<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/tmc/tag-99" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>TMC - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/99/rss</link>
                <description>TMC RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, TMC के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा उपचुनाव से पहले भाजपा ने सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को बनाया उम्मीदवार, टीएमसी में बढ़ी राजनीतिक हलचल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। भाजपा ने पार्टी में शामिल होते ही तीनों नेताओं को राज्यसभा की रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस राजनीतिक बदलाव को पश्चिम बंगाल की बदलती सियासी तस्वीर और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। राज्यसभा उपचुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। तीनों नेताओं ने कुछ सप्ताह पहले ही राज्यसभा सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर मनमाने तरीके से फैसले लेने और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए थे। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा ने इन तीनों नेताओं को जिस तेजी से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है, उससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी बंगाल में अपने संगठन को और मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं पर भरोसा जता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है। राज्यसभा की इन तीन रिक्त सीटों के लिए 24 जुलाई को मतदान और मतगणना होगी। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि 15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक बंगाल की राजनीति पूरी तरह इन उपचुनावों और दल-बदल की चर्चाओं के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह भी सार्वजनिक रूप से बताई। उन्होंने कहा कि आरजी कर अस्पताल रेप और हत्या मामले में उन्होंने सबूतों से कथित छेड़छाड़ और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्यों के अपहरण की धमकी भी दी गई। सुखेंदु के अनुसार उन्होंने पुलिस आयुक्त और अस्पताल प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी बात पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें पुलिस मुख्यालय बुलाया गया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुष्मिता देव ने भी भाजपा में शामिल होने के बाद अपने बयान से राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भाजपा की लगातार बढ़ती ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने असम में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनने को इसकी बड़ी मिसाल बताया। साथ ही उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अन्य राजनीतिक दल उन्हें अपने साथ नहीं लेना चाहते, इसलिए वे अब भी टीएमसी में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन इस्तीफों और भाजपा में शामिल होने की घटना को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि तीनों नेता पहले से ही भाजपा के संपर्क में थे। उनके अनुसार अब भाजपा ने केवल अपनी राजनीतिक जरूरत के कारण उन्हें उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने दावा किया कि इससे तृणमूल कांग्रेस को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होगा और भाजपा को भी कोई बड़ा लाभ मिलने वाला नहीं है। सौगत रॉय का कहना है कि दल बदलने वाले नेताओं का राजनीतिक प्रभाव सीमित होता है और जनता ऐसे नेताओं को अधिक महत्व नहीं देती।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर लगातार असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने पार्टी छोड़ दी या अलग गुट बना लिया। उपलब्ध राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या में भी कमी आई है। राज्यसभा में भी कई सांसदों के इस्तीफे के बाद पार्टी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में भी पार्टी के सामने चुनौती बढ़ी है। चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद कई विधायक अलग गुट का हिस्सा बन चुके हैं। इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार दावा कर रहा है कि संगठन पूरी तरह मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से उसके जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में दल-बदल की राजनीति नई नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी रफ्तार काफी बढ़ी है। भाजपा और टीएमसी दोनों एक-दूसरे के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति लगातार अधिक प्रतिस्पर्धी होती जा रही है। राज्यसभा उपचुनाव के नतीजे भले ही सीमित सीटों तक हों, लेकिन उनका राजनीतिक संदेश आने वाले चुनावों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा। भाजपा बंगाल में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे रही है जिनका प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक पहचान मजबूत हो। वहीं टीएमसी अपने संगठन को मजबूत रखने और असंतुष्ट नेताओं को रोकने की कोशिश में जुटी हुई है। आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:41:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/tmc-%281%29.jpg"                         length="204728"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[बारुईपुर घटना के विरोध मार्च के दौरान कथित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने साधा निशाना, तृणमूल ने आरोपों को बताया भ्रामक; पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/mamata-banerjee-%281%29.jpg"                         length="201475"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा संदेश, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा- अगर हिम्मत है तो खुलकर दूसरी पार्टी में शामिल हों, पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन को मजबूत बनाए रखने का किया दावा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-big-message-amid-rebellion-in-tmc-if/article-57902"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी संगठनात्मक खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उन्हें रोकना है तो उसे उन्हें खत्म करना पड़ेगा, क्योंकि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। ममता बनर्जी ने कहा कि वह पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन के साथ जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेंगी। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उनके नेतृत्व से सहमत नहीं हैं तो खुलकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लें। उनके इस बयान को टीएमसी में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अहम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि तृणमूल कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न और उसकी पहचान किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत से बनी है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता संगठन को और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा जनता के बीच पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संगठन के साथ विश्वासघात उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के टिकट और चुनाव चिह्न पर जनता का समर्थन हासिल किया, वही आज संगठन से अलग राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ चुना था, उस विश्वास का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। ममता ने कहा कि राजनीति में विचारों का अंतर हो सकता है, लेकिन किसी भी संगठन के प्रति निष्ठा और जिम्मेदारी का भी महत्व होता है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में निराश न हों और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर कई नेताओं के अलग गुट बनाने की खबरों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी के कई विधायक और सांसद संगठन से अलग होकर नए राजनीतिक विकल्पों की ओर बढ़ चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी का यह बयान सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश मुख्य रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई। हालांकि पार्टी की ओर से संगठनात्मक स्तर पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पार्टी से अलग हुए नेताओं ने अपने स्तर पर नया गुट तैयार किया है और संगठनात्मक दावों को लेकर भी सक्रियता दिखाई है। चुनाव आयोग के समक्ष भी विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने की कवायद जारी है। राजनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाता है। इसलिए पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक मान्यता से जुड़े सभी विषय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार तय होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी भवन या कार्यालय पर अधिकार जताने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ता और आम लोग होते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भविष्य में भी संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे और जनता के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि संघर्ष उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा रहा है और आगे भी वह पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच काम करती रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-big-message-amid-rebellion-in-tmc-if/article-57902</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-big-message-amid-rebellion-in-tmc-if/article-57902</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:52:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/mamata-banerjee.jpg"                         length="120047"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में सियासी संकट गहराया, बागी गुट आज चुनाव आयोग से करेगा नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[58 विधायक और 20 सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला तृणमूल कांग्रेस का बागी गुट नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मान्यता दिलाने के लिए चुनाव आयोग पहुंचेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-crisis-deepens-in-tmc-rebel-group-will-demand-from/article-57603"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी सियासी संकट अब एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। पार्टी का बागी गुट गुरुवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और हाल ही में गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (नेशनल वर्किंग कमेटी) को आधिकारिक मान्यता देने की मांग करेगा। बागी नेताओं का दावा है कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किए गए हैं और उन्हें संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज कर दी है। बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि चुनाव आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। करीब 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने उन सभी दस्तावेजों को पेश करेगा, जिनमें नई कार्यकारिणी के गठन और संगठनात्मक बदलावों का उल्लेख है। उनके अनुसार 22 जून को कोलकाता में आयोजित प्रतिनिधि बैठक में पार्टी के नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। इस बैठक की जानकारी पहले ही चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है और अब उसी के आधार पर औपचारिक मान्यता की मांग की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीएमसी में यह संकट विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद खुलकर सामने आया। तीन जून को पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की। बाद में इस मांग को मंजूरी भी मिल गई। इसके कुछ दिनों बाद लोकसभा में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया। बाद में इन सांसदों ने एक अलग राजनीतिक मंच के साथ विलय का निर्णय लिया, जिससे टीएमसी के भीतर संकट और गहरा गया। बागी गुट का कहना है कि उसके पास पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक और सांसदों का समर्थन है। दल-बदल कानून की दसवीं अनुसूची के तहत यदि किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य किसी अलग समूह का समर्थन करते हैं या विलय का फैसला लेते हैं, तो उन्हें कानूनी संरक्षण मिल सकता है। इसी आधार पर बागी गुट खुद को वैध संगठन बताते हुए चुनाव आयोग से नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग कर रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और आवश्यक होने पर न्यायपालिका के स्तर पर ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर अधिकार को लेकर भी कानूनी लड़ाई तेज हो सकती है। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम रहते हैं तो मामला उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीएमसी के भीतर पैदा हुआ यह संकट कई राजनीतिक विश्लेषकों को महाराष्ट्र में शिवसेना में हुई बगावत की याद दिला रहा है। वहां भी बड़ी संख्या में विधायक तत्कालीन नेतृत्व से अलग हो गए थे और बाद में संगठन, चुनाव चिन्ह और वैधता को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली थी। आखिरकार चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष के फैसलों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। अब पश्चिम बंगाल में भी कुछ वैसी ही स्थिति बनने की चर्चा तेज हो गई है, हालांकि अंतिम फैसला संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो ममता बनर्जी के पास विधानसभा में केवल 22 विधायक बचे होने का दावा किया जा रहा है, जबकि लोकसभा में भी उनके साथ सांसदों की संख्या काफी कम हो गई है। राज्यसभा में भी कुछ सांसदों के इस्तीफे के बाद उनकी संसदीय ताकत पहले की तुलना में कमजोर बताई जा रही है। हालांकि ममता समर्थक गुट इन दावों से सहमत नहीं है और पूरे घटनाक्रम को कानूनी चुनौती देने की तैयारी में जुटा हुआ है। यदि चुनाव आयोग बागी गुट के दावों पर विचार करता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दूसरी ओर यदि मामला अदालत तक जाता है तो अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है। इस दौरान दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों को मजबूत करने और संगठन पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेंगे। जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई नेताओं की भूमिका भी आने वाले दिनों में बदल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तृणमूल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्षी दल भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि पार्टी में टूट और गहराती है तो आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों, उपचुनावों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका और विपक्षी गठबंधन में उनकी स्थिति को लेकर नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। आयोग के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज, दोनों पक्षों के दावे और आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद का अगला अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-crisis-deepens-in-tmc-rebel-group-will-demand-from/article-57603</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-crisis-deepens-in-tmc-rebel-group-will-demand-from/article-57603</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 10:10:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/tmc-.jpg"                         length="224989"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC ने चुनाव आयोग को भेजी नई सूची, ममता बनर्जी को फिर बताया पार्टी प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[बागी गुट द्वारा समानांतर कार्यसमिति के गठन के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी। सूची में ममता बनर्जी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-sent-new-list-to-election-commission-and-again-declared/article-56718"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी ने चुनाव आयोग को अपने पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की अद्यतन सूची भेज दी है। पार्टी द्वारा आयोग को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में ममता बनर्जी को अध्यक्ष, सुभ्रत बक्शी को उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एक दिन पहले पार्टी के बागी गुट ने समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने और विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करने का दावा किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को भेजी गई सूची 20 जून 2026 तक की संगठनात्मक स्थिति के आधार पर तैयार की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व की वैधता और संगठनात्मक संरचना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इधर, तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट से जुड़े आठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी का आरोप है कि ये नेता संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आधिकारिक लाइन से अलग काम कर रहे हैं। हालांकि बागी गुट का दावा है कि उसने पार्टी संविधान के तहत संगठनात्मक रिक्तता को भरने के लिए नई कार्यसमिति गठित की है।</p>
<h2>कार्यसमिति पर विवाद</h2>
<p class="isSelectedEnd">चुनाव आयोग को भेजी गई सूची के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 24 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा, अमित मित्रा और चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यसमिति में स्थान मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता में बैठक कर समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया था। इस गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष तथा फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष घोषित किया था।</p>
<h2>नेतृत्व पर सियासी संदेश</h2>
<p class="isSelectedEnd">बागी नेताओं का कहना है कि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त हो गया था और नई समिति का गठन नहीं होने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस दावे को खारिज कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कोई समानांतर संगठन चलाने का अधिकार नहीं है। सांसद सौगत रॉय ने भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक और सर्वोच्च नेता हैं तथा संगठन की पहचान उनके नेतृत्व से ही जुड़ी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता के खिलाफ प्रदर्शन की घटना भी चर्चा में रही। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे स्थानीय स्तर का मामला बताया है और संगठनात्मक विवाद से जोड़ने से इनकार किया है।</p>
