार्रवाई से जुड़ी फाइल बताकर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कर्मचारी इस फाइल को डाउनलोड या खोलता है, उसका मोबाइल या सिस्टम मैलवेयर की चपेट में आ सकता है। इसके बाद साइबर ठग डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। गृह मंत्रालय ने भी लोगों को इस तरह के साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले 30 महीनों के दौरान केवल छत्तीसगढ़ में ही साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां फर्जी कॉल और ओटीपी फ्रॉड अधिक देखने को मिलते थे, वहीं अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाकर उनसे गलत कदम उठवाए जा रहे हैं। अपराधी अक्सर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला बिना सोचे-समझे ZIP फाइल डाउनलोड कर ले। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन ZIP फाइलों के अंदर कई बार EXE, DLL या अन्य हानिकारक फाइलें छिपी होती हैं। जैसे ही ऐसी फाइल सक्रिय होती है, डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद अपराधी मोबाइल या कंप्यूटर की कई जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में बैंकिंग ऐप, सेव किए गए पासवर्ड, मैसेज, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। कुछ मामलों में अपराधी डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और उपयोगकर्ता को इसकी भनक तक नहीं लगती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस तरह की ठगी का एक और खतरनाक पहलू यह है कि साइबर अपराधी मोबाइल में सेव संपर्कों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में असली अधिकारी या बॉस का नंबर हटाकर ठग अपना नंबर सेव कर देते हैं। इसके बाद कर्मचारी को लगता है कि वह अपने वरिष्ठ अधिकारी से ही बात कर रहा है। फिर तत्काल भुगतान, गोपनीय दस्तावेज भेजने या किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने जैसे निर्देश दिए जाते हैं। जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी रकम की ठगी कर लेते हैं।  किसी भी अनजान ZIP फाइल, EXE फाइल या DLL फाइल को बिना जांचे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक कोई संदिग्ध संदेश आए और उसमें तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाए तो पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। फोन कॉल, वीडियो कॉल या सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है। केवल व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के आधार पर कोई आर्थिक लेनदेन करना या फाइल डाउनलोड करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड सुरक्षा प्रणाली का उपयोग किया जाए। व्हाट्सएप सहित अन्य जरूरी ऐप्स में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखना चाहिए। मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें। किसी भी अज्ञात लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत की जांच जरूर करें। यदि कंपनी में काम करते हैं तो साइबर सुरक्षा से जुड़े आंतरिक दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स को गिरफ्तार किया था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने ऐसे गिरोह का भी खुलासा किया, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस लगातार संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने और समय रहते पीड़ितों की रकम रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ते मामलों के कारण चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए ताकि लेनदेन रोका जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार साबित होता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:29 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्ग में साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन, 6 आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन, 30 संदिग्ध खाताधारकों की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-action-on-cyber-fraud-network-in-durg-6-accused/article-56298"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऐसे छह लोगों को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों को चिन्हित किया गया। इन खातों के लेन-देन की पड़ताल करने पर कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि खातों में बड़ी मात्रा में ऐसी रकम जमा की गई थी, जिसका संबंध साइबर ठगी के मामलों से था। खाते में पैसा आने के बाद उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या फिर नकद निकाल लिया जाता था। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। पुलिस ने जांच के आधार पर इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक इन खातों में लगातार संदिग्ध ट्रांजेक्शन होती रही। बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों के विश्लेषण के बाद पुलिस को यह आशंका हुई कि यह कोई सामान्य बैंकिंग गतिविधि नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। अधिकारियों ने बैंकिंग दस्तावेज, खातों की केवाईसी जानकारी और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की। इसके आधार पर छह खाताधारकों की पहचान की गई, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम कार्ड अन्य लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी इसके बदले आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। उन्हें खाते उपलब्ध कराने के एवज में कुछ राशि दी जाती थी। