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मुंबई में मराठी नियम के विरोध में ऑटो हड़ताल, ड्राइवर बोले- 55 की उम्र में भाषा सीखना आसान नहीं
भारत
तीन दिन की हड़ताल से कई इलाकों में ऑटो सेवा प्रभावित; सरकार ने ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए 3 महीने की मोहलत देने की बात कही है
मुंबई में मराठी भाषा से जुड़े नए नियम के विरोध में ऑटो-रिक्शा चालकों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार को शहर के कई इलाकों में ड्राइवरों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। चालकों का कहना है कि मराठी बोलने की अनिवार्यता से उन लोगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जो लंबे समय से मुंबई में ऑटो चला रहे हैं, लेकिन मराठी भाषा में सहज नहीं हैं। प्रदर्शन कर रहे कई उम्रदराज ड्राइवरों ने कहा कि 55 से 60 साल की उम्र में नई भाषा सीखना उनके लिए आसान नहीं है। कुछ चालकों का कहना है कि उन्होंने औपचारिक शिक्षा नहीं ली है और वर्षों से ऑटो चलाकर अपना परिवार चला रहे हैं। ऐसे में भाषा संबंधी नियम लागू करने से पहले उनकी उम्र, शिक्षा और रोजगार की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
हड़ताल के दौरान कांदिवली लिंक रोड समेत मुंबई के कुछ हिस्सों में ऑटो चालकों ने एकजुट होकर विरोध जताया। ड्राइवरों का कहना है कि वे भाषा सीखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके लिए ऐसा तरीका अपनाया जाना चाहिए जिससे उनके लाइसेंस, बैज और रोजी-रोटी पर अचानक असर न पड़े। विवाद के बीच महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 19 अगस्त को नियम को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि मराठी नहीं बोलने वाले ड्राइवरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले उन्हें नोटिस दिया जाएगा और भाषा सीखने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा।
सरकार के मुताबिक, तीन महीने की मोहलत के बाद भी अगर कोई ड्राइवर निर्धारित नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके लाइसेंस और बैज को निलंबित किया जा सकता है। इसी कार्रवाई की संभावना को लेकर ऑटो चालकों में असंतोष है और उन्होंने तीन दिन की हड़ताल के जरिए अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की है। ड्राइवरों का कहना है कि मुंबई में बड़ी संख्या में ऐसे ऑटो चालक हैं जो अलग-अलग राज्यों से आकर वर्षों से शहर में काम कर रहे हैं। उनके लिए भाषा सीखने की व्यवस्था, प्रशिक्षण और पर्याप्त समय जैसे मुद्दों पर भी सरकार को स्पष्ट दिशा तय करनी चाहिए।
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