<p>राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागी गुट की गतिविधियों पर पार्टी क्या अनुशासनात्मक कदम उठाती है और चुनाव आयोग के समक्ष संगठनात्मक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट तथा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-sent-new-list-to-election-commission-and-again-declared/article-56718</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-sent-new-list-to-election-commission-and-again-declared/article-56718</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:54:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-.jpg"                         length="107484"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, फालता थाने पर हमले का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश का आरोप, हिंसक प्रदर्शन मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-jahangir-khans-wife-arrested-for-attack-on-falta/article-56486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sarina-bibi-arrested.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान से जुड़े मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी पत्नी सरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह हुई इस गिरफ्तारी के बाद इलाके में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पुलिस का आरोप है कि सरीना बीबी ने फालता पुलिस स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में समर्थकों को इकट्ठा कर विरोध प्रदर्शन कराया था और इसी दौरान पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों पर हमला करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने में उनकी भूमिका सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें डायमंड हार्बर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरा मामला 16 जून को फालता थाने के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक बड़ी संख्या में थाने के बाहर जमा हो गए थे। इसी दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल कानून व्यवस्था बाधित की बल्कि पुलिस हिरासत में मौजूद जहांगीर खान को छुड़ाने की भी कोशिश की। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य वीडियो फुटेज की जांच शुरू की थी। इन्हीं फुटेज के आधार पर कई लोगों की पहचान की गई और अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जहांगीर खान का नाम पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। वह दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में टीएमसी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनका नाम कई बार चर्चा में आया था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की तरह पेश किया था और सार्वजनिक सभाओं में कई बार फिल्म का चर्चित संवाद दोहराया था। इसी वजह से वह स्थानीय स्तर पर काफी चर्चित हो गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि चुनाव के बाद हालात तेजी से बदले। फालता विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे। चुनाव आयोग को मतदान रद्द कर दोबारा वोटिंग करानी पड़ी थी। दोबारा मतदान से ठीक पहले जहांगीर खान ने चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा ने इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज की और उसी समय से जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देने लगे। इस बीच उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप भी सामने आए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फालता थाने में उनके खिलाफ सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में अवैध वसूली, धमकी देने, लोगों को डराने और महिलाओं को गैंगरेप की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। आरोप लगने के बाद वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहे। पुलिस का कहना है कि वह लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार 8 जून को पश्चिम बंगाल पुलिस ने उन्हें नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक वह देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें राज्य में लाया गया और पूछताछ शुरू की गई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें फालता क्षेत्र में कई जगहों पर ले जाकर घटनास्थलों की पहचान कराई। इसी दौरान उनकी सार्वजनिक परेड भी कराई गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो में जहांगीर खान लोगों के सामने कान पकड़कर और हाथ जोड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। एक वीडियो में वह हथकड़ी लगाए नजर आए, जबकि दूसरे वीडियो में उनकी कमर में रस्सी बंधी हुई थी। इन तस्वीरों को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन का कहना था कि यह जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">फालता थाने पर हुए हमले के बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। इसके बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान का अभियान शुरू किया। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि जांच अभी जारी है। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ जनता का विरोध खुलकर सामने आया है। कहीं नेताओं का घेराव किया गया तो कहीं उन पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगे। ऐसे माहौल में जहांगीर खान और उनकी पत्नी से जुड़ा यह मामला राज्य की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। सरीना बीबी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फालता थाने पर हुए हमले और हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-jahangir-khans-wife-arrested-for-attack-on-falta/article-56486</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-jahangir-khans-wife-arrested-for-attack-on-falta/article-56486</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:55:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/sarina-bibi-arrested.jpg"                         length="131420"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर बढ़े विरोध के स्वर, सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके गए</title>
                                    <description><![CDATA[धनुरहाट की सरपंच मंदिरा गेन का माफी मांगते वीडियो वायरल, कुछ ही दिनों में तृणमूल नेताओं को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आईं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके जाने और कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर धनुरहाट ग्राम पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लोगों के बीच हाथ जोड़कर माफी मांगती और भावुक नजर आ रही हैं। सौमित्र बनर्जी को पुलिस सुरक्षा के बीच रानीगंज कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने उन पर अंडे फेंके और धक्का-मुक्की भी की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित तरीके से अदालत तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सौमित्र बनर्जी की गिरफ्तारी बीजेपी नेता रवि केशरी की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बनर्जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इसी मामले में उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, दक्षिण 24 परगना जिले के धनुरहाट ग्राम पंचायत क्षेत्र से भी एक अलग लेकिन चर्चित घटना सामने आई है। पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने घर के बाहर जमा लोगों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती और भावुक होकर रोती नजर आती हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जिनमें वह घुटनों के बल बैठी हुई दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत से जुड़े किसी स्थानीय विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर के बाहर पहुंच गए थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि कई घटनाओं को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सोमवार को टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष भी विरोध का सामना कर चुके हैं। कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने उन पर अंडा फेंक दिया था। घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा समर्थक थे। उन्होंने दावा किया कि अंडा उनकी आंख के बेहद करीब से गुजरा और यदि वह समय रहते बचाव नहीं करते तो गंभीर चोट लग सकती थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। राज्य में हाल के दिनों में टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 28 मई को पार्टी सांसद सौगत रॉय पर उत्तर 24 परगना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके गए थे। इसके दो दिन बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां उन पर अंडे और पत्थर फेंके जाने की खबर सामने आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद जून के पहले सप्ताह से लेकर अब तक कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पूर्व विधायक सनत डे, विधायक मदन मित्रा, पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता, नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन और सुजय हाजरा जैसे कई नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में अंडों के साथ टमाटर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की नाराजगी को दर्शाती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विरोध प्रदर्शनों को अधिक आक्रामक रूप मिल रहा है। दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल सुनियोजित तरीके से पार्टी नेताओं को बदनाम करने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रही है और इसके लिए सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-news.jpg"                         length="130735"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी में बड़ी टूट, 20 सांसदों ने NCPI में विलय कर NDA को समर्थन दिया</title>
                                    <description><![CDATA[ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बागी सांसदों ने नई राजनीतिक राह चुनी; चर्चा में आई छोटी पार्टी NCPI]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-mps-split.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इन सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है। इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों का एक साथ अलग होना पार्टी की ताकत को सीधे प्रभावित करता है। सांसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सदस्यता बचाने की थी। यदि वे सीधे किसी अन्य दल में शामिल होते या एनडीए का समर्थन करने का ऐलान करते, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती थी। इसी वजह से उन्होंने एक अलग रणनीति अपनाई और सामूहिक रूप से एनसीपीआई में विलय का रास्ता चुना। चूंकि सांसदों की संख्या दो-तिहाई से अधिक बताई जा रही है, इसलिए दल-बदल कानून के प्रावधानों के तहत उन्हें राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिस पार्टी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया है, वह है नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई। राजनीतिक हलकों में यह नाम अब तक बहुत कम लोगों ने सुना था, लेकिन टीएमसी सांसदों के विलय के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस पार्टी का अब तक न कोई सांसद था और न कोई विधायक, वह एक झटके में लोकसभा में 20 सांसदों वाली पार्टी बनने का दावा कर रही है। एनसीपीआई का गठन 20 जनवरी 2023 को किया गया था। यह एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। पार्टी का पंजीकरण पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन इसकी सक्रियता मुख्य रूप से त्रिपुरा में देखने को मिली। गठन के समय पार्टी ने खुद को सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की आवाज बताने का प्रयास किया था। इसके चुनावी संदेशों में दलबदल की राजनीति का विरोध भी प्रमुख रूप से शामिल था। यही वजह है कि अब टीएमसी से आए सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में बताया जाता है। पार्टी के अध्यक्ष शेली कुंडू हैं, जबकि संगठनात्मक गतिविधियों में उनके सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक बहुत सीमित आर्थिक सहयोग मिला है और इसके संसाधन भी अपेक्षाकृत छोटे स्तर के रहे हैं। एनसीपीआई ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में लड़ा था। उस चुनाव में पार्टी ने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने की कोशिश की थी, लेकिन कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए थे। अंततः पार्टी सीमित सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई और उसे कोई सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद पार्टी ने खुद को राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास जारी रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टीएमसी सांसदों के इस कदम के पीछे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को भी एक कारण माना जा रहा है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावी नतीजों के बाद संगठन के भीतर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग राय दिखाई दे रही थी। अब सांसदों के इस बड़े समूह के अलग होने के बाद यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस राजनीतिक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि उनका समूह भविष्य में एनडीए के साथ मिलकर काम करेगा। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। इस घटनाक्रम का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-mps-split.jpg"                         length="151423"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी में बगावत तेज, ममता के करीबी सुदीप बंदोपाध्याय भी बागी खेमे में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, बागी सांसदों ने लोकसभा में ‘असली टीएमसी’ होने का दावा ठोकने की तैयारी की, स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात संभव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rebellion-in-tmc-intensifies-mamatas-close-friend-sudeep-bandopadhyay-also/article-55921"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-rebellion.