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों या शहरों में की गई ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों के लिए ऐसे खाते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके जरिए ठगी के पैसों का स्रोत और अंतिम गंतव्य छिपाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को साइबर अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) शामिल हैं। सभी आरोपी भिलाई के सेक्टर-7 क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और मामले की जांच अभी जारी है। अब तक कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल करने वाले मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं और उनका नेटवर्क किन राज्यों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साइबर अपराध लगातार बदलते स्वरूप में सामने आ रहे हैं और अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य के उपयोग के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करना न केवल वित्तीय जोखिम पैदा करता है बल्कि व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>साइबर ठगी पर सख्ती: बार-बार बैंक खाते खुलवाने वालों पर रहेगी पुलिस की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में बैंकों और पुलिस की बैठक में बड़े फैसले, फर्जी खातों, संदिग्ध लेन-देन और साइबर अपराधों पर लगाम कसने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/strict-action-on-cyber-fraud-police-will-keep-an-eye/article-55521"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच रायपुर पुलिस ने बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब ऐसे लोगों पर विशेष नजर रखी जाएगी जो अलग-अलग बैंकों में बार-बार खाते खुलवा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि साइबर ठगी के कई मामलों में ऐसे खातों का इस्तेमाल किया जाता है जिनके जरिए ठगी की रकम को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह भेज दिया जाता है। इसी खतरे को देखते हुए बैंक अधिकारियों और पुलिस के बीच हुई अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों का उद्देश्य साइबर अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर करना और ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में आयोजित इस बैठक में विभिन्न राष्ट्रीय और निजी बैंकों के नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए खातों पर विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है और अधिकांश मामलों में अपराधी ऐसे खातों का उपयोग करते हैं जिनकी निगरानी समय पर नहीं हो पाती। कई बार एक व्यक्ति अलग-अलग बैंकों में कई खाते खुलवा लेता है और ठगी की रकम को लगातार ट्रांसफर करके जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस ने बैंक अधिकारियों से ऐसे खाताधारकों की पहचान करने और उनकी जानकारी समय-समय पर साझा करने का आग्रह किया। अधिकारियों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही संदिग्ध गतिविधियों की पहचान हो जाए तो करोड़ों रुपए की साइबर ठगी को रोका जा सकता है। पुलिस का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय प्रत्येक बैंक में लीगल नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रहा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कई बार जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज और बैंकिंग जानकारी प्राप्त करने में देरी हो जाती है, जिससे कार्रवाई प्रभावित होती है। यदि हर बैंक में कानूनी मामलों के लिए एक समर्पित अधिकारी नियुक्त किया जाता है और उसके लिए स्थायी मोबाइल नंबर जारी किया जाता है, तो जांच एजेंसियों को समय पर जानकारी मिल सकेगी। इससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। पुलिस ने निर्देश दिए कि सभी बैंक शाखाओं में कैमरों की स्थिति स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए और मुख्य प्रवेश द्वार के साथ-साथ पिछले हिस्सों को भी निगरानी दायरे में लाया जाए। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज जांच का महत्वपूर्ण आधार बनती है। ऐसे में कैमरों की गुणवत्ता और कवरेज क्षेत्र को बेहतर बनाना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में साइबर ठगी के शिकार लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। बैंकों को निर्देश दिए गए कि यदि कोई ग्राहक ठगी की शिकायत लेकर बैंक पहुंचता है तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जाए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के बारे में भी जानकारी देने को कहा गया है। सभी बैंक शाखाओं में हेल्पलाइन नंबर का प्रमुखता से प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोग तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए बैंक खातों को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश सामने आए हैं। पुलिस ने मोबाइल नंबर और पहचान दस्तावेजों का गहन सत्यापन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके अलावा कॉर्पोरेट खातों के मामले में खाता खुलने के लगभग 15 दिन बाद दोबारा पते का सत्यापन करने का सुझाव दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी कंपनियों और संदिग्ध खातों की पहचान करना आसान होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में संदिग्ध ट्रांजेक्शन यानी असामान्य वित्तीय लेन-देन की निगरानी को भी प्राथमिकता दी गई। बैंकों से कहा गया है कि यदि किसी खाते में असामान्य गतिविधि दिखाई देती है तो तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं और जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचना दी जाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर कम समय में बड़ी संख्या में ट्रांजेक्शन करते हैं, जिससे उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:29:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गूगल अपडेट के नाम पर ठगी, दुर्ग के ठेकेदार के खाते से उड़े 1.99 लाख रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल हैक कर साइबर अपराधियों ने तीन बार में निकाली रकम, पुलिस जांच में जुटी