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है और पार्टी की शीर्ष नेतृत्व के लिए यह स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के बागी खेमे के साथ खड़े होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम टीएमसी के अंदर चल रहे शक्ति संघर्ष को और तेज कर सकता है। विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा था। अब यह असंतोष खुली बगावत का रूप लेता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि सुदीप बंदोपाध्याय ने बागी सांसदों के साथ बैठकें की हैं और आगे की रणनीति पर चर्चा भी की है। इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सुदीप लंबे समय से ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बागी गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। इस मुलाकात के दौरान बागी सांसद अपने पक्ष को विस्तार से रखने और संसदीय स्तर पर मान्यता की मांग कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो यह टीएमसी के लिए एक बड़ा संस्थागत संकट साबित हो सकता है। लोकसभा में पार्टी की स्थिति और नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं। बागी खेमे की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि लोकसभा में उनके समूह का नेतृत्व सुदीप बंदोपाध्याय करें। विद्रोही नेताओं का मानना है कि उनके अनुभव और राजनीतिक पकड़ को देखते हुए वे इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा हो सकते हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ सुदीप बंदोपाध्याय की मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार इस मुलाकात में टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की खबरों ने भी राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। विपक्षी दल और राजनीतिक पर्यवेक्षक इन बैठकों को बंगाल की राजनीति में संभावित नए समीकरणों के संकेत के रूप में देख रहे हैं। टीएमसी के भीतर असंतोष केवल संसदीय स्तर तक सीमित नहीं है। विधानसभा में भी स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए चिंताजनक बताई जा रही है। खबरों के मुताबिक बड़ी संख्या में विधायक पहले ही हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं। बागी विधायकों ने निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी को नेता के रूप में समर्थन देने का संकेत दिया है। इससे साफ है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मंत्री मानस भूनिया का हाल ही में पार्टी से इस्तीफा देना भी इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। उनके इस्तीफे के बाद यह संदेश गया कि असंतोष केवल कुछ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के विभिन्न स्तरों पर इसकी गूंज सुनाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता तो आने वाले समय में और भी नेता खुलकर विरोध का रास्ता अपना सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बागी सांसद जगदीश चंद्र बसूनिया ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया है और वे जल्द ही अपने समूह की ओर से औपचारिक दावा पेश करेंगे। उनका कहना है कि उनका गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है और इसी आधार पर वे संसदीय मान्यता की मांग करेंगे। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर टीएमसी समर्थकों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और बागी नेताओं की गतिविधियां संगठन को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह असंतोष अस्थायी है और समय के साथ स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना आसान नहीं है कि विवाद किस दिशा में जाएगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से नाटकीय घटनाक्रमों और तीखे राजनीतिक संघर्षों के लिए जानी जाती रही है। मौजूदा संकट भी उसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rebellion-in-tmc-intensifies-mamatas-close-friend-sudeep-bandopadhyay-also/article-55921</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rebellion-in-tmc-intensifies-mamatas-close-friend-sudeep-bandopadhyay-also/article-55921</guid>
                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:25:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-rebellion.jpg"                         length="121032"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रात 3 बजे अभिषेक बनर्जी घर पुलिस रेड, सियासी हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में तड़के हुई कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमाया, टीएमसी ने लगाए गंभीर आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2ce67146ff8/article-55781"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee-raid.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोलकाता के कालीघाट इलाके में शनिवार तड़के करीब 3 बजे जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के घर पर पुलिस की अचानक हुई कार्रवाई को लेकर “अभिषेक बनर्जी घर रेड” अब राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक बहसों में शामिल हो गया है। जानकारी के मुताबिक कोलकाता पुलिस सेंट्रल फोर्स के जवानों के साथ उनके आवास पर पहुंची और करीब चार घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। बाहर भारी सुरक्षा तैनात रही और इलाके में देर रात से ही हलचल बढ़ गई थी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में की गई, जो पश्चिम मिदनापुर के सालबनी थाने में दर्ज है। हालांकि, इस पूरी घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेजी से शुरू हो गई है और माहौल लगातार गरमाता गया। पुलिस टीम जब रात लगभग 3 बजे कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची तो कई बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जो स्थिति बनी, उस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। टीएमसी का आरोप है कि पुलिस ने ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया और पूरे परिसर की तलाशी ली, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा थी और सभी नियमों का पालन किया गया। घर के बाहर सेंट्रल फोर्स के जवानों को तैनात किया गया था, जबकि अंदर पुलिस टीम और कुछ महिला अधिकारी मौजूद थे। लगभग चार घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और स्थानीय लोग भी अचानक हुई इस घटना से हैरान रह गए। “अभिषेक बनर्जी घर रेड” को लेकर सुबह तक राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी रहा और टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ धीरे-धीरे उनके आवास के बाहर जमा होने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच जैसे ही इस कार्रवाई की खबर फैली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कालीघाट स्थित आवास पर पहुंचीं। उनके पहुंचते ही राजनीतिक माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। टीएमसी नेताओं और समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक दबाव में की गई है, जबकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां अपने काम के तहत कार्रवाई कर रही हैं और इसमें किसी तरह की असामान्यता नहीं है। अभिषेक बनर्जी ने बाद में मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उनके घर में जबरन प्रवेश किया गया और पूरे घर की तलाशी ली गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना उचित जवाब का इंतजार किए कार्रवाई की, हालांकि पुलिस का पक्ष है कि जांच के लिए जरूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी और यह एक चल रही जांच का हिस्सा है। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। कुछ दिन पहले ही सीआईडी ने उनसे विधानसभा से जुड़े कथित सिग्नेचर फर्जीवाड़े मामले में पूछताछ की थी, जबकि साइबर शिकायत से जुड़े एक मामले में भी उन्हें नोटिस दिया गया था। इसके अलावा उन्हें 16 जून को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है। वहीं ईडी ने भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में 15 जून को पेश होने के लिए समन जारी किया है। लगातार चल रही इन जांचों के बीच “अभिषेक बनर्जी घर रेड” ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं और फिलहाल किसी भी कठोर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई हुई है, फिर भी जांच एजेंसियों की सक्रियता और लगातार हो रही पूछताछ ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया बताया है और कहा है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, इसमें किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर टीएमसी का आरोप है कि यह सब विपक्षी नेताओं को दबाने की कोशिश है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इलाके में सुबह तक पुलिस की मौजूदगी बनी रही, हालांकि तलाशी अभियान समाप्त होने के बाद टीम वहां से रवाना हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2ce67146ff8/article-55781</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2ce67146ff8/article-55781</guid>
                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:37:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/abhishek-banerjee-raid.jpg"                         length="173117"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, कल्याण बनर्जी के बयान से हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा सांसद के इस्तीफे और संगठन के भीतर उठते सवालों के बीच पार्टी नेतृत्व पर बढ़ा दबाव, कई दावों ने तेज की राजनीतिक चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-tussle-increased-in-tmc-stir-due-to-kalyan-banerjees/article-55673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। पार्टी के भीतर मतभेदों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी का बयान चर्चा के केंद्र में आ गया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह उनके साथ हैं या फिर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ। इस बयान ने न केवल पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर किया है, बल्कि आने वाले दिनों की राजनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें एक मामले से जुड़े वकीलों की सूची में बदलाव की जानकारी देर रात दी गई, जबकि वह भी उस मामले से जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया उन्हें अपमानजनक लगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उचित सम्मान मिलना चाहिए और संगठन में संवाद की कमी नहीं होनी चाहिए। उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही असहमति के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों और जनादेश को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी, इसका फैसला समय के साथ होगा। हालांकि उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। पिछले कुछ दिनों में पार्टी से जुड़े कई घटनाक्रमों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफे और पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं ने खुलकर कहा है कि वे अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पूरा भरोसा रखते हैं और पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता से राजनेता बने सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ तौर पर कहा कि ममता बनर्जी एक मजबूत नेता हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संघर्ष करने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के साथ हैं और नेतृत्व पर उनका भरोसा कायम है। इसी तरह अन्य कई नेताओं ने भी पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। इस बीच कुछ बागी नेताओं और पूर्व नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। कई नेताओं ने संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े दल में चुनावी नतीजों और संगठनात्मक बदलावों के बाद इस तरह की असहमति सामने आना असामान्य नहीं माना जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में उन दावों पर भी चर्चा हो रही है जिनमें कुछ सांसदों और विधायकों के अलग गुट बनाने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों को लेकर अब तक आधिकारिक स्तर पर कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। संबंधित नेताओं की ओर से भी कई मामलों में अलग-अलग बयान सामने आए हैं, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। ऐसे में सभी की नजर आने वाले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। इधर, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं को भी कांग्रेस नेतृत्व ने खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और दोनों दलों के नेताओं के बीच हुई मुलाकातें सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है। साथ ही जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है। इस मामले पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर पार्टी की आंतरिक राजनीति पर पड़ सकता है। तृणमूल कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखने की है। यदि नेतृत्व स्तर पर मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर चलने में सफल रहता है तो मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-tussle-increased-in-tmc-stir-due-to-kalyan-banerjees/article-55673</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-tussle-increased-in-tmc-stir-due-to-kalyan-banerjees/article-55673</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:53:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc.jpg"                         length="190036"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ममता के साथ खड़ी हुईं महुआ, बोलीं- वही असली तृणमूल</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी की वैधता, पहचान और जनाधार ममता बनर्जी से जुड़ा; अभिषेक बनर्जी का भी किया बचाव, बीजेपी पर साधा निशाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahua-stood-with-mamata-and-said-she-is-the/article-55667"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahua-moitra.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी नेतृत्व के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान, वैधता और राजनीतिक ताकत उसकी संस्थापक ममता बनर्जी से जुड़ी हुई है और कोई भी बागी या अलग गुट खुद को “असली तृणमूल” नहीं कह सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">एक साक्षात्कार के दौरान महुआ मोइत्रा ने पार्टी में चल रहे असंतोष और कुछ नेताओं द्वारा अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक ममता बनर्जी सक्रिय राजनीति में हैं, तब तक तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान उन्हीं के साथ रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना ममता बनर्जी ने की थी और जनता का जनादेश भी उसी नेतृत्व को मिला है। ऐसे में किसी भी बागी गुट का दावा राजनीतिक रूप से स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ मोइत्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दल इन घटनाओं को तृणमूल के कमजोर पड़ते जनाधार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे अस्थायी राजनीतिक परिस्थितियों का हिस्सा बता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की पहचान दो प्रमुख आधारों पर टिकी होती है—उसके संस्थापक नेता और चुनाव चिह्न। उनके अनुसार, बागी नेताओं के पास न तो पार्टी का मूल नेतृत्व है और न ही आधिकारिक चुनाव चिह्न, इसलिए वे तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक विरासत का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पार्टी का आकार छोटा या बड़ा होना अलग बात है, लेकिन इससे उसकी वैधता समाप्त नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कुछ नेताओं द्वारा अलग संसदीय समूह बनाने या बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। महुआ ने संकेत दिया कि ऐसी गतिविधियां राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो सकती हैं, लेकिन इससे पार्टी की मूल पहचान प्रभावित नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">साक्षात्कार के दौरान महुआ मोइत्रा ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का भी बचाव किया। हाल के समय में पार्टी की चुनौतियों और चुनावी झटकों के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराने वाली आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि यह एकतरफा दृष्टिकोण है। उनके मुताबिक अभिषेक ने संगठन को मजबूत करने के लिए कई संरचनात्मक बदलाव किए हैं और पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में कठिन समय आने पर नेतृत्व को निशाना बनाना आसान होता है, लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक जटिल होती है। उन्होंने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर जो ढांचा तैयार किया है, उसने पार्टी को मजबूत बनाने में योगदान दिया है। इसलिए उन्हें केवल नकारात्मक दृष्टि से देखना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती सक्रियता पर भी टिप्पणी की। महुआ ने आरोप लगाया कि राज्य की राजनीति में कुछ नेताओं का मुख्य उद्देश्य अभिषेक बनर्जी को राजनीतिक रूप से कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चल रहे राजनीतिक अभियानों के पीछे व्यक्तिगत और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी काम कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारधारात्मक स्तर पर वह बीजेपी को अपना प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानती हैं और भविष्य में भी उनकी राजनीति का केंद्र यही रहेगा। उनके अनुसार देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुलतावादी सोच की रक्षा के लिए मजबूत विपक्ष की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में चाहे जितनी भी चुनौतियां हों, फिर भी यह बीजेपी के खिलाफ संघर्ष का सबसे मजबूत मंच है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में बने रहने का उनका उद्देश्य केवल सत्ता नहीं बल्कि वैचारिक संघर्ष है। इसलिए वे पार्टी छोड़ने या राजनीतिक जीवन से दूर होने की किसी संभावना को नहीं देखतीं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक वापसी को लेकर भी महुआ ने विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर मजबूती हासिल कर सकती है और बंगाल की राजनीति में अपना प्रभाव कायम रख सकती है। उनके मुताबिक पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ मोइत्रा का यह बयान केवल व्यक्तिगत निष्ठा का प्रदर्शन नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक स्पष्ट संदेश भी है। ऐसे समय में जब पार्टी को अंदरूनी असंतोष और बाहरी राजनीतिक दबाव दोनों का सामना करना पड़ रहा है, वरिष्ठ नेताओं की सार्वजनिक एकजुटता संगठन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महुआ मोइत्रा के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व को ही पार्टी की असली पहचान और भविष्य का आधार मानता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahua-stood-with-mamata-and-said-she-is-the/article-55667</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahua-stood-with-mamata-and-said-she-is-the/article-55667</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/mahua-moitra.jpg"                         length="152051"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        