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-the-name-of-google-update-rs-199-lakh-was/article-54454"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/durg-cyber-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार साइबर अपराधियों ने ‘गूगल अपडेट’ के नाम पर एक ठेकेदार का मोबाइल फोन हैक कर उसके बैंक खाते से करीब दो लाख रुपए पार कर दिए। मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ठगों ने एक फर्जी अपडेट मैसेज भेजकर मोबाइल का एक्सेस हासिल किया और फिर बैंक खाते से तीन बार में रकम निकाल ली।</p>
<p dir="ltr">जानकारी के अनुसार शंकर नगर दुर्ग निवासी महेंद्र कुमार देशलहरा ठेकेदारी का काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 22 मई 2026 की सुबह उनके मोबाइल पर गूगल अपडेट से जुड़ा एक मैसेज आया था। सामान्य सिस्टम अपडेट समझकर उन्होंने उस लिंक को खोल दिया। बताया जा रहा है कि लिंक ओपन करते ही मोबाइल की स्क्रीन कुछ देर के लिए फ्रीज हो गई। इसके बाद फोन असामान्य तरीके से काम करने लगा। कई ऐप अपने आप बंद होने लगे और मोबाइल बार-बार हैंग हो रहा था।</p>
<p dir="ltr">महेंद्र कुमार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद फोन में तकनीकी दिक्कत आ गई है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद बैंक खाते से रकम कटने के मैसेज आने लगे। सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उनके बंधन बैंक खाते से 94 हजार 999 रुपए ट्रांसफर हो गए। इसके एक मिनट बाद ही 5 हजार 1 रुपए फिर खाते से निकल गए। लगातार दो ट्रांजेक्शन होने के बाद वे कुछ समझ पाते, उससे पहले अगले दिन 23 मई को शाम करीब 4 बजे फिर 99 हजार 500 रुपए खाते से निकाल लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 99 हजार 500 रुपए की ठगी हो गई।</p>
<p dir="ltr">पीड़ित का कहना है कि ठगी के दौरान उनका मोबाइल पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुका था। फोन में कोई भी कमांड सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। बैंकिंग ऐप खुल नहीं रहा था और कई सिस्टम अपने आप एक्टिव और बंद हो रहे थे। ऐसा कहा जा रहा है कि साइबर ठगों ने किसी रिमोट एक्सेस एप या मालवेयर के जरिए मोबाइल का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। इसी का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई।</p>
<p dir="ltr">लगातार रकम कटने के बाद महेंद्र कुमार ने सबसे पहले बैंक से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। बाद में मोहन नगर थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। शिकायत के साथ बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल, साइबर कंप्लेन की कॉपी और मोबाइल से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे गए हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है।</p>
<p dir="ltr">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में इस तरह के मामलों में तेजी आई है। साइबर अपराधी अब लोगों को सीधे फोन कर ठगी करने के बजाय मोबाइल हैकिंग के जरिए वारदात को अंजाम दे रहे हैं। फर्जी अपडेट लिंक, APK फाइल और स्क्रीन शेयरिंग ऐप इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक बार अगर यूजर गलती से लिंक खोल देता है तो मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप, पासवर्ड, OTP और निजी जानकारी तक ठगों की पहुंच बन जाती है।</p>
<p dir="ltr">कई लोग फोन में आने वाले अपडेट मैसेज को असली समझकर तुरंत क्लिक कर देते हैं। यही जल्दबाजी भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान लिंक, एप या अपडेट को बिना जांचे-परखे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। खासकर बैंकिंग से जुड़े काम करने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अगर फोन अचानक हैंग होने लगे, अपने आप ऐप खुलने लगें या बैंकिंग गतिविधियां संदिग्ध दिखें तो तुरंत इंटरनेट बंद कर बैंक और साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।</p>
<p dir="ltr">दुर्ग पुलिस अब ट्रांजेक्शन डिटेल और मोबाइल डेटा के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर सेल की टीम बैंकिंग ट्रेल और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई है ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि मामले की तकनीकी जांच जारी है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:41:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंस्टाग्राम पर लोन एप डाउनलोड करना पड़ा भारी, व्यापारी से 1.36 लाख की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर में ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग का मामला, फोटो वायरल करने की धमकी देकर वसूले रुपए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/had-to-download-loan-app-on-instagram-cheated-businessman-of/article-54392"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indore-cyber-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर में ऑनलाइन लोन एप के जरिए ब्लैकमेलिंग और साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। शहर के एक फुटकर व्यापारी ने इंस्टाग्राम पर दिखाई दिए लोन एप के विज्ञापन पर भरोसा कर छोटा लोन लिया था, लेकिन बाद में यही फैसला उसके लिए बड़ी परेशानी बन गया। आरोपियों ने व्यापारी को फोटो और निजी जानकारी वायरल करने की धमकी देकर करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। मामले में बाणगंगा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक पीड़ित राहुल गिरी बुधवार को शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे। राहुल ने बताया कि फरवरी महीने में उन्हें निजी जरूरत के लिए पैसों की आवश्यकता थी। इसी दौरान इंस्टाग्राम चलाते समय उन्हें “स्वीट मनी” नाम के एक ऑनलाइन लोन एप का विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में आसान प्रक्रिया और तुरंत लोन देने का दावा किया गया था। जरूरत के चलते उन्होंने लिंक पर क्लिक कर एप डाउनलोड कर ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल ने पुलिस को बताया कि एप डाउनलोड करने के बाद उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगी गई। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह सामान्य प्रक्रिया है, इसलिए उन्होंने सभी दस्तावेज और जरूरी जानकारी साझा कर दी। इसके बाद कुछ ही समय में उनके खाते में करीब 4 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। शुरुआत में उन्हें लगा कि प्रक्रिया सही है और उन्हें राहत मिल गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लेकिन कुछ दिनों बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वॉट्सएप कॉल और मैसेज आने लगे। कॉल करने वाले लोग खुद को लोन कंपनी का कर्मचारी बताते थे। उन्होंने राहुल से कहा कि अब उन्हें लोन की रकम ब्याज सहित तुरंत लौटानी होगी। राहुल के मुताबिक आरोपियों ने कुछ ही दिनों में रकम कई गुना बढ़ाकर मांगना शुरू कर दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल ने बताया कि आरोपियों ने कहा कि उनके मोबाइल फोन का डाटा और फोटो उनके पास मौजूद है। पैसे नहीं देने पर फोटो एडिट कर रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भेजने की धमकी दी गई। लगातार आने वाले कॉल और धमकियों से राहुल घबरा गए। बदनामी के डर से उन्होंने आरोपियों द्वारा बताई गई अलग-अलग यूपीआई आईडी पर रुपए ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने धीरे-धीरे उनसे करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। इसके बावजूद ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई। आरोपी लगातार और पैसों की मांग करते रहे। जब राहुल ने आगे रकम देने से मना किया तो आरोपियों ने उनके रिश्तेदारों और परिचितों को एडिट किए गए फोटो भेज दिए। इससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लगातार धमकियों और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर राहुल ने बाद में अपना मोबाइल फोन भी फॉर्मेट कर दिया। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच की साइबर यूनिट में की। शुरुआती जांच के बाद मामला बाणगंगा थाना पुलिस को भेजा गया, जहां एफआईआर दर्ज कर ली गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार पीड़ित ने आधा दर्जन से ज्यादा यूपीआई आईडी और कई मोबाइल नंबरों की जानकारी जांच एजेंसियों को दी है। इन्हीं खातों और नंबरों के जरिए रकम ट्रांसफर करवाई गई थी। साइबर टीम अब इन यूपीआई खातों और बैंक डिटेल्स के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि कई मामलों में ऐसे गिरोह दूसरे राज्यों से ऑपरेट करते हैं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खोलते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी लोन एप के विज्ञापन तेजी से बढ़े हैं। ये एप कम समय में आसान लोन देने का लालच देकर लोगों से निजी जानकारी हासिल करते हैं। एप डाउनलोड करते ही कई बार मोबाइल का डाटा, कॉन्टैक्ट लिस्ट और फोटो तक एक्सेस कर लिया जाता है। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लोन एप या लिंक पर भरोसा न करें। केवल रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त और विश्वसनीय संस्थाओं से ही ऑनलाइन लोन लें। साथ ही मोबाइल एप डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को इस तरह की धमकी मिलती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इंदौर में सामने आया यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन लोन एप के बढ़ते खतरे को दिखाता है। छोटी रकम के लालच में लोग निजी जानकारी साझा कर देते हैं और बाद में साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। पुलिस अब मामले में तकनीकी जांच कर रही है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:43:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>LPG सिलेंडर डिलीवरी सिस्टम में हुआ बड़ा बदलाव, गैस कंपनियों ने दिया नया अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[LPG सिलेंडर डिलीवरी में DAC सिस्टम लागू, HPCL, इंडेन और भारत गैस ने फर्जी मैसेज व साइबर फ्रॉड को लेकर उपभोक्ताओं को चेताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-lpg-cylinder-delivery-system-gas-companies-gave/article-53113"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t124704.812.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर की डिलीवरी और सुरक्षा को लेकर बड़ी गैस कंपनियों जैसे इंडेन</span>, HPCL <span lang="hi" xml:lang="hi">और भारत गैस ने उपभोक्ताओं के लिए एक नया अपडेट जारी किया है। अब </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर डिलीवरी पूरी तरह से </span>Delivery Authentication Code <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम पर निर्भर कर गई है। कंपनियों का कहना है कि इससे गलत डिलीवरी और गड़बड़ी में काफी कमी आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी बीच साइबर फ्रॉड के नए मामले भी सामने आ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम के तहत गैस सिलेंडर डिलीवर करते समय एक ओटीपी या कोड जनरेट होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे डिलीवरी के समय ही कन्फर्म करना होता है। अधिकारियों का कहना है कि ये सुनिश्चित करता है कि सिलेंडर सही ग्राहक तक पहुंचे। लेकिन अब स्कैमर्स इस सिस्टम का फायदा उठाते हुए फर्जी मैसेज भेज रहे हैं और लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। </span>HPCL <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म </span>X <span lang="hi" xml:lang="hi">पर एक स्पष्ट चेतावनी जारी की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उपभोक्ताओं से कहा गया है कि वो किसी भी अनजान मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कंपनी ने बताया है कि असली </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">HP Gas <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसेज हमेशा </span>“VM-HPGASc-S” <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे आधिकारिक सेंडर नाम से भेजे जाते हैं और उनमें केवल </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> अंकों का </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ सिलेंडर डिलीवरी के समय मान्य होता है। </span>HPCL <span lang="hi" xml:lang="hi">ने ये भी स्पष्ट किया है कि कंपनी का कोई कर्मचारी फोन कॉल</span>, WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">या किसी लिंक के जरिए </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं मांगता है। यदि कोई मैसेज आपको जल्दी में या डराने की कोशिश करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे तुरंत अनदेखा कर दें।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत गैस ने भी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। कंपनी का कहना है कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड को किसी भी हालत में पहले से शेयर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं इंडेन ने उपभोक्ताओं के लिए साइबर एक्सपर्ट्स द्वारा अलग गाइडलाइंस जारी की हैं। उपेंद्र सिंह बताते हैं कि अगर बिना बुकिंग के कोई डिलीवरी मैसेज आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उस पर ध्यान न दें। असली मैसेजों में </span>VK-INDANE <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>VM-INDANE <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे आधिकारिक सेंडर </span>ID <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हैं और इनमें बुकिंग नंबर और </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> अंकों का </span>DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड दिया जाता है। ये कोड केवल डिलीवरी बॉय के सामने ही शेयर करना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले नहीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर डिलीवरी को लेकर कंपनियों ने कहा है कि ये सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उपभोक्ताओं की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए संदिग्ध मैसेज पर तुरंत भरोसा न करने की सलाह दी गई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आज के </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर रेट की बात करें तो विभिन्न शहरों में कीमतें अलग-अलग हैं। बेंगलुरु में घरेलू सिलेंडर </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">915.50 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3152 <span lang="hi" xml:lang="hi">है। हैदराबाद में घरेलू </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">965 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3315, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर में </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">941 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3176.5, <span lang="hi" xml:lang="hi">रायपुर में </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">984.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3294.5, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना में </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">1002.50 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3346.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गई हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर में घरेलू सिलेंडर का दाम </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">916.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3099 <span lang="hi" xml:lang="hi">है। देहरादून में ये कीमतें </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">932 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3129 <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अंडमान में घरेलू सिलेंडर </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">989 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3490 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक बिक रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 12:59:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गिफ्ट-हॉलिडे पैकेज के नाम पर 50 लाख की ठगी, FIR दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर के मैग्नेटो मॉल में हॉलिडे पैकेज के नाम पर 50 लाख की ठगी का मामला सामने आया। कंपनी समेत 16 लोगों पर FIR दर्ज, जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/fir-registered-for-fraud-of-rs-50-lakh-in-the/article-52830"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(100).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऑनलाइन और कॉल के जरिए लोगों को गिफ्ट और हॉलिडे पैकेज का लालच देकर बड़े पैमाने पर ठगी का मामला सामने आया है। शहर के मैग्नेटो मॉल स्थित चौथी मंजिल पर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">क्लब्रियोंट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से चल रही कंपनी पर आरोप है कि उसने करीब 15 से 20 लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपये वसूल लिए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है और पुलिस ने कंपनी के संचालक समेत 16 लोगों के खिलाफ </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पीड़ितों का कहना है कि उन्हें फोन कॉल के जरिए बताया गया कि उनका नाम लकी ड्रॉ या कूपन में निकला है और उन्हें फ्री गिफ्ट या सस्ते हॉलिडे पैकेज दिए जाएंगे। इसी झांसे में आकर लोग मैग्नेटो मॉल के ऑफिस तक पहुंचते रहे। वहां पहुंचने के बाद उन्हें आकर्षक टूर पैकेज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">होटल स्टे और विदेश यात्रा जैसे सपने दिखाए जाते थे। धीरे-धीरे उनसे अलग-अलग बहाने से पैसे वसूले जाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी रजिस्ट्रेशन के नाम पर तो कभी टिकट बुकिंग और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक पीड़ित अमित गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उन्हें 20 फरवरी को कॉल आया था और कहा गया कि उनका नाम गिफ्ट लकी ड्रॉ में आया है। इसके बाद उन्हें मैग्नेटो मॉल की चौथी मंजिल पर स्थित ऑफिस बुलाया गया। अमित वहां पहुंचे तो उन्हें काफी प्रीमियम सेटअप दिखाया गया और भरोसा दिलाया गया कि कंपनी पूरी तरह रजिस्टर्ड है और जल्द ही उन्हें विदेश टूर पैकेज मिलेगा। शुरुआती भरोसे के बाद उनसे 27 फरवरी को 25 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए गए और फिर धीरे-धीरे अलग-अलग बहानों से 50 हजार रुपये और वसूले गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालात तब बदलने लगे जब पैसे लेने के बाद कंपनी के कर्मचारी लगातार टालमटोल करने लगे। पीड़ितों के मुताबिक वादा किया गया था कि टिकट और पैकेज की पूरी जानकारी ईमेल पर भेजी जाएगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ ही दिनों में सभी नंबर बंद आने लगे। जब लोग दोबारा ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। यही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस वक्त तक कई और लोग भी वहां पहुंच चुके थे जो इसी तरह की ठगी का शिकार हुए थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस की शुरुआती जांच में अब तक करीब 8 लाख 12 हजार रुपये की ठगी का हिसाब सामने आया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पीड़ितों का दावा है कि यह रकम 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। अलग-अलग लोगों से 75 हजार से लेकर 1.28 लाख रुपये तक की वसूली की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क सिर्फ बिलासपुर तक सीमित नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रायपुर और भिलाई जैसे शहरों के मॉल में भी इनके ऑफिस होने की बात सामने आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक कंपनी के कर्मचारी रोजाना नए लोगों को कॉल करते थे और उन्हें फ्री गिफ्ट या हॉलिडे पैकेज का लालच देकर ऑफिस बुलाते थे। खास बात यह है कि इनके निशाने पर नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोग ज्यादा होते थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें क्रेडिट कार्ड और यूपीआई के जरिए पेमेंट करवाया जाता था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल पुलिस ने कंपनी के संचालक नागेश बालासाहेब साखरे समेत 16 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में ठगी का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अभी कई पीड़ित सामने आना बाकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की भी जांच कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:51:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनगणना 2026 में ठगी का खतरा, अधिकारियों की चेतावनी- क्यूआर कोड स्कैन करने से करें परहेज</title>
                                    <description><![CDATA[जनगणना 2026 में फर्जीवाड़े से बचने अलर्ट जारी। क्यूआर कोड स्कैन न करें, 1 मई से घर-घर सर्वे शुरू होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/census-2026-alert-issued-to-avoid-fraud-never-scan-any/article-51669"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/census-2026-india,-census-fraud-alert.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">छत्तीसगढ़ में चल रही जनगणना प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने संभावित फर्जीवाड़े को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनधिकृत क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें और जानकारी साझा करने से पहले गणनाकर्मी की पहचान अवश्य जांचें। राज्य में 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व-जनगणना का विकल्प खुला है, जबकि 1 मई से 30 मई के बीच गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार और संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इस दौरान साइबर ठगी या फर्जी पहचान के जरिए डेटा जुटाने की आशंका को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, इस बार सभी गणनाकर्मियों को विशेष पहचान पत्र (आईडी) दिए गए हैं, जिन्हें दिखाना अनिवार्य होगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को जानकारी देने से पहले उसकी आधिकारिक पहचान की पुष्टि करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्व-जनगणना प्रक्रिया</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्व-जनगणना को इस बार एक वैकल्पिक सुविधा के रूप में पेश किया गया है। नागरिक चाहें तो स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें भाग लेना अनिवार्य नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यदि कोई व्यक्ति स्व-जनगणना नहीं करता है, तो भी उसे किसी तरह की परेशानी या दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे मामलों में गणनाकर्मी घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डेटा सुरक्षा भरोसा</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डेटा सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। यह डेटा एन्क्रिप्टेड सर्वर पर सुरक्षित रहता है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और विकास कार्यों के लिए किया जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-जनगणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ हो सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं भी इस सुविधा के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह या फर्जी संदेश से सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के नाम पर किसी प्रकार का क्यूआर कोड स्कैन करने या भुगतान करने की जरूरत नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सटीक आंकड़े जुटाना है, जिससे सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही डेटा के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को मजबूत किया जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में जब घर-घर सर्वे शुरू होगा, तब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती प्रक्रिया को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए रखना होगी। नागरिकों की सतर्कता और सहयोग से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:55:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>रायगढ़ में मैट्रिमोनियल साइट के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड, 7,693 लोग ठगे गए, 26 आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[लोक सेवा केंद्र की आड़ में देशभर में चल रहा था फर्जीवाड़ा, रजिस्ट्रेशन और मीटिंग फीस के नाम पर 1.11 करोड़ की ठगी का खुलासा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-cyber-fraud-in-the-name-of-matrimonial-site-in/article-51235"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg---2026-04-15t150528.833.jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हजारों लोगों को निशाना बनाकर करीब 1.11 करोड़ रुपये की ठगी की। इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क कोतवाली थाना क्षेत्र के दरोगा पारा इलाके में संचालित लोक सेवा केंद्र ‘निधि परिवहन सुविधा केंद्र’ की आड़ में चल रहा था। बाहर से यह केंद्र सरकारी कामकाज और दस्तावेज निर्माण का वैध कार्यालय प्रतीत होता था, लेकिन अंदर से एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क सक्रिय था।</p>
<p>जांच में सामने आया कि गिरोह यूट्यूब चैनलों, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और कॉल सेंटर के माध्यम से देशभर के लोगों को शादी के नाम पर संपर्क करता था। इसके बाद उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल मैचिंग फीस और मीटिंग चार्ज के नाम पर यूपीआई के जरिए पैसे वसूले जाते थे। पैसे लेने के बाद पीड़ितों को कोई वास्तविक प्रोफाइल या सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती थी।</p>
<p>पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से कई लैपटॉप, मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें फोटोशॉप के जरिए तैयार किए गए नकली दस्तावेज, सरकारी मुहरें और सील भी शामिल हैं। जांच टीम को यह भी पता चला कि अलग-अलग कमरों में कॉल सेंटर और एडिटिंग यूनिट चल रही थी, जहां से ठगी को अंजाम दिया जा रहा था।</p>
<p>इस गिरोह का संचालन कपिल गर्ग और हिमांशु मेहर कर रहे थे, जिन्हें मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इनके अलावा कई अन्य लोग भी इस नेटवर्क में सक्रिय थे, जिन्हें युवतियों और अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर लोगों को फंसाने और उनसे पैसे वसूलने की जिम्मेदारी दी गई थी।</p>
<p>पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 से अब तक इस नेटवर्क के जरिए करीब 7,693 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया। कुल मिलाकर 1 करोड़ 11 लाख रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 55 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, 2 प्रिंटर और बैंक खातों को भी जब्त किया है।</p>
<p>सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।</p>
<p>फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य राज्यों में फैले लिंक और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए थे और कितने लोग अभी भी इसके निशाने पर हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 15:06:28 +0530</pubDate